लेख

मटमैला पानी: विकास के दावों पर भारी पड़ती जमीनी हकीकत

देश के स्वच्छता सर्वेक्षणों में लगातार अव्वल रहने वाला इंदौर आज एक ऐसे गंभीर सवाल के घेरे में है, जो…

4 months ago

निर्विरोध चुनाव, NOTA और संविधान: क्या यह जन-सहमति का हनन है?

भारत को विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहा जाता है, क्योंकि यहाँ प्रत्येक नागरिक को राजनीतिक भागीदारी का अधिकार प्राप्त…

4 months ago

जंगलों से पहाड़ों तक: मानव और पर्यावरण का बढ़ता टकराव

सुनीता कुमारी, बिहार इसमें कहीं कोई संदेह नहीं है कि मनुष्य ने पहले जंगल काटकर जानवरों का विनाश किया और…

4 months ago

विश्व शांति का शाश्वत मार्ग : सनातन चिंतन की प्रासंगिकता

कैलाश सिंह महाराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।आज की वैश्विक परिस्थितियां अशांति, युद्ध, आतंकवाद, वैमनस्य और मानसिक तनाव से घिरी हुई हैं।…

4 months ago

निंदा से डरे बिना काम करते रहना चाहिए: सावित्रीबाई फुले

मराठी कवयित्री, भारत में सामाजिक सुधार आंदोलन की नायिका, भारत की प्रथम महिला शिक्षिका, शोषितों-वंचितों एवं पिछड़ गए लोगों की…

4 months ago

हिन्दी साहित्य के मनोवैज्ञानिक उपन्यासकार जैनेन्द्र कुमार: विचार, संघर्ष और रचना-दृष्टि

पुनीत मिश्र हिन्दी साहित्य के इतिहास में जैनेन्द्र कुमार का नाम एक ऐसे रचनाकार के रूप में स्थापित है, जिन्होंने…

4 months ago

डिजिटल युग, युवा भारत और स्वभाव की राजनीति: अधिकारों से आगे मानवता का मार्ग

व्यक्ति से विश्व-मानवता तक सफ़लता का शाश्वत दर्शन - स्वभाव ही जीवन की दिशा तय करता है गोंदिया - वैश्विक…

4 months ago

बिना प्रशिक्षण के शिक्षक, अधूरी शिक्षा: क्या दांव पर है बच्चों का भविष्य?

डिजिटल शिक्षा और बदलती शिक्षा व्यवस्था ✍️ सोमनाथ मिश्रा, (राष्ट्र की परम्परा) देश की शिक्षा व्यवस्था तेजी से डिजिटल युग…

4 months ago

सरकारी शिक्षा व्यवस्था : अब सिर्फ सुधार नहीं, निर्णायक कार्रवाई की जरूरत

डॉ. सतीश पाण्डेयमहराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। देश की रीढ़ कही जाने वाली सरकारी शिक्षा व्यवस्था आज गंभीर संकट के दौर…

4 months ago

महादेव देसाई: गांधी के शब्द, संघर्ष की आत्मा और राष्ट्रवाद वाहक

✍️ पुनीत मिश्र महादेव देसाई भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उन अनन्य सिपाहियों में थे, जिनका योगदान मंच से कम और…

4 months ago