बड़े बड़े महलों को ढहते देखा है,
उन महलों में रहने वालों को देखा है,
भूखे प्यासे दर दर भटकते देखा है,
उनकी संतान अनाथ होते देखा है।
सुखदुःखदो न चान्योऽस्ति
यतः स्वकृतभुक्पुमान् ॥
कोई दूसरा किसी को सुख
दुःख देने वाला नहीं होता है,
प्रत्येक मनुष्य अपने किए हुए
कर्म का फल स्वयं भोगता है।
बाक़ी सब सांसारिक माया मोह है
सत्य तो केवल वह परमात्मा ही है
उसे चाहे साकार मानो या निराकार,
सबसे सच्चा मित्र तो वही होता है।
समस्या का समाधान वास्तव में,
मित्र के साथ, मित्र के पास होता है,
रिश्ता न खून का है, न रिवाज का है,
पर ये रिश्ता आजीवन साथ देता है।
परमात्मा का क़हर जब टूटता है,
सांसारिक मित्र भी शत्रु हो जाते हैं,
आदित्य जब उसकी कृपा बरसती है,
तब परम शत्रु भी मित्र बन जाते है।
•कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’
लखनऊ
धूल से आसपास के लोग परेशान, ट्रकों की तेज रफ्तार पर उठे सवाल, भागलपुर/देवरिया(राष्ट्र की…
कुशीनगर में दर्दनाक हादसा: पोखरी में डूबने से 50 वर्षीय व्यक्ति की मौत, गाय की…
प्राकृतिक खेती पर कार्यशाला आयोजित संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। केंद्र सरकार के 12…
एसएसपी ने महत्वपूर्ण सर्किल की सौंपी जिम्मेदारी, अरुणकुमार एस को सीओ लाइन का प्रभार गोरखपुर(राष्ट्र…
लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू), लखनऊ में 21 जून को आयोजित…
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के शैक्षिक सत्र 2025-26 का दीक्षान्त समारोह…