अपनी माँ की ममता का सागर
बेटी सबकी आँखों का तारा है,
मैं बतलाऊँ कैसे हमने कितने,
लाड़, प्यार, नाज़ों से पाला है।
पाहुन बन तुम मेरे घर आए हो,
सादर सत्कार तुम्हारा करता हूँ,
लक्ष्मी स्वरूपा नवरत्न है बिटिया,
जिसे मैं तुम्हें समर्पित करता हूँ।
मेरे ह्रदय का नील कमल कोमल
आँगन की बिटिया चाँद सितारा है,
मैं आज समझ पाया हूँ कि अब
इसपर नहीं अधिकार हमारा है।
आज अमानत ले जाओ अपनी,
कर जोड़ निवेदन यह करता हूँ,
कन्या रूपी नवरत्न है बिटिया
जिसको तुम्हें समर्पित करता हूँ।
यह सरला, फूलों सी सुकुमारी,
इसकी हर भूल क्षमा कर देना,
यह मेरे घर की राजदुलारी है,
मेरी आँखों का चाँद सितारा है।
भाई-बहन से आज बहन बिछुड़ी,
माँ से उसकी ममता भी बिछुड़ी,
तुम्हीं हो इसके आज से साथी,
तुम्हें समर्पित जीवन का साथी।
आदित्य जब इसका जन्म हुआ था,
न कोई ढोलक, न संगीत बजा था,
न किसी प्रकार की कोई शहनाई,
पर आज विदाई में बजती शहनाई।
•कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’
लखनऊ
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