शांत है लुंबिनी की पगडंडी,
जहाँ फूलों ने पहले देखा प्रकाश,
राजकुमार की पहली हँसी में,
छुपा था अनंत का एक उलझा प्रकाश।
जन्मा था एक प्रश्न वहाँ,
चक्रवर्ती नहीं, चैतन्य का दीपक,
महलों की आभा से दूर,
सत्य का नन्हा एक दीपक।
बोधिवृक्ष के पत्तों में,
बहती है अनहद की बयार,
तप की चुप्पी, सत्य की पुकार,
जिसने अंधेरों को सीखा दिया,
प्रकाश का अनादि व्यापार।
कपिलवस्तु की गलियों में,
गूँजता है अब भी वो प्रश्न,
जीवन का सत्य क्या है?
दुख की गाँठें क्यों हैं?
महापरिनिर्वाण की शांति,
कुशीनगर की माटी में बसी,
जहाँ देह नहीं, पर जीवन का अर्थ,
साँसों में घुली एक अनंत हँसी।
साक्षी है ये धरती,
हर बोधि की फुसफुसाहट का,
जहाँ मौन से फूटा था अमरत्व,
और जाग उठा था एक विश्व का सत्य।
डॉo सत्यवान सौरभ
नए पदाधिकारियों का हुआ चयन बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)l रविवार को मोहाव बाईपास स्थित भाकपा कार्यालय…
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)l जनपद में अग्निशमन तथा आपात सेवा विभाग द्वारा 14 से 20…
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)जनपद देवरिया के थाना बरहज क्षेत्र में हत्या के एक मामले में…
आगरा (राष्ट्र की परम्परा)l ग्राम पंचायत रायभा के मजरा नगला लालदास में धरना स्थल से…
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व यात्रा के शुभारंभ पर रविवार को शहर के…
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद महराजगंज के चौक बाजार स्थित गुरु गोरक्षनाथ मंदिर परिसर में…