टीचर्स ऑफ बिहार राज्य के नवाचारी शिक्षकों एवं छात्रों के लिए उत्कृष्ट मंच

पटना (राष्ट्र की परम्परा)। बिहार की सबसे बड़ी प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी के रूप में विगत छः वर्षों से ” टीचर्स ऑफ बिहार-द चेंज मेकर्स ” कार्य कर रही है। इस मंच के द्वारा किए जा रहे बेहतरीन कार्यों को देखकर अब तक लाखों शिक्षक जुड़कर अपने विद्यालय में किए जा रहे नवाचार, गतिविधि या अन्य शैक्षणिक क्रियाकलाप से संबंधित पोस्ट इस मंच के विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करते हैं जिसे देखकर अन्य शिक्षक भी प्रेरित होते हैं एवं अपने अपने विद्यालयों में लागू करते हैं। बता दें कि इस मंच की परिकल्पना ठीक छः वर्ष पूर्व 2019 में पटना जिले के शिक्षक शिव कुमार ने कुछ अन्य शिक्षकों के साथ मिलकर की थी। धीरे-धीरे इस मंच के बेहतरीन कार्यों को देखकर शिक्षक जुड़ते गए और आज यह मंच एक सफल कार्ययोजना के साथ बिहार ही नहीं देश के शिक्षा जगत में एक अलग ही पहचान स्थापित कर चुका है।
टीचर्स ऑफ बिहार एक ऐसा अभिनव मंच है जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं शैक्षिक बेहतरी के लिए विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से लगातार छः सालों से निःस्वार्थ भाव से काम कर रही है। इस मंच के साथ बिहार के एक से बढ़कर एक सरकारी विद्यालय के शिक्षक जुड़कर अपना योगदान दे रहें हैं। टेक्निकल टीम लीडर ई.शिवेंद्र प्रकाश सुमन ने बताया कि इस मंच द्वारा शिक्षकों एवं छात्रों के लिए कई उपयोगी ई-पत्रिकाएं प्रकाशित की जाती है जिसमें दैनिक ज्ञानकोश, चेतना, बालमंच, प्रज्ञानिका, बालमन, अभिमत, पद्यपंकज, गद्यगुंजन आदि प्रमुख हैं। हाल फिलहाल इस मंच द्वारा ” प्रोजेक्ट शिक्षक साथी ” लाॅन्च किया गया है जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य के सभी विद्यालयों का अपना वेबसाइट उपलब्ध कराना है। साथ ही एमडीएम कैलकुलेटर भी इस मंच के द्वारा बिहार के सभी विद्यालयों के लिए लाॅन्च की गई है जिसके माध्यम से प्रधानाध्यापक को प्रतिदिन का लेखा-जोखा रखना आसान होगा। टीचर्स ऑफ बिहार के इन्हीं बेहतरीन कार्यों को देखते हुए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद(एनसीईआरटी) ने तारीफ की है एवं ऐसे समूह देश के अन्य राज्यों में लागू करने की बात की है। प्रदेश प्रवक्ता रंजेश कुमार एवं प्रदेश मीडिया संयोजक मृत्युंजय कुमार ने बताया कि टीचर्स ऑफ बिहार से मिलता जुलता कई मंच बिहार में काम कर रहा है लेकिन वैसे मंच शिक्षकों को सही मंच से जुड़ने के बजाय उन्हें कई तरह की बंदिशों में बांधकर गुमराह कर रहे हैं। शिक्षक स्वयं निर्णय लेते हुए ऐसे मंच का चयन करें जहां उनके कार्यों को पहचान मिलें तथा उनके द्वारा किए जा रहे उत्कृष्ट कार्य किसी ऐसे मंच तक सिमट न रह जाए जहां कोई विकल्प न बचें। प्रदेश मीडिया संयोजक मृत्युंजय कुमार ने राज्य के शिक्षकों से अपील करते हुए कहा कि टीचर्स ऑफ बिहार एक ऐसा मंच है जो शिक्षकों के लिए, शिक्षकों द्वारा ही संचालित है। आईए,जुड़िए टीचर्स ऑफ बिहार के साथ और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं शैक्षिक बेहतरी के लिए किए जा रहे अपने कार्यों को दीजिए एक नई उड़ान।

Karan Pandey

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