Thursday, July 16, 2026
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शिक्षा मंत्रालय ने जारी की NIRF 2025 रैंकिंग

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय (MoE) ने आज देशभर के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों की राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) 2025 सूची जारी कर दी है। इस रैंकिंग में एक बार फिर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) का दबदबा कायम रहा है।

टॉप 10 में से 7 स्थान IITs ने अपने नाम किए हैं।
सबसे खास बात यह रही कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास ने लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए इस वर्ष भी पहला स्थान हासिल किया है।

टॉप 10 में स्थान प्राप्त विश्वविद्यालय और संस्थान:
1️⃣ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास
2️⃣ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली
3️⃣ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे
4️⃣ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर
5️⃣ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) खड़गपुर
6️⃣ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) रुड़की
7️⃣ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) गुवाहाटी
8️⃣ भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) बेंगलुरु
9️⃣ जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), नई दिल्ली
🔟 बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), वाराणसी

शिक्षा मंत्रालय के अनुसार यह रैंकिंग संस्थानों के शैक्षणिक प्रदर्शन, अनुसंधान, नवाचार, संकाय गुणवत्ता, इंफ्रास्ट्रक्चर, छात्र-शिक्षक अनुपात और प्लेसमेंट जैसी कई कसौटियों पर आधारित है।

इस साल की सूची ने एक बार फिर यह साबित किया है कि IITs देश की उच्च शिक्षा और अनुसंधान का सबसे मजबूत स्तंभ बने हुए हैं, वहीं JNU और BHU जैसे पारंपरिक विश्वविद्यालय भी टॉप 10 में अपनी जगह बनाए रखने में सफल रहे हैं।

प्रतिबंधित पॉलिथिन पर बीजेपी पार्षद अरुण राय ने उठाए सवाल

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) नगर निगम की कार्यवाही पर सवाल खड़े करते हुए बीजेपी पार्षद अरुण राय ने सदन में पॉलिथिन प्रतिबंध के मुद्दे पर जोरदार आवाज़ उठाई। उन्होंने कहा कि नगर निगम की कार्रवाई केवल छोटे दुकानदारों तक सीमित है, जबकि बड़े पैमाने पर पन्नी बनाने वाली फैक्ट्रियों पर किसी तरह की सख़्ती नहीं की जाती।

अरुण राय ने आरोप लगाया कि निगम की टीम छोटे दुकानदारों से 50 ग्राम पन्नी जब्त कर 2 से 3 हज़ार रुपये का जुर्माना वसूलती है, लेकिन सवाल यह है कि जब्त की गई पन्नी आखिर जाती कहां है। उन्होंने नगर निगम से यह जानकारी देने की मांग की कि ज़ब्त पन्नी किस स्थान पर रखी जाती है और उसका निस्तारण किस प्रक्रिया से किया जाता है।

इस पर मेयर ने नगर आयुक्त को जवाब देने के लिए कहा, लेकिन जब भी नगर आयुक्त से सवाल किया गया तो उन्होंने कभी “चीफ” को बोलने के लिए कहा, तो कभी “पर्यावरण अभियंता” की ओर इशारा कर दिया।

बीजेपी पार्षद अरुण राय ने साफ़ कहा कि यदि बड़ी फैक्ट्रियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो पॉलिथिन प्रतिबंध केवल दिखावा साबित होगा। उन्होंने पर्यावरण अभियंता संजीव प्रधान को हटाए जाने की मांग भी सदन में रखी।

गौरतलब है कि प्रदेश सरकार ने पर्यावरण संरक्षण के तहत प्रतिबंधित पॉलिथिन पर सख़्ती के निर्देश दिए हैं, लेकिन नगर निगम की मौजूदा कार्यप्रणाली पर उठे सवाल प्रशासन की कार्यवाही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र में भारत का बयान : युद्ध नहीं, वार्ता से सुलझे यूक्रेन संकट

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क )संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में “यूक्रेन के अस्थायी रूप से कब्ज़े वाले क्षेत्रों की स्थिति” पर हुई बहस के दौरान भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि यूक्रेन संकट का समाधान केवल संवाद और कूटनीतिक प्रयासों से ही संभव है। भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने कहा कि नई दिल्ली संघर्ष को शीघ्र समाप्त करने के लिए हर तरह के राजनयिक प्रयासों का समर्थन करने के लिए तैयार है।

हरीश ने महासभा में कहा, “भारत यूक्रेन की स्थिति को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करता है। निर्दोष नागरिकों की जान जाना अस्वीकार्य है। इस संकट का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि शांति और वार्ता की राह पर ही संभव है।”

उन्होंने आगे कहा कि भारत का रुख शुरू से ही स्पष्ट रहा है कि किसी भी संघर्ष का स्थायी समाधान हिंसा और टकराव से नहीं निकल सकता। इसके लिए सभी पक्षों को धैर्य और विवेक का परिचय देते हुए वार्ता की मेज पर लौटना होगा।

भारत ने संयुक्त राष्ट्र मंच से दोहराया कि वह शांति स्थापना के सभी प्रयासों का समर्थन करता है और जरूरत पड़ने पर रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए भी तैयार है।
गौरतलब है कि फरवरी 2022 से चल रहा रूस-यूक्रेन युद्ध वैश्विक स्तर पर गंभीर मानवीय, राजनीतिक और आर्थिक संकट का कारण बना हुआ है। हजारों लोगों की जान जा चुकी है और लाखों नागरिक विस्थापित हो चुके हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार संघर्ष समाप्त करने की अपील कर रहा है।

भारत का यह बयान ऐसे समय आया है जब संयुक्त राष्ट्र समेत कई वैश्विक मंचों पर युद्ध समाप्त करने के लिए कूटनीतिक हल तलाशने की कोशिशें तेज हो रही हैं।
भारत का संदेश साफ है — युद्ध नहीं, संवाद ही समाधान है।

भारत का जीएसटी सुधार 2025 -टैक्स ढांचे का पुनर्निर्माण और वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारत की अर्थव्यवस्था ने पिछले एक दशक में अनेकों उतार-चढ़ाव देखे हैं। वैश्वीकरण, अमेरिकी टैरिफ,तेल कीमतों की अनिश्चितता, महामारी के झटके और डिजिटल क्रांति के बीच भारतीय कर प्रणाली को समय- समय पर नए स्वरूप की आवश्यकता महसूस होती रही है। इसी कड़ी में 3-4 सितंबर 2025 को आयोजित जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक ऐतिहासिक साबित हुई,जब इसमें टैक्स स्लैब को पुनर्संरचित कर 12 पर्सेंट और 28 पर्सेंट की दरों को समाप्त कर दिया गया और सैकड़ों उत्पादों को 5 व 18 पर्सेंट टैक्स स्लैब में स्थानांतरित कर दिया गया। साथ ही अनेक आवश्यक वस्तुओं को 0 पर्सेंट टैक्स स्लैब में डाल दिया गया,मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र मानता हूं कि इससे गरीबों किसानों और मध्यम वर्ग के लिए जीवन यापन आसान होगा।यह नया ढांचा 22 सितंबर 2025 से लागू होगा।
साथियों बात अगर हम जीएसटी क्या है?और इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की करें तो,वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) एक ऐसा अप्रत्यक्ष कर है, जिसे 122वें संविधान संशोधन अधिनियम के तहत 1 जुलाई 2017 को पूरे देश में लागू किया गया। जीएसटी का मूल उद्देश्य देशभर में एक राष्ट्र,एक टैक्स की अवधारणा को साकार करना था। इससे पहले केंद्र और राज्य स्तरपर उत्पाद शुल्क, सेवा कर, वैट, एंट्री टैक्स और लगान जैसी अनेक परतों वाले कर प्रणाली लागू थे,जिससे व्यापारियों और उपभोक्ताओं दोनों को जटिलताओं का सामना करना पड़ता था। जीएसटी ने इन सबको समेटकर एक एकीकृत कर ढांचा दिया।आज की तारीख में दुनियाँ के 150 से अधिक देशों में इसी तरह का जीएसटी सिस्टम किसी-न-किसी रूप में लागू है। कनाडा,ऑस्ट्रेलिया, यूरोपीय संघ के अधिकांश देश, मलेशिया, सिंगापुर और यहां तक कि ब्राजील जैसे बड़े देश भी जीएसटी आधारित कर व्यवस्था से जुड़े हुए हैं।भारत का नया सुधार इसलिए भीमहत्वपूर्ण है क्योंकि अब वह वैश्विक मानकों के अनुरूप टैक्स ढांचे को और सरल बना रहा है।
साथियों बात अगर हम नए ढांचे का स्वरूप, नए टैक्स स्लैब की करें तो, नए सुधार के बाद भारत में अब टैक्स ढांचा मुख्यतः तीन बड़े स्लैब पर केंद्रित हो गया है, 0 पर्सेंट 5 पर्सेंट और 18 पर्सेंट- 0 पर्सेंट स्लैब-गरीब और मध्यम वर्ग की जरूरतों से जुड़े खाद्यान्न, दालें, फल, सब्जियां, स्कूल किताबें, प्राथमिक शिक्षा सेवाएं और जीवनरक्षक दवाइयां इसमें शामिल हैं। यह स्लैब सीधे तौर पर समाज के कमजोर तबकों को राहत देने के लिए बनाया गया है।5 पर्सेंट स्लैब,इसमें रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुएं, कुछ डेयरी प्रोडक्ट्स, सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं और छोटे व्यापार से संबंधित सामान आते हैं।18 पर्सेंट स्लैब- इसमें इलेक्ट्रॉनिक्स, बीमा,निर्माण कार्य,उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं,औद्योगिक उत्पादन, लक्जरी सामान और उच्च मूल्य के कंज्यूमर गुड्स शामिल हैं।12पर्सेंट और 28 पर्सेंट स्लैब हटाने से टैक्स ढांचा सरल हुआ है। पहले जहां चार से अधिक प्रमुख दरें थीं,अब यह तीन स्लैबों में सिमट गया है,जिससे न केवल व्यापारियों के लिए टैक्स अनुपालन आसान होगा बल्कि आम उपभोक्ता को भी स्पष्टता मिलेगी।
साथियों बातें अगर हम किन क्षेत्रों को मिलेगा लाभ? इसको समझने की करें तो,नए ढांचे के सबसे बड़े लाभार्थी वे क्षेत्र हैं जो प्रत्यक्ष रूप से गरीब, मध्यम वर्ग, उद्योग और सामाजिक जरूरतों से जुड़े हैं। (1)डेयरी प्रोडक्ट्स : दूध, पनीर, दही, घी और पोषण संबंधी उत्पादों पर टैक्स संरचना सरल होने से कीमतें स्थिर रहेंगी। इससे किसानों और उपभोक्ताओं दोनों को लाभ होगा। (2)बीमा क्षेत्र- स्वास्थ्य व जीवन बीमा पर बीमा प्रीमियम पर 0पर्सेंट टैक्स लागू होने से उपभोक्ताओं के लिए प्रीमियम लागत कम हो सकती है। इससे जीवन बीमा, स्वास्थ्य बीमा और पेंशन योजनाओं में भागीदारी बढ़ेगी। (3)निर्माण और आवास-घर बनाने के लिए आवश्यक सीमेंट, स्टील, टाइल्स और सेवाओं पर कर भार कम होने से घर की लागत घटेगी। यह मध्यम वर्ग और रियल एस्टेट उद्योग दोनों के लिए लाभकारी है (4) इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र,मोबाइल, लैपटॉप और घरेलू उपकरणों की कीमतें स्थिर होने से डिजिटल इंडिया अभियान को गति मिलेगी। (5) मेडिकल और पोषण क्षेत्र :जीवन रक्षक दवाओं को 0% स्लैब और अन्य चिकित्सा उपकरणों को 5 पर्सेंट-18 पर्सेंट स्लैब में रखने से स्वास्थ्य सेवाएं सस्ती होंगी।(6) एमएसएमई और बड़े उद्योग- सरल टैक्स स्लैब से छोटे और मझोले उद्योगों को अनुपालन लागत कम होगी, जबकि बड़े उद्योगों को उत्पादन और निर्यात बढ़ाने में बहुत विशाल सहूलियत होगी।
साथियों बात अगर हम जीएसटी रिफॉर्म करने का सरकार का मकसद और आम आदमी का फायदा होने की करें तो,जीएसटी सुधार का सबसे बड़ा मकसद है, (1) गरीबों और मध्यम वर्ग को राहत देना। नई दरों से- गरीब तबके को 0 पर्सेंट टैक्स स्लैब से सस्ते में भोजन और दवाइयां मिलेंगी, (2) घर बनाने वालों को कम खर्च आएगा,(3) बीमा सस्ता होगा, (4) स्वास्थ्य सेवाएं किफायती होंगी, (5) छोटे उद्योगों को प्रतिस्पर्धा में मजबूती मिलेगी,(6) और महंगाई का दबाव घटेगासरकार यह संदेश देना चाहती है कि टैक्स नीति सिर्फ राजस्व बढ़ाने का साधन नहीं, बल्कि आर्थिक न्याय और सामाजिक सुरक्षा का भी सशक्त औजार है।
साथियों बात अगर हम टैक्स के स्लैब में परिवर्तन करने से क़रीब 85000 करोड़ का घाटा और भरपाई के उपायों को समझने की करें तो, सरकार का अनुमान है कि दरें घटाने और कई वस्तुओं को 0 पर्सेंट टैक्स स्लैब में डालने से उसे लगभग 85,000 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हो सकता है। लेकिन इसकी भरपाई के लिए बड़े उपाय किए गए हैं, 40 पर्सेंट स्लिप से रिकवरी-टैक्स अनुपालन बढ़ने, ई-इनवॉइसिंग और डिजिटल ट्रैकिंग से टैक्स चोरी में कमी आएगी और इससे राजस्व की बड़ी मात्रा में भरपाई होगी।
साथियों बात अगर हम अमेरिकी टैरिफ और भारत की रणनीति को समझने की करें तो, हाल के वर्षों में अमेरिका ने भारत सहित कई देशों के खिलाफ टैरिफ हथियार के रूप में इस्तेमाल किए हैं। इस पृष्ठभूमि में जीएसटी सुधार भारत की आंतरिक ताकत को बढ़ाने का जरिया है। (1) सरल टैक्स ढांचा विदेशी निवेशकों को आकर्षित करेगा। (2) घरेलू उद्योग को प्रतिस्पर्धी बनाएगा।(3)निर्यात लागत कम होने से अमेरिका और यूरोप के टैरिफ का दबाव कम महसूस होगा।यह सुधार संकेत देता है कि भारत आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन बनाना चाहता है।
साथियों बातें अगर हम जीएसटी सुधारो के पीछे संभव होता है राजनीतिक विमर्श,राहत या सियासत? की करें तो, जब 2017 में जीएसटी लागू हुआ था तब सरकार ने इसे “वन नेशन, वन टैक्स” कहकर ऐतिहासिक बताया था और तर्क दिया था कि उच्च दरें राजस्व जुटाने के लिए जरूरी हैं। अब 2025 में दरें घटाने पर वही सरकार कह रही है कि, इससे उपभोक्ताओं को राहत और उद्योग को प्रोत्साहन मिलेगा। अब सवाल उठता है, क्या यह आर्थिक विवशता है या राजनीतिक रणनीति?दरअसल, यह दोनों का मिश्रण है। वैश्विक मंदी, अमेरिकी दबाव और घरेलू महंगाई ने सरकार को दरें घटाने पर मजबूर किया। साथ ही, यह कदम गरीबों, मध्यम वर्ग और छोटे उद्योगों को चुनावी वर्ष में राहत देने की रणनीति भी हो सकता है।
साथियों बात अगर हम जीएसटी सुधारो को सामाजिक दृष्टिकोण, जैसे घर के बड़े समझाते हैं थ्योरी को समझने की करें तो, अगर इस सुधार को सामाजिक रूप से समझा जाए तो यह बिल्कुल वैसा है जैसे घर के बड़े सदस्य बच्चों को जीवन जीने का तरीका बताते हैं (1) “भोजन और स्वास्थ्य सबसे पहले”-इसलिए खाद्यान्न और दवाइयां 0% स्लैब में।(2)“स्वास्थ्य का ध्यान रखो”- इसलिए मेडिकल और बीमा क्षेत्र सस्ता।(3)“घर बनाओ” -इसलिए कंस्ट्रक्शन सेक्टर को राहत।(4)“बच्चों की पढ़ाई जरूरी है”-इसलिए शिक्षा सेवाएं किफायती (5)“फालतू दिखावा मत करो”-इसलिए लक्जरी सामान पर टैक्स ऊंचा रखा गया।यह सुधार दर्शाता है कि सरकार टैक्स नीति को सिर्फ राजस्व का औजार नहीं, बल्कि समाज के कल्याण का ढांचा मानकर आगे बढ़ रही है।
साथियों बात अगर हम इन जीएसटी सुधारो को अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य के रूप में समझने की करें तो,विश्व अर्थव्यवस्था आज दो ध्रुवों में बंटी हुई है,अमेरिकी प्रभुत्व और एशियाई उभार। ऐसे समय में भारत का टैक्स सुधार एक सॉफ्ट पावर मॉडल के रूप में सामने आ रहा है।(1) यूरोप ने भी 2008 मंदी के बाद टैक्स स्लैब घटाकर अर्थव्यवस्था को स्थिर किया था। (2) चीन ने निवेश आकर्षित करने के लिए टैक्स दरें लचीली बनाई थीं।(3) भारत अब उसी राह पर चल रहा है।इससे भारत की छवि निवेश के लिए सुरक्षित और आकर्षक गंतव्य के रूप में मजबूत होगी।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि भारत का जीएसटी सुधार 2025 सिर्फ एक वित्तीय पहल नहीं बल्कि आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन का प्रतीक है। यह सुधार भारत को न केवल घरेलू स्तर पर महंगाई से राहत दिलाएगा बल्कि वैश्विक मंच पर उसे और मजबूती से खड़ा करेगा।

आज जाने अपने राशियों से क्या करे क्या नहीं

👉 आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के अवसर बन रहे हैं। वहीं कुछ जातकों को स्वास्थ्य और घरेलू विवादों से जूझना पड़ सकता है। ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ही सफलता की कुंजी होगा।

मेष (Aries)
संतान की प्रगति से सुख और प्रसन्नता मिलेगी।
आपके कार्य और व्यक्तित्व की लोग प्रशंसा करेंगे।
सामाजिक मान-सम्मान में वृद्धि के योग हैं।

वृषभ (Taurus)
ज्ञान-विज्ञान में रुचि बढ़ेगी, अध्ययन में सफलता मिलेगी।
हालांकि, तन-मन के लिए दिन थोड़ा चुनौतीपूर्ण रह सकता है।
खानपान पर ध्यान दें, अनावश्यक विवादों से बचें।

मिथुन (Gemini)
दिन संतोष और सुकून से बीतेगा।
राजनीतिक एवं सामाजिक दलों से घनिष्ठता बढ़ सकती है।
नये संपर्क भविष्य में लाभदायी रहेंग।

कर्क (Cancer)
नए संबंध और सम्पर्कों से लाभ की संभावनाएं हैं।
पारिवारिक विवाद या मतभेद बढ़ सकते हैं।
धैर्य और विवेक से काम लेना फायदेमंद होगा।

सिंह (Leo)
रिश्तों के बंधन मजबूत होंगे।
विरोधियों पर विजय प्राप्त करेंगे।
आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी, कार्यक्षेत्र में सम्मान मिलेगा।

कन्या (Virgo)
किसी प्रियजन से अप्रिय सूचना मिलने की संभावना।
कार्यों को सुनियोजित ढंग से करना आवश्यक है।
जल्दबाज़ी से बचें और स्वास्थ्य का ध्यान रखें।

तुला (Libra)
मन शांत रहेगा और धैर्य से सफलता के योग हैं।
दूसरों की चिंता करना आपके लिए हानिकारक हो सकता है।
आत्म-विश्वास और संयम से दिन बेहतर गुजरेगा।

वृश्चिक (Scorpio)
कोई महत्वपूर्ण “डील” फाइनल होगी।
उच्च शिक्षा या विशेष प्रशिक्षण का अवसर मिल सकता है।
आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी।

धनु (Sagittarius)
अपने ज्ञान और प्रवचनों से लोगों को प्रभावित करेंगे।
धन और संपत्ति बढ़ाने का प्रयास सफल होगा।
धार्मिक कार्यों में मन लगेगा।

मकर (Capricorn)
परिस्थितियां धीरे-धीरे शुभता की ओर बढ़ रही हैं।
किसी पुराने मित्र से संबंध टूट सकता है।
कार्यक्षेत्र में नए अवसर मिल सकते हैं।

कुंभ (Aquarius)
शुभ समाचार मिलने की संभावना।
रोजगार और पदोन्नति के योग बन रहे हैं।
हालांकि, तन-मन के लिए दिन थोड़ा चुनौतीपूर्ण रहेगा।

मीन (Pisces)
विशेष उत्तरदायित्व के कारण यात्रा करनी पड़ सकती है।
स्वास्थ्य संबंधी चिंता से मुक्ति मिलेगी।
पारिवारिक सहयोग प्राप्त होगा।

समस्त प्रधान जन के सम्मान एवं हित की लड़ाई लडूंगा:सभाकुँवर कुशवाहा

भाटपार रानी विकास खण्ड सभागार में बोले लोकप्रिय विधायक

भाटपार रानी/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)
उक्त बातें ग्राम प्रधान संघ भाटपार रानी व विकासखण्ड परिवार द्वारा आयोजित ग्राम प्रधान उन्मुखीकरण कार्यशाला समीक्षा बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में लोकप्रिय विधायक सभा कुँवर कुशवाहा ने सभी प्रधान जन की समस्याओं को बारी बारी सुन कर कहीं।
विधायक ने उनके सम्मान की लड़ाई लड़ने का आश्वासन दिया साथ ही यह वादा किया की सभी प्रधान हमारे साथी हैं,बिना किसी भेदभाव के प्रधान लोगों के सम्मान की लड़ाई लडूंगा। सभी को आश्वस्त करते हुए विधायक ने ग्राम पंचायत के समुचित विकास के लिए सदैव सहयोग में तत्पर तत्पर रहने को आश्वस्त किया। उन्होंने कहा कि गांव के विकास के लिए मैं मुख्यमंत्री जी से मिलकर हर तरह की समस्याओं का समाधान कराने का प्रयास करूंगा।
वहीं इस अवसर पर कार्यक्रम के आयोजक प्रधान संघ भाटपार रानी अध्यक्ष प्रतिनिधि डॉक्टर शम्स परवेज द्वारा विश्वास दिलाया गया प्रधानों की मदद और उनकी समस्याओं को निस्तारित कराया जाएगा, हम सभी प्रधान साथी भी बिना किसी भेदभाव के जी जान से उनके साथ कदम से कदम मिलाकर सहयोग करेंगे। व अपने-अपने गांव को विकसित बनाने के लिए भरपूर मेहनत करेंगें।कार्यक्रम में उपस्थित प्रधान संघ के जिला अध्यक्ष सत्येंद्र कुमार पाठक ने ग्राम पंचायत की समस्याओं से विधायक को अवगत कराया जिसमें नरेगा भुगतान में देरी, ग्राम पंचायत के अनुमोदन के बिना राशन कार्ड निर्गत करना और जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र को सरल बनाने के लिए प्रधान संघ की तरफ से विधायक को पत्रक सौंपा।
वहीं बैठक में खंड विकास अधिकारी श्री पी एन त्रिपाठी ने बुके और फूल मालाओं से सभी अतिथियों का स्वागत किया और प्रधान साथियों से कदम से कदम मिलाकर शासन की योजनाओं को संचालित करने के लिए आश्वासन दिया ।इस अवसर पर ग्राम पंचायत में बेहतर कार्य करने वाले ग्राम पंचायत सचिव और पंचायत सहायकों को प्रशस्ति पत्र देकर उन्हें सम्मानित किया गया । कार्यक्रम के आखिर में इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि श्री लक्ष्मण खरवार ने कहा कि मैं अपने पैसे से नए विकासखंड कार्यालय पर सभी प्रधान और क्षेत्र पंचायत सदस्यों का नाम अंकित कराऊंगा और जिन गांवों में क्षेत्र पंचायत से कार्य नहीं हुआ है वहां भी कार्य हो इसका का प्रयास करूंगा।
कार्यक्रम में सभी प्रधान गण, क्षेत्र पंचायत के सदस्य और विकासखंड के कर्मचारी उपस्थित रहे।

ट्रेन बनी गंदगी का अड्डा, महिलाओं में हड़कंप

पीएनआर नंबर 2822139688 ट्रेन नंबर 19490

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)से अहमदाबाद जाने वाली ट्रेन संख्या 19490 में गुरुवार को यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। ट्रेन के डिब्बों में जगह-जगह काकरोच रेंगते दिखाई दिए, जिससे महिला यात्री भयभीत हो गईं। हालात ऐसे बने कि कई महिलाएं जोर-जोर से चिल्लाने लगीं और पूरे कोच में अफरा-तफरी मच गई।

देशभर में जहाँ महिलाएं फाइटर विमान उड़ा रही हैं, पुलिस, आईएएस-आईपीएस बनकर देश सेवा में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं, वहीं घरेलू स्तर पर गृहणी के रूप में घर संभाल रही हैं। लेकिन, ट्रेन जैसे सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी और काकरोच का सामना होने पर उनकी हिम्मत भी जवाब देती नजर आई।

यात्रियों का कहना है कि रेलवे लाख दावे करे, लेकिन स्वच्छता अभियान की पोल ट्रेन के अंदर खुल रही है। डिब्बों की गंदगी और कीड़े-मकोड़े न सिर्फ यात्रा को असुविधाजनक बना रहे हैं, बल्कि यात्रियों की सेहत के लिए भी खतरा बन चुके हैं।

लोगों ने सवाल उठाया कि जब पूरा देश स्वच्छ भारत अभियान में जुटा है, तो रेलवे जैसा “कमाऊ पुत्र” विभाग गंदगी फैलाने में क्यों पीछे है? क्या यात्रियों को अब काकरोच और गंदगी के बीच यात्रा करने की आदत डालनी पड़ेगी?

यात्रियों ने मांग की है कि रेलवे महज़ आश्वासन से आगे बढ़कर नियमित निगरानी और कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि ट्रेन यात्रा गंदगी और बीमारी का कारण न बनकर, सचमुच आरामदायक और सुरक्षित अनुभव बने।

नेपाल सरकार का बड़ा फैसला: सभी प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म हुए निष्क्रिय

काठमांडू।(राष्ट्र की परम्परा )नेपाल सरकार का बड़ा फैसला: सभी प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म हुए निष्क्रिय नेपाल सरकार ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश, मंत्रिपरिषद के 2082/05/09 के निर्णय और संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की मंत्रिस्तरीय समिति के निर्देशानुसार देश में सभी प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को निष्क्रिय करने का निर्णय लिया है।

जारी आदेश (प.सं.-०८२/८३, दिनांक – 2082 / 05/19, च.नं.-५९७, ने.सं.: ११४५) के तहत नेपाल में फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, ट्विटर (एक्स), स्नैपचैट, टेलीग्राम, लिंक्डइन, क्वोरा, पिनटेरेस्ट, थ्रेड्स, वीचैट, सिग्नल, डिस्कॉर्ड, रेडिट, टंबलर, क्लबहाउस, वीके, IMO, ज़ालो, मेस्टोडोन और कई अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तत्काल प्रभाव से निष्क्रिय कर दिए गए हैं।

निर्णय के पीछे का कारण “सोशल मीडिया के उपयोग को विनियमित करने के निर्देश, 2080” बताया गया है। सरकार का कहना है कि नेपाल में केवल वही प्लेटफॉर्म सक्रिय रहेंगे जो आधिकारिक रूप से सूचीबद्ध और पंजीकृत हैं।इस आदेश के बाद नेपाल में करोड़ों यूज़र्स प्रभावित होंगे और इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को निर्देश दिया गया है कि इन सभी प्लेटफॉर्म्स की सेवाओं को तुरंत निष्क्रिय किया जाए। यह नेपाल के डिजिटल इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है।

समर्थकों ने बार काउन्सिल उत्तर प्रदेश का प्रत्याशी बनाया प्रद्युम्न कुमार बाजपेयी को

बाराबंकी (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बार काउन्सिल उत्तर प्रदेश के चुनाव में प्रद्युम्न कुमार बाजपेयी ‘एडवोकेट’ को समर्थकों ने प्रत्याशी घोषित किया है। समर्थकों समेत राजकुमार मणि ने अधिवक्ताओं से अपील कर रहे हैं कि आगामी चुनाव में श्री बाजपेई को प्रथम (1) वरीयता का मत देकर विजयी बनाएं।

राजकुमार मणि ने बताया की श्री बाजपेयी “एडवोकेट” लंबे समय से अधिवक्ता हितों के लिए सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं और अधिवक्ताओं की समस्याओं को उठाने के लिए ही जाने जाते हैं। उन्होंने कहा कि अगर अधिवक्ताओं का सहयोग और समर्थन उन्हें मिला तो वे संगठन के उत्थान, अधिवक्ताओं की सुविधाओं और न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए लगातार प्रयासरत रहेंगे।

श्री मणि ने बताया की एडवोकेट वाजपेई का चुनाव कार्यालय न्याय भवन के सामने, सिविल कोर्ट बाराबंकी स्थित चेम्बर से संचालित किया जा रहा है, जहां से वे अधिवक्ताओं से निरंतर संपर्क कर रहे हैं।

समर्थकों सहित राजकुमार मणि ने स्वय सभी अधिवक्ता बंधुओं से अपील की है कि श्री वाजपेई के अनुभव और कार्यशैली को देखते हुए उन्हें अपना प्रथम वरीयता का मत देकर भारी मतों से विजयी बनाएं।

आगरा में डीसीसी-डीएलआरसी की बैठक सम्पन्न

आगरा, (राष्ट्र की परम्परा)l कलेक्ट्रेट सभागार में डीसीसी एवं डीएलआरसी की त्रैमासिक बैठक केंद्रीय मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल तथा सांसद फतेहपुर सीकरी राजकुमार चाहर की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में जनपद का ऋण जमा अनुपात 69.43% पाया गया जो आरबीआई मानक से अधिक है।
बैंकों को केसीसी, शिक्षा ऋण एवं स्वरोजगार परक योजनाओं के लक्ष्यों को समय पर पूरा करने, जनधन खाताधारकों को बीमा योजनाओं से जोड़ने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय साक्षरता शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने लम्बित ऋण प्रस्तावों पर नाराजगी व्यक्त करते हुए शीघ्र निस्तारण के आदेश दिए।
मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार, माटीकला, पीएम मुद्रा, एनआरएलएम, पीएम स्वनिधि, किसान क्रेडिट कार्ड व फसल बीमा योजनाओं की भी समीक्षा हुई। मंत्री ने कहा कि सरकारी योजनाओं की सफलता बैंकों की सक्रियता पर निर्भर है।
बैठक में जिलाधिकारी अरविन्द मल्लप्पा बंगारी, सीडीओ प्रतिभा सिंह, नाबार्ड, आरबीआई एवं विभिन्न बैंकों के अधिकारी उपस्थित रहे।

06 सितम्बर को नहीं होगा सम्पूर्ण समाधान दिवस, अब 08 सितम्बर को होगा आयोजन

आगरा(राष्ट्र की परम्परा)l उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की PET-2025 परीक्षा 06 एवं 07 सितम्बर को आयोजित होने के कारण शासन स्तर से निर्णय लिया गया है कि 06 सितम्बर को प्रस्तावित “सम्पूर्ण समाधान दिवस” अब 08 सितम्बर (सोमवार) को आयोजित होगा। आगरा सहित प्रदेश के 48 जनपदों में यह व्यवस्था लागू रहेगी।

विद्यार्थी परिषद किया शिक्षकों का अभिनंदन

शिक्षक वह बनता है जिसे ईश्वर चुनता है:प्रो श्रीप्रकाश मणि

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। अखिल विद्यार्थी परिषद देवरिया द्वारा जिला पंचायत सभागार मे शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर शिक्षक अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें शिक्षण के साथ समाज क्षेत्र मे कार्य कर रहे शिक्षकों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व कुलपति प्रो श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी और मुख्य वक्ता के रूप मे अभाविप के प्रान्त उपाध्यक्ष डॉ निगम मौर्य रहें। कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत करते हुए अतिथियों द्वारा मॉ सरस्वती और स्वामी विवेकानन्द की प्रतिमा पर पुष्पांजलि और दीप प्रज्वलित किया गया।
मुख्य अतिथि प्रो श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी ने कहा कि अभाविप समाज, संस्था और राष्ट्र के बीच सेतु का कार्य कर रहा है यह संगठन राष्ट्रीय पुर्ननिमार्ण के लिए सदैव तत्पर और क्रियाशील रहते हुए आज विश्व का सबसे बड़ा सांस्कारित छात्र संगठन बन चुका है। शिक्षक की भूमिका को बताते हुए उन्होंने कह कि वही राष्ट्र विकसित त होता है जहाँ आचार्य प्रतिष्ठित होते हैं। हमारा धर्म होता हर गुरू का सम्मान करना और यह घर्म भी हमे वही गुरु सिखाता है।इस धरा पर ज्ञान से बड़ा कुछ नहीं है वह ज्ञान का बोध कराने वाला शिक्षक ही है। आज की तकनीकी विधा और विशेषकर एआई के युग मे ज्ञानार्थ आईये और विकासार्थ जाईये के ध्येय के साथ जब हम विद्यालय परिसर से विद्यार्थीयों को निकालेंगे तो ऐसे विद्यार्थी समाज को अपने प्रकाश से आलोकित करते रहेंगे।शिक्षक होना एक महनीय कार्य है और शिक्षक वह बनता है जिसे ईश्वर चुनता है।

अभाविप के प्रान्त उपाध्यक्ष और मुख्य वक्ता डॉ निगम मौर्य ने कहा कि समाज मे शिक्षक की भूमिका को ईश्वर से ऊँचा बताया गया है ।आज की युवा तरुणाई को मार्गदर्शन करने का कार्य एक शिक्षक ही कर सकता है। विद्यार्थी परिषद विद्यार्थियों को शैक्षिक जगत में परिपक्व और प्रतियोगी बनाते हुए उन्हें समाज और राष्ट्र के उत्थान हेतु अतिरिक्त समय देने के लिए प्रशिक्षित करने का कार्य करता है। शिक्षक की भूमिका समाज मे एक दार्शनिक और मार्गदर्शक के रूप मे है इस देश के सभी महान व्यक्तित्व के पीछे किसी महान शिक्षक का हाथ रहा है और वर्तमान समाज को देखते हुए आज का शिक्षक केवल क्लास तक सीमित होता है तो यह समाज के प्रति उसकी बहुआयामी भूमिका के प्रति न्यायसंगत नही है।
स्वागत भाषण जिला प्रमुख डॉ अभिनव सिंह ने किया और आभार नगर अध्यक्ष डॉ मंतोष मौर्य द्वारा व्यक्त किया गया।कार्यक्रम का संचालन नगर सहमंत्री अमन तिवारी द्वारा किया गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रान्त उपाध्यक्ष डॉ विवेक मिश्र,विभाग सहप्रमुख डॉ राघवेन्द्र पाण्डेय,पूर्व विधायक प्रो सत्य प्रकाश मणि, प्रो अर्जुन मिश्र, प्रो बृजेश पाण्डेय, डॉ वीरेंद्र मणि, प्रोफेसर अशोक सिंह, डॉ अभिषेक तिवारी, डॉ प्रद्योत सिंह, डॉ भावना सिन्हा , डॉ सुधीर कुमार, शैलेन्द्र कुमार सैनी, प्रशांत मणि ,सात्विक श्रीवास्तव, सविनय पाण्डेय अमित मणि सहित विभिन्न महाविद्यालयों व इंटर कालेजों के अध्यापक और कार्यकर्ता उपस्थित रहें।

नाली निर्माण कार्य को ग्रामीणों ने रोका

उपजिलाधिकारी को सौपा पत्रक

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)l सैकड़ो ग्रामीणों ने नाली निर्माण कार्य को रुकवाने को लेकर उपजिलाधिकारी बरहज को पत्रक सौपा।
राम जानकी मार्ग (NHI) पर नाली से पहले ही नाली निर्माण कराया जा रहा था, जिसको लेकर ग्रामीणों ने गुरुवार को उपजिलाधिकारी विपिन कुमार द्विवेदी पत्रक सौप कर रोका।
राम जानकी मार्ग निर्माण में गौरा बांगर के समीप ठेकेदार द्वारा नाली पहले ही निर्माण कराया जा रहा था, जिसको लेकर सैकड़ो ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी के पास पहुंचकर पत्रक देकर अपनी कृषि योग्य भूमि के प्रभावित होने की बात कही, जिस पर राजस्व टीम ने निर्माण कार्य को तत्काल रुकवा दिया।
इस दौरान शिवचंद्र प्रसाद सोनकर, देवचंद्र सोनकर, दुर्गा जायसवाल, संतोष जायसवाल, कमलेश पासवान, राधिका देवी, सरिता देवी, वकील यादव, अशोक यादव सहित सैकड़ो लोग मौजूद रहे।

भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय में निदेशक बने हितेंद्र मिश्र

घुघली क्षेत्र के ग्राम पंचायत ढेकही के मूल निवासी हैं हितेंद्र मिश्र

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा) । विकासखंड घुघली अंतर्गत ग्राम पंचायत ढेकहीं के मूल निवासी हितेंद्र कुमार मिश्र ने शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार में हिंदी विभाग के निदेशक के पद पर पदभार ग्रहण किया है। । उनके इस सफलता से घुघली क्षेत्र ही नहीं बल्कि महराजगंज जनपद के लिए गर्व की बात है।
प्रो. मिश्रा 28 नवंबर 1998 से स्वामी सहजानंद पीजी कॉलेज गाजीपुर में हिंदी के प्रोफेसर पद पर नियुक्त हुए थे। वे प्रारंभ से ही कुशाग्र बुद्धि के धनी थे। उन्होंने अपने प्रतिभा के बल पर पहली बार प्रोफेसर के पद पर नियुक्त हुए। और भारत के कई राज्यों में अपनी लंबी सेवाएं देते हुए उन्होंने मेघालय राज्य में निदेशक मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र नेहू शिलांग में हिंदी विभाग के प्रमुख भी रह चुके हैं। विद्यार्थी जीवन से ही वह संघर्षशील रहे है। शिक्षा ग्रहण करने के दौरान ही पिता का साया सिर से हट गया। इनके बड़े भाई व ढेकहीं ग्राम पंचायत के वर्तमान ग्राम प्रधान नागेश्वर कुमार मिश्र ने अपने छोटे भाई हितेंद्र कुमार मिश्र की पढ़ाई में किसी भी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न नही होने दिया। इसके लिए वे अपनी पढ़ाई को ब्रेक करते हुए भाई के पढ़ाई को ब्रेक नहीं होने दिया। हितेंद्र कुमार मिश्र के इस सफलता से घुघली क्षेत्र ही नहीं बल्कि महराजगंज जनपद भी आज गोरवान्वित महसूस कर रहा है। उनके इस उपलब्धि से प्रधान संघ के मंडल अध्यक्ष विजय कुमार मिश्रा, प्रमुख प्रतिनिधि ओम प्रकाश जायसवाल, पूर्व नगर अध्यक्ष घुघली वीरेंद्र सिंह, भरत शुक्ला, अरुण कुमार सिंह, अविनाश उर्फ बंटी पटेल, रामाश्रय कन्नौजिया, हरिश्चंद्र यादव, रामराज यादव, रामप्यारे गौड़, आदि लोगों ने इस उपलब्धि पर शुभकामनाएं दी है।

कूड़ा पृथक्करण हेतु क्षमता संवर्धन कार्यशाला सम्पन्न

बरहज /देवरिया(राष्ट्र की परम्परा )l नगर पालिका परिषद गौरा बरहज के सभागार में सफाई नायक व स्वच्छ वातावरण प्रोत्साहन समिति के सहयोग से, कूड़ा पृथक्करण हेतु क्षमता संवर्धन कार्यशाला सम्पन्न आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही नगर पालिका परिषद की अधिशासी अधिकारी कार्मिको के खुशहाल एवं स्वस्थ जीवन के लिए कचरे का पृथक्करण आवश्यक है। हरे व नीले डिब्बों में गीले एवं सूखे कचरे को अलग-अलग रखकर ही उसका सही निस्तारण संभव है, जिससे पर्यावरण को स्वच्छ रखा जा सकता है।

इस दौरान जियो स्टेट से रत्नाकर तिवारी, एस बी एम प्रभारी रितिका यादव, बड़े बाबु, मनोज कुमार गुप्ता, राजेश जायसवाल और सभी कर्मचारी मौजूद रहे।