Thursday, July 16, 2026
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1984 से 2025 तक राजनीति के नारों और भाषणों में बदलती भाषा : मर्यादा से अमर्यादा तक

लखनऊ(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) भारतीय लोकतंत्र में चुनाव सिर्फ वोट पाने का माध्यम नहीं बल्कि विचारों और नीतियों की प्रतियोगिता भी होते हैं। नारे और भाषण इस लोकतांत्रिक यात्रा के अहम हथियार रहे हैं। नारे जनता तक सीधे पहुँचते हैं और भाषण माहौल बनाते हैं। लेकिन जहाँ पहले नारे प्रेरणादायक, आशावादी और जनकल्याण पर केंद्रित होते थे, वहीं समय के साथ इनकी जगह कटाक्ष, तंज़ और अब तो अभद्र/अमर्यादित शब्दों ने ले ली है।

1984 से 1990 का दौर : सकारात्मक नारों की परंपरा
1984 लोकसभा चुनाव में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस ने सहानुभूति की लहर में चुनाव लड़ा। नारा था – “एक मजबूत प्रधानमंत्री, एक मजबूत भारत”।
इस दौर के नारे और भाषण विकास, स्थिरता और शांति पर केंद्रित थे। विपक्षी दलों में भी भाषा अपेक्षाकृत मर्यादित रही।

1990 से 2000 : आक्रामक राजनीति की शुरुआत मंडल बनाम कमंडल की राजनीति ने शब्दावली को तेज़ किया।
राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान धार्मिक उन्माद और भावनात्मक नारों का बोलबाला रहा – “जय श्री राम” एक धार्मिक उद्घोष से राजनीतिक हथियार बन गया।
इसी दौरान चुनावी भाषणों में प्रतिद्वंद्वियों को कठोर शब्दों से नवाज़ा जाने लगा।

2000 से 2010 : टेलीविज़न डिबेट और नारे की धार

टीवी चैनलों और 24×7 मीडिया ने राजनीतिक नारों को और धार दी।भाषणों में कटाक्ष बढ़े – जैसे “अंधेर नगरी चौपट राजा”, “मौत का सौदागर” (2007 में कांग्रेस द्वारा गुजरात दंगों को लेकर प्रयुक्त)।
नारे अब विकास और सुशासन से हटकर व्यक्ति-विशेष पर केंद्रित होने लगे।

2010 से 2020 : सोशल मीडिया का युग और भाषा का पतन

सोशल मीडिया ने “ट्रोल संस्कृति” को जन्म दिया। नारे और भाषण अब व्यक्तिगत हमलों तक पहुँच गए – “चौकीदार चोर है”, “50 इंच की छाती”, “नकली हिंदू”, “खून की दलाली”।
सत्तापक्ष और विपक्ष, दोनों ने ही एक-दूसरे के खिलाफ कटु और असंवेदनशील शब्दों का प्रयोग किया।

2020 से 2025 : अभद्रता का चरम कोरोना महामारी और किसान आंदोलन के दौरान नेताओं की बयानबाज़ी और अधिक असंवेदनशील हुई।
व्यक्तिगत हमले अब परिवार तक पहुँच गए – हाल का उदाहरण प्रधानमंत्री की दिवंगत माँ पर टिप्पणी है, जिसने राजनीति की भाषा को और अधिक शर्मनाक स्तर पर पहुँचा दिया।
चुनावी नारों और भाषणों में अब मुद्दों से ज्यादा गालियाँ, अपशब्द और व्यक्ति-परक हमले शामिल हो चुके हैं।

वर्षवार प्रमुख नारे और अमर्यादित बयान

वर्ष/दौर प्रमुख नारे/भाषण अमर्यादित/विवादित बयान1984 “एक मजबूत प्रधानमंत्री, एक मजबूत भारत” (कांग्रेस) –
1989 “राजा नहीं फकीर है, देश की तक़दीर है” (वी.पी. सिंह) –
1990-92 “जय श्री राम” (राम मंदिर आंदोलन) धार्मिक उन्मादपूर्ण बयान
1996 “सबका साथ, सबका विकास” जैसी प्रारंभिक धारणाएँ –
2004 “भारत उदय” (एनडीए), “आम आदमी” (कांग्रेस) –
2007 – “मौत का सौदागर” (कांग्रेस द्वारा मोदी पर)
2014 “अच्छे दिन आने वाले हैं” (बीजेपी) –
2016-17 – “खून की दलाली” (राहुल गांधी)
2019 “मैं भी चौकीदार” (बीजेपी) “चौकीदार चोर है” (कांग्रेस)
2021 – “50 इंच की छाती” (बीजेपी नेता), “नकली हिंदू” (विपक्ष)
2023-24 – प्रधानमंत्री की दिवंगत माँ पर आपत्तिजनक टिप्पणी

नारे और भाषणों में गिरावट के कारण

वोट बैंक की राजनीति – तात्कालिक लाभ के लिए भावनाएँ भड़काना। मीडिया और सोशल मीडिया का दबाव – उत्तेजक बयान तुरंत वायरल होते हैं।
विचारधारात्मक टकराव – जाति, धर्म और क्षेत्रीय राजनीति ने शब्दावली को विषाक्त किया।
राजनीतिक शुचिता का अभाव – दलों में आपसी मर्यादा घटती गई।
लोकतंत्र पर असर जनता के असली मुद्दे – विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार – चर्चा से बाहर होते गए।
युवा पीढ़ी राजनीति को गाली-गलौज का अखाड़ा मानने लगी।
समाज में वैमनस्य और विभाजन की भावना मजबूत हुई।

सुधार की राह
चुनाव आयोग द्वारा कड़ी कार्यवाही – आपत्तिजनक बयानों पर तत्काल बैन और जुर्माना।
पार्टियों के आचार संहिता में कठोर नियम।
मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी – गाली/अमर्यादित शब्दों को amplify न करना।
जनता की सजगता – ऐसे नेताओं को वोट न देना जो भाषा की मर्यादा लांघते हैं।
नैतिक शिक्षा और राजनीतिक प्रशिक्षण – लोकतांत्रिक मूल्यों पर जोर।

1984 के प्रेरणादायी और विकासोन्मुख नारों से लेकर 2025 की अभद्र और अपमानजनक भाषा तक का यह सफ़र लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है। जब नारे और भाषण गाली-गलौज तक सीमित हो जाएं तो लोकतंत्र की आत्मा घायल होती है। जरूरत है कि राजनीतिक दल और नेता नकारात्मकता छोड़कर सकारात्मक एजेंडे और मर्यादित भाषा को अपनाएँ। यही लोकतांत्रिक भारत की सच्ची पहचान और मजबूती होगी।

ग्राम पंचायत चकरा गोसाई में जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी का भव्य आयोजन, अमन-ओ-शांति की दुआओं के बीच निकला जुलूस

सलेमपुर/देवरिया।(राष्ट्र की परम्परा)
ग्राम पंचायत चकरा गोसाई में शुक्रवार को जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी बड़े ही धूमधाम और श्रद्धा-उत्साह के साथ मनाया गया। इस मौके पर एक विशाल जुलूस निकाला गया, जिसमें सैकड़ों की संख्या में लोगों ने शिरकत की। जुलूस में शामिल लोगों ने नबी-ए-करीम हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहो ताला अलैहिवसल्लम की शिक्षाओं पर अमल करने और देश-दुनिया में अमन-ओ-शांति की दुआएं मांगीं।

जुलूस के दौरान माहौल पूरी तरह से जश्न और रूहानियत से सराबोर रहा। नात-ए-पाक और तकरीरें पेश कर नबी-ए-पाक के जीवन से जुड़ी शिक्षाओं को याद किया गया। सभी ने मिलकर यह संदेश दिया कि इस्लाम का असल पैगाम मोहब्बत, भाईचारा और इंसानियत की सेवा है।

इस मौके पर ग्राम पंचायत चकरा गोसाई के अशरफ अली मंसूरी, सैयद मंसूरी, सरफुद्दीन मंसूरी, इजराफिल मंसूरी, अनवर मंसूरी, इदरीश मंसूरी, आरिफ मंसूरी, साहिल मंसूरी, शोएब मंसूरी, आतिफ खान, छोटू खान, सोहेल खान, सरफराज खान, बबलू समेत बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में शामिल सभी लोगों ने एक स्वर में देश की तरक्की, भाईचारा और पूरी दुनिया में अमन-चैन कायम रहने की दुआ मांगी। गाँव में इस मौके पर गंगा-जमुनी तहज़ीब की झलक भी साफ तौर पर देखने को मिली।

सिकन्दरपुर में ईद-ए-मिलादुन्नबी धूमधाम से मनाई गई, जुलूस में उमड़ी भीड़

सिकन्दरपुर /बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

ईद-ए-मिलादुन्नबी का पर्व कस्बा एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में एक समुदाय ने पूरे उत्साह और अक़ीदत के साथ मनाया। सुबह घरों में फातेहा कराई गई और शाम को मकानों व मस्जिदों पर चिरागां कर खुशियां जताई गईं। हर वर्ष की भांति इस बार भी नगर में पुलिस की पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के बीच अदब और एहतराम के साथ जुलूस निकाला गया। सुबह 11:30 बजे शुरू हुआ यह जुलूस परंपरागत मार्गों से गुजरता हुआ मोहल्ला मुड़ियापुर स्थित दाता साहब हजरत हाशिम शाह चहार जर्ब के मज़ार के प्रांगण तक पहुंचा, जहां जलसे का आयोजन किया गया।जुलूस के दौरान जगह-जगह रुककर इस्लामी नारे बुलंद किए गए। मज़ार के प्रांगण में आयोजित जलसे में मुख्य वक्ता प्रोफेसर सैय्यद सिराजुद्दीन अजमली ने हजरत मोहम्मद साहब की सीरत, मजहबे इस्लाम की खूबियों और उनकी हिदायतों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने लोगों को नबी के उसूलों पर चलने की नसीहत दी। इस अवसर पर अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री दानिस आजाद अंसारी, विधायक मोहम्मद ज़ियाउद्दीन रिजवी, शेख अहमद अली, सुरेश सिंह, शेख फ़ैज, जावेद इक़बाल अंसारी, डॉ. नदीम अहमद खान, भीष्म यादव, गणेश प्रसाद सोनी, दिनेश चौधरी, नजरूलबारी, डॉ. उमेश चन्द, राकेश सिंह, राकेश यादव, जितेश कुमार वर्मा, खुर्शीद नेता, फैजी अंसारी, शेख अलीमुद्दीन (मैनेजर दारुल उलूम), इमाम अख्तर सहित हजारों लोग मौजूद रहे

ड्रोन संबंधी जागरूकता के लिए पुलिस ने जारी की एडवाइजरी

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले में ड्रोन के दुरुपयोग की संभावनाओं और तैर रही अफवाहों को देखते हुए जिला पुलिस ने लोगों से सतर्कता बरतने की अपील की है। हाल ही में विभिन्न थाना क्षेत्रों में उड़ते हुए ऐसे ड्रोन देखे गए हैं, जो खिलौना हेलीकॉप्टर या टॉय ड्रोन न होकर संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े हो सकते हैं। पुलिस का कहना है कि इस प्रकार की घटनाओं से आमजन में अनावश्यक भय उत्पन्न होता है।
पुलिस ने बताया कि रात्रि गश्त बढ़ाकर सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत की गई है। गांव-गांव जाकर जनजागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। साथ ही सभी ड्रोन उड़ाने वाले व्यक्तियों का सत्यापन और पंजीकरण किया जा रहा है। तकनीकी निगरानी को भी बढ़ाया गया है, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।


नियमों के अनुसार 250 ग्राम से अधिक वज़न वाले सभी ड्रोन का पंजीकरण अनिवार्य है। बिना अनुमति ड्रोन उड़ाने पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना और जेल की सजा का प्रावधान है। वहीं, 3000 ग्राम से अधिक भार वाले ड्रोन के लिए सुरक्षा मंजूरी प्राप्त करना अनिवार्य है।
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उन्हें कोई संदिग्ध ड्रोन उड़ता दिखाई दे तो तत्काल स्थानीय पुलिस या 112 डायल कर सूचना दें। ड्रोन उड़ाने से पहले सभी लोग संबंधित अनुमति व पंजीकरण कराएं।
पुलिस द्वारा जारी एडवाइजरी मे स्पष्ट किया गया है कि “सतर्क और जागरूक रहकर ही हम अपने क्षेत्र को शांतिपूर्ण और सुरक्षित बना सकते हैं।”

मुख्तार की जमीन पर बने फ्लैटों की बुकिंग इस माह से शुरू

सांकेतिक फोटो

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) के डालीबाग इलाके में बने 72 फ्लैटों की योजना इसी माह से आम जनता के लिए खुलने जा रही है। खास बात यह है कि जिस जमीन पर यह योजना तैयार की गई है, वह कभी कुख्यात माफिया मुख्तार अंसारी के कब्जे में थी। सरकारी कार्रवाई के बाद जमीन को मुक्त कराकर आवासीय योजना विकसित की गई है।

सूत्रों के अनुसार, यह योजना जी प्लस 3 कैटेगरी की है और प्रत्येक फ्लैट का क्षेत्रफल 360 वर्ग फीट तय किया गया है। इन फ्लैटों की कीमत 9 लाख से 9.5 लाख रुपये निर्धारित की गई है।

योजना का आवंटन पूरी तरह पारदर्शी तरीके से किया जाएगा। इसके लिए इच्छुक लोगों को पहले पंजीकरण कराना होगा। पंजीकरण के बाद लॉटरी सिस्टम के माध्यम से फ्लैटों का आवंटन होगा।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस योजना का लाभ केवल उन्हीं लोगों को मिलेगा जिनकी सालाना आय 3 लाख रुपये तक है। यानी निम्न आय वर्ग के परिवार ही आवेदन कर सकेंगे।

डालीबाग के इस प्रोजेक्ट को लेकर शहर में खासा उत्साह देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि सरकार की यह पहल न केवल आम नागरिकों को किफायती आवास उपलब्ध कराएगी, बल्कि माफियाओं की अवैध कमाई पर भी बड़ा प्रहार है।

15 साल तक बिना वेतन नौकरी! अब याद आई बकाया तनख्वाह की — PWD में अजब खेल

बड़ा सवाल कैसे चला साहब का 15 साल की बिना बेतन ?

लखनऊ।(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) यूपी के लोक निर्माण विभाग (PWD) में एक हैरान करने वाला मामला सुर्खियों में है। विभाग में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत अधिकारी सत्यवीर (नाम परिवर्तित) ने 2004 से 2010 तक सेवाएं तो दीं, लेकिन इस अवधि में उन्होंने कभी भी वेतन का दावा नहीं किया। विभाग ने भी अपनी ओर से भुगतान की पहल नहीं की। अब करीब 15 साल बाद अधिकारी ने बकाया वेतन की मांग उठाई, तो पूरे महकमे में खलबली मच गई।

सवालों की बौछार इस मामले ने अफसरशाही की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।जब अधिकारी को छह वर्षों तक तनख्वाह नहीं मिली तो घर का खर्च कैसे चला? बच्चों की पढ़ाई, परिवार की जिम्मेदारी आखिर किस सहारे पूरी हुई? विभाग ने इतने लंबे समय तक इस पर ध्यान क्यों नहीं दिया?

लापरवाही या रहस्य? विभागीय सूत्रों का कहना है कि वेतन मांग में देरी खुद अधिकारी की लापरवाही से हुई। नियुक्ति, सेवा अवधि और फाइलों से जुड़े दस्तावेज समय रहते दावे में नहीं लगाए गए। वहीं, अधिकारी का अचानक 15 साल बाद वेतन मांगना अब विभाग के लिए सिरदर्द बन गया है।

प्रणाली पर भी उठे सवाल मामला सिर्फ एक अधिकारी की लापरवाही तक सीमित नहीं दिखता। यह विभाग की सुस्ती और जवाबदेही की कमी को भी उजागर करता है। आमतौर पर वेतन बिल न बनने पर विभागीय स्तर से स्वतः संज्ञान लिया जाना चाहिए था। मगर इस प्रकरण में न अधिकारी ने आवाज उठाई, न ही विभाग ने कोई कार्रवाई की।

आगे क्या? अब फाइलों के खुलने और वेतन मांग की चिट्ठी पहुंचने के बाद विभाग कानूनी पहलुओं की जांच में जुट गया है। नियमों के तहत इतनी लंबी अवधि के बाद भुगतान संभव होगा या नहीं, इस पर मंथन जारी है।

यह घटना विभागीय सुस्ती, अफसर की लापरवाही और प्रशासनिक तंत्र की खामियों को एक साथ उजागर कर रहा है। अब सबकी नजर इस पर है कि क्या अधिकारी को 15 साल बाद बकाया वेतन मिलेगा या मामला नियमों की भेंट चढ़ जाएगा।

17 नगर निगमों को 477 करोड़ की सौगात लखनऊ नगर निगम को सबसे अधिक 72 करोड़, अयोध्या को मात्र 8 करोड़

लखनऊ(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) उत्तर प्रदेश सरकार ने शहरी विकास को नई रफ़्तार देने के उद्देश्य से नगर निगमों को बड़ी धनराशि जारी की है। पंचम वित्त आयोग की संस्तुति पर स्थानीय निकाय निदेशालय के निदेशक अनुज झा ने 17 नगर निगमों को कुल ₹477 करोड़ की धनराशि अवमुक्त की है।

सबसे बड़ी राशि 72 करोड़ रुपए लखनऊ नगर निगम को मिली है। इसके बाद कानपुर को 62 करोड़, वाराणसी को 42 करोड़ और गाजियाबाद को 39 करोड़ दिए गए हैं। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संसदीय क्षेत्र गोरखपुर को 20 करोड़, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को 42 करोड़ रुपए मिले हैं।दिलचस्प बात यह रही कि रामनगरी अयोध्या, जो आस्था और पर्यटन के लिहाज़ से लगातार सुर्खियों में रहती है, उसे मात्र 8 करोड़ रुपए की धनराशि दी गई है।

नगर निगमवार आवंटन (₹ करोड़ में):
लखनऊ – 72,कानपुर – 62 ,वाराणसी – 42,
गाजियाबाद – 39,प्रयागराज – 38,मेरठ – 30,
आगरा – 29,मुरादाबाद – 21,अलीगढ़- 21 , बरेली – 21,गोरखपुर – 20,शाहजहांपुर – 18
,मथुरा – 17,फिरोजाबाद – 13,झांसी – 12
,अयोध्या – 8
यह धनराशि नगर निगम क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विकास, जल निकासी व्यवस्था, सड़क निर्माण, स्वच्छता एवं अन्य शहरी अवसंरचना परियोजनाओं पर खर्च की जाएगी।
सरकार का कहना है कि इस आवंटन से नगर निगमों को विकास कार्यों में गति मिलेगी और आमजन को बेहतर नागरिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

बरहज में गाजे बाजे के साथ निकली पीडीए सम्मान यात्रा

देवरिया, (राष्ट्र की परम्परा) ।बरहज विधानसभा में सपा नेता विजय रावत के नेतृत्व मे पीडीए सम्मान यात्रा शुक्रवार को निकाली गयी। यह यात्रा देवरिया बाईपास से शुरू होकर मोहाव गाँव भ्रमण कर काली मंदिर पर समाप्त हुई इस दौरान पूर्व ग्राम प्रधान श्रवण गौड़, अम्बिका पाल, राजेन्द्र कुशवाहा, शिव कुमार, अनिरुद्ध यादव को साल व माला पहनाकर सम्मानित किया गया। सपा नेता विजय रावत ने कहा की जिस समाज को भाजपा ने अपमानित करने का काम किया उसे गाँव गाँव जाकर सम्मानित करने का काम करेंगे। भाजपा की सरकार ने अपने दस साल के कार्यकाल में जनता के हक को छीनने का काम किया और पूरे प्रदेश को महंगाई के आग में झोंकने का काम किया है। इस सरकार में किसान नौजवान व्यापारी बेरोजगार सभी तपका परेशान हैं जिसे प्रदेश व देश की जनता जान चुकी हैं और आने वाले विधानसभा चुनाव मे भाजपा सरकार को उखाड़ फेंकने का काम करेगी। सपा नेता अनिरुद्ध यादव ने कहा सपा की कथनी करनी में कोई अंतर नहीं है जो कहती हैं वह करती हैं और सपा सरकार में ही सबका सम्मान है। इस लिए सभी साथियों से अनुरोध है आने वाले चुनाव में सपा को जिताने का काम करें इस दौरान मुख्य रूप से संजय प्रसाद, कुमार, मनोज कुमार, अनिरुद्ध यादव, अख़्तर खाँ, दिनेश यादव, विकास यादव, विपिन सिंह आदित्य यादव पतरू आदि उपस्थित रहे।

विद्यालयों में केक काट कर मनाया गया शिक्षक दिवस

बघौचघाट,देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)
देवरिया के विकास खंड क्षेत्र पथरदेवा के स्कूलों में शुक्रवार को देश के पूर्व राष्ट्रपति व महान शिक्षाविद् डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन शिक्षक दिवस के रूप में हर्षोल्लास के साथ केक काट कर मनाया गया।वही
विद्यार्थियों ने शिक्षकों के सम्मान में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।शिक्षकों ने गुरु और शिष्य के संबंधों पर प्रकाश डालते हुए बच्चों को डॉ राधाकृष्णन के जीवन वृतांत की जानकारी एवम उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प दिलाया।पथरदेवा प्राथमिक विद्यालय व जूनियर हाई स्कूल में, डॉ अंबेडकर शिक्षण संस्थान,स्व परमानंद इंटर कॉलेज मलसी,प्राथमिक विद्यालय व जूनियर हाई स्कूल बघौचघाट,न्यू आइडियल पब्लिक स्कूल पकहॉ,प्राथमिक विद्यालय और जूनियर हाईस्कूल मेदीपट्टी,किंग्स पब्लिक स्कूल बघौचघाट,प्राथमिक विद्यालय रामनगर, देवता देवी महिला महाविद्यालय बघौचघाट,स्वामी विवेकानंद महाविद्यालय केडी चौराहा,गणेश शिक्षण संस्थान केडी चौराहा, एमपीआईसी कुर्मीपट्टी,भाऊराव इंटर कालेज ओलीपट्टी में छात्र छात्राओं ने केक काटकर और डॉ राधाकृष्णन की चित्र पर फूल माला चढ़ाकर उन्हें याद किया।इस मौके पर बच्चों ने अपने शिक्षकों को पेन,चॉकलेट एवं गिफ्ट डायरी आदि उपहार देकर उनका सम्मान किया।इस दौरान प्रबंधक नीलेश्वर राय, प्रबंधक इं रंजीत गौतम,डॉ विंध्याचल मद्धेशिया, प्रधानाचार्य अजय सिंह,जमशेद आलम,हरेंद्र सिंह, दीपक मिश्रा,नवीन यादव,केशव प्रताप शाही,सादिक अली,अशरफ अली,ओंकार सिंह,आकाश राय,देवेंद्र लाल श्रीवास्तव,विवेक सिंह पटेल,जितेंद्र यादव,सुनील राय,रामबालक सिंह,कुंवर राय,राजेश यादव आदि शिक्षकों ने डॉ सर्वपल्ली राधा कृष्णन की चित्र पर फूल माला चढ़ाकर उन्हें याद किया।

ओवरब्रिज पर दर्दनाक हादसा : तीन की मौत, एक घायल

कुशीनगर।(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) थाना कोतवाली क्षेत्रान्तर्गत कसया ओवरब्रिज पर बीती रात बड़ा सड़क हादसा हो गया। डायल 112 पर एक्सीडेंट की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और जनसहयोग से घायलों को एंबुलेंस के जरिए जिला अस्पताल भिजवाया।

अस्पताल में इलाज के दौरान डॉक्टरों ने दो पुरुषों और एक महिला को मृत घोषित कर दिया, जबकि एक अन्य गंभीर घायल का इलाज जारी है। हादसे की सूचना मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम हाउस भेजकर नियमानुसार अग्रिम विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।

यह सड़क हादसा क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोग प्रशासन से कसया ओवरब्रिज पर दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए पुख्ता कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।

राधाकृष्णन के जन्म दिवस पर शिक्षक दिवस मनाया गया

कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। रामकोला विकास खण्ड के ग्राम सिधावें स्थित टोला भड़कुड़वा में शिक्षक दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान आर.पी. कोचिंग सेंटर के छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए शिक्षक रामप्रवेश राय ने कहा कि डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितम्बर 1888 को मद्रास प्रेसीडेंसी में हुआ था। वे एक महान दार्शनिक, विद्वान और कुशल शिक्षक थे। उन्हीं की स्मृति में प्रत्येक वर्ष भारत में शिक्षक दिवस मनाया जाता है।

कार्यक्रम में उपस्थित पूर्व प्रधान भगवन्त यादव ने भी छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि डॉ. राधाकृष्णन का जीवन अत्यंत सादगीपूर्ण था। उन्होंने गरीबी और संघर्षों के बावजूद उच्च शिक्षा प्राप्त की और आगे चलकर महान दार्शनिक, विद्वान तथा देश के राष्ट्रपति बने। उनके आदर्श और विचार आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

शिक्षक दिवस के इस अवसर पर सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और शिक्षकों के योगदान को नमन किया।

डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक महान दार्शनिक थे- प्रिंस

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा )
डाक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन अपना अधिकांश जीवन भारतीय शिक्षा और भारतीय दर्शन को समृद्ध बनाने में समर्पित कर दिऐ उक्त बातें प्राथमिक विद्यालय जयनगर नंबर -2 नगर क्षेत्र बरहज पर शिक्षक दिवस मनाते हुए विद्यालय के प्रधानाध्यापक एवं उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष जय नारायण त्रिपाठी प्रिंस ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा। उन्होंने कहा कि सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1888 को तमिलनाडु के तिरूत्तनी में हुआ था हालांकि उनका परिवार तेलुगु भाषी ब्राह्मण समुदाय से थे, उन्होंने 1962 से 1967 तक भारत के दूसरे राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया वह 1952 से 1962 तक भारत के पहले उपराष्ट्रपति भी रहे। वह 1949 से 1952 तक सोवियत संघ में भारत के दूसरे राजदूत थे।
कार्यक्रम में सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित किया गया, पुष्प अर्पित करते हुए विद्यालय की शिक्षा मित्र गण अर्चना त्रिपाठी,आशा यादव,आशा देवी,मंजू देवी, रसोइया माला देवी,मीना देवी,सरिता देवी एवं सैकड़ों बच्चे उपस्थित थे।

नरसिंहडाड़ के तालाब से अवैध खनन पर हाई कोर्ट सख्त जिलाधिकारी से मांगी रिपोर्ट

भागलपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा )
तहसील बरहज के ग्राम नरसिंहडाड़ स्थित गाटा संख्या 135ख और 135ग, जो राजस्व अभिलेखों में “जलमग्न भूमि (तालाब की जमीन)” के रूप में दर्ज है, वहां से अवैध मिट्टी खनन के मामले पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है।

ग्रामवासी अनुराग कुमार द्वारा दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया कि तालाब की भूमि से नियमों के विरुद्ध खनन हो रहा है, जिससे पर्यावरण और ग्रामीणों के हितों को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता डॉ. गजेंद्र सिंह यादव ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से अदालत में प्रस्तुत रिपोर्ट खनन निरीक्षक के हस्ताक्षर से जारी की गई थी, जबकि वही अधिकारी याचिका में प्रतिवादी हैं। अदालत ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए उस रिपोर्ट को अविश्वसनीय मानकर खारिज कर दिया।
याचिका में यह भी कहा गया कि ग्रामीणों द्वारा बार-बार ग्राम प्रधान के खिलाफ शिकायतें की गईं, लेकिन खनन निरीक्षक ने उसी प्रधान से रिपोर्ट मंगाई, जो तथ्यहीन और मनमानी होती थी। ग्रामीणों की आवाज़ को लगातार अनसुना करने के कारण अंततः याचिकाकर्ता को उच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली की अध्यक्षता वाली डबल बेंच ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि प्रतिवादी अधिकारी की रिपोर्ट स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने कहा कि जिलाधिकारी, देवरिया को इस मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और प्रमाणिक रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
अब मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर 2025 को होगी।
यह मामला न केवल पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा से जुड़ा है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट के हस्तक्षेप का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि इससे गांव के तालाब और जलस्रोत सुरक्षित रहेंगे।

नवंबर में पहली बार होगा आयोजन

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लखनऊ।(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) उत्तर प्रदेश सरकार इस बार पर्यटन को नई पहचान देने जा रही है। नवंबर में पहली बार दुधवा नेशनल पार्क में दुधवा महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। तीन दिवसीय इस महोत्सव में आवासीय, सांस्कृतिक और वन्यजीव आधारित गतिविधियों का संगम होगा। खास बात यह है कि इस महोत्सव में विदेशी पर्यटकों के शामिल होने की भी संभावना है। तारीखों की घोषणा शीघ्र ही की जाएगी।

पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि यह महोत्सव अनोखा और यादगार होगा। आगंतुकों को दुधवा की प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ थारू जनजाति की अनोखी संस्कृति, खानपान, हस्तशिल्प और जीवनशैली को करीब से देखने-समझने का अवसर मिलेगा। इस आयोजन की थीम होगी— ‘ईको टूरिज्म, नेचर ऐंड कल्चर सेलिब्रेशन’।

क्या होगा खास? नेचर वॉक और बर्ड वॉचिंग सेशन,ग्रामीण कल्चरल टूर और थारू जनजातीय संस्कृति का अनुभव,प्रकृति के बीच योग और बच्चों के लिए इको कैंप,एडवेंचर एवं इको स्पोर्ट्स जैसे वाल क्लाइम्बिंग, साइकिल ट्रैक और इंडोर गेम्स,लग्जरी एवं डीलक्स टेंट में आवासीय सुविधा (कुल 250 टेंट—50 लग्जरी, 200 डीलक्स),आकर्षक सेल्फी जोन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

पर्यटकों के लिए विशेष इंतजाम महोत्सव के दौरान प्रतिदिन 1,000 दर्शकों के बैठने की व्यवस्था होगी। सुरक्षा की पुख्ता तैयारियों के साथ ही आयोजन स्थल पर आधुनिक सुविधाओं से लैस टेंट सिटी बनाई जाएगी।

पर्यटन विभाग के अनुसार, इस महोत्सव के जरिए न सिर्फ संरक्षण, संस्कृति, वेलनेस और रोमांच को एक साथ जोड़ने का प्रयास होगा, बल्कि दुधवा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इको-टूरिज्म हब के रूप में पहचान भी दिलाई जाएगी।

प्रेम विवाह से नाराज़ भाई ने तमंचे से गोली मारकर बहन की हत्या की, पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार

हरदोई (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले से ऑनर किलिंग का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां सगे भाई ने अपनी बड़ी बहन की गोली मारकर हत्या कर दी।

जानकारी के अनुसार, मृतका मानवी मिश्रा ने इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल अभिनव कटियार से प्रेम विवाह किया था। इसी बात से नाराज़ उसका छोटा भाई वीरू मिश्रा, जो दिव्यांग भी बताया जा रहा है, ने शुक्रवार को बहन मानवी के सिर पर तमंचा सटाकर गोली चला दी। गोली लगते ही मानवी की मौके पर ही मौत हो गई।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी भाई वीरू मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में घटना के पीछे ऑनर किलिंग का मामला सामने आ रहा है। फिलहाल मामले की गहन जांच की जा रही है।