Friday, July 10, 2026
Home Blog Page 639

25 लाख से अधिक के निर्माण कार्यों की समीक्षा डीएम ने जताई नाराजगी

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
जिलाधिकारी दीपक मीणा ने शनिवार को 25 लाख रुपये से अधिक लागत वाले निर्माण कार्यों की समीक्षा की। बैठक के दौरान उन्होंने अधिकारियों को साफ संदेश दिया कि गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध तरीके से कार्यों को पूरा करना प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने नगर के विभिन्न स्थानों पर डिवाइडर में लगाए गए पौधों के रख-रखाव पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि साफ-सफाई और पौधों की देखभाल में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
डीएम ने कहा कि डिवाइडर में लगाए गए पौधे शहर की सुंदरता और हरियाली को बढ़ाने के उद्देश्य से लगाए गए हैं, लेकिन वर्तमान स्थिति देखकर लगता है कि संबंधित विभाग अपने दायित्व का सही निर्वहन नहीं कर रहे हैं। घास-फूस की सफाई, पौधों की देखभाल और उनकी उचित सिंचाई अनिवार्य है। उन्होंने निर्देश दिया कि जिम्मेदार विभाग नियमित निरीक्षण कर सुनिश्चित करें कि सभी पौधे स्वस्थ और सुरक्षित रहें।

इसे भी पढ़ें – https://rkpnewsup.com/supreme-courts-strong-comment-on-the-functioning-of-high-court-judges/
इसके साथ ही डीएम ने अन्य निर्माण परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए चेतावनी दी कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या ढिलाई स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने कहा कि निर्धारित समयसीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण कार्य पूर्ण होना चाहिए। “गोरखपुर मुख्यमंत्री सिटी है, यहां के अधिकारी का कर्तव्य है कि शहर को बेहतर ढंग से विकसित करें और जनपद को प्रगति के पथ पर आगे ले जाएं। जनता की सुविधाओं से जुड़े कामों में कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी,” डीएम ने स्पष्ट कहा।

इसे भी पढ़ें – https://rkpnewsup.com/villagers-protested-against-the-non-operation-of-boats/
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक परियोजना की प्रगति की साप्ताहिक रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए और यदि किसी प्रकार की शिकायत सामने आती है तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी की होगी।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी शाश्वत त्रिपुरारी, परियोजना निदेशक दीपक कुमार सिंह सहित लोक निर्माण विभाग, नगर निगम, वन विभाग और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। डीएम ने अधिकारियों को हिदायत दी कि वे अपने-अपने कार्यक्षेत्र में सक्रिय रहकर नियमित निरीक्षण करें और जनता के हित में योजनाओं को धरातल पर उतारें।
अंत में जिलाधिकारी ने कहा कि गोरखपुर के विकास कार्यों में सभी अधिकारियों की सामूहिक भूमिका महत्वपूर्ण है। सभी को अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करना होगा ताकि शहर को स्वच्छ, सुंदर और सुविधाजनक बनाया जा सके।

हाईकोर्ट जजों के कामकाज पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

जजों के लिए परफॉर्मेंस इवैल्यूएशन सिस्टम की ज़रूरत: जस्टिस सूर्यकांत

नई दिल्ली, (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट में लंबित मामलों और फैसले में होने वाली देरी पर गंभीर चिंता जताई है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि अब समय आ गया है जब हाईकोर्ट के जजों के कामकाज का आकलन करने के लिए परफॉर्मेंस इवैल्यूएशन सिस्टम लागू किया जाए।

यह टिप्पणी झारखंड हाईकोर्ट के एक मामले की सुनवाई के दौरान की गई, जिसमें तीन साल तक आपराधिक अपील का फैसला सुरक्षित रखे जाने के बाद सुनाया गया। बेंच ने कहा, “हम स्कूल प्रिंसिपल की तरह जजों पर निगरानी नहीं रखना चाहते, लेकिन एक ऐसी स्व-प्रबंधन प्रणाली बननी चाहिए जिससे यह सुनिश्चित हो कि उनकी मेज पर फाइलों का ढेर न लगे।”

इसे भी पढ़ें – https://rkpnewsup.com/india-us-trade-tensions-trumps-unexpected-blow-to-the-pharmaceutical-sector/

जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि हर न्यायाधीश को एक ही तराजू में नहीं तोला जा सकता। कुछ जज दिन-रात मेहनत कर मामलों का शानदार निस्तारण कर रहे हैं, वहीं कुछ दुर्भाग्यवश अपना काम पूरा नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस स्थिति को सुधारने के लिए ठोस पैरामीटर और गाइडलाइन तय करना जरूरी है।

नाव न चलाने को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन

बरहज/देवरिया(राष्ट्र कि परम्परा)
शनिवार को अपराह्न परसिया देवार के निवासियों एवं दूध बेचने वालों ने नदी उस पार घाट के किनारे नाव न पहुंचने से नाराज होकर प्रदर्शन करने लगे। ग्रामीणों का कहना है कि एक महीने से सरकारी नाव नहीं चलाई जा रही है, प्राइवेट नाव से 50 रूपये भाड़ा देकर अपनी जान जोखिम मे डाल कर रोजमर्रा कार्य के लिए बरहज आना पड़ता है। इस समस्या के निवारण हेतु पी डब्लू डी के अधिकारीयों से बार बार कहा जाता है लेकिन वें अनसुना कर देते है। पूछे जाने पर लोक निर्माण विभाग के अवर अभियंता अखिलेश राम ने बताया कि जल स्तर खतरे के निशान से ऊपर है इस लिए शासन के तरफ से नाव नहीं चलाई जा रही है, जल स्तर कम होने पर शासन कि तरफ से नाव संचालित किया जाएगा।

“संघ और स्त्रियाँ सेविका समिति से शताब्दी तक की यात्रा”

सितंबर 2025 में आयोजित व्याख्यानमाला के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि आज महिलाओं की भागीदारी समाज और राष्ट्र निर्माण में पहले से कहीं अधिक आवश्यक है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि स्त्री-शक्ति केवल परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक क्षेत्रों में भी उसकी बराबरी की भूमिका होनी चाहिए। भागवत ने कहा कि “मातृशक्ति के बिना राष्ट्र अधूरा है।” उन्होंने इस पर ज़ोर दिया कि भारतीय संस्कृति में नारी को सदा पूजनीय और निर्णायक स्थान दिया गया है, इसलिए संघ परिवार की शाखाओं और गतिविधियों में महिलाओं का सक्रिय योगदान भविष्य की दिशा तय करेगा।

इसे भी पढ़ें – https://rkpnewsup.com/prof-up-singh-passes-away-the-education-world-has-lost-a-guiding-light/
भारत के सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) एक महत्त्वपूर्ण संगठन के रूप में स्थापित है। 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा स्थापित यह संस्था मूलतः पुरुष swayamsevaks के लिए बनी थी। इसकी शाखाओं, अनुशासन और विचारधारा ने धीरे-धीरे भारतीय राजनीति और समाज पर गहरा असर डाला। परन्तु जब हम महिलाओं की भूमिका की ओर देखते हैं, तो तस्वीर कुछ अलग मिलती है। आरएसएस के समानान्तर 1936 में जन्मी “राष्ट्र सेविका समिति” ने ही स्त्रियों के लिए रास्ता खोला। आज जब संघ अपनी शताब्दी मना रहा है, तब इस यात्रा पर नज़र डालना ज़रूरी है कि स्त्रियों की भागीदारी कहाँ से शुरू हुई और 2025 तक वह किस मुकाम तक पहुँची।

इसे भी पढ़ें – https://rkpnewsup.com/the-courts-strong-message-life-imprisonment-for-the-stepfather-in-14-days/

शुरुआती दौर: 1925 से 1936

संघ की स्थापना 1925 में नागपुर में हुई। यह संगठन अनुशासन, परेड, शाखा और राष्ट्रवाद पर आधारित था। लेकिन इसकी संरचना पुरुष प्रधान रही। हेडगेवार स्वयं मानते थे कि स्त्रियों को अलग मंच चाहिए, क्योंकि उस समय के सामाजिक परिवेश में स्त्रियों का सीधे पुरुष शाखाओं में आना सहज नहीं माना जाता था। इसी पृष्ठभूमि में 1936 में लक्ष्मीबाई केलकर ने विजयादशमी के दिन वर्धा में “राष्ट्र सेविका समिति” की स्थापना की। हेडगेवार ने भी इस पहल का स्वागत किया और सुझाव दिया कि महिलाएँ अपनी संस्था चलाएँ, ताकि वे अपनी शक्ति, संस्कृति और नेतृत्व को स्वतंत्र रूप से विकसित कर सकें। इस तरह महिलाओं की भागीदारी औपचारिक रूप से शुरू हुई।

सेविका समिति की स्थापना और शुरुआती संघर्ष

1939 में पहली बार समिति ने प्रशिक्षण वर्ग आयोजित किया। धीरे-धीरे अलग-अलग प्रांतों में इसकी शाखाएँ बनने लगीं। समिति का उद्देश्य केवल राष्ट्रवादी विचार फैलाना नहीं था, बल्कि स्त्रियों में ‘मातृत्व, कर्तृत्व और नेतृत्व’ (मातृत्व, कर्र्तृत्व, नेत्रृत्व) जैसे गुणों का विकास करना भी था। इसमें शारीरिक प्रशिक्षण, योग, गीत, खेल, अनुशासन और समाज सेवा शामिल किए गए। आज़ादी के आंदोलन में भी समिति की महिलाओं ने परोक्ष रूप से भूमिका निभाई। परन्तु उनकी गतिविधियाँ मुख्यतः सांस्कृतिक और सामाजिक क्षेत्रों तक सीमित रहीं।

1940 से 1970 का दशक: विस्तार की ओर

स्वतंत्रता के बाद के दशकों में समिति का नेटवर्क बढ़ा। लक्ष्मीबाई केलकर की मृत्यु (1978) तक संगठन कई राज्यों में फैल चुका था। उनके बाद सरस्वती आपटे प्रमुख संचालिका बनीं। इस समय तक शाखाओं की संख्या हज़ारों में पहुँच गई थी। समिति का जोर महिला शिक्षा, संस्कार, और सेवा परियोजनाओं पर रहा। आपातकाल (1975–77) में समिति से जुड़ी महिलाओं ने विरोध प्रदर्शनों में भी भाग लिया। इस दौर ने उन्हें राजनीतिक रूप से अधिक सचेत और सक्रिय बनाया।

1980–2000: आधुनिकता और परम्परा का संगम

90 के दशक में जब भारतीय राजनीति में भाजपा और संघ परिवार का प्रभाव बढ़ने लगा, तो महिलाओं की भागीदारी भी चर्चा में आने लगी। समिति ने इस समय शहरी और पेशेवर महिलाओं तक पहुँच बनाने की कोशिश की। महिला शिक्षिकाएँ, चिकित्सक और नौकरीपेशा स्त्रियाँ समिति के कार्यक्रमों से जुड़ने लगीं। 1994 में उषाताई चाटे और 2006 में प्रमिलाताई मेढे प्रखर नेतृत्व के रूप में सामने आईं। इन नेताओं ने महिला शाखाओं को आधुनिक मुद्दों—जैसे कामकाजी महिलाओं की चुनौतियाँ, शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवार में संतुलन—से जोड़ा।

2012 से आगे: शांथक्का का नेतृत्व

2012 में वेंकट्रामा शांता कुमारी, जिन्हें लोकप्रिय रूप से “शांथक्का” कहा जाता है, राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख संचालिका बनीं। उनका जन्म 1952 में हुआ और वे लंबे समय से संघ परिवार के कार्य में सक्रिय थीं। उनके नेतृत्व में समिति ने अपना विस्तार और तेज़ किया। आज समिति के पास चार से पाँच हज़ार शाखाएँ हैं, जो लगभग 800 से अधिक जिलों में फैली हुई हैं। यद्यपि सटीक आँकड़े संगठन सार्वजनिक नहीं करता, लेकिन अनुमान है कि लाखों महिलाएँ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इससे जुड़ी हुई हैं। समिति शिक्षा, स्वास्थ्य, सेवा, छात्रावास और महिला सशक्तिकरण परियोजनाएँ चला रही है। शहरी महानगरों में भी इसकी शाखाएँ सक्रिय हो रही हैं।

इसे भी पढ़ें – https://rkpnewsup.com/under-mission-shakti-5-0-womens-safety-in-75-districts-has-received-a-new-dimension/

संघ और महिला प्रश्न

संघ के भीतर महिलाओं को औपचारिक सदस्यता या नेतृत्व स्थान नहीं दिया गया है। आरएसएस की शाखाएँ केवल पुरुषों के लिए ही हैं। महिलाएँ केवल समिति के माध्यम से संघ के विचारधारा संसार का हिस्सा बनती हैं। आलोचकों का कहना है कि यह व्यवस्था महिलाओं को मुख्यधारा से बाहर रखती है। वे पुरुषों के बराबर निर्णयकारी पदों पर नहीं पहुँच पातीं। परन्तु समर्थकों का मत है कि अलग संगठन होने से महिलाएँ स्वतंत्र रूप से नेतृत्व और गतिविधियाँ विकसित कर पाती हैं। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कई बार कहा है कि महिलाओं की भागीदारी “प्राकृतिक रूप से” बढ़ रही है। परन्तु अब भी नेतृत्व संरचना में असमानता साफ दिखाई देती है।

वर्तमान स्थिति (2025)

संघ अपनी शताब्दी मना रहा है। उसके लगभग 83,000 शाखाएँ देशभर में सक्रिय बताई जाती हैं। वहीं राष्ट्र सेविका समिति की शाखाएँ भी लगातार बढ़ रही हैं। समिति अब गाँवों के साथ-साथ महानगरों में भी काम कर रही है। इसके प्रशिक्षण वर्गों में स्कूली छात्राओं से लेकर पेशेवर महिलाएँ तक भाग ले रही हैं। 2025 में समिति का चेहरा परम्परा और आधुनिकता का मिश्रण है—जहाँ एक ओर मातृत्व और परिवार आधारित मूल्य हैं, वहीं दूसरी ओर समाज सेवा और महिला नेतृत्व के अवसर भी हैं। समिति ने लाखों महिलाओं को संगठित कर आत्मविश्वास और सामूहिकता दी। शिक्षा, सेवा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से समाज पर ठोस असर पड़ा। महिलाओं को नेतृत्व और प्रबंधन का अवसर मिला। महिलाएँ संघ की मुख्य धारा (आरएसएस) में निर्णयकारी भूमिकाओं से बाहर रहीं। संगठन का वैचारिक ढाँचा महिलाओं को परम्परागत भूमिकाओं तक सीमित करता है। आधुनिक नारीवादी विमर्श से समिति का दृष्टिकोण टकराता है, क्योंकि वह स्वतंत्रता और समानता की बजाय मातृत्व और संस्कृति पर ज़ोर देती है।
सितंबर 2025 में आयोजित व्याख्यानमाला के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि आज महिलाओं की भागीदारी समाज और राष्ट्र निर्माण में पहले से कहीं अधिक आवश्यक है। व्याख्यानमाला में यह भी कहा गया कि 2025 का भारत उस मुकाम पर खड़ा है, जहाँ महिला नेतृत्व केवल “पूरक” नहीं बल्कि “निर्णायक” भूमिका निभा रहा है। वक्ताओं ने यह भी जोड़ा कि आधुनिक शिक्षा, तकनीक और आर्थिक आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में महिलाएँ जिस तरह से आगे बढ़ रही हैं, संघ परिवार को भी उसी अनुरूप अपनी संरचना और कार्यपद्धति को और खुला बनाना होगा। व्याख्यानमाला में अन्य वरिष्ठ कार्यकर्ताओं और विचारकों ने भी महिला नेतृत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे राष्ट्र सेविका समिति की महिलाएँ दशकों से शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक सुधारों के क्षेत्र में काम कर रही हैं। यह तर्क दिया गया कि यदि 1925 में संघ की नींव रखी गई थी, तो उसी दशक में महिलाओं के लिए समानांतर संगठन की स्थापना इस बात का प्रमाण है कि महिलाओं की उपस्थिति को शुरुआत से ही महत्वपूर्ण माना गया।
1925 से 2025 की यात्रा दिखाती है कि संघ की विचारधारा से प्रेरित महिलाओं ने अपना अलग संगठन खड़ा कर लिया और उसे राष्ट्रीय स्तर तक फैलाया। लक्ष्मीबाई केलकर से लेकर शांथक्का तक यह सिलसिला निरंतर चला है। आज जब भारतीय समाज में महिलाएँ राजनीति, शिक्षा, व्यवसाय और सेना तक में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं, तब यह सवाल और महत्त्वपूर्ण हो जाता है कि—क्या भविष्य में महिलाएँ सीधे संघ की शाखाओं और नेतृत्व में भी शामिल होंगी, या वे हमेशा समानान्तर संगठन तक ही सीमित रहेंगी?संघ की शताब्दी महिलाओं की इस यात्रा का पड़ाव भी है—एक यात्रा जिसमें परम्परा, अ नुशासन, सेवा और नेतृत्व का संगम है, लेकिन समानता और सहभागिता की चुनौती अब भी शेष है।

डॉ प्रियंका सौरभ
स्वतंत्र पत्रकार ये स्तम्भस्कार

“भारत-अमेरिका व्यापार तनाव: फार्मास्यूटिकल सेक्टर को ट्रंप का अप्रत्याशित झटका”

गोंदिया-वैश्विक स्तरपर अंतरराष्ट्रीय व्यापार की दुनियाँ में नीति-निर्माण अक्सर केवल आर्थिक नहीं बल्कि राजनीतिक, रणनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से भी जुड़ा होता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ब्रांडेड और पेटेंटेड दवाओं पर 100 पर्सेंट टैरिफ लगाने की जो घोषणा की है,वह इसी तथ्य का प्रमाण है। यह निर्णय 1 अक्टूबर 2025 से प्रभावी होगा। उल्लेखनीय है कि यह टैरिफ उन कंपनियों पर लागू नहीं होगा जो अमेरिका के भीतर उत्पादन इकाइयां स्थापितकरेंगी। इसका सीधा अर्थ है कि ट्रंप प्रशासन“अमेरिका फर्स्ट”और “मेक इन अमेरिका” की नीति को फार्मास्यूटिकल सेक्टर में और मजबूत करना चाहता है।यह कदम न केवल अमेरिकी उपभोक्ताओं और कंपनियों पर असर डालेगा बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तरपर भी इसकी गूंज सुनाई देगी। किचन कैबिनेट, बाथरूम वैनिटी पर भी 50 पर्सेंट टैरिफ लगाया-ट्रम्प ने किचन कैबिनेट, बाथरूम वैनिटी और उनसे जुड़े सभी सामानों पर भी टैरिफ लगाया है। उन्होंने कहा- ‘हम 1 अक्टूबर 2025 से, किचन कैबिनेट, बाथरूम वैनिटी और उनसे जुड़े सभी सामानों पर 50, पर्सेंट टैरिफ लगाना शुरू कर देंगे। इसके अलावा, हम अपहोल्स्टर्ड फर्नीचर (गद्देदार या फोम वाला फर्नीचर) पर 30 पर्सेंट टैक्स लेंगे।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र ऐसा मानता हूं कि भारत, जो दुनियाँ का सबसे बड़ा जेनेरिक दवा उत्पादक और निर्यातक देश है, इस फैसले से विशेष रूप से प्रभावित होगा क्योंकि अमेरिका उसका सबसे बड़ा बाजार है।हालांकि आदेश में जेनेरिक दवाइयों के बारे में स्पष्ट नहीं है यदि इसके बारे में भी लागू हो जाता है तो निश्चित तौर पर असर पढ़ना निश्चित है क्योंकि,अमेरिका लंबे समय से इस बात पर चिंतित रहा है कि दवाओं की कीमतें उसके घरेलू बाजार में लगातार बढ़ रही हैं। दूसरी ओर, विदेशों से आयातित दवाएं सस्ती और प्रतिस्पर्धी होती हैं, जिससे अमेरिकी कंपनियों का दबाव बढ़ जाता है।ट्रंप की मंशा,स्थानीय उत्पादन बढ़ाना, रोजगार सृजित करना और अमेरिका को आयात पर निर्भरता से मुक्त करना। इस आदेश में राजनीतिक संदेश भी छिपा हुआ है,यह कदम घरेलू मतदाताओं को यह संदेश देता है कि ट्रंप अमेरिकी उद्योग और उपभोक्ताओं के हित में कठोर फैसले लेने से पीछे नहीं हटेंगे।इसमें रणनीतिक दबावयह है कि चीन, भारत और यूरोप जैसे देशों पर यह अप्रत्यक्ष दबाव है कि वे अमेरिका को केवल उपभोक्ता बाजार की तरह न देखें, बल्कि वहां निवेश करें। इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्धजानकारी के सहयोग से इसआर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे, ट्रंप ने भारत पर फोड़ा टैरिफ बम- दवाओं पर 100 पर्सेंट टैरिफ-वैश्विक अर्थव्यवस्था, भारत और अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य पर विश्लेषण।

इसे भी पढ़ें – https://rkpnewsup.com/tauqeer-raza-khan-detained-in-bareilly-clashes-yogi-adityanath-sends-strong-message-on-law-and-order/

साथियों बात अगर हम भारत के फार्मा सेक्टर सेक्टर की करें तो,यह अंतरराष्ट्रीय स्तरपरअपनी सस्ती और गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाओं के लिए जाना जाता है। यह इस तरह प्रभावित होगा कि (1) निर्यात पर सीधा असर- अमेरिका भारत की दवाओं का सबसे बड़ा निर्यातक बाजार है। 2024 में भारत ने अमेरिका को लगभग 8-9 बिलियन डॉलर की दवाइयां निर्यात की थीं। 100 पर्सेंट टैरिफ लगने से यह व्यापार तुरंत प्रभावित होगा (2) कीमत और प्रतिस्पर्धा-भारतीयकंपनियों की दवाएं अमेरिकी उपभोक्ताओं को अब दोगुनी कीमत पर मिलेंगी ,जिससे उनकी प्रतिस्पर्धा कम होगी। (3) निवेश दबाव- भारतीय कंपनियों पर अमेरिका में उत्पादन इकाइयां लगाने का दबाव बढ़ेगा।इससे भारतीय दवा कंपनियों को एफडीआई और मर्जर एंड अक्विजीशन के रास्ते तलाशने पड़ सकते हैं।(4) रोजगार पर असर-भारत में लाखों लोग फार्मा इंडस्ट्री से जुड़े हैं। यदि निर्यात घटा तो उत्पादन और रोजगार दोनों पर दबाव पड़ेगा।
साथियों बात अगर हम भारत को जेनेरिक दवाइयों के एंगिल देखें तो यदि जेनेरिक दवाइयों को छूट रहती है तो भारत को ज्यादा असर नहीं पड़ेगा,भारत जेनेरिक दवाइयाँ अमेरिका को एक्सपोर्ट करने वाला सबसे बड़ा देश है। 2024 में भारत ने अमेरिका को लगभग 8.73 अरब डॉलर (करीब 77 हजार करोड़ रुपए) की दवाइयां भेजीं, जो भारत के कुल दवा एक्सपोर्ट का करीब 31 पर्सेंट था।(1) अमेरिका में डॉक्टर जो प्रिस्क्रिप्शन लिखते हैं, उनमें से हर 10 में से लगभग 4 दवाइयां भारतीय कंपनियों की बनाई होती हैं।(2)एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 में अमेरिका के हेल्थकेयर सिस्टम के 219 अरब डॉलर बचे थे। 2013 से 2022 के बीच यह बचत 1.3 ट्रिलियन थी।(3) भारत की बड़ी फार्मा कंपनियां, जैसे डॉ. रेड्डीज, सन फार्मा, ल्यूपिन सिर्फ जेनेरिक दवाएं ही नहीं बेचती, बल्कि कुछ पेटेंट वाली दवाएं भी बेचती हैं। बाकी भारत अधिगम निर्यात जेनेरिक दवाइयां का ही करता है।
साथियों बात अगर हम ब्रांडेड या पेटेंटेड दवाई और जेनरिक दवाई में अंतर को समझने की करें तो,ब्रांडेड दवाई-(1) यह वो ओरिजिनल दवाई होती है जिसकी खोज किसी फार्मा कंपनी ने बहुत रिसर्च और भारी- भरकम खर्च के बाद की होती है।(2) इसे बनाने वाली कंपनी को एक तय समय (आमतौर पर 20 साल) के लिए पेटेंट अधिकार मिल जाता है।(3) इस दौरान कोई भी दूसरी कंपनी उस फॉर्मूले का इस्तेमाल करके वह दवाई नहीं बना सकती।(4) रिसर्च और डेवलपमेंट पर हुए खर्च को वसूलने के लिए इसकी कीमत बहुत ज़्यादा होती है।
जेनरिक दवाई-(1) यह वो दवाई होती है जो ब्रांडेड दवाई का पेटेंट खत्म होने के बाद बाज़ार में आती है। यह ब्रांडेड दवाई के समान फॉर्मूले का इस्तेमाल करके बनाई जाती है।(2) इसका कोई नया पेटेंट नहीं होता, क्योंकि यह पहले से मौजूद फॉर्मूले की नकल होती है।(3)जेनेरिक दवा बनाने वाली कंपनियों को रिसर्च का खर्च नहीं उठाना पड़ता, इसलिए इसकी कीमत ब्रांडेड दवा के मुकाबले 80 पर्सेंट से 90 पर्सेंट तक कम हो सकती है। अब दो जरूरी बातों को इसमें समझना जरूरी है(1) ब्रांडेड दवाओं पर टैरिफ लगाने का फैसला ट्रम्प ने क्यों लिया?-ट्रम्प ने ब्रांडेड दवाओं पर टैरिफ लगाने का फैसला अमेरिका में दवा उत्पादन को बढ़ाने के लिए लिया है। ट्रम्प का यह कदम उनकी ‘अमेरिका फर्स्ट’ और ‘मेक इन अमेरिका’ नीति का हिस्सा है।ट्रम्प प्रशासन का यह भी मानना है कि दवाओं के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है।महामारी के दौरान यह बात साफ हुई थी कि अगर सप्लाई चेन टूटती है तो अमेरिका में दवाओं की भारी कमी हो सकती है।ब्रांडेड दवाओं पर दबाव डालकर, वे पूरी फार्मा सप्लाई चेन को सुरक्षित करना चाहते हैं।(2) जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ क्यों नहीं लगाया गया?-जेनेरिक दवाएं ब्रांडेड दवाओं से 80 पर्सेंट से 90 पर्सेंट तक सस्ती होती हैं। अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम जेनेरिक दवाओं पर बहुत ज़्यादा निर्भर है। अगर जेनेरिक दवाओं पर भी 100 पर्सेंट टैरिफ लग जाता, तो उनकी कीमत बहुत बढ़ जाती। इससे अमेरिकी नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सेवा बहुत महंगी हो जाती, और यह सीधे तौर पर कंज्यूमर्स कोबहुत अधिक प्रभावित करता।
साथियों बात अगर हम वैश्विक व्यापार पर असर को समझने की करें तो,यह निर्णय केवल भारत तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि पूरी वैश्विक दवा सप्लाई चेन को प्रभावित करेगा।(1) यूरोपीय यूनियन -कई यूरोपीय कंपनियां भी अमेरिका में दवाएं निर्यात करती हैं। टैरिफ के कारण वे भी प्रभावित होंगी।(2) चीन- अमेरिका पहले ही चीन के साथ टकराव की स्थिति में है। अब फार्मा सेक्टर पर यह टैरिफ उसके खिलाफ एक और मोर्चा खोल सकता है।(3) विकासशील देश-अमेरिका में दवाएं महंगी होने का मतलब है कि गरीब देशों तक पहुंचने वाली सस्ती जेनेरिक दवाओं पर भी असर पड़ेगा क्योंकि सप्लाई चैन और प्राइसिंग ग्लोबल स्तर पर प्रभावित होंगी।
साथियों बात अगर हम अमेरिका के उपभोक्ताओं के लिए लाभ या हानि? को समझने की करें तो, ट्रंप प्रशासन दावा करता है कि यह कदम घरेलू उत्पादन बढ़ाकर अमेरिकी उपभोक्ताओं को दीर्घकालीन लाभ देगा।परंतु अल्पकालिक दृष्टिकोण से स्थिति विपरीत हो सकती है लाभ- अमेरिका में नई फैक्ट्रियों के खुलने से रोजगार बढ़ेगा,रिसर्च और इनोवेशन पर भी सकारात्मक असर होगा।हानि-दवाएं तत्काल महंगी हो जाएंगी क्योंकि घरेलू उत्पादन को गति देने में समय लगेगा।गरीब और मध्यमवर्गीय मरीजों को सबसे अधिक कठिनाई होगी।
साथियों बात अगर हम भारत की रणनीतिक प्रतिक्रिया को समझने की करें तो, भारत के लिए यह परिस्थिति चुनौतीपूर्ण तो है,परंतु अवसर भी छिपे हैं।(1)नए बाजारों की तलाश: भारत यूरोप, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और एशिया के अन्य देशों में अपना निर्यात बढ़ा सकता है। (2) द्विपक्षीय समझौते: भारत अमेरिका से इस निर्णय में राहत पाने के लिए कूटनीतिक दबाव बना सकता है, जैसे कि “मेक इन इंडिया” बनाम “मेक इन अमेरिका” का सहयोग मॉडल। (3) घरेलू नवाचार-भारत को केवल जेनेरिक दवाओं तक सीमित न रहकर ब्रांडेड और नवाचारी दवाओं के क्षेत्र में निवेश बढ़ाना होगा।(4) उद्योग का भारत की करें तो पुनर्गठन- बड़े भारतीय समूह अमेरिका में स्थानीय उत्पादन इकाइयां स्थापित कर सकते हैं, जबकि छोटे और मध्यम उद्योग वैकल्पिक बाजारों की ओर रुख करेंगे।
साथियों बात अगर हम अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति क़े आयाम को समझने की करें तो,ट्रंप का यह निर्णय केवल आर्थिक कदम नहीं है, बल्कि इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय राजनीति भी है।भारत-अमेरिका संबंध: हाल के वर्षों में भारत और अमेरिका की रणनीतिक साझेदारी मजबूत हुई है। लेकिन यह निर्णय द्विपक्षीय संबंधों में तनाव ला सकता है। भारत-चीन प्रतिस्पर्धा-भारत इस स्थिति का उपयोग कर सकता है कि चीन की तुलना में अमेरिका को अधिक विश्वसनीय सप्लाई पार्टनर के रूप में खुद को पेश करे।वैश्विक स्वास्थ्य संकट- यदि किसी महामारी जैसी स्थिति आती है, तो इस तरह के टैरिफ वैश्विक सहयोग को कमजोर कर सकते हैं।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का दवाओं पर 100 पर्सेंट टैरिफ लगाने का निर्णय वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक संतुलन को प्रभावित करने वाला कदम है। अमेरिका ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने घरेलू उद्योगों को प्राथमिकता देगा, भले ही इसके लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों और साझेदारियों पर असर क्यों न पड़े।भारत के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है क्योंकि उसका सबसे बड़ा निर्यातक बाजार प्रभावित होगा। हालांकि, भारत अपनी कूटनीतिक और आर्थिक रणनीति के जरिए नए अवसर भी तलाश सकता है। यह फैसला इस बात की भी याद दिलाता है किवैश्विक व्यापार में कोई भी नीति केवल एक देश तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पूरी दुनिया को प्रभावित करती है।

एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

प्रो. यूपी सिंह का निधन, शिक्षा जगत ने खोया मार्गदर्शक

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। गोरक्षपीठ के अनन्य भक्त और महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. उदय प्रताप सिंह का शनिवार को निधन हो गया। प्रो. सिंह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, गोरक्ष प्रांत के पूर्व प्रांत संघचालक भी रहे। उनके निधन से शिक्षा जगत और सामाजिक जीवन को अपूरणीय क्षति पहुँची है।

इसे भी पढ़ें https://rkpnewsup.com/from-digital-to-transport-odisha-takes-a-new-flight-of-development-modi/


प्रो. सिंह वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर के कुलपति पद पर आसीन रहे। इसके अलावा गोरखपुर विश्वविद्यालय के गणित एवं सांख्यिकी विभाग के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और अनुसंधान को दिशा दी। उनके मार्गदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने शिक्षा और जीवन में सफलता प्राप्त की।
शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में उनके योगदान को सदैव याद किया जाएगा। गोरक्षपीठ और सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से उन्होंने जनजागरण, शैक्षिक विकास और राष्ट्रभावना को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई।
प्रो. सिंह के निधन पर गोरक्षपीठ परिवार, शिक्षाविदों और समाज के विभिन्न वर्गों ने गहरा शोक व्यक्त किया है।

निःसंदेह यही कर्म फल हैं

निःसंदेह यही कर्म फल हैं

निसंदेह हम अपने कर्मों की
वजह से ही बीमार पडते हैं,
खानपान में परहेज़ न करना,
समयानुसार वस्त्र न बदलना।

इसे भी पढ़ें – https://rkpnewsup.com/no-permission-to-take-law-into-ones-own-hands-government/

स्वास्थ्य विरोधी हों आदतें,
व्यायाम व आराम न करना,
अपने शरीर का ज़रूरत भर
पूर्ण रखरखाव नहीं करना।

यह सभी अपने ही कर्म हैं,
स्वस्थ होने के लिये उपचार,
अच्छा शुद्ध भोजन खाना,
निःसंदेह यही कर्म फल हैं।

इसे भी पढ़ें – https://rkpnewsup.com/hyderabad-faces-a-deluge-not-a-water-crisis-himayat-sagar-and-osman-sagar-gates-opened/

भोजन पदार्थों में मिलावट,
नक़ली खाद्य पदार्थ का सेवन,
नक़ली दवाइयों का सेवन भी,
कर्म फल के रूप में भोगते हैं।

हमें शक किस बात का रह गया,
समाज की दशा और दिशा भी,
व्यक्ति विशेष के लिए कर्मफल है,
आदित्य जैसी करनी वैसी भरनी है।

डॉ कर्नल आदि शंकर मिश्र
‘आदित्य’

“जब तक तोडूंगा नहीं, छोड़ूंगा नहीं” -निवेदन तोरणे

कुर्ला एल -4 में सिंघम तोरणे की एंट्री से हड़कंप

मुंबई(राष्ट्र की परम्परा)
कुर्ला एल विभाग में एक बार फिर सख़्त कार्रवाई की सुगबुगाहट शुरू हो गई है।
दुय्यम अभियंता निवेदन तोरणे को एल-4 का अतिरिक्त कार्यभार सौंपे जाने के बाद, विभाग के भीतर “सफाई अभियान” जैसी हलचल मची हुई है।
तोरणे का व्हाट्सऐप स्टेटस “जब तक तोडूंगा नहीं, छोड़ूंगा नहीं” अब विभागीय कर्मचारियों और अवैध निर्माण माफियाओं के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

इसे भी पढ़ें – https://rkpnewsup.com/tauqeer-raza-khan-detained-in-bareilly-clashes-yogi-adityanath-sends-strong-message-on-law-and-order/


सूत्रों के अनुसार, प्रभाग 168 क्षेत्र में अवैध गेस्ट हाऊस, होटल और डोर्मेटरी की भरमार हो गई थी, जिस पर पूर्व सहायक अभियंता किरण कुमार अन्नमवार कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर सके।
हाल ही में मानसून सत्र के अधिवेशन में कई जनप्रतिनिधियों ने एल विभाग में फलते-फूलते अवैध गेस्ट हाऊस के मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था, जिसके बाद प्रशासन पर दबाव बढ़ गया था।
अब निवेदन तोरणे के आने के बाद स्थानीय सूत्रों का कहना है कि “जहां तोरणे होते हैं, वहां अवैध निर्माण टिकते नहीं।”
उनकी सख्त छवि और तत्परता के कारण स्थानीय बांधकाम माफिया, भू-माफिया और अवैध व्यवसायिक नेटवर्क में खलबली मच जाती है।
स्थानीय समाजसेवक और शिकायतकर्ता भी अब उम्मीद जता रहे हैं कि “सिंघम तोरणे” के आने से एल-4 में फिर से कानून और मनपा नियमों की सख्त अमलदारी देखी जाएगी।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि “जब तक तोडूंगा नहीं, छोड़ूंगा नहीं” कहने वाले इस अधिकारी की अगली कार्रवाई कब और कहां से शुरू होती है।

“बरेली झड़पों में तौकीर रजा खान हिरासत में, योगी आदित्यनाथ ने कानून-व्यवस्था में कड़ा संदेश दिया”

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)उत्तर प्रदेश पुलिस ने बरेली में शुक्रवार को हुई सांप्रदायिक झड़पों के मामले में मौलवी और इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल के नेता तौकीर रजा खान को हिरासत में लिया है। उनसे इस हिंसा और विरोध प्रदर्शन की घटनाओं के पीछे की वजहों की विस्तार से पूछताछ की जा रही है। इस घटनाक्रम पर राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा कि त्योहारों के मौसम में कभी-कभी कुछ लोग अपनी पुरानी बुरी आदतों को नहीं छोड़ पाते। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब उत्तर प्रदेश में कानून और व्यवस्था बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

इसे भी पढ़ें – https://rkpnewsup.com/no-permission-to-take-law-into-ones-own-hands-government/

योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि बरेली में हुए हालिया उपद्रव में मौलाना तौकीर रजा खान ने भूलवश सत्ता और कानून की सीमाओं को चुनौती दी। राज्य सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए अवरोध और हिंसा को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए। उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि इस तरह के सबक भविष्य में सभी के लिए मिसाल बने और आने वाली पीढ़ियों के लिए दंगा जैसी घटनाओं को रोकने का संदेश दें।

कानून को हाथ में लेने की कोई अनुमति नहीं-सरकार

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)उत्तर प्रदेश के बरेली में शुक्रवार को ‘आई लव मोहम्मद’ के समर्थन में आयोजित विरोध प्रदर्शन हिंसक रूप ले लिया। प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने पथराव किया, जिसके जवाब में पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और कई लोगों को हिरासत में लेना पड़ा। राज्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने स्पष्ट किया कि योगी सरकार में किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं है, और प्रशासन अपनी जिम्मेदारी के अनुसार कार्रवाई करेगा। बरेली के एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि ज़िले के अन्य हिस्सों में जुमे की नमाज़ सुरक्षित रूप से संपन्न हुई, लेकिन कोतवाली इलाके में बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा होकर इस्लामिया ग्राउंड जाने पर अड़े और पुलिस के साथ टकराव किया। अधिकारीयों ने कहा कि घटना में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इसे भी पढ़ें – https://rkpnewsup.com/from-digital-to-transport-odisha-takes-a-new-flight-of-development-modi/

प्रदर्शनकारी आला हज़रत दरगाह और इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल के प्रमुख मौलाना तौकीर रज़ा खान के आवास के बाहर इकट्ठा हुए थे और उनके हाथों में ‘आई लव मोहम्मद’ लिखी तख्तियाँ थीं। प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि हिंसा में सीधे तौर पर कौन शामिल था।

“डिजिटल से लेकर ट्रांसपोर्ट तक — ओडिशा में विकास की नई उड़ान”-मोदी

झारसुगुड़ा (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 सितंबर को ओडिशा के झारसुगुड़ा से राज्य और देश की प्रगति को नई रफ्तार देने वाले 60,000 करोड़ रुपये से अधिक की बहुप्रतीक्षित विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इन योजनाओं में दूरसंचार, रेलवे, स्वास्थ्य सेवा, उच्च शिक्षा, कौशल विकास और ग्रामीण आवास जैसी अहम पहलें शामिल हैं। इस दौरान पीएम मोदी ने 97,500 से अधिक स्वदेशी तकनीक से निर्मित 4G टावरों की स्थापना की घोषणा की, जबकि रेलवे इन्फ्रास्ट्रक्चर के बड़े उन्नयन से ओडिशा और पड़ोसी राज्यों में कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी। ब्रह्मपुर से सूरत तक चलने वाली अमृत भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर उन्होंने देश को तेज, सुलभ और किफायती यातायात का तोहफा भी दिया।

इसे भी पढ़ें – https://rkpnewsup.com/hyderabad-faces-a-deluge-not-a-water-crisis-himayat-sagar-and-osman-sagar-gates-opened/

मुख्य खबर (SEO अनुकूल पुनर्लेखन)
ओडिशा के झारसुगुड़ा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को विकास की नई राह खोलते हुए 60,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि “यह दशक ओडिशा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, अब राज्य तेजी से समृद्धि की ओर बढ़ रहा है।”
प्रमुख घोषणाएं और परियोजनाएं:
दूरसंचार क्षेत्र: स्वदेशी तकनीक से लगभग 97,500 4G टावरों की स्थापना, जिससे डिजिटल कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
रेलवे विकास: ओडिशा और आसपास के राज्यों में रेलवे इन्फ्रास्ट्रक्चर का विस्तार और उन्नयन।
नई ट्रेन सेवा: पीएम मोदी ने ब्रह्मपुर से सूरत (उधना) के बीच अमृत भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर शुरू किया। यह यात्रा को किफायती, आरामदायक और सुरक्षित बनाने के साथ ही पर्यटन और रोजगार को भी बढ़ावा देगी।
BSNL 4G सेवा: प्रधानमंत्री ने BSNL की स्वदेशी 4G सर्विसेज की शुरुआत की, जो डिजिटल इंडिया मिशन को नई ऊंचाई देगी।
ग्रामीण आवास: ओडिशा में 50,000 से अधिक परिवारों को पक्के घरों की स्वीकृति मिली। मोदी ने बताया कि देशभर में अब तक 4 करोड़ से अधिक गरीब परिवारों को आवास उपलब्ध कराया जा चुका है।
सेमीकंडक्टर हब: केंद्र सरकार ने ओडिशा में दो सेमीकंडक्टर यूनिट्स और एक सेमीकंडक्टर पार्क को मंजूरी दी है।
जहाज निर्माण: भारत में बड़े जहाज निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 70,000 करोड़ रुपये का पैकेज घोषित किया गया है। पीएम मोदी ने कहा, “हमारा लक्ष्य है — चिप से लेकर जहाज तक आत्मनिर्भर भारत।”
पीएम मोदी के उद्गार:
“ओडिशा को प्रकृति ने अपार उपहार दिए हैं। अब यह दशक ओडिशा के लिए विकास और समृद्धि का होगा।”
“गरीब, दलित, पिछड़े और आदिवासी परिवारों तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।”
जहाज निर्माण सिर्फ व्यापार ही नहीं, बल्कि तकनीक, राष्ट्रीय सुरक्षा और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ी छलांग है।”

जर्जर विद्युत पोल गिरा, दुर्घटना से बाल-बाल बचे राहगीर

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
शनिवार की सुबह पटेल नगर के मुख्य सड़क के बगल मे खड़ा जर्जर विद्युत पोल सड़क पर गीर गया, दुर्घटना से बाल बाल बचे राहगीर।
स्थानीय लोगो ने बताया की इस मुख्य सड़क के साथ जितने विद्युत पोल लगे है सभी जर्जर हो गए है, और उनपोलो पर तारों का मकड़ जाल फैला हुआ है इसकी शिकायत बिजली विभाग को कई बार किया गया था, किन्तु संबन्धित विभाग ने कोई कार्यवाही नहीं की, जिसका परिणाम आज देखने को मील रहा है कि जर्जर पोल गीर पड़ा। अगर इन जर्ज़र पोलो को नहीं बदला गया तो कभी भी जान माल की हानि हो सकती है।

हैदराबाद में जलसंकट नहीं जलप्रलय: हिमायत सागर-उस्मान सागर के गेट खोले गए

🌧️ भारी बारिश से हैदराबाद में बाढ़ जैसे हालात

मूसी नदी में जलस्तर बढ़ा, 1000 से अधिक लोग राहत शिविरों में स्थानांतरित

हैदराबाद,(राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।
तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद और आसपास के क्षेत्रों में हुई भारी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। मूसी नदी के जलस्तर में खतरनाक वृद्धि के चलते निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए। प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए करीब 1,000 लोगों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों में भेजा, जहां उन्हें भोजन और आवश्यक वस्तुएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं।

इसे भी पढ़ें – https://rkpnewsup.com/the-courts-strong-message-life-imprisonment-for-the-stepfather-in-14-days/

शुक्रवार देर रात से ही कई प्रभावित परिवारों को शहर के अलग-अलग राहत शिविरों में पहुँचाया गया। अधिकारियों के अनुसार, स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
🚍 बस अड्डे में घुसा पानी, सेवाएँ बाधित
राज्य का प्रमुख महात्मा गांधी बस स्टेशन (एमजीबीएस) भी बारिश और बाढ़ के पानी की चपेट में आ गया। इसके चलते बस सेवाओं को तत्काल रोकना पड़ा और यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालना पड़ा।
तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम (टीएसआरटीसी) के प्रबंध निदेशक वी. सी. सज्जनार ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी दी कि एमजीबीएस से चलने वाली सभी बस सेवाएँ अब शहर के अलग-अलग स्थानों से संचालित होंगी। उन्होंने यात्रियों से अपील की कि वे एमजीबीएस परिसर में न जाएँ।
🏞️ हिमायत सागर और उस्मान सागर के गेट खोले गए
भारी वर्षा के चलते हिमायत सागर और उस्मान सागर जलाशयों के गेट खोलने पड़े, जिसके कारण मूसी नदी में जलस्तर और तेजी से बढ़ा। इससे नदी किनारे बसे कई इलाके बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
🏛️ सीएम रेवंत रेड्डी ने समीक्षा की
मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने हालात की उच्चस्तरीय समीक्षा की और अधिकारियों को निर्देश दिए कि नदी किनारे बसे इलाकों में लगातार चौकसी बरती जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में लोगों की सुरक्षा से समझौता न किया जाए और जरूरत पड़ते ही तुरंत उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जाए।
🌩️ मौसम विभाग का अलर्ट
भारतीय मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि 27 सितंबर को तेलंगाना के कई जिलों में भारी बारिश, बिजली गिरने और तेज हवा चलने की संभावना है। लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।
अतिरिक्त शीर्षक (Alternate Headlines)

पकहां में डांडिया नृत्य कर बच्चो ने सबका मन मोहा

बघौचघाट/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)
देवरिया जनपद के पथरदेवा क्षेत्र स्थित टी एस इंटरनेशनल स्कूल पकहां के बच्चो ने शारदीय नवरात्रि पर शानदार डांडिया नृत्य कर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया।यह कार्यक्रम महिला सशक्तिकरण पर आधारित था।जो देर रात तक चलता रहा। जहां
डांडिया नृत्य के माध्यम से महिला सशक्तिकरण का जज्बा दिखा।
कार्यक्रम का आगाज प्रधान संघ अध्यक्ष मुरारी मोहन शाही,थानाध्यक्ष विशाल उपाध्याय एवं तारा देवी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर एवं कन्या पूजन कर किया गया।थानाध्यक्ष विशाल उपाध्याय ने कहा कि डांडिया एक नृत्य ही नहीं बल्कि नारी शक्ति और समाज में उनके योगदान के प्रतीक हैं। ऐसे आयोजन से बालिकाओं में आत्मविश्वास ,उत्साह बढ़ता है।वही डायरेक्टर शिखा शाही ने कहा कि महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप से समान अवसर देना है, ताकि वे अपनी पूरी क्षमता व्यक्त कर सकें और अपने जीवन पर नियंत्रण रख सकें। ऐसे में बेटियां समाज में किसी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं हैं।

इसे भी पढ़े – https://rkpnewsup.com/the-courts-strong-message-life-imprisonment-for-the-stepfather-in-14-days/

इस अवसर पर अनूप शाही,सुंदर देव शाही,डॉ गौतम दास,सद्दाम हुसैन,स्नेहलता,सृष्टि आदि मौजूद रहे।

करेंट लगने से युवक झुलसा हुई मौत

बरहज/देवरिय(राष्ट्र की परम्परा)
रात को एक युवक अपने छत पर सो रहा था, कि रात करीब 2:00 बजे के लगभग उसके छत से गुजर रहे नंगे तार जिसकी चपेट में आने से युवक झुलस गया। आनन-फानन में परिजनों ने इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया जहां पर डाक्टरों ने जांच कर मृत्यु घोषित कर दिया।
थाना क्षेत्र खोरी निवासी लाल बहादुर 30 पुत्र मलई अपने छत पर रात मे सो रहा था, बताया जा रहा है कि उनके छत से नंगा तार गुजर रही है जिसके सम्पर्क में आने से युवक झुलस गया। सआनन फानन मे परिजनों एवं स्थानीय लोगों ने इलाज के लिए siyechsi बरहज पहुंचाया जहां पर डाक्टरों ने जांच कर मृत्यु घोषित कर दिया।
घटना स्थल पर पहुंची पुलिस ने शव का पंचनामा बनवाकर पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज भेज दिया।