Wednesday, July 8, 2026
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अमृतसर पुलिस की बड़ी सफलता: पूर्व कमांडो समेत तीन आतंकी गिरफ्तार, हैंड ग्रेनेड बरामद – दशहरे पर ब्लास्ट की साजिश नाकाम

अमृतसर/पंजाब (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। त्योहारों के बीच आतंकी वारदात की बड़ी साजिश को अमृतसर पुलिस ने बीएसएफ के साथ मिलकर विफल कर दिया। खुफिया इनपुट के आधार पर की गई कार्रवाई में पुलिस ने पूर्व कमांडो धर्मेंद्र समेत तीन आतंकियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से हैंड ग्रेनेड बरामद हुए हैं। जांच में खुलासा हुआ है कि ये आतंकी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के संपर्क में थे और सीमा पार से ड्रोन के जरिए हथियार और ग्रेनेड मंगवाए गए थे।

दशहरे पर धमाके की थी साजिश

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पकड़े गए आरोपियों की योजना दशहरे की रात अमृतसर और आसपास के भीड़-भाड़ वाले इलाकों में ब्लास्ट करने की थी। उनका मकसद त्योहार के मौके पर दहशत फैलाना और राज्य का माहौल खराब करना था। समय रहते की गई इस कार्रवाई से पंजाब को एक बड़ी आतंकी वारदात से बचा लिया गया।

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आईएसआई से जुड़ा नेटवर्क

पुलिस का कहना है कि आईएसआई लगातार पंजाब और सीमावर्ती जिलों में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहा है। ड्रोन के जरिए न सिर्फ हथियार और ग्रेनेड बल्कि नशा तस्करी का सामान भी भेजा जाता है। बरामद ग्रेनेड को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

अधिकारियों ने बताया कि त्योहारों के दौरान राज्यभर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। गिरफ्तार आतंकियों से पूछताछ जारी है और इनके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है। पुलिस का दावा है कि समय रहते कार्रवाई कर एक बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम कर दिया गया है।

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लुधियाना में मूर्ति पूजा के दौरान युवक की हत्या, गोली मारकर उतारा मौत के घाट – परिवार के सामने वारदात

लुधियाना/पंजाब (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। मोती नगर इलाके की फौजी कॉलोनी में गुरुवार देर रात मूर्ति पूजा के दौरान हुई रंजिशनुमा वारदात ने पूरे इलाके को दहला दिया। किराना दुकान चलाने वाले 20 वर्षीय मोनू कुमार की दबंग युवकों ने पहले बेरहमी से पिटाई की और फिर परिवार के सामने गोली मारकर हत्या कर दी। इस दौरान बीच-बचाव करने पहुंचे मोनू के मामा गुड्डू को भी बुरी तरह घायल कर दिया गया। घटना के बाद आरोपी फरार हो गए।

परिवार के सामने चली गोलियां

जानकारी के मुताबिक, पंडाल में डीजे पर डांस को लेकर कहासुनी हुई थी। मोनू ने आरोपियों को रोकने की कोशिश की, जिसके बाद विवाद बढ़ गया। आरोपियों ने पहले मारपीट की और फिर अचानक गोलियां चला दीं। एक गोली मोनू के पेट में लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़ा। स्थानीय लोगों और परिजनों ने उसे अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

प्रयागराज का रहने वाला था मोनू

मूल रूप से उत्तर प्रदेश के प्रयागराज का रहने वाला मोनू लुधियाना में परिवार के साथ रहकर किराना दुकान चलाता था। मृतक की मां सीमा देवी ने आरोप लगाया कि आरोपी युवक नशा तस्करी में शामिल हैं और इसी वजह से मोनू के साथ उनकी पुरानी रंजिश चल रही थी।

पुलिस ने दर्ज किया हत्या का केस

सूचना मिलने के बाद थाना मोती नगर पुलिस और आलाधिकारी मौके पर पहुंचे। थाना मोती नगर के एसएचओ सब इंस्पेक्टर भूपिंदर सिंह ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया है। सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

मैंने भाई को मार दिया

संपत्ति की जंग में भाई बना दुश्मन

संपत्ति की लड़ाई बनी खून-खराबे की वजह, आरोपी गिरफ्तार, घटनास्थल से कट्टा व खोखे बरामद

गया /बिहार(राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।गया जिले के शेरघाटी थाना क्षेत्र के नई बाजार मोहल्ले में शुक्रवार देर रात उस समय सनसनी फैल गई जब संपत्ति विवाद को लेकर चचेरे भाई ने 35 वर्षीय युवक दीपक की गोली मारकर हत्या कर दी। घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी राजेश खुद थाने पहुंचा और पुलिस को बताया कि “मैंने भाई को मार दिया है।” पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए घटनास्थल पर छानबीन की और खून से लथपथ शव बरामद कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
शराब पार्टी बनी खून-खराबे का मंच
जानकारी के मुताबिक, आरोपी ने दीपक को शराब पार्टी में बुलाया और उसी दौरान उस पर ताबड़तोड़ 4 गोलियां दाग दीं। मौके पर ही दीपक की मौत हो गई। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर घटनास्थल से चार खोखे और हत्या में इस्तेमाल किया गया कट्टा बरामद किया है।
गोद लिए बेटे पर पिता की संपत्ति, चचेरे भाई को लगी चुभन
पुलिस जांच में सामने आया है कि हत्या की जड़ संपत्ति विवाद है। करीब 35 साल पहले आरोपी राजेश के चाचा द्वारिका प्रसाद ने शेरघाटी बस स्टैंड से एक लावारिस नवजात को घर लाकर पाला था। उस बच्चे का नाम दीपक रखा गया। द्वारिका प्रसाद और उनकी पत्नी का कुछ वर्ष पहले निधन हो गया। उनकी दो बेटियों की शादी पहले ही हो चुकी थी।

द्वारिका प्रसाद ने जीवनकाल में वसीयत बनाकर अपनी सारी संपत्ति गोद लिए बेटे दीपक के नाम कर दी थी। यही बात राजेश को नागवार गुज़री। उसे उम्मीद थी कि चाचा की संपत्ति में उसका भी हिस्सा होगा। लेकिन सारी जायदाद दीपक को मिलने से राजेश और दीपक के बीच लंबे समय से तनाव चल रहा था।
पुलिस की कार्रवाई
आरोपी राजेश ने हत्या की बात खुद थाने में स्वीकार की। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हत्या का मुख्य कारण संपत्ति विवाद ही है और मामले की जांच जारी है।

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दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान हाई वोल्टेज लाइन की चपेट में आई ट्रॉली, छः लोग झुलसे

गंभीर रूप से घायल वृद्ध गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर, प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था कड़े करने की मांग

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। नवरात्रि समापन पर प्रतिमा विसर्जन का उत्सव गुरुवार को उस समय मातम में बदल गया जब चौक थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत परासखाड़ टोला झुंगवा चौराहे पर 11 हजार वोल्टेज की हाईटेंशन विद्युत लाइन से ट्रॉली टकरा गई। इस हादसे में छः लोग करंट की चपेट में आकर झुलस गए, जिनमें एक की हालत गंभीर बताई जा रही है।
घटना ग्राम पंचायत शेखपुरवा की है, जहां नवरात्रि पर्व पर देवी दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गई थी। गुरुवार को ग्रामीण ट्रैक्टर-ट्रॉली से प्रतिमा विसर्जन के लिए रोहिन नदी के चानकी घाट की ओर जा रहे थे। बताया जा रहा है कि ट्रॉली पर सजी हुई सजावटी पाइप ऊपर से गुजर रही 11 हजार वोल्टेज की लाइन से अचानक छू गई, जिससे ट्रॉली में करंट प्रवाहित होने से हादसा हो गया। जिसमे अंशिका (12 वर्ष) पुत्री संतोष,महिमा (14 वर्ष) पुत्री संतवली,दिव्या (10 वर्ष) पुत्री संतोष,रवीना (17 वर्ष) पुत्री मुराली,इन्नर (65 वर्ष) निवासी शेखपुरवा,अखिलेश गुप्ता (30 वर्ष) निवासी झुंगवा बुरी तरह से झुलस गये। ग्रामीणों ने तुरंत घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया। जहां 65 वर्षीय इन्नर की हालत गंभीर देखते हुए उन्हें डॉक्टरों ने गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया है। अन्य पांच घायलों का इलाज जिला अस्पताल में जारी है।
ग्रामीणों ने बताया कि हादसा इतनी तेजी से हुआ कि जुलूस में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई थी। अचानक करंट लगते ही ट्रॉली में बैठे लोग चीखने लगे और अफरा-तफरी मच गई। हालांकि मौके पर मौजूद लोगों ने साहस और समझदारी दिखाते हुए घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जिससे बड़ी त्रासदी टल गई। स्थानीय लोगों ने इस घटना के बाद गहरी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि त्योहारों और जुलूसों के दौरान बिजली लाइन की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस व्यवस्था नहीं की जाती है। न ही विद्युत विभाग और न ही प्रशासन ने हाईटेंशन लाइन के आसपास से गुजरने वाले जुलूसों पर ध्यान दिया। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि अगले पर्व और जुलूसों के दौरान बिजली आपूर्ति बंद कर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों।घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। फिलहाल घायलों के इलाज की व्यवस्था की जा रही है। वहीं, बिजली विभाग को भी सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर सख्त निर्देश दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।

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“मैनचेस्टर सिनेगॉग हमला: भारत ने जताई कड़ी निंदा, वैश्विक आतंकवाद से लड़ाई में एकजुटता की अपील”

नई दिल्ली/मैनचेस्टर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।
ब्रिटेन के मैनचेस्टर स्थित हीटन पार्क सिनेगॉग में योम किप्पुर की प्रार्थना सभा के दौरान हुआ आतंकी हमला पूरी दुनिया को हिला गया। इस हमले में दो लोगों की मौत हो गई जबकि चार गंभीर रूप से घायल हुए। भारत ने इस जघन्य आतंकी वारदात की कड़ी निंदा की है और इसे वैश्विक आतंकवाद के खतरों की भयावह याद दिलाने वाला बताया है।

विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को बयान जारी कर कहा कि इस कठिन घड़ी में भारत ब्रिटेन के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा – “यह विशेष रूप से दुखद है कि यह हमला अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के दिन हुआ। आतंकवाद की दुष्ट ताकतों से लड़ने के लिए वैश्विक समुदाय को एकजुट होकर निर्णायक कार्रवाई करनी होगी।”

हमलावर की पहचान और पुलिस कार्रवाई

ग्रेटर मैनचेस्टर पुलिस ने बताया कि हमलावर की पहचान 35 वर्षीय सीरियाई मूल के ब्रिटिश नागरिक जिहाद अल-शमी के रूप में हुई। उसने पहले कार से लोगों को कुचला और फिर चाकू से हमला किया। पुलिस ने मुठभेड़ में हमलावर को मार गिराया। शुरुआती आशंका थी कि उसके पास विस्फोटक हैं क्योंकि उसने एक भारी जैकेट पहनी हुई थी, लेकिन बाद में यह गलत साबित हुआ।

पुलिस ने इस आतंकी घटना से जुड़े अपराधों के संदेह में तीन अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया है, जिनमें दो 30 वर्षीय पुरुष और एक 60 वर्षीय महिला शामिल हैं।

ब्रिटिश प्रधानमंत्री का बयान

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे “घृणित” करार दिया। उन्होंने कहा कि यहूदी समुदाय को उनकी आस्था के कारण निशाना बनाया गया, जो अस्वीकार्य है। स्टारमर ने भरोसा दिलाया – “हम यहूदी समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। आने वाले दिनों में ब्रिटेन करुणा, शालीनता और प्रेम से भरा हुआ नजर आएगा। यह देश आपको और आपके परिवार को गले लगाएगा।”

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लद्दाख के सोनम वांगचुक की रिहाई की गुहार – पत्नी गीतांजलि पहुँची सुप्रीम कोर्ट

जलवायु कार्यकर्ता वांगचुक की गिरफ्तारी को बताया अवैध, राष्ट्रपति से भी हस्तक्षेप की अपील


नई दिल्ली/लेह,(राष्ट्र की परम्परा डेस्क)लद्दाख के प्रख्यात पर्यावरणविद् और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी को लेकर देशभर में चिंता गहराती जा रही है। उनकी पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए अपने पति की तत्काल रिहाई की मांग की।
वांगचुक को 24 सितंबर को लद्दाख में हिंसक झड़पों के बाद हिरासत में लेकर 26 सितंबर से राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत राजस्थान की जोधपुर जेल में बंद किया गया है।
गीतांजलि ने याचिका में कहा कि उनके पति की गिरफ्तारी पूरी तरह से अवैध है और उन पर लगाए गए आरोप निराधार हैं। उन्होंने कोर्ट में स्पष्ट किया –
👉 “वांगचुक को पाकिस्तान से संबंध रखने जैसे आरोपों में फंसाया गया है, जबकि उनका पूरा जीवन लद्दाख और भारत की सेवा को समर्पित है।”
राष्ट्रपति से भी की गुहार
याचिका दायर करने से पहले गीतांजलि अंगमो ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मुलाकात कर अपील की थी कि वे मामले में हस्तक्षेप करें और वांगचुक की रिहाई सुनिश्चित कराएं।
उन्होंने राष्ट्रपति को दिए तीन पन्नों के पत्र में लिखा कि उनके पति जनहित के मुद्दों पर काम कर रहे हैं और इसी वजह से उन्हें “जासूसी” जैसे गंभीर आरोपों में फंसाया गया है।
गीतांजलि ने कहा –
👉 “मेरे पति किसी भी तरह देश के लिए खतरा नहीं बन सकते। उन्होंने लद्दाख की धरती और वहाँ के लोगों की सेवा में अपना जीवन लगा दिया है।”
लद्दाख में झड़पों के बाद बढ़ा विवाद
24 सितंबर को लेह में राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की माँग को लेकर विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया था। इस झड़प में चार लोगों की मौत और कई घायल हुए थे। इसी घटना के बाद प्रशासन ने सोनम वांगचुक को हिरासत में लिया।
सवाल – क्या पर्यावरण के लिए आवाज उठाना गुनाह है?
लद्दाख जैसे नाजुक पारिस्थितिकी वाले क्षेत्र में अनियंत्रित विकास कार्यों के खिलाफ वांगचुक की लड़ाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
गीतांजलि अंगमो ने कहा –
👉 “क्या हिमालय और लद्दाख की सुरक्षा के लिए आवाज उठाना अपराध है? उत्तराखंड, हिमाचल और पूर्वोत्तर में हुई त्रासदियाँ इस देश को चेतावनी देती हैं। सरकार को विकास के नाम पर पहाड़ों को बर्बाद नहीं करना चाहिए।”
जनसमर्थन बढ़ता जा रहा
लद्दाख में वांगचुक की गिरफ्तारी के विरोध में लोग लगातार आवाज उठा रहे हैं। कई सामाजिक संगठन और बुद्धिजीवी भी सरकार से बिना शर्त रिहाई की मांग कर रहे हैं।

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बैतालपुर चीनी मिल विवाद पर किसान-मज़दूरों की हुंकार

“जनवरी में होगी किसान-मज़दूर पंचायत, अगर नहीं चली मिल तो बढ़ेगा आंदोलन”

देवरिया/बैतालपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) बैतालपुर चीनी मिल चलाओ संघर्ष समिति ने शुक्रवार को बैठक कर सरकार और प्रबंधन को चेतावनी दी कि यदि बंद पड़ी बैतालपुर चीनी मिल को शीघ्र चालू नहीं किया गया, तो जनवरी माह में बड़े पैमाने पर किसान-मज़दूर पंचायत आयोजित की जाएगी। इस पंचायत के बाद आंदोलन को और व्यापक रूप देने की रणनीति तैयार की जाएगी।

बैठक में किसानों और मजदूरों ने कहा कि बैतालपुर चीनी मिल वर्षों से ठप पड़ी है, जिससे गन्ना किसानों को अपने फसल का उचित मूल्य और समय पर भुगतान नहीं मिल पा रहा है। वहीं, हजारों मजदूर बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। समिति का कहना है कि मिल को चालू करना केवल किसानों का ही नहीं बल्कि क्षेत्र के समग्र विकास का सवाल है।

संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि जब तक मिल शुरू नहीं होगी, तब तक किसान और मजदूर चैन से नहीं बैठेंगे। अगर सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में यह आंदोलन पूर्वांचल से निकलकर प्रदेशव्यापी रूप लेगा।

बैठक में तय किया गया कि दिसंबर माह तक सरकार को समय दिया जाएगा। इसके बाद जनवरी में विशाल पंचायत कर भविष्य की दिशा तय की जाएगी। समिति ने क्षेत्र के सभी जनप्रतिनिधियों से भी अपील की कि वे किसानों और मजदूरों की आवाज को विधानसभा और संसद तक पहुंचाएं।

बैठक में बड़ी संख्या में किसान, मजदूर और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने एक सुर में कहा – “बैतालपुर मिल चालू करो, किसानों-मज़दूरों को न्याय दो।”

प्रमुख बिंदु बैतालपुर चीनी मिल वर्षों से बंद, किसानों-मज़दूरों की बढ़ी परेशानी। संघर्ष समिति ने दी चेतावनी – जनवरी में विशाल पंचायत होगी।आंदोलन को प्रदेशव्यापी बनाने की तैयारी।किसानों ने कहा – गन्ना मूल्य और रोजगार का सवाल जुड़ा है मिल से।

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दशहरा मेले से लौटते समय देवरिया में भीषण सड़क हादसा, 2 युवकों की मौत, 5 घायल

देवरिया/बघौचघाट (राष्ट्र की परम्परा)। दशहरे मेले से घर लौटते समय देवरिया जिले के बघौचघाट थाना क्षेत्र में देर रात एक भीषण सड़क हादसा हो गया। बघौचघाट-पकहा मार्ग पर दो बाइकों की आमने-सामने टक्कर में 2 युवकों की मौके पर ही मौत हो गई और 5 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों को जिला मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है।

हादसे का विवरण:
मलवाबर गांव के समीप पुलिया के पास यह दर्दनाक हादसा हुआ। एक बाइक पर तीन और दूसरी बाइक पर चार युवक सवार थे। तेज रफ्तार में दोनों बाइकों की टक्कर इतनी ज़ोरदार थी कि शिवम (14 वर्ष) पुत्र मनोज निवासी रामनगर और शंभु कुमार (21 वर्ष) पुत्र दिलीप निवासी कोयलसवा खुर्द की मौके पर मौत हो गई।

घायलों की स्थिति:
घायलों में विकास कुमार (17 वर्ष), मुकेश साहनी (18 वर्ष), अमित यादव (18 वर्ष) और दो अन्य शामिल हैं। इनमें चार की हालत गंभीर बताई जा रही है।

पुलिस कार्रवाई:
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को एम्बुलेंस से अस्पताल पहुंचाया। मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया और आगे की जांच शुरू कर दी गई है।

यूएनएचआरसी में पीओके कार्यकर्ताओं ने उठाया पाकिस्तान में जबरन गायब किए जाने का मुद्दा, अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की मांग

जिनेवा (राष्ट्र की परम्परा)। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में पाकिस्तान की किरकिरी एक बार फिर सामने आई है, जब पीओके (पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर) के सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने वहां मानवाधिकार उल्लंघनों पर चिंता जताई और कार्रवाई की मांग की। यह मामला मानवाधिकार एवं शांति वकालत केंद्र द्वारा आयोजित साइड इवेंट में उठाया गया, जिसका शीर्षक था “पाकिस्तान में जबरन गायब किए गए लोगों के लिए आवाज़ उठाना”।

कार्यक्रम में पाकिस्तान और पीओके से जुड़े कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में जबरन गायब किए जाने, जेलों में बंदी बनाने और हत्या के मामलों का हवाला देते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान पर दबाव डालने की अपील की।

मुख्य घटनाक्रम और आरोप:

पश्तून तहफुज मूवमेंट (PTM) के कार्यकर्ता फजल-उर-रहमान अफरीदी ने कहा कि पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में 6,500 पश्तूनों को जबरन गायब किया गया है। इसके अलावा सिंधी और बलूच समुदायों में भी हजारों ऐसे मामले हैं।

पाकिस्तान सरकार पीटीएम को आतंकवादी घोषित कर अत्याचार कर रही है।

पीओजेके में गोलीबारी: निर्वासित कार्यकर्ता नासिर अजीज खान ने बताया कि 27 सितंबर को अवामी एक्शन कमेटी के शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पाकिस्तानी रेंजर्स ने गोली चलाई, जिसमें कई लोग मारे गए। अब तक 10 से अधिक मौतें हुई हैं, सैकड़ों लोग गिरफ्तार और जेलों में यातनाएं झेल रहे हैं।

सिंध से भी आवाज़ उठी: विश्व सिंधी कांग्रेस के कार्यकर्ता कमरान जटोई ने कहा कि सरकार विरोधी आवाज़ उठाने वालों को जबरन उठा लिया जाता है, विशेष रूप से इंडस नदी पर बनाए जा रहे नहर प्रोजेक्ट के विरोधियों को।

अंतरराष्ट्रीय अपील:

ग्लोबल सेंटर फॉर डेमोक्रेटिक गवर्नेंस के अध्यक्ष डॉ. हबीब मिल्लत ने कहा कि जबरन गायब किए जाना एक गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन है और इस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई जरूरी है। इस कार्यक्रम का समापन एक सामूहिक अपील के साथ हुआ, जिसमें अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान पर दबाव डालने, जवाबदेही तय करने और पीओके व अन्य प्रभावित क्षेत्रों में मानवाधिकारों की रक्षा करने की मांग की गई।

RRB JE भर्ती 2025: रेलवे में 2,570 पदों पर जूनियर इंजीनियर समेत कई पदों पर भर्ती, जल्द जारी होगी विस्तृत नोटिफिकेशन

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नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) ने जूनियर इंजीनियर (JE), डिपो मटेरियल सुपरिंटेंडेंट (DMS) और केमिकल एंड मेटलर्जिकल असिस्टेंट (CMA) के कुल 2,570 पदों के लिए भर्ती का शॉर्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। इस भर्ती अभियान की शुरुआत अक्टूबर 2025 के अंत से होगी, और इच्छुक उम्मीदवार आरआरबी की आधिकारिक वेबसाइट rrbapply.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।

आवेदन तिथि:

आवेदन शुरू: 31 अक्टूबर 2025

आवेदन समाप्ति: 30 नवंबर 2025

आधिकारिक नोटिफिकेशन आवेदन प्रक्रिया से पहले जारी किया जाएगा।

पद विवरण और शैक्षणिक योग्यता:

1. जूनियर इंजीनियर (JE) और डिपो मटेरियल सुपरिंटेंडेंट (DMS) — डिप्लोमा या BE/BTech इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस, IT या संबंधित क्षेत्र में।

2. केमिकल एंड मेटलर्जिकल असिस्टेंट (CMA) — स्नातक (ग्रेजुएशन) में भौतिकी और रसायन शास्त्र।

विस्तृत शैक्षणिक योग्यता और पदों का विवरण आगामी विस्तृत अधिसूचना में प्रकाशित किया जाएगा।

आयु सीमा:

1 जनवरी 2026 को उम्मीदवार की आयु 18 से 33 वर्ष के बीच होनी चाहिए। आरक्षित वर्गों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु में छूट मिलेगी।

पद और वेतनमान:

कुल रिक्तियां: 2,570 पद (JE, DMS, CMA शामिल)

वेतन: 7वें वेतन आयोग के अनुसार लेवल-6, मासिक वेतन ₹35,400अन्य भत्ते और रेलवे सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।

चयन प्रक्रिया:

1. CBT-I (ऑनलाइन टेस्ट)

2. CBT-II

3. दस्तावेज सत्यापन

4. मेडिकल टेस्ट

सफल उम्मीदवारों को CBT-II में बुलाया जाएगा, और अंतिम चयन दस्तावेज़ जांच व मेडिकल फिटनेस के बाद होगा।

आरबीआई सर्वे: महंगाई पर जनता की चिंता में कमी, आने वाले महीनों में राहत की उम्मीद

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के ताजा इन्फ्लेशन सर्वे में सामने आया है कि देशवासियों को महंगाई और कीमतों में दबाव पहले के मुकाबले कम महसूस हो रहा है। सितंबर 2025 के इस सर्वे में खाद्य वस्तुओं से लेकर सेवाओं तक लगभग सभी क्षेत्रों में महंगाई की धारणा में कमी देखी गई है।

हालांकि सर्वे में वर्तमान महंगाई की धारणा में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, लेकिन आने वाले महीनों में महंगाई की उम्मीदें कम हुई हैं, जिससे आमजन के लिए राहत की संभावना जगी है।

मुख्य Findings:

वर्तमान महंगाई की धारणा: 7.4% (पिछले सर्वे से 0.2% अधिक)

अगले तीन महीनों में महंगाई की उम्मीद: 8.1% (पहले 8.3%)

एक साल आगे की महंगाई की उम्मीद: 8.7% (पहले 9.0%)

77.8% लोगों ने अगले तीन महीनों में कीमतें बढ़ने की संभावना जताई (पिछली बार 79.5%)

86.8% लोगों का मानना है कि एक साल में कीमतें बढ़ेंगी (पिछली बार 88.1%)

क्षेत्रवार महंगाई अनुभव:

कोलकाता: 10.5% (सबसे ज्यादा)

मुंबई: 8.5%

दिल्ली: 8.0%

आरबीआई का स्पष्टीकरण:
आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि यह सर्वे केवल आम जनता की महंगाई धारणा को दर्शाता है और यह केंद्रीय बैंक की आधिकारिक महंगाई दर नहीं है।

इस सर्वे से संकेत मिलता है कि आने वाले महीनों में महंगाई पर काबू पाने की संभावना है, जिससे आमजन को आर्थिक राहत मिल सकती है।

लुधियाना में टिफिन मांगने पर कहासुनी: नशे में पड़ोसी ने किशोर के सिर में मारी गोली

लुधियाना (राष्ट्र की परम्परा)। लुधियाना के जमालपुर स्थित राम नगर इलाके में एक किशोर की नशे में चूर पड़ोसी द्वारा गोली मारकर हत्या करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। घटना में आरोपी गुलशन ने मामूली विवाद को लेकर हिमांशु (19) के सिर में गोली चला दी। घायल किशोर को परिजनों ने अस्पताल पहुँचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

एसीपी जसविंदर सिंह ने बताया कि हिमांशु और उसका भाई एक सैलून चलाते हैं। आरोपी गुलशन नशे का आदी है और समय-समय पर दुकान में परेशान करता था। इस बार गुलशन ने टिफिन मांगने पर विवाद खड़ा किया और अवैध पिस्तौल से गोली चला दी। घटना के बाद आरोपी फरार हो गया।

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। आरोपी के घर से अवैध हथियार बरामद हुआ है। थाना जमालपुर की एसएचओ इंस्पेक्टर बलविंदर कौर ने बताया कि आरोपी की गिरफ्तारी के लिए व्यापक छापामारी की जा रही है।

इस घटना ने लुधियाना में कानून व्यवस्था और नशे के प्रति गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आज का इतिहास : 3 अक्टूबर

आइए जानते हैं इतिहास के पन्नों में 3 अक्टूबर को दर्ज कुछ प्रमुख घटनाएँ, जन्म व निधन –

महत्वपूर्ण घटनाएँ

1735 – रूस और ऑस्ट्रिया ने तुर्की साम्राज्य के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए।

1866 – अमेरिका में पहला टेलीग्राफ केबल बिछाया गया, जिसने संचार क्रांति की राह खोली।

1906 – भारत में पहली बार सम्पूर्ण भारत का जनगणना आयोग गठित किया गया।

1929 – सर्ब, क्रोएट और स्लोवेनिया का साम्राज्य नया नाम युगोस्लाविया हुआ।

1952 – ब्रिटेन ने अफ्रीका में पहला परमाणु परीक्षण किया।

1977 – पाकिस्तान में जनरल ज़िया-उल-हक़ ने संविधान निलंबित कर देश में आपातकाल लगाया।

1990 – पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी का पुनः एकीकरण हुआ।

2008 – अमेरिका में वित्तीय संकट के बीच 700 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज को मंज़ूरी मिली।

जन्मदिवस

1800 – जॉर्ज बैनक्रॉफ्ट, प्रसिद्ध अमेरिकी इतिहासकार।

1867 – पियरे बोन्नार, फ्रांसीसी चित्रकार।

1897 – लुई आरमां, फ़्रांसीसी इंजीनियर और वैज्ञानिक।

1935 – अर्नेस्ट हेस, जर्मन फुटबॉल खिलाड़ी।

1935 – पेर बैले, प्रसिद्ध स्वीडिश अर्थशास्त्री (नोबेल पुरस्कार विजेता)।

1943 – रॉय हॉर्न, प्रसिद्ध जादूगर।

1951 – क्लाइव ओवेन, ब्रिटिश अभिनेता।

1969 – ग्वेन स्टेफानी, अमेरिकी गायिका।

निधन

1226 – संत फ्रांसिस ऑफ असिसी, ईसाई धर्मगुरु।

1896 – विलियम मॉरिस, इंग्लैंड के प्रसिद्ध कवि और कलाकार।

1929 – गुस्ताव स्ट्रीजमैन, जर्मनी के राजनीतिज्ञ।

1990 – ग्रैहम चैपमैन, ब्रिटिश कॉमेडियन।

2016 – सैयद अली गिलानी, कश्मीर के राजनेता।

विशेष :

आज ही के दिन जर्मनी का एकीकरण (1990) आधुनिक यूरोप के इतिहास का सबसे बड़ा घटनाक्रम माना जाता है।

भारत में आज़ादी से पहले की जनगणना व्यवस्था (1906) ने प्रशासनिक ढाँचे को नई दिशा दी।

ब्रिटेन ने कैसे किया मैसूर पर कब्ज़ा?

3 अक्टूबर 1831 की ऐतिहासिक घटना और उसके दूरगामी परिणाम
भारत का इतिहास विदेशी आक्रमणों और उपनिवेशवाद की लंबी गाथा है। इसी क्रम में ब्रिटेन और मैसूर राज्य के बीच हुए संघर्षों ने दक्षिण भारत की राजनीति और समाज को गहराई से प्रभावित किया। 3 अक्टूबर 1831 का दिन इस दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी दिन ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने मैसूर राज्य पर प्रत्यक्ष कब्ज़ा कर लिया। यह घटना केवल एक राज्य का अधिग्रहण नहीं थी, बल्कि ब्रिटेन के उपनिवेशवादी साम्राज्य की नींव को और मजबूत करने वाला निर्णायक मोड़ साबित हुई। आइए, इस ऐतिहासिक घटना को विस्तार से समझते हैं।
🔹 मैसूर राज्य की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
मैसूर दक्षिण भारत का एक शक्तिशाली राज्य था, जिसकी नींव 14वीं शताब्दी में वोडेयार वंश ने रखी। 18वीं शताब्दी में हैदर अली और उनके पुत्र टीपू सुल्तान के नेतृत्व में यह राज्य एक सैन्य शक्ति के रूप में उभरा।
हैदर अली ने ब्रिटिशों के विरुद्ध फ्रांसीसियों के सहयोग से कई बार चुनौती दी।
टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों को दक्षिण भारत से उखाड़ फेंकने का स्वप्न देखा और मैसूर को आधुनिक हथियारों, प्रशासन और अर्थव्यवस्था से सशक्त किया।
लेकिन 1799 की चौथी आंग्ल-मैसूर युद्ध में श्रीरंगपट्टनम की लड़ाई के दौरान टीपू सुल्तान वीरगति को प्राप्त हुए।
इसके बाद ब्रिटेन ने मैसूर के पुराने वोडेयार वंश को पुनः गद्दी पर बैठा दिया, लेकिन शर्त यह रही कि वे अंग्रेज़ी हुकूमत के अधीन रहेंगे।
🔹 टीपू सुल्तान के बाद मैसूर
टीपू सुल्तान की मृत्यु के बाद मैसूर कमजोर हो चुका था।
अंग्रेजों ने वोडेयार वंश के बालक कृष्णराज वोडेयार तृतीय (Krishnaraja Wodeyar III) को 1799 में गद्दी पर बैठाया।
वास्तविक सत्ता ब्रिटिश रेजीडेंट (Resident) और ईस्ट इंडिया कंपनी के हाथों में आ गई।
वोडेयार शासक नाम मात्र के राजा बन गए, जबकि कर संग्रह, सैनिक व्यवस्था और बाहरी नीतियों पर ब्रिटेन का नियंत्रण था।
🔹 ब्रिटिश हस्तक्षेप और ‘कुप्रशासन’ का बहाना
19वीं शताब्दी के पहले तीन दशक मैसूर के लिए अस्थिर रहे। कृष्णराज वोडेयार तृतीय व्यक्तिगत रूप से सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यों में अधिक रुचि रखते थे।
उन्होंने कला, साहित्य और मंदिरों के विकास पर ध्यान दिया।
किंतु प्रशासनिक और वित्तीय मामलों में उनकी पकड़ कमजोर बताई गई।
ब्रिटिश अधिकारियों ने लगातार यह प्रचार किया कि राजा और उनके मंत्रियों के कारण राज्य में भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता और जनता पर अत्याचार बढ़ रहे हैं।
1820 के दशक तक अंग्रेजी दस्तावेज़ों में “कुप्रशासन” (Misrule) शब्द बार-बार उपयोग किया जाने लगा।
ब्रिटेन का वास्तविक मकसद था मैसूर पर प्रत्यक्ष कब्ज़ा करना ताकि दक्षिण भारत पर उनका प्रभाव स्थायी रूप से मजबूत हो सके।
🔹 आयोग की नियुक्ति और रिपोर्ट
ब्रिटेन ने 1830 में एक आयोग (Commission) गठित किया, जिसने मैसूर राज्य के प्रशासन की जाँच की।
आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि राजा का शासन अक्षम और भ्रष्ट है।
किसानों पर अत्यधिक कर लगाए जा रहे हैं।
राज्य की आय-व्यय व्यवस्था पारदर्शी नहीं है।
यह रिपोर्ट ब्रिटिशों के लिए वह ‘औचित्य’ (justification) बन गई, जिसके आधार पर वे मैसूर की सत्ता सीधे अपने हाथ में लेना चाहते थे।
🔹 3 अक्टूबर 1831 – ब्रिटिश अधिग्रहण का दिन
3 अक्टूबर 1831 को अंग्रेजों ने आधिकारिक रूप से मैसूर की सत्ता अपने हाथों में ले ली।
ईस्ट इंडिया कंपनी ने मैसूर का प्रशासन अपने सीधे नियंत्रण में ले लिया।
राजा कृष्णराज वोडेयार को केवल औपचारिक उपाधि और कुछ राजसी सुविधाएँ दी गईं, लेकिन उन्हें शासन से पूरी तरह अलग कर दिया गया।
कंपनी ने एक ब्रिटिश कमिश्नर को नियुक्त किया, जिसने राज्य का प्रशासन संभाला।
इस तरह वोडेयार वंश का प्रत्यक्ष शासन समाप्त हो गया और मैसूर लगभग आधी सदी तक ब्रिटिश प्रशासकों के अधीन रहा।
🔹 ब्रिटिश प्रशासन के प्रभाव
ब्रिटिश कब्ज़े के बाद मैसूर में कई बड़े परिवर्तन हुए –

  1. राजस्व व्यवस्था
    भूमि कर सीधे ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा वसूला जाने लगा।कर की दरें ऊँची होने के कारण किसानों की स्थिति और खराब हो गई।
  2. प्रशासनिक ढांचा
    ब्रिटिश अधिकारियों ने न्याय, पुलिस और सैन्य व्यवस्था को अपने नियंत्रण में ले लिया।
    स्थानीय अधिकारियों की भूमिका कम कर दी गई।
  3. आर्थिक शोषण
    कपास, रेशम और मसालों जैसे उत्पादों का निर्यात केवल अंग्रेज़ों के लिए लाभकारी बनाया गया।स्थानीय उद्योग-धंधे प्रभावित हुए।
  4. सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव
    ब्रिटिश शिक्षा प्रणाली धीरे-धीरे यहाँ भी लागू की गई।
    पारंपरिक प्रशासनिक और सांस्कृतिक संस्थाएँ कमजोर पड़ीं।
    🔹 मैसूर की जनता की प्रतिक्रिया
    ब्रिटिश कब्ज़े से जनता खुश नहीं थी।
    किसानों पर करों का बोझ बढ़ा।
    स्थानीय जमींदार और अधिकारी अंग्रेजों के अधीनस्थ हो गए।
    सांस्कृतिक स्वायत्तता भी प्रभावित हुई।
    हालाँकि बड़े पैमाने पर विद्रोह नहीं हुआ, लेकिन जनता के भीतर असंतोष लगातार simmer करता रहा।
    🔹 मैसूर का पुनर्स्थापन (1881)
    लगभग 50 वर्षों तक ब्रिटिश प्रशासन के अधीन रहने के बाद परिस्थितियाँ बदलीं।
    1881 में मैसूर पुनर्स्थापन अधिनियम (Mysore Restoration Act) लागू हुआ।
    इसके तहत वोडेयार वंश को पुनः सत्ता सौंपी गई।
    चामराज वोडेयार (Chamarajendra Wodeyar X) को शासक बनाया गया।

यह कदम ब्रिटिशों की ‘फूट डालो और राज करो’ नीति का हिस्सा था, ताकि स्थानीय राजाओं को अपने अधीन रखकर जनता का गुस्सा कम किया जा सके
🔹 मैसूर पर कब्ज़े का ऐतिहासिक महत्व
3 अक्टूबर 1831 की घटना का महत्व कई दृष्टियों से है –

  1. उपनिवेशवादी विस्तार
    यह दिखाता है कि ब्रिटिश सत्ता केवल सैन्य बल से नहीं, बल्कि “कुप्रशासन” के बहाने भी भारतीय राज्यों को हड़पती थी।
  2. राजाओं की कमजोर स्थिति
    वोडेयार वंश का राजा अंग्रेजों के लिए ‘कठपुतली’ बनकर रह गया।भारतीय शासक अंग्रेज़ी रेजीडेंट पर निर्भर हो गए।
  3. दक्षिण भारत पर पकड़
    मैसूर पर कब्ज़े के बाद अंग्रेजों ने दक्षिण भारत में अपनी पकड़ और मजबूत कर ली।
    इससे उन्हें मराठों और निज़ाम पर भी दबाव बनाने में मदद मिली।
  4. आर्थिक लूट
    मैसूर की संपन्नता का बड़ा हिस्सा ब्रिटिश साम्राज्य के खजाने में जाने लगा।
    3 अक्टूबर 1831 को ब्रिटिशों द्वारा मैसूर पर कब्ज़ा भारतीय इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना है। यह केवल सत्ता परिवर्तन नहीं था, बल्कि उपनिवेशवाद की उस नीति का हिस्सा था जिसमें “भारतीयों को उनके ही राजाओं की अक्षमता” का हवाला देकर शोषण किया गया।

मैसूर का अधिग्रहण हमें यह सिखाता है कि विदेशी ताकतें अक्सर अपने हित साधने के लिए स्थानीय कमज़ोरियों और असंतोष का लाभ उठाती हैं। टीपू सुल्तान के बाद जिस मैसूर ने सांस्कृतिक और राजनीतिक रूप से पुनर्निर्माण का प्रयास किया था, वही मैसूर अंग्रेज़ी साम्राज्यवाद की शिकार बन गया।

यह घटना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि में एक बड़ा सबक बनकर सामने आई कि जब तक भारतीय एकजुट होकर विदेशी शासन का विरोध नहीं करेंगे, तब तक वे बार-बार उपनिवेशवादी चालों का शिकार होते रहेंगे।

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🗓️ 3 अक्टूबर 2025 पंचांग (Panchang – Friday)

विक्रम संवत – 2082 (कालयुक्त संवत्सर)
शक संवत – 1947 (विश्वावसु संवत्सर)
माह – आश्विन (शुक्ल पक्ष)
तिथि – एकादशी तिथि 09:46 AM तक, उसके बाद द्वादशी प्रारंभ
वार – शुक्रवार
🌟 नक्षत्र श्रवण 07:01 PM तक, उसके बाद धनिष्ठा
🧘‍♂️ योग सुकर्मा 06:34 AM तक, फिर धृति योग
🔆 करण वणिज 09:46 AM तक उसके बाद विष्टि (भद्रा) 08:35 PM तक फिर बव करण
🌞 सूर्योदय और सूर्यास्त सूर्योदय – 06:25 AM सूर्यास्त – 06:05 PM
सूर्य राशि – कन्या
🌙 चंद्रमा का संचार मकर राशि में पूरे दिन और रात
🌸 तिथियां एकादशी – 02 अक्टूबर 11:51 AM से 03 अक्टूबर 09:46 AM तक
द्वादशी – 03 अक्टूबर 09:46 AM से 04 अक्टूबर 05:09 PM तक
शुभ समय (Shubh Muhurat)
अभिजीत मुहूर्त – 11:51 AM – 12:38 PM
ब्रह्म मुहूर्त – 04:48 AM – 05:36 AM
अमृत काल – 09:04 AM – 10:36 AM
अशुभ समय (Ashubh Kaal)
राहुकाल – 10:46 AM – 12:15 PM
यमगण्ड – 03:11 PM – 04:39 PM
कुलिक काल – 07:52 AM – 09:20 AM
दुर्मुहूर्त – 08:53 AM – 09:40 AM एवं 12:38 PM – 01:25 PM
🔆 चौघड़िया (दिनकाल)
उद्बेग – 06:25 AM – 07:52 AM
चर – 07:52 AM – 09:20 AM
लाभ – 09:20 AM – 10:46 AM
अमृत – 10:46 AM – 12:15 PM
काल – 12:15 PM – 01:43 PM
शुभ – 01:43 PM – 03:11 PM
रोग – 03:11 PM – 04:39 PM
उद्बेग – 04:39 PM – 06:05 PM

3 अक्टूबर 2025 शुक्रवार को पापांकुशा एकादशी व्रत सम्पन्न होगा। यह दिन व्रत-पूजन और धार्मिक कार्यों के लिए श्रेष्ठ रहेगा। द्वादशी प्रारंभ होते ही दान-पुण्य एवं पूजा का महत्व और अधिक बढ़ जाएगा। राहुकाल व यमगण्ड के समय में नए कार्य से बचना चाहिए।

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