Wednesday, July 8, 2026
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दिल्ली यौन शोषण मामला: स्वामी चैतन्यानंद को 14 दिन की न्यायिक हिरासत, हुए ये बड़े खुलासे


दिल्ली के वसंत कुंज यौन शोषण मामले में गिरफ्तार आरोपी स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती को आज कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। आरोपी की पांच दिन की पुलिस रिमांड आज (शुक्रवार) को खत्म हो रही थी, जिसके बाद पुलिस ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत की मांग की, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
दिल्ली पुलिस फिलहाल आरोपी स्वामी से मामले की गहन पूछताछ कर रही है। स्वामी चैतन्यानंद पर यौन शोषण के अलावा जालसाजी और फर्जी नंबर प्लेट लगाने के दो अलग-अलग मामले भी दर्ज हैं।
ऐसे पकड़ा गया था चैतन्यानंद

  • गिरफ्तारी: दिल्ली के वसंत कुंज स्थित श्री शारदा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन मैनेजमेंट-रिसर्च की 17 छात्राओं के यौन उत्पीड़न के आरोपी स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती उर्फ पार्थसारथी को दिल्ली पुलिस ने 27 सितंबर की रात आगरा से गिरफ्तार किया था।
  • स्थान: आरोपी को आगरा, उत्तर प्रदेश के होटल फर्स्ट ताजगं से पकड़ा गया था।
  • बड़े खुलासे और जांच में नए मोड़
  1. छात्राओं संग अल्मोड़ा में रुका था स्वामी:
    पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी स्वामी चैतन्यानंद उर्फ पार्थ सारथी उत्तराखंड के अल्मोड़ा के एक होटल में कुछ छात्राओं के साथ रुका था। बाबा के खिलाफ सबूत जुटाने अल्मोड़ा पहुंची पुलिस टीम ने होटल स्टाफ से भी पूछताछ कर इसकी पुष्टि की है।
  2. छात्राओं पर योग करते तस्वीरें डालने का था दबाव:
  • पुलिस को चैतन्यानंद द्वारा बनाए गए एक व्हाट्सएप ग्रुप की जानकारी मिली है।
  • इस ग्रुप पर छात्राओं को योग करते हुए तस्वीरें डालना अनिवार्य था।
  • पुलिस को चैट मिली है, जिसमें आरोपी उन तस्वीरों पर अनुचित और अश्लील टिप्पणियां करता था।
  • विरोध दबाना: यदि कोई छात्रा विरोध करती थी, तो संस्थान में कार्यरत वार्डन उनकी आवाज को दबा देती थीं।
  • तीन वार्डन गिरफ्तार:
  • इस गंभीर मामले में बाबा की हरकतों पर पर्दा डालने और छात्राओं के विरोध को दबाने के आरोप में पुलिस ने संस्थान की तीन वार्डन को भी गिरफ्तार कर लिया है। दिल्ली पुलिस मामले से जुड़े सभी पहलुओं पर जांच कर रही है और जल्द ही चार्जशीट दाखिल कर सकती है।

भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत, वैश्विक स्थिरता का भरोसा बनी: RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि भारत की मैक्रो-इकोनॉमिक स्थिति मजबूत बनी हुई है और देश एक अस्थिर वैश्विक परिदृश्य में आर्थिक स्थिरता का भरोसा बनकर उभरा है।

वे शुक्रवार को आयोजित कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव 2025 में बोल रहे थे।

कम मुद्रास्फीति और मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार ने बढ़ाई ताकत

गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि भारत की मजबूती का आधार है—

नियंत्रित मुद्रास्फीति (Inflation)

मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves)

सीमित चालू खाता घाटा (Current Account Deficit)

और बैंकों व कॉरपोरेट्स की सुदृढ़ बैलेंस शीट।

सरकार और नियामक संस्थाओं के प्रयासों का नतीजा

RBI गवर्नर ने कहा कि यह उपलब्धि सरकार, नीति-निर्माताओं, नियामकों और वित्तीय संस्थाओं के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है।

उन्होंने आगे कहा कि हाल की वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था लचीले विकास और स्थिरता के बीच संतुलन बनाए हुए है। यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।

देवरिया का बस स्टेशन बना सवाल: तीन साल बाद भी वादे अधूरे

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। जनता की उम्मीदें और नेताओं के वादे—दोनों के बीच का फासला लगातार बढ़ता जा रहा है। देवरिया का सुरक्षित बस स्टेशन तीन साल पहले तोड़ दिया गया था। कहा गया था कि उसकी जगह एक आधुनिक मॉडल बस स्टेशन बनाया जाएगा। लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी न तो निर्माण शुरू हुआ, न ही योजना पर कोई स्पष्ट जानकारी आमजन तक पहुँच पाई।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुराना बस स्टेशन तो “कभी भी गिर सकता है” कहकर गिरा दिया गया, लेकिन नया मॉडल स्टेशन कहाँ से आ रहा है और कहाँ तक पहुँचा, इसकी जानकारी न तो प्रशासन देना चाहता है और न ही नेता जी के करीबी।

इस बीच, जब भी भाजपा के प्रभारी मंत्री देवरिया दौरे पर आते हैं, तो छोटे-बड़े नेता गुलदस्ता लेकर स्वागत करने और उनके साथ तस्वीर खिंचवाने में सबसे आगे रहते हैं। इन तस्वीरों को सोशल मीडिया पर साझा कर खुद को “नेता जी का करीबी” साबित करने की होड़ लगी रहती है।
जनता के सवाल
लेकिन जनता पूछ रही है—तीन साल से परिवहन मंत्रालय का जिम्मा संभाल रहे प्रभारी मंत्री ने देवरिया और आसपास के क्षेत्रों के लिए कौन-सा ठोस काम किया?
क्या विकास केवल सोशल मीडिया पोस्ट और फोटो तक ही सीमित रहेगा?
क्या हुआ तेरा वादा, वो कसम, वो इरादा?
जमीनी हकीकत

लोगों का कहना है कि विकास का शोर केवल पोस्टर, बैनर और सोशल मीडिया पर सुनाई देता है, जबकि धरातल पर हालात जस के तस हैं।
देवरिया सहित पूरे पूर्वांचल के यात्री और आमजन अब यह जानना चाहते हैं कि क्या कभी यह वादा पूरा होगा, या फिर यह मुद्दा भी चुनावी वादों और नेताओं की फोटो पॉलिटिक्स तक ही सीमित रह जाएगा।

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मिशन शक्ति की गूंज: विजय लक्ष्मी बनीं एक दिन की प्राचार्य

डायट महराजगंज में बेटियों को मिला नेतृत्व का अवसर,आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की दिशा में नई पहल

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। महिलाओं को सशक्त बनाने और बेटियों में नेतृत्व क्षमता विकसित करने की दिशा में चल रहे मिशन शक्ति अभियान के तहत डायट महराजगंज में एक ऐतिहासिक पहल हुई।
डीएलएड बैच 2024 की प्रशिक्षु विजय लक्ष्मी उपाध्याय, सुपुत्री संजय उपाध्याय, ग्राम पंचायत बूढ़ा डीह, विकासखंड निचलौल निवासी को एक दिन के लिए प्रतीकात्मक प्राचार्य बनाया गया।
इस अवसर पर प्राचार्य सत्येंद्र सिंह ने प्रशिक्षुओं के बीच से विजय लक्ष्मी का चयन किया। चयन का उद्देश्य था छात्राओं को यह अनुभव कराना कि जब जिम्मेदारी बड़ी हो,तो उसका निर्वहन कैसे किया जाता है और नेतृत्व का व्यवहारिक प्रशिक्षण किस प्रकार मिलता है।
विजय लक्ष्मी उपाध्याय ने बताया कि एक दिन के लिए प्राचार्य बनना मेरे लिए गौरव की बात है। मैंने सीखा कि नेतृत्व करते समय किस प्रकार निर्णय लिए जाते हैं और प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी कितनी अहम होती है। भविष्य में मैं एक सफल शिक्षिका बनकर समाज और देश की सेवा करना चाहती हूं। उन्होंने कार्यवाहक प्राचार्य के रूप में विभिन्न पत्रावलियों का अवलोकन भी किया, प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन किया और शिक्षण-प्रशिक्षण व्यवस्था की बारीकियों को समझा।
यह पहल सिर्फ एक दिन की प्रतीकात्मक जिम्मेदारी नहीं थी, बल्कि यह बेटियों को यह एहसास दिलाने का प्रयास था कि वे समाज की हर बड़ी से बड़ी जिम्मेदारी निभाने में सक्षम हैं।
मिशन शक्ति अभियान का यही उद्देश्य है कि महिलाएं आत्मनिर्भर बनें, नेतृत्व की राह पर आगे बढ़ें और शिक्षा के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में अपनी छाप छोड़ें।
डायट महराजगंज में हुई यह अनूठी पहल पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गई। ग्रामीण पृष्ठभूमि से आई विजय लक्ष्मी ने यह साबित किया कि अगर अवसर मिले तो बेटियां किसी भी जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा और दक्षता के साथ निभा सकती हैं।
इस दौरान प्राचार्य सत्येंद्र सिंह समेत प्रवक्ता आशीष कुमार मौर्य सुजीत चौहान पूजा चौधरी अरुण मिश्रा सूरज प्रकाश मिश्रा दिव्या गुप्ता आदि मौजूद रहे। सभी ने विजयलक्ष्मी के आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता की सराहना की।

मलसी चौराहे पर भक्ति गीतों पर रात भर झूमते रहे श्रद्धालु

बघौचघाट/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)
विकास खंड पथरदेवा क्षेत्र के मलसी चौराहा पर जय मां शेरावाली क्लब द्वारा शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर गुरुवार की रात भगवती जागरण का आयोजन किया गया।जिसमें शामिल कलाकारों की जीवंत प्रस्तुति देखकर उपस्थित श्रद्धालुओं ने रात भर झूमते रहे। भगवती जागरण का आगाज मां दुर्गा की पूजन करके किया गया।बिहार गोपालगंज कॉमेडी स्टार सुनील यादव की टीम के कलाकारों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुति से कार्यक्रम का आगाज किया।इस दौरान कॉमेडी ,गायक सुनील यादव टीम द्वारा मां दुर्गा के भजन से आगाज तेरा जगराता है मां.., तूने मुझे बुलाया शेरावालीये.., भर दे झोली मैया भोली.., समेत अनेकों पारंपरिक भक्ति गीत प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।इसके साथ ही कार्यक्रम के बीच-बीच में उक्त कलाकारों द्वारा शिव तांडव की मनमोहक झांकी प्रस्तुत की गई। इस दौरान जगराता में जुटे हजारों महिला पुरुष श्रद्धालूगण भाव विभोर हुए। कार्यक्रम का समापन उक्त कलाकारों ने मां दुर्गा की आरती मां शेरावाली तेरा शेर आ गया…के साथ संपन्न किया।इस दौरान आयोजक कमलेश मद्धेशिया आयोजक समिति सदस्य विशाल गुप्ता,अंकित शर्मा,पंकज राय, विवेक राय,रवि मद्धेशिया,सत्येंद्र,विकास यादव, चंद्र भूषण कुशवाहा,अभिषेक मद्धेशिया,नंदू मद्धेशिया,आनंद यादव,बृजेश पांडेय,शंभू यादव आदि मौजूद रहे।

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गया जी में पूजा पंडाल पर डांस कर रहे युवक की गोली मारकर हत्या, बहन की गोद में तोड़ा दम

गया/बिहार (राष्ट्र की परम्परा)। दुर्गा पूजा के दौरान गया जिले में बड़ा हादसा हो गया। मुफस्सिल थाना क्षेत्र के भुसुंडा में पूजा पंडाल के पास डांस कर रहे 19 वर्षीय रोहित कुमार को अपराधियों ने गोली मार दी। गोली सीधे सीने में लगी, जिससे युवक की मौके पर ही मौत हो गई।

बहन की गोद में थमी सांस

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गुरुवार देर रात करीब दो बजे रोहित अपने दोस्तों के साथ घर के पास पंडाल में डांस कर रहा था। तभी अपराधियों ने अचानक गोली चला दी। गोली लगते ही रोहित जमीन पर गिर पड़ा।
शोर सुनकर उसकी बहन प्रियंका शेखर भी वहां पहुंची और भाई का सिर अपनी गोद में रखा। लेकिन अस्पताल ले जाने से पहले ही रोहित ने दम तोड़ दिया।

परिजनों ने मोहल्ले के युवक पर लगाया आरोप

मृतक के परिजनों ने मोहल्ले के ही युवक मोहित कुमार पर हत्या का आरोप लगाया है। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने आरोपियों की छोड़ी हुई बाइक को तोड़फोड़ कर क्षतिग्रस्त कर दिया।

पुलिस की कार्रवाई

सूचना मिलते ही मुफस्सिल थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और घटनास्थल से आरोपियों की बाइक जब्त कर ली।
थाना प्रभारी ने कहा कि जांच जारी है और जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

इलाके में दहशत

गौरतलब है कि महज दो दिनों के भीतर गया जिले में यह तीसरी हत्या है। लगातार हो रही घटनाओं से इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल है।

उटंगन नदी हादसा: मूर्ति विसर्जन के बाद स्नान करने उतरे युवक डूबे, अब तक पांच शव बरामद

आगरा (राष्ट्र की परम्परा)। खेरागढ़ के पास उटंगन नदी में गुरुवार को बड़ा हादसा हो गया। मां दुर्गा की मूर्ति विसर्जन के बाद स्नान करने उतरे 13 युवक नदी के गहरे गड्ढे में फंस गए। इनमें से कई युवक बाहर नहीं निकल सके। अब तक पांच लाशें बरामद की जा चुकी हैं, जबकि बाकी की तलाश जारी है।

कैसे हुआ हादसा?

गांव कुसियापुर डूंगरवाला के प्रत्यक्षदर्शी आकाश ने बताया कि नदी में अचानक शोर मचा। तीन युवक डूब रहे थे, जिन्हें बचाने के लिए रस्सा डालकर प्रयास किया गया। एक युवक को बचा लिया गया लेकिन बाकी गहरे पानी में समा गए।
उन्होंने कहा कि नदी में गहरा गड्ढा था, जिसका किसी को अंदाजा नहीं था। इसी वजह से युवक भंवर में फंसते चले गए।

परिजनों का दर्द

प्रत्यक्षदर्शी मुकेश ने बताया कि उसका छोटा भाई किशन सिंह और चाचा का बेटा भी डूब गया। मूर्ति विसर्जन के बाद सभी युवक स्नान करने नदी में उतरे थे। एक-एक कर कई लोग डूबते गए और उन्हें बचाने की कोशिश में अन्य युवक भी पानी में समा गए।

पुलिस ने पहले दी थी चेतावनी

डूबे हुए करण के भाई ने बताया कि वे सभी पहले विसर्जन के लिए पुल पर पहुंचे थे। उस समय पुलिसवालों ने उन्हें वहां नहाने से मना किया। इसके बाद सभी युवक करीब 300 मीटर दूर दूसरे घाट पर चले गए और वहीं हादसा हो गया। कुछ ही देर बाद नदी किनारे बचाओ-बचाओ की चीखें गूंज उठीं।

मौत का मंजर

गांव वालों का कहना है कि हादसा इतना अचानक हुआ कि लोग सिर्फ चीखें सुनते और युवकों को डूबते देखते रह गए। जब तक पुलिस और गोताखोर पहुंचे, तब तक देर हो चुकी थी।

70 साल के दूल्हे की शादी के अगले दिन मौत, 35 साल की दुल्हन बनी विधवा; पोस्टमार्टम में बड़ा खुलासा

जौनपुर/उत्तर प्रदेश (राष्ट्र की परम्परा)। जौनपुर जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां 70 वर्षीय बुजुर्ग सगरू राम ने 35 साल की महिला मनभावती से शादी की, लेकिन सुहागरात उनकी आखिरी रात साबित हुई। शादी के अगले ही दिन अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और तड़के उनकी मौत हो गई।

पोस्टमार्टम में खुलासा – ब्रेन स्ट्रोक से मौत

परिवार की तहरीर पर पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया। रिपोर्ट में सामने आया कि बुजुर्ग दूल्हे की मौत सीवीए (Cardio Vascular Accident) यानी ब्रेन स्ट्रोक से हुई थी। प्रभारी निरीक्षक प्रवीण कुमार यादव ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम संस्कार कराया गया।

35 वर्षीय दुल्हन के तीन बच्चे

जानकारी के अनुसार, सगरू राम की पहली पत्नी की एक साल पहले मौत हो चुकी थी। संतान न होने की वजह से उन्होंने दूसरी शादी करने का फैसला लिया।
गांव के लोगों की राय पर उन्होंने 35 साल की मनभावती से विवाह किया। मनभावती पहले से ही विधवा थीं और उनके दो बेटियां व एक बेटा है। उनके पति की सात साल पहले ब्रेन हैमरेज से मौत हो गई थी।

मंदिर में की थी शादी, वीडियो वायरल

सोमवार को सगरू राम और मनभावती ने मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से शादी की थी। शादी का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
वीडियो में दोनों खुशी-खुशी जयमाल करते और सिंदूर भरते नजर आते हैं। पत्नी उनके चरण स्पर्श करती है तो वे आशीर्वाद भी देते दिखते हैं।

अचानक बिगड़ी तबीयत

शादी के अगले दिन भोर में बुजुर्ग दूल्हे की तबीयत बिगड़ गई। बताया जाता है कि उनकी गर्दन टेढ़ी हो गई थी। पड़ोसियों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

गांव में चर्चा का विषय

70 साल की उम्र में शादी और फिर शादी के अगले ही दिन मौत का मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर भी यह खबर और शादी का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।

ऑपरेशन सिंदूर पर IAF प्रमुख का बड़ा खुलासा: भारत ने मार गिराए PAK के 5 लड़ाकू विमान

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने गुरुवार को कहा कि ऑपरेशन सिंदूर हाल के वर्षों की सबसे महत्वपूर्ण सैन्य कार्रवाई रही। उन्होंने खुलासा किया कि इस ऑपरेशन के दौरान भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के पांच लड़ाकू विमान (F-16 और JF-17) मार गिराए।

पाकिस्तान को भारी नुकसान

एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के कई अहम ठिकानों पर हमला किया गया। इनमें शामिल हैं:

चार रडार स्टेशन

दो कमांड एवं कंट्रोल सेंटर

दो रनवे

तीन हैंगर

भारतीय कार्रवाई में पाकिस्तान के कम से कम 4-5 लड़ाकू विमान तबाह हुए, जिनमें संभवतः F-16 भी शामिल थे। इसके अलावा एक SAM (Surface-to-Air Missile) प्रणाली भी नष्ट की गई।

300 किलोमीटर भीतर तक की मार

IAF प्रमुख ने बताया कि भारतीय वायुसेना ने दुश्मन के क्षेत्र में 300 किलोमीटर तक लंबी दूरी के लक्ष्यों को भेदा। उन्होंने कहा,
“हमारे पास मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम है, जिसने पूरे हालात को बदल दिया। हमने पाकिस्तान की गहराई तक जाकर हमला किया और उनकी गतिविधियों पर रोक लगा दी।”

एस-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम को लेकर सवाल पर उन्होंने सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा, लेकिन यह जरूर बताया कि यह प्रणाली भारतीय सुरक्षा के लिए बेहद कारगर साबित हुई है।

‘दुनिया को भारत से सीखने की जरूरत’

ऑपरेशन सिंदूर पर एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों को साफ निर्देश दिए गए थे और लक्ष्य हासिल होने के बाद ऑपरेशन को आगे नहीं बढ़ाया गया। उन्होंने कहा,
“यह इतिहास में दर्ज होगा कि हमने साफ उद्देश्य के साथ युद्ध लड़ा और मिशन पूरा होने के बाद तुरंत रोक दिया। आज दुनिया में दो बड़े युद्ध चल रहे हैं, लेकिन हमने युद्धविराम उसी समय स्वीकार किया जब दुश्मन ने हमसे इसकी मांग की। यह दुनिया के लिए एक सबक है।”

तीनों सेनाओं का तालमेल

IAF प्रमुख ने यह भी बताया कि ऑपरेशन सिंदूर तीनों सेनाओं (थलसेना, नौसेना और वायुसेना) के तालमेल का प्रतीक था। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अब ‘सुदर्शन चक्र’ वायु रक्षा प्रणाली पर काम कर रहा है, जो देश की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाएगा।

हिमगिरी देश की सबसे लंबी दूरी तय करने वाली ‘जीवंत धरोहर’

3 अक्टुबर 1984 का ऐतिहासिक सफर की हुई थी शुरुआत

राष्ट्र की परम्परा डेस्क भारत अपनी विविधता, संस्कृति और भौगोलिक विस्तार के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। दक्षिण के सागर तट से लेकर उत्तर के बर्फीले पहाड़ों तक की यात्रा यदि कोई रेलगाड़ी सबसे सुंदर तरीके से करवाती है, तो वह है हिमसागर एक्सप्रेस। 1984 में भारतीय रेल के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ा, जब इस ट्रेन को देश की सबसे लंबी दूरी तय करने वाली एक्सप्रेस के रूप में शुरू किया गया। यह न केवल एक साधारण रेलगाड़ी है, बल्कि भारत की एकता, विविधता और भौगोलिक सुंदरता की चलती-फिरती तस्वीर भी है।
शुरुआत की कहानी: 1984 का ऐतिहासिक सफर
1984 में भारतीय रेल ने हिमसागर एक्सप्रेस को जनता के लिए शुरू किया। इसका मकसद केवल एक नई ट्रेन चलाना नहीं था, बल्कि देश के एक सिरे को दूसरे सिरे से जोड़ना था। कन्याकुमारी, जिसे “भारत का अंतिम छोर” कहा जाता है, से लेकर जम्मू तवी, जो कश्मीर के द्वार के रूप में प्रसिद्ध है — इन दोनों को जोड़कर भारतीय रेल ने एक तरह से उत्तर से दक्षिण को एक सूत्र में पिरो दिया।
इस ट्रेन ने उस दौर में यात्रियों को यह अनुभव कराया कि भारत वास्तव में कितना विशाल और विविधताओं से भरा हुआ है।
मार्ग और दूरी: हजारों किलोमीटर की जीवन यात्रा
हिमसागर एक्सप्रेस का मार्ग लगभग 3,715 किलोमीटर लंबा है, जो भारत की सबसे लंबी दूरी तय करने वाली यात्री ट्रेन बनाता है। यह यात्रा कन्याकुमारी (तमिलनाडु) से शुरू होकर जम्मू तवी (जम्मू-कश्मीर) पर समाप्त होती है।
इस दौरान ट्रेन 12 राज्यों से होकर गुजरती है:
तमिलनाडु,केरल,कर्नाटक,महाराष्ट्र,मध्यप्रदेश
उत्तर प्रदेश,दिल्ली,हरियाणा,पंजाब,और अंततः जम्मू-कश्मीर।
ट्रेन अपने रास्ते में 60 से अधिक स्टेशनों पर रुकती है और यात्रियों को विविध संस्कृति, भाषा, भोजन और पहनावे की झलक दिखाती है।
समय और अनुभव
हिमसागर एक्सप्रेस को अपना पूरा सफर तय करने में लगभग 70 से 72 घंटे लगते हैं। यह ट्रेन सप्ताह में एक बार चलती है, लेकिन इसका इंतजार यात्रियों को बड़ी बेसब्री से रहता है।
इसका अनुभव केवल यात्रा का नहीं, बल्कि भारत के विशाल भूगोल और सांस्कृतिक विविधता को देखने का भी है। समुद्र तट की ठंडी हवाओं से लेकर दिल्ली की हलचल और फिर जम्मू की पहाड़ी ठंडक तक — हर यात्री को अलग-अलग मौसम और परिदृश्य देखने का अवसर मिलता है।
हिमसागर एक्सप्रेस क्यों है खास? सबसे लंबी दूरी की ट्रेन – यह भारत में एकमात्र यात्री ट्रेन है, जो समुद्र तट से बर्फीले पहाड़ों तक की यात्रा कराती है।

  1. एकता का प्रतीक – देश के दक्षिणी छोर को उत्तरी छोर से जोड़कर यह ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत करती है।
  2. आर्थिक और सामाजिक महत्व – लाखों यात्री, खासकर लंबी दूरी के प्रवासी और सैनिक परिवार, इस ट्रेन पर निर्भर रहते हैं।
  3. पर्यटन को बढ़ावा – रास्ते में आने वाले अनेक धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
    यात्रा के दौरान दृश्य और अनुभव
    कन्याकुमारी का तटीय सौंदर्य – यहां से यात्रा शुरू होते ही समुद्री लहरें और सूर्योदय का मनमोहक दृश्य मिलता है।
    केरल की हरियाली – नारियल के पेड़, बैकवाटर और धान के खेत हर यात्री का मन मोह लेते हैं।
    महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश का औद्योगिक क्षेत्र – यहां से गुजरते हुए भारत की आर्थिक गतिविधियों की झलक मिलती है।
    दिल्ली और उत्तर भारत का रंग – राजधानी का हलचल भरा जीवन, पंजाबी संस्कृति और आगे हिमालय की ओर बढ़ती ठंडक का अनुभव अविस्मरणीय होता है।
    जम्मू की धरती – यात्रा का अंतिम पड़ाव, जहां बर्फ से ढके पहाड़ और धार्मिक महत्व की झलक देखने को मिलती है।
    यात्रियों के लिए खास सुविधा
    हिमसागर एक्सप्रेस को लंबी दूरी की वजह से यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें
    स्लीपर क्लास,एसी 3-टियर,एसी 2-टियर,एसी 1-टियर,की सुविधाएं मौजूद रहती हैं।
    साथ ही, कैटरिंग सेवाओं और स्टेशन पर उपलब्ध खाने-पीने की विविधता इस यात्रा को और भी यादगार बना देती है।
    भारत की एकता का संदेश
    हिमसागर एक्सप्रेस केवल ट्रेन नहीं, बल्कि एक चलता-फिरता भारत है। इसमें चढ़ने वाला हर यात्री अलग भाषा बोलता है, अलग भोजन लाता है और अलग संस्कृति का प्रतिनिधित्व करता है। लेकिन 3,700 किलोमीटर की यह यात्रा साबित करती है कि विविधताओं के बावजूद हम सब भारतीय हैं और एक साझा पहचान से जुड़े हैं।
    रोचक तथ्य (Fun Facts)
    हिमसागर एक्सप्रेस भारत की सबसे लंबी दूरी तय करने वाली यात्री ट्रेन है।
    इसका नाम ‘हिमसागर’ इसलिए पड़ा क्योंकि यह हिमालय (हिम) से लेकर सागर (कन्याकुमारी) तक जाती है।
    यह ट्रेन औसतन 50 किमी/घंटा की गति से चलती है।
    इस ट्रेन का नंबर 16317/16318 है।
    इसमें प्रतिदिन औसतन 2000 से अधिक यात्री सफर करते हैं।
    एक ट्रेन, अनगिनत कहानियां
    हिमसागर एक्सप्रेस की यात्रा केवल दूरी तय करने का साधन नहीं, बल्कि यह भारत की विविधता, संस्कृति और एकता की जीवंत मिसाल है। 1984 में शुरू हुई यह ट्रेन आज भी लाखों लोगों के जीवन का अभिन्न हिस्सा है।
    जब कोई यात्री कन्याकुमारी से जम्मू तक का टिकट लेता है, तो वह केवल एक जगह से दूसरी जगह जाने का फैसला नहीं करता, बल्कि वह भारत के उत्तर-दक्षिण को जीने और महसूस करने की यात्रा करता है।

देवरिया सड़क हादसा: दो बाइकों की भीषण टक्कर में दो युवकों की मौत, चार गंभीर घायल

​देवरिया(राष्ट्र की परम्परा) बघौचघाट-पकहा मुख्य मार्ग पर दो बाइकों की आमने-सामने की जोरदार टक्कर में दो युवकों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हादसा गुरुवार रात करीब 1 बजे मलवाबर गांव के समीप नहर पुलिया के पास हुआ।

​मृतक और घायल

​इस भीषण दुर्घटना में रामनगर निवासी 18 वर्षीय शिवम शर्मा और कोईलसवा गांव निवासी 22 वर्षीय शंभू कुशवाहा की मौके पर ही मौत हो गई। ये दोनों युवक बघौचघाट में मेला करने आए थे।

गंभीर रूप से घायल होने वालों में कोईलसवा गांव के राकेश कुशवाहा, विपिन कुशवाहा, विकास और गोलू शामिल हैं।

​दुर्घटना और बचाव कार्य

​टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों बाइकें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। घटना की सूचना मिलते ही डायल 112 की टीम (कांस्टेबल छोटेलाल और चालक राजेश यादव) और थानाध्यक्ष विशाल उपाध्याय पुलिस बल के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे। सभी घायलों को इलाज के लिए एंबुलेंस से सीएचसी भिजवाया गया।

​सीएचसी में चिकित्सकों ने शिवम शर्मा और शंभू कुशवाहा को मृत घोषित कर दिया, जबकि अन्य चार घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद मेडिकल कॉलेज देवरिया रेफर कर दिया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।

​परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़

​यह हादसा दोनों मृतकों के परिवारों के लिए दुखों का पहाड़ लेकर आया है।

  • शंभू कुशवाहा (22 वर्ष) अपने चार भाइयों में तीसरे नंबर पर थे और घर पर टेंट व डीजे की दुकान चलाते थे। उनकी शादी इसी साल जून में हुई थी और उनकी पत्नी दो माह के गर्भ से हैं। शुक्रवार सुबह उनके परिजनों ने उनका दाह संस्कार कर दिया। उनकी पत्नी पिंकी देवी और माता कैलाशी देवी का रो-रोकर बुरा हाल है।

अमेरिकी किसानों की चिंता और ट्रंप की रणनीति – चीन के टेरिफ युद्ध ने अमेरिकी कृषि को झकझोरा

राष्ट्र की परम्परा डेस्कअमेरिका और चीन के बीच बढ़ती व्यापारिक टकराव की गूँज अब अमेरिकी खेतों तक पहुँच रही है। चीन ने अमेरिका से सोयाबीन की खरीद को लगभग शून्य कर दिया है, जिससे अमेरिकी किसानों की चिंता बढ़ गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब इस मसले को लेकर सक्रिय हो गए हैं और उन्होंने संकेत दिया है कि शी जिनपिंग के साथ बातचीत के माध्यम से इस संकट का हल निकालना उनका उद्देश्य है।

ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए टेरिफ ने अमेरिका की अर्थव्यवस्था में हलचल मचा दी है। हालांकि ट्रंप इसे अपने देश की इकॉनमी को बढ़ावा देने का तरीका बता रहे हैं, लेकिन किसानों के लिए यह भारी पड़ रहा है। मक्का और सोयाबीन जैसी प्रमुख फसलें टेरिफ युद्ध की चपेट में हैं और किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने कहा कि वह शी जिनपिंग से आगामी एशिया प्रशांत आर्थिक सहयोग शिखर सम्मेलन में मिलेंगे और सोयाबीन के मुद्दे को उठाएंगे। अमेरिकी रिपब्लिकन सांसद भी लगातार ट्रंप पर दबाव डाल रहे हैं कि वे किसानों के हित में कदम उठाएँ।

हालांकि, इस बीच अमेरिकी सोयाबीन बाजार में हलचल जारी है। पशु आहार और जैव ईंधन में उपयोग होने वाले तिलहन के नवंबर डिलीवरी वाले अनुबंधों में 0.8% की बढ़ोतरी हुई, जिससे गिरावट की स्थिति रुक गई।

कृषि क्षेत्र पर लागतों का बढ़ना भी चिंता का विषय बना हुआ है। बीज, उर्वरक और अन्य कृषि सामग्री की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लगभग एक दशक में यह दो साल की सबसे खराब गिरावट के बाद बेंचमार्क अमेरिकी सोयाबीन की कीमतें स्थिर होने लगी हैं, लेकिन वैश्विक मांग में अनिश्चितता बनी हुई है।

अमेरिकी किसानों और उनके समर्थक रिपब्लिकन पदाधिकारियों के लिए अब दांव बहुत ऊँचा है। यह संघर्ष केवल व्यापारिक मसला नहीं बल्कि अमेरिका की कृषि सुरक्षा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर भी असर डाल रहा है। ट्रंप की शी जिनपिंग के साथ बैठक से तय होगा कि भविष्य में अमेरिकी सोयाबीन किसानों को राहत मिलेगी या नहीं।

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गुजरात मॉडल से बिहार में एंटी-इंकंबेंसी का समाधान, नए चेहरे लाकर जीतने की रणनीति

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा अगले कुछ दिनों में हो सकती है। इस बार चुनावी मैदान में भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती एंटी इनकंबेंसी (स्थानीय विधायकों और मंत्रियों के खिलाफ नाराजगी) से निपटना है। पार्टी ने गुजरात मॉडल की तर्ज पर रणनीति तैयार की है, जिसमें कई मौजूदा विधायकों और वरिष्ठ नेताओं का टिकट कट सकता है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, करीब 30 विधायकों की ऐसी सूची तैयार की गई है, जिन्हें इस बार बाहर किया जा सकता है, ताकि जनता के बीच पार्टी का नया चेहरा और सकारात्मक संदेश पहुँचाया जा सके। 2020 के विधानसभा चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन संतोषजनक रहा था, लेकिन स्थानीय नेताओं के खिलाफ नाराजगी इस बार बड़ा संकट बन सकती है।

बिहार में गुजरात मॉडल लागू करने की तैयारी

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पार्टी के कोर ग्रुप ने उम्मीदवारों की अंतिम सूची तय करने से पहले गहन विचार-विमर्श किया है। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने लगातार बिहार टीम के साथ रणनीति पर चर्चा की। गुजरात चुनाव 2022 की तरह, जहां भाजपा ने अपने मंत्रिमंडल में व्यापक बदलाव किए और 108 मौजूदा विधायकों में से 45 का टिकट काटा, बिहार में भी इसी रणनीति को अपनाने की तैयारी है।

भाजपा के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि मौजूदा विधायकों के खिलाफ मतदाताओं में नाराजगी है, जबकि सरकार की योजनाओं और नीति से जनता संतुष्ट है। इस वजह से पार्टी नए और युवा नेताओं को मौका देने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।

नई रणनीति से लक्ष्य: सत्ता में वापसी

नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए पांचवीं बार सत्ता में बने रहने का प्रयास करेगा। भाजपा के पास वर्तमान में 80 विधायक हैं, जिनमें 22 मंत्री शामिल हैं। पार्टी का मकसद स्थानीय नाराजगी को कम करना और नए चेहरे के जरिए चुनावी जीत सुनिश्चित करना है।

गुजरात मॉडल के तहत, भाजपा ने चुनावी फोकस को केवल सरकार की उपलब्धियों तक सीमित नहीं रखा बल्कि विधायकों के चयन में भी बड़े बदलाव किए थे। बिहार में भी भाजपा इसी रणनीति से जीत की उम्मीद कर रही है।

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गुरुहरसहाए में युवक की हत्या: आरोपियों की गिरफ्तारी तक परिजनों का धरना, अंतिम संस्कार करने से इंकार

फिरोजपुर/पंजाब (राष्ट्र की परम्परा)। गुरुहरसहाए विधानसभा क्षेत्र के गांव मोहनके उजाड़ में एक युवक की हत्या के बाद इलाके में तनाव फैल गया है। आरोप है कि कुछ लोगों ने युवक की बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी। घटना के बाद गुस्साए परिजनों और ग्रामीणों ने धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। पीड़ित परिवार का कहना है कि जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी और एफआईआर में बढ़ोतरी नहीं होगी, वे मृतक का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।

परिवार बोला – आरोपी पकड़ो, तभी करेंगे अंतिम संस्कार

परिजनों ने साफ कहा कि उनका धरना तब तक जारी रहेगा जब तक हत्या के आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर लिया जाता। परिवार का आरोप है कि पुलिस की कार्रवाई धीमी है और आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं।

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पुलिस अधिकारियों ने दिया आश्वासन

धरना स्थल पर एसपी डी मनजीत सिंह, डीएसपी बलजिंदर सिंह और डीएसपी राजवीर सिंह पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। हालांकि, पीड़ित परिवार ने स्पष्ट किया कि सिर्फ आश्वासन से काम नहीं चलेगा, आरोपी पकड़े जाने के बाद ही अंतिम संस्कार किया जाएगा।

इलाके में तनाव, धरना जारी

गांव और आसपास के इलाके में तनाव का माहौल है। पुलिस का कहना है कि स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया है और धरना खत्म कराने के लिए प्रयास जारी हैं।

बिहार में वंदे भारत ट्रेन और दुर्गा पूजा स्थल पर दो भयंकर हादसे: 4 की मौत, कई घायल – गांव में शोक की लहर

पूर्णिया में ट्रेन-रेल हादसा और बायसी में पूजा स्थल दुर्घटना ने खुशी को बदल दिया दर्द में

पूर्णिया, बिहार (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)शुक्रवार की सुबह बिहार के पूर्णिया जिले में दो अलग- अलग घटनाओं ने लोगों को सदमे में डाल दिया। कटिहार-जोगबनी रेलखंड पर वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन से कटकर तीन लोगों की मौत हो गई और दो गंभीर रूप से घायल हो गए। वहीं, बायसी थाना क्षेत्र के मीनापुर पंचायत के बैरिया सरबजिया गांव में दुर्गा पूजा के अंतिम दिन अचानक एक स्कॉर्पियो पंडाल में घुस गई, जिसमें पुजारी सहित एक की मौत और चार श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हुए।

वंदे भारत एक्सप्रेस हादसा:
जानकारी के मुताबिक, वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन जोगबनी (अररिया) से दानापुर (पटना) जा रही थी। तीनों मृतक दशहरा मेला घूमकर लौट रहे थे। घटना कसबा जबनपुर के पास हुई, और मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। घटना की सूचना मिलते ही आरपीएफ और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए, जबकि दोनों घायलों को पूर्णिया सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया।

वंदे भारत एक्सप्रेस का परिचालन जोगबनी से दानापुर के बीच 17 दिसंबर से शुरू हुआ था। ट्रेन जोगबनी से सुबह 3:25 बजे रवाना होकर 4:50 बजे पूर्णिया पहुंचती है और लगभग 11:30 बजे दानापुर (पटना) पहुंचती है। अभी तक मृतकों और घायलों की पहचान नहीं हो पाई है।

दुर्गा पूजा स्थल हादसा:
गुरुवार की शाम बैरिया सरबजिया गांव में दुर्गा पूजा का अंतिम दिन चल रहा था। पंडाल में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा थी, तभी अचानक एक स्कॉर्पियो तेज रफ्तार में पंडाल में घुस गई। वाहन ने पांच लोगों को कुचला और पंडाल की सजावट को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया।

इस हादसे में मंदिर के पुजारी भागवत महलदार (60 वर्ष) की मौके पर ही मौत हो गई। चार अन्य श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हुए हैं और उनका इलाज पूर्णिया जीएमसीएच में जारी है। घटना के बाद गांव में शोक की लहर दौड़ गई।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पूजा पंडालों के आसपास यातायात नियंत्रण और सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था की जानी चाहिए।

विशेष जानकारी:
वंदे भारत ट्रेन और स्कॉर्पियो हादसे दोनों ने गांव और आसपास के लोगों के लिए दुखद संदेश छोड़ा।
धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के दौरान सुरक्षा उपायों की कमी को उजागर किया।
दुर्घटना स्थलों पर पुलिस और प्रशासन ने जांच-पड़ताल शुरू कर दी है।

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