Wednesday, July 8, 2026
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कटक में भड़की सांप्रदायिक हिंसा: बाइक रैली पर रोक के बाद 36 घंटे का कर्फ्यू, 25 घायल – इंटरनेट बंद

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कटक में तनाव के बाद सन्नाटा, प्रशासन अलर्ट मोड पर

कटक (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)ओडिशा के ऐतिहासिक शहर कटक में रविवार को उस समय स्थिति अचानक बिगड़ गई जब प्रशासन द्वारा अनुमति न दिए जाने के बावजूद एक समूह ने बाइक रैली निकालने की कोशिश की। पुलिस ने जब रैली रोकने का प्रयास किया, तो तनावपूर्ण माहौल हिंसक झड़प में बदल गया। देखते ही देखते पथराव, आगजनी और पुलिस कार्रवाई शुरू हो गई, जिसमें आठ पुलिसकर्मियों सहित कम से कम 25 लोग घायल हो गए।

स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए प्रशासन ने 36 घंटे का कर्फ्यू लागू कर दिया है और इंटरनेट सेवाओं को निलंबित कर दिया गया है ताकि अफवाहें न फैलें।
13 थाना क्षेत्रों में निषेधाज्ञा, इंटरनेट बंद
पुलिस आयुक्त एस देवदत्त सिंह ने बताया कि रविवार रात 10 बजे से 36 घंटे के लिए निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। यह आदेश कटक के दरगाह बाजार, मंगलाबाग, छावनी, पुरीघाट, लालबाग, बिदानासी, मरकट नगर, सीडीए फेज-2, मालगोदाम, बादामबाड़ी, जगतपुर, बयालीस मौजा और सदर थाना क्षेत्रों में प्रभावी रहेगा।

राज्य सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कटक नगर निगम, सीडीए और आसपास के 42 मौजा क्षेत्र में रविवार शाम सात बजे से सोमवार शाम सात बजे तक इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं।

विहिप की रैली से भड़की हिंसा, छह गिरफ्तार
अधिकारियों के अनुसार, यह हिंसा उस समय शुरू हुई जब विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने जिला प्रशासन के आदेशों की अवहेलना करते हुए मोटरसाइकिल रैली निकालने की कोशिश की। पुलिस ने सुरक्षा कारणों से रैली को आगे बढ़ने से रोका, जिससे स्थिति अचानक हिंसक हो गई।

पुलिस ने बताया कि अब तक छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है और सीसीटीवी, ड्रोन फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर अन्य उपद्रवियों की पहचान की जा रही है।

विहिप प्रवक्ता ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि “बार-बार अनुरोधों के बावजूद शांतिपूर्ण विसर्जन सुनिश्चित नहीं किया गया।”

बीजद ने ‘असामाजिक तत्वों’ को ठहराया दोषी

बीजू जनता दल (बीजद) ने हिंसा के लिए “असामाजिक तत्वों” को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि “कुछ लोग सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं।”
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि “दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।” उन्होंने घायल लोगों को नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा देने और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात करने के निर्देश दिए हैं।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी हालात पर लगातार नजर रखे हुए हैं और प्रशासन किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए फुल अलर्ट मोड पर है।

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“भारत को चुनौती देना महंगा पड़ेगा: पाक रक्षा मंत्री की धमकी पर सेना प्रमुख का पलटवार – ऑपरेशन सिंदूर से उठी लपटें फिर भड़कीं”

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नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव ने एक बार फिर सीमा पार बयानबाजी की आग को हवा दे दी है। भारतीय सैन्य नेतृत्व की कठोर चेतावनी के बाद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने उकसाने वाला बयान देते हुए कहा कि अगर हालात बिगड़े तो भारत “अपने लड़ाकू विमानों के मलबे के नीचे दब जाएगा”।
यह बयान भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के उस सख्त संदेश के बाद आया है, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान को साफ शब्दों में कहा था कि अगर उसने आतंकवाद को बढ़ावा देना नहीं छोड़ा, तो वह “विश्व मानचित्र से मिट सकता है।”

आसिफ ने भारतीय सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व पर “भड़काऊ बयानबाजी” का आरोप लगाते हुए कहा कि यह “मई के ऑपरेशन सिंदूर के बाद अपनी धूमिल छवि सुधारने का असफल प्रयास” है।
उन्होंने तथाकथित “0-6 स्कोर” का उल्लेख करते हुए दावा किया कि पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के छह लड़ाकू विमान मार गिराए — हालांकि इसके समर्थन में कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया।

पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने कहा,

“भारतीय नेतृत्व अपने सम्मान को पुनः पाने की कोशिश कर रहा है। 0-6 के परिणाम के बाद, यदि वे दोबारा प्रयास करेंगे तो इस बार स्कोर और भी निर्णायक होगा।”
विश्लेषकों का मानना है कि आसिफ का “0-6 स्कोर” कथन दरअसल उन अपुष्ट दावों की ओर संकेत करता है, जिनमें पाकिस्तान ने भारतीय विमानों को गिराने का दावा किया था। भारत ने इन दावों को “मनगढ़ंत और प्रचारात्मक” बताया है।
🔶 ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि
7 मई को शुरू हुआ ऑपरेशन सिंदूर, 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारतीय सेना द्वारा की गई सैन्य कार्रवाई थी। इस अभियान में भारत ने पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकवादी ढाँचों को निशाना बनाया था।
चार दिन चले इस ऑपरेशन के बाद पाकिस्तान ने ही युद्धविराम की अपील की थी।
🔶 भारतीय नेतृत्व का कड़ा संदेश
4 अक्टूबर को, सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा था कि अगर पाकिस्तान विश्व मानचित्र पर बने रहना चाहता है, तो उसे आतंकवाद को पालना बंद करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगला संघर्ष “ऑपरेशन सिंदूर 1.0” की तरह संयमित नहीं होगा।
“भारत अब पूरी तरह तैयार है। इस बार, जवाब ऐसा होगा कि पाकिस्तान को सोचना पड़ेगा कि वह विश्व मानचित्र पर रहना चाहता है या नहीं,” — जनरल द्विवेदी।
🔶 भारतीय वायुसेना का दावा
एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान के कई सामरिक ठिकानों को ध्वस्त किया था।
उन्होंने बताया कि कम से कम एक दर्जन पाकिस्तानी सैन्य विमान, जिनमें अमेरिकी मूल के F-16 जेट भी शामिल थे, नष्ट या क्षतिग्रस्त हुए।

“हमारे खुफिया स्रोतों ने पुष्टि की है कि चार रडार स्टेशन, दो कमांड सेंटर, दो रनवे और तीन हैंगर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए,” — एयर चीफ सिंह।

🔶 रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बयान
हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक, 2019 के बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत अपने नागरिकों और राष्ट्र की अखंडता की रक्षा के लिए किसी भी सीमा को पार करने में संकोच नहीं करेगा।
उन्होंने चेतावनी दी —

“सर क्रीक क्षेत्र में पाकिस्तान का कोई भी दुस्साहस निर्णायक जवाब पाएगा, जो इतिहास और भूगोल दोनों बदलने में सक्षम होगा।”

🔶 सर क्रीक विवाद की पृष्ठभूमि
सर क्रीक 96 किलोमीटर लंबा ज्वारीय मुहाना है, जो गुजरात के कच्छ क्षेत्र और पाकिस्तान की सीमा के बीच स्थित है। इस क्षेत्र पर दोनों देशों के बीच समुद्री सीमा को लेकर दशकों से विवाद चला आ रहा है।

🗳️ बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की उलटी गिनती शुरू: सोमवार को बजेगी चुनावी बिगुल, छठ के बाद तय होंगी मतगणना की तिथियाँ

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पटना, सोमवार (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)
बिहार की सियासत में अब चुनावी गहमागहमी का दौर शुरू होने वाला है। निर्वाचन आयोग सोमवार शाम 4 बजे बहुप्रतीक्षित बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तारीखों की घोषणा करेगा। आयोग का संवाददाता सम्मेलन नई दिल्ली स्थित मुख्यालय में होगा, जहाँ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी राज्य में चुनावी तैयारियों की समीक्षा के बाद विस्तृत कार्यक्रम जारी करेंगे।

243 सदस्यीय बिहार विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर 2025 को समाप्त हो रहा है। इसी के साथ सूबे की राजनीति में नए समीकरण और रणनीतियों का दौर फिर शुरू हो गया है। राजनीतिक दलों ने आयोग से आग्रह किया है कि चुनाव छठ पर्व के तुरंत बाद, यानी अक्टूबर के अंतिम सप्ताह या नवंबर के पहले सप्ताह में कराए जाएँ, ताकि बड़ी संख्या में प्रवासी मतदाता भी मतदान में हिस्सा ले सकें।
🔸 त्योहारों के बीच संतुलन साधेगा चुनाव आयोग
सूत्रों के अनुसार, इस बार आयोग छठ (18 से 28 अक्टूबर) और दिवाली के बीच पड़ने वाले उत्सवों को ध्यान में रखते हुए तिथियों का निर्धारण करेगा। संभावना है कि मतदान की प्रक्रिया एक से अधिक चरणों में होगी, जैसा कि 2020 में हुआ था।
🔹 2025 में कौन किसके मुकाबले में
राजनीतिक समीकरण एक बार फिर दिलचस्प हैं। सत्ता पक्ष में भाजपा-जदयू गठबंधन है, जबकि विपक्ष में राजद-कांग्रेस महागठबंधन अपनी ताकत आजमाने उतरेगा। वहीं, चुनाव रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर भी अपनी जन सुराज पार्टी के साथ मैदान में उतरने को तैयार हैं, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है।
🔸 2020 के चुनाव का संदर्भ
2020 का विधानसभा चुनाव कोविड-19 महामारी की पृष्ठभूमि में देश का पहला बड़ा चुनाव था।
तीन चरणों में मतदान —
28 अक्टूबर,
3 नवंबर,
7 नवंबर — को हुआ था।
परिणाम 10 नवंबर 2020 को घोषित हुए, जिसमें राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को 125 सीटों पर जीत मिली, जबकि महागठबंधन को 110 सीटों से संतोष करना पड़ा।
🔹 2025 का चुनाव: मुद्दे, मतदाता और माहौल
इस बार बिहार में रोजगार, शिक्षा, महंगाई, किसानों की स्थिति और युवाओं का पलायन प्रमुख चुनावी मुद्दे रहेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव में जनता की भागीदारी ऐतिहासिक स्तर पर बढ़ सकती है, क्योंकि त्योहारी सीजन के कारण लाखों प्रवासी मतदाता घर लौटेंगे।
🔸 क्या कहता है राजनीतिक विश्लेषण
राजनीति विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आयोग ने मतदान की तारीखें छठ पर्व के बाद रखीं, तो मतदान प्रतिशत 2020 की तुलना में 5–7% तक बढ़ सकता है। साथ ही, नई तकनीक और मतदाता सूची के अद्यतन से पारदर्शिता और सहभागिता दोनों में वृद्धि होगी।
🔹 मुख्य चुनाव आयुक्त बोले — “उत्सव लोकतंत्र का, जिम्मेदारी सबकी”
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि बिहार जैसे जनसंख्या बहुल राज्य में चुनाव कराना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है, लेकिन आयोग इसके लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा,

“यह लोकतंत्र का उत्सव है। आयोग का उद्देश्य है कि हर मतदाता बिना भय, प्रलोभन या दबाव के मतदान कर सके।”

🔸 संभावित समयरेखा (अनुमानित)
चरण संभावित तारीख क्षेत्र
पहला चरण 1-5 नवंबर दक्षिण बिहार
दूसरा चरण 10-14 नवंबर उत्तरी बिहार
तीसरा चरण 17-20 नवंबर सीमांचल व कोसी क्षेत्र

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भारतीय दंड संहिता 1860: एक ऐतिहासिक दृष्टि से समीक्षा

राष्ट्र की परम्परा [सुधीर पाठक एडवोकेट] ब्रिटिश भारत में 6 अक्टूबर 1860 को पारित की गई भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code, IPC), जिसे 1 जनवरी 1862 से लागू किया गया, आज भी (अनेक संशोधनों के बाद) भारतीय आपराधिक न्याय व्यवस्था की रीढ़ रही। इस लेख में हम संहिता की उत्पत्ति, उद्देश्य, संरचना, समय के साथ हुए परिवर्तन और उसकी वर्तमान विषम चुनौतियों पर विस्तृत नजर डालेंगे।
उत्पत्ति और प्रेरणा: कोडिफिकेशन की आवश्यकता
पूर्वकालीन स्थिति 19वीं सदी की शुरुआत तक भारत में अपराध और दंडों का कानून एक जटिल मिश्रण था: स्थानीय रीति-रिवाज, सामुदायिक प्रथाएँ, धार्मिक कानून और विभिन्न ब्रिटिश अधिनियम। इस अव्यवस्था से न्याय वितरण असमान और अनिश्चित हो गया।
कॉमन लॉ और कोडिफिकेशन सोच
ब्रिटेन में न्यायशास्त्र की आधुनिक सोच—विशेष रूप से उपयोगितावाद (Utilitarianism) और कोडिफिकेशन का क्रम—भारतीय न्याय सुधारकों को प्रेरित करती थी। Thomas Babington Macaulay को ब्रिटिश सरकार ने 1834 में भारत के पहले कानून आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया, जिसकी भूमिका IPC की रूपरेखा तैयार करने में महत्वपूर्ण रही।
मशाले की पहली मसौदे की प्रस्तुति (1837)
Macaulay ने 1837 में IPC का प्रारंभिक मसौदा प्रस्तुत किया, जिसका आधार अंग्रेज़ी अपराध कानून था। लेकिन उस वक्त इसे स्वीकार नहीं किया गया। बाद के वर्षों में इसे संशोधित किया गया और 1850 के बाद पुनः तैयार होकर 1856 में विधायी परिषद में प्रस्तुत किया गया।
1857 का विद्रोह और शोधन
1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम (ब्रिटिशों द्वारा ‘म्युटिनी’ कहा गया) ने ब्रिटिश प्रशासन को यह एहसास कराया कि उन्हें एक विधिपरक एवं सुसंगत दंड विधान चाहिए, जिससे उन्हें विद्रोह नियंत्रित करने में विधि-संगत अधिकार मिल सके। इस घटना ने IPC को पुनर्संशोधित करने का राजनीतिक और व्यावहारिक दबाव बढ़ाया।
अंतिम पारित करना (1860) और कार्यान्वयन (1862)
IPC को 6 अक्टूबर 1860 को विधायिका से पारित किया गया और इसे 1 जनवरी 1862 से अपनाया गया।
उद्देश्य एवं विशेषताएँ
एक समेकित अपराध संहिता
IPC का मूल उद्देश्य एक सामान्य अपराध संहिता तैयार करना थी, जिसमें पूरे भारत में समान दंड और अपराध की परिभाषाएँ हों।
उत्कृष्ट विधि सिद्धांत
IPC ने स्पष्टता, संक्षिप्तता और न्यायसंगतता पर बल दिया। इसने अपराध के तत्व (actus reus और mens rea) जैसे सिद्धांत स्थापित किए।
आगे की व्याप्ति (Extra-territorial jurisdiction)
IPC ने उन अपराधों को भी दंड योग्य माना जो भारत के बाहर किए जाएँ, यदि उन्हें भारत की न्यायसत्ता में लाया जा सके।
विभिन्न प्रकार के दंडों की व्यवस्था
IPC ने दंडों को विभाजित किया — मृत्यु दंड, आजीवन कारावास, अवधि कारावास, भारी जुर्माने आदि।
सरल भाषा और अनुवाद
IPC को अंग्रेजी में तैयार किया गया, पर बाद में इसे उर्दू आदि भाषाओं में अनुवाद किया गया ताकि आम न्यायालयों में उपयोग हो सके। उर्दू संस्करण को “तज़ीरात-ए-हिंद” भी कहा गया।
संरचना और विस्तार
आधारभूत संरचना
मूल रूप से IPC में 23 अध्याय और 511 धाराएँ (Sections) थीं। बाद में दो अध्याय जोड़े गए: अपराध सहमति (Criminal Conspiracy) और चुनाव से संबंधित अपराध।
अध्यायों का विभाजन
उदाहरण स्वरूप:

  1. परिचय एवं सामान्य समझ (Chapters I–V)
  2. राज्य के विरुद्ध अपराध (Chapter VI)
  3. जनता की शांति भंग करने वाले अपराध (Chapter VIII)
  4. सार्वजनिक सेवा, दस्तावेज, संपत्ति अपराध इत्यादि
  5. अन्य अपराध जैसे मानहानि, धमकी आदि (अंतिम अध्याय)
    संशोधन एवं विस्तार
    समय-समय पर IPC में कई संशोधन हुए हैं। नए अपराध जैसे आतंकवाद, भ्रष्टाचार, साइबर अपराध आदि को जोड़ने के लिए अन्य अधिनियम बनाए गए।
    IPC की दीर्घायु और प्रभाव
    सबसे लंबी सेवा देने वाला अपराध कोड
    IPC अंग्रेज़ी common law विश्व में सबसे लंबे समय तक लागू रहने वाला दंड विधान माना जाता है।
    अन्य देशों पर प्रभाव
    IPC की संरचना अन्य देशों पर भी लागू हुई — जैसे बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका, म्यांमार, सिंगापुर आदि ने इसे बड़ी हद तक अपनाया।
    संघीय भारत में अपनाना
    1947 के बाद भारत ने इस संहिता को अपनाया और इसे समय-समय पर संशोधित किया। कई अन्य अपराध विशेष अधिनियमों के माध्यम से शामिल किए गए।
    नवीन न्याय सुधार और प्रतिस्थापन
    अगस्त 2023 में भारत सरकार ने IPC की जगह Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS, 2023) को प्रस्तावित किया, जो दिसंबर 2023 को राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त कर चुका है।
    आलोचनाएँ और चुनौतियाँ
    उपनिवेशकालीन स्वरूप
    IPC को उपनिवेश काल के सोच और प्राथमिकताओं पर आधारित माना जाता है — कई धाराएँ ब्रिटिश शासन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई थीं, न कि भारतीय नागरिकों की आज़ादी को।
    समकालीन अपराधों का अभाव
    IPC में आधुनिक अपराध जैसे साइबर अपराध, आर्थिक अपराध, डिजिटल यौन उत्पीड़न आदि पूरी तरह शामिल नहीं थे; इन्हें अन्य अधिनियमों से पूरा किया गया।
    भाषा और निष्पादन चुनौतियाँ
    IPC में प्रयुक्त अंग्रेज़ी शब्दावली आम जनता के लिए कठिन थी, और न्यायालयों में अनुवाद व व्याख्या विवादित रहे।
    संहार्यता और सुधार की मांग
    विद्वानों और विधि विशेषज्ञों ने IPC को पूरी तरह बदलने या कम-से-कम बड़े पैमाने पर पुनर्लेखन करने की मांग कई बार की है।
    निष्कर्ष: IPC से BNS की ओर एक नई कदम
    भारतीय दंड संहिता, 1860 ने भारत को अपराध एवं दंड की एक सुसंगत विधि विरासत दी। 1 जनवरी 1862 से लागू इस कानून ने एक एकरूप प्रणाली स्थापित की, जो आज तक (संशोधित रूप में) काम करती रही। लेकिन समय की आवश्यकताएँ बदल गई हैं। अत्याधुनिक अपराध, डिजिटल दुनिया और नागरिक अधिकारों की बढ़ती मांग ने नए न्याय कोड की ज़रूरत उत्पन्न की है।

आज, Bharatiya Nyaya Sanhita के आगमन के साथ IPC का युग समाप्त हो रहा है। यह परिवर्तन सिर्फ विधि-पारित नहीं, बल्कि अवधारणा-आधारित है — एक संलग्न, जवाबदेह और नागरिक केंद्रित न्याय प्रणाली की ओर।

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शरद पूर्णिमा : चाँदनी से उतरता अमृत

आश्विन मास की पूर्णिमा का दिन भारत में शरद पूर्णिमा के रूप में जाना जाता है। यह वह रात्रि होती है जब चंद्रमा अपनी सोलहों कलाओं के साथ आकाश में सबसे अधिक उज्ज्वल दिखाई देता है। कहा जाता है कि इस रात उसकी किरणों से अमृत बरसता है। यह केवल खगोलीय घटना नहीं, बल्कि आत्मिक जागरण, साधना की पूर्णता और शुद्धता का प्रतीक है।

भारतीय परंपरा में इसे कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है “कौन जाग रहा है।” मान्यता है कि इस रात माँ लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं और उन्हें वही व्यक्ति आशीर्वाद पाता है जो जागकर भक्ति और साधना में लीन रहता है।

इस दिन खीर को खुले आकाश के नीचे रखकर चाँदनी में रखा जाता है। विश्वास है कि चंद्रमा की किरणें उसमें अमृत का संचार करती हैं। आयुर्वेद में भी शरद पूर्णिमा की रात की चाँदनी को स्वास्थ्यवर्धक माना गया है। यह शरीर की ऊष्मा को संतुलित करती है, रक्त को शुद्ध करती है और मन को शांति देती है।

कहा जाता है कि इसी रात भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन में गोपियों के साथ महारास किया था। यह घटना प्रेम, भक्ति और आत्मा की एकता का प्रतीक मानी जाती है। यह हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति वह अवस्था है जिसमें हृदय पूर्ण चंद्रमा की तरह निर्मल और उज्जवल हो जाता है।

विज्ञान के अनुसार, इस समय वर्षा ऋतु समाप्त हो चुकी होती है और ठंड की शुरुआत होती है। हवा में मौजूद ओस और चंद्र किरणों का मिलन शरीर के लिए लाभदायक होता है। यही कारण है कि इस रात को प्राकृतिक चिकित्सा के लिए भी उपयुक्त माना जाता है।

देश के विभिन्न भागों में इस दिन लक्ष्मी पूजन, रासलीला, भजन, दीपदान और खीर प्रसाद वितरण का आयोजन किया जाता है। गाँवों में बच्चे खुले आकाश के नीचे गीत गाते हैं और महिलाएँ दीप लेकर आँगन में घूमती हैं। यह रात भारतीय जीवन की सरलता, भक्ति और आनंद का उत्सव है।

शरद पूर्णिमा यह संदेश देती है कि जैसे चंद्रमा हर अमावस्या के बाद फिर से पूर्ण हो जाता है, वैसे ही मनुष्य को भी अपने भीतर के अंधकार को मिटाकर उजाले की ओर बढ़ना चाहिए।
“जीवन की हर अंधेरी घड़ी में चाँदनी बनकर चमकिए, क्योंकि भीतर की रोशनी ही सच्चा अमृत है।”

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जयपुर: सवाई मान सिंह अस्पताल के ICU में भीषण आग, 7 मरीजों की मौत; CM भजनलाल शर्मा मौके पर पहुँचे

जयपुर/राजस्थान (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। राजधानी जयपुर के सवाई मान सिंह अस्पताल में एक भयानक हादसा हुआ। अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर के ICU वार्ड में देर रात शॉर्ट सर्किट से आग लग गई। इस घटना में 7 मरीजों की मौत हो गई जबकि कई गंभीर रूप से घायल मरीजों को सुरक्षित निकाल लिया गया। आग लगने के बाद अस्पताल प्रशासन, डॉक्टर, नर्स और दमकल विभाग की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।

हादसे का विवरण

ट्रॉमा सेंटर के इंचार्ज डॉ. अनुराग धाकड़ के अनुसार, आग शॉर्ट सर्किट से लगी प्रतीत होती है। आईसीयू में भर्ती मरीज पहले से गंभीर स्थिति में थे, जिनमें कई कोमा में थे। आग से निकलने वाली टॉक्सिक गैसों ने उनकी हालत और बिगाड़ दी। मरीजों को सुरक्षित निकालने के प्रयास में उन्हें निचले फ्लोर के आईसीयू में शिफ्ट करने का प्रयास किया गया, लेकिन सात मरीजों को बचाया नहीं जा सका।

CM और प्रशासन का फौरन रेस्पॉन्स

हादसे की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा घटनास्थल पर पहुँचे और स्थिति का जायजा लिया। उनके साथ राजस्थान सरकार के मंत्री जवाहर सिंह बेधम भी मौजूद थे। मंत्री ने बताया कि ICU में आग लगने की यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार घायलों के इलाज को प्राथमिकता दे रही है और मृतकों के परिजनों को हर संभव सहायता प्रदान करेगी।

जांच और सुरक्षा समीक्षा

अस्पताल प्रशासन ने इस हादसे की गहन जांच के आदेश दिए हैं। पुलिस और फॉरेंसिक टीम आग के कारणों की विस्तृत जांच में जुटी हैं। जयपुर पुलिस आयुक्त बिजू जॉर्ज जोसेफ ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह शॉर्ट सर्किट का मामला प्रतीत होता है, लेकिन अंतिम रिपोर्ट के बाद ही कारण स्पष्ट होगा। मृतकों के शवों को मॉर्चरी में रखा गया है और पोस्टमॉर्टम के बाद ही आधिकारिक रिपोर्ट जारी की जाएगी।

मरीजों का उपचार

आग लगने के बाद बचाए गए मरीजों को अन्य वार्डों में शिफ्ट किया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। अस्पताल प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और फायर सिस्टम की समीक्षा शुरू कर दी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

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🌕 6 अक्टूबर 2025 पंचांग: शरद पूर्णिमा का पावन दिवस, जानें आज के शुभ-अशुभ मुहूर्त, योग और राहुकाल

आज का दिन: सोमवार, 6 अक्टूबर 2025
हिन्दू पंचांग के अनुसार: आश्विन माह, शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि (12:24 PM तक), उपरांत पूर्णिमा।

संवत्सर: विक्रम संवत 2082 (कालयुक्त), शक संवत 1947 (विश्वावसु)

चंद्रमा: मीन राशि में संचार करेगा। सूर्य: कन्या राशि में स्थित।


🕉️ तिथि एवं नक्षत्र
चतुर्दशी तिथि: 05 अक्टूबर 03:04 PM – 06 अक्टूबर 12:24 PM
पूर्णिमा तिथि: 06 अक्टूबर 12:24 PM – 07 अक्टूबर 09:17 AM
नक्षत्र: उत्तरभाद्रपदा 04:01 AM तक, उपरांत रेवती
योग: वृद्धि 01:13 PM तक, उसके बाद ध्रुव योग
करण: वणिज 12:24 PM तक, विष्टि 10:53 PM तक, बाद में बव
☀️ सूर्य और चंद्र का समय
सूर्योदय: 6:24 AM  सूर्यास्त: 6:05 PM
चन्द्रोदय: 5:34 PM  चन्द्रास्त: 6:16 AM (07 अक्टूबर)
अयन: दक्षिणायन  ऋतु: शरद
⚖️ आज के शुभ-अशुभ समय
राहुकाल: 07:51 AM – 09:19 AM
यमगण्ड: 10:47 AM – 12:14 PM
कुलिक काल: 01:42 PM – 03:10 PM
दुर्मुहूर्त: 12:38 PM – 01:25 PM, 02:58 PM – 03:45 PM
वर्ज्य काल: 02:58 PM – 04:25 PM
🌟 शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: 11:51 AM – 12:38 PM
ब्रह्म मुहूर्त: 04:48 AM – 05:36 AM
अमृत काल: 11:18 PM – 12:45 AM
🙏 आज के पर्व और व्रत सत्य व्रत
शरद पूर्णिमा (काजोगरा पूजा)
पूर्णिमा व्रत (सत्यनारायण पूजा)
इस दिन चंद्रमा की पूर्ण किरणों से अमृत वर्षा मानी जाती है। रात्रि में खीर बनाकर खुले आकाश में रखने का विशेष महत्व है।
🌸 विशेष योग और राशिफल संकेत
आनन्दादि योग: गद योग 04:01 AM तक, तत्पश्चात मातंग योग शुभ फलदायक।
सर्वार्थ सिद्धि योग: 06:16 AM – 06:24 AM (अल्प समय, परंतु श्रेष्ठ कार्य हेतु उत्तम)।
चन्द्र राशि: मीन (संपूर्ण दिवस) — भावनात्मक निर्णयों में सावधानी रखें।
🪔 महत्व
शरद पूर्णिमा का यह सोमवार धन, सौभाग्य और आरोग्य की सिद्धि के लिए शुभ है। व्रत-उपवास, चंद्र दर्शन और ध्यान-पूजन से मानसिक शांति एवं समृद्धि का संचार होता है।
🔖 संक्षिप्त विवरण
दिन: सोमवार | माह: आश्विन | पक्ष: शुक्ल | तिथि: चतुर्दशी-पूर्णिमा
सूर्य राशि: कन्या | चंद्र राशि: मीन | ऋतु: शरद | अयन: दक्षिणायन

पंडित सत्य प्रकाश पाण्डेय

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आज का इतिहास (6अक्टूबर): कानून, सिनेमा और विश्व राजनीति के निर्णायक पल

6 अक्टूबर का दिन इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। इस दिन भारत, विश्व राजनीति और विज्ञान—तीनों ने नई दिशा पाई।


1860 में भारतीय दंड संहिता पारित होकर न्याय की नींव रखी गई, तो 1927 में सिनेमा ने पहली बार “आवाज़” पाई। वहीं 1981 का यही दिन मिस्र के राष्ट्रपति अनवर सादात की हत्या जैसी घटना का साक्षी बना। आइए जानें 6 अक्टूबर के ऐतिहासिक घटनाक्रम—
🔹 1860 — भारतीय दंड संहिता का जन्म
ब्रिटिश शासनकाल में आज ही के दिन भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) पारित की गई, जो 1 जनवरी 1862 से लागू हुई। यह भारत के न्यायिक इतिहास की सबसे बड़ी विधिक उपलब्धियों में से एक रही।
🔹 1927 — सिनेमा को मिली आवाज़
न्यूयॉर्क में “द जैज़ सिंगर” के प्रदर्शन के साथ सिनेमा युग ने बोलती फिल्मों का युग देखा। यह विश्व सिनेमा के इतिहास में क्रांतिकारी मोड़ था।
🔹 1973 — योम किप्पुर युद्ध की शुरुआत
यहूदियों के पवित्र पर्व योम किप्पुर के दिन मिस्र और सीरिया ने इजरायल पर हमला किया, जिससे मध्य पूर्व का इतिहास हमेशा के लिए बदल गया।
🔹 1981 — मिस्र के राष्ट्रपति अनवर सादात की हत्या
काहिरा में एक सैन्य परेड के दौरान मिस्र के राष्ट्रपति अनवर सादात की हत्या कर दी गई। यह घटना पूरे अरब जगत के लिए झटका साबित हुई।
🔹 1995 — अंतरिक्ष में नई खोज
दो स्विस वैज्ञानिकों ने पहली बार हमारे सौरमंडल के बाहर एक ग्रह की खोज की, जिसने खगोल विज्ञान को नई दिशा दी।
🎂 आज के दिन जन्मे
1935: जीवन डी घोष — भारत के प्रसिद्ध क्रिकेट अंपायर
1946: विनोद खन्ना — हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध अभिनेता और राजनेता
🕯️ आज के दिन हुए निधन
1974: वी. के. कृष्ण मेनन — भारत के पूर्व रक्षा मंत्री (1957–1962)

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मेघनाथ साहा: विज्ञान और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत संगम

जयन्ती पर विशेष

भारतीय विज्ञान जगत में मेघनाथ साहा का नाम सदैव आदर और गर्व के साथ लिया जाता है। उन्होंने अपने शोध, सिद्धांतों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भारत को विश्व के अग्रणी वैज्ञानिक देशों की श्रेणी में स्थान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे न केवल एक महान वैज्ञानिक थे, बल्कि एक सच्चे राष्ट्रभक्त, विचारक और समाज सुधारक भी थे। मेघनाथ साहा का जन्म तत्कालीन पूर्वी बंगाल (अब बांग्लादेश) के ढाका से लगभग 45 किलोमीटर दूर शिओरताली गाँव में 6 अक्टूबर 1893 को हुआ था। उनके पिता जगन्नाथ साहा एक साधारण दुकानदार थे और माता भुवनेश्वरी देवी धार्मिक प्रवृत्ति की महिला थीं। आर्थिक स्थिति सीमित होने के बावजूद, मेघनाथ ने कठिन परिस्थितियों में भी शिक्षा प्राप्त करने का संकल्प नहीं छोड़ा।

उन्होंने ढाका कॉलेज से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की और बाद में प्रेसीडेंसी कॉलेज, कलकत्ता से उच्च शिक्षा ली। वहीं से उनकी वैज्ञानिक प्रतिभा का विकास हुआ।
मेघनाथ साहा का सबसे बड़ा योगदान “साहा समीकरण (Saha Equation)” का प्रतिपादन है। यह समीकरण तारों की आंतरिक संरचना, तापमान और आयनीकरण की अवस्था का वैज्ञानिक विश्लेषण करता है। इस सिद्धांत ने आधुनिक खगोल भौतिकी (Astrophysics) को एक नया आयाम दिया।
उनके शोध से यह स्पष्ट हुआ कि तारों का रंग, ताप और उनके तत्व किस प्रकार निर्धारित किए जा सकते हैं। यह समीकरण आज भी विश्वभर के खगोल वैज्ञानिकों के लिए आधारभूत सिद्धांतों में गिना जाता है।
देश में विज्ञान के विकास को गति देने के लिए उन्होंने कई संस्थानों की स्थापना की। उन्होंने साहा नाभिकीय भौतिकी संस्थान (Saha Institute of Nuclear Physics) और इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टिवेशन ऑफ साइंस (IACS) की स्थापना की, जहाँ युवा वैज्ञानिकों को अनुसंधान के अवसर मिले। साथ ही वे राष्ट्रीय शक पंचांग के संशोधन में भी प्रमुख भूमिका में रहे। उनकी अध्यक्षता में बनी समिति की सिफारिशों के अनुसार नया पंचांग 22 मार्च 1957 से लागू किया गया।
nसाहा केवल प्रयोगशाला के वैज्ञानिक नहीं थे, बल्कि एक जागरूक देशभक्त भी थे। जब 1905 में अंग्रेज़ सरकार ने बंगाल विभाजन का षड्यंत्र रचा, तब युवा मेघनाथ गहराई से आंदोलनों से प्रभावित हुए। प्रेसीडेंसी कॉलेज में पढ़ाई के दौरान उन्होंने अनुशीलन समिति से जुड़कर क्रांतिकारी गतिविधियों में भाग लिया। यह संगठन उस समय युवाओं में देशभक्ति की भावना जगाने का केंद्र था।
बाद में उनका संपर्क नेताजी सुभाष चंद्र बोस और डॉ. राजेंद्र प्रसाद जैसे राष्ट्रीय नेताओं से हुआ, जिन्होंने उनके वैज्ञानिक दृष्टिकोण और देशप्रेम दोनों की सराहना की।
विज्ञान के साथ-साथ मेघनाथ साहा सामाजिक सुधारों में भी विश्वास रखते थे। वे शिक्षा को सामाजिक उत्थान का सबसे बड़ा माध्यम मानते थे। उन्होंने भारतीय संसद में भी प्रतिनिधित्व किया और विज्ञान एवं शिक्षा से जुड़े विषयों पर सार्थक सुझाव दिए। उनका मानना था कि विज्ञान तभी सार्थक है जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे।
मेघनाथ साहा को उनके योगदान के लिए कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिले। भारत सरकार ने उनके सम्मान में डाक टिकट जारी किया और कई विश्वविद्यालयों में उनके नाम से अनुसंधान केंद्र स्थापित किए। उनकी स्मृति में स्थापित साहा पुरस्कार देश के श्रेष्ठ वैज्ञानिकों को प्रदान किया जाता है।
मेघनाथ साहा का जीवन इस बात का प्रमाण है कि सीमित संसाधन भी असीम सफलता का आधार बन सकते हैं, यदि मन में दृढ़ निश्चय और देशभक्ति हो। उन्होंने यह दिखाया कि विज्ञान केवल प्रयोगशाला की दीवारों तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का मजबूत आधार है।
आज उनकी जयंती के अवसर पर पूरा देश इस महान वैज्ञानिक को नमन करता हैl एक ऐसे व्यक्तित्व को जिसने तारे-ग्रहों की गुत्थियाँ सुलझाने के साथ-साथ भारत की वैज्ञानिक चेतना को भी नई ऊँचाई दी।

— नवनीत मिश्र

🌟 अंक ज्योतिष 6 अक्टूबर 2025: भाग्य का गणित बोलेगा आज! कौन चमकेगा, किसे रखनी होगी सावधानी?

(Mulank Rashifal 6 October 2025, Monday Numerology Prediction)

सोमवार, 6 अक्टूबर 2025 आज की तारीख (06/10/2025) के अंकों का योग



(6+1+0+2+0+2+5 = 16 → 1+6 = 7) अंक 7 बनाता है, जिसका स्वामी केतु है। आज का दिन रहस्यमय ग्रह के प्रभाव में रहेगा — आत्ममंथन, अंतर्ज्ञान और गहराई से सोचने का समय।
🔹 मूलांक 1 (जिनका जन्म किसी भी माह की 1, 10, 19, 28 तारीख को हुआ हो)
नेतृत्व और आत्मविश्वास आज आपका सबसे बड़ा हथियार है। कार्यस्थल पर नई ज़िम्मेदारी या पदोन्नति के योग बन रहे हैं। उच्च अधिकारी आपके काम से प्रसन्न रहेंगे।
उपाय: सूर्यदेव को अर्घ्य दें और तांबे का सिक्का जल में प्रवाहित करें।
🔹 मूलांक 2 (जन्मतिथि 2, 11, 20, 29)
भावनाओं का उतार-चढ़ाव रहेगा। परिजनों से संवाद बनाए रखें और मन की बातें साझा करें। प्रेम संबंधों में हल्की खटास संभव है, लेकिन शाम तक सुलह के संकेत हैं।
उपाय: चंद्रदेव को अर्घ्य दें, दूध या चावल का दान करें।
🔹 मूलांक 3 (जन्मतिथि 3, 12, 21, 30)
विद्या और करियर में प्रगति का योग है। प्रतियोगी परीक्षाओं में शुभ संकेत मिलेंगे। किसी वरिष्ठ या गुरु के सहयोग से नई दिशा प्राप्त हो सकती है।
उपाय: पीले वस्त्र पहनें और केले के वृक्ष की पूजा करें।
🔹 मूलांक 4 (जन्मतिथि 4, 13, 22, 31)
आज पुराने विवाद या देरी से चल रहे कार्यों में राहत मिलेगी। डिजिटल या तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों को आर्थिक लाभ संभव है। वाहन सावधानी से चलाएं।
उपाय: बजरंगबली को सिंदूर अर्पित करें और काले तिल का दान करें।
🔹 मूलांक 5 (जन्मतिथि 5, 14, 23)
संचार और नए संपर्क आज लाभदायक रहेंगे। मीडिया, मार्केटिंग या व्यापार से जुड़े लोगों को विशेष सफलता मिल सकती है। जीवनसाथी से मतभेद से बचें।
उपाय: हरे वस्त्र धारण करें और “ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः” का जाप करें।
🔹 मूलांक 6 (जन्मतिथि 6, 15, 24)
शुक्र का दिन — प्रेम, सौंदर्य और आकर्षण का संगम रहेगा। दांपत्य जीवन में मधुरता बढ़ेगी। आर्थिक स्थिति में सुधार संभव है।
उपाय: माता लक्ष्मी की आराधना करें और सफेद मिठाई का वितरण करें।
🔹 मूलांक 7 (जन्मतिथि 7, 16, 25)
आत्मनिरीक्षण और आध्यात्मिक चिंतन का दिन। आप अपने भीतर झाँकेंगे और नई राह खोजेंगे। लेखन, संगीत या शोध कार्य में सफलता संभव है।
उपाय: नीले वस्त्र पहनें और ध्यान करें।
🔹 मूलांक 8 (जन्मतिथि 8, 17, 26)
शनि का प्रभाव आपकी गति को धीमा कर सकता है, पर धैर्य ही आपकी सफलता की कुंजी है। न्यायिक या वित्तीय मामलों में सुधार होगा।
उपाय: शनिदेव को तिल का तेल अर्पित करें और शनिवार उपवास करें।
🔹 मूलांक 9 (जन्मतिथि 9, 18, 27)
ऊर्जा और साहस से भरा दिन। प्रतिस्पर्धा में सफलता मिलेगी। कार्यस्थल पर आपका वर्चस्व बढ़ेगा। लेकिन क्रोध पर नियंत्रण रखें।
उपाय: माँ दुर्गा की उपासना करें और लाल चंदन का तिलक लगाएं।
🌠 आज का अंक योग (7)
केतु का प्रभाव रहस्यमयता बढ़ाएगा। अंतर्ज्ञान प्रबल रहेगा — किसी निर्णय में मन की आवाज़ सुनना फायदेमंद साबित होगा।
आज का रंग: नीला | शुभ अंक: 7 | शुभ दिशा: उत्तर-पश्चिम

🪔 समापन संदेश:
“अंकों में छिपा है आपका भाग्य — बस सही दिशा में चलें, सफलता स्वयं आपका साथ देगी।”

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पीओके में बढ़ता मानवाधिकार संकट

पाकिस्तान की नीतियों से जनता त्रस्त, भारत से अंतरराष्ट्रीय मंच पर सशक्त हस्तक्षेप की मांग

जम्मू कश्मीर/जम्मू (राष्ट्र की परम्परा)
अखिल भारतीय स्वामी समर्थ गुरु पीठ, त्र्यंबकेश्वर (नासिक) से जुड़े सोशल वर्कर सनी कपाही, जो स्वामी समर्थ केंद्र, जम्मू–पुंछ में बाल संस्कार सेवक एवं स्टेट कोऑर्डिनेटर हैं, ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में लगातार बढ़ रहे मानवाधिकार उल्लंघनों पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

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उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के नियंत्रण वाले अज़ाद कश्मीर में स्थानीय नागरिक वर्षों से राजनीतिक उत्पीड़न, अभिव्यक्ति की आज़ादी पर रोक और सैन्य दमन का सामना कर रहे हैं। हाल के जनविरोधों ने स्पष्ट कर दिया है कि वहाँ की जनता अब कठपुतली सरकारों और झूठे लोकतंत्र के आवरण को स्वीकार करने से इनकार कर रही है। यह परिस्थिति अब गंभीर मानवाधिकार संकट का रूप ले चुकी है।

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सनी कपाही के अनुसार, भारत की सुरक्षा एजेंसियाँ सीमा क्षेत्रों में पूरी सतर्कता के साथ तैनात हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सेवा प्रमुख उपेन्द्र त्रिवेदी ने यह स्पष्ट किया है कि थल, वायु और नौसेना किसी भी नापाक हरकत का मुँहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, और आवश्यक सैन्य अभियान जारी हैं।

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उन्होंने भारत सरकार और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से अपील की कि संयुक्त राष्ट्र सहित अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को प्रखरता से उठाया जाए, ताकि पाकिस्तान के दमनकारी रवैये और मानवाधिकार हनन को विश्व समुदाय के सामने उजागर किया जा सके। साथ ही, सीमावर्ती नागरिकों की सुरक्षा, राहत और तात्कालिक आश्रय की व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

अंत में, सनी कपाही ने देशवासियों से अपील की कि वे अफवाहों से दूर रहें, शांति और एकता बनाए रखें, तथा किसी भी असामाजिक या देशविरोधी गतिविधि से स्वयं को दूर रखें। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग देश की एकता के विरुद्ध कार्य कर रहे हैं, उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई आवश्यक है।

दिवाली में आसमान छूता किराया: मलेशिया-सिंगापुर से महंगी लखनऊ, पटना की फ्लाइट

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। दिवाली नजदीक आते ही विमानन कंपनियों ने यात्रियों की जेब पर गहरी चोट कर दी है। उत्तर भारत के शहरों में घरेलू हवाई किराया इतना बढ़ गया है कि अब लखनऊ और पटना पहुंचना मलेशिया या सिंगापुर जाने से भी महंगा हो गया है।

यात्रा पोर्टल्स से प्राप्त जानकारी के अनुसार, 18 अक्टूबर 2025 को दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु से उत्तर भारत के प्रमुख शहरों के लिए टिकट दामों में 3 से 4 गुना तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

घरेलू रूट पर बढ़ा किराया

रूट 18 अक्तूबर का किराया 9 अक्तूबर का किराया

रूट 18 अक्तूबर का किराया9 अक्तूबर का किराया
दिल्ली – लखनऊ ₹13,618 – ₹18,738₹4,200
दिल्ली – पटना ₹15,248 – ₹26,072 ₹4,900
मुंबई – लखनऊ ₹17,401 – ₹29,466 ₹7,202
बंगलूरू – लखनऊ ₹16,429 – ₹23,656 ₹7,288
मुंबई – जयपुर ₹18,352 – ₹26,038 ₹6,500
मुंबई – भोपाल ₹14,500 – ₹18,048 ₹6,099

विदेश जाने में सस्ती उड़ानें

रूट किराया (₹ में)
दिल्ली – बैंकॉक ₹8,750
दिल्ली – दुबई ₹11,308
दिल्ली – मलेशिया ₹13,315
दिल्ली – सिंगापुर ₹17,799
दिल्ली – हांगकांग ₹16,282

यानी कि दिवाली पर दिल्ली से लखनऊ या पटना की टिकट 30,000 रुपये तक पहुंच गई है, जबकि मलेशिया या सिंगापुर जाने के लिए सिर्फ 17,000 रुपये में टिकट मिल रही है।

त्योहार पर घर लौटना बना मुश्किल

त्योहारों के समय ट्रेन और बसों का हाल भी कुछ ऐसा ही है।

वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम ट्रेनों में टिकटों की लंबी वेटिंग चल रही है।

बसों का किराया भी 4,000 से 5,000 रुपये तक पहुंच गया है।

ज्यादातर यात्रियों को अब यात्रा स्थगित करनी पड़ रही है या ऑफ-पीक डेट्स में टिकट बुक करनी पड़ रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, त्योहारों के समय एयरलाइंस डायनामिक प्राइसिंग के तहत मांग बढ़ने पर तुरंत किराया बढ़ा देती हैं।

UP Weather Today: उत्तर प्रदेश में बारिश का अलर्ट, 24 जिलों में भारी वर्षा की चेतावनी

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश में मानसून की विदाई से पहले मौसम ने फिर करवट ली है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने सोमवार, 6 अक्टूबर 2025 के लिए राज्य के कई हिस्सों में तेज बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की है।

मौसम विभाग के अनुसार, सहारनपुर से बदायूं तक ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है। वहीं लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, वाराणसी, गोरखपुर, प्रयागराज और कानपुर समेत 24 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

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किन जिलों में भारी बारिश की संभावना

लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, मेरठ, बरेली, मुरादाबाद, नोएडा, गाजियाबाद

इन जिलों में दोपहर बाद से शाम तक तेज बारिश, बिजली गिरने और हवा के झोंके चलने की संभावना है।

तापमान में गिरावट

बारिश के चलते प्रदेश में अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है।
रात का तापमान सामान्य से नीचे जा सकता है जिससे ठंडक का अहसास बढ़ेगा।

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किसानों और यात्रियों के लिए सलाह

खेतों में कटाई-मड़ाई के काम को कुछ दिन के लिए टाल दें।

बिजली गिरने की आशंका वाले क्षेत्रों में खुले में न जाएं।

यात्रा करने से पहले स्थानीय मौसम की जानकारी अवश्य लें।

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IND W vs PAK W: अजेय भारत का दमदार प्रदर्शन, पाकिस्तान 88 रन से परास्त — हरमनप्रीत की टीम ने फिर रचा इतिहास

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कोलंबो (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। महिला क्रिकेट विश्व कप 2025 में भारतीय टीम ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान को 88 रन से हराकर टूर्नामेंट में अपनी विजयी लय बरकरार रखी। आर. प्रेमदासा स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 247 रन बनाए, जिसके जवाब में पाकिस्तान की टीम 43 ओवर में 159 रन पर ऑलआउट हो गई।

भारत की ओर से क्रांति गौड़ और दीप्ति शर्मा ने तीन-तीन विकेट झटके, जबकि स्नेह राणा ने दो विकेट अपने नाम किए। इस जीत के साथ भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ महिला वनडे में 12-0 के अजेय रिकॉर्ड को और मजबूत किया।

पाकिस्तान की पारी – भारतीय गेंदबाजों का जलवा

लक्ष्य का पीछा करने उतरी पाकिस्तान की शुरुआत बेहद खराब रही। ओपनर मुनीबा अली (2) रन आउट होकर पवेलियन लौटीं — यह रन आउट दीप्ति शर्मा के शानदार डायरेक्ट हिट से हुआ।
इसके बाद क्रांति गौड़ (3/20) ने लगातार दो विकेट लेकर पाकिस्तान को गहरे संकट में डाल दिया। उन्होंने सदफ शमास (6) और आलिया रियाज (2) को आउट किया, जिससे पाकिस्तान का स्कोर 26/3 हो गया।

एक ओर जहां सिदरा अमीन (81) ने धैर्यपूर्वक पारी संभाली, वहीं नतालिया परवेज (33) के साथ 69 रन की साझेदारी भी टीम को बचा नहीं सकी। साझेदारी टूटते ही भारतीय स्पिनरों ने मैच पर पूरी तरह कब्जा कर लिया।
अंततः पाकिस्तान की टीम 43वें ओवर में 159 रन पर सिमट गई।

भारत की पारी – ऋचा घोष और हरलीन देओल ने दिखाया दम

भारतीय ओपनर प्रतिका रावल (31) ने टीम को तेज शुरुआत दी। हालांकि, स्मृति मंधाना (23) और रावल दोनों ही जल्दी आउट हो गईं।
इसके बाद हरलीन देओल (46) ने कप्तान हरमनप्रीत कौर (19) और जेमिमा रॉड्रिग्स (32) के साथ महत्वपूर्ण साझेदारी कर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया।

अंत में ऋचा घोष (35 रन, 20 गेंदों पर) ने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए तीन चौके और दो छक्के लगाए।
भारतीय टीम ने निर्धारित 50 ओवर में 247/9 रन बनाए।

पाकिस्तान की ओर से डायना बेग सबसे सफल गेंदबाज रहीं, जिन्होंने चार विकेट चटकाए।
सादिया इकबाल और फातिमा सना को दो-दो सफलता मिलीं।

भारत का अजेय रिकॉर्ड कायम

इस जीत के साथ भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ महिला वनडे मुकाबलों में 12वीं जीत दर्ज की।
हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में टीम इंडिया लगातार बेहतरीन प्रदर्शन कर रही है और विश्व कप में खिताब की प्रबल दावेदार बनकर उभरी है।

दिवाली 2025: जानें कब है धनतेरस, छोटी दिवाली, दिवाली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज — पूरी तिथियां और मुहूर्त

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(राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। दिवाली, दीपों का त्योहार, हर साल कार्तिक अमावस्या को मनाया जाता है। यह दिन अच्छाई की बुराई पर और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक माना जाता है। घरों और मंदिरों में दीपों की जगमगाहट, मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा, और खुशियों का उत्सव पूरे देश में मनाया जाता है।
दिवाली का पर्व केवल एक दिन का नहीं है — यह पांच दिवसीय उत्सव होता है, जो धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज तक चलता है।

इस वर्ष दिवाली 20 अक्तूबर 2025 को है। आइए जानते हैं पूरे दिवाली पर्व की तिथियां और शुभ मुहूर्त:

धनतेरस 2025

तिथि प्रारंभ: कार्तिक कृष्ण पक्ष त्रयोदशी, 18 अक्तूबर 2025, दोपहर 12:18 बजे

तिथि समाप्त: 19 अक्तूबर 2025, दोपहर 1:51 बजे

धनतेरस इस वर्ष 18 अक्तूबर 2025 को मनाया जाएगा।

छोटी दिवाली / नरक चतुर्दशी 2025

तिथि: 19 अक्तूबर 2025

इस दिन शाम को घर के मुख्य द्वार पर यम देव के लिए चार मुखी दीपक जलाए जाते हैं। दीपदान और सकारात्मक ऊर्जा के लिए पूजा की जाती है।

दिवाली 2025

तिथि प्रारंभ: 20 अक्तूबर 2025, दोपहर 3:44 बजे

तिथि समाप्त: 21 अक्तूबर 2025, शाम 5:54 बजे

लक्ष्मी पूजन शुभ मुहूर्त: 20 अक्तूबर 2025, शाम 7:08 बजे से रात 8:18 बजे तक।
इस वर्ष दिवाली 20 अक्तूबर 2025 को मनाई जाएगी।

गोवर्धन पूजा 2025

तिथि: 22 अक्तूबर 2025

पंचांग अनुसार, कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 21 अक्तूबर शाम 5:54 बजे होगी और समाप्ति 22 अक्तूबर रात 8:16 बजे।

भाई दूज 2025

तिथि: 23 अक्तूबर 2025

कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि प्रारंभ 22 अक्तूबर रात 8:16 बजे और समाप्त 23 अक्तूबर रात 10:46 बजे।

तिलक मुहूर्त: 23 अक्तूबर 2025, दोपहर 1:13 बजे से 3:28 बजे तक।

डिस्क्लेमर – यह जानकारी धार्मिक ग्रंथों, पंचांग और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। तिथियां और मुहूर्त स्थानीय समय और पंचांग के आधार पर भिन्न हो सकते हैं। कृपया अंतिम पूजा समय की पुष्टि अपने स्थानीय पंडित या पंचांग से अवश्य करें।