Wednesday, July 8, 2026
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दिल्ली सरकार की सुप्रीम कोर्ट से अपील: दिवाली पर केवल प्रमाणित हरित पटाखों को मंज़ूरी देने की मांग

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को घोषणा की कि उनकी सरकार दिवाली के अवसर पर प्रमाणित हरित पटाखों (Green Crackers) के इस्तेमाल की अनुमति के लिए सुप्रीम कोर्ट से अपील करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार लिखित रूप से न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखेगी और केवल उन पटाखों की मंज़ूरी मांगेगी जो पर्यावरणीय मानकों और आधिकारिक दिशानिर्देशों का पूरी तरह पालन करते हों।

सीएम गुप्ता ने कहा कि इस प्रस्ताव का उद्देश्य जनभावनाओं और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना है, ताकि दिल्लीवासी दिवाली का पर्व आनंद और जिम्मेदारी दोनों के साथ मना सकें। उन्होंने कहा कि दिवाली भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है, और करोड़ों लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए सरकार हरित पटाखों के सीमित उपयोग की अनुमति का अनुरोध करेगी।

मुख्यमंत्री ने यह भी दोहराया कि दिल्ली सरकार प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सुप्रीम कोर्ट के किसी भी निर्णय या निर्देश का कड़ाई से पालन किया जाएगा।

सीएम गुप्ता ने कहा —

“यदि न्यायालय अनुमति देता है, तो केवल वे पटाखे इस्तेमाल किए जाएंगे जो अधिकृत संस्थानों द्वारा निर्मित और सक्षम प्राधिकरणों द्वारा प्रमाणित हों। सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि सभी सुरक्षा और पर्यावरण मानदंडों का पालन हो।”

इससे पहले रविवार को दिल्ली पुलिस ने दिवाली से पहले राष्ट्रीय राजधानी में 1,700 किलोग्राम से ज़्यादा प्रतिबंधित पटाखे ज़ब्त किए और सात लोगों को गिरफ़्तार किया। पुलिस उपायुक्त पंकज कुमार ने बताया कि अपराध शाखा ने द्वारका, रोहिणी, उत्तम नगर, शास्त्री नगर, मुकुंदपुर और शाहदरा में ये अभियान चलाए।

यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के पटाखों के भंडारण और बिक्री पर नियंत्रण संबंधी हालिया निर्देशों के अनुरूप की गई। ज्ञात हो कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अक्टूबर से लेकर सर्दियों तक लगातार खराब रहती है और पटाखों के कारण प्रदूषण स्तर में तेज़ी आती है।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025: मतदान की तारीखें घोषित, 7.42 करोड़ मतदाता करेंगे भागीदारी

6 और 11 नवंबर को मतदान, 14 को आएगा नतीजा 7.42 करोड़ मतदाता तैयार, बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखें घोषित

पटना (राष्ट्र की परंपरा) – बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए निर्वाचन आयोग ने मतदान कार्यक्रम घोषित कर दिया है। राज्य में दो चरणों में मतदान 6 और 11 नवंबर को होगा, जबकि मतगणना 14 नवंबर को होगी। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि बिहार में कुल मतदाताओं की संख्या 7.42 करोड़ है, जिनमें पुरुष मतदाता 3.92 करोड़ और महिला मतदाता 3.50 करोड़ हैं।
243 सदस्यीय विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर को समाप्त हो रहा है।

राजनीतिक दलों ने निर्वाचन आयोग से अनुरोध किया था कि चुनाव छठ पर्व के तुरंत बाद आयोजित किए जाएं ताकि बाहर काम करने वाले लोग त्योहार के दौरान घर लौटकर मतदान में भाग ले सकें। उल्लेखनीय है कि पिछली बार 2020 में बिहार विधानसभा चुनाव कोविड-19 महामारी के बीच तीन चरणों में संपन्न हुए थे।

इस चुनाव में मतदाता संख्या और मतदान प्रक्रिया को लेकर विशेष इंतजाम किए जाएंगे ताकि

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जेन-ज़ी और भारत की चुनौतियाँ

युवा ऊर्जा को दिशा देने की ज़रूरत

संपादकीय

   भारत आज विश्व की सबसे युवा आबादी वाला देश है। यही युवा, यही जेनरेशन ज़ी, देश के भविष्य का चेहरा है। इंटरनेट, स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के युग में जन्मी यह पीढ़ी तेज़, जागरूक और आत्मविश्वासी है। लेकिन इस गति के साथ-साथ इसके सामने कुछ ऐसी चुनौतियाँ भी हैं, जो यदि समय रहते न सुलझाई गईं, तो देश के विकास मार्ग को प्रभावित कर सकती हैं।
       डिजिटल दुनिया ने इस पीढ़ी को अभूतपूर्व अभिव्यक्ति का मंच दिया है, लेकिन इसके साथ पहचान का भ्रम भी गहराया है। सोशल मीडिया की दुनिया में जहाँ ‘लाइक्स’ और ‘फॉलोअर्स’ सफलता का पैमाना बन चुके हैं, वहीं युवाओं में आत्मविश्वास और आत्म-संतोष का संकट बढ़ा है। लगातार तुलना और प्रतिस्पर्धा के दबाव में कई युवा मानसिक तनाव और अवसाद से जूझ रहे हैं।
     भारत की शिक्षा प्रणाली अब भी रटंत और परीक्षा केंद्रित है, जबकि जेन-ज़ी क्रिएटिविटी, नवाचार और व्यावहारिक कौशल की ओर झुकाव रखती है। ऐसे में शिक्षा और रोजगार के बीच की खाई गहरी होती जा रही है। एआई और ऑटोमेशन के बढ़ते दौर में पारंपरिक नौकरियाँ सिकुड़ रही हैं और नए कौशलों की मांग बढ़ रही है। लेकिन नीति और व्यवस्था उस गति से नहीं बदल रही, जितनी तेज़ यह पीढ़ी बदल रही है।
     रील्स, गेमिंग और ऑनलाइन ट्रेंड्स की लत ने ध्यान और धैर्य को कम किया है। जेन-ज़ी की एक बड़ी संख्या ‘वर्चुअल दुनिया’ में जी रही है, जहाँ सफलता त्वरित है लेकिन स्थायित्व नहीं। यह प्रवृत्ति उन्हें वास्तविक चुनौतियों और ज़मीनी अनुभवों से दूर कर रही है।
    यह पीढ़ी जागरूक है, संवेदनशील भी। जलवायु परिवर्तन, लैंगिक समानता और मानवाधिकार जैसे विषयों पर आवाज़ उठाने में पीछे नहीं रहती। लेकिन आंदोलन की स्थायित्व क्षमता कम है। सोशल मीडिया अभियानों से आगे बढ़कर वास्तविक सामाजिक परिवर्तन के लिए दीर्घकालिक समर्पण की ज़रूरत है।
     फिर भी, उम्मीद जेन-ज़ी से ही है। यही वह पीढ़ी है जो परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन बना सकती है। स्टार्टअप कल्चर, डिजिटल नवाचार और सामाजिक उद्यमिता के क्षेत्र में उसके प्रयास भारत को नई ऊँचाइयों पर पहुँचा सकते हैं। सवाल बस यही है — क्या हम इस ऊर्जा को सही दिशा दे पा रहे हैं?
        भारत का भविष्य उसी दिन सुनिश्चित होगा, जब उसकी युवा पीढ़ी आत्ममंथन के साथ आत्मनिर्माण की दिशा में बढ़ेगी। सरकार, समाज और शिक्षा जगत को मिलकर ऐसा वातावरण बनाना होगा, जहाँ यह पीढ़ी न केवल तकनीक में आगे बढ़े बल्कि मूल्य, जिम्मेदारी और संवेदनशीलता में भी अग्रणी बने। तभी भारत का अमृतकाल साकार होगा।

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“जयशंकर का स्पष्ट संदेश: अमेरिका से व्यापार समझौता, लेकिन भारत की ‘लक्ष्मण रेखाओं’ का सम्मान अनिवार्य”

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत–अमेरिका संबंधों में चल रहे तनाव के बीच एक स्पष्ट संदेश दिया है कि किसी भी व्यापारिक समझौते में भारत की ‘लक्ष्मण रेखाओं’ का सम्मान करना अनिवार्य होगा। जयशंकर ने कौटिल्य इकोनॉमिक एन्क्लेव में “उथल-पुथल के दौर में विदेश नीति का स्वरूप” विषय पर आयोजित परिचर्चा में कहा कि भारत और अमेरिका के बीच कुछ विवादास्पद मुद्दे हैं, जिनमें से कई प्रस्तावित व्यापार समझौतों के अंतिम रूप न देने से जुड़े हैं।

जयशंकर ने कहा, “अंत में जो भी समझौता हो, अमेरिका के साथ व्यापारिक साझेदारी जरूरी है क्योंकि वह दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है। लेकिन यह समझौता हमारी आधारभूत सीमाओं और लक्ष्मण रेखाओं के सम्मान पर आधारित होना चाहिए। कुछ मुद्दों पर बातचीत संभव है, जबकि कुछ पर नहीं।”

विदेश मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत और अमेरिका के बीच संबंधों में तनाव का असर बातचीत के सभी पहलुओं पर नहीं पड़ रहा है। उन्होंने कहा, “मुद्दों पर चर्चा और समाधान की आवश्यकता है और हम इसी दिशा में काम कर रहे हैं। कई क्षेत्रों में संबंध पहले से बेहतर हैं।”

विश्लेषकों के अनुसार, यह बयान केवल कूटनीतिक सफाई नहीं बल्कि भारत की नव-सशक्त विदेश नीति का संकेत है। भारत अब वैश्विक दबावों के आगे झुकने वाला नहीं है और समानता, सम्मान और साझा हितों के आधार पर ही अंतरराष्ट्रीय संबंध बनाएगा। टैरिफ विवाद अस्थायी हो सकते हैं, लेकिन रणनीतिक साझेदारी दीर्घकालिक बनी रहेगी। जयशंकर के शब्दों में, “समस्याएं स्वाभाविक हैं, पर संकट नहीं।”

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मन की पुकार

जब तक साँस है तब तक आस है, प्रेम है प्यार है संघर्ष और खटास है,मेल है मिलाप है, दुआ और श्राप है, बुराई भी भलाई भी और संताप है।भाव हैं, कुभाव है, स्नेह, दुर्भाव हैं,हार है, जीत है, मंज़िल है पड़ाव हैं, मिलन है विरह है, घर व वनवास है,निंदा है प्रशंसा है, मर्ज़ है, उपचार है।द्वन्द्व प्रतिद्वन्द्व हैं, तिमिर है प्रकाश है, अमृत है तो विष है, दिन है तो रात है, आना भी है, तो जाना, निभाना भी है, अपने पराये, उन्हें अपना बनाना भी है।हँसता चेहरा, हँसकर किया काम है,हँसना शान है, और काम पहचान है,काम में हो गलती, उसका सुधार है, ग़लतियाँ बुरी नहीं, बुरा अनदेखी है।अपना कुछ नहीं, केवल प्रेम प्यार है,आदित्य सब अस्थिर ही एक सोच हैदेकर भूल जाना है, पाया तो याद है,जीवन नश्वर पर मृत्यु निर्विवाद है।डॉ कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’

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वन्यजीव संघर्ष पर अंकुश लगाने के लिए मंत्री ने दिए सख्त निर्देश, कहा—संसाधनों की कमी नहीं बनने दी जाएगी बाधा

बहराइच (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) वन, पर्यावरण, जन्तु उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, डॉ. अरूण कुमार ने सोमवार को जनपद भ्रमण के दौरान लोक निर्माण विभाग निरीक्षण भवन, बहराइच में समीक्षा बैठक आयोजित की। बैठक में जनप्रतिनिधियों, वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक तथा मुख्य विकास अधिकारी सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों की उपस्थिति रही।

बैठक में मंत्री डॉ. अरूण कुमार ने मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं पर नियंत्रण के लिए संचालित गतिविधियों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिया कि जनसुरक्षा को शीर्ष प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि रेस्क्यू आपरेशन में किसी भी प्रकार की संसाधनों की कमी आड़े नहीं आएगी।

मंत्री ने प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) बहराइच को निर्देशित किया कि रेस्क्यू टीमों की संख्या में वृद्धि की जाए तथा पेट्रोलिंग वाहनों की संख्या भी बढ़ाई जाए। उन्होंने कहा कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों व नागरिकों से निरंतर संवाद बनाए रखें और उनसे प्राप्त सूचनाओं पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें।

डॉ. कुमार ने नदियों के किनारे बसे गांवों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए तथा कहा कि मछुआ समुदाय का सहयोग लेकर वन्यजीवों के मूवमेंट की जानकारी समय रहते प्राप्त की जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रभावित गांवों को हिंसक वन्यजीवों की समस्या से मुक्त कराने हेतु पूरी सजगता और तत्परता के साथ कार्य करें।

मंत्री ने जनजागरूकता अभियान पर बल देते हुए कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को जागरूक किया जाए कि बच्चे व महिलाएं अकेले बाहर न निकलें। बाहर जाने की स्थिति में समूह में जाएं और हाथ में डण्डा रखें। उन्होंने लोगों से अपील की कि शौच आदि के लिए बाहर न जाएं बल्कि घर में बने शौचालयों का उपयोग करें। साथ ही, रात में घर के बाहर न सोने की सलाह भी दी।

बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष मंजू सिंह, विधान परिषद सदस्य पदमसेन चौधरी एवं डॉ. प्रज्ञा त्रिपाठी, विधायक महसी सुरेश्वर सिंह, प्रमुख सचिव वन एवं पर्यावरण विभाग अनिल कुमार, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) अनुराधा वेमुरी, मुख्य वन संरक्षक मध्य क्षेत्र रेणु सिंह, वन संरक्षक देवीपाटन वृत्त सेम्मारन, जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी, पुलिस अधीक्षक रामनयन सिंह, मुख्य विकास अधिकारी मुकेश चन्द्र तथा प्रभागीय वनाधिकारी डॉ. राम सिंह यादव सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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राम-भरत मिलन के अवसर पर सजी शोभायात्रा, आंसुओं और भावनाओं का संगम

बहराइच (राष्ट्र की परम्परा)। रविवार की रात शहर में श्री मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम लीला कमेटी द्वारा ऐतिहासिक भरत मिलाप कार्यक्रम का आयोजन किया गया। “राजीव लोचन स्रवत जल तन ललित पुलकावलि बनी, अति प्रेम हृदयँ लगाइ अनुजहि मिले प्रभु त्रिभुअन धनी” की लयबद्ध पंक्तियों के बीच भगवान श्रीराम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुध्न का भावपूर्ण मिलन हुआ। इस दौरान दर्शकों की आंखों में आंसू छलक उठे। जय श्रीराम और हर-हर महादेव के जयघोष से सैकड़ों श्रद्धालु रोमांच और उत्साह से सराबोर रहे।

भरत मिलाप का जुलूस स्थानीय फायर स्टेशन चौराहे से शुरू होकर बिसातखाने पर समाप्त हुआ। रास्ते भर श्रद्धालुओं ने भगवान राम की आरती उतारी और पुष्प वर्षा कर उनका स्वागत किया। ग्रामीण अंचलों में सजी झांकियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। जुलूस में भगवान राम, सीता, लक्ष्मण, शत्रुघ्न, भरत और हनुमान की शोभा यात्रा निकाली गई।

बिसातखाना लाइन में भगवान राम और भरत के मिलाप का मंचन हुआ। रावण वध और उसकी सोने की लंका को राख करने की सूचना मिलने के बाद भरत अयोध्या से राम से मिलने के लिए आए। मंचन के दौरान भगवान राम और भरत के मिलन के समय राम की आंखों से आंसू छलक पड़े। छतों पर मौजूद महिलाओं ने पुष्प वर्षा कर उनका स्वागत किया।

मुख्य आयोजक और प्रमुख अतिथि:
रामलीला कमेटी के अध्यक्ष श्याम करण टेकड़ीवाल के नेतृत्व में शोभायात्रा निकाली गई। कार्यक्रम में भाजपा जिलाध्यक्ष बृजेश पाण्डेय, राधेश्याम त्रिपाठी, जय जय अग्रवाल, राहुल रॉय, कमल शेखर गुप्ता, मीडिया प्रभारी सचिन श्रीवास्तव, दीपिक सोनी, सुमित खन्ना, नन्हे लाल लोधी, विनय जैन, सुरेश गुप्ता, श्रवण शुक्ला, वैभव जैन, आनंद गुप्ता, के के सक्सेना, अंशुमान यज्ञसैनी, अजय सिंह सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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युवा प्रतिभाओं को मंच मिलेगा: मऊ में आयोजित होगा जिला स्तरीय उत्सव

मऊ (राष्ट्र की परम्परा) मुख्य विकास अधिकारी प्रशांत नागर की अध्यक्षता में युवा उत्सव एवं साइंस मेला को लेकर विकास भवन सभागार में बैठक संपन्न हुई। बैठक में आगामी जिला स्तरीय कार्यक्रम की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की गई।

जिला युवा कल्याण अधिकारी काशीनाथ ने बताया कि इस उत्सव में डिक्लेमेशन, कहानी लेखन, कविता लेखन, पेंटिंग, लोक नृत्य समूह, लोकगीत समूह और इनोवेशन साइंस मेला जैसी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। प्रतिभागियों की आयु सीमा 15 से 29 वर्ष निर्धारित की गई है। प्रतियोगिता में शामिल होने वाले प्रतिभागियों को अपने हाई स्कूल प्रमाण पत्र या आधार कार्ड की छाया प्रति साथ लानी होगी।

जिला स्तर पर विजयी युवाओं को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा। इसके बाद विजयी प्रतिभागियों को मंडल, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। राज्य स्तर के विजेताओं को 29वें राष्ट्रीय युवा उत्सव 2026 में प्रतिभाग करने का मौका मिलेगा।

मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि इनोवेशन ट्रैक के अंतर्गत युवाओं को विज्ञान और तकनीक के अपने नवीनतम प्रोजेक्ट प्रस्तुत करने का मंच मिलेगा। इससे युवाओं में विज्ञान एवं तकनीक के प्रति रुचि बढ़ेगी और समाज के विकास में योगदान देने वाले युवा वैज्ञानिक तैयार होंगे।

मुख्य विकास अधिकारी ने युवाओं से अपील की कि वे अधिक से अधिक संख्या में प्रतिभाग करें और अपनी कला का प्रदर्शन कर जनपद का नाम राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर रोशन करें।

बैठक में जिला सूचना विज्ञान अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, जिला युवा अधिकारी, नेहरू युवा केंद्र और समस्त क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारी उपस्थित रहे।

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पटना मेट्रो की रफ्तार से गूंजा बिहार: नीतीश कुमार ने किया ऐतिहासिक शुभारंभ

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।लंबे इंतजार के बाद बिहार की राजधानी पटना ने सोमवार को एक ऐतिहासिक दिन देखा, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य की पहली मेट्रो ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस उद्घाटन के साथ ही बिहार आधुनिक परिवहन के नए युग में प्रवेश कर गया।

पहले चरण में भूतनाथ रोड से न्यू आईएसबीटी तक 4.3 किलोमीटर लंबे रूट पर मेट्रो सेवा शुरू की गई है। यह मार्ग फिलहाल तीन प्रमुख स्टेशनों — न्यू आईएसबीटी, जीरो माइल और भूतनाथ रोड — के बीच परिचालित होगा।

बिहार की पहचान से सजी आधुनिक मेट्रो

पटना मेट्रो के डिब्बों को खास अंदाज में सजाया गया है। कोचों के अंदर और बाहर मधुबनी पेंटिंग की झलक बिहार की संस्कृति का गौरव बढ़ा रही है। साथ ही गोलघर, महावीर मंदिर, महाबोधि वृक्ष, नालंदा के खंडहर और बुद्ध स्तूप जैसे ऐतिहासिक स्थलों के आकर्षक चित्र भी लगे हैं।

किराया और समय-सारिणी

यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए किराया बेहद किफायती रखा गया है —
आईएसबीटी से जीरो माइल : ₹15
न्यू आईएसबीटी से भूतनाथ रोड : ₹30
फिलहाल मेट्रो सेवा सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक उपलब्ध रहेगी। हर 20 मिनट के अंतराल पर ट्रेनें चलेंगी और प्रतिदिन 40 से 42 फेरे लगाए जाएँगे।
तकनीक और सुरक्षा में अत्याधुनिक व्यवस्था
हर कोच में 360 डिग्री सीसीटीवी कैमरे, दो इमरजेंसी बटन, और माइक्रोफोन की सुविधा दी गई है। किसी भी आपात स्थिति में यात्री सीधे ड्राइवर से संवाद कर सकेंगे और कंट्रोल रूम को लाइव फुटेज भेजा जाएगा।
प्रत्येक डिब्बे में 138 सीटें हैं, जबकि 945 यात्री खड़े होकर यात्रा कर सकते हैं। अगले चरण की आधारशिला भी रखी गई
उद्घाटन समारोह के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कॉरिडोर-1 के तहत पटना जंक्शन सहित छह भूमिगत स्टेशनों और 9.35 किमी लंबी सुरंग की भी आधारशिला रखी। इससे राजधानी का मेट्रो नेटवर्क और भी विस्तारित होगा।

जनता में उमंग, नई पहचान की ओर कदम

पहली ही दिन बड़ी संख्या में लोग मेट्रो में सफर का अनुभव लेने पहुंचे। आधुनिक तकनीक, स्वच्छता और पारंपरिक कला के संगम ने पटना मेट्रो को खास बना दिया है।
यह परियोजना न केवल राजधानी की ट्रैफिक समस्या का समाधान करेगी, बल्कि बिहार के विकास की गति को भी नई दिशा देगी।

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दीपदान व्रत: सबसे श्रेष्ठ व्रत, जीवन में सुख, सौभाग्य और मोक्ष का स्रोत

(राष्ट्र की परम्परा के लिए – गरिमा सिंह -अजमेर)

ज्योति ही जिसका मुख है, वह अग्नि (एवं दीप) हमारे लिये कल्याणकारक हो, मित्र, वरुण और अश्विनी कुमार हमारे लिये कल्याणप्रद हों।
दीपदान का अर्थ – दीपक प्रज्वलित करके रखना। विभिन्न देवालयों, मन्दिरों, आवासों, भवनों, आंगन, तुलसा जी के चौरों, नदियों, पवित्र सरोवरों में प्रवाहित करना अथवा प्रज्वलित करने को दीपदान कहते हैं। संक्षेप में यह समझें कि दीपक को प्रज्वलित करना ही दीपदान है।

दीपदान की महत्ता विभिन्न शास्त्रों, पुराणों, संहिता ग्रंथों एवं तांत्रिक ग्रंथों में वर्णित है। अग्नि पुराण के 200वें अध्याय से दीपदान व्रत की महिमा एवं विदर्भ राजकुमारी ललिता का उपाख्यान शीर्षक से दीप दान की गरिमा का वर्णन किया गया है-

अग्निदेव कहते हैं- हे वसिष्ठ, अब मैं भोग और मोक्ष को प्रदान करने वाले दीपदान व्रत का वर्णन करता हूँ। जो मनुष्य देव मन्दिर अथवा ब्राह्मण के गृह में एक वर्ष तक दीपदान करता है, वह सब कुछ प्राप्त कर लेता है। अतः साधक को किसी देवालय में एक वर्ष तक दीपदान करना चाहिये।

चातुर्मास में दीपदान करने वाला मृत्यु के बाद विष्णु लोक को जाता है। कार्तिक मास में दीपदान करने वाला स्वर्ग लोक को प्राप्त होता है। दीपदान से बढ़कर न कोई व्रत है, न था और न होगा।

दीपदान से आयु और नेत्र ज्योति की प्राप्ति होती है। दीपदान से धन और पुत्रादि की प्राप्ति होती है। दीपदान करने वाला सुख-सौभाग्य युक्त होकर स्वर्गलोक में देवताओं द्वारा पूजित होता है। विदर्भ राजकुमारी ललिता दीपदान के पुण्य से ही राजा चारूधर्मा की पत्नी और उसकी सौ रानियों में प्रमुख हुईं। उस साध्वी ने एक बार विष्णु मन्दिर में सहस्र दीपों का दीपदान किया। उसी से उसे यह सुख-सौभाग्य प्राप्त हुआ। और वह चारूधर्मा की प्रधान पटरानी बन गयीं।

राजकुमारी ललिता की बातें सुनकर चारूधर्म की सौ पत्नियों ने उससे दीपदान का महत्त्व पूछा, तब राजकुमारी ललिता ने दीपदान का महत्त्व इस प्रकार बताया – बहुत पहले की बात है, सौवीर राजा के यहाँ मैत्रेय नामक पुरोहित थे। उन्होंने देविका नदी के तट पर भगवान विष्णु का मन्दिर बनवाया। कार्तिक मास में उन्होंने नित्य दीपदान किया। एक दिन बिलाव (बिल्ली) के डर से भागती हुई चुहिया वहाँ छिप गयी। दीपक की बाती कम हो रही थी। उस चुहिया ने अपने मुख के अग्रभाग से बाती को बढ़ा दिया। बत्ती के बढ़ने से वह बुझता हुआ दीपक प्रज्वलित हो उठा। कुछ देर बाद दीपक बुझ गया, तब बिल्ली ने चुहिया को पकड़कर मार डाला। मृत्यु के बाद वही चुहिया (मैं) राजकुमारी हुई और राजा चारूधर्मा की सौ रानियों में प्रमुख पटरानी हुई। इस प्रकार मेरे (चुहिया-जन्म) द्वारा बिना सोचे-समझे विष्णु मंदिर के दीपक की वर्तिका बढ़ा देने के पुण्य का यह राजसी फल भोग रही हूँ। इसी पुण्य के फलस्वरूप मुझे अपने पूर्व जन्म का ज्ञान भी है। यही कारण है कि मैं सदा दीपदान किया करती हूँ। यह रहस्य बताकर उसने दीपदान का महत्त्व बताया।
एकादशी को विष्णु मन्दिर में दीपदान करने वाला सांसारिक सुख भोगकर विमानारूढ़ होकर स्वर्ग जाता है।
मन्दिर का दीपक हरण (चुराने) करने वाला गूंगा, मूर्ख और अन्धा हो जाता है। वह अंधराभिक्षु नरक में जाता है।
प्रदोष व्रत करने वाले शिव मन्दिर में दीपदान करते हैं तो परमानन्द को प्राप्त करशिव लोक जाते हैं।
महुये के पेड़ के नीचे मण्डप बनाकर काली देवी की पूजा में महुये का दीपदान करने वाला अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर राज्य प्राप्त करता है और मृत्योपरांत मुक्ति का अधिकारी होता है।
नवरात्र में दीपदान, अखण्ड दीपदान करने वाला भोग और मोक्ष का अधिकारी विहारिणी के शरण चरण में स्थान पाता है। अग्निदेव कहते हैं कि ललिता की बार्ता मे प्रभावित होकर उसकी सौ पत्नियों ने दीपदान करना प्रारम्भ कर दिया। दीपदान के पुण्य होता है। यदि माँ की भक्ति-भावना चाहता है तो ऐसा व्यक्ति मृत्यु के बाद मणिदीप से सांसारिक सुख भोगने के बाद वे स्वर्ग का सुख पा गया । अतः दीपदान सभी व्रतों में श्रेष्ठ और विशेष फलदायक है।

भारतीय संस्कृति एवं दर्शन में दीपदान का महत्व –

कुछ कम नहीं है। पुरुषोत्तम मास में, कार्तिक एवं माघ माह में तथा विभिन्न तीज-त्योहारों में प्रत्येक अमावस्या को, विशेषकर दीपावली के दिन पवित्र नदियों, सरोवरों एवं तीर्थों की जलधारा में दीपदान किया जाता है। प्रातः अथवा सायंकाल स्नानादि करके सूर्योदय अथवा सूर्यास्त के समय बहते जल में दीपदान करना अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करना होता है। सूर्योदय के पूर्व जो दीपदान किया जाता है, वह इस पार्थिव देह को, छोड़ जाते हुये प्राण को आकाशीय मार्ग में प्रकाश दिखाता है तथा यमराज को प्रसन्न करता है। दीपावली के बाद पड़ने वाली भैयादूज को जो दीपदान किया जाता है, इससे यमराज प्रसन्न होते हैं। दीपदान करने वाले के संकटों का हरण करके अकाल मृत्यु से रक्षा करते हैं और इसके पितरों को सद्गति देते हैं। ऐसा दीपदान व्यक्ति को विभिन्न समस्याओं के समाधान दिखाता है।

विभिन्न पर्वो, तिथियों एवं नदियों में दीपदान करने का अलग-अलग महत्त्व एवं अलग-अलग फल है, किन्तु मेरा कहना यह है कि व्यक्ति जिस भावना को लेकर, जैसी प्रार्थना से दीप-दीपेश्वर को प्रसन्न करेगा और फिर दीपदान करेगा, वैसा ही फल उसको मिलेगा। दक्षिण भारत में दीपदान की सोलह विधियां बताई गई हैं। 1225 ई. में एक चौल ताम्र पात्र में मन्दिर के नन्दा-दीपकों को प्रज्वलित करने के लिये घी तथा गायों का दान दिया जाता था। साथ ही उन गायों के भरण-पोषण एवं पालन के लिये एक निश्चित व्यय दीपदान करने वाले को वहन करना पड़ता था । सोलह प्रकार के दीपदान से सोलह प्रकार की आकांक्षाओं की पूर्ति की जाती थी। जिस भावना से दीपदान किया जायेगा, वैसा प्रतिफल एवं मनोकामनाओं की पूर्ति दीप-देवता द्वारा प्राप्त होगी।

मन्दिरों में स्थाई रूप से प्रज्वलित रहने वाले अखण्ड दीपों के लिए घृतादि की व्यवस्था जो व्यक्ति करता है अथवा जो उसका खर्च वहन करता है। उसको भी दीपदान का फल मिलता है।
दीपदान के विभिन्न लाभों में से कुछ का वर्णन किया जा रहा है। दीपों को जल में प्रवाहित करने के पूर्व विधिवत् पूजा करनी चाहिये, फिर उनसे प्रार्थना कर आत्म निवेदन करना चाहिये। किस प्रकार के दीपदान से क्या प्राप्ति हो सकती है, इसके बारे में यहां बताया जा रहा है-

-यदि कोई विधवा कार्तिक मास के सारे दिनों में सूर्योदय के पूर्व यमुना नदी में दीपदान करती है तो उसके स्वर्गीय पति को पूर्णगति प्राप्त होगी तथा उसके पुत्रों का सुख-सौभाग्य बढ़ेगा। स्वयं उसे श्रीकृष्ण का प्रेम मिलेगा।

-यदि विवाह योग्य कन्या माघ मास में गंगा नदी में दीपदान करती है तो उसका विवाह शीघ्र मनोनुकूल एवं श्रेष्ठ पति से होगा। दाम्पत्य सुख मिलेगा।

-यदि कोई सुहागिन माघ माह में सायंकाल सूर्योदय के बाद दीपदान करती है तो उसका दाम्पत्य जीवन सुखमय होगा और पति दीर्घायु होगा।

-यदि कोई विद्यार्थी किसी नदी में सूर्योदय के समय दीपदान करता है तो उस पर सरस्वती की कृपा होगी और उसका ज्ञान बढ़ेगा।

-यदि कोई भक्त पुष्कर सरोवर में दीपदान करता है तो उसे संन्यास, भक्ति एवं मरने पर ब्रह्म लोक की सद्गति प्राप्त होगी।

-हरिद्वार में दीपदान करने वाला, प्रयाग में दीपदान करने वाला, बनारस में दीपदान करने वाला, यश, वैभव एवं अनेकानेक सम्पत्तियों का स्वामी होता है।

-उज्जैन के महाकाल मन्दिर में दीपदान करके नदी में कोई दीपदान करता है तो वह दीर्घायु होता है तथा उसकी अकाल मृत्यु कभी नहीं होती।

-नर्मदा तट पर फाल्गुन मास में दीपदान करने वाला धन-सम्पत्ति एवं वैभव प्राप्त करता है और मृत्योपरान्त शिव सामुज्य पाता है।

-क्षिप्रा की जल धाराओं में दीपदान करने वाला संमति-काव्य, लेखन से ख्याति एवं धन प्राप्त करता है। मृत्यु के बाद शिवलोक वासी होता है।

-प्रयाग के संगम अथवा किन्हीं दो नदियों के संगम पर दीपदान करने वाला यशस्वी होता है। वह राजनीति निपुण राजपुरुष होता है।

-सतलज, राप्ती तथा सिन्धु नदियों में दीपदान करने वाला सब भोगों को भोगकर मोक्ष प्राप्त करता है। ऐसे फल संगम तीर्थ में भी मिलते हैं।

-यदि कोई कुष्ठ रोगी पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करने के बाद दीपदान करता है तो 41 दिनों में उसे लाभ मिलता है। जल एवं औषधियों से वह ठीक हो जाता है।

-यदि कोई पुत्र इच्छुक अथवा सन्तानोत्पत्ति में असफल व्यक्ति संगम तीर्थ, पुष्कर, मन्दाकिनी अथवा चित्रकूट की पयस्वनी नदी में 21 अमावस्या को सप्त दीपों वाला दीपदान करता है और तुलसी की मंजरी प्रातःकाल मिश्री सेवन करके एवं उसी नदी का जल पीता है, तो उसे सन्तान प्राप्त होती है।

-बांझ अर्थात् बंध्या स्त्री यदि पवित्र सरोवरों अथवा नदियों में दीपदान करती है तो सन्तान प्राप्त करती है। एक वर्ष तक प्रत्येक पूर्णिमा को पाँच दीपों वाला दीपदान करना चाहिये ।

-रोजी-रोजगार चाहने वालों को अथवा व्यापारिक समस्या हल करने वालों को शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से पूर्णिमा तक घी के दीपक नित्य पवित्र नदी में दीपदान करना चाहिये।
आपने मन्दिरों में दीपक के बड़े-बड़े पात्र देखे होंगे जो सदैव प्रज्वलित रहते हैं। ऐसे दीपों को आजीवन प्रज्वलित रहने वाले अखण्ड दीप कहते हैं। इन अखण्ड दीपों के लिये देशी घी की व्यवस्था बडे-बडे व्यापारी एवं धनाढ्य लोग करते हैं। यही कारण है कि ऐसे दीपदान कराने वालों का विकास निरन्तर होता रहता है। किसी-किसी मन्दिर में एक, सात, नौ, ग्यारह, इक्कीस दिनों, एक माह, तीन माह, छह माह, एक वर्ष तक अखण्ड दीप जलवाने की व्यवस्था रहती है। उसका खर्च पूर्व निर्धारित रहता है। जो व्यक्ति जितने दिनों तक दीपदान करना चाहता है, उतने दिन का निर्धारित व्यय देकर अखण्ड दीपदान करा सकता है।

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नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।लद्दाख के प्रख्यात शिक्षा सुधारक और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार, लद्दाख प्रशासन और जोधपुर सेंट्रल जेल से जवाब तलब किया है।न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने यह निर्देश देते हुए मामला 14 अक्टूबर के लिए सूचीबद्ध किया।याचिका में अंगमो ने अपने पति की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत की गई गिरफ्तारी को संविधान के अनुच्छेद 22 के उल्लंघन के रूप में चुनौती दी है।🔹 सिब्बल बोले – “बिना गिरफ्तारी के कारण बताए न्याय कैसे मिलेगा?”गीतांजलि अंगमो की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि बिना हिरासत आदेश की प्रति दिए परिवार न्यायिक प्रक्रिया में प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता।उन्होंने कहा, “हमें न तो गिरफ्तारी के कारण बताए गए, न ही दस्तावेज़ की प्रति दी गई। पत्नी अब तक पति से नहीं मिल सकी हैं, केवल इंटरकॉम से ही बातचीत हो रही है।”🔹 केंद्र ने कहा – “यह भावनात्मक माहौल बनाने की कोशिश”वहीं, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि वांगचुक को हिरासत के आधार पहले ही सौंपे जा चुके हैं और उनके भाई उनसे मिल चुके हैं।उन्होंने कहा, “यह याचिका केवल मीडिया में शोर मचाने और सहानुभूति बटोरने के लिए दायर की गई है। किसी को मिलने से नहीं रोका गया है।”मेहता ने यह भी बताया कि 12 लोगों की सूची दी गई है जो वांगचुक से मिल सकते हैं, और उन्हें सभी आवश्यक चिकित्सा सुविधाएँ दी जा रही हैं।🔹 सुप्रीम कोर्ट ने कहा – “पत्नी को आधार प्रति देने में कोई बाधा नहीं”पीठ ने कहा कि कानूनन हिरासत में व्यक्ति को आधार कारणों की जानकारी दी जानी चाहिए।हालाँकि अदालत ने इस स्तर पर कोई आदेश पारित नहीं किया, पर यह स्पष्ट किया कि पत्नी को हिरासत आधार की प्रति देने में कोई कानूनी बाधा नहीं है।अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि “वांगचुक को सभी आवश्यक दवाइयाँ, कपड़े और चिकित्सीय देखभाल दी जाए।”यह उल्लेखनीय है कि हिरासत से पहले वांगचुक उपवास पर थे और गिरफ्तारी के समय उनके पास व्यक्तिगत सामान भी नहीं था।🔹 क्या है मामला?लद्दाख के चर्चित समाजसेवी सोनम वांगचुक, जिन्होंने शिक्षा और जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, को 26 सितंबर को एनएसए के तहत हिरासत में लिया गया था।उनकी गिरफ्तारी के बाद देशभर में व्यापक विरोध और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ सामने आई थीं।

अध्यात्म: जीवन में सुख, शांति और आंतरिक विकास की यात्रा

(लेखिका: सुनीता कुमारी, बिहार राष्ट्र की परम्परा)

आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में लोग अक्सर भौतिक सफलता, करियर और पैसे पर ध्यान केंद्रित करते हैं। लेकिन जीवन का वास्तविक आनंद और संतोष केवल बाहरी उपलब्धियों में नहीं है। जैसे-जैसे हमारे जीवन में अध्यात्म का प्रवेश होता है, वैसे-वैसे हम सच्चे सुख, शांति और आंतरिक संतुलन का अनुभव करते हैं।

अध्यात्म की वास्तविक परिभाषा

अध्यात्म शब्द सुनते ही अधिकतर लोगों के मन में पूजा-पाठ, मंदिर जाना, माला जपना या संसार से दूर रहने का विचार आता है। लेकिन अध्यात्म केवल बाहरी कर्मकांड नहीं है।
यह स्वयं को जानने की यात्रा, अपने भीतर झाँकने और जीवन के मूल उद्देश्य को समझने का प्रयास है। यह हमें सिखाता है कि हम केवल शरीर, मन या बुद्धि नहीं हैं, बल्कि इनसे परे एक अविनाशी ऊर्जा का अंश हैं।

अध्यात्म और आंतरिक शांति

अध्यात्म सिखाता है कि जीवन का सच्चा आनंद भौतिक वस्तुओं या क्षणिक सुखों में नहीं, बल्कि आंतरिक संतुलन और मानसिक शांति में निहित है। यह हमारे दृष्टिकोण को बदलता है और हमें यह समझने में मदद करता है कि हर चुनौती एक अवसर है और हर दुख अस्थायी है।

तनाव से मुक्ति और मानसिक स्पष्टता

आज के समय में तनाव एक आम समस्या बन चुका है।
ध्यान और योग, जो अध्यात्म के अभिन्न अंग हैं, हमें मन पर नियंत्रण, शांतता और केंद्रित रहने की कला सिखाते हैं। जब मन शांत होता है, तो हम परिस्थितियों पर भावनात्मक प्रतिक्रियाओं के बजाय विवेकपूर्ण निर्णय ले पाते हैं।

संबंधों में सुधार और करुणा

अध्यात्म हमें यह महसूस कराता है कि हम सब आपस में जुड़े हैं। यह समझ दूसरों के प्रति सहानुभूति, करुणा और प्रेम उत्पन्न करती है। परिणामस्वरूप हमारे पारिवारिक, सामाजिक और व्यावसायिक संबंध मधुर और मजबूत बन जाते हैं।

स्व-विकास और मानव सेवा

जीवन का अंतिम लक्ष्य केवल पैसा कमाना या करियर बनाना नहीं है।
अध्यात्म हमें स्व-विकास और मानव सेवा का उद्देश्य प्रदान करता है। जब हम अपनी क्षमताओं का उपयोग दूसरों के कल्याण के लिए करते हैं, तो हमें असीम संतोष और आंतरिक खुशी का अनुभव होता है।

अध्यात्म: निरंतर यात्रा

अध्यात्म कोई मंजिल नहीं, बल्कि सतत यात्रा है। यह किसी चमत्कार की तरह रातों-रात जीवन नहीं बदलता। लगातार अभ्यास, जागरूकता और आत्म-निरीक्षण से हम धीरे-धीरे बेहतर इंसान बनते हैं। यह सिखाता है कि जीवन का सबसे बड़ा रहस्य बाहर नहीं, बल्कि हमारे भीतर छिपा है।

समापन

जब व्यक्ति अध्यात्म को अपने जीवन का आधार बनाता है, तो वह केवल स्वयं के लिए नहीं, बल्कि पूरे संसार के लिए सकारात्मक शक्ति बन जाता है। इस पथ पर चलने से जीवन की हर चुनौती अर्थपूर्ण बन जाती है और हर पल एक आशीर्वाद में परिवर्तित हो जाता है।

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रूस ने तोड़ी चुप्पी: पाकिस्तान को JF-17 इंजन सप्लाई की खबरों पर सख्त इंकार, भारत-रूस रिश्तों पर कोई असर नहीं

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) रूस ने उन सभी दावों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि वह चीन द्वारा पाकिस्तान को सप्लाई किए जा रहे JF-17 थंडर लड़ाकू विमानों के लिए इंजन उपलब्ध कराने की योजना बना रहा है। मास्को ने इन खबरों को “निराधार, भ्रामक और शरारतपूर्ण” करार दिया है।

रूसी विदेश मंत्रालय की ओर से आए बयान में कहा गया कि ऐसी किसी डील या प्रस्ताव की पुष्टि नहीं हुई है, जैसा कि हाल में एक भारतीय चैनल WION की रिपोर्ट में बताया गया था।
रूस ने स्पष्ट किया कि वह JF-17 ब्लॉक III के लिए RD-93MA इंजन की आपूर्ति नहीं कर रहा और यह दावा पूरी तरह कल्पना पर आधारित है।

🔹 भारत में उठे राजनीतिक स्वर

इन रिपोर्टों ने भारत में राजनीतिक हलचल मचा दी थी।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सरकार से सवाल उठाते हुए कहा, “भारत का कभी सबसे विश्वसनीय रणनीतिक साझेदार अब पाकिस्तान को सैन्य इंजन क्यों दे रहा है?”
वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इन दावों को “फर्जी प्रचार” और “सूचना युद्ध” का हिस्सा बताया। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर “असत्यापित रिपोर्टों को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करने” और “राष्ट्रीय हितों से ऊपर राजनीति करने” का आरोप लगाया।

भाजपा प्रवक्ताओं ने याद दिलाया कि रूस के साथ भारत के रक्षा संबंध मजबूत और दीर्घकालिक हैं — जिनके अंतर्गत S-400 वायु रक्षा प्रणाली, परमाणु पनडुब्बी सहयोग, और रक्षा प्रौद्योगिकी साझेदारी जैसी पहलें पहले से जारी हैं।

🔹 दिसंबर में पुतिन की भारत यात्रा तय

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दिसंबर की शुरुआत में भारत दौरे पर आएंगे। हाल में वल्दाई क्लब के अधिवेशन में उन्होंने कहा,

“मैं अपने मित्र और विश्वसनीय सहयोगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात को लेकर उत्सुक हूं।”

उन्होंने अमेरिका द्वारा रूस और भारत पर लगाए जा रहे दबावों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि “भारतीय लोग अपने राष्ट्रीय हितों के विरुद्ध कोई निर्णय स्वीकार नहीं करेंगे।”

🔹 रूसी विशेषज्ञों ने खोला पुराना पन्ना

रूस के रक्षा विशेषज्ञ टोपीचकानोव ने कहा कि भारत की आलोचना “अनुचित” है क्योंकि यह मुद्दा मास्को-नई दिल्ली के दशकों पुराने रक्षा संबंधों की गहराई में देखा जाना चाहिए।
उन्होंने खुलासा किया कि चीन ने पहले FC-17 (JF-17) जेट के लिए अस्थायी रूप से RD-93 इंजन की मांग की थी, और अतीत में भारत की सरकारों — वाजपेयी व मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान — इस विषय पर परामर्श हुआ था।

एक अन्य रूसी विशेषज्ञ ने याद दिलाया कि उस समय मॉस्को ने नई दिल्ली को स्पष्ट आश्वासन दिया था कि यह सौदा सिर्फ व्यावसायिक प्रकृति का था और इसमें प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (ToT) शामिल नहीं था।
भारत को इसके बदले RD-33 इंजन का पूर्ण तकनीकी हस्तांतरण अधिकार मिला, जो आज MiG-29 विमानों में प्रयुक्त होता है।

🔹 इंजन का तकनीकी अंतर

क्लिमोव संयंत्र द्वारा निर्मित RD-93 इंजन, भारत के RD-33 मॉडल का संशोधित संस्करण है।
RD-93 अधिक थ्रस्ट (बल) प्रदान करता है,
लेकिन इसकी सेवा अवधि मात्र 2,200 घंटे है,
जबकि RD-33 इंजन लगभग 4,000 घंटे तक उड़ान भर सकता है।

रूस वर्ष 2000 से चीन के माध्यम से पाकिस्तान को इन इंजनों की त्रिपक्षीय आपूर्ति करता रहा है, परंतु हाल में RD-93MA नामक नए मॉडल की मांग पर रूस ने अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं दी है।

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वन विभाग के गेस्ट हाउस में गंदगी का साम्राज्य! स्वच्छता मिशन को मिली मात, ग्रामीण बोले – जांच हो अफसरों की मिलीभगत की

लक्ष्मीपुर रेंज का एकमा गेस्ट हाउस बना कूड़े का अड्डा, लाखों की लागत से बना मीटिंग हॉल भी जर्जर हाल में; ग्रामीणों ने उठाई जांच की मांग

रिपोर्ट: डॉ. सतीश पाण्डेय एवं नीरज की विशेष रिपोर्ट

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)उत्तर प्रदेश सरकार के स्वच्छ भारत मिशन का प्रभाव जहां पूरे प्रदेश में दिख रहा है, वहीं महराजगंज जनपद के लक्ष्मीपुर वन रेंज के एकमा गेस्ट हाउस परिसर में इसकी पूरी तरह अनदेखी नजर आ रही है।
यहां चारों ओर फैली गंदगी, खरपतवारों का जंगल और बदहाल परिसर विभाग की लापरवाही और फर्जी सफाई अभियानों की पोल खोल रहा है।

गेस्ट हाउस के ठीक सामने स्थित नव निर्मित मीटिंग हॉल भी जर्जर अवस्था में पड़ा है। लाखों रुपये की लागत से तैयार यह भवन अब कूड़े और झाड़ियों से घिरा हुआ है। परिसर की स्थिति देखकर साफ प्रतीत होता है कि वन विभाग का ध्यान स्वच्छता से अधिक फाइलों और बजट की सफाई पर है।
ग्रामीणों के गंभीर आरोप:
स्थानीय ग्रामीणों ने खुलासा किया कि हर वर्ष विभाग मजदूरों से सफाई कार्य कराने का दावा करता है, लेकिन यह काम केवल कागज़ों में ही सीमित रहता है।
कहा जाता है कि जंगल से जलावन लकड़ी लेने आने वाले ग्रामीणों से जबरन सफाई कराई जाती है, जबकि कागजों पर उसी काम का भुगतान मजदूरी के नाम पर दिखाया जाता है।

ग्रामीणों का आरोप है कि यह सब रेंज के एसडीओ की जानकारी और संरक्षण में हो रहा है। उनके अनुसार, “ऊपर तक हिस्सा पहुंचने के कारण विभागीय लापरवाही पर किसी की नजर नहीं जाती।”
स्वच्छता मिशन को ठेंगा:
जब पूरा प्रदेश श्रमदान के माध्यम से स्वच्छता अभियान को नई दिशा देने में जुटा है, तब वन विभाग सफाई के लिए बजट का बहाना बनाकर अपने दायित्व से बचता दिख रहा है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि लक्ष्मीपुर रेंज के एसडीओ के कार्यकाल की जांच हो, ताकि बजट घोटाले और सफाई में लापरवाही के असली जिम्मेदार सामने आएं।

अधिकारियों की सफाई:
जब इस मामले में डीएफओ निरंजन सुर्वे से बात की गई तो उन्होंने कहा—
“शासन को सफाई कार्य हेतु प्रस्ताव भेजा जाएगा। धनराशि अवमुक्त होते ही गेस्ट हाउस और मीटिंग हॉल की सफाई कराई जाएगी।”
लेकिन सवाल अब भी वही है —
क्या विभाग के पास बजट से पहले ‘जिम्मेदारी’ नहीं है?

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🚨 कोपागंज में साइबर ठगी का आतंक: 9 में से 8 मामले फाइनेंस फ्रॉड से जुड़े, युवा सबसे अधिक निशाने पर

📊 270 दिनों में दर्ज हुए 159 केस, 121 का निस्तारण — 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग सबसे अधिक शिकार
रिपोर्ट – धीरेंद्र त्रिपाठी

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)डिजिटल क्रांति ने जहां आधुनिक भारत को गति दी है, वहीं साइबर अपराधों की रफ्तार ने लोगों की नींद उड़ा दी है। मऊ जिले के कोपागंज थाना क्षेत्र में साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, पिछले 270 दिनों में कुल 159 साइबर अपराध दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 121 मामलों का निस्तारण पुलिस व साइबर सेल ने किया है।
🧠 युवाओं पर सबसे ज्यादा असर

पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि 18 से 35 वर्ष के युवक-युवतियां साइबर अपराधियों के मुख्य निशाने पर हैं। सोशल मीडिया, मोबाइल कॉल, ईमेल और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए ठग लोगों को झांसे में ले रहे हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि कुल मामलों में से 90% वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े हैं — जिनमें फर्जी बैंक कॉल, क्रेडिट कार्ड लिमिट बढ़ाने, लोन मंजूरी, यूपीआई भुगतान और ई-वॉलेट ठगी शामिल हैं।
🔍 ठगों की नई चालें
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि अपराधी खुद को बैंक अधिकारी या सरकारी प्रतिनिधि बताकर कॉल करते हैं और ओटीपी, पिन या पासवर्ड जैसी गोपनीय जानकारी हांसिल कर लेते हैं।
थाना प्रभारी ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक या मैसेज पर भरोसा न करें और धोखाधड़ी की स्थिति में साइबर हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत संपर्क करें।
⚠️ जागरूक रहें, सुरक्षित रहें: साइबर ठगी से बचाव के 5 उपाय
1️⃣ ओटीपी, पिन और पासवर्ड किसी से साझा न करें।
2️⃣ बैंक या सरकारी एजेंसियां फोन पर गोपनीय जानकारी नहीं मांगतीं।
3️⃣ संदिग्ध लिंक, ई-मेल या व्हाट्सएप मैसेज से बचें।
4️⃣ केवल विश्वसनीय ऐप या वेबसाइट से ही ऑनलाइन भुगतान करें।
5️⃣ धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।
🕵️‍♂️ केस स्टडी 1: क्राइम ब्रांच अधिकारी बनकर 42 हजार की ठगी

1 सितम्बर 2025

मोहल्ला जुम्मनपुरा, कोपागंज स्थानीय युवक मोहम्मद तनवीर के पास फर्जी कॉल आई, जिसमें कॉलर ने खुद को क्राइम ब्रांच अधिकारी बताया। ठग ने “आधिकारिक जांच” के नाम पर बैंक डिटेल्स मांगी और 42 हजार रुपये उड़ा लिए।
तनवीर कई दिनों तक भय में घटना छिपाता रहा, लेकिन बाद में परिवार की मदद से साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज की।

💻 केस स्टडी 2: व्हाट्सएप संदेश से बैंक खाता साफ

8 जुलाई 2025
नगर पंचायत कुर्थीजाफरपुर निवासी अबू होरैरा को यूनियन बैंक के नाम से व्हाट्सएप पर संदेश मिला — “आपका खाता ब्लॉक कर दिया गया है।” साथ ही एक ऐप इंस्टॉल करने को कहा गया।
अबू ने जैसे ही ऐप डाउनलोड किया, मोबाइल हैंग हो गया और कुछ ही मिनटों में उसके खाते से चार चरणों में 70 हजार रुपये गायब हो गए।
सतर्कता दिखाते हुए उसने तुरंत साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज की।
📢 स्थानीय सुझाव
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि प्रशासन गांव-गांव डिजिटल सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाए, तो इस तरह के अपराधों पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।