Tuesday, July 7, 2026
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लालू यादव का तंज— “छह और ग्यारह NDA नौ-दो-ग्यारह!” से सियासी पारा चढ़ा

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 की तारीखों के ऐलान के साथ ही राजनीतिक तापमान तेजी से बढ़ गया है। चुनाव आयोग ने सोमवार को दो चरणों में मतदान की घोषणा की, जिसके बाद सियासी बयानबाजी का दौर शुरू हो गया। इसी बीच, राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने अपनी चिर-परिचित व्यंग्य शैली में एनडीए पर ऐसा तंज कसा कि राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई।

दो चरणों में होगा मतदान
चुनाव आयोग के मुताबिक, बिहार की 243 विधानसभा सीटों के लिए दो चरणों में मतदान होगा।
पहले चरण में 6 नवंबर को 121 सीटों पर और दूसरे चरण में 11 नवंबर को 122 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। नतीजों की घोषणा के बाद नई सरकार के गठन की तस्वीर साफ होगी।

लालू यादव का चुटीला हमला
तारीखों की घोषणा के कुछ ही देर बाद लालू यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा —
“छह और ग्यारह NDA नौ-दो-ग्यारह!”

उनके इस चुटीले पोस्ट ने ना सिर्फ विपक्षी खेमे में जोश भर दिया, बल्कि एनडीए खेमे में खलबली मचा दी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान संकेत देता है कि लालू यादव को इस बार सत्ता परिवर्तन का पूरा भरोसा है।
‘नौ-दो-ग्यारह’ का सियासी अर्थ

लालू यादव का “छह और ग्यारह NDA नौ-दो-ग्यारह” कहना महज शब्दों का खेल नहीं, बल्कि सियासी संदेश भी है।
6 और 11 नवंबर को होने वाले मतदान के बाद, उनका संकेत साफ है कि एनडीए की विदाई तय है — यानी “नौ-दो-ग्यारह” यानी गायब!
लालू यादव की यही खासियत उन्हें बिहार की राजनीति का सबसे प्रभावशाली वक्ता बनाती है।
बढ़ी राजनीतिक गर्माहट
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, लालू यादव का यह बयान आगामी चुनाव में आरजेडी की आक्रामक रणनीति की झलक देता है।
एनडीए जहां विकास और स्थिरता का एजेंडा लेकर मैदान में उतरने की तैयारी में है, वहीं राजद ने व्यंग्य और जनभावना के मेल से माहौल गर्माने का काम कर दिया है।
बिहार में सियासी संग्राम की दस्तक
चुनाव की तारीखें तय होते ही पटना से लेकर गांव-कस्बों तक चुनावी चर्चा जोरों पर है। सोशल मीडिया पर “#छहऔरग्यारह” ट्रेंड कर रहा है।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या लालू यादव का यह व्यंग्य राजनीतिक भविष्यवाणी साबित होगा या एनडीए एक बार फिर सत्ता का परचम लहराएगा।

इसे भी देखे –भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कश्मीर पर पाकिस्तान के “भ्रामक प्रचार” की कड़ी आलोचना की

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स्वास्थ्य परंपरा

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दिल का रक्षक: ‘अर्जुन पुष्प’ के चमत्कारी योग

       भारत की औषधीय परंपरा में अर्जुन वृक्ष का नाम अत्यंत श्रद्धा से लिया जाता है। आयुर्वेद में इसे “हृदय-बल्य” अर्थात् हृदय को शक्ति देने वाली औषधि कहा गया है। Terminalia arjuna नामक यह वृक्ष भारत के लगभग सभी भागों में नदी-तालाबों के किनारे पाया जाता है। इसकी छाल, पत्तियाँ, फल और फूल सभी औषधीय महत्व रखते हैं।

अर्जुन की छाल जहाँ हृदय रोग, रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण में उपयोगी है, वहीं इसके फूल भी कम प्रभावी नहीं हैं। अर्जुन पुष्प शीतल, सुगंधित और रक्तशुद्धिकारक गुणों से भरपूर होते हैं। प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में इसका उल्लेख हृदय रोग, रक्त दोष, मूत्र विकार और अनिद्रा जैसी बीमारियों में उपयोगी औषधि के रूप में किया गया है।

  1. अर्जुन पुष्प क्वाथ (काढ़ा)

उपयोग: हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, रक्तशुद्धि
सामग्री:

अर्जुन फूल (सूखे) – 10 ग्राम

जल – 200 मि.ली.
विधि: जल को धीमी आँच पर आधा रहने तक उबालें। छानकर सुबह और शाम सेवन करें।

  1. अर्जुन पुष्प–गुलाब योग

उपयोग: हृदय की धड़कन, तनाव, रक्त दोष
सामग्री:

अर्जुन फूल चूर्ण – 5 ग्राम

गुलाब की पंखुड़ी चूर्ण – 2 ग्राम

शहद – 1 चम्मच
सेवन विधि: सुबह खाली पेट और रात को सोने से पहले सेवन करें।

  1. अर्जुन पुष्प–द्राक्ष योग

उपयोग: उच्च रक्तचाप, थकावट, हृदय दुर्बलता
सामग्री:

अर्जुन फूल चूर्ण – 3 ग्राम

मुनक्का (द्राक्ष) – 5 नग

जल – 150 मि.ली.
विधि: मुनक्के को जल में उबालें, फिर अर्जुन फूल चूर्ण मिलाकर गुनगुना पिएँ।

  1. अर्जुन पुष्प चूर्ण योग

उपयोग: रक्तशुद्धि, त्वचा रोग, हृदय बल
सामग्री:

अर्जुन फूल चूर्ण – 100 ग्राम

मिश्री – 50 ग्राम
विधि: दोनों को मिलाकर रखें। 3–5 ग्राम मात्रा दिन में दो बार गुनगुने जल के साथ लें।

  1. अर्जुन पुष्प शीतल अर्क

उपयोग: मूत्रकृच्छ (मूत्र रुकना), मूत्रदाह
सामग्री:

अर्जुन फूल – 50 ग्राम

ठंडा जल – 400 मि.ली.
विधि: फूलों को रातभर जल में भिगो दें। सुबह छान लें।
सेवन: 50–60 मि.ली. मात्रा दिन में दो बार लें।

  1. अर्जुन पुष्प हृदय वटी (घरेलू योग)
    उपयोग: हृदय की कमजोरी, धड़कन बढ़ना, अनिद्रा
    सामग्री:
  • अर्जुन फूल चूर्ण – 20 ग्राम
  • अश्वगंधा चूर्ण – 20 ग्राम
  • शंखपुष्पी चूर्ण – 20 ग्राम
  • शहद – आवश्यकता अनुसार
    विधि: सभी सामग्री मिलाकर छोटे-छोटे वटी (गोली) बना लें।
    सेवन: 1-1 वटी सुबह और शाम गुनगुने जल से लें।

सावधानियाँ

  1. हृदय रोगी इन योगों का सेवन चिकित्सक की देखरेख में करें।
  2. अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से कब्ज़ या पेट में भारीपन हो सकता है।
  3. गर्भवती महिलाएँ प्रयोग से पहले वैद्य या चिकित्सक से परामर्श लें।
    अर्जुन पुष्प प्रकृति का एक अनुपम वरदान है। यह न केवल हृदय को सशक्त बनाता है, बल्कि शरीर और मन दोनों को संतुलित रखता है। नियमित और संयमित सेवन से यह दीर्घायु, मानसिक शांति और स्वस्थ हृदय का साधन बन सकता है।

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कश्मीर पर पाकिस्तान के “भ्रामक प्रचार” की कड़ी आलोचना की

न्यूयॉर्क (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में भारत ने पाकिस्तान के कश्मीर पर भ्रामक प्रचार और 1971 में हुए “व्यवस्थित नरसंहार” को उजागर करते हुए तीखी आलोचना की है। भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने पाकिस्तान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह “अपने ही लोगों पर बमबारी करता है” और दुनिया को गुमराह करने की कोशिश करता है।

भारत का यूएनएससी में बयान

भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने महिला, शांति और सुरक्षा पर यूएनएससी की खुली बहस में कहा:
“दुर्भाग्यवश, हर साल हमें पाकिस्तान के भ्रामक प्रचार को सुनना पड़ता है, खासकर जम्मू-कश्मीर पर, जिस पर वे अवैध लालच करते हैं। महिला, शांति और सुरक्षा के एजेंडे पर भारत का रिकॉर्ड बेदाग और अक्षुण्ण है।”

उन्होंने आगे कहा:
“जो देश अपने ही लोगों पर बमबारी करता है, व्यवस्थित नरसंहार करता है, वह केवल दुनिया का ध्यान भटकाने की कोशिश कर सकता है। पाकिस्तान ने 1971 में ऑपरेशन सर्चलाइट के दौरान अपनी ही सेना द्वारा 4,00,000 महिला नागरिकों के सामूहिक बलात्कार और नरसंहार की योजना बनाई थी।”

पाकिस्तान के आरोपों पर प्रतिक्रिया

पाकिस्तान की स्थायी मिशन की काउंसलर साइमा सलीम ने कश्मीर में यौन हिंसा के आरोप लगाए थे। भारत ने इसका जवाब देते हुए कहा कि यह “भ्रामक और निराधार आरोप” हैं और उनका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करना है।

भारत का मानना

हरीश ने कहा कि पाकिस्तान को अपनी “जीवनरक्षक प्रणाली पर निर्भर अर्थव्यवस्था, सैन्य प्रभुत्व, उत्पीड़न और मानवाधिकार उल्लंघनों” पर ध्यान देना चाहिए, बजाय इसके कि वह भारत के खिलाफ निराधार बयानबाजी करे। भारत ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर देश का अभिन्न अंग है और रहेगा।

पाकिस्तान पर आरोपों की सूची

भारत ने यूएनएससी में पाकिस्तान पर निम्न गंभीर आरोप लगाए:

कश्मीर में भ्रामक प्रचार

अपने ही नागरिकों पर बमबारी

व्यवस्थित नरसंहार और सामूहिक बलात्कार

आतंकवाद का निर्यात

संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादियों को पनाह देना

भोजपुरी स्टार पवन सिंह ने पत्नी ज्योति सिंह विवाद पर दिया बड़ा बयान, इंस्टाग्राम पर किया खुलासा

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। भोजपुरी अभिनेता और सिंगर पवन सिंह ने हाल ही में अपनी पत्नी ज्योति सिंह के साथ विवाद को लेकर इंस्टाग्राम पर एक बड़ा बयान जारी किया है। पवन सिंह ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट करते हुए अपनी सच्चाई और स्थिति स्पष्ट की है।

पवन सिंह का इंस्टाग्राम पोस्ट

पवन सिंह ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा:
“मैं अपने जीवन में एक ही बात जानता हूं कि जनता मेरे लिए भगवान है। क्या मैं आप सब की जनभावना को ठेस पहुंचाऊंगा जिनके बदौलत मैं यहां तक पहुंचा?”

इसके साथ ही उन्होंने अपनी पत्नी ज्योति सिंह को संबोधित करते हुए कहा:
“ज्योति सिंह जी क्या यह सच नहीं है कि कल सुबह आप मेरी सोसाइटी में आईं तो मैंने ससम्मान आपको अपने घर बुलाया और करीब 1:30 घंटे हम लोगों की वार्तालाप हुई? आपके द्वारा बस एक ही रट कि मुझे चुनाव लड़वाइए, जो मेरे वश का नहीं। समाज में भ्रम फैलाया गया कि मैंने पुलिस बुलाई, जबकि सच्चाई यह है कि पुलिस सुबह से वहां इसलिए मौजूद थी ताकि कोई भी अनहोनी ना हो।”

विवाद की पृष्ठभूमि

पवन सिंह और ज्योति सिंह के बीच हाल ही में सार्वजनिक विवाद की खबरें आई थीं, जिसमें दोनों के व्यक्तिगत और राजनीतिक मतभेद सामने आए। इस विवाद ने सोशल मीडिया और मीडिया जगत में चर्चा का विषय बन गया है। पवन सिंह का यह बयान इस पूरे मामले में उनकी प्रतिक्रिया माना जा रहा है।

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया

पवन सिंह के इस पोस्ट के बाद उनके फैंस और सोशल मीडिया यूजर्स में इस विवाद को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई है। कई यूजर्स पवन सिंह के समर्थन में हैं, जबकि कुछ ने उनकी पत्नी ज्योति सिंह के पक्ष में प्रतिक्रिया दी है।

Mother Teresa और Missionaries of Charity: सेवा का अनमोल आदर्श

लेखक: अभिषेक कुमार, लखनऊ

विश्व में सेवा और मानवता का प्रतीक बनने वाली एक नामी शख्सियत हैं Mother Teresa, जिनका जीवन पूरी तरह मानवता की सेवा के लिए समर्पित रहा। गरीबों, अनाथों, बीमारों और समाज के उपेक्षित वर्गों के लिए उनके योगदान को आज भी सम्मान और श्रद्धा के साथ याद किया जाता है। 7 अक्टूबर 1950 को उन्होंने Missionaries of Charity की स्थापना की, जिसने उनके आदर्शों को विश्वव्यापी स्वरूप दिया। यह संस्था सिर्फ एक धार्मिक समुदाय नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का जीवंत प्रतीक बन गई।
Missionaries of Charity की स्थापना
Mother Teresa को उनके जीवन का सबसे बड़ा आह्वान 10 सितंबर 1946 को मिला, जिसे उन्होंने “call within a call” बताया। इस आह्वान ने उन्हें गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा के लिए पूरी तरह समर्पित कर दिया। चार साल के गहन विचार और योजना के बाद, 7 अक्टूबर 1950 को Missionaries of Charity को औपचारिक रूप से स्वीकृति मिली।
शुरुआत में संस्था के पास सिर्फ 12 सदस्य थे, जिन्होंने कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) के छोटे से इलाके में गरीबों की सेवा शुरू की। इस संस्था का मुख्य उद्देश्य समाज के उन वर्गों की सहायता करना था जिन्हें जीवन की बुनियादी आवश्यकताओं तक पहुँच नहीं थी। समय के साथ यह संस्था अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फैल गई और अनेक देशों में इसकी शाखाएँ स्थापित हुईं।
उद्देश्य, सिद्धांत और सेवा मॉडल
Missionaries of Charity के उद्देश्य और सिद्धांत अत्यंत स्पष्ट हैं। इसका मुख्य लक्ष्य समाज के सबसे कमजोर और उपेक्षित वर्गों की सेवा करना है। इसके लिए सदस्यों को चार प्रमुख व्रत (vows) लेने होते हैं:

ब्रह्मचर्य (Chastity) – शुद्ध जीवन और सेवा में पूर्ण समर्पण।
व्रत्ती (Poverty) – किसी भी प्रकार के व्यक्तिगत संपत्ति या भौतिक साधनों का त्याग।
आज्ञाकारिता (Obedience) – संस्थान के नियमों और सेवा के उद्देश्यों के प्रति पूर्ण समर्पण।
“Poorest of the Poor” की सेवा – एक अनूठा चौथा व्रत, जो उन लोगों की नि:स्वार्थ सेवा की प्रतिज्ञा करता है जो समाज की अंतिम पंक्ति में हैं।
Home for the Dying: अंतिम समय में जीवन व्यतीत करने वाले बीमार लोगों को सम्मान और सुविधा प्रदान करना।
अनाथालय: अनाथ बच्चों की शिक्षा और पालन-पोषण।
वृद्धाश्रम: वृद्ध और बेसहारा व्यक्तियों को आश्रय एवं देखभाल।
लेप्रसी (कुष्ठ रोगी) केंद्र: समाज से बहिष्कृत रोगियों की चिकित्सा और पुनर्वास।
गृहमुखी सहायता: जरूरतमंद परिवारों और समुदायों के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण संबंधी सहायता।
इस सेवा मॉडल की खासियत यह है कि यह केवल सहायता देने तक सीमित नहीं, बल्कि मानवता और गरिमा को बनाए रखने पर केंद्रित है।
Missionaries of Charity ने समय के साथ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता और प्रभाव हासिल किया। आज यह संस्था केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और एशिया के अनेक देशों में सक्रिय है। इनके कार्यक्षेत्र में स्वास्थ्य, शिक्षा, आपदा राहत, गरीबों को दवाइयाँ और अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना शामिल है।
Mother Teresa को उनके योगदान के लिए कई अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए, जिनमें सबसे प्रमुख नोबेल शांति पुरस्कार (1979) है। उनका जीवन और कार्य आज भी विश्व भर के धर्मार्थ और सामाजिक संगठनों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उनका आदर्श हमें यह सिखाता है कि समाज के सबसे कमजोर वर्गों की सेवा करना न केवल कर्तव्य है, बल्कि मानवता की सच्ची पहचान है।
Missionaries of Charity की शाखाएँ आज भी गरीबों, रोगियों, अनाथों और बेसहारा लोगों की सेवा में समर्पित हैं। उनके कार्यों का सबसे बड़ा संदेश यह है कि सेवा में शक्ति है और छोटी-छोटी मदद भी किसी के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है।
Mother Teresa और Missionaries of Charity का जीवन संदेश आज भी समाज के लिए प्रकाश स्तंभ है। यह संस्था यह प्रमाणित करती है कि निस्वार्थ सेवा, समर्पण और करुणा से विश्व में स्थायी परिवर्तन लाया जा सकता है। 7 अक्टूबर का दिन केवल Missionaries of Charity की स्थापना का प्रतीक नहीं, बल्कि मानवता की सेवा और करुणा के आदर्श का प्रतीक है।

Mother Teresa का जीवन हमें यह याद दिलाता है कि मानवता की सेवा कोई बड़ा या प्रसिद्ध कार्य नहीं, बल्कि हर दिन के छोटे-छोटे प्रयासों से शुरू होती है। उनके आदर्श आज भी हमें प्रेरित करते हैं कि हर व्यक्ति चाहे किसी भी समाज या धर्म से हो, मानवता की सेवा में योगदान दे सकता है।

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🗞️ 7 अक्टूबर: इतिहास में दर्ज वह दिन जिसने रचा भारत और विश्व का नया अध्याय


आज का इतिहास (7 अक्टूबर)
भारत और विश्व इतिहास में 7 अक्टूबर की तिथि ने अनेक अविस्मरणीय घटनाओं को जन्म दिया। यह दिन न केवल भारतीय संस्कृति और स्वतंत्रता आंदोलन के लिए, बल्कि विज्ञान, राजनीति, अंतरिक्ष और वैश्विक सहयोग के क्षेत्र में भी मील का पत्थर साबित हुआ।
🔹 आज के दिन की ऐतिहासिक झलकियां
1586 – मुगल सम्राट अकबर की सेना ने कश्मीर में प्रवेश कर वहाँ अपना शासन स्थापित किया।
1737 – बंगाल के तट पर आई भीषण समुद्री आपदा में करीब तीन लाख लोगों की मौत हुई; 20 हजार नौकाएँ डूब गईं।
1840 – विलेम द्वितीय बने नीदरलैंड के सम्राट।
1868 – अमेरिका में कॉर्नेल विश्वविद्यालय की स्थापना हुई, जिसमें उस समय रिकॉर्ड 412 छात्रों का नामांकन हुआ।
1919 – महात्मा गांधी द्वारा प्रकाशित ‘नवजीवन’ पत्रिका का पहला अंक सामने आया।
1942 – अमेरिका और ब्रिटेन ने संयुक्त राष्ट्र की स्थापना की घोषणा की।
1950 – मदर टेरेसा ने कोलकाता में मिशनरीज ऑफ चैरिटी की स्थापना की, जो आज भी मानवता की सेवा का प्रतीक है।
1952 – चंडीगढ़ को पंजाब की राजधानी घोषित किया गया।
1959 – सोवियत अंतरिक्ष यान लूना-3 ने पहली बार चंद्रमा के छिपे हिस्से की तस्वीरें भेजीं।
1977 – सोवियत संघ का चौथा संविधान लागू हुआ।
1992 – भारत में रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) का गठन हुआ, जो सांप्रदायिक दंगों और प्राकृतिक आपदाओं में राहत कार्य करती है।
1997 – सूर्य बहादुर थापा ने नेपाल के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली; भारत और रूस ने सुरक्षा सहयोग 2010 तक बढ़ाने पर सहमति दी।
2000 – WWF-इंडिया को पहला राजीव गांधी वन्यजीव संरक्षण पुरस्कार मिला; जापान ने मानव क्लोनिंग को अपराध घोषित किया।
2001 – अमेरिका ने आतंकवाद विरोधी ‘ऑपरेशन एंड्योरिंग फ्रीडम’ की शुरुआत की।
2003 – पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने कट्टरपंथियों के खिलाफ अभियान जारी रखने की घोषणा की।
2004 – जर्मनी ने भारत की सुरक्षा परिषद सदस्यता के दावे का समर्थन किया।
2008 – फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास भारत पहुंचे।
2011 – नोबेल शांति पुरस्कार लाइबेरिया की राष्ट्रपति एलेन सरलीफ, लीमेह जीबोई और यमन की तवाकुल करमान को संयुक्त रूप से प्रदान किया गया।
🌟 आज के दिन जन्मे महान व्यक्तित्व
1907 – दुर्गा भाभी, भारत के स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना।
1914 – बेगम अख्तर, ग़ज़ल और ठुमरी की मल्लिका।
1922 – बलीराम भगत, स्वतंत्रता सेनानी और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष।
1924 – विजयदेव नारायण साही, प्रसिद्ध कवि एवं आलोचक।
1943 – अरुण भादुड़ी, भारतीय शास्त्रीय संगीत के अग्रणी गायक।
1949 – इंद्रजीत लांबा, कुशल भारतीय घुड़सवार खिलाड़ी।
1952 – व्लादिमीर पुतिन, रूस के प्रभावशाली नेता।
1977 – वाजिद खान, प्रसिद्ध संगीतकार (जोड़ी साजिद-वाजिद)।
1978 – ज़हीर खान, भारत के तेज़ गेंदबाज।
1979 – युक्ता मुखी, अभिनेत्री एवं मिस वर्ल्ड 1999।
🕯️ आज के दिन जिनकी स्मृति ताज़ा होती है
1708 – गुरु गोविंद सिंह, सिखों के दशम गुरु।
1961 – केदारेश्वर सेन गुप्ता, क्रांतिकारी नेता।
1971 – के. केलप्पन, स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक।
2020 – अश्वनी कुमार, सीबीआई के पूर्व निदेशक।
2022 – अरुण बाली, प्रख्यात अभिनेता।
🌿 विशेष अवसर
वन्यजीव संरक्षण सप्ताह (2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर) यह सप्ताह पर्यावरण संतुलन और जीव-जंतुओं के संरक्षण के प्रति जागरूकता का प्रतीक है।

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Rapid Action Force (RAF): संवेदनशील पुलिसिंग की सशक्त पहचान

“Serving Humanity with Sensitive Policing” — मानवता की सेवा, तत्परता और अनुशासन का प्रतीक बल

जब भी देश में भीड़ नियंत्रण, दंगे या किसी आकस्मिक सामाजिक तनाव की स्थिति उत्पन्न होती है, तो सबसे पहले जिस नाम पर भरोसा किया जाता है, वह है — Rapid Action Force (RAF)।
यह केवल एक बल नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और अनुशासन की मिसाल है, जो “मानवता की सेवा” के अपने आदर्श वाक्य को हर मिशन में साकार करती है।
भारत के गृह मंत्रालय के अधीन केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) की यह विशेष इकाई, भीड़ नियंत्रण, साम्प्रदायिक दंगे, बचाव और राहत कार्यों में अपनी त्वरित प्रतिक्रिया और अनुशासित कार्यशैली के लिए जानी जाती है।

Rapid Action Force का गठन भारत सरकार द्वारा 11 दिसंबर 1991 को किया गया था।
इसका उद्देश्य था — देशभर में बढ़ती भीड़ नियंत्रण और साम्प्रदायिक तनाव की घटनाओं में पेशेवर, संवेदनशील और शीघ्र प्रतिक्रिया देने वाली इकाई का गठन।

हालाँकि, RAF ने अपने पहले ऑपरेशन की शुरुआत 7 अक्टूबर 1992 को की, और यही तिथि अब इसका स्थापना दिवस (Day) मानी जाती है।
यह दिन उस प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जब भारत ने एक ऐसी बल को जन्म दिया जो “कानून व्यवस्था और मानवीय संवेदनशीलता” के बीच संतुलन स्थापित करने का कार्य करती है।

7 अक्टूबर 2003 को Rapid Action Force को President’s Colour (राष्ट्रपति का सम्मान) प्रदान किया गया — जो किसी भी सैन्य या अर्धसैनिक बल के लिए सर्वोच्च गौरव का प्रतीक होता है।
यह सम्मान RAF को उसके अद्वितीय योगदान, अनुशासन और नागरिक सुरक्षा में असाधारण सेवा के लिए दिया गया।
🔹 संगठनात्मक ढांचा
Rapid Action Force, CRPF की एक विशेष इकाई है, जिसके अंतर्गत वर्तमान में 15 बटालियनें कार्यरत हैं।
प्रत्येक बटालियन की कमान एक कमांडेंट के पास होती है।
हर बटालियन को रणनीतिक रूप से देश के विभिन्न राज्यों और प्रमुख शहरों में तैनात किया गया है, ताकि किसी भी क्षेत्र में संकट की स्थिति उत्पन्न होने पर “Zero-Response Time” में सहायता दी जा सके।

हर कंपनी में विशेष रूप से प्रशिक्षित टीमें होती हैं:
Riot Control Team (दंगा नियंत्रण इकाई)
Tear Gas Unit (आंसू गैस इकाई)
Fire Element (अग्निशमन एवं सुरक्षा दल)
इनके अतिरिक्त, हर बटालियन में एक महिला कंपनी शामिल की गई है — जो RAF की संवेदनशील पुलिसिंग की अवधारणा को सशक्त बनाती है।
महिला कर्मियों की यह उपस्थिति महिला प्रदर्शनकारियों या भीड़ से जुड़े संवेदनशील मामलों में मानवता और समझदारी के साथ हस्तक्षेप सुनिश्चित करती है।
🔹 कार्य क्षेत्र एवं ज़िम्मेदारियाँ
RAF का प्रमुख मिशन है —
“Serving Humanity with Sensitive Policing”
(संवेदनशील पुलिसिंग के माध्यम से मानव सेवा)
यह बल हमेशा Zero-Response Force के रूप में तैयार रहता है।
इसकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल हैं:
दंगे, साम्प्रदायिक झगड़े या भीड़ नियंत्रण
संवेदनशील इलाकों में कानून व्यवस्था बनाए रखना
प्राकृतिक आपदाओं में राहत और बचाव कार्य
बड़े राजनीतिक, धार्मिक या खेल आयोजनों में सुरक्षा
चुनावी प्रक्रिया के दौरान शांति और निष्पक्षता बनाए रखना
अंतरराष्ट्रीय मिशनों में भारत का प्रतिनिधित्व
🔹 राष्ट्रीय सेवा में RAF की भूमिका
RAF ने पिछले तीन दशकों में अनगिनत परिस्थितियों में देश की शांति और सुरक्षा बनाए रखने में अहम योगदान दिया है।
चाहे वह 1992 का अयोध्या आंदोलन हो, 2002 का गुजरात दंगा, 2013 का मुजफ्फरनगर दंगा या 2020 के दिल्ली दंगे — हर जगह RAF ने संवेदनशीलता और अनुशासन के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाई।
2008 के मुंबई आतंकी हमलों के दौरान भी RAF ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई — ‘ताज होटल, ओबेरॉय ट्राइडेंट’ और अन्य इलाकों में सुरक्षा घेरा बनाकर नागरिकों को सुरक्षित निकाला।
2001 में संसद हमले के दौरान RAF की महिला सदस्य कमलेश कुमारी ने असाधारण साहस का परिचय दिया।
उन्हें देश के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किया गया — जो RAF के साहस और त्याग का प्रतीक है।
🔹 अंतरराष्ट्रीय मंच पर RAF
RAF ने न केवल देश में बल्कि विश्व स्तर पर भी भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाई है।
संयुक्त राष्ट्र (UN) के Peacekeeping Missions में RAF के कई सदस्य सक्रिय रूप से भाग ले चुके हैं —
विशेष रूप से हैती, सोमालिया, लाइबेरिया और दक्षिण सूडान में RAF ने “भारतीय ब्लू हेलमेट्स” के रूप में शांति स्थापना में योगदान दिया।
सामाजिक संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण
RAF को अन्य बलों से अलग पहचान उसकी मानवीय दृष्टि और संवेदनशीलता देती है।
यह बल Non-Lethal Methods (अघातक उपायों) को प्राथमिकता देता है, जिससे किसी भी ऑपरेशन में नागरिकों को न्यूनतम हानि हो।
दंगे नियंत्रण के दौरान RAF “मोबाइल वॉटर कैनन, टियर गैस, रबर बुलेट्स और साउंड ग्रेनेड्स” का प्रयोग करती है — ताकि कानून व्यवस्था बहाल हो, लेकिन मानवता पर आंच न आए।
RAF की महिला टीमें “Gender Sensitivity” की उत्कृष्ट मिसाल हैं — जो महिलाओं और बच्चों से जुड़े संकटों में कोमलता और संवेदनशीलता के साथ हस्तक्षेप करती हैं।
चुनौतियाँ और सुधार की दिशा
यद्यपि RAF ने अपनी कार्यकुशलता से विश्व स्तर पर पहचान बनाई है, फिर भी कई चुनौतियाँ इसके सामने हैं:
संसाधनों की सीमाएँ:
आधुनिक दंगा नियंत्रण तकनीक और उपकरणों की कमी, प्रशिक्षण संसाधनों में असमानता जैसी चुनौतियाँ अब भी हैं।
केंद्र और राज्य समन्वय:
कई बार राज्यों और केंद्र सरकार के बीच तैनाती अनुमोदन या लॉजिस्टिक समर्थन में विलंब हो जाता है, जिससे प्रतिक्रिया समय प्रभावित होता है।
मानसिक तनाव और कार्यभार:
निरंतर तनावपूर्ण वातावरण में कार्य करने के कारण कर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रभाव पड़ता है।
आधुनिक उपकरणों की आवश्यकता:
ड्रोन सर्विलांस, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल कम्युनिकेशन सिस्टम जैसी तकनीकों का समावेश और अधिक आवश्यक है।
इन चुनौतियों के बावजूद RAF ने अपने मूल उद्देश्य “संवेदनशील पुलिसिंग” को बनाए रखा है और हर परिस्थिति में अपने कर्तव्यों का निर्वहन सर्वोत्तम ढंग से किया है।
त्वरित कार्रवाई से विश्वास की नींव तक
Rapid Action Force (RAF) आज भारत की “शांति और मानवता की प्रहरी” बन चुकी है।
इसकी नीली वर्दी केवल अनुशासन का प्रतीक नहीं, बल्कि विश्वास और सुरक्षा का प्रतीक भी है।
7 अक्टूबर को जब देश RAF का स्थापना दिवस मनाता है, तो यह दिन उस “अनुशासन, संवेदनशीलता और समर्पण” को सलाम करने का अवसर होता है, जिसने भारत में आधुनिक कानून व्यवस्था को नई दिशा दी।
RAF ने यह सिद्ध कर दिया है कि—
“बल का प्रयोग तभी सार्थक है, जब वह मानवता की रक्षा में हो।”

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वैशाली: आटा मिल फैक्ट्री में संदिग्ध परिस्थितियों में सुरक्षा गार्ड का शव बरामद, पुलिस ने तोड़ा दरवाजा

वैशाली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। वैशाली जिले के औद्योगिक क्षेत्र थाना अंतर्गत स्थित एक आटा मिल फैक्ट्री में सुरक्षा गार्ड का संदिग्ध हालत में शव मिलने से हड़कंप मच गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और फैक्ट्री के मेन गेट का ताला तोड़कर कमरे में प्रवेश किया। शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया गया है।

घटना का क्रम

सूचना के अनुसार, वैशाली जिले के औद्योगिक क्षेत्र स्थित फैक्ट्री में सुबह सुरक्षा गार्डों में से एक को उठाने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इस पर दूसरे गार्ड ने कंपनी अधिकारियों को सूचित किया। सूचना पाकर डायल 112 पुलिस टीम मौके पर पहुंची और फैक्ट्री का मुख्य गेट तोड़कर कमरे में प्रवेश किया, जहाँ मृतक सुरक्षा गार्ड का शव पड़ा मिला।

मृतक की पहचान

पुलिस ने मृतक की पहचान विनोद तिवारी (54 वर्ष) के रूप में की है, जो भोजपुर जिले के गरहनी थाना क्षेत्र अंतर्गत बरौरा के निवासी थे। वे पिछले 15 वर्षों से फैक्ट्री में सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्यरत थे। मृतक के पुत्र शिवम कुमार ने बताया कि सुबह उन्होंने पिता को फोन किया था, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुई। इसके बाद जब दूसरे नंबर से संपर्क किया गया तो उन्हें घटना की जानकारी मिली।

फैक्ट्री की पृष्ठभूमि

पहले यह फैक्ट्री सरिया निर्माण का कार्य करती थी, लेकिन पिछले कुछ महीनों से यहाँ आटा मिल का संचालन हो रहा है। फैक्ट्री में दो सुरक्षा गार्ड तैनात हैं, जो रात में अपने-अपने कमरे में सोते हैं। घटना वाले दिन सुबह एक गार्ड ने दूसरे को उठाने की कोशिश की, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, जिसके बाद घटना का पता चला।

पुलिस की कार्रवाई

औद्योगिक क्षेत्र थाना अध्यक्ष अरविंद पासवान ने कहा कि पुलिस ने घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। मृतक के कमरे में संदिग्ध स्थिति मिलने के कारण मामले की गहन जांच की जा रही है। शव का पोस्टमार्टम सदर अस्पताल में किया गया है और परिवार को इसकी सूचना दे दी गई है।

Instagram पर लॉन्च हुआ ‘Live Map’ फीचर, अब दोस्तों के साथ शेयर कर सकेंगे लोकेशन — लेकिन साथ आई नई प्राइवेसी चुनौती

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नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Instagram ने हाल ही में एक नया फीचर लॉन्च किया है — “Live Map”। इस फीचर के ज़रिए यूजर्स अब अपनी लाइव लोकेशन अपने दोस्तों के साथ शेयर कर सकते हैं। यह फीचर Snapchat के लोकेशन शेयरिंग टूल से मिलता-जुलता है और इसे सोशल मैप के रूप में पेश किया गया है।

नया Instagram Map फीचर — क्या है खास?

Instagram का नया मैप फीचर यूजर्स को यह नियंत्रण देता है कि वे अपनी लोकेशन किसके साथ शेयर करना चाहते हैं — केवल करीबी दोस्तों, किसी खास ग्रुप या सभी के साथ। यह फीचर एक सोशल डिस्कवरी प्लेटफॉर्म भी है, जहाँ यूजर्स लोकेशन टैग वाले रील्स, पोस्ट्स और स्टोरीज को एक्सप्लोर कर सकते हैं।

इसके ज़रिए यूजर्स ट्रेंडिंग कैफे, सिटी स्पॉट्स, आसपास चल रही पार्टियों और पब्लिक इवेंट्स के बारे में भी जान पाएंगे।

प्राइवेसी फीचर्स और सुरक्षा

Instagram ने इस फीचर में कई प्राइवेसी कंट्रोल जोड़े हैं:

डिफॉल्ट रूप से लोकेशन शेयरिंग बंद रहेगी।

यूजर्स को मैनुअली इसे ऑन करना होगा।

मैप के टॉप पर लोकेशन इंडिकेटर होगा जो दिखाएगा कि लोकेशन शेयर हो रही है या नहीं।

लोकेशन किसी भी समय डिसेबल की जा सकती है।

नई परेशानी — प्राइवेसी रिस्क

हालांकि, यदि यूजर्स एक बार लोकेशन शेयर करना चालू कर देते हैं, तो यह ऑटोमैटिक बंद नहीं होगा। इसे मैनुअली बंद करना ज़रूरी होगा। इस बात को भूल जाने पर यूज़र की लोकेशन लगातार दूसरों को दिखाई दे सकती है।

अगर लोकेशन शेयरिंग “फ्रेंड्स” या “पब्लिक” के लिए ऑन है, तो कई इंस्टाग्राम कनेक्शंस यूज़र की मूवमेंट ट्रैक कर सकते हैं। इसी कारण प्राइवेसी एक्सपर्ट्स इस फीचर का इस्तेमाल करते समय सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।

भारत में खास प्राइवेसी अपडेट

यह फीचर कुछ देशों में पहले से उपलब्ध था, लेकिन भारत में इसे अतिरिक्त प्राइवेसी फीचर्स के साथ पेश किया गया है। इंस्टाग्राम ने कहा कि यह बदलाव यूज़र्स की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किया गया है और भविष्य में इस फीचर में और सुधार किए जाएंगे।

जेईई, नीट और सीयूईटी में मनचाहा परीक्षा शहर चुनने की सुविधा खत्म, आधार कार्ड पते पर होगा केंद्र आवंटन

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने जेईई मेन, नीट यूजी और सीयूईटी यूजी परीक्षाओं के लिए नए नियम लागू करने की घोषणा की है। अब परीक्षार्थियों को मनचाहा परीक्षा शहर चुनने की सुविधा नहीं मिलेगी और परीक्षा केंद्र आधार कार्ड में लिखे पते के आधार पर ही आवंटित किए जाएंगे।

आधार कार्ड में पते का महत्व

NTA ने छात्रों और अभिभावकों को नोटिस जारी कर चेतावनी दी है कि आवेदन प्रक्रिया शुरू होने से पहले आधार कार्ड में पते का सही अपडेट होना अनिवार्य है। आवेदन प्रक्रिया के बाद किसी भी प्रकार का बदलाव संभव नहीं होगा।

यह बदलाव शैक्षणिक सत्र 2026-27 के राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं में लागू होगा, जिनमें शुरुआत जेईई मेन-2026 (जनवरी सत्र) से होगी।

जरूरी निर्देश

आधार कार्ड और दसवीं कक्षा के सर्टिफिकेट में नाम, जन्मतिथि और अन्य जानकारियां एक जैसी होनी चाहिए।

यदि इन जानकारियों में अंतर होगा तो आवेदन रद्द किया जा सकता है।

आधार कार्ड का पता सही होना आवश्यक है, क्योंकि इसी के आधार पर परीक्षा केंद्र आवंटित होगा।

आरक्षित वर्ग के छात्रों के लिए सूचना

दिव्यांग, एससी, एसटी, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के छात्रों को सलाह दी गई है कि वे अपने अपडेटेड आरक्षण प्रमाण पत्र तैयार रखें। इन दस्तावेजों में दी गई जानकारी आधार और दसवीं कक्षा के प्रमाण पत्र से मेल खानी चाहिए। आवेदन पत्र भरने के बाद इन दस्तावेजों में कोई बदलाव संभव नहीं होगा।

परीक्षा केंद्र आवंटन में बदलाव का उद्देश्य

NTA का कहना है कि यह बदलाव परीक्षा प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए किया जा रहा है। इसका मकसद परीक्षार्थियों को उनके निवास स्थान के नजदीकी केंद्र पर परीक्षा देने की सुविधा सुनिश्चित करना है और प्रशासनिक प्रक्रिया को सरल बनाना है।

महर्षि वाल्मीकि जयंती — आदिकवि का स्मरण

आदि कवि की कलम से निकला अमर ग्रंथ – रामायण का संदेश

रत्नाकर से वाल्मीकि बनने की आत्मगाथा

धर्म, काव्य और मानवता के आदिशिल्पी
भारत की संस्कृति, दर्शन और काव्य परंपरा में महर्षि वाल्मीकि का नाम सबसे पहले और सबसे ऊँचा आता है। उन्हें ‘आदि कवि’ कहा गया है — अर्थात् वे, जिन्होंने सर्वप्रथम काव्य के रूप में भाव, नीति और आदर्श का संयोजन किया।
वाल्मीकि केवल एक कवि नहीं, बल्कि एक जीवन परिवर्तन की प्रतीक कथा हैं — एक डाकू से महर्षि बनने की यात्रा, जो आत्म-परिवर्तन, साधना और सत्य की खोज का अमर उदाहरण है।
उनकी रचना रामायण न केवल धार्मिक ग्रंथ है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, मर्यादा, नीति और मानवता का शाश्वत दर्शन प्रस्तुत करती है।
त्योहार की तिथि व पंचांग
महर्षि वाल्मीकि जयंती प्रतिवर्ष हिन्दू पंचांग के अनुसार अश्विन माह की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। इस दिन को प्रकट दिवस (Pragat Diwas) भी कहा जाता है।
यह तिथि चंद्र कलेंडर पर आधारित होती है, इसलिए ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार हर वर्ष बदलती रहती है।
2025 में अश्विन पूर्णिमा तिथि 6 अक्टूबर दोपहर 12:24 बजे प्रारंभ होकर 7 अक्टूबर सुबह 9:17 बजे तक रही।
इस दिन देशभर में भव्य आयोजन, शोभा यात्राएँ और धार्मिक कार्यक्रम होते हैं, जिनमें लोग आदिकवि को नमन करते हैं और रामायण पाठ के माध्यम से उनके विचारों को आत्मसात करते हैं।
महर्षि वाल्मीकि — जीवन, प्रेरणा व कृति
महर्षि वाल्मीकि का जीवन एक अद्भुत परिवर्तन की गाथा है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, उनका पूर्व नाम रत्नाकर था। वे एक साधारण परिवार में जन्मे थे, किन्तु परिस्थितियोंवश अपराध के मार्ग पर चल पड़े।
उनका जीवन तब परिवर्तित हुआ जब नारद मुनि ने उन्हें “राम नाम” का जप करने की प्रेरणा दी। जब रत्नाकर ने ‘राम’ का नाम जपना शुरू किया, तो वे गहन ध्यान में लीन हो गए। वर्षों की तपस्या के पश्चात जब वे भूमि के अंदर चींटियों की वालियों (मिट्टी के ढेरों) से ढक गए, तब उनका नाम पड़ा — ‘वाल्मीकि’, अर्थात् जो वाल्मी (मिट्टी) से प्रकट हुए।

उनकी तपस्या ने उन्हें एक ऋषि बना दिया और अंततः उन्होंने रामायण की रचना की — जो मानव सभ्यता की सबसे पुरानी, सबसे प्रेरक और नैतिकता से परिपूर्ण कृति है।
रामायण के सात कांड (बालकांड से उत्तरकांड) जीवन के सात सोपानों की तरह हैं, जो धर्म, मर्यादा, प्रेम, संघर्ष और मोक्ष का मार्ग दिखाते हैं।
वाल्मीकि ने न केवल राम की कथा लिखी, बल्कि सीता को आश्रय देकर मानवीय संवेदनाओं की पराकाष्ठा दिखाई। उन्होंने लव-कुश को शिक्षा दी और उन्हें समाज में आदर्श व्यक्तित्व के रूप में गढ़ा।
यही कारण है कि वाल्मीकि केवल कवि नहीं, बल्कि धर्म, नीति और शिक्षण के आदिगुरु हैं।

सामाजिक चेतना के प्रणेता : वाल्मीकि दर्शन की आधुनिक प्रासंगिकता
महर्षि वाल्मीकि का जीवन दर्शन केवल प्राचीन काल तक सीमित नहीं है। आज के युग में जब समाज भौतिकता की ओर अग्रसर है, तब उनके विचार पुनः मानवता की ओर लौटने की प्रेरणा देते हैं।
उन्होंने यह दिखाया कि कोई भी व्यक्ति चाहे कितना भी पतित क्यों न हो, यदि वह सत्य, तप और करुणा का मार्ग अपनाए, तो महर्षि बन सकता है।
उनका जीवन आत्म-शुद्धि का उदाहरण है — यह संदेश देता है कि सच्ची महानता जन्म से नहीं, कर्म से प्राप्त होती है।

वाल्मीकि का रामायण आज भी साहित्य, नाटक, टेलीविज़न और फिल्म के माध्यम से करोड़ों लोगों तक पहुँच रहा है।
उनकी वाणी ने न केवल संस्कृत साहित्य को जन्म दिया, बल्कि भारतीय भाषाओं के विकास की नींव भी रखी।
श्रद्धेय आयोजन और सामाजिक भावना
वाल्मीकि जयंती पर भारत के विभिन्न हिस्सों में भव्य कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं — विशेषकर उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, तमिलनाडु और दिल्ली में।
इस दिन शोभायात्राएँ, भजन-कीर्तन, रामायण पाठ, निःशुल्क भोजन वितरण और रक्तदान शिविर जैसे आयोजन किए जाते हैं।
कई स्थानों पर वाल्मीकि मंदिरों और आश्रमों को सजाया जाता है। लोग उनके जीवन से प्रेरणा लेकर समाज में समानता, शिक्षा और करुणा का संदेश देते हैं।
सरकारी दफ्तरों और विद्यालयों में भी इस दिन विशेष कार्यक्रम या अवकाश रखा जाता है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ महर्षि के आदर्शों से जुड़ सकें।

वाल्मीकि और स्त्री सम्मान : सीता को आश्रय का प्रतीक
वाल्मीकि की सबसे मानवीय विशेषता यह थी कि उन्होंने सीता — जो उस समय समाज की कठोर परीक्षा का सामना कर रही थीं — को आश्रय दिया।
उन्होंने उन्हें केवल सुरक्षा ही नहीं दी, बल्कि सम्मानजनक जीवन प्रदान किया।
लव-कुश को शिक्षा देकर उन्होंने यह भी सिद्ध किया कि एक सच्चा गुरु वही है, जो अपने विद्यार्थियों को सत्य, धर्म और परिश्रम का मार्ग दिखाए।
वाल्मीकि का यह अध्याय आज के समाज को बताता है कि स्त्री-सम्मान किसी धर्म या जाति का विषय नहीं, बल्कि मानवता का आधार है।

शिक्षा और नीति के मार्गदर्शक
महर्षि वाल्मीकि ने अपनी रचनाओं के माध्यम से शिक्षा, नीति और संस्कृति के तीनों मूल स्तंभों को परिभाषित किया।
उनकी दृष्टि में शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जन नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण था।
उन्होंने राम के चरित्र के माध्यम से यह सिखाया कि जीवन में संयम, न्याय, करुणा और मर्यादा ही मनुष्य को श्रेष्ठ बनाती है।
आज के युवा वर्ग के लिए यह संदेश अत्यंत प्रासंगिक है, जब वे प्रतिस्पर्धा और प्रलोभनों से जूझ रहे हैं।

वाल्मीकि — युगों युगों तक जीवित प्रेरणा
महर्षि वाल्मीकि का जीवन काल, चाहे लाखों वर्ष पूर्व का हो, परंतु उनके विचार आज भी युगों-युगों तक प्रासंगिक हैं।
उन्होंने भारतीय साहित्य को जीवन का अर्थ दिया, काव्य को दर्शन का माध्यम बनाया और मानवता को आत्मज्ञान की दिशा दिखाई।
उनका नाम केवल रामायण तक सीमित नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के हर क्षेत्र में जीवित है — शिक्षा, समाज, धर्म और नीति में।

इसलिए महर्षि वाल्मीकि जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मानवता, समानता और ज्ञान का उत्सव है।
जब हम वाल्मीकि को स्मरण करते हैं, तब हम अपने भीतर की करुणा, सृजन और सत्य की खोज को भी नमन करते हैं।

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इंग्लैंड दौरे पर चोटिल ऋषभ पंत रणजी ट्रॉफी में वापसी कर सकते हैं, मेडिकल टीम की मंजूरी का इंतजार

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नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। भारतीय टीम के स्टार विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत जल्द ही रणजी ट्रॉफी में वापसी कर सकते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, पंत अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में दिल्ली की ओर से रणजी ट्रॉफी में खेलते नजर आ सकते हैं, बशर्ते उन्हें बीसीसीआई की मेडिकल टीम से फिटनेस क्लियरेंस मिल जाए।

पंत की चोट और वापसी की संभावना

ऋषभ पंत इंग्लैंड दौरे के दौरान चोटिल हो गए थे। उनके दाएं पैर में चोट लगी थी, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अगले दिन बल्लेबाजी की, जिससे चोट और गंभीर हो गई। इसी कारण उन्हें वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट सीरीज और ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए चुने गए स्क्वॉड में शामिल नहीं किया गया था।

बीसीसीआई के सूत्रों के अनुसार, पंत के पैर की जांच बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) में इस हफ्ते की जाएगी। यदि मेडिकल टीम को फिटनेस में कोई समस्या नहीं मिली, तो उन्हें 10 अक्टूबर तक खेलने की अनुमति मिल सकती है।

दिल्ली रणजी टीम के लिए पंत की योजना

पंत ने दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (DDCA) के अध्यक्ष रोहन जेटली को सूचित किया है कि वह 25 अक्टूबर से शुरू होने वाले रणजी मैचों में खेलने के इच्छुक हैं, यदि उन्हें मेडिकल मंजूरी मिलती है। DDCA के एक अधिकारी के अनुसार, पंत ने अभी तक किसी निश्चित तारीख की पुष्टि नहीं की है, लेकिन संभव है कि वह पहले रणजी मैच में शामिल न हो पाएँ।

यदि पंत उपलब्ध हुए तो वह दिल्ली टीम की कप्तानी भी कर सकते हैं।

रणजी ट्रॉफी से टेस्ट क्रिकेट में वापसी

भारत को 14 नवंबर से दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज़ खेलनी है। पंत रणजी ट्रॉफी में कम से कम दो मैच खेल सकते हैं, जिससे उन्हें टेस्ट सीरीज़ से पहले मैदान पर वापसी का मौका मिलेगा और वह अपनी फॉर्म को टेस्ट मैचों के लिए परख पाएंगे।

बैंक ऑफ महाराष्ट्र का लोन 17% बढ़ा; सरकारी बैंकों की पूंजी निजी बैंकों से बेहतर प्रदर्शन कर रही है

मुंबई (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में अपने लोन पोर्टफोलियो में 16.8% की वृद्धि दर्ज की है। सितंबर 2024 तक बैंक का लोन आकार 2.17 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 2.54 लाख करोड़ रुपये हो गया है। जमा राशि भी 12.1% बढ़कर 3.09 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।

सरकारी बैंकों की पूंजी में बढ़ोतरी, निजी बैंकों में गिरावट

वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के बीच सरकारी बैंकों की पूंजी मजबूत बनी हुई है। जुलाई-सितंबर तिमाही में सरकारी बैंकों के बाजार पूंजीकरण में इजाफा हुआ है, जबकि निजी बैंकों में गिरावट दर्ज की गई।

एसएंडपी ग्लोबल के आंकड़ों के अनुसार:

एचडीएफसी बैंक की पूंजी में 4.8% गिरावट

आईसीआईसीआई बैंक की पूंजी में 6.7% गिरावट

कोटक महिंद्रा बैंक, एक्सिस बैंक और इंडसइंड बैंक में भी गिरावट

इंडसइंड बैंक का बाजार पूंजीकरण सबसे अधिक 15.7% घटा

वहीं, सरकारी बैंकों में:

एसबीआई की पूंजी में 10% वृद्धि

बैंक ऑफ बड़ौदा में 3.9% वृद्धि

पंजाब नेशनल बैंक में 2.1% वृद्धि

सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर में गिरावट

सेवा क्षेत्र में गतिविधियों की धीमी गति के कारण सेवा क्षेत्र का पीएमआई सितंबर में घटकर 60.9 हो गया, जो अगस्त में 62.9 था। एचएसबीसी इंडिया के मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी के अनुसार, यह गिरावट सामान्य है और सेवाओं में विकास की गति में कोई बड़ी मंदी का संकेत नहीं देती।

सेवा निर्यात में वृद्धि

नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का सेवा निर्यात सालाना आधार पर 14% बढ़कर 102 अरब डॉलर हो गया है। इसी दौरान, आयात 4.2% बढ़कर 48 अरब डॉलर तक पहुंचा। 2024-25 में कुल व्यापार 1.73 लाख करोड़ डॉलर रहा, जिसमें 823 अरब डॉलर का निर्यात और 908 अरब डॉलर का आयात शामिल है। प्रमुख निर्यात श्रेणियों में मिनरल फ्यूल, इलेक्ट्रिकल मशीनरी और न्यूक्लियर रिएक्टर शामिल हैं।

सेबी ने सोशल मीडिया से हटाई 1 लाख से अधिक सामग्री

सेबी ने पिछले 18 महीनों में गूगल, मेटा और अन्य प्लेटफॉर्म से 1 लाख से अधिक गैरकानूनी निवेश सामग्री हटाई है। सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा कि तकनीकी प्लेटफॉर्म निवेशकों को धोखा देने वाली सामग्री के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं। उन्होंने निवेशकों को सतर्क रहने की चेतावनी दी और कहा कि केवल 36% लोगों को पूंजी बाजार की पर्याप्त जानकारी है।

जन औषधि नीति में बदलाव की संभावना

जन औषधि केंद्रों के खुदरा विक्रेताओं ने सरकार से “शून्य दूरी नीति” की समीक्षा की मांग की है। यदि नीति में बदलाव होता है, तो नजदीक की दुकानें नहीं खोली जा सकेंगी और तय दूरी पर ही नई दुकानें खुलेंगी। 11 जून 2025 तक देश में 16,000 से अधिक जन औषधि केंद्र काम कर रहे हैं।

दिल का रक्षक: ‘अर्जुन पुष्प’ के चमत्कारी योग

भारत की औषधीय परंपरा में अर्जुन वृक्ष का नाम अत्यंत श्रद्धा से लिया जाता है। आयुर्वेद में इसे “हृदय-बल्य” अर्थात् हृदय को शक्ति देने वाली औषधि कहा गया है। Terminalia arjuna नामक यह वृक्ष भारत के लगभग सभी भागों में नदी-तालाबों के किनारे पाया जाता है। इसकी छाल, पत्तियाँ, फल और फूल सभी औषधीय महत्व रखते हैं।

अर्जुन की छाल जहाँ हृदय रोग, रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण में उपयोगी है, वहीं इसके फूल भी कम प्रभावी नहीं हैं। अर्जुन पुष्प शीतल, सुगंधित और रक्तशुद्धिकारक गुणों से भरपूर होते हैं। प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में इसका उल्लेख हृदय रोग, रक्त दोष, मूत्र विकार और अनिद्रा जैसी बीमारियों में उपयोगी औषधि के रूप में किया गया है।

  1. अर्जुन पुष्प क्वाथ (काढ़ा)

उपयोग: हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, रक्तशुद्धि
सामग्री:

अर्जुन फूल (सूखे) – 10 ग्राम

जल – 200 मि.ली.
विधि: जल को धीमी आँच पर आधा रहने तक उबालें। छानकर सुबह और शाम सेवन करें।

  1. अर्जुन पुष्प–गुलाब योग

उपयोग: हृदय की धड़कन, तनाव, रक्त दोष
सामग्री:

अर्जुन फूल चूर्ण – 5 ग्राम

गुलाब की पंखुड़ी चूर्ण – 2 ग्राम

शहद – 1 चम्मच
सेवन विधि: सुबह खाली पेट और रात को सोने से पहले सेवन करें।

  1. अर्जुन पुष्प–द्राक्ष योग

उपयोग: उच्च रक्तचाप, थकावट, हृदय दुर्बलता
सामग्री:

अर्जुन फूल चूर्ण – 3 ग्राम

मुनक्का (द्राक्ष) – 5 नग

जल – 150 मि.ली.
विधि: मुनक्के को जल में उबालें, फिर अर्जुन फूल चूर्ण मिलाकर गुनगुना पिएँ।

  1. अर्जुन पुष्प चूर्ण योग

उपयोग: रक्तशुद्धि, त्वचा रोग, हृदय बल
सामग्री:

अर्जुन फूल चूर्ण – 100 ग्राम

मिश्री – 50 ग्राम
विधि: दोनों को मिलाकर रखें। 3–5 ग्राम मात्रा दिन में दो बार गुनगुने जल के साथ लें।

  1. अर्जुन पुष्प शीतल अर्क

उपयोग: मूत्रकृच्छ (मूत्र रुकना), मूत्रदाह
सामग्री:

अर्जुन फूल – 50 ग्राम

ठंडा जल – 400 मि.ली.
विधि: फूलों को रातभर जल में भिगो दें। सुबह छान लें।
सेवन: 50–60 मि.ली. मात्रा दिन में दो बार लें।

  1. अर्जुन पुष्प हृदय वटी (घरेलू योग)
    उपयोग: हृदय की कमजोरी, धड़कन बढ़ना, अनिद्रा
    सामग्री:
  • अर्जुन फूल चूर्ण – 20 ग्राम
  • अश्वगंधा चूर्ण – 20 ग्राम
  • शंखपुष्पी चूर्ण – 20 ग्राम
  • शहद – आवश्यकता अनुसार
    विधि: सभी सामग्री मिलाकर छोटे-छोटे वटी (गोली) बना लें।
    सेवन: 1-1 वटी सुबह और शाम गुनगुने जल से लें।

सावधानियाँ

  1. हृदय रोगी इन योगों का सेवन चिकित्सक की देखरेख में करें।
  2. अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से कब्ज़ या पेट में भारीपन हो सकता है।
  3. गर्भवती महिलाएँ प्रयोग से पहले वैद्य या चिकित्सक से परामर्श लें।
    अर्जुन पुष्प प्रकृति का एक अनुपम वरदान है। यह न केवल हृदय को सशक्त बनाता है, बल्कि शरीर और मन दोनों को संतुलित रखता है। नियमित और संयमित सेवन से यह दीर्घायु, मानसिक शांति और स्वस्थ हृदय का साधन बन सकता है।

बिहार चुनाव: लोकतंत्र की असली परीक्षा शुरू

तिथियाँ तय हैं, पर दिशा तय करना है जनता को

बिहार में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। नवंबर में दो चरणों में मतदान होगा और 14 नवंबर को नतीजे सामने होंगे। यह केवल चुनावी प्रक्रिया का आरंभ नहीं, बल्कि बिहार की लोकतांत्रिक चेतना की नई परीक्षा है। राजनीति के मैदान में फिर वही चेहरे, वही वादे और वही नारों की गूंज है — मगर जनता के मन में सवाल पहले से कहीं अधिक तीखे हैं। चुनाव तिथियों के ऐलान के साथ ही राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। अब सारा ध्यान प्रशासनिक निष्पक्षता और राजनीतिक शालीनता पर है। किंतु अनुभव कहता है कि कागज़ पर लागू नियम तभी सार्थक होते हैं, जब उनके पालन की नीयत सच्ची हो। चुनाव आयोग और शासन-प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि चुनाव सिर्फ “कानूनी प्रक्रिया” न बन जाए, बल्कि जन विश्वास का उत्सव भी रहे। नवीन मतदाता सूची में लाखों नामों के घटने-बढ़ने से आम मतदाता में संदेह पनपा है। यह चुनावी ईमानदारी की पहली सीढ़ी है। अगर सूची ही अपारदर्शी हो, तो जनादेश की पवित्रता पर धब्बा लगना स्वाभाविक है। आयोग को इस पर तुरंत स्पष्टता और भरोसा कायम करना चाहिए। लोकतंत्र की जड़ तभी मजबूत होगी, जब हर मतदाता यह विश्वास रखे कि उसका नाम दर्ज है और उसका वोट गिने जाने लायक है। सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियों का बखान करेगा, सड़कें, पुल, बिजली, स्वास्थ्य योजनाएं। विपक्ष बेरोजगारी, पलायन, अपराध और शिक्षा की दुर्दशा को मुद्दा बनाएगा। पर बिहार की जनता अब आंकड़ों से नहीं, अंतर से बदलाव चाहती है। यह चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन का नहीं, राजनीतिक संस्कृति के सुधार का होना चाहिए। जनता अब वादों से नहीं, विश्वसनीयता से निर्णय करेगी। सभाओं की भीड़, नारों का शोर, सोशल मीडिया का प्रचार — ये सब फिर लौट आएंगे। मगर लोकतंत्र शोर से नहीं, संवाद से जीवित रहता है। जाति, धर्म और भावनाओं की आंधी में अगर मतदाता फिर बह गया, तो इतिहास खुद को दोहराएगा। अब वक्त है कि हर नागरिक अपने वोट को विचार का औजार बनाए, न कि भावनाओं का हथियार। बिहार के इस चुनाव में सबसे बड़ा प्रश्न यह नहीं कि कौन पार्टी जीतेगी, बल्कि यह कि जनता अपने विवेक से कितनी जीतेगी। अगर मतदाता जाति और छलावे से ऊपर उठकर मतदान करेगा, तो यही होगा बिहार के राजनीतिक पुनर्जागरण का आरंभ। अब जब तिथियाँ तय हो चुकी हैं, तो बिहार को चाहिए नई दिशा, क्योंकि असली जीत वोटों की नहीं, विश्वास की होनी चाहिए।