Sunday, July 5, 2026
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विकी उर्फ बेबी की मौत में 24 घंटे बाद भी गिरफ्तारी नही

परिजन न्याय की गुहार में बेहाल

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

सिकंदरपुर क्षेत्र में हुई विकी उर्फ बेबी निवासी गाँव चक्खांन की संदिग्ध मौत के 24 घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ अभी तक कोई ठोस सुराग नहीं लग सका है। घटना के बाद से ही पुलिस लगातार आरोपितों की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है, लेकिन अब तक किसी भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। इससे क्षेत्र में लोगों में आक्रोश और नाराजगी व्याप्त है।वहीं मृतका के घर का दृश्य बेहद मार्मिक है। मासूम बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है, जिन्हें देखकर हर किसी की आंखें नम हो जा रही हैं। परिजन न्याय की गुहार लगाते हुए आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस यदि तत्परता से कार्रवाई करे तो आरोपी जल्द ही पकड़ में आ सकते हैं।इस संबंध में चौकी प्रभारी अश्वनी कुमार मिश्र ने बताया कि पुलिस टीम लगातार छापेमारी कर रही है और प्रतिवादी की तलाश में जुटी हुई है। उन्होंने कहा कि आरोपितों को बहुत जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख

साइबर टीम कोपागंज द्वारा शिकायतकर्ता को वापस कराई गई 90 हजार की धनराशि

मऊ ( राष्ट्र की परम्परा ) पुलिस अधीक्षक इलमारन व अपर पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार के निर्देशन में साइबर फ्रॉड की रोकथाम व जागरूकता के तहत चलाए जा रहे अभियान के क्रम क्षेत्राधिकारी घोसी जितेंद्र सिंह व प्रभारी निरीक्षक कोपागंज रविन्द्रनाथ राय के कुशल नेतृत्व में थाने पर नियुक्त साईबर टीम द्वारा शिकायतकर्ता को उसके खाते से गायब कुल 90 हजार रुपए शिकायतकर्ता को थाने बुला कर गुरुवार को वापस कराया गया । शिकायतकर्ता अपनी गायब हुई धनराशि पाकर काफी उत्साहित है।

जानकारी के अनुसार ग्राम फिरोजपुर थाना कोपागंज निवासी ममता पत्नी नागेन्द्र राजभर के खाते से साइबर फ्रॉडर द्वारा 90 का फ्रॉड कर ट्रान्सफर कर लिया गया । जिसकी पीड़ित ने साइबर पोर्टल पर शिकायत संख्या 33110250142782 दर्ज करायी थी । जिसके तहत थाना कोपागंज में नियुक्त साईबर टीम कम्प्यूटर आपरेटर अभिजीत पटेल, कांस्टेबल अंकित चौरसिया, महिला कांस्टेबल कविता पासवान के द्वारा कार्यवाही करके शिकायतकर्ता के खाते मे फ्रॉड हुई सम्पूर्ण धनराशि 90 हजार रूपये गुरुवार को वापस करायी गयी।

देश के मान सम्मान व विकास की चिंता सिर्फ कांग्रेस को – गोविन्द मिश्र

मंजीत प्रजापति बने युवा कांग्रेस सोशल मीडिया के जिला कोआर्डिनेटर दी बधाई

सलेमपुर, देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के निर्देश पर युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोआर्डिनेटर मनीष शर्मा , राष्ट्रीय अध्यक्ष उदयभानु चिब व सोशल मीडिया के अध्यक्ष मनु जैन,प्रदेश अध्यक्ष विशाल सिंह के द्वारा देवरिया जिले के देसही देवरिया ब्लॉक के महवा निवासी मंजीत प्रजापति को युवा कांग्रेस सोशल मीडिया का जिला कोआर्डिनेटर बनाए जाने पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस कार्यालय पर बैठक कर उन्हें बधाई दी। इस दौरान सम्बोधित करते हुए युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष गोविंद मिश्र ने कहा कि मंजीत प्रजापति को केंद्रीय नेतृत्व ने जिस आशा और विश्वास से यह जिम्मेदारी सौंपी है वह निश्चित ही इस पर खरा उतरेंगें। इनके नेतृत्व में सोशल मीडिया प्लेटफार्म के द्वारा युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार होगा। देश के मान सम्मान व विकास की चिंता सिर्फ कांग्रेस को ही है।युवा कांग्रेस सोशल मीडिया के प्रदेश संयोजक सत्यम पांडेय ने कहा कि केन्द्र व प्रदेश की भाजपा सरकार ने युवा वर्ग से जो चुनावी वादे किये हैं उसको पूरा नहीं कर रही है ।युवा वर्ग जब कहीं नौकरी की मांग कर रहा है तो उसको नौकरी के वजाय लाठियां खानी पड़ रही है।देश में कांग्रेस को ही युवाओं,छात्रों के रोजगार व शिक्षा की चिंता है। देश की आम जनता अब जान गईं है कि कांग्रेस के बिना सत्ता में आए देश की जनता को गरीबी व महंगाई से निजात नही मिल सकता है। बैठक को मनीष रजक, विराट यादव,अशोक कुमार, हर्षित सिंह,रोहित यादव,विजय लाल,परमानंद प्रसाद,कार्तिकेय मिश्र, रणजीत शुक्ल, अमित प्रताप सिंह,गंगा सागर मिश्र,मणिप्रकाश पांडेय, सन्नी पांडेय, मोहित कुमार, अवधेश यादव,जाबिर खान,जावेद अख्तर,शोएब खान,शाहरुख खान,इरफान खान ,विपिन पांडेय, विश्वामित्र राजभर,आदि ने सम्बोधित किया।

लौहपुरुष से लेकर विज्ञान के सितारों तक

🌿 31 अक्टूबर: लौहपुरुष से लेकर विज्ञान के सितारों तक — इतिहास के पन्नों में अंकित गौरव गाथा 🌿


भारत का इतिहास उन तिथियों से सजा हुआ है जिनमें देशभक्ति, त्याग, बुद्धिमत्ता और समर्पण की अमर कहानियाँ छिपी हैं। ऐसी ही एक ऐतिहासिक तिथि है 31 अक्टूबर, जिसने देश और विश्व को ऐसे रत्न दिए जिन्होंने अपने कार्यों से युगों-युगों तक प्रेरणा दी। आइए जानें, इस दिन जन्मे महान व्यक्तित्वों के जीवन से जुड़ी प्रेरक झलकियाँ ।
🕊️ सरदार वल्लभभाई पटेल (1875) – भारत के लौहपुरुष और एकता के प्रतीक
31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नाडियाद में जन्मे सरदार वल्लभभाई पटेल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के ऐसे सेनानी थे जिन्होंने स्वतंत्र भारत को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया।
भारत की 562 रियासतों का विलय करवाना एक असंभव कार्य था जिसे उन्होंने अपने लौह-संकल्प और राजनीतिक कौशल से संभव बनाया। उन्हें “भारत का लौहपुरुष” कहा गया।
उनकी दूरदर्शिता ने देश की एकता को स्थायी नींव दी। आज “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” उनके अदम्य साहस और देशप्रेम का प्रतीक बनकर खड़ी है।

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📚 आचार्य नरेन्द्र देव (1889) – समाजवाद के सिद्धांतकार और शिक्षा के दीपस्तंभ
31 अक्टूबर 1889 को जन्मे आचार्य नरेन्द्र देव भारतीय समाजवाद के जनक माने जाते हैं। उन्होंने राजनीति को नैतिकता और दर्शन से जोड़ा।
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय और लखनऊ विश्वविद्यालय में उन्होंने शिक्षा को समाज सुधार का माध्यम माना। उनका मानना था कि समाज की प्रगति शिक्षा और समानता से ही संभव है।
वे भारतीय राजनीति में “नीतिवान समाजवादी” के रूप में अमर हैं।

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👑 नोरोदम शिनौक (1922) – कंबोडिया के राष्ट्रनायक और शांति के दूत
कंबोडिया के राजा नोरोदम शिनौक का जन्म भी 31 अक्टूबर 1922 को हुआ। वे न केवल अपने देश के शासक थे बल्कि वहां के राजनीतिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के प्रतीक बने।
उन्होंने कंबोडिया को फ्रांसीसी शासन से मुक्त कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और दक्षिण पूर्व एशिया में शांति और स्वतंत्रता के अग्रदूत कहलाए।
उनका शासन कला, संस्कृति और राष्ट्रीय गौरव के पुनर्जीवन का काल था।
🔬 डॉ. नरिंदर सिंह कपानी (1926) – फाइबर ऑप्टिक्स के जनक
31 अक्टूबर 1926 को पंजाब में जन्मे डॉ. नरिंदर सिंह कपानी ने विज्ञान की दुनिया में वह क्रांति की जिसने आधुनिक संचार तकनीक को नया युग दिया।
उन्होंने फाइबर ऑप्टिक्स तकनीक की खोज कर मानव सभ्यता को प्रकाश की गति से जोड़ दिया।
उनके योगदान के कारण आज इंटरनेट, टेलीकम्युनिकेशन, और मेडिकल तकनीक संभव हुई। वे सच्चे अर्थों में “लाइट मैन ऑफ द वर्ल्ड” थे।

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🏛️ ओमान चांडी (1943) – जनसेवा और सौम्यता के प्रतीक
केरल के लोकप्रिय नेता ओमान चांडी का जन्म 31 अक्टूबर 1943 को हुआ। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के इस नेता ने जनता से गहरा जुड़ाव बनाए रखा।
दो बार केरल के मुख्यमंत्री रहे ओमान चांडी ने शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार किए।
उनकी राजनीति ईमानदारी, सादगी और सेवा की मिसाल थी।
🚀 जी. माधवन नायर (1943) – अंतरिक्ष विज्ञान के अग्रदूत
जी. माधवन नायर, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष, का जन्म भी 31 अक्टूबर 1943 को हुआ।
उनके नेतृत्व में इसरो ने PSLV और GSLV जैसे प्रक्षेपण यान विकसित किए।
उन्होंने भारत के अंतरिक्ष मिशनों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई और देश को “स्पेस सुपरपावर” बनने की दिशा में अग्रसर किया।
🌾 सर्बानन्द सोनोवाल (1962) – असम की पहचान और युवा नेतृत्व का प्रतीक
31 अक्टूबर 1962 को जन्मे सर्बानन्द सोनोवाल असम के 14वें मुख्यमंत्री बने।
उनकी राजनीति का आधार था – क्षेत्रीय पहचान, सांस्कृतिक संरक्षण और विकास।
उन्होंने असम को पर्यावरणीय, सांस्कृतिक और औद्योगिक दृष्टि से नई दिशा दी।
आज वे केंद्र सरकार में मंत्री हैं और पूर्वोत्तर भारत की आवाज को मजबूती से प्रस्तुत करते हैं।
💻 देबदीप मुखोपाध्याय (1977) – आधुनिक कंप्यूटर विज्ञान के प्रतिभाशाली शोधकर्ता
1977 में जन्मे देबदीप मुखोपाध्याय भारत के एक प्रसिद्ध कंप्यूटर वैज्ञानिक हैं।
उन्होंने साइबर सुरक्षा और क्रिप्टोग्राफी के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर भारत का नाम रोशन किया।
उनके शोध कार्य आधुनिक डिजिटल सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण हैं।
वे भारत के युवा वैज्ञानिकों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं जो नवाचार की राह पर अग्रसर हैं।
🌺 31 अक्टूबर — इतिहास का प्रेरक दर्पण
31 अक्टूबर केवल एक तारीख नहीं, यह एक विचारधारा का प्रतीक है।
इस दिन जन्मे इन महापुरुषों ने शिक्षा, विज्ञान, राजनीति, समाज और संस्कृति के हर क्षेत्र में अमिट योगदान दिया।
इनके जीवन से यह संदेश मिलता है कि सच्ची सेवा, निष्ठा और कर्मठता ही किसी व्यक्ति को अमर बनाती है।
भारत के लिए 31 अक्टूबर हमेशा प्रेरणा, एकता और नवप्रगति की तिथि बनी रहेगी —
जहां लौहपुरुष का साहस, आचार्य का चिंतन, वैज्ञानिक की खोज और नेता का समर्पण एक सूत्र में बंधकर भविष्य का मार्ग प्रकाशित करते हैं।

वीर लोरिक स्टेडियम में होगा पटेल जयंती का मुख्य कार्यक्रम, सीडीओ ने दिए सख्त निर्देश

सीडीओ ने सभी व्यवस्थाएं समय से पूर्ण करने के दिए निर्देश, लापरवाही पर चेतावनी

शहीद पार्क से वीर लोरिक स्टेडियम तक दौड़ प्रतियोगिता, विजेताओं को किया जाएगा सम्मानित

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150वीं जयंती पर 31 अक्टूबर को जिले में विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसको लेकर गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में मुख्य विकास अधिकारी ओजस्वी राज ने संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि सुबह 08:30 बजे से दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। यह प्रतियोगिता शहीद पार्क चौक से प्रारंभ होकर कासिम बाजार, फ्लाई ओवर, टीडी कॉलेज चौराहा, कुंवर सिंह चौराहा, पुलिस लाइन होते हुए वीर लोरिक स्पोर्ट्स स्टेडियम पर समाप्त होगी। स्टेडियम में ही सरदार पटेल जी के चित्र पर माल्यार्पण किया जाएगा। दौड़ प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान पाने वाले बालक-बालिकाओं को प्रोत्साहन स्वरूप पुरस्कृत किया जाएगा।
मुख्य विकास अधिकारी ने जिला क्रीड़ाधिकारी जवाहर लाल यादव को निर्देशित किया कि स्टेडियम में लाइट, साउंड, कुर्सी, सोफा, बैनर आदि की संपूर्ण व्यवस्था की जाए तथा जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित कर कार्यक्रम के दौरान राष्ट्र की एकता की शपथ दिलाई जाए। साथ ही डीपीआरओ को कार्यक्रम स्थल एवं मार्ग पर साफ सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, वहीं जिला पूर्ति अधिकारी को जलपान आदि की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया। इसके साथ ही सीएमओ को निर्देशित किया गया कि सुबह 10:30 बजे जिला अस्पताल में जिलाधिकारी द्वारा रोगियों को फल वितरण कराया जाएगा, जिसकी सभी तैयारियां समय से पूरी कर ली जाएं। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को आदेश दिया गया कि सभी प्राथमिक विद्यालयों में प्रभात फेरी तथा माध्यमिक विद्यालयों के छात्र-छात्राओं द्वारा रैली निकाली जाए। उन्होंने सभी अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि सभी व्यवस्थाएं आज ही पूर्ण कर ली जाएं, किसी भी प्रकार की लापरवाही पर संबंधित अधिकारी स्वयं उत्तरदायी होंगे। बैठक में सिटी मजिस्ट्रेट आसाराम शर्मा, डीडीओ आनंद कुमार, क्रीड़ाधिकारी जवाहर लाल यादव, डीपीआरओ, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मनीष सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

ददरी मेला हेतु कार्य प्रारंभ

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

ददरी मेला स्थल का प्रशासनिक टीम द्वारा निरीक्षण किया गया। मेला क्षेत्र में मिट्टी लेवलिंग एवं भूमि चिन्हांकन का कार्य प्रारंभ हो चुका है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन से आरंभ हो रहे इस ऐतिहासिक ददरी मेले के भव्य आयोजन के लिए प्रशासन पूरी तरह कटिबद्ध है। निरीक्षण के दौरान भूमि पर विभिन्न स्थलों का चिन्हांकन किया गया, जिसमें भर्तृहरि मंच, झूला, फूड कोर्ट, दुकानें, लड़की बाजार, शौचालय, कंट्रोल रूम, पुलिस बूथ एवं बिजली ट्रांसफॉर्मर स्थल आदि शामिल हैं। सभी स्थलों के चिन्हांकन की प्रक्रिया तेजी से जारी है। टीम को निर्देश दिए गए हैं कि मिट्टी कार्य, प्रकाश व्यवस्था एवं मार्ग निर्धारण का कार्य आगामी दो दिनों में पूर्ण कर लिया जाए, ताकि इसके उपरांत दुकानों की स्थापना प्रारंभ की जा सके। इस वर्ष मेले में विशेष व्यापारी सहायता केंद्र की स्थापना की जाएगी। साथ ही, आगंतुकों की सुविधा एवं सुरक्षा हेतु विभिन्न स्थानों पर पुलिस चौकियां भी स्थापित की जाएंगी।
प्रशासन ददरी मेले के भव्य एवं सुव्यवस्थित आयोजन के लिए पूर्ण रूप से समर्पित है।

फोरमैन और ड्राइवर की बेरहमी से पिटाई

सिकंदरपुर /बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

गांगकिशोर गांव के पास गुरुवार को दबंगों ने फोरमैन और ड्राइवर की बेरहमी से पिटाई कर दी। मामूली वाहन टक्कर के विवाद में हुई यह घटना क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। हरदियां निवासी सत्यजीत सिंह ने सिकंदरपुर थाने में तहरीर देकर बताया कि उनकी कंपनी का फोरमैन हरप्रीत सिंह (निवासी घनीबाल, जिला पियाला, पंजाब) और ड्राइवर रोहित राजभर (निवासी भेलारा, जिला सुल्तानपुर) मोटरसाइकिल से सिकंदरपुर की ओर जा रहे थे। रास्ते में किसी अज्ञात वाहन से हल्की टक्कर होने के बाद भी दोनों आगे बढ़ गए। इसी बीच गांगकिशोर गांव के सामने कुछ लोगों ने उन्हें रोक लिया और यह कहते हुए लाठी-डंडों से हमला कर दिया कि “मेरे रिश्तेदार की गाड़ी को कैसे टक्कर मारी।” प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों ने दोनों को जमीन पर गिराकर बर्बर पिटाई की, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायलों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा। पीड़ित पक्ष ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

बारिश से धान की फसल बर्बाद, किसानों के चेहरे मुरझाए

सिकंदरपुर/बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

तहसील क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवाती तूफान ‘मोंथा’ का असर गुरुवार सुबह से ही क्षेत्र में दिखने लगा। रुक-रुक कर हो रही तेज वर्षा से खेतों में खड़ी पकी हुई धान की फसलें पानी में डूबकर बर्बाद हो गई हैं। कई किसानों के खेतों में धान की बालियां गिरकर सड़ने लगी हैं, जिससे उपज पर गंभीर असर पड़ने की संभावना है। सिकंदरपुर निवासी किसान अरविंद कुमार राय और चेतन किशोर ने बताया कि उनकी मेहनत की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। अरविंद कुमार ने कहा, “किसान हमेशा से संघर्षशील और सहनशील रहा है। हमने पहले भी सूखा, ओलावृष्टि और बाढ़ जैसी आपदाओं का सामना किया है, लेकिन इस बार की बारिश ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। फिर भी हम हिम्मत नहीं हारेंगे और दोबारा खेतों में उतरेंगे लगातार बारिश से खेतों में पानी भर गया है, जिससे कटाई का काम रुक गया है। कई जगहों पर कटाई की गई फसलें भीगकर सड़ने लगी हैं। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। किसान अब सरकार से मुआवजे की मांग कर रहे हैं ताकि उन्हें कुछ राहत मिल सके। हालांकि निराशा के बीच भी किसानों का जज्बा कायम है। उनका कहना है कि वे देश के अन्नदाता हैं और विपरीत परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटेंगे। चाहे मौसम कितना भी प्रतिकूल क्यों न हो, वे हर बार नई उम्मीद और हौसले के साथ अपनी जमीन से जुड़कर देश के लोगों का पेट भरने का संकल्प निभाते रहेंगे।

🎧 जब शब्द बोलते हैं और कल्पनाएँ जीवंत होती हैं — विश्व ऑडियो ड्रामा दिवस विशेष

🎧 विश्व ऑडियो ड्रामा दिवस 2025: आवाज़ों में छुपी कहानियाँ, जो बिना परदे के दिलों तक पहुँचती हैं


🌍 विश्व ऑडियो ड्रामा दिवस 2025: सृजनशीलता की वो ध्वनि जो कल्पनाओं को सजीव कर देती है
हर साल 30 अक्टूबर को विश्व ऑडियो ड्रामा दिवस (World Audio Drama Day) मनाया जाता है। यह दिन उन रचनात्मक कलाकारों, लेखकों, निर्देशकों और आवाज़ के जादूगरों को समर्पित है, जो शब्दों को ध्वनि में ढालकर श्रोताओं के मन में अदृश्य चित्र उकेरते हैं। आज जब दृश्य माध्यमों की भरमार है, तब भी ऑडियो ड्रामा अपने अनोखे आकर्षण और भावनात्मक गहराई से लोगों के दिलों में जगह बनाए हुए है।
🎙️ ऑडियो ड्रामा का इतिहास और महत्व
ऑडियो ड्रामा का इतिहास करीब एक सदी पुराना है। 1920 के दशक में जब रेडियो का दौर शुरू हुआ, तब कहानी कहने का यह रूप सबसे अधिक लोकप्रिय हुआ। उस समय लोग परिवार सहित रेडियो के आसपास बैठकर नाटक, रहस्य कथा, सामाजिक व्यंग्य और भावनात्मक कहानियाँ सुना करते थे।
30 अक्टूबर 1938 को प्रसारित “War of the Worlds” ने दुनिया को दिखाया कि ऑडियो ड्रामा किस हद तक प्रभाव डाल सकता है। उस रेडियो नाटक ने इतनी वास्तविकता पैदा की कि लोगों को सच में लगा धरती पर एलियंस का हमला हो गया है। यही कारण है कि उसी दिन को विश्व ऑडियो ड्रामा दिवस के रूप में मनाया जाता है — ताकि इस माध्यम के प्रभाव, रचनात्मकता और ऐतिहासिक महत्व को याद किया जा सके।

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🎧 डिजिटल युग में ऑडियो ड्रामा का पुनर्जागरण
आज पॉडकास्टिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के दौर में ऑडियो ड्रामा फिर से नई ऊँचाइयों पर पहुँच रहा है। स्पॉटिफाई, ऑडिबल, जियोसावन और यूट्यूब जैसे मंचों पर अब हजारों ऑडियो नाटक उपलब्ध हैं — रोमांच, प्रेम, रहस्य, थ्रिलर और फैंटेसी की दुनियाओं से भरे हुए।
यह माध्यम उन रचनाकारों के लिए भी वरदान साबित हुआ है जो सीमित संसाधनों में भी अपनी कल्पनाओं को जीवंत करना चाहते हैं। केवल आवाज़, संगीत और ध्वनि प्रभावों से कहानी को प्रस्तुत करने का यह तरीका सुनने वालों की कल्पना शक्ति को बढ़ाता है — जो किसी भी दृश्य माध्यम से कहीं अधिक प्रभावशाली साबित होता है।

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💡 भारत में ऑडियो ड्रामा की बढ़ती लोकप्रियता
भारत में भी ऑडियो ड्रामा का पुनर्जन्म हो रहा है। हिंदी, बंगाली, तमिल, मराठी और अन्य भाषाओं में अनेक पॉडकास्ट और रेडियो ड्रामा सुनने को मिलते हैं। ऑल इंडिया रेडियो जैसे संस्थानों ने दशकों से इस परंपरा को जीवित रखा है। वहीं आधुनिक समय में Audible Suno, Pocket FM और Spotify Originals जैसे प्लेटफॉर्म्स नई पीढ़ी के बीच इसे पुनः लोकप्रिय बना रहे हैं।

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❤️ क्यों मनाना चाहिए विश्व ऑडियो ड्रामा दिवस
इस दिन का उद्देश्य सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि कहानी कहने की कला, सृजनात्मकता और आवाज़ की ताकत को सम्मान देना है।
ऑडियो ड्रामा हमें याद दिलाता है कि “हर आवाज़ में एक कहानी छिपी होती है” — बस उसे सुनने की संवेदना चाहिए।
🏁 विश्व ऑडियो ड्रामा दिवस केवल एक स्मरण दिवस नहीं, बल्कि सृजनशीलता की उस परंपरा का उत्सव है जो कल्पनाओं को ध्वनि का आकार देती है। यह हमें सिखाता है कि कहानियाँ देखने से नहीं, बल्कि महसूस करने से जीवित होती हैं।

🍬राष्ट्रीय कैंडी कॉर्न दिवस 2025: स्वाद, परंपरा और रंगों का उत्सव


हर साल 30 अक्टूबर को अमेरिका में बड़े ही उत्साह और मिठास भरे अंदाज़ में “राष्ट्रीय कैंडी कॉर्न दिवस” (National Candy Corn Day) मनाया जाता है। यह दिन एक खास अमेरिकी मिठाई — कैंडी कॉर्न — को समर्पित है, जो पीले, नारंगी और सफेद रंग की सुंदर परतों वाली शुगर कैंडी है। यह न केवल स्वाद का प्रतीक है, बल्कि हैलोवीन (Halloween) से जुड़ी सांस्कृतिक परंपराओं का भी अहम हिस्सा बन चुकी है।
🎃 कैंडी कॉर्न का इतिहास: 130 साल पुरानी परंपरा
कैंडी कॉर्न का इतिहास 19वीं सदी के उत्तरार्ध से जुड़ा है। 1880 के दशक में जॉर्ज रेनिंगर (George Renninger) नामक कन्फेक्शनर ने इसे सबसे पहले बनाया था। इसकी तीन परतों वाले रंग — पीला, नारंगी और सफेद — मकई के दाने (Corn Kernel) जैसे दिखते हैं, इसलिए इसे “Candy Corn” कहा गया। बाद में Goelitz Confectionery Company (जो अब Jelly Belly Candy Company के नाम से जानी जाती है) ने इसे लोकप्रिय बनाया।
🍭 क्यों खास है कैंडी कॉर्न?
कैंडी कॉर्न सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि अमेरिका की हैलोवीन स्पिरिट का प्रतीक है। इस दिन लोग कैंडी कॉर्न को बच्चों में बाँटते हैं, घरों को सजाते हैं, और मीठे व्यंजनों में इसका इस्तेमाल करते हैं। इसकी रंगत पतझड़ के मौसम की याद दिलाती है, जब प्रकृति नारंगी और पीले रंग से सज जाती है।
❤️ रोचक तथ्य:
लगभग 3.5 करोड़ पाउंड कैंडी कॉर्न हर साल अमेरिका में बनाई जाती है।
इसे “हैलोवीन कैंडी की रानी” भी कहा जाता है।
कैंडी कॉर्न ग्लूटेन-फ्री होती है, जो स्वास्थ्य-सचेत लोगों के बीच भी लोकप्रिय है।
राष्ट्रीय कैंडी कॉर्न दिवस का उद्देश्य
इस दिन का मकसद सिर्फ मिठाई खाना नहीं, बल्कि अमेरिकी परंपरा, बचपन की यादों और सामूहिक खुशियों को साझा करना है। सोशल मीडिया पर भी #NationalCandyCornDay हैशटैग के साथ हजारों लोग अपनी तस्वीरें और यादें साझा करते हैं।

आपराधिक कानूनों के प्रति जनजागरूकता अभियान

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

गांधी इंटर कॉलेज सिकंदरपुर में गुरुवार को सरकार की मंशा के अनुरूप नए आपराधिक कानूनों के प्रति जनजागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को बताया गया कि केंद्र सरकार द्वारा 1 जुलाई 2024 से भारतीय न्याय संहित लागू की गई है, जिसके तहत अंग्रेजों के समय बनाए गए पुराने आपराधिक कानूनों में व्यापक सुधार किए गए हैं। पुराने कानून मुख्यतः दंड देने पर केंद्रित थे, जबकि नए कानून न्याय सुनिश्चित करने और आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा पर आधारित हैं। विशेष रूप से देशद्रोह संबंधी कानून को समाप्त कर उसकी जगह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए नया प्रावधान जोड़ा गया है। इस अवसर पर थाना सिकंदरपुर के प्रभारी निरीक्षक मूलचंद चौरसिया, क्राइम इंस्पेक्टर नरेश मलिक, चौकी प्रभारी अश्वनी मिश्रा, कॉलेज की प्राचार्य डाक्टर संजय राय व शिक्षकगण और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधिकारियों ने नए कानूनों के प्रमुख बिंदुओं की विस्तार से जानकारी दी और विद्यार्थियों को जागरूक नागरिक बनकर कानून का पालन करने की अपील की। अधिकारियों ने कहा कि कानून की जानकारी ही न्याय का पहला कदम है, इसलिए सभी को इन परिवर्तनों को समझना आवश्यक है।

तनाव प्रबंधन पर व्याख्यान में दिया गया विद्यार्थियों को मानसिक रूप से सशक्त बनने का संदेश

बिछुआ/मध्य प्रदेश(राष्ट्र की परम्परा) l वीर अमर शहीद स्वर्गीय श्रीकबीर दास उईके शासकीय महाविद्यालय बिछुआ में स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ के अंतर्गत “ तनाव प्रबंधन ” विषयक व्याख्यान प्राचार्य डॉ. आर. पी. यादव के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
मुख्य वक्ता डॉ. शाहिदा बेगम मंसूरी ने तनाव के कारणों, लक्षणों और उससे निपटने की प्रभावी तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की तथा विद्यार्थियों को मानसिक रूप से सशक्त बनने के लिए प्रेरित किया। विशिष्ट वक्ता डॉ. नवीन कुमार चौरसिया ने शैक्षणिक जीवन में तनाव के प्रभाव और समाधान पर अपने विचार साझा किए, जिससे विद्यार्थियों को व्यावहारिक दृष्टिकोण प्राप्त हुआ।
प्राचार्य डॉ. आर. पी. यादव ने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में विद्यार्थियों के लिए मानसिक संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। शिक्षा के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना सफलता की कुंजी है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को जीवन के तनावों से निपटने की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
कार्यक्रम की नोडल अधिकारी डॉ. फरहत मंसूरी ने सत्र का सफल संचालन किया, जिससे आयोजन सुचारू रूप से संपन्न हुआ। आभार प्रदर्शन डॉ. मनीता कौर विरदी ने किया और सभी अतिथियों एवं विद्यार्थियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस कार्यक्रम में शताधिक विद्यार्थी उपस्थित रहे और उन्होंने विषय में गहरी रुचि दिखाई। यह आयोजन विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सराहनीय पहल साबित हुआ।

स्वास्तिक गणेशजी का स्वरूप

स्वास्तिक गणेशजी का स्वरूप,
स्वास्तिक की दो अलग-अलग
रेखायें श्री गणपति जी की पत्नी
रिद्धि-सिद्धि देवियों को दर्शाती हैं।

घर के बाहर स्वास्तिक प्रतीक व
शुभ -लाभ लिखने का प्रयोजन
यह होता है कि घर में सुख-शांति
और समृद्धि सदैव वृद्धिरत होती रहे।

शुभ- लाभ लिखने का भाव यह है
कि भगवान से लोग प्रार्थना करते हैं
कि उनके घर की संपदा और धन
सदा बढ़ता रहे, लाभ प्राप्त होता रहे।

शुभ-लाभ लिखना सुंदर तो है,
परंतु दिखावा अधिक होता है,
दरवाज़े का यह शुभ प्रतीक है,
मन में भी यही हो तो अच्छा है।

मन में लिखे शुभ-लाभ शुभ भी है,
व यही शुभ, लाभ भी हो जाते हैं,
आओ इस दीपावली में मन में भी
आदित्य शुभ – लाभ लिख लेते हैं।

डॉ कर्नल आदि शंकर मिश्र
‘आदित्य’

“सपनों को सुरक्षित करने का दिन — क्यों जरूरी है बचत की आदत? जानिए विश्व बचत दिवस का अर्थ और भारत से इसका गहरा रिश्ता”

“सिर्फ कमाना नहीं, संभालना भी जरूरी है — बचत की संस्कृति पर विशेष रिपोर्ट”

✨ हर सिक्के की खनक में एक कहानी होती है — मेहनत की, उम्मीद की और भविष्य की।
जीवन में हर इंसान अपने सपनों को साकार करने के लिए कमाता है, लेकिन यह समझना उतना ही जरूरी है कि “कमाई नहीं, बचत ही जीवन की स्थिरता की कुंजी है।”
इसी सोच को बढ़ावा देने के लिए हर साल विश्व बचत दिवस (World Savings Day) मनाया जाता है।

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🌱 विश्व बचत दिवस की शुरुआत कैसे हुई?
विश्व बचत दिवस की नींव 1924 में इटली के मिलान शहर में रखी गई थी।
यह वह समय था जब प्रथम विश्व युद्ध के बाद पूरी दुनिया आर्थिक अस्थिरता से गुजर रही थी। लोगों का बैंकों पर भरोसा टूट चुका था, और वे अपने पैसे को सुरक्षित रखने की बजाय घरों में छिपाने लगे थे।
इसी स्थिति को बदलने के लिए विश्व बचत बैंकों के पहले अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में 31 अक्टूबर को “विश्व बचत दिवस” मनाने का निर्णय लिया गया।
इसका उद्देश्य था — लोगों को बचत की आदत डालना और वित्तीय संस्थाओं में विश्वास को पुनः स्थापित करना।
🇮🇳 भारत में क्यों 30 अक्टूबर को मनाया जाता है विश्व बचत दिवस
जहाँ विश्व स्तर पर यह दिन 31 अक्टूबर को मनाया जाता है, वहीं भारत में इसे 30 अक्टूबर को मनाया जाता है।

इसकी वजह ऐतिहासिक है — 1948 में महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के कारण भारत सरकार ने इसे एक दिन पहले मनाने का निर्णय लिया था, ताकि 31 अक्टूबर को अन्य राष्ट्रीय कार्यक्रमों से टकराव न हो।
इसलिए, भारत में हर वर्ष 30 अक्टूबर को स्कूलों, बैंकों, और सामाजिक संस्थानों के माध्यम से नागरिकों को बचत के महत्त्व के बारे में जागरूक किया जाता है।
💡 बचत क्यों है जीवन की रीढ़
आज के समय में, जब खर्चे तेज़ी से बढ़ रहे हैं और आर्थिक अनिश्चितता हर घर का हिस्सा बन चुकी है, बचत ही वह उपाय है जो हमें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रखता है।
बचत न केवल पैसे का संचय है, बल्कि यह हमारे आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और सुरक्षा का प्रतीक भी है।

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  1. आपात स्थिति में सहारा: अचानक बीमारी, नौकरी छूटना या कोई अप्रत्याशित परिस्थिति — ऐसे समय में बचत ही संकटमोचक बनती है।
  2. सपनों की पूर्ति: घर, शिक्षा, यात्रा या स्वयं का व्यवसाय — हर सपना बचत से ही शुरू होता है।
  3. आर्थिक स्वतंत्रता: बचत करने वाला व्यक्ति निर्णय लेने में स्वतंत्र होता है, उसे परिस्थितियों का गुलाम नहीं बनना पड़ता।
    🏦 भारत में बचत की परंपरा — संस्कृति से जुड़ी विरासत
    भारत में बचत सिर्फ आर्थिक आदत नहीं, बल्कि संस्कार का हिस्सा है।
    हमारे घरों में “धनतेरस पर धन संग्रह”, “गुल्लक में पैसे डालना” या “पोस्ट ऑफिस में खाता खुलवाना” जैसी परंपराएँ बचत की भावना को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाती आई हैं।
    भारतीय महिलाएँ हमेशा से घर की अर्थव्यवस्था की असली प्रबंधक रही हैं — वे “रसोई की बचत” से लेकर “सोने की बचत” तक हर स्तर पर समझदारी दिखाती हैं।
    आज डिजिटल युग में यह संस्कृति बैंक खातों, म्यूचुअल फंड, फिक्स्ड डिपॉजिट और डिजिटल सेविंग ऐप्स के रूप में नया रूप ले चुकी है।
    📲 डिजिटल इंडिया में बचत का नया चेहरा
    भारत में डिजिटल क्रांति ने बचत को स्मार्ट और सुलभ बना दिया है।
    आज UPI, डिजिटल बैंकिंग और फिनटेक ऐप्स ने हर व्यक्ति के हाथ में बैंक पहुंचा दिया है।
    अब “पैसे बचाने” के साथ-साथ “सही जगह निवेश करने” की जानकारी भी लोगों तक पहुँच रही है।
    जन धन योजना ने करोड़ों परिवारों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा।
    UPI, BHIM, Paytm, PhonePe जैसे प्लेटफ़ॉर्म ने छोटी बचत को भी सरल बनाया।
    महिला स्व-सहायता समूह और पोस्ट ऑफिस स्कीमें अब भी ग्रामीण भारत में भरोसे का प्रतीक हैं।
    🌏 बचत से बनता है मजबूत देश
    जब हर नागरिक बचत करता है, तो देश की आर्थिक मजबूती भी बढ़ती है।
    बचत से बैंकिंग सेक्टर में पूंजी बढ़ती है, जिससे उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास परियोजनाओं को गति मिलती है।
    इसलिए, यह कहना गलत नहीं होगा कि —
    “बचत केवल व्यक्ति की नहीं, राष्ट्र की भी संपत्ति है।”
    ❤️ समापन: अपने भविष्य का बीज आज ही बोएं
    बचत किसी बैंक खाता या गुल्लक में बंद रकम नहीं है, यह वह विश्वास है जो हमें कहता है —
    “चिंता मत करो, कल तुम्हारा है।”
    इस विश्व बचत दिवस पर, आइए हम सभी संकल्प लें —
    👉 अनावश्यक खर्चों को कम करें
    👉 हर महीने थोड़ी सी राशि बचाएं
    👉 और अपने परिवार को आर्थिक सुरक्षा का उपहार दें।
    क्योंकि जीवन का असली सुकून वही है —
    जब भविष्य के डर पर वर्तमान की समझ भारी पड़ जाए।

तनाव प्रबंधन पर व्याख्यान में दिया गया विद्यार्थियों को मानसिक रूप से सशक्त बनने का संदेश

बिछुआ/मध्य प्रदेश(राष्ट्र की परम्परा)l वीर अमर शहीद स्वर्गीय श्रीकबीर दास उईके शासकीय महाविद्यालय बिछुआ में स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ के अंतर्गत “ तनाव प्रबंधन ” विषयक व्याख्यान प्राचार्य डॉ. आर. पी. यादव के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
मुख्य वक्ता डॉ. शाहिदा बेगम मंसूरी ने तनाव के कारणों, लक्षणों और उससे निपटने की प्रभावी तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की तथा विद्यार्थियों को मानसिक रूप से सशक्त बनने के लिए प्रेरित किया। विशिष्ट वक्ता डॉ. नवीन कुमार चौरसिया ने शैक्षणिक जीवन में तनाव के प्रभाव और समाधान पर अपने विचार साझा किए, जिससे विद्यार्थियों को व्यावहारिक दृष्टिकोण प्राप्त हुआ।


प्राचार्य डॉ. आर. पी. यादव ने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में विद्यार्थियों के लिए मानसिक संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। शिक्षा के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना सफलता की कुंजी है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को जीवन के तनावों से निपटने की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
कार्यक्रम की नोडल अधिकारी डॉ. फरहत मंसूरी ने सत्र का सफल संचालन किया, जिससे आयोजन सुचारू रूप से संपन्न हुआ। आभार प्रदर्शन डॉ. मनीता कौर विरदी ने किया और सभी अतिथियों एवं विद्यार्थियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस कार्यक्रम में शताधिक विद्यार्थी उपस्थित रहे और उन्होंने विषय में गहरी रुचि दिखाई। यह आयोजन विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सराहनीय पहल साबित हुआ।