Sunday, July 5, 2026
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“30 अक्टूबर के अमर दीपक —जिनकी विदाई ने भारतीय इतिहास और संस्कृति को मौन कर दिया”

भारत के इतिहास में 30 अक्टूबर वह तिथि है जब अनेक प्रतिभाशाली रत्न इस संसार से विदा हुए। उनकी रचनात्मकता, विचारधारा और योगदान ने देश की सांस्कृतिक, सामाजिक और कलात्मक परंपराओं को नई दिशा दी। आइए जानते हैं उन महान आत्माओं के जीवन, शिक्षा, कर्म और योगदान के बारे में, जिन्होंने अपने कार्यों से भारत को गौरवान्वित किया।

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🕊️ 1. स्वामी दयानंद सरस्वती (निधन: 30 अक्टूबर 1883)
जन्मस्थान: टंकारा, जिला मोरबी, गुजरात
शिक्षा एवं विचारधारा:
स्वामी दयानंद सरस्वती का जन्म 12 फरवरी 1824 को एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा संस्कृत और वेदों के अध्ययन से प्रारंभ हुई। उन्होंने धार्मिक अंधविश्वास और मूर्तिपूजा के विरोध में अपने विचार प्रकट किए और “वेदों की ओर लौटो” का नारा दिया।
योगदान आर्य समाज की स्थापना करके उन्होंने भारत में शिक्षा, नारी सशक्तिकरण, समानता और स्वराज्य का संदेश फैलाया। उनका ग्रंथ सत्यार्थ प्रकाश भारतीय समाज सुधार का जीवंत दस्तावेज है। स्वामीजी ने उस युग में राष्ट्रवाद की नींव रखी जब भारत गुलामी की बेड़ियों में जकड़ा था।

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🎶 2. बेगम अख़्तर (निधन: 30 अक्टूबर 1974)
जन्मस्थान: फैजाबाद, उत्तर प्रदेश
शिक्षा एवं कला-प्रशिक्षण:
बेगम अख्तर का जन्म 7 अक्टूबर 1914 को हुआ था। बचपन से ही संगीत में रुचि रखने वाली बेगम अख्तर ने उस्ताद इमरात खान और अता मोहम्मद खान से संगीत की शिक्षा ली।
योगदान:
उनकी गायकी में ठुमरी, दादरा और ग़ज़ल का अद्भुत समन्वय था। उन्होंने उर्दू शायरी को संगीत के साथ जोड़कर उसे आम जनता तक पहुँचाया। “दीवाना बनाना है तो दीवाना बना दे” जैसी ग़ज़लें आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में गूंजती हैं। उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।

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🎼 3. ख़्वाजा खुर्शीद अनवर (निधन: 30 अक्टूबर 1984)
जन्मस्थान: मियांवाली, पंजाब (अब पाकिस्तान में)
शिक्षा एवं संगीत सफर:
खुर्शीद अनवर का जन्म 21 मार्च 1912 को हुआ था। उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र में स्नातक किया और बाद में संगीत में गहरी रुचि दिखाई।
योगदान:
भारतीय और पाकिस्तानी फिल्म संगीत में उनका योगदान अमूल्य है। वे संगीत के सिद्धांतकार भी थे और शास्त्रीय संगीत को फ़िल्मों में लाने के अग्रदूत माने जाते हैं। उनकी रचनाएँ जैसे “परछाईं” और “इंशाल्लाह” आज भी संगीत के इतिहास में अंकित हैं।

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🎭 4. विनोद मेहरा (निधन: 30 अक्टूबर 1990)
जन्मस्थान: अमृतसर, पंजाब
शिक्षा एवं प्रारंभिक जीवन:
विनोद मेहरा का जन्म 13 फरवरी 1945 को हुआ। उन्होंने अपनी शिक्षा मुंबई में प्राप्त की और किशोरावस्था से ही अभिनय में रुचि दिखाई।
योगदान:
1970–80 के दशक में विनोद मेहरा हिंदी सिनेमा के लोकप्रिय चेहरे बने। “अनुराग”, “घर”, “लाल पत्थर” जैसी फिल्मों में उनके अभिनय ने संवेदनशील नायक की छवि गढ़ी। वे एक सादगीपूर्ण व्यक्तित्व के धनी थे और फिल्म उद्योग में अपने विनम्र स्वभाव के लिए जाने जाते थे।
🎬 5. वी. शांताराम (निधन: 30 अक्टूबर 1990)
जन्मस्थान: कोल्हापुर, महाराष्ट्र
शिक्षा एवं आरंभिक सफर:
वी शांताराम का जन्म 18 नवंबर 1901 को हुआ। उन्होंने प्रारंभिक जीवन में थिएटर और फिल्म निर्माण का प्रशिक्षण लिया।
योगदान:
वे भारतीय सिनेमा के स्तंभों में से एक थे। “दो आंखें बारह हाथ”, “झनक झनक पायल बाजे”, “नवरंग” जैसी फिल्मों से उन्होंने सामाजिक संदेशों को कला के माध्यम से प्रस्तुत किया।
उनकी फिल्में स्त्री सशक्तिकरण, श्रम, और मानवता के मूल्यों पर केंद्रित थीं। उन्हें दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
📚 6. रॉबिन शॉ (निधन: 30 अक्टूबर 2014)
जन्मस्थान: लंदन, इंग्लैंड
शिक्षा एवं लेखन कार्य:
रॉबिन शॉ एक प्रसिद्ध साहित्यकार और आलोचक थे जिन्होंने अंग्रेज़ी साहित्य में कई प्रभावशाली रचनाएँ दीं। उनकी शिक्षा ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से हुई।
योगदान:
उन्होंने आधुनिक समाज में नैतिकता और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित उपन्यास लिखे। उनके लेखन में सामाजिक चेतना और मानवीय करुणा की गहराई झलकती थी। साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान ने युवा लेखकों को प्रेरणा दी।
🎥 7. यूसुफ़ हुसैन (निधन: 30 अक्टूबर 2021)
जन्मस्थान: लखनऊ, उत्तर प्रदेश
शिक्षा एवं फिल्मी जीवन:
यूसुफ़ हुसैन एक शिक्षित और विचारशील अभिनेता थे, जिन्होंने फिल्म और टेलीविजन दोनों में अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने साहित्य और रंगमंच से अपने करियर की शुरुआत की।
योगदान:
“दिल चाहता है”, “दामिनी”, “राज़”, “ओम शांति ओम” जैसी फिल्मों में उनके सहायक किरदार दर्शकों के दिलों में बस गए। वे निर्देशक हंसल मेहता के पिता समान माने जाते थे और कई कलाकारों के प्रेरणास्रोत रहे।
🌿 30 अक्टूबर भारतीय सांस्कृतिक, कलात्मक और सामाजिक विरासत के लिए एक भावनात्मक दिन है। इस दिन हम उन आत्माओं को याद करते हैं जिन्होंने समाज को नई दिशा दी, मानवीय मूल्यों को जीवित रखा और अपनी कला से इतिहास को रंगीन बना दिया। चाहे स्वामी दयानंद की विचारधारा हो या बेगम अख़्तर की गायकी, इन सबने मिलकर भारत के हृदय को स्पंदित किया है।

“ग्राम प्रधान पर सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर आरोप, ग्रामीणों ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग, बोले: विकास कार्य बने भ्रष्टाचार का अड्डा”

महराजगंज के मिठौरा ब्लॉक की ग्राम पंचायत नक्शा बक्शा में विकास कार्यों की पारदर्शिता पर उठे सवाल, ग्रामीणों ने डीएम से की कार्रवाई की मांग — बोले, “अब तो न्याय चाहिए, नहीं तो करेंगे धरना!”


महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।ग्राम पंचायतों में विकास के नाम पर भ्रष्टाचार का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। महराजगंज जनपद के मिठौरा विकासखंड के ग्राम पंचायत नक्शा बक्शा में ग्राम प्रधान पर शासन द्वारा जारी धनराशि के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत में हुए निर्माण कार्यों में भारी अनियमितताएं की गई हैं और कई योजनाओं में फर्जी भुगतान दिखाकर सरकारी धन को हड़प लिया गया।

ग्रामीणों — रामकुमार, दशरथ पुत्र नर्वदा और अजीत निगम पुत्र विशुनदेव सहित कई लोगों ने जिलाधिकारी को एक शिकायत पत्र सौंपते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। शिकायत में कहा गया है कि ग्राम सभा के प्राथमिक विद्यालय में दिव्यांग शौचालय निर्माण के लिए ₹67,896 की धनराशि 26 जुलाई 2024 को जारी की गई थी, लेकिन उसी कार्य के नाम पर 3 फरवरी 2025 को ₹89,906 का भुगतान फिर से दिखाया गया। ग्रामीणों के अनुसार, वास्तविक निर्माण पर ₹35,000 से अधिक खर्च नहीं हुआ, जबकि रिकॉर्ड में लाखों रुपये का खर्च दर्शाया गया है।

इसी प्रकार, ग्राम सभा नक्शा बक्शा में स्नानघर निर्माण के लिए ग्राम प्रधान द्वारा ₹1,39,000 और मजदूरी के नाम पर ₹20,000 का भुगतान दिखाया गया है, जबकि स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरे कार्य की वास्तविक लागत ₹60,000 से अधिक नहीं रही।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि टोला टिकुलहिंया में बरसात के मौसम में कीचड़ और जलभराव से लोगों का आना-जाना मुश्किल हो जाता है, लेकिन ग्राम प्रधान ने अब तक उस क्षेत्र में कोई सुधार कार्य नहीं कराया। जब ग्रामीणों ने इस पर सवाल उठाया, तो ग्राम प्रधान ने कथित रूप से कहा — “जो करना हो कर लो”, जिससे गांव में आक्रोश फैल गया।

ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि ग्राम पंचायत नक्शा बक्शा के सभी निर्माण कार्यों और भुगतानों की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी प्रधान के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द जांच नहीं हुई, तो वे जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन करने को विवश होंगे।

स्थानीय जनता का कहना है कि शासन की योजनाएं पारदर्शी विकास के लिए होती हैं, लेकिन जब धन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाए, तो विश्वास टूटता है। ग्रामीण अब प्रशासन से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

स्वामी दयानंद सरस्वती की पुण्यतिथि पर सीएम योगी ने श्रद्धांजलि, बोले “शिक्षा को संस्कार और आधुनिकता का सेतु बनाया”

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। आर्य समाज के संस्थापक और भारतीय पुनर्जागरण के महान विचारक स्वामी दयानंद सरस्वती की पुण्यतिथि पर आज पूरे देश में उन्हें श्रद्धा से याद किया गया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी उन्हें नमन करते हुए कहा कि स्वामी दयानंद ने शिक्षा को संस्कार और आधुनिकता के बीच संतुलन का माध्यम बनाया।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने अपने विचारों से समाज में फैली कुरीतियों और अंधविश्वासों को चुनौती दी। उनकी शिक्षाएं एक समरस और जागरूक समाज की दिशा में प्रेरणा देती रहेंगी।

दिल्ली से शेख हसीना का बड़ा बयान:‘भारत में आज़ादी से हूं, पर…

बांग्लादेश में बढ़ी सियासी हलचल

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। अगस्त पिछले वर्ष बांग्लादेश में हुए सैन्य तख्तापलट के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना देश छोड़कर भारत आ गई थीं। करीब डेढ़ साल से वह यहां निर्वासन में रह रही हैं। अब पहली बार दिल्ली में रहते हुए उन्होंने मीडिया से खुलकर बातचीत की है।
इस साक्षात्कार में 78 वर्षीय हसीना ने बांग्लादेश के आगामी आम चुनाव, अवामी लीग की स्थिति, अपने खिलाफ दर्ज मामलों और भविष्य की योजनाओं पर स्पष्ट रुख रखा। उन्होंने कहा कि भारत में वह स्वतंत्रता और सुरक्षा का अनुभव तो करती हैं, लेकिन अपने परिवार के इतिहास को देखते हुए हमेशा सतर्क रहती हैं। हसीना ने अपने वतन लौटने की इच्छा जताते हुए यह भी कहा कि वापसी कुछ शर्तों के पूरे होने पर ही संभव है।

ग्राम प्रधान पर शासन के धन के दुरुपयोग का आरोप,जांच की मांग

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ग्राम पंचायत में हुए निर्माण कार्यों में गड़बड़ी का आरोप

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। विकास कार्यों में अनियमितता और शासन के धन के दुरुपयोग को लेकर ग्राम पंचायतों में एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।मिठौरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत नक्शा बक्शा में ग्राम प्रधान पर सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाया गया है।
इस संबंध में ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को एक शिकायत पत्र सौंपकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है। वहीं ग्रामीणों में रामकुमार, दशरथ पुत्र नर्वदा और अजीत निगम पुत्र विशुन देव सहित कई ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि ग्राम प्रधान ने कई विकास योजनाओं में फर्जी भुगतान दिखाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया है।शिकायत में कहा गया है कि ग्राम सभा नक्शा बक्शा के प्राथमिक विद्यालय में दिव्यांग शौचालय निर्माण के लिए ₹67,896 की धनराशि 26 जुलाई 2024 को जारी की गई, जबकि उसी शौचालय के नाम पर पुनः 3 फरवरी 2025 को ₹89,906 का भुगतान कराया गया। ग्रामीणों का कहना है कि वास्तविक निर्माण पर ₹35,000 से अधिक खर्च नहीं हुआ। इसी तरह, ग्राम सभा नक्शा बक्शा में एक स्नानघर निर्माण के लिए ग्राम प्रधान द्वारा ₹1,39,000 तथा मजदूरी के नाम पर ₹20,000 का अतिरिक्त भुगतान दिखाया गया है, जबकि स्थानीय लोगों के अनुसार उक्त कार्य पर ₹60,000 से अधिक खर्च नहीं हुआ।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि ग्राम सभा के टोला टिकुलहिंया में बरसात के समय लोगों के आने-जाने में परेशानी होती है, लेकिन ग्राम प्रधान ने अब तक उस क्षेत्र में कोई कार्य नहीं कराया। ग्रामीणों ने बताया कि जब इस विषय पर ग्राम प्रधान से बात की गई, तो उन्होंने जो करना हो कर लो कहकर असंवेदनशील रवैया अपनाया। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि उपरोक्त ग्राम पंचायतों में हुए सभी निर्माण कार्यों और भुगतानों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा दोषी प्रधान के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई, तो वे जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन करने को विवश होंगे।स्थानीय लोग इस पूरे मामले को लेकर नाराज हैं और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।

सिंदुरिया में ट्रैफिक जाम बनी बड़ी समस्या, आमजन बेहाल

मरम्मत कार्य और अव्यवस्थित यातायात ने बढ़ाई परेशानी, प्रशासन से सख्त कदम उठाने की मांग

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। मिठौरा विकासखंड के ग्राम पंचायत सिंदुरिया चौराहा स्थित मुख्य मार्गों पर इन दिनों ट्रैफिक जाम की समस्या विकराल रूप ले चुकी है। सुबह और शाम के व्यस्त समय में मुख्य सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। दुपहिया, चार-पहिया वाहनों से लेकर स्कूल बसों और एम्बुलेंस तक को घंटों जाम में फंसे रहना पड़ता है, जिससे न केवल आमजन को परेशानी हो रही है, बल्कि दैनिक जीवन भी अस्त-व्यस्त हो गया है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि बीते कुछ महीनों से सड़क मरम्मत और नालों की सफाई का कार्य एक साथ चलने से सड़कों की चौड़ाई काफी घट गई है। कई स्थानों पर निर्माण सामग्री और मिट्टी के ढेर खुले पड़े हैं,जिससे वाहनों की आवा-जाही बाधित हो रही है। वहीं दूसरी ओर यातायात पुलिस की लचर व्यवस्था और वाहन चालकों की मनमानी ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है।जाम का सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों और मरीजों पर पड़ रहा है। सुबह स्कूल जाने और दोपहर में घर लौटने के समय जगह-जगह वाहन रेंगते नजर आते हैं। एम्बुलेंस तक को घंटों फंसना पड़ता है। जिससे मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।स्थानीय लोगों ने बताया कि कई बार छोटे-छोटे विवाद और झगड़े भी जाम के कारण हो जाते हैं, जिससे हालात और बिगड़ जाती हैं। मुख्य मार्गों पर लगातार जाम की स्थिति को देखते हुए लोग वैकल्पिक रास्तों का सहारा ले रहे हैं, लेकिन अब उन गलियों और उपमार्गों पर भी वाहनों का दबाव बढ़ गया है। इससे पूरे नगर में अव्यवस्थित यातायात की स्थिति बन गई है।लंबे समय तक वाहनों के फसे रहने से पेट्रोल और डीजल की खपत बढ़ रही है, जिससे आर्थिक नुकसान के साथ- साथ वायु प्रदूषण भी बढ़ा है। वाहन चालकों का कहना है कि पहले जो दूरी दस मिनट में तय होती थी, अब वही सफर आधे घंटे से अधिक में पूरा हो पाता है।
स्थानीय व्यापारियों, शिक्षकों और आम नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द यातायात व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। मरम्मत कार्यों को तय समय सीमा में पूरा किया जाए और पीक ऑवर्स में ट्रैफिक पुलिस की अतिरिक्त तैनाती की जाए। साथ ही, निर्माण स्थलों पर वैकल्पिक डायवर्जन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि नागरिकों को राहत मिल सके।

परमाणु ऊर्जा के जनक होमी जहांगीर भाभा: भारत के विज्ञान और आत्मनिर्भरता के अग्रदूत

भाभा जयन्ती विशेष संपादकीय

भारत के आधुनिक वैज्ञानिक इतिहास में यदि किसी एक व्यक्ति ने विज्ञान, तकनीक और राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता की दिशा तय की, तो वे थे डॉ. होमी जहांगीर भाभा। 30 अक्टूबर 1909 को जन्मे भाभा ने न केवल भारत में परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की नींव रखी, बल्कि विज्ञान को राष्ट्रनिर्माण का आधार बनाया। आज उनकी जयंती पर हम उन्हें उस दूरदर्शी वैज्ञानिक के रूप में नमन करते हैं, जिन्होंने स्वतंत्र भारत को ऊर्जा और सुरक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का सपना देखा था।

डॉ. भाभा का बचपन से ही झुकाव गणित और भौतिकी की ओर था। कैंब्रिज विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे विश्व के शीर्ष वैज्ञानिकों में शामिल हो सकते थे, परंतु उन्होंने देश लौटने का निर्णय लिया। 1940 के दशक में जब भारत विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में संघर्षरत था, तब भाभा ने इस दिशा में नई रोशनी दी।

1945 में उन्होंने मुंबई में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) की स्थापना की, जो आज भी भारत के सबसे प्रतिष्ठित अनुसंधान संस्थानों में से एक है। यही संस्थान आगे चलकर देश के परमाणु कार्यक्रम का वैचारिक और तकनीकी केंद्र बना।

स्वतंत्रता प्राप्ति के तुरंत बाद भाभा ने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को यह विश्वास दिलाया कि परमाणु ऊर्जा केवल बम बनाने का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्र के विकास का इंजन बन सकती है। 1948 में उन्होंने एटॉमिक एनर्जी कमीशन ऑफ इंडिया की स्थापना कर भारत में परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग की नींव रखी। उनकी अगुवाई में भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) अस्तित्व में आया, जिसने भारत को नाभिकीय अनुसंधान, रिएक्टर निर्माण और ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाया।

डॉ. भाभा ने भारत के परमाणु कार्यक्रम की रूपरेखा तीन चरणों में तैयार की। पहले चरण में प्राकृतिक यूरेनियम से ऊर्जा उत्पादन, दूसरे चरण में प्लूटोनियम आधारित फास्ट ब्रीडर रिएक्टर और तीसरे चरण में थोरियम आधारित रिएक्टर विकसित करने की योजना थी। यह दूरदर्शी दृष्टि आज भी भारत की परमाणु नीति की आधारशिला है। यही कारण है कि भारत दुनिया के कुछ चुनिंदा देशों में शामिल है जो अपने संसाधनों से परमाणु ऊर्जा उत्पादन करने में सक्षम हैं।

भाभा का मानना था कि “विज्ञान तभी सार्थक है जब वह समाज की उन्नति में योगदान दे।” उन्होंने भारतीय युवाओं को विज्ञान के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का आह्वान किया। उनकी सोच थी कि भारत को भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए विदेशी निर्भरता से मुक्त होना चाहिए।

सन 1966 में एक विमान दुर्घटना में डॉ. भाभा का निधन हो गया। यह केवल एक वैज्ञानिक का नहीं, बल्कि भारत की एक सोच का भी अपूरणीय नुकसान था। परंतु उनकी दी हुई दिशा आज भी भारत की वैज्ञानिक नीतियों का मार्गदर्शन कर रही है।

आज जब भारत ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है, तब डॉ. भाभा की विचारधारा पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है। स्वच्छ ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के दौर में भाभा का परमाणु दृष्टिकोण भारत के लिए स्थायी समाधान का मार्ग दिखाता है।

डॉ. होमी जहांगीर भाभा केवल वैज्ञानिक नहीं थे, वे भविष्यद्रष्टा थे। उन्होंने दिखाया कि राष्ट्र की सच्ची शक्ति उसकी वैज्ञानिक सोच और आत्मविश्वास में निहित है। आज उनकी जयंती पर यह संकल्प लिया जाना चाहिए कि हम विज्ञान को केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रखकर, समाज के हर कोने तक पहुँचाएँ। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

जानें, कैसा रहेगा आपका दिन अंक ज्योतिष के अनुसार 🪔

✍️ लेखक–पंडित सुधीर तिवारी (अंक ज्योतिष विशेषज्ञ)


अंक ज्योतिष (Numerology) में हर व्यक्ति का जीवन उसके जन्मांक से प्रभावित होता है। यह विज्ञान बताता है कि आपका दिन, व्यक्तित्व, निर्णय लेने की क्षमता और भाग्य—सब आपके अंक से जुड़े हैं। 30 अक्टूबर 2025 का दिन अंकों के प्रभाव से विशेष परिवर्तन लेकर आ सकता है।
यदि आप अपनी जन्मतिथि, माह और वर्ष को जोड़कर एक अंक में बदलते हैं, तो वही आपका मूलांक (Life Path Number) कहलाता है। उदाहरण के लिए—अगर किसी का जन्म 16, 8 या 17 तारीख को हुआ है, तो उसका मूलांक 8 होगा। अब आइए जानें, आज का आपका अंक राशिफल—

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🔢 मूलांक 1 (Number 1)

आज का दिन ऊर्जा से भरपूर रहेगा। ध्यान या योग से शुरुआत करने पर सकारात्मक परिणाम मिलेंगे। धन से जुड़ी योजनाओं में सावधानी जरूरी है। पारिवारिक जीवन आनंदमय रहेगा। करियर में महत्वपूर्ण अवसर प्राप्त हो सकता है।
🔢 मूलांक 2 (Number 2)
मानसिक शांति का अनुभव करेंगे। भाई-बहन से सहयोग मिलेगा। आर्थिक मामलों में समझदारी से निर्णय लें। व्यापारिक वर्ग को नई डील से लाभ होगा। प्रेम जीवन में मधुरता बढ़ेगी।

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🔢 मूलांक 3 (Number 3)
यात्रा और कार्य विस्तार के योग बन रहे हैं। आर्थिक तनाव कम होगा। वरिष्ठों से सहयोग मिलेगा। प्रभावशाली लोगों से संपर्क बढ़ेगा। ऑफिस पॉलिटिक्स से दूरी बनाएं।

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🔢 मूलांक 4 (Number 4)
आज धन कमाने में थोड़ी दिक्कत आ सकती है। प्रियजनों की सेहत का ध्यान रखें। पार्टनरशिप में लाभ संभव है। दोस्तों से भावनात्मक सहयोग मिलेगा। प्रेम जीवन में शब्दों का चयन सोच-समझकर करें।
🔢 मूलांक 5 (Number 5)
ऑफिस से जल्दी लौटकर परिवार के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा। पदोन्नति या नई जिम्मेदारी की संभावना है। आर्थिक वृद्धि होगी। जीवनसाथी का प्रेम और सहयोग प्रेरणा देगा।

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🔢 मूलांक 6 (Number 6)
आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा। नए रिश्तों की शुरुआत हो सकती है। प्रेम जीवन में उत्साह रहेगा। व्यापारियों के लिए दिन लाभदायक रहेगा। आर्थिक स्थिति में सुधार संभव है।
🔢 मूलांक 7 (Number 7)
भाग्य का साथ मिलेगा। आर्थिक राहत के योग हैं। घर में बदलाव करने से पहले बड़ों की सलाह लें। कार्यक्षेत्र में संतुलन बनाए रखें। वैवाहिक जीवन में सामंजस्य रहेगा।

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🔢 मूलांक 8 (Number 8)
निवेश से लाभ मिलेगा। रिश्तेदारों या मित्रों से लाभकारी सलाह मिल सकती है। लव लाइफ में नई शुरुआत संभव है। करियर में बदलाव के योग हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
🔢 मूलांक 9 (Number 9)
पुराने निवेश का लाभ मिलेगा। कारोबार में वृद्धि के अवसर हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। विवादों से बचें। अधूरे कार्य पूरे करने का प्रयास करें। परिवार में खुशी का माहौल रहेगा।
🕉️ 30 अक्टूबर का दिन अंक ज्योतिष के अनुसार सफलता और प्रगति के संकेत दे रहा है। प्रत्येक मूलांक के जातकों के लिए यह दिन आत्मविश्वास, संयम और निर्णय क्षमता की परीक्षा का रहेगा। सही दृष्टिकोण अपनाने पर सफलता निश्चित है।

📜 डिस्क्लेमर:
इस अंक राशिफल में दी गई जानकारी पंडित सुधीर तिवारी जी के विश्लेषण पर आधारित है। “राष्ट्र की परम्परा” इस अंक ज्योतिष की पुष्टि नहीं करता। किसी भी निर्णय से पहले अपनी जन्मकुंडली किसी योग्य ज्योतिष विशेषज्ञ को अवश्य दिखाएं।

जन्मे भारत के गौरव विज्ञान, संगीत और सेवा के सितारे

✨ इतिहास के रत्न: 30 अक्टूबर को जन्मे वे महान व्यक्तित्व जिन्होंने भारत की पहचान गढ़ी ✨


इतिहास के पन्नों में 30 अक्टूबर का दिन कई महान आत्माओं के जन्म से उज्जवल है। इस तिथि ने भारत को ऐसे रत्न दिए जिन्होंने विज्ञान, संगीत, साहित्य, राजनीति और खेल जैसे विविध क्षेत्रों में अमिट छाप छोड़ी। आइए जानें उन नौ महापुरुषों के जीवन, संघर्ष और योगदान के बारे में जिन्होंने अपने कर्म से देश को गौरवान्वित किया।
🇮🇳 1. राही सरनोबत (जन्म: 30 अक्टूबर 1990, कोल्हापुर, महाराष्ट्र)
राही सरनोबत भारत की पहली महिला पिस्टल निशानेबाज हैं जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रौशन किया। महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में जन्मी राही ने बचपन से ही खेलों के प्रति गहरी रुचि दिखाई। उन्होंने अपनी शिक्षा पुणे में पूरी की और जल्द ही निशानेबाजी में कदम रखा। 2013 में उन्होंने विश्वकप में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा। 2018 के एशियाई खेलों में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला शूटर बनकर उन्होंने भारत की महिलाओं को नई दिशा दी। राही का जीवन अनुशासन, दृढ़ संकल्प और देशप्रेम का अद्भुत उदाहरण है।
🎵 2. अभिजीत भट्टाचार्य (जन्म: 30 अक्टूबर 1958, कानपुर, उत्तर प्रदेश)
अभिजीत भट्टाचार्य हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध पार्श्वगायक हैं, जिनकी आवाज़ 90 के दशक में हर दिल में बस गई। कानपुर में जन्मे अभिजीत ने शुरुआती शिक्षा यहीं से प्राप्त की, फिर संगीत के सपनों को लेकर मुंबई का रुख किया। “मैं कोई ऐसा गीत गाऊँ”, “वादा रहा सनम” और “चुरा के दिल मेरा” जैसे गीतों ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया। उन्होंने शाहरुख खान समेत कई दिग्गज कलाकारों के लिए अपनी आवाज़ दी। अभिजीत की गायकी भावनाओं की सजीव अभिव्यक्ति है — जो पीढ़ियों तक याद रहेगी।

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🧪 3. दीपक धर (जन्म: 30 अक्टूबर 1951, कानपुर, उत्तर प्रदेश)
डॉ. दीपक धर भारत के प्रख्यात सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी हैं। कानपुर में जन्मे धर ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर से भौतिकी की पढ़ाई की और बाद में अमेरिका के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से पीएच.डी. प्राप्त की। उन्होंने सांख्यिकीय भौतिकी में महत्वपूर्ण अनुसंधान कार्य किए, विशेषकर रैंडम वॉक थ्योरी पर उनका काम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित हुआ। भारतीय विज्ञान अकादमी के अध्यक्ष रह चुके धर, नई पीढ़ी के वैज्ञानिकों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।
🏛️ 4. प्रमोद महाजन (जन्म: 30 अक्टूबर 1949, महबूबनगर, तेलंगाना)
भारतीय राजनीति के कुशल रणनीतिकार और जनसंघ से लेकर भारतीय जनता पार्टी तक के प्रमुख स्तंभ प्रमोद महाजन का जन्म महबूबनगर (वर्तमान तेलंगाना) में हुआ। उन्होंने सांगली के महाविद्यालय से स्नातक किया और राजनीति विज्ञान में एम.ए. किया। वे अटल बिहारी वाजपेयी के विश्वासपात्र माने जाते थे। टेलीकॉम और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सुधारों का श्रेय भी उन्हें ही दिया जाता है। प्रमोद महाजन की संवाद क्षमता और दूरदर्शिता ने भाजपा को आधुनिकता के पथ पर अग्रसर किया।

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📚 5. बरुन डे (जन्म: 30 अक्टूबर 1932, कोलकाता, पश्चिम बंगाल)
डॉ. बरुन डे भारतीय इतिहास लेखन के अग्रणी विद्वानों में से एक रहे हैं। कोलकाता में जन्मे डे ने कलकत्ता विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की और बाद में विदेशों में शोध कार्य किया। भारतीय पुनर्जागरण और औपनिवेशिक इतिहास पर उनकी शोध कृतियाँ आज भी अकादमिक जगत में संदर्भ मानी जाती हैं। वे नेशनल लाइब्रेरी, कोलकाता के निदेशक भी रहे। उनका योगदान यह सिखाता है कि इतिहास केवल बीते समय की कहानी नहीं, बल्कि भविष्य के निर्माण का आधार है।
🕉️ 6. भाई महावीर (जन्म: 30 अक्टूबर 1922, लाहौर, पंजाब – अब पाकिस्तान)
भाई महावीर भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में से एक और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता रहे। उनका जन्म लाहौर में हुआ था, जहाँ उन्होंने दर्शनशास्त्र में उच्च शिक्षा प्राप्त की। बाद में वे मध्य प्रदेश के राज्यपाल बने। उन्होंने राजनीति में नैतिकता और राष्ट्रवाद का समावेश किया। भाई महावीर का जीवन आदर्शों की मिसाल है — जिन्होंने राजनीति को जनसेवा का माध्यम माना।
⚛️ 7. होमी जहाँगीर भाभा (जन्म: 30 अक्टूबर 1909, मुंबई, महाराष्ट्र)
होमी भाभा भारतीय परमाणु कार्यक्रम के जनक माने जाते हैं। मुंबई में जन्मे भाभा ने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग और भौतिकी में अध्ययन किया। उन्होंने टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) की स्थापना की और भारत को वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर किया। उनके नेतृत्व में भारत ने परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की। 1966 में एक विमान दुर्घटना में उनका निधन हुआ, पर उनकी वैज्ञानिक दृष्टि आज भी भारत की ऊर्जा नीति में जीवित है।
✍️ 8. सुकुमार राय (जन्म: 30 अक्टूबर 1887, कोलकाता, पश्चिम बंगाल)
सुकुमार राय बंगाल के सबसे लोकप्रिय हास्य लेखक और कवि थे। वे प्रसिद्ध कवि रविंद्रनाथ ठाकुर के समकालीन थे और बाल साहित्य में नए आयाम लेकर आए। “आबोल-ताबोल” और “पागला दाशु” जैसी रचनाओं ने उन्हें अमर बना दिया। उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की और साहित्य के माध्यम से समाज में सरलता और विनोद का संदेश फैलाया। सुकुमार राय के पुत्र सत्यजित राय ने भी पिता की विरासत को सिनेमा में आगे बढ़ाया।
⚔️ 9. प्रमथनाथ मित्र (जन्म: 30 अक्टूबर 1853, बंगाल)
प्रमथनाथ मित्र भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के आरंभिक प्रेरक रहे। वे बंगाल के निवासी थे और ‘अनुशीलन समिति’ के संस्थापकों में से एक थे। लंदन में बैरिस्टर की पढ़ाई के दौरान उन्होंने भारतीय युवाओं में स्वतंत्रता की चेतना जगाई। उनका लक्ष्य भारत को आत्मसम्मान और स्वराज्य की राह पर लाना था। उनके संगठन ने आगे चलकर क्रांतिकारी आंदोलन की नींव रखी। प्रमथनाथ मित्र का जीवन हमें यह सिखाता है कि स्वाधीनता केवल संघर्ष नहीं, बल्कि आत्मबल की अभिव्यक्ति है।
🌟 30 अक्टूबर का दिन भारत के लिए केवल एक तारीख नहीं, बल्कि प्रेरणा का प्रतीक है। इन महान व्यक्तित्वों ने अपने-अपने क्षेत्र में ऐसे मानक स्थापित किए, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए पथप्रदर्शक हैं। विज्ञान से लेकर संगीत, राजनीति से लेकर साहित्य तक, इनकी जीवनगाथा भारत की आत्मा को झंकृत करती है।

“कैमेस्ट्री बोर्ड एग्जाम 2025: डर नहीं, रणनीति से जीतें सफलता की जंग!”


कैमेस्ट्री बोर्ड परीक्षा 2025 – सफलता की राह यहीं से शुरू होती है!
माध्यमिक शिक्षा परिषद की इंटरमीडिएट परीक्षा नज़दीक है। छात्रों के मन में सबसे बड़ी चिंता रहती है कैमेस्ट्री (रसायन विज्ञान) का पेपर — जिसमें सूत्र, अभिक्रियाएँ और संख्यात्मक प्रश्न कई बार उलझा देते हैं। लेकिन यदि तैयारी स्मार्ट प्लानिंग से की जाए, तो यह विषय सबसे अधिक स्कोरिंग बन सकता है।
यह लेख आपको बताएगा कि कैमेस्ट्री का पेपर कैसे सॉल्व करें, किस तरह तैयारी करें, और किन बातों का ध्यान रखकर आप 90+ अंक तक हासिल कर सकते हैं।
🧪 1. कैमेस्ट्री की तैयारी कैसे शुरू करें
कैमेस्ट्री तीन भागों में बंटी होती है —
(1) भौतिक रसायन (Physical Chemistry)
(2) अजैविक रसायन (Inorganic Chemistry)
(3) कार्बनिक रसायन (Organic Chemistry)
हर भाग की अपनी रणनीति जरूरी है।
भौतिक रसायन: इसमें संख्यात्मक प्रश्न अधिक होते हैं। फार्मूलों को याद करने की बजाय उनके concept समझें। हर अध्याय जैसे मोल अवधारणा, विलयन, ऊष्मागतिकी, विद्युत रसायन आदि के नियम आधारित प्रश्न ज्यादा आते हैं।
📘 टिप: हर फॉर्मूले के साथ उसका यूनिट और डाइमेंशन लिखकर चार्ट बनाएं।
अजैविक रसायन: इसमें याददाश्त का खेल होता है। धातुओं के गुण, यौगिकों के रंग, अभिक्रियाएँ और गैसों के नाम बार-बार दोहराएं।
📘 टिप: एनसीईआरटी के अंत में दिए गए “नोट्स” सबसे ज्यादा पूछे जाते हैं।
कार्बनिक रसायन: यह अध्याय कठिन लगता है, लेकिन समझने पर आसान हो जाता है। नामकरण, अभिक्रिया तंत्र (Reaction Mechanism) और फंक्शनल ग्रुप पर मजबूत पकड़ बनाएं।
📘 टिप: हर रिएक्शन को फ्लोचार्ट या माइंड मैप में लिखें, इससे याद जल्दी होता है।
🧠 2. समय प्रबंधन है सबसे बड़ा हथियार
कैमेस्ट्री का पेपर सामान्यतः 3 घंटे का होता है।
समय का सही विभाजन सफलता की कुंजी है –
प्रश्न का प्रकार अंक समय (लगभग) सुझाव
वस्तुनिष्ठ (Objective) 1 15 मिनट पहले इन्हें हल करें
लघु उत्तरीय प्रश्न 2–3 1 घंटा साफ-सुथरा उत्तर दें
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 5 1 घंटा चित्र, समीकरण जरूर लिखें
पुनरीक्षण – 30 मिनट उत्तर जाँचें, गलती सुधारें
📘 टिप: पहले आसान और पक्के उत्तर लिखें, कठिन सवाल बाद में करें ताकि समय की बचत हो।
📋 3. परीक्षा में पेपर सॉल्व करने की रणनीति

  1. प्रश्नपत्र को पहले 10 मिनट तक ध्यान से पढ़ें। कौन से प्रश्न आपको अच्छे आते हैं, उन्हें पहले चिन्हित करें।
  2. क्लीन कॉपी में साफ-सुथरा उत्तर दें। परीक्षक पर अच्छा प्रभाव पड़ता है।
  3. रासायनिक समीकरण (Chemical Equation) हमेशा संतुलित (Balanced) लिखें।
  4. ग्राफ, चार्ट और डाइग्राम जहां संभव हो, जरूर बनाएं — इससे अंक बढ़ते हैं।
  5. प्रत्येक उत्तर के बाद 2–3 लाइन की स्पेस छोड़ें ताकि पेपर सुव्यवस्थित लगे।
    📚 4. अभ्यास से ही बनेगा आत्मविश्वास
    हर रोज़ कम से कम 2 घंटे कैमेस्ट्री को दें।
    पिछले 5 वर्षों के बोर्ड प्रश्नपत्र हल करें। इससे ट्रेंड समझ में आता है।
    मॉडल पेपर और मॉक टेस्ट जरूर दें।
    रिवीजन के लिए फॉर्मूला नोटबुक अलग बनाएं।
    📘 टिप: हर रविवार “Full Syllabus Test” लें, इससे परीक्षा जैसी स्थिति में अभ्यास होगा।🧩
  6. महत्वपूर्ण प्रश्न (2025 के लिए संभावित विषय)
  7. इलेक्ट्रोकेमिस्ट्री – नर्नस्ट समीकरण और EMF कैलकुलेशन
  8. सॉलिड स्टेट – यूनिट सेल और पैकिंग दक्षता
  9. केमिकल किनेटिक्स – ऑर्डर और रेट लॉ
  10. d-ब्लॉक एलिमेंट्स – संक्रमण धातुएँ और उनके यौगिक
  11. एल्डिहाइड, कीटोन और एसिड्स – अभिक्रियाएँ और पहचान परीक्षण
  12. कोऑर्डिनेशन कंपाउंड्स – आईसोमरिज्म और नामकरण
    📘 टिप: इन टॉपिक्स को “हाई वेटेज” के रूप में मानें — अक्सर हर साल इनसे प्रश्न आते हैं।
    🌟 6. परीक्षा के एक दिन पहले क्या करें
    पूरा सिलेबस दोहराने की कोशिश न करें।
    केवल महत्वपूर्ण फार्मूले, अभिक्रियाएँ और संख्यात्मक उदाहरण रिवाइज करें।
    पर्याप्त नींद लें और सुबह हल्का नाश्ता करें।
    आत्मविश्वास रखें — जो पढ़ा है वही लिखें।
    🏆 7. सफलता का मंत्र
    कैमेस्ट्री कठिन नहीं, बस समझदारी और दोहराव की जरूरत है।
    अगर आप रोज थोड़ा-थोड़ा पढ़ते हैं, अभ्यास करते हैं और अपनी कॉपी साफ रखते हैं, तो 80–90% अंक पाना पूरी तरह संभव है।
    याद रखें — “कैमेस्ट्री का डर वही महसूस करता है जो तैयारी अधूरी छोड़ देता है।”
    🧾 कैमेस्ट्री बोर्ड परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए आपको
    👉 कॉन्सेप्ट क्लियर करने,
    👉 रिवीजन की नियमितता रखने,
    👉 समय का प्रबंधन करने
    और
    👉 उत्तरों को सुव्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करने
    की आदत डालनी होगी।

    यह विषय न केवल अंकों के लिए, बल्कि उच्च शिक्षा (JEE, NEET आदि) के लिए भी आधारशिला है।
    इसलिए इस बार “पढ़ो समझकर, लिखो आत्मविश्वास से” — सफलता निश्चित है।

UP Weather Today: यूपी में बदला मौसम का मिजाज, कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश, जानें कहां बरसेंगे बादल

लखनऊ/उत्तर प्रदेश (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश में आज बुधवार को मौसम ने करवट ले ली है। सुबह से ही आसमान बादलों से घिरा है और कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि दोपहर बाद कई इलाकों में गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।

राजधानी लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, प्रयागराज, कानपुर समेत पूर्वी यूपी के जिलों में बारिश की संभावना सबसे अधिक है। वहीं, पश्चिमी यूपी के मेरठ, सहारनपुर और मुज़फ्फरनगर में शाम के समय तेज़ हवाओं के साथ हल्की बारिश हो सकती है।

तापमान में भी गिरावट दर्ज की जाएगी — अधिकतम तापमान 26°C और न्यूनतम 23°C रहने का अनुमान है। बारिश और ठंडी हवाओं से मौसम सुहावना बने रहने की संभावना है।

मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि बाहर निकलते समय छाता या रेनकोट साथ रखें और बिजली की चमक या तेज़ हवा के दौरान खुले में खड़े होने से बचें। किसानों को फसल बचाव के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

मुख्य बातें एक नजर में:

सुबह से बादल छाए रहेंगे, कुछ जगहों पर हल्की बारिश शुरू।

दोपहर में तेज़ हवाओं के साथ गरज-चमक की संभावना।

शाम तक कई जिलों में बौछारें जारी रह सकती हैं।

तापमान 23°C से 26°C के बीच रहेगा।

मौसम विभाग ने सतर्कता बरतने की दी सलाह।

बड़ा नौका हादसा: कोरियाला नदी में नाव पलटने से 60 वर्षीय महिला की मौत, 24 लोग लापता

मुख्यमंत्री ने दिए राहत कार्य तेज करने के निर्देश”

बहराइच (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बहराइच जिले में बुधवार शाम को एक दर्दनाक हादसे ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया। सुजौली थाना क्षेत्र के करधनिया घाट के पास कोरियाला नदी में एक नाव अचानक पलट गई, जिसमें सवार करीब 28 ग्रामीणों में से 60 वर्षीय महिला की मौत हो गई, जबकि 24 लोग अब भी लापता हैं। ग्रामीणों ने साहस दिखाते हुए 6 लोगों की जान बचाई, वहीं प्रशासनिक अमला और एसडीआरएफ की टीमें देर रात तक राहत और बचाव कार्य में जुटी रहीं।

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घटना का विस्तृत ब्यौरा:
जानकारी के मुताबिक, भरतपुर गांव के 28 ग्रामीण बुधवार को खैरटिया गांव बाजार करने गए थे। शाम करीब 6 बजे लौटते समय कोरियाला नदी पार करते हुए नाव अचानक तेज बहाव की चपेट में आ गई। हाल ही में घाघरा बैराज के गेट खोले जाने से नदी का जलस्तर बढ़ गया था, जिसके चलते यह हादसा हुआ। नाव पर 18 बच्चों समेत कई महिलाएं और बुजुर्ग सवार थे।

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जैसे ही नाव पलटी, नदी किनारे अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर 4 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। सूचना मिलते ही थाना सुजौली पुलिस, एसडीएम अमित कुमार, एसपी रमन सिंह और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची। देर रात तक 24 लापता लोगों की तलाश जारी रही। एक 60 वर्षीय महिला का शव बरामद किया गया, जिसकी पहचान भरतपुर गांव की निवासी के रूप में हुई।

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प्रशासनिक सक्रियता और मुख्यमंत्री का निर्देश:
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के सहयोग से राहत एवं बचाव कार्य में तेजी लाई जाए। उन्होंने कहा कि लापता व्यक्तियों की हर हाल में तलाश सुनिश्चित की जाए और पीड़ित परिवारों को हरसंभव मदद प्रदान की जाए।
थाना प्रभारी प्रकाश चंद्र शर्मा और तहसील प्रशासन की टीम लगातार नदी किनारे डेरा डाले हुए हैं। घाघरा बैराज के खोले गए गेट अब अस्थायी रूप से बंद कराए जा रहे हैं, ताकि बहाव नियंत्रित किया जा सके।

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स्थानीय प्रतिक्रिया:
गांव के लोगों में गहरा शोक व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी पर पक्के पुल की कमी के चलते उन्हें रोजाना नाव का सहारा लेना पड़ता है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस स्थान पर जल्द से जल्द स्थायी पुल का निर्माण किया जाए ताकि भविष्य में ऐसे हादसे दोबारा न हों।
🕯️ यह हादसा सिर्फ एक नाव डूबने की घटना नहीं, बल्कि गांव की लाचारी और अव्यवस्थित व्यवस्थाओं की पीड़ा भी उजागर करता है। राहत दल की कोशिशें जारी हैं, और पूरा क्षेत्र इस त्रासदी से उबरने की कोशिश कर रहा है।

सत्य भारती में खेलकूद प्रतियोगिता आयोजित

शाहजहांपुर(राष्ट्र की परम्परा)l जैतीपुर गढ़िया रगीन , भारती एयरटेल फाउंडेशन द्वारा संचालित सत्य भारती स्कूल में बुधवार को वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय की प्रधानाध्यापक द्वारा ध्वजारोहण कर किया गया। इसके बाद विद्यार्थियों ने विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं जैसे दौड़, लंबी कूद, रस्साकशी, बोरा दौड़ नींबू चम्मच दौड़,कबड्डी, लूडो, कैरम और खो-खो में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बच्चों में उत्साह देखते ही बनता था। विद्यालय परिसर में खेल भावना और अनुशासन का सुंदर समन्वय देखने को मिला। विजेता विद्यार्थियों को जिला समन्वयक मनोज तोमर एवं राकेश गुप्ता ने पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। इस अवसर पर शिक्षकों और अभिभावकों ने बच्चों का उत्साहवर्धन किया। प्रधानाध्यापक ने कहा कि खेल से न केवल शरीर स्वस्थ रहता है बल्कि बच्चों में टीम भावना और नेतृत्व कौशल भी विकसित होता है। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
इस अवसर पर प्रधानाध्यापक विवेक कुमार सिंह, अध्यापक उमेश चंद्र, रेनू भारती, रविका मिश्रा, अंशिका, गिरिराज सिंह, सौरभ कुमार एवं भारी संख्या में सम्मानित अभिभावकगण उपस्थित रहे।

गाजे-बाजे के साथ निषाद समाज ने निकाली कोयला वीर बाबा की भव्य शोभा यात्रा

सरयू में जल भर शुरू किया अखण्ड हरि कीर्तन, आज महाप्रसाद का आयोजन

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)l ब्लॉक क्षेत्र के पैना पश्चिम पट्टी बिंद टोला से निषाद समाज के लोगों ने माँ दुर्गा मित्र मण्डल समिति के बैनर तले कोयला वीर बाबा का गाजे बाजे, डीजे व घोड़े के साथ भव्य शोभा यात्रा निकाली। शोभा यात्रा बिंद टोली से निकलकर राम जानकी मार्ग होते पंचायत भवन तक पहुंची व पुनः वापसी होते हुए शहीद स्मारक स्थित सरयू घाट पहुंचा, जहां लोगों ने कोयला वीर बाबा की जय, सरयू माता की जय, शीतला माता की जय के जयकारों के बीच जल भरा। जल भरकर शोभा यात्रा का समापन बिंद टोली मौजूद कोयला वीर बाबा मंदिर में हुआ। शोभा यात्रा मंदिर परिसर में पहुंचने के बाद श्री कोयला वीर बाबा, माँ शीतला व माँ भागेश्वरी पूजन हुआ । इस अवसर पर अखण्ड हरि कीर्तन शुरू हुआ, समापन गुरूवार को होगा, जिसके उपलक्ष्य में महाप्रसाद का आयोजन है। इस दौरान जितेन्द्र भारत,अजय निषाद, सोनू निषाद, विजय निषाद, दीनानाथ निषाद, अमित सिंह, अजय यादव, विकास सिंह, ,शक्ति राज सिंह ,दीपक सिंह, ,संजय सिंह, हीरालाल निषाद, रामज्ञा निषाद अंगद निषाद जय राम निषाद विजय निषाद, जुगेश निषाद, रुपेश सुमित अभिषेक मुकेश, गुलाबचंद , धनंजय, आदित्य, चन्दन, छोटू ,नितेश रितेश गोलू ,सोनू ,मदन बिक्की टोनू, अमित, विशाल, मंजीत ,अमित विजय मल्ल ,रामईश्वर ,कन्हैया, विपिन ,जुगेश ,प्रेम ,गोलू आदि सैकड़ों लोग उपस्थित रहें।

पूर्वोत्तर रेलवे का सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2 नवंबर तक

वाराणसी(राष्ट्र की परम्परा)l पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी मंडल पर 27 अक्टूबर,2025 से 02 नवम्बर,2025 तक सतर्कता जागरूकता सप्ताह मनाया जा रहा है । इसी क्रम में मंडल रेल प्रबंधक,वाराणसी आशीष जैन ने ’’सतर्कता जागरूकता सप्ताह-2025’’ के अन्तर्गत. बुधवार 29 अक्टूबर, को पूर्वाह्न मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार वाराणसी मंडल पर कार्यरत रेल अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अपने कार्यकलापों के प्रत्येक क्षेत्र में ईमानदारी और पारदर्शिता बनाये रखने के लिए सत्यनिष्ठा की शपथ दिलाई।
मंडल रेल प्रबंधक आशीष जैन ने रेल कर्मियों को संदेश देते हुए कहा कि मेरा विश्वास है कि हमारे देश की आर्थिक, राजनीतिक तथा सामाजिक प्रगति में भ्रष्टाचार एक बड़ी बाधा है। मेरा विश्वास है कि भ्रष्टाचार उन्मूलन करने के लिये सभी संबंधित पक्षों जैसे सरकार, नागरिकों तथा निजी क्षेत्र को एक साथ मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक को सर्तक होना चाहिये तथा उसे सदैव ईमानदारी एवं सत्यनिष्ठा के उच्चतम मानकों के प्रति वचनबद्ध होना चाहिये और भ्रष्टाचार के विरुद्ध संघर्ष में साथ देना चाहिये। मंडल रेल प्रबंधक ने रेल कर्मियों को जीवन के सभी क्षेत्रों में ईमानदारी तथा कानून के नियमों का पालन करने, न तो रिश्वत लेने और न ही रिश्वत देने, सभी कार्य ईमानदारी तथा पारदर्शी रीति से करने, जनहित में कार्य करने, अपने निजी आचरण में ईमानदारी दिखाकर उदाहरण प्रस्तुत करने, भ्रष्टाचार की किसी भी घटना की रिपोर्ट उचित एजेन्सी को देने की शपथ दिलाई।इस अवसर पर अपर मंडल रेल प्रबंधक(इन्फ्रा) अजय सिंह, अपर मंडल रेल प्रबंधक (परिचालन) अशोक कुमार वर्मा, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा आर.जे.चौधुरी एवं वरिष्ठ मंडल कार्मिक अधिकारी अभिनव कुमार सिंह सहित सभी शाखाधिकारियों ने भ्रष्टाचार मिटाने एवं नये भारत के निर्माण के लिए शपथ ग्रहण किया । इस अवसर पर मंडल के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सी.वी.सी. की वेबसाइट https//pledge.cvc.nic.in पर e-pledge लेने हेतु भी जागरूक किया गया।