Friday, July 3, 2026
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सीतामढ़ी में पीएम मोदी की गरज: अब हर बच्चा बनेगा डॉक्टर, इंजीनियर और जज

सीतामढ़ी (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) बिहार के सीतामढ़ी जिले में शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए महागठबंधन पर तीखा हमला बोला और एनडीए के प्रत्याशी के समर्थन में जनसमर्थन मांगा। डुमरा हवाई अड्डा मैदान में उमड़ी भारी भीड़ के बीच पीएम मोदी ने कहा कि “बिहार में अब कट्टा वालों के लिए कोई जगह नहीं है। यहां के बच्चे रंगदार नहीं, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर और जज बनेंगे।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पहले चरण के मतदान के बाद विपक्ष को “65 वोल्ट का झटका” लगा है और जनता का रुझान स्पष्ट रूप से एनडीए के पक्ष में है। उन्होंने कहा कि “बीजेपी और एनडीए जो कहते हैं, उसे पूरा करते हैं। बिहार की जनता ने फिर से ‘मोदी सरकार’ चुनने का मन बना लिया है।”

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अपने संबोधन में पीएम मोदी ने एनडीए के संकल्प पत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि बिहार में उद्योग, निवेश और विकास पर सरकार का पूरा फोकस है। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रशंसा करते हुए कहा कि “नीतीश जी ने टूटे हुए भरोसे को फिर से जोड़ा है।”

महागठबंधन पर निशाना साधते हुए पीएम मोदी ने कहा कि “विपक्ष अपने बच्चों को मंत्री बनाना चाहता है और आपके बच्चों को रंगदार। लेकिन बिहार का हर बच्चा अब रंगदार नहीं, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर और जज बनेगा।” उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों को विकास की “एबीसी” तक नहीं आती और उनके वादे सिर्फ झूठे हैं।

सीतामढ़ी की यह रैली बिहार चुनाव में एनडीए के लिए जनसमर्थन की एक बड़ी शक्ति के रूप में देखी जा रही है, जहाँ मोदी के भाषण ने जनता में नई ऊर्जा और जोश भर दिया।

रोहिणी में भीषण आग से तबाही, रातभर गूँजते रहे सिलेंडर धमाके

दिल्ली के रोहिणी में रिठाला मेट्रो स्टेशन के पास लगी भीषण आग, कई झोपड़ियाँ जलकर खाक — रातभर गूँजते रहे सिलेंडर विस्फोट

नई दिल्ली,(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) राजधानी दिल्ली के रोहिणी इलाके में शुक्रवार देर रात रिठाला मेट्रो स्टेशन के पास दर्दनाक हादसा हुआ, जब झुग्गी बस्ती में अचानक भीषण आग भड़क उठी। देखते ही देखते लपटों ने कई झोपड़ियों को अपनी चपेट में ले लिया। घटना की सूचना मिलते ही दिल्ली अग्निशमन सेवा (DFS) की करीब 15 दमकल गाड़ियाँ मौके पर पहुँचीं और घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को जान बचाने के लिए घरों से भागना पड़ा। कई एलपीजी सिलेंडर विस्फोटों ने आग को और भयानक बना दिया। रात के सन्नाटे में लगातार सिलेंडरों के फटने की आवाजें गूँजती रहीं, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई।

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अग्निशमन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग एक झोपड़ी से शुरू हुई और फिर आसपास की बस्तियों में फैल गई। उन्होंने कहा, “हमारी टीमें लगातार आग बुझाने में जुटी हैं। पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने और लोगों को सुरक्षित दूरी पर रखने के निर्देश दिए गए हैं।”

घटना के बाद क्षेत्र को घेराबंदी कर सुरक्षित कर दिया गया है। हालांकि, आग लगने के सही कारणों का अब तक पता नहीं चल पाया है और जांच जारी है। राहत की बात यह है कि अब तक किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है।

विकास की नई पटरी पर ‘वंदे भारत’ — पीएम मोदी बोले, तीर्थों को जोड़ने वाली यह यात्रा भारत की आत्मा को जगाने वाली है

“चार नई वंदे भारत ट्रेनों के साथ मोदी ने रचा नया अध्याय — तीर्थ, तकनीक और आत्मनिर्भर भारत का संगम”

वाराणसी (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी से चार नई ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर देश को एक नई सौगात दी। बनारस रेलवे स्टेशन से रवाना की गई ये अत्याधुनिक ट्रेनें — बनारस-खजुराहो, लखनऊ-सहारनपुर, फिरोजपुर-दिल्ली और एर्नाकुलम-बेंगलुरु मार्गों पर दौड़ेंगी। इस अवसर पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उपस्थित रहे।

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प्रधानमंत्री मोदी ने इस मौके पर कहा कि “वंदे भारत ट्रेनें सिर्फ रेलगाड़ियां नहीं, बल्कि भारत की नई ऊर्जा और आत्मनिर्भरता का प्रतीक हैं।” उन्होंने बताया कि देश के अनगिनत तीर्थस्थल अब वंदे भारत नेटवर्क से जुड़ रहे हैं, जिससे भारत की संस्कृति, आस्था और विकास की यात्रा एक सूत्र में बंध रही है।

मोदी ने कहा कि भारत में सदियों से तीर्थ यात्राएं केवल देवदर्शन का माध्यम नहीं रही हैं, बल्कि यह देश की आत्मा को जोड़ने वाली परंपरा हैं। उन्होंने कहा, “प्रयागराज, अयोध्या, हरिद्वार, चित्रकूट, कुरुक्षेत्र जैसे तीर्थ क्षेत्र हमारी आध्यात्मिक चेतना के केंद्र हैं। अब जब ये पावन धाम वंदे भारत नेटवर्क से जुड़ रहे हैं, तो यह भारत की संस्कृति और विकास को एक साथ जोड़ने का प्रतीक है।”

प्रधानमंत्री ने गर्व से कहा कि “वंदे भारत भारतीयों की, भारतीयों द्वारा, भारतीयों के लिए बनी ट्रेन है।” यह आधुनिकता, दक्षता और स्वदेशी नवाचार का संगम है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वंदे भारत, नमो भारत और अमृत भारत जैसी ट्रेनें भारतीय रेलवे के भविष्य की नई नींव रख रही हैं।

मोदी ने यह भी कहा कि वंदे भारत का निर्माण अभियान न सिर्फ रेलवे को बल्कि पूरे भारत को रूपांतरित करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। “अब तो विदेशी यात्री भी वंदे भारत देखकर अचंभित होते हैं। यह विकसित भारत की दिशा में बढ़ते आत्मविश्वास का प्रतीक है।”

प्रधानमंत्री की इस पहल से न केवल यात्रा सुगम होगी, बल्कि तीर्थ, पर्यटन और व्यापार को भी एक नई गति मिलेगी। वाराणसी से रवाना हुई ये ट्रेनें भारत की नई पहचान और आत्मगौरव की प्रतीक बन चुकी हैं।

माली में बढ़ता आतंक: पाँच भारतीय नागरिकों का अपहरण, दहशत के साये में विदेशी कामगार

माली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)पश्चिम अफ्रीकी देश माली से एक चिंताजनक खबर सामने आई है। वहां पाँच भारतीय नागरिकों का अपहरण कर लिया गया है। माली में बढ़ती आतंकी गतिविधियों और चरमपंथी हिंसा के बीच यह घटना भारतीय समुदाय के लिए गहरी चिंता का विषय बन गई है।

अधिकारियों ने शनिवार को इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि हथियारबंद लोगों ने गुरुवार को पश्चिमी माली के कोबरी क्षेत्र के पास इन भारतीयों को अगवा किया। समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार, सभी पीड़ित स्थानीय विद्युतीकरण परियोजनाओं से जुड़ी एक भारतीय कंपनी में कार्यरत थे।

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कंपनी के प्रतिनिधि ने बताया कि घटना के बाद बाकी सभी भारतीय कर्मचारियों को राजधानी बमाको सुरक्षित पहुँचा दिया गया है। हालांकि, अब तक किसी भी संगठन ने इस अपहरण की जिम्मेदारी नहीं ली है।

ज्ञात रहे कि माली में पिछले कई वर्षों से अल-कायदा और आईएसआईएस से जुड़े आतंकवादी समूह सक्रिय हैं। इनमें सबसे प्रमुख है जेएनआईएम (इस्लाम और मुसलमानों के समर्थन समूह), जिसने हाल के महीनों में देशभर में हिंसा और ईंधन आपूर्ति पर रोक जैसी सख्त पाबंदियाँ लगाई हैं।

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रिपोर्ट्स के मुताबिक, माली में विदेशी नागरिकों के अपहरण की घटनाएँ आम हो चली हैं। इस साल सितंबर में इसी संगठन ने दो अमीराती और एक ईरानी नागरिक का भी अपहरण किया था, जिन्हें कथित तौर पर करीब 5 करोड़ अमेरिकी डॉलर की फिरौती देने के बाद रिहा किया गया।

विशेषज्ञों का कहना है कि माली की राजनीतिक अस्थिरता, बार-बार के तख्तापलट और रूस की ओर झुकाव ने देश की सुरक्षा व्यवस्था को और कमजोर कर दिया है। राजधानी बमाको भले ही सरकारी नियंत्रण में है, लेकिन जेएनआईएम के लगातार विस्तार ने स्थानीय नागरिकों में दहशत फैला दी है।

भारत सरकार की ओर से अभी तक इस अपहरण पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन विदेश मंत्रालय स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

पं. लोचन प्रसाद पाण्डेय: दो भाषाओं के सेतु–शिल्पी, जन–मन के सहज कवि

भारतीय साहित्य के व्यापक विस्तार में पं. लोचन प्रसाद पाण्डेय का नाम उन रचनाकारों में लिया जाता है, जिन्होंने अपनी काव्य–प्रतिभा को किसी एक भाषा तक सीमित नहीं रहने दिया। हिन्दी और उड़िया दोनों भाषाओं में समान दक्षता, समान सहजता और समान भाव–गौरव के साथ सृजन करना उनकी साहित्य–यात्रा की सबसे विशिष्ट पहचान है। वे उन विरले कवियों में हैं जिनकी लेखनी भाषा के बंधनों को तोड़कर सीधे संवेदना की भूमि पर उतरती है।
पाण्डेय जी का सृजन जीवन-यथार्थ के विविध अनुभवों से उपजा है। ग्रामीण परिवेश की मिट्टी, लोकगीतों की लय, संस्कृति से गहरा जुड़ाव और मनुष्य के दुख–सुख की जीवंत समझl इन सबने उनके काव्य को एक ऐसी धड़कन दी है, जो पढ़ते ही पाठक से आत्मीय संवाद बनाने लगती है। हिन्दी में उनकी रचनाएँ जहाँ भाषा की सहज सरसता का प्रमाण हैं, वहीं उड़िया में उनकी अभिव्यक्ति स्थानीय जीवन और संस्कृति के इतने करीब महसूस होती है कि लगता है जैसे यह भाषा उनके भीतर ही सांस लेती हो।
उनकी रचनाओं का मूल केंद्र ‘मनुष्य’ है, उसका संघर्ष, उसकी आशाएँ, उसका चिंतन और उसके भीतर की अन्त:प्रेरणाएँ। पाण्डेय जी की कविता विचार और भावना का ऐसा संतुलन प्रस्तुत करती है, जहाँ गहरी वैचारिक दृष्टि भी है और सहज मानवीय कोमलता भी। उनकी पंक्तियों में परंपरा की गरिमा और समय के बदलते तंतु दोनों साथ चलते हैं। यही द्वैत और समन्वय उनकी कविता की असली शक्ति है।
हिन्दी और उड़िया, दोनों भाषाओं में उनकी काव्य–साधना भारतीय भाषाई संस्कृति के उस गहरे सामंजस्य को रेखांकित करती है, जो हमारे देश की पहचान रहा है। वे इस तथ्य के जीवंत प्रमाण हैं कि भाषाएँ एक-दूसरे की प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि संवेदनाओं का विस्तार करती हुई सहयात्री हैं। पाण्डेय जी की रचनाओं को पढ़ते हुए यह स्पष्ट हो जाता है कि दो भाषाओं में लिखना सिर्फ कौशल नहीं, बल्कि दो सांस्कृतिक संसारों के साथ आत्मीय संबंध स्थापित करने की क्षमता है।
प्रकृति, सामाजिक बदलाव, मानवीय रिश्ते, लोक–संस्कृति और निजी स्मृतियाँl इन सभी विषयों के बीच उनकी कविता बड़ी सहजता से चलती है। उनकी रचनाओं में कहीं गाँव की पगडंडी की मिट्टी है, कहीं शहर की बेचैनी, कहीं स्मृतियों का सौम्य झरना और कहीं भविष्य के प्रति चेतावनी का स्वर। यही विविधता पाठक को उनकी रचनाओं से जोड़ती है।
पं. लोचन प्रसाद पाण्डेय का महत्व मात्र इतना भर नहीं कि उन्होंने दो भाषाओं में लिखा, बल्कि यह कि उन्होंने दोनों भाषाओं में मौलिकता, गहराई और संवेदनशीलता के साथ लिखा। वे बताते हैं कि साहित्य की असली शक्ति उसके सार्वभौमिक मानवीय स्वर में है—ऐसा स्वर जिसे न भाषा बाँध सकती है, न भूगोल सीमित कर सकता है।
आज जब भारतीय भाषाओं की विविधता को संरक्षित रखने की आवश्यकता और अधिक महसूस की जा रही है, पाण्डेय जी का साहित्यिक योगदान एक प्रेरक उदाहरण है। वे दिखाते हैं कि भाषा केवल अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि संस्कृति का सेतु है और वही सेतु भारतीय गौरव की असली पहचान है।
पं. लोचन प्रसाद पाण्डेय की काव्य–यात्रा इसलिए महत्वपूर्ण है कि वह दो भाषाओं को जोड़ते हुए दो संवेदनात्मक संसारों को भी जोड़ती है। उनकी रचनाएँ आने वाली पीढ़ियों के लिए न सिर्फ साहित्यिक धरोहर हैं, बल्कि यह संदेश भी देती हैं कि सृजन का सौंदर्य तब सबसे अधिक खिलता है, जब वह मनुष्य की मूल मानवीयता को केंद्र में रखता है।
वे साहित्य के उस उजले परंपरा–स्तंभ की तरह हैं, जिनकी काव्य–प्रज्ञा हिन्दी और उड़िया—दोनों भाषाओं में बराबर प्रकाश फैलाती है। उनकी सृजनशीलता भारतीय साहित्य के बहुरंगी सौन्दर्य की एक अनमोल कड़ी है और आने वाले समय तक रहेगी।

“जब होंठ बोलें दर्द की कहानी — एक छोटा घर का लिप बाम, बड़ी राहत।”

नाज़ुक होंठ, नाज़ुक इलाज: घर पर बनाएं घी–एलोवेरा लिप बाम और पाएं सर्दियों में मुलायम होंठ — आसान, सुरक्षित और किफायती

सर्द हवाओं, कम नमी और पानी की कमी से ठंड के मौसम में होंठ जल्दी ही रूखे और फट जाते हैं। बाजार के उत्पाद अस्थायी राहत देते हैं, पर घर पर बनाए प्राकृतिक लिप बाम से आप बिना रसायन के लंबे समय तक नमी और पोषण दे सकते हैं। नीचे दी गई रेसिपी सरल, किफायती और बच्चों सहित परिवार के लिए सुरक्षित है — बस पैच-टेस्ट कर लें।
घर पर नेचुरल लिप बाम — सामग्री (एक छोटा कंटेनर के लिए)
1 चम्मच शुद्ध देसी घी (गुनगुना)
1 चम्मच एलोवेरा जेल (ताज़ा या शुद्ध बोतलबंद)
1 विटामिन-E कैप्सूल (अंदर का तेल निकाल लें)
(वैकल्पिक) 2–3 ड्रॉप्स नारियल तेल या बादाम तेल — अतिरिक्त नरिशमेंट के लिए
(वैकल्पिक) 1–2 बूंद प्राकृतिक इत्र/नीम/लैवेंडर अगर आप खुशबू चाहते हैं
विधि (सीधे और सुरक्षित)

  1. छोटी कटोरी में घी को हल्का गुनगुना कर लें (बर्न न होने दें)।
  2. उसमें एलोवेरा जेल मिलाकर अच्छी तरह फेंटें ताकि गुठलियाँ न रहें।
  3. विटामिन-E का तेल मिलाकर एक समान मिश्रण बना लें। अगर आप तेल जोड़ रहे हैं तो उसी समय डालें।
  4. मिश्रण ठंडा होने पर स्वच्छ कांच/टिन की छोटी शीशी में भर दें और ढक्कन बंद कर दें।
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  6. इस्तेमाल से पहले हमेशा साफ चम्मच/क्यू-टिप से निकालें — सीधे उंगली लगाने से बैक्टीरिया का खतरा बढ़ता है।
    स्टोरेज और शेल्फ-लाइफ: फ्रिज में रखने पर 2–3 हफ्ते सुरक्षित रहता है; कमरे के तापमान पर 1 सप्ताह तक ठीक रहेगा — लेकिन गंध में बदलाव या बूदों पर ध्यान दें, बदलते ही फेंक दें।
    उपयोग विधि और सुझाव
    दिन में 3–4 बार साफ होंठों पर लगाएं — सोने से पहले मोटा लेप करें।
    बाहर निकलने से पहले लगा कर जाएँ, और रात में मोटा लेप लगाने से डीप-नरिशमेंट मिलेगा।
    अगर होंठों पर दरारें ज्यादा गहरी हों या खून निकल रहा हो तो पहले हल्का नमक पानी से साफ कर चिकित्सक से सलाह लें।
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  8. फायदे (संक्षेप में)
    घी: प्राकृतिक मॉइस्चराइज़र, त्वचा को मुलायम बनाता है।
    एलोवेरा: ठंडक और त्वचा-मरम्मत में मदद; विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर।
    विटामिन-E: डीप-नरिशमेंट और त्वचा-रिपेयरिंग में सहायक।
    सावधानियाँ (जरूरी)
    पहली बार उपयोग से पहले हाथ की कलाई पर छोटा पैच-टेस्ट करें। अगर 24 घंटे में लालिमा, खुजली या जलन दिखे तो बंद कर दें।
    एलोवेरा या किसी तेल से एलर्जी हो तो उपयोग न करें।
    बच्चों में उपयोग से पहले पैच-टेस्ट और छोटे मात्रा में दें।
    यदि होंठों पर बार-बार कालापन, फफोले या खूनी दरारें हों तो त्वचा विशेषज्ञ से संपर्क करें — यह किसी अन्य त्वचा रोग का संकेत हो सकता है।
    छोटे बोनस टिप्स — बालों के लिए गुलाब जल का घरेलू नुस्खा (संक्षेप)
    शैम्पू-कंडीशनर के बाद गुनगुने पानी में 1–2 चम्मच गुलाब जल मिलाकर बालों पर अंतिम रिंस करें — बाल शाइनी और फ्रेशनिंग मिलती है।
    हेयर-मास्क में बादाम/नारियल तेल में कुछ बूंदें गुलाब जल मिलाकर रात भर लगाएं; सुबह हल्के शैम्पू से धोएँ।
    किसी भी नए उपचार को पूरे सिर पर लगाने से पहले 24-घंटे पैच-टेस्ट अवश्य करें।

मेरठ में खौफनाक वारदात: पत्नी ने प्रेमी संग मिलकर पति की हत्या कर जिंदा गंगनहर में फेंका, तीनों आरोपी गिरफ्तार

मेरठ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। रोहटा थाना क्षेत्र के रसूलपुर रोहटा गांव में एक महिला ने अपने प्रेमी और उसके दोस्त के साथ मिलकर पति की हत्या कर दी।
पत्नी ने पहले पति को खाने में नींद की छह गोलियां खिलाईं, फिर दुपट्टे से गला घोंटा और अचेत अवस्था में गंगनहर में फेंक दिया।

अवैध संबंध का विरोध बना हत्या की वजह

एसपी देहात अभिजीत कुमार के अनुसार, मृतक अनिल (32) राजमिस्त्री था और उसकी शादी आठ साल पहले काजल से हुई थी।
काजल के गांव के ही आकाश से अवैध संबंध थे, जिसका अनिल विरोध करता था। इसी से नाराज होकर काजल ने प्रेमी आकाश और उसके दोस्त बादल के साथ मिलकर हत्या की योजना बनाई।

नींद की गोलियों से अचेत कर गंगनहर में फेंका

25 अक्तूबर की रात काजल ने अनिल को खाने में छह नींद की गोलियां दे दीं।
अचेत होने पर उसने आकाश और बादल को बुलाया। तीनों ने मिलकर अनिल को बाइक पर बैठाकर सिवालखास गंगनहर पुल के पास ले जाकर दुपट्टे से गला घोंटा और बेहोशी की हालत में गंगनहर में फेंक दिया।

26 अक्तूबर की सुबह काजल ने अनिल के गायब होने की झूठी कहानी रची और परिजनों को गुमराह किया।

तीनों आरोपी गिरफ्तार, बरामद हुए साक्ष्य

पुलिस ने सर्विलांस और जांच के आधार पर आकाश, बादल और काजल को गिरफ्तार कर लिया।
तीनों से पूछताछ में घटना का खुलासा हुआ।

काजल का दुपट्टा, जो हत्या में प्रयोग हुआ, गंगनहर किनारे झाड़ियों से बरामद किया गया।

नींद की गोलियां भी काजल के घर से मिलीं।

गंगनहर में अनिल के शव की तलाश के लिए गोताखोर लगाए गए हैं।

तीन मासूम हुए बेसहारा

अनिल और काजल के तीन बच्चे — दो बेटियां (7 व 5 वर्ष) और एक बेटा (2 वर्ष) — अब मां-पिता दोनों से वंचित हो गए हैं।
काजल जेल में है जबकि पिता अब इस दुनिया में नहीं। परिजनों के सामने अब इन बच्चों की परवरिश का सवाल सबसे बड़ी चिंता बन गया है।

पुलिस कार्रवाई जारी

तीनों आरोपियों को अदालत में पेश कर जेल भेज दिया गया है।
गंगनहर में शव की तलाश और सबूत जुटाने के लिए पुलिस की कई टीमें सक्रिय हैं।

आठ हफ्तों में सड़कों से हटाने होंगे सभी आवारा पशु- सुप्रीमकोर्ट


🚨 सुप्रीम कोर्ट सख्त: सड़कों से हटेंगे आवारा मवेशी, सरकारों को 8 हफ्तों में करनी होगी कार्रवाई

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)देशभर में सड़कों और राजमार्गों पर खुले घूमते आवारा मवेशियों से बढ़ती दुर्घटनाओं और अव्यवस्था पर अब सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने केंद्र और सभी राज्य सरकारों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राष्ट्रीय राजमार्गों और सड़कों से आवारा मवेशियों को हटाकर सुरक्षित आश्रय गृहों में रखा जाए, ताकि सड़क सुरक्षा और सार्वजनिक सुविधा सुनिश्चित की जा सके।

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यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट ने उस दौरान की, जब वह आवारा कुत्तों से जुड़े पुराने मामले की सुनवाई कर रही थी। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि अब केवल आवारा कुत्तों पर नहीं, बल्कि अन्य पशुओं पर भी ठोस कदम उठाना जरूरी है। अदालत ने राज्यों को इस दिशा में कार्रवाई के लिए आठ सप्ताह का समय दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्कूलों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और खेल परिसरों जैसे सार्वजनिक स्थलों से भी आवारा जानवरों को हटाया जाए। साथ ही, न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि पकड़े गए कुत्तों या मवेशियों को उसी स्थान पर दोबारा नहीं छोड़ा जाए।

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न्यायालय ने सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि वे सड़कों और हाइवे पर नियमित गश्त के लिए विशेष टीमें गठित करें, जिनका कार्य इन पशुओं को सुरक्षित रूप से पकड़कर आश्रय गृहों तक पहुंचाना होगा, जहां उनकी देखभाल और भोजन की उचित व्यवस्था की जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के उस फैसले का भी समर्थन किया जिसमें सड़कों से मवेशियों को हटाने और पुनर्वास की बात कही गई थी। अब देशभर में इस फैसले के लागू होने से सड़क दुर्घटनाओं में कमी आने और यातायात सुचारु रहने की उम्मीद है। अगली सुनवाई 13 जनवरी 2026 को होगी, जिसमें अब तक की प्रगति की समीक्षा की जाएगी।

SSC JE और CAPF 2025: अब उम्मीदवार खुद चुन सकेंगे परीक्षा स्लॉट, जानें पूरी प्रक्रिया और तिथियां

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। कर्मचारी चयन आयोग (SSC) ने उम्मीदवारों को बड़ी राहत देते हुए स्व-स्लॉट चयन (Self Slot Selection) की सुविधा शुरू करने का ऐलान किया है। अब परीक्षार्थी आगामी SSC जूनियर इंजीनियर (JE) और दिल्ली पुलिस एवं केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) सब-इंस्पेक्टर (SI) परीक्षा 2025 के लिए अपनी पसंद के परीक्षा शहर और तिथि खुद चुन सकेंगे।

कब से शुरू होगी स्लॉट चयन सुविधा

JE परीक्षा 2025 के लिए स्लॉट चयन विंडो: 10 नवंबर से 13 नवंबर 2025 तक खुली रहेगी।

CAPF SI परीक्षा 2025 के लिए स्लॉट चयन विंडो: 17 नवंबर से 21 नवंबर 2025 तक सक्रिय रहेगी।

उम्मीदवार http://ssc.gov.in पर जाकर लॉगिन करके यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

स्लॉट चयन के बाद बदलाव संभव नहीं

SSC ने स्पष्ट किया है कि एक बार स्लॉट चयन करने के बाद उसमें किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया जा सकेगा। जो उम्मीदवार तय अवधि में स्लॉट नहीं चुनेंगे, उन्हें सिस्टम द्वारा स्वतः एक उपलब्ध स्लॉट आवंटित किया जाएगा।

आयोग ने कहा, “सिस्टम द्वारा किया गया स्लॉट आवंटन अंतिम और बाध्यकारी होगा, किसी भी स्थिति में परिवर्तन नहीं किया जाएगा।”

दिसंबर में होगी परीक्षा

कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित SSC JE और CAPF SI पेपर-I परीक्षा दिसंबर 2025 में आयोजित की जाएगी।

कुल रिक्तियां:

JE (जूनियर इंजीनियर): 1,731 पद

SI (सब-इंस्पेक्टर, दिल्ली पुलिस व CAPF): 5,308 पद

उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण सलाह

उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे निर्धारित समय के भीतर अपनी पसंद का स्लॉट और शहर चुन लें, ताकि उन्हें मनचाहा परीक्षा केंद्र और तिथि मिल सके।

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🪔 मूलांक 1 से 9 तक जानें कैसा रहेगा आज का दिन

🪔 शुक्रवार का अंक राशिफल: मूलांक 1 से 9 तक जानें कैसा रहेगा आज का दिन — पंडित सुधीर तिवारी


तारीख — 7 नवंबर 2025, दिन — शुक्रवार
आज की तारीख के अंकों (07/11/2025 ➡️ 7+1+1+0+2+0+2+5=18 ➡️ 1+8=9) का कुल योग 9 है। यह अंक मंगल ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है — ऊर्जा, साहस और नेतृत्व का प्रतीक।
आज का अंक राशिफल इन्हीं प्रभावों पर आधारित है।
🌞 मूलांक 1 (जिनका जन्म 1, 10, 19, या 28 को हुआ हो)
आज का दिन उत्साह और आत्मविश्वास से भरा रहेगा। कार्यस्थल पर नई जिम्मेदारी या पदोन्नति की संभावना है। किसी योजना में निवेश से पहले विचार करें।
सलाह: साथी के साथ अहंकार से बचें।

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🌙 मूलांक 2 (जिनका जन्म 2, 11, 20 या 29 को हुआ हो)
भावनाएं आज प्रमुख रहेंगी। रचनात्मक कार्यों में सफलता के योग हैं। अधूरे काम पूरे करने का अवसर मिलेगा।
सावधानी: खर्चों पर नियंत्रण रखें।
प्रेम जीवन: रोमांटिक पल दिल के करीब रहेंगे।
🔱 मूलांक 3 (जिनका जन्म 3, 12, 21 या 30 को हुआ हो)
यह दिन प्रगति और सम्मान लेकर आएगा। शिक्षा, लेखन और प्रशासनिक क्षेत्र के लोगों के लिए लाभ का समय है।
धन लाभ: अचानक आर्थिक अवसर बनेंगे।
संबंध: भरोसे से रिश्ते मजबूत होंगे।

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मूलांक 4 (जिनका जन्म 4, 13, 22 या 31 को हुआ हो)
आपका आत्मविश्वास उच्च रहेगा। व्यापार, मीडिया और संचार क्षेत्र के लिए यह दिन खास है।
यात्रा और नए संपर्क लाभ देंगे।
सावधानी: जल्दबाजी में निर्णय न लें।
💐 मूलांक 5 (जिनका जन्म 5, 14 या 23 को हुआ हो)
घर में खुशियों का माहौल रहेगा। कला, डिजाइन, लेखन और मनोरंजन से जुड़े लोगों के लिए दिन शुभ है।
खर्च: विलासिता पर धन व्यय हो सकता है।
संबंध: पुराने मतभेद दूर होंगे।

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🌺 मूलांक 6 (जिनका जन्म 6, 15 या 24 को हुआ हो)
दिन में कुछ अनपेक्षित परिवर्तन संभव हैं, पर अंत में स्थिति आपके पक्ष में जाएगी।
धन लाभ: रुका हुआ पैसा मिलने के योग हैं।
संबंध: संवाद बनाए रखें, गलतफहमी से बचें।
🔮 मूलांक 7 (जिनका जन्म 7, 16 या 25 को हुआ हो)
आध्यात्मिक रुझान बढ़ेगा। पुराने रहस्य या उलझनें सुलझ सकती हैं।
वित्तीय निर्णयों में सावधानी बरतें।
संबंध: आत्ममंथन का दिन है, जल्दबाजी न करें।
⚖️ मूलांक 8 (जिनका जन्म 8, 17 या 26 को हुआ हो)
आज कर्म का फल मिलेगा। कार्यस्थल पर जिम्मेदारी और सम्मान दोनों बढ़ेंगे।
संपत्ति या भूमि संबंधी लाभ संभव।
संबंध: साथी के विचारों को महत्व दें।
🔥 मूलांक 9 (जिनका जन्म 9, 18 या 27 को हुआ हो)
आज आपका विशेष दिन है। आत्मविश्वास चरम पर रहेगा। नई परियोजनाओं की शुरुआत के लिए समय शुभ है।
लाभ: अचानक धन लाभ संभव है।
सावधानी: क्रोध पर नियंत्रण रखें।
📜 पंडित सुधीर तिवारी कहते हैं:
“आज का दिन मंगल ऊर्जा से भरा हुआ है। जो भी कार्य निष्ठा से करेंगे, उसका परिणाम निश्चित रूप से सफलता देगा।”

⚠️ महत्वपूर्ण सूचना:
यह अंक ज्योतिष भारतीय परम्परा पर आधारित है, राष्ट्र की आधिकारिक मान्यता नहीं रखता।
अपने व्यक्तिगत निर्णयों के लिए अपनी जन्मकुंडली किसी विशेषज्ञ ज्योतिष से अवश्य दिखाएँ।

सबके राम…

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✍️ डॉ कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’

विपदा विनाशक ऐश्वर्य दाता,
संसार सुखदाता विधि विधाता,
श्री राम जय राम जय जय राम,
जपा करते शिव सारे देवता।

वेदज्ञाता शास्त्रनिपुण तत्ववेत्ता,
स्मृतिवान प्रतिभावान सर्वप्रिय,
श्री रामचंद्र सर्वगुण सम्पन्न हैं,
कहलाते मर्यादा पुरुषोत्तम हैं।

दीनो के श्री राम दीनानाथ हैं,
भक्तों को प्रिय भक्तवत्सल हैं,
विवेक आगार अति सज्जन हैं,
सीतापति श्रीराम सबके राम हैं।

वाल्मीक, गोस्वामी तुलसीदास,
नारद, शारद, शेष और महेश,
गावत उनके गुण दिनेश, गणेश,
जपते राम नाम सुर मुनि सुरेश।

येहि कलिकाल में रामनाम,
महिमा आदित्य सब जानते,
जिसे भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न
और हनुमान जी सदा जपते।

“हर घर नल जल” अब भी अधूरा सपना — कागज़ों में कनेक्शन पूरे, पर कई गाँव अब भी प्यासे!

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)ग्रामीण भारत को सुरक्षित पेयजल मुहैया कराने के उद्देश्य से 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई “हर घर नल जल योजना” यानी जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) आज भी अपने लक्ष्य से लगभग 20 प्रतिशत पीछे है।
मिशन का लक्ष्य था—हर ग्रामीण घर तक नल द्वारा प्रतिदिन 55 लीटर शुद्ध पेयजल पहुँचाना, परंतु जमीनी सच्चाई अब भी अधूरी है।

आंकड़े बताते हैं कि अगस्त 2019 में मात्र 3.23 करोड़ ग्रामीण घरों में नल कनेक्शन थे, जो उस समय कुल ग्रामीण घरों का करीब 17% था।
फरवरी 2025 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 15.44 करोड़ (करीब 79.74%) तक पहुँच चुकी है। यानी प्रगति तो तेज़ है, मगर 100% कवरेज का लक्ष्य अब भी दूर है।

मिशन की असली चुनौती सिर्फ “कनेक्शन देना” नहीं, बल्कि “नियमित और पर्याप्त जल आपूर्ति” सुनिश्चित करना है।
राष्ट्रीय स्तर पर किए गए अध्ययन के अनुसार, जहाँ कनेक्शन तो मिल गए हैं, वहाँ भी सिर्फ 80% घरों को नियमित पानी मिल रहा है। कई जगह पाइपलाइन अधूरी हैं, टंकियाँ बनीं पर चालू नहीं हुईं — जिससे “कागज़ों पर सफलता” और “जमीनी सच्चाई” में फर्क साफ नजर आता है।

पश्चिम बंगाल, केरल, राजस्थान और झारखंड जैसे राज्यों में कवरेज अब भी 54% के आसपास है। वहीं, उत्तर प्रदेश और बिहार के कई ग्राम पंचायतों में टंकियाँ बन चुकी हैं, लेकिन पानी की सप्लाई अनियमित है।
उदाहरण के तौर पर सीतापुर जिले के एक गाँव में नई बनी पानी की टंकी गिर गई, जो निर्माण गुणवत्ता और निगरानी पर सवाल उठाती है।

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विशेषज्ञों का कहना है कि पेयजल की नियमितता और गुणवत्ता दोनों ही स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण से सीधा जुड़ा है। जब पानी नल तक नहीं पहुँचता, तो ग्रामीण महिलाएँ अब भी दूर-दूर तक पानी ढोने को मजबूर हैं।
,“हर घर नल जल” योजना ने ग्रामीण भारत में उम्मीद जगाई है, परंतु सफलता का सफर अब भी अधूरा है।
सरकार को अब न केवल संख्या बढ़ाने, बल्कि सप्लाई की गुणवत्ता, नियमितता और निगरानी पर विशेष ध्यान देना होगा, तभी यह योजना सच में “हर घर की प्यास बुझाने” का सपना साकार कर पाएगी।

सिकंदरपुर-मनियर मार्ग जगह-जगह टूटा, राहगीरों को हो रही भारी परेशानी

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। सिकंदरपुर क्षेत्र का प्रमुख संपर्क मार्ग सिकंदरपुर-मनियर मार्ग बदहाल स्थिति में पहुंच गया है। जगह-जगह गड्ढों से भरे इस मार्ग पर यात्रा करना अब खतरे से खाली नहीं रहा। सड़क की जर्जर हालत के कारण आए दिन वाहन चालक हादसों का शिकार हो रहे हैं। सबसे अधिक परेशानी दोपहिया चालकों और स्कूल जाने वाले बच्चों को झेलनी पड़ रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मार्ग सिकंदरपुर कस्बे को मनियर, बैरिया और बलिया शहर से जोड़ता है। प्रतिदिन हजारों लोग इस सड़क से गुजरते हैं, लेकिन लंबे समय से इस पर कोई मरम्मत कार्य नहीं हुआ। बरसात के मौसम में सड़क की हालत और भी खराब हो गई है। कई जगहों पर तो गड्ढे इतने बड़े हो गए हैं कि उनमें पानी भर जाने से सड़क और नाले का फर्क मिट जाता है।


व्यापारी वर्ग का कहना है कि खराब सड़क के कारण माल ढुलाई में दिक्कतें आ रही हैं। ट्रक और टेंपो चालक मजबूरी में रेंग-रेंग कर चलने को विवश हैं। कई बार दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन संबंधित विभाग के अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे। ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधियों ने बताया कि उन्होंने सड़क की मरम्मत के लिए कई बार विभाग को पत्र लिखा, मगर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ आश्वासन मिला।

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स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस मार्ग की शीघ्र मरम्मत कराई जाए, ताकि आमजन को राहत मिल सके। राहगीरों का कहना है कि यदि जल्द ही सड़क की मरम्मत नहीं हुई, तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे। क्षेत्र की जनता का मानना है कि सिकंदरपुर-मनियर मार्ग की बदहाली विकास कार्यों पर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। प्रशासन यदि समय रहते ध्यान नहीं देगा, तो आने वाले दिनों में यह सड़क किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

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🌟 12 राशियों पर आज ग्रहों की चाल का प्रभाव, कैसा रहेगा आपका दिन कार्य, प्रेम, शिक्षा और भाग्य के अनुसार


♈ मेष (Aries) — (अ, ल, ई)
कार्य/व्यवसाय: ऊर्जा और आत्मविश्वास से दिन की शुरुआत। रुके कार्य गति पकड़ेंगे।
शिक्षा: विद्यार्थियों को मनचाहा परिणाम मिलेगा।
कला/संगीत: नई प्रेरणा मिलेगी, प्रदर्शन में निखार आएगा।
राजनीति/प्रशासन: सम्मान बढ़ेगा, वरिष्ठों का सहयोग मिलेगा।
आर्थिक पक्ष: धीरे-धीरे सुधार, खर्च पर नियंत्रण रखें।
प्रेम जीवन: समय और भरोसे की आवश्यकता।
स्वास्थ्य: सामान्य रहेगा।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 9
पूजा: भगवान हनुमान जी की आराधना शुभ फलदायी।
♉ वृषभ (Taurus) — ( ब, व, उ)
कार्य/व्यवसाय: मेहनत का फल मिलेगा, स्थिरता बनी रहेगी।
शिक्षा: प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता।
कला/संगीत: रचनात्मक कार्यों में सराहना मिलेगी।
राजनीति/प्रशासन: धैर्य रखें, निर्णय सोच-समझकर लें।
आर्थिक पक्ष: पुराना प्रयास लाभ देगा।
प्रेम जीवन: स्थिर रहेगा, पर संवाद बनाए रखें।
स्वास्थ्य: सामान्य, थकान से बचें।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 6
पूजा: देवी लक्ष्मी की उपासना शुभ।
♊ मिथुन (Gemini) — ( क, छ, घ)
कार्य/व्यवसाय: संचार कौशल से लाभ। नए संपर्क बनेंगे।
शिक्षा: नई दिशा में सफलता के योग।
कला/संगीत: क्रिएटिविटी का दिन।
राजनीति/प्रशासन: जनसंपर्क मजबूत होगा।
आर्थिक पक्ष: संतुलित।
प्रेम जीवन: नई शुरुआत संभव।
स्वास्थ्य: मानसिक तनाव से बचें।
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 5
पूजा: भगवान गणेश की उपासना शुभ।

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♋ कर्क (Cancer) — ( ड, ह)
कार्य/व्यवसाय: भावनात्मक निर्णय न लें। स्थिरता बनाए रखें।
शिक्षा: ध्यान केंद्रित रखें।
कला/संगीत: आत्म-अभिव्यक्ति के लिए अच्छा दिन।
राजनीति/प्रशासन: संयम रखें, विरोधी सक्रिय।
आर्थिक पक्ष: सतर्कता जरूरी।
प्रेम जीवन: संवेदनशीलता बढ़ेगी।
स्वास्थ्य: पेट संबंधी समस्या संभव।
शुभ रंग: चांदी जैसा सफेद
शुभ अंक: 2
पूजा: भगवान शिव का जलाभिषेक करें।
♌ सिंह (Leo) — ( म, ट)
कार्य/व्यवसाय: नई शुरुआत व नेतृत्व का दिन।
शिक्षा: परीक्षा में अच्छे अंक।
कला/संगीत: मंच पर प्रदर्शन के योग।
राजनीति/प्रशासन: पदोन्नति व सम्मान के संकेत।
आर्थिक पक्ष: शुभ समाचार मिलेगा।
प्रेम जीवन: जोश और आकर्षण बढ़ेगा।
स्वास्थ्य: जल की कमी न होने दें।
शुभ रंग: सुनहरा
शुभ अंक: 1
पूजा: सूर्य देव को अर्घ्य दें।

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♍ कन्या (Virgo) — ( प, ठ, ण)
कार्य/व्यवसाय: जिम्मेदारी का दिन, सफलता सुनिश्चित।
शिक्षा: शोध और विश्लेषण में रुचि बढ़ेगी।
कला/संगीत: सटीकता से सराहना।
राजनीति/प्रशासन: वरिष्ठों से प्रशंसा।
आर्थिक पक्ष: स्थिर।
प्रेम जीवन: साथी की भावनाएं सुनें।
स्वास्थ्य: नींद पूरी लें।
शुभ रंग: नीला
शुभ अंक: 3
पूजा: विष्णु जी की आराधना करें।
♎ तुला (Libra) — ( र, त)
कार्य/व्यवसाय: संतुलन जरूरी, मतभेद टालें।
शिक्षा: लचीलापन रखें।
कला/संगीत: नए प्रयोग सफल होंगे।
राजनीति/प्रशासन: शांति बनाए रखें।
आर्थिक पक्ष: सावधानी से निर्णय लें।
प्रेम जीवन: स्पष्ट संवाद आवश्यक।
स्वास्थ्य: पाचन पर ध्यान दें।
शुभ रंग: गुलाबी
शुभ अंक: 7
पूजा: मां सरस्वती की उपासना करें।
♏ वृश्चिक (Scorpio) — ( न, य)
कार्य/व्यवसाय: टीमवर्क से लाभ।
शिक्षा: समूह अध्ययन में सफलता।
कला/संगीत: रचनात्मकता बढ़ेगी।
राजनीति/प्रशासन: सहयोग से प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
आर्थिक पक्ष: निवेश सोच-समझकर करें।
प्रेम जीवन: अपनापन बढ़ेगा।
स्वास्थ्य: मानसिक शांति बनी रहेगी।
शुभ रंग: भूरा
शुभ अंक: 8
पूजा: महाकाल शिव की आराधना शुभ।
♐ धनु (Sagittarius) — ( भ, ध, फ)
कार्य/व्यवसाय: आकर्षक विचारों से कामयाबी।
शिक्षा: उच्च शिक्षा के लिए शुभ दिन।
कला/संगीत: प्रेरणा का दिन।
राजनीति/प्रशासन: जनसंपर्क मजबूत।
आर्थिक पक्ष: लाभ के योग।
प्रेम जीवन: खुशियां लौटेंगी।
स्वास्थ्य: अच्छा रहेगा।
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 4
पूजा: श्री विष्णु जी की पूजा करें।
♑ मकर (Capricorn) — ( ख, ज)
कार्य/व्यवसाय: रहस्यमय आत्मविश्वास से सफलता।
शिक्षा: ध्यान केंद्रित रहेगा।
कला/संगीत: नई दिशा में विचार।
राजनीति/प्रशासन: वरिष्ठों की नजर आप पर।
आर्थिक पक्ष: लाभ के योग।
प्रेम जीवन: गहराई बढ़ेगी।
स्वास्थ्य: ध्यान करें।
शुभ रंग: धूसर
शुभ अंक: 5
पूजा: शनि देव की आराधना लाभकारी।
♒ कुंभ (Aquarius) — ( ग, स, श)
कार्य/व्यवसाय: भाग्य का साथ, नई डील या यात्रा सफल।
शिक्षा: विदेश से जुड़े अवसर।
कला/संगीत: नवीनता दिखेगी।
राजनीति/प्रशासन: सम्मान और सहयोग।
आर्थिक पक्ष: पुराना उधार मिलेगा।
प्रेम जीवन: बात आगे बढ़ सकती है।
स्वास्थ्य: अच्छा।
शुभ रंग: बैंगनी
शुभ अंक: 11
पूजा: हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाएं।
♓ मीन (Pisces) — ( द, च, झ, थ)
कार्य/व्यवसाय: रचनात्मकता से लाभ।
शिक्षा: कला, साहित्य में प्रगति।
कला/संगीत: भावनात्मक अभिव्यक्ति श्रेष्ठ।
राजनीति/प्रशासन: धैर्य रखें, सही समय का इंतजार करें।
आर्थिक पक्ष: स्थिरता, पर फिजूलखर्च से बचें।
प्रेम जीवन: सुकून व अपनापन।
स्वास्थ्य: ध्यान व संगीत लाभकारी।
शुभ रंग: आसमानी
शुभ अंक: 7
पूजा: विष्णु जी या श्रीकृष्ण की आराधना शुभ।
🕉️ पंडित सत्य प्रकाश पाण्डेय
(वैदिक ज्योतिष विशेषज्ञ – ग्रह, नक्षत्र एवं पंचांग विश्लेषक)
डिस्क्लेमर:यह राशिफल सामान्य ज्योतिषीय विश्लेषण पर आधारित है। राष्ट्र की परंपरा इस ज्योतिषीय गणना को प्रमाणित नहीं करती। अपने व्यक्तिगत जन्मकुंडली विश्लेषण हेतु किसी विशेषज्ञ ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।

“कर्म के न्यायाधीश शनि-देव: जन्म-वृतांत एवं रहस्यमयी शुरुआत”

“शनि देव की उत्पत्ति — कर्म-वेदी के न्यायाधीश का आगमन”


इस संसार में जहाँ समय की धारा शांत नहीं, जहाँ कर्मों का लेखा-जोखा अपनी गति से चलता है, वहाँ हमें मिलता है एक ऐसे देवता से जिनके दृष्टिकोच्‌छेदन से न कोई बच सकता है—वह हैं शनि देव। हम राष्ट्र की परम्परा (RkpNewsUp) के माध्यम से हम आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं इस पवित्र देवता की उत्पत्ति कथा का पहला भाग, भावनात्मक स्वर में, विस्तृत वर्णन के साथ, ताकि पाठक-मन मन‐मुग्ध हो जाए और उनकी आस्था के साथ-साथ समझ भी गहरी हो सके।
बचपन-सेतु: सूर्य की छाया में जन्म।

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हिन्दू पुराणों के मतानुसार, शनि देव का जन्म हुआ था सूर्य देव तथा उनकी सहधर्मिणी छाया देवी के पुत्र रूप में। कथा यह है कि सूर्यदेव की पत्नी स्वर्णा या संध्या थीं, परन्तु उनकी अनुपस्थिति में सूर्य ने छाया को अपना स्थान दिया था। छाया-देवी के गर्भ में शनि देव धारण हुए थे, उस समय छायादेवी गहन तपस्या में लीन थीं—रोटी-छाँव की परवाह न करके, सूर्य की तेज किरणों में कठिन तप कर रही थीं।
उस तपस्या और तेज प्रकृति के कारण जब शनि देव का जन्म हुआ, तो उनका रंग गहरा एवं काला था—वह तप की भस्म और छाया के प्रभाव का प्रतीक था।

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जब शनि ने जन्म लिया और पहली बार अपनी आँखों से पिता सूर्य को देखा, उस घड़ी ऐसा हुआ कि सूर्य का चक्र अर्थात् सूर्यरथ ठहर गया, ऐसा कहा जाता है कि सूर्यदेव ने क्षिप्र दृष्टि में उस काले-प्रकाश को देखा तो उन्हें आशंका हुई कि यह उनका पुत्र नहीं हो सकता।
यह क्षण शनि देव की उत्पत्ति में एक धक्का और एक न्यायाधीश-को बनने की चेतावनी दोनों का प्रतीक बन गया।

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पिता-पुत्र का मेल-मुकाबला और शनि-कर्म की शुरुआत
कहा जाता है कि शनि देव के जन्म के बाद सूर्यदेव ने जिज्ञासा और शंका व्यक्त की कि इस काले रूप का पुत्र मेरा कैसे हो सकता है? इस कारण पिता ने छायादेवी को उपेक्षित किया। जैसे-जैसे शनि बढ़े, उन्होंने अपने अंदर न्याय, तप और अनुशासन की शक्ति विकसित की।
एक अन्य प्रसिद्ध कथा में है कि जब शनि देव अंकल की भूमिका अदा कर रहे थे, उन्होंने अपनी माँ को खाद्य-विराम के समय बेशकण्गा ही किया—जिससे उन्हें एक भयंकर श्राप मिला: उनकी एक टाँग लंगड़ी हो गई। इस कारण कहा जाता है कि शनि देव धीमे-धीमे चलते हैं, एक प्रकार से ‘शनी’ अर्थात शनि ग्रह की गति से मेल खाते हुए।

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फिर एक दिन, जब सूर्यदेव की गति रुक गई थी और उनके रथ के घोड़े नहीं चले, तब उन्होंने भगवान शिव जी की शरण ली। शिवजी ने समझाया कि उन्होंने अपनी छाया और पुत्र को अपमानित किया है; उन्हें शनी को सम्मान देना होगा। इस प्रकार शनि को न्यायाधीश का स्थान मिला—वे कर्मों के फल देने वाले देवता बन गए।
कर्म-पालक की सत्ता, न्याय का प्रतीक
शनि देव केवल जन्म की एक कथा मात्र नहीं हैं—वे एक आदर्श की मूर्ति हैं: अच्छे कर्मों के अनुसार फल देना, और दूसरों द्वारा किए गए कर्मों का हिसाब रखना। हिन्दू ज्योतिष में वे ग्रह-देवों में से एक माने जाते हैं, विशेषतः समय, धैर्य, तपस्या एवं न्याय के लिए।
उनका वाहन कौआ या गरुड़ नहीं बल्कि कौवा/कौआ मानकर देखा गया है—जो प्रतीक है उस निगाह का जो हमेशा जीवित प्राणी के कर्मों पर टिकी रहती है।

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उनके प्रभाव में आने वाला व्यक्ति न केवल कठिन परिस्थितियों से गुज़रता है, बल्कि स्वयं को तपकर, अनुशासन से आगे बढ़ने का अवसर प्राप्त करता है। शनि देव का दण्ड किसी को बर्बाद नहीं करता—बल्कि वह व्यक्ति को शुद्ध करने, संवर्धित करने का माध्यम बनता है।
भावनात्मक दृष्टि: क्यों हमें शनि देव से डर लगता है?
यह अच्छाई की व्याख्या नहीं देता कि शनि देव बुराई से प्यार करते हैं—बल्कि यह दर्शाता है कि अनुशासन, सत्य और कर्म का पालन उनके समीकरण में नहीं आने पर परिणाम सामने आता है। जब हम गलत राह पर जाते हैं, तो शनि देव की दृष्टि हमें झकझोर देती है। लेकिन जब हम सच्चे मन से अपने कर्मों को सुधारते हैं, तो वही दण्डकर्ता हमें संगठित जीवन, सुधार एवं उन्नति का मार्ग दिखाते हैं।

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उनकी उपस्थिती हमें यह याद दिलाती है कि जीवन-पथ आसान नहीं है, लेकिन इस कठिन मार्ग पर चलने वाला कभी अकेला नहीं। क्योंकि न्याय-चक्र में कोई भी क्रिया ध्वस्त नहीं होती—हर क्रिया का फल मिलता है।
आज के इस पहले एपिसोड में हमने जाना कि शनि देव कैसे उत्पन्न हुए, उनके जन्म-परिस्थितियाँ क्या थीं, पिता-पुत्र के विवाद कैसे न्याय के रास्ते पर ले गए और आखिर-कार वे कर्म-फलदाता देवता के रूप में स्थापित हुए। अगले एपिसोड में हम जानेंगे कि कैसे उन्होंने विभिन्न पुराण-कथाओं में अपनी न्यायधीश भूमिका निभाई, जिन्हें राजा-प्रजा, ऋषि-मुनि और आम जन जीवन में महसूस किया गया।
जब आप अगली बार शनिवार के दिन तेल चढ़ाएँ, काला तिल अर्पित करें, तो याद रखें—शनि देव सिर्फ डरावने नहीं बल्कि सुधार‐कर्त्ता, संजीवक और न्याय के प्रतीक हैं।