Wednesday, July 1, 2026
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दिल्ली धमाके में हसनपुर के दो लोगों की मौत, घरों में मचा कोहराम

हसनपुर/अमरोहा (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। दिल्ली में हुए भीषण धमाके में हसनपुर क्षेत्र के दो लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों की पहचान डीटीसी कंडक्टर अशोक कुमार (34) निवासी मंगरौला और खाद कारोबारी लोकेश अग्रवाल (52) निवासी हसनपुर के रूप में हुई है। दोनों सोमवार को लालकिला मेट्रो स्टेशन के पास हुए कार ब्लास्ट की चपेट में आ गए थे।

जानकारी के मुताबिक, लोकेश अग्रवाल दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती अपने समधन (बेटे की सास) को देखने गए थे। लौटते समय उन्होंने अशोक कुमार को फोन कर लाल किला मेट्रो स्टेशन पर मिलने बुलाया। इसके बाद दोनों बाइक से आनंद विहार बस अड्डा जा रहे थे, जहां से लोकेश को हसनपुर लौटना था।

धमाके में दर्दनाक मौत

जब दोनों लालकिला के गेट नंबर-1 के सामने पहुंचे, तभी अचानक एक कार में जोरदार धमाका हुआ। विस्फोट की चपेट में आने से दोनों की मौके पर मौत हो गई। पहले अशोक की मौत की पुष्टि हुई थी, लेकिन बाद में पुलिस को घटनास्थल पर मिला एक मोबाइल फोन लोकेश अग्रवाल का निकला। दिल्ली पुलिस ने मोबाइल से पहचान कर हसनपुर पुलिस को जानकारी दी।

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गम और गुस्से में डूबा हसनपुर

मंगलवार सुबह दोनों के शव जब गांव पहुंचे, तो घरों में मातम छा गया। परिजनों के रोने की आवाजें सुनकर पूरा गांव गमगीन हो गया। सुबह 10:20 बजे अंतिम संस्कार के दौरान ग्रामीणों ने अशोक को शहीद का दर्जा और आर्थिक सहायता की मांग करते हुए सड़क किनारे शव रखकर प्रदर्शन किया।
करीब एक घंटे बाद एसडीएम पुष्करनाथ चौधरी और सीओ दीप कुमार पंत के आश्वासन के बाद लोग शांत हुए और दोनों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

सीओ दीप कुमार पंत ने बताया कि दिल्ली धमाके में हसनपुर के अशोक कुमार और लोकेश अग्रवाल की मौत हुई है। दोनों के शवों का पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंप दिया गया है। लोकेश अपने पीछे दो बेटे और एक बेटी छोड़ गए हैं।

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दिल्ली में आज से शुरू होगी भारत-नेपाल सीमा वार्ता, जेन जेड प्रदर्शन के बाद पहली उच्चस्तरीय बैठक

भारत और नेपाल के बीच वार्षिक सीमा वार्ता आज यानी 12 नवंबर से दिल्ली में शुरू हो रही है। यह बैठक तीन दिनों तक चलेगी, जिसमें दोनों देशों के शीर्ष सुरक्षा बलों — भारत के सशस्त्र सीमा बल (SSB) और नेपाल के आर्म्ड पुलिस फोर्स (APF) — के प्रमुख शामिल होंगे। यह वार्ता खास इसलिए मानी जा रही है क्योंकि यह सितंबर में काठमांडू में हुए ‘जेन जेड’ प्रदर्शन के बाद दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों के बीच पहली उच्चस्तरीय बैठक है।

बैठक का एजेंडा

इस वार्ता का मुख्य एजेंडा सीमा पार अपराधों पर रोक लगाना, रियल-टाइम खुफिया जानकारी साझा करने की प्रणाली को मजबूत बनाना और सीमा प्रबंधन में समन्वय बढ़ाना है। अधिकारियों के मुताबिक, यह बैठक भारत-नेपाल सीमा पर शांति और सुरक्षा बनाए रखने की दिशा में अहम साबित होगी।

भारत की ओर से इस बैठक का नेतृत्व एसएसबी के महानिदेशक संजय सिंगल करेंगे, जबकि नेपाल की ओर से एपीएफ के इंस्पेक्टर जनरल राजू आर्यल के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल भाग लेगा।
एसएसबी के बयान के अनुसार, बैठक में सीमा पार अपराधों की रोकथाम के लिए संयुक्त तंत्र विकसित करने, सूचना साझा करने के लिए तेज और कुशल चैनल स्थापित करने और संवेदनशील सीमा इलाकों की निगरानी को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

सीमा की निगरानी और सहयोग

पिछली बार यह वार्षिक बैठक नवंबर 2024 में काठमांडू में आयोजित की गई थी। एसएसबी भारत-नेपाल की 1,751 किलोमीटर लंबी खुली सीमा की निगरानी करती है, जो बिना बाड़ की है। इसके अलावा, यह बल 699 किलोमीटर लंबी भारत-भूटान सीमा की सुरक्षा की भी जिम्मेदारी निभाता है।

भारत और नेपाल के बीच यह वार्ता दोनों देशों के सुरक्षा सहयोग को नई दिशा देने के साथ सीमा पर सुरक्षा, शांति और विश्वास को और मजबूत करने का प्रयास है।

अशुभ समय जानें —कालभैरव जयंती विशेष पंचांग

12 नवम्बर 2025 का शुभ पंचांग — कालभैरव जयंती व बुधाष्टमी विशेष दिवस


(बुधवार • मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष अष्टमी/नवमी • विक्रम संवत 2082, शक संवत 1947)
“धर्म, काल और कर्म का संगम — जब बुध की ऊर्जा मिले भैरव की शक्ति से!”
🕉️ दिन का सारांश
वार: बुधवार
संवत्सर: कालयुक्त (विक्रम संवत 2082), विश्वावसु (शक संवत 1947)

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मास: अमांत कार्तिक, पूर्णिमांत मार्गशीर्ष
पक्ष: कृष्ण पक्ष
तिथि:अष्टमी – 11 नवम्बर 11:09 PM से 12 नवम्बर 10:58 PM तक
नवमी – 12 नवम्बर 10:58 PM से 13 नवम्बर 11:34 PM तक
नक्षत्र:आश्लेषा – 12 नवम्बर 06:35 PM तक
मघा – 12 नवम्बर 06:35 PM के बाद
योग:शुक्ल – 08:02 AM तक
ब्रह्म – 08:02 AM से अगले दिन 06:57 AM तक
करण:बालव – 10:58 AM तक
कौलव – 10:58 AM से 10:58 PM तक
तैतिल – उसके बाद

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☀️ सूर्य और चंद्र विवरण
सूर्योदय: 06:42 AM
सूर्यास्त: 05:39 PM
चन्द्रोदय: 13 नवम्बर 12:35 AM
चन्द्रास्त: 12 नवम्बर 01:06 PM
सूर्य राशि: तुला
चंद्र राशि: 06:35 PM तक कर्क, उसके बाद सिंह
🌸 आज के व्रत व पर्व
बुधाष्टमी व्रत
कालभैरव जयंती
कालाष्टमी
आज के दिन भैरव जी की पूजा से भय, रोग और अशुभ प्रभाव नष्ट होते हैं। विशेष रूप से रात्रि में “ॐ कालभैरवाय नमः” का जप उत्तम फलदायक रहेगा।

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🕑 अशुभ काल (Avoid These Timings)
राहुकाल: 12:10 PM – 01:33 PM
यमगण्ड: 08:04 AM – 09:26 AM
कुलिक काल: 10:48 AM – 12:10 PM
दुर्मुहूर्त: 11:49 AM – 12:32 PM
वर्ज्यम्: 07:15 AM – 08:52 AM
🌿 शुभ काल
अमृत काल: 04:58 PM – 06:35 PM
ब्रह्म मुहूर्त: 05:07 AM – 05:55 AM
अभिजीत मुहूर्त: आज नहीं
🧭 आज की यात्रा दिशा
शुभ दिशा: उत्तर या पूर्व की ओर यात्रा शुभ रहेगी।
अशुभ दिशा: दक्षिण दिशा में यात्रा टालें या पहले दक्षिणमुखी कदम रखते समय “हरे राम हरे कृष्ण” का स्मरण करें।
यात्रा से पूर्व क्या खाएँ:
गुड़ व दही खाकर निकलना आज विशेष मंगलकारी है।
व्यापारियों के लिए: तुलसी पत्र और सिक्का लेकर निकलें।
छात्रों के लिए: सरस्वती वंदना कर कलम को माथे से लगाएँ।

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💫 दिन के शुभ चौघड़िये
समय चौघड़िया फल
06:42 – 08:04 लाभ कार्य सिद्धि
08:04 – 09:26 अमृत अत्यंत शुभ
09:26 – 10:48 काल हानिकर
10:48 – 12:10 शुभ सफल कार्य
12:10 – 13:33 रोग विवाद से बचें
13:33 – 14:55 उद्बेग मानसिक तनाव
14:55 – 16:17 चर यात्रा शुभ
16:17 – 17:39 लाभ कार्य में लाभ
🌕 रात्रि के चौघड़िये
समय चौघड़िया फल
17:39 – 19:17 उद्बेग अस्थिरता
19:17 – 20:55 शुभ मनोकामना पूर्ति
20:55 – 22:33 अमृत उत्तम लाभ
22:33 – 00:11 चर यात्रा उपयुक्त
00:11 – 01:49 रोग विवाद से दूर रहें
01:49 – 03:27 काल अशुभ समय
03:27 – 05:05 लाभ आर्थिक लाभ
05:05 – 06:43 उद्बेग सावधानी रखें
🌙 चंद्र बल
06:35 PM तक: वृषभ, कर्क, कन्या, तुला, मकर, कुंभ राशियों को लाभ
06:35 PM के बाद: मिथुन, सिंह, तुला, वृश्चिक, कुंभ, मीन राशियों को लाभ
🔮 दिन का विशेष उपाय
🕯️ “शिव का स्मरण और भैरव का ध्यान, मिटा देगा हर विघ्न का संधान।”
आज कालभैरव जयंती पर सरसों के तेल का दीपक दक्षिणमुखी दिशा में जलाएँ,
साथ ही “ॐ ह्रीं भैरवाय नमः” का 108 बार जप करें।
इससे जीवन में रुके कार्य पुनः गति पकड़ेंगे।
आज का भाव-संदेश
“जो समय का मान करता है, वही जीवन का सम्मान पाता है।
आज बुध की ऊर्जा और भैरव की शक्ति से अपने मन के भय को हराएँ क्योंकि हर दिन शुभ है, यदि शुरुआत श्रद्धा से हो।”

रोजाना इलायची चबाने से मिलते हैं ये 11 अद्भुत फायदे, जानिए क्यों कहा जाता है इसे मसालों की रानी

इलायची को यूं ही “मसालों की रानी” नहीं कहा जाता। इसकी अनोखी खुशबू और स्वाद के साथ-साथ इसमें ऐसे औषधीय गुण मौजूद हैं जो सेहत के लिए बेहद फायदेमंद हैं। प्राचीन आयुर्वेद से लेकर आधुनिक जीवनशैली तक, इलायची का इस्तेमाल शरीर को स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखने के लिए किया जाता रहा है। आइए जानते हैं, रोजाना इलायची चबाने से मिलने वाले 11 बड़े फायदे।

1. पाचन को मजबूत बनाती है

इलायची डाइजेशन सुधारने में मदद करती है। अगर आपको गैस, एसिडिटी या पेट भारी लगने की समस्या रहती है, तो खाना खाने के बाद एक इलायची चबाना फायदेमंद रहता है। यह पेट के एंजाइम्स को एक्टिव करती है जिससे खाना जल्दी पचता है।

2. मुंह की दुर्गंध दूर करती है

इलायची के एंटीबैक्टीरियल गुण मुंह के बैक्टीरिया को खत्म करते हैं और सांसों को ताजगी देते हैं। पुराने समय में लोग माउथ फ्रेशनर की जगह इलायची का सेवन करते थे।

3. दिल को रखती है स्वस्थ

इलायची के एंटीऑक्सीडेंट्स ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर करते हैं, ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखते हैं और कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम करते हैं। इससे हार्ट हेल्थ मजबूत होती है।

4. शरीर को करती है डिटॉक्स

इलायची एक नैचुरल डिटॉक्स एजेंट है जो शरीर से टॉक्सिन्स निकालती है। इससे लिवर और किडनी बेहतर तरीके से काम करते हैं। सुबह गर्म पानी के साथ इलायची लेना शरीर को अंदर से साफ करता है।

5. वजन घटाने में मददगार

इलायची मेटाबॉलिज्म बढ़ाती है और शरीर में जमा अतिरिक्त पानी को बाहर निकालती है। इससे ब्लोटिंग कम होती है और फैट बर्निंग तेज होती है।

6. ब्लड शुगर को नियंत्रित रखती है

इलायची ब्लड ग्लूकोज लेवल को बैलेंस करने में मदद करती है। डायबिटीज के मरीजों के लिए इसका नियमित सेवन फायदेमंद होता है।

7. इम्यून सिस्टम को बनाती है मजबूत

इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को संक्रमण से बचाते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।

8. त्वचा को बनाती है चमकदार

इलायची के डिटॉक्स गुण चेहरे की गंदगी हटाकर पिंपल्स कम करते हैं और त्वचा को नेचुरल ग्लो देते हैं।

9. मानसिक तनाव कम करती है

इलायची के नैचुरल कंपाउंड्स मूड को बेहतर बनाते हैं और तनाव दूर करते हैं। इलायची वाली चाय थकान मिटाने में मदद करती है।

10. सांस और गले की समस्याओं में राहत

इसके सूजनरोधी गुण खांसी, गले की खराश और सांस फूलने की दिक्कत को कम करते हैं। सर्दी-जुकाम के मौसम में इलायची वाली चाय बेहद फायदेमंद रहती है।

11. ऊर्जा बढ़ाती है

इलायची ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाकर शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई बेहतर करती है, जिससे एनर्जी लेवल बढ़ता है और शरीर एक्टिव महसूस करता है।


अगर आप छोटी-छोटी हेल्थ प्रॉब्लम्स से छुटकारा चाहते हैं, तो अपनी डाइट में रोजाना 1–2 इलायची जरूर शामिल करें। यह न सिर्फ स्वाद बढ़ाएगी बल्कि सेहत को भी अंदर से मजबूत करेगी।

ट्रंप का बड़ा बयान: विदेशी छात्रों को रोका तो अमेरिका की यूनिवर्सिटीज बंद हो जाएंगी

वॉशिंगटन (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विदेशी छात्रों को अमेरिका में पढ़ाई की अनुमति देने का जोरदार समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि अगर विदेशी छात्रों के दाखिले पर रोक लगाई गई, तो अमेरिका की कई यूनिवर्सिटीज बंद होने की कगार पर पहुंच जाएंगी।

फॉक्स न्यूज की एंकर लॉरा इंग्राहम से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “अगर आप दुनियाभर से आने वाले आधे छात्रों को रोक देंगे, तो हमारे कॉलेज और यूनिवर्सिटीज तबाह हो जाएंगे। बाहर के देशों के छात्रों का आना अच्छा है, क्योंकि यह न सिर्फ शिक्षा प्रणाली को मजबूत रखता है, बल्कि हमारी अर्थव्यवस्था के लिए भी फायदेमंद है।”

ट्रंप ने दावा किया कि चीन और अन्य देशों से छात्रों की संख्या घटाने से अमेरिका की आधी यूनिवर्सिटीज बंद हो सकती हैं। उनके मुताबिक, विदेशी छात्र अमेरिकी अर्थव्यवस्था में ट्रिलियंस डॉलर का योगदान करते हैं और स्थानीय छात्रों की तुलना में दोगुनी फीस चुकाते हैं। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ छात्रों को बुलाने की बात नहीं है, बल्कि यह हमारे लिए एक मजबूत बिजनेस मॉडल भी है।”

इस बयान के बावजूद, ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के वीजा नियम सख्त कर दिए हैं। हजारों वीजा रद्द किए गए हैं और कुछ विदेशी छात्रों को प्रो-पैलेस्टाइन गतिविधियों के कारण गिरफ्तार या निर्वासित भी किया गया है।

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जब इंग्राहम ने सुझाव दिया कि विदेशी छात्रों की संख्या घटाने से अमेरिकी छात्रों को अधिक मौके मिलेंगे, तो ट्रंप ने असहमति जताई। उन्होंने कहा कि ऐसा कदम छोटे कॉलेजों और ब्लैक हिस्टोरिकल यूनिवर्सिटीज के लिए नुकसानदायक साबित होगा।

इस बीच, विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस साल की शुरुआत में छात्र वीजा इंटरव्यू को अस्थायी रूप से रोकने का आदेश दिया था। अब प्रशासन कॉम्पैक्ट फॉर एकेडमिक एक्सीलेंस इन हायर एजुकेशन नामक नई नीति पर काम कर रहा है, जिसके तहत विदेशी छात्रों की संख्या कुल एडमिशन का 15% तक सीमित करने और किसी एक देश से 5% से अधिक छात्रों को अनुमति न देने की योजना है। कई शीर्ष संस्थानों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है।

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लाल किला विस्फोट: भारत में उभरती “व्हाइट कलर टेरर नेटवर्क” की नई रणनीति — जब आतंक ने बदली अपनी शक्ल

लाल किला धमाका-जब आतंक ने बदल ली अपनी शक्ल-भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए उभरती नई चुनौती

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर दिल्ली, जो भारत की आत्मा का प्रतीक है,सत्ता, संस्कृति, और सुरक्षा का संगम। जब इसी दिल में लाल किला जैसे ऐतिहासिक, संरक्षित और उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र में विस्फोट होता है,तो यह केवल एक “सुरक्षा चूक”नहीं रह जाता, यह राष्ट्रीय चेतना को झकझोर देने वाला संदेश बन जाता है। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब उस दौर में प्रवेश कर चुका है जहाँ आतंकवाद केवल बंदूकों और बमों से नहीं,बल्कि ब्रेनवॉश, बौद्धिक आतंक और साइकोलॉजिकल रिक्रूटिंग के जरिए अपना विस्तार कर रहा है।यह धमाका उस नए युग की शुरुआत का संकेत है जिसमें आतंकी नेटवर्क ने पारंपरिक रणनीतियों को त्याग कर,सॉफ्ट टेररिज़्म यानी मानसिक और वैचारिक आतंकवाद की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं कि आज भारत एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। एक ओर वह डिजिटल और वैचारिक शक्ति का केंद्र बन रहा है, दूसरी ओर वही क्षेत्र आतंक के व्हाइट-कलर अवतार का मैदान भी बनता जा रहा है।लाल किला विस्फोट इस नई वास्तविकता की सबसे भयावह चेतावनी है, कि आतंक अब हमारी सीमाओं के बाहर नहीं,बल्कि हमारे विश्वविद्यालयों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और दफ्तरों के भीतर प्रवेश कर चुका है।इसलिए भारत को अब पारंपरिक नेशनल सिक्योरिटी पॉलिसी के साथ एक नेशनल माइंड- सिक्योरिटी पॉलिसी भी तैयार करनी होगी,जो शिक्षा, सूचना, साइबर और वैचारिक सुरक्षा को एक समग्र रणनीति में जोड़े आख़िरकार, जब आतंकी हथियारों से नहीं, विचारों से हमला करते हैं,तो देश को भी केवल सुरक्षा बलों से नहीं, बल्कि सतर्क नागरिकों, जागरूक संस्थानों और सशक्त विचारधारा से जवाब देना होगा। यही उस अदृश्य युद्ध का सटीक प्रतिकार होगा जो आज भारत के मस्तिष्क पर लड़ी जा रही है।

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साथियों बात अगर हम लाल किला विस्फोट,एक प्रतीकात्मक हमला,एक गहरी साजिश को समझने की करें तो,लाल किला केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि भारतीय गणराज्य की गरिमा का प्रतीक है। जब इस धरोहर को निशाना बनाया गया, तो इसका उद्देश्य केवल भय फैलाना नहीं बल्कि भारत की आत्मा पर प्रहार करना था।प्रारंभिक जांच से यह संकेत मिले कि इस हमले की योजना अत्यधिक शिक्षित, सामाजिक रूप से प्रतिष्ठित और प्रोफेशनल लोगों ने तैयार की थी,यानी वह वर्ग, जिसे अब तक समाज सम्मानित नागरिक कहता आया है। यहीं से इस घटना की गंभीरता कई गुना बढ़ जाती है।यह केवल आतंकवाद नहीं, बल्कि व्हाइट कलर टेरर नेटवर्क का उदाहरण है,एक ऐसा नेटवर्क जो हथियार नहीं, बल्कि विचार, शिक्षा, तकनीक और मनोविज्ञान को हथियार बनाता है। इस नेटवर्क का खतरनाक पहलू यह है कि यह समाज की मुख्यधारा में रहकर, उसी के ताने-बाने को भीतर से नष्ट करता है।

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साथियों बात अगर हम व्हाइट कलर टेरर नेटवर्क, विश्वविद्यालय और पेशेवर संस्थान आतंकवाद की नई पोशाक को समझने की करें तो, पारंपरिक आतंकवाद में बंदूक, विस्फोटक और गुप्त ठिकाने शामिल होते थे, लेकिन अब यह युग समाप्त हो रहा है। नई पीढ़ी का आतंकवाद व्हाइट कॉलर हो गया है,यानी वो लोग जो शिक्षित हैं,डॉक्टर हैं, प्रोफेसर हैं, इंजीनियर हैं, आईटी एक्सपर्ट हैं।ये लोग किसी सीमा पार के कैंप में नहीं,बल्किविश्वविद्यालयों, डिजिटल प्लेटफॉर्मों और थिंक टैंकों के माध्यम से भर्ती किए जाते हैं। यह आतंकवाद अब रॉकेट लांचर से नहीं, बल्कि री- प्रोग्राम किए गए माइंड से काम लेता है।व्हाइट कलर टेरर नेटवर्क की यह अवधारणा आज के समय में वैश्विक स्तर पर सबसे खतरनाक मानी जा रही है। अमेरिका में लोन वुल्फ टेररिज़्म, यूरोप में स्लीपर सेल प्रोफेशनल्स और दक्षिण एशिया में इंटेलेक्चुअल रेडिकलिज़्म,यह सब एक ही श्रेणी में आते हैं।भारत में यह मॉडल धीरे-धीरे सक्रिय हुआ है,खासतौर पर सोशल मीडिया, डार्क वेब और विश्वविद्यालय परिसरों के जरिए। विश्वविद्यालय और पेशेवर संस्थान,वैचारिकरेडिकलाइजेशन के नए ठिकाने-लाल किला विस्फोट के संदिग्धों में कुछ विश्वविद्यालय- शिक्षित लोग शामिल होना कोई संयोग नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में यह देखा गया है कि भारत के कुछ शैक्षणिक संस्थानों में विचारधारात्मक चरमपंथ ने धीरे- धीरे जड़ें जमाई हैं।कट्टरपंथी संगठन अब हथियारों की बजाय ब्रेनवॉशिंग पर अधिक निवेश कर रहे हैं। वे छात्रों को सिस्टम के खिलाफ, राज्य के विरोध में और सांस्कृतिक अस्मिता से दूर करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।विश्वविद्यालयों का माहौल जहां स्वतंत्र चिंतन का केंद्र होना चाहिए वहीं कुछ स्थानों पर यह सॉफ्ट रिक्रूटमेंट जोन में बदल गया है। ये युवा न तो सीधे आतंक मेंशामिल होते हैं, न ही हथियार उठाते हैं, बल्कि वे वैचारिक वाहक बन जाते हैं,जो आगे चलकर साइकोलॉजिकल टेरर के वाहक होते हैं।

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साथियों बात अगर हम सोशल मीडिया,आतंक का नया भर्ती तंत्र व बौद्धिक आतंकवाद को समझने की करें तो, 21वीं सदी का आतंकवाद अब जंगलों या पहाड़ों में नहीं, बल्कि मोबाइल स्क्रीन और चैट ग्रुपों में पलता है।लाल किला विस्फोट की जांच में सामने आया कि कुछ अभियुक्तों की ऑनलाइन इंडोक्ट्रीनेशन विदेशी प्रोफाइलों के माध्यम से की गई थी।यह नेटवर्क“डिजिटल स्लीपर सेल्स” की तरह काम करता है जहाँ व्यक्ति सामान्य नागरिक की तरह दिखता हैपर धीरे- धीरे उसे चरमपंथ की विचारधारा में खींच लिया जाता है।साइकोलॉजिकल टेररिज़्म का यह डिजिटल चेहरा वैश्विक है। सीरिया, अफगानिस्तान, और अफ्रीका से लेकर यूरोप और अब भारत तक,यह नेटवर्क डिजिटल जिहाद, साइबर रिक्रूटमेंट और फेक नरेटिव प्रोपेगेंडा के माध्यम से युवाओं को जोड़ रहा है।भारत में भी इस खतरे के संकेत स्पष्ट हैं। इसलिए यह जरूरी है कि सरकार केवल फिजिकल टेररिज़्म पर नहीं,बल्कि साइबर-सोशल रेडिकलाइजेशन पर भी कठोर निगरानी रखे।बौद्धिक आतंकवाद,जब शब्द बनते हैं हथियार- आधुनिक आतंकवाद का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि यह अब केवल गोली से नहीं, बल्कि “विचार” से भी हत्या करता है।यह वही स्थिति है जब शिक्षित, सभ्य और प्रतिष्ठित लोग, अपने विचारों के माध्यम से युवाओं के मन में नफरत, विभाजन और हिंसा का बीज बो देते हैं।इसे ही सुरक्षा विशेषज्ञ बौद्धिक आतंकवाद या इंटेलेक्चुअल रेडिकलिज़्म कहते हैं।लाल किला विस्फोट इसी प्रवृत्ति की परिणति है,जहां विचारधारा ने विस्फोटक का रूप ले लिया। आतंक अब उन विश्वविद्यालयों और प्रोफेशनल सर्किलों में पैठ बना रहा है जहां सोचने-समझने की शक्ति को हथियार बना दिया गया है।इस स्थिति से निपटने के लिए केवल सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका पर्याप्त नहीं, समाज, शिक्षा प्रणाली और परिवारों को भी जागरूक होना होगा।
साथियों बात अगर हम वैश्विक संदर्भ, सुरक्षा तंत्र की चुनौती, दुनियाँ में बढ़ता व्हाइट कलर टेररिज़्म को समझने की करें तो,लाल किला विस्फोट कोई अलग घटना नहीं है; यह उसी श्रृंखला का हिस्सा है जो यूरोप, अमेरिका और एशिया के कई देशों में देखी जा रही है।अमेरिका में 9/11 के बाद यह महसूस किया गया कि कुछ उच्च शिक्षित इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों ने इस हमले की योजना बनाई थी।इसी तरह ब्रिटेन में 2005 का लंदन ब्लास्ट और फ्रांस में 2015 का पेरिस अटैक,दोनों में ऐसे लोग शामिल थे जो उच्च शिक्षित और सामाजिक रूप से प्रतिष्ठित थे।यह प्रवृत्ति बताती है कि आतंकवाद अब गरीबी,अशिक्षा या बेरोजगारी से नहीं, बल्कि विचारधारात्मक हाइजैकिंग से पैदा हो रहा है।भारत के लिए यह एक गंभीर चेतावनी है कि यदि समय रहते इस दिशा में वैचारिक और डिजिटल सुरक्षा नहीं बढ़ाई गई, तो आने वाले वर्षों में इंटेलेक्चुअल टेररिज़्म सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है।सुरक्षा तंत्र की चुनौती,जब दुश्मन हमारे भीतर हो-भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह नई परिस्थिति सबसे कठिन है।पहले आतंकवादी सीमाओं के पार से आते थे,पर अब वह हमारे बीच रहकर हमारे जैसा जीवन जीते हुए, हमारे खिलाफ साजिश रचते हैं।ऐसे में पारंपरिक खुफिया प्रणाली पर्याप्त नहीं रह जाती।सुरक्षा तंत्र को अब साइकोलॉजिकल प्रोफाइलिंग, इंटेलेक्चुअल सर्विलांस और डिजिटल पैटर्न एनालिसिस जैसे आधुनिक तरीकों का उपयोग करना होगा।इसके साथ ही, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, विश्वविद्यालय प्रशासन और कॉरपोरेट संस्थानों को भी सुरक्षा साझेदार बनाना होगा।“नेशनल सेक्योरिटी अब केवल पुलिस या इंटेलिजेंस एजेंसी का विषय नहीं रहा;यह अब वैचारिक, तकनीकी और सामाजिक सुरक्षा का संयुक्त फ्रेमवर्क है।सॉफ्ट रेडिकलाइजेशन, सबसे छिपा, सबसे खतरनाक रूप-सॉफ्ट रेडिकलाइजेशन वह प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति को धीरे-धीरे, बिना किसी हिंसक प्रशिक्षण के, वैचारिक रूप से चरमपंथी बना दिया जाता है,यह प्रक्रिया महीनों नहीं, बल्कि वर्षों में होती है,और व्यक्ति को अहसास तक नहीं होता कि वह एकविचारधारात्मक सैनिक बन चुका है।लाल किला धमाका इसी सॉफ्ट रेडिकलाइजेशन की परिणति है।यह हमें बताता है कि आतंकी अब गोलियों की नहीं, बल्कि क्लिक की दुनिया में रहते हैं।इसलिए सुरक्षा एजेंसियों को इस अदृश्य आतंक”को पहचानने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग और डाटा एनालिटिक्स का उपयोग बढ़ाना होगा। साथियों बात अगर हम समाधान, विचार, निगरानी और समाज की सजगता को समझने की करें तो,अब सवाल यह है कि इससे निपटा कैसे जाए?सबसे पहले, राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में सॉफ्ट रेडिकलाइजेशन मॉनिटरिंग को एक स्वतंत्र अध्याय के रूप में शामिल करना होगा।दूसरा, विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में “राष्ट्रीय सुरक्षा चेतना पाठ्यक्रम” लागू किए जा सकते हैं, ताकि छात्र यह समझ सकें कि विचारों का दुरुपयोग कैसे हो सकता है।तीसरा,सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को कानूनी रूप से बाध्य किया जाए कि वे ऐसे सटीक डिजिटल नेटवर्क का डेटा सरकार से साझा करें जो वैचारिक कट्टरता फैला रहे हैं।चौथा,समाज में परिवार स्तर पर संवाद बढ़ाया जाए क्योंकि अधिकांश ब्रेनवॉशिंग तब होती है जब व्यक्ति अकेला या मानसिक रूप से असुरक्षित होता है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि लाल किला विस्फोट का सबक, लाल किला विस्फोट ने हमें यह याद दिलाया है कि भारत की सुरक्षा अब केवल सीमा की नहीं, विचार की भी लड़ाई है।जब शिक्षित, सभ्य और सम्मानित व्यक्ति आतंक का औजार बन जाता है, तब यह केवल खुफिया विफलता नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना की हार होती है।इसलिए यह आवश्यक है कि भारत एक ऐसी नीति बनाए जिसमें कठोर सुरक्षा उपायों के साथ- साथ वैचारिक जागरूकता, डिजिटल अनुशासन और बौद्धिक जिम्मेदारी को भी राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा माना जाए।लाल किला का यह घाव हमें यह सिखाता है कि दिल्ली की सुरक्षा केवल पुलिस की नहीं, बल्कि हर नागरिक की वैचारिक सतर्कता पर निर्भर है।यह एक ऐसा दौर है जब हथियारों से नहीं, विचारों से लड़ाई लड़ी जा रही है,और इस युद्ध में भारत को ज्ञान, विवेक और सजगता से ही विजय प्राप्त करनी होगी।आज की सबसे बड़ी जंग मनुष्य के मन में लड़ी जा रही है,और जो अपने विचारों की रक्षा कर लेगा, वही राष्ट्र की रक्षा करेगा।

संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

14 साल बाद फिर हिली दिल्ली, डर और सुरक्षा के बीच सवालों का विस्फोट

दिल्ली, देश की राजधानी, सत्ता का केंद्र और विविधता का प्रतीक। लेकिन जब इसी शहर में 14 साल के लंबे अंतराल के बाद फिर से बम विस्फोट की गूंज सुनाई देती है, तो यह केवल एक घटना नहीं होती, बल्कि कई सवालों का विस्फोट भी साथ लाती है—क्या हमारी सुरक्षा व्यवस्था केवल दिखावे तक सीमित है? क्या खुफिया एजेंसियों की सतर्कता सुस्त पड़ी है? और सबसे अहम, क्या नागरिक अब भी ‘सुरक्षित’ महसूस कर सकते हैं?
14 साल पहले दिल्ली ने वह भयावह शाम देखी थी जब कुछ मिनटों में कई धमाकों ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया था। तब भी जांच एजेंसियों ने ‘सुरक्षा में चूक’ की बात कही थी, और आज फिर वही शब्द गूंज रहे हैं। फर्क बस इतना है कि तब यह नई चिंता थी, अब यह ‘सिस्टम की पुरानी बीमारी’ बन चुकी है।
वर्तमान विस्फोट को लेकर प्रारंभिक जांच बताती है कि यह योजनाबद्ध था, स्थान, समय और तरीका सबकुछ सोच-समझकर चुना गया। यह इस बात का संकेत है कि आतंकी मानसिकता अब भी सक्रिय है और उसने एक बार फिर यह परखने की कोशिश की है कि दिल्ली कितनी सतर्क है। दुर्भाग्य यह कि जवाब उम्मीद से कमजोर साबित हुआ।
भारत ने बीते वर्षों में तकनीकी निगरानी, सीसीटीवी नेटवर्क और खुफिया सूचना तंत्र में बहुत निवेश किया है। लेकिन जब भी इस तरह की घटना घटती है, यह साफ हो जाता है कि हमारी सुरक्षा की दीवार में कहीं न कहीं दरार अब भी मौजूद है। यह दरार केवल तकनीकी नहीं, बल्कि प्रशासनिक, राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी है।
सुरक्षा का सवाल केवल पुलिस या खुफिया एजेंसियों तक सीमित नहीं होना चाहिए। समाज को भी चौकस रहना होगा। संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देना, भीड़भाड़ वाले इलाकों में सजग रहना और अफवाहों से बचना—ये छोटी-छोटी बातें बड़ी त्रासदियों को रोक सकती हैं।
लेकिन साथ ही यह भी जरूरी है कि ऐसी घटनाओं को केवल ‘आतंकवाद’ के चश्मे से न देखा जाए। इसके पीछे अगर कोई स्थानीय असंतोष, साइबर नेटवर्क या किसी विदेशी एजेंसी की चाल है, तो उसकी तह तक जाना भी उतना ही आवश्यक है। हमें केवल ‘कौन’ नहीं, बल्कि ‘क्यों’ का जवाब भी तलाशना होगा।
14 साल बाद यह विस्फोट हमें फिर याद दिलाता है कि आतंक कभी पूरी तरह खत्म नहीं होता, वह बस अवसर की प्रतीक्षा करता है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि उस अवसर को हम खुद अपने ढीलेपन से पैदा न करें।
अब वक्त है कि सुरक्षा का तंत्र केवल ‘घटना के बाद’ नहीं, बल्कि ‘घटना से पहले’ सक्रिय हो। जांच एजेंसियों को राजनीतिक दबावों से मुक्त कर, आधुनिक तकनीक और जिम्मेदारी दोनों से लैस करना होगा। और नागरिकों को भी समझना होगा कि सुरक्षा किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं, यह एक साझा कर्तव्य है।
अंत में, दिल्ली का यह ताजा धमाका सिर्फ विस्फोट नहीं, एक चेतावनी है, हमारा डर तभी समाप्त होगा जब सुरक्षा केवल नीति नहीं, संस्कृति बन जाएगी।

महामना मदन मोहन मालवीय: भारत की आत्मा के शिल्पी

नवनीत मिश्र
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अनेक ऐसे महान व्यक्तित्व हुए जिन्होंने अपने विचारों, कर्मों और चरित्र से राष्ट्र के निर्माण में अमिट योगदान दिया। उन महान विभूतियों में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय का नाम अत्यंत आदर और श्रद्धा के साथ लिया जाता है। वे केवल एक राजनेता या शिक्षाविद ही नहीं, बल्कि भारत की आत्मा को स्वर देने वाले एक युगपुरुष थे — जिनकी दृष्टि में राष्ट्र केवल भूभाग नहीं, बल्कि एक जीवंत संस्कृति, सभ्यता और मानवीय मूल्यों की समग्र अभिव्यक्ति था।
मदन मोहन मालवीय का जन्म 25 दिसंबर 1861 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में एक विद्वान ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनके पिता पंडित ब्रजनाथ मालवीय संस्कृत के प्रसिद्ध कथा-वाचक थे। घर के धार्मिक और सांस्कृतिक वातावरण ने बालक मदन मोहन के व्यक्तित्व को प्रारंभ से ही गढ़ना शुरू कर दिया। वे अध्ययनशील, विनम्र और तेजस्वी बालक थे। प्रारंभिक शिक्षा संस्कृत पाठशालाओं में हुई, तत्पश्चात उन्होंने इलाहाबाद के एम.ए.ओ. कॉलेज (वर्तमान अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय) और बाद में कलकत्ता विश्वविद्यालय से अपनी उच्च शिक्षा पूरी की।
मालवीय जी का मानना था कि “शिक्षा केवल रोजगार प्राप्ति का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्रनिर्माण का आधार है।” इसी विचार से प्रेरित होकर उन्होंने 1916 में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना की। यह केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि भारत के सांस्कृतिक और वैज्ञानिक पुनर्जागरण का केंद्र बना। उन्होंने आधुनिक विज्ञान, तकनीकी शिक्षा और भारतीय संस्कृति को एक साथ जोड़ने का सपना देखा था और बीएचयू उस सपने की मूर्त प्रतिमा बन गया।
मालवीय जी एक सशक्त पत्रकार भी थे। उन्होंने हिन्दुस्थान, द इंडियन यूनियन और लीडर जैसे अखबारों के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना जगाने का कार्य किया। उन्होंने पत्रकारिता को ‘सत्य और राष्ट्रहित की साधना’ माना, न कि केवल विचारों की राजनीति।
मदन मोहन मालवीय भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के चार बार अध्यक्ष रहे, 1909, 1918, 1930 और 1932 में। वे स्वदेशी आंदोलन, असहयोग आंदोलन और नमक सत्याग्रह के समर्थक रहे, किंतु उनका मार्ग हमेशा संयम, नैतिकता और अहिंसा से प्रेरित रहा। उन्होंने 1919 के जलियांवाला बाग नरसंहार के बाद ब्रिटिश सरकार की कठोर आलोचना की और इस घटना को भारत के आत्मसम्मान पर गहरी चोट बताया। मालवीय जी का योगदान केवल आंदोलन तक सीमित नहीं था; उन्होंने हिन्दू महासभा की स्थापना कर सामाजिक एकता और धर्मनिरपेक्ष नैतिकता का सूत्र प्रस्तुत किया। उनकी यह उक्ति आज भी प्रासंगिक है “राजनीति में नैतिकता का अभाव राष्ट्र को खोखला कर देता है।”
मालवीय जी का जीवन भारतीय संस्कृति के “सर्वे भवंतु सुखिनः” के आदर्श पर आधारित था। वे जाति, संप्रदाय और धर्म के आधार पर समाज को विभाजित करने के विरोधी थे। उन्होंने महिला शिक्षा, अस्पृश्यता उन्मूलन और ग्रामीण स्वावलंबन के पक्ष में अनेक प्रयास किए। उनकी दृष्टि में भारतीय संस्कृति का सार थाl संयम, सहिष्णुता और आत्मबल। उन्होंने हिंदू धर्म के सनातन मूल्यों को आधुनिकता से जोड़ने का अद्भुत प्रयास किया, जिससे वे ‘संस्कृति और प्रगति’ के बीच सेतु बन गए।
मालवीय जी की वाणी में अद्भुत ओज था। कहा जाता है कि उनका भाषण सुनकर ब्रिटिश अधिकारी तक प्रभावित हो जाते थे। वे संस्कृत, हिंदी और अंग्रेजी के ज्ञाता थे, और हर भाषा में उनका वक्तव्य ज्ञान और शालीनता से भरा होता था। उनके शिष्य और समकालीन लोग कहते थे “मालवीय जी ने जो कहा, वही जिया।” उनका जीवन पारदर्शी और नैतिकता का उदाहरण था। इसी कारण लोकमान्य तिलक ने उन्हें “महामना” की उपाधि दी अर्थात् “महान आत्मा वाले व्यक्ति।”
उनके अमूल्य योगदान की मान्यता स्वरूप भारत सरकार ने वर्ष 2014 में उन्हें मरणोपरांत ‘भारत रत्न’ देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से अलंकृत किया। आज बीएचयू, जो एशिया का सबसे बड़ा आवासीय विश्वविद्यालय है, मालवीय जी की दृष्टि और समर्पण का जीवंत स्मारक है। भारतीय शिक्षा प्रणाली में उनकी सोच आज भी मार्गदर्शक हैl कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञानार्जन नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और राष्ट्र सेवा है।
उनकी विरासत आज के भारत में हर उस नागरिक में जीवित है जो सच्चाई, संयम और राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानता है। महामना मदन मोहन मालवीय का जीवन हमें यह सिखाता है कि सच्चा राष्ट्रनिर्माण केवल राजनीति या आंदोलन से नहीं, बल्कि चरित्र, शिक्षा और सेवा के समन्वय से होता है। वे एक ऐसे महामानव थे जिन्होंने न तो सत्ता का मोह किया, न पद की लालसा, उनका एकमात्र ध्येय था “भारत माता की सेवा।”
“महामना” केवल एक उपाधि नहीं, बल्कि एक जीवनदर्शन हैl जो आज भी हर भारतीय के लिए प्रेरणास्रोत है।

रफ्तार फिर बनी कहर अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहा दोनों बाइक चालक व सवार

भाटपार रानी में दर्दनाक सड़क हादसा — दो बाइकों की आमने-सामने टक्कर, चार घायल, एक की हालत नाजुक

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा) डेस्क)।
जनपद देवरिया के भाटपार रानी थाना क्षेत्र में बुधवार की रात एक भीषण सड़क दुर्घटना में चार युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा पीएसी शराब भट्टी और भारत गैस एजेंसी बेलपार पंडित डाला के पास हुआ, जब दो बाइकों की आमने-सामने जोरदार टक्कर हो गई।

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प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दोनों बाइकों की रफ्तार काफी तेज थी। अचानक सामने से आती बाइक को देखकर चालक संभल नहीं सका और दोनों वाहन आपस में भीषण रूप से टकरा गए। हादसे के बाद मौके पर अफरातफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी और घायलों को एंबुलेंस की मदद से भाटपार रानी सीएचसी पहुंचाया।

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डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद चारों घायलों की हालत गंभीर देखते हुए देवरिया मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। सूत्रों के अनुसार, घायलों में एक चालक की स्थिति नाजुक बताई जा रही है। वहीं पुलिस ने दोनों बाइकों को कब्जे में लेकर हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस सड़क पर लगातार तेज रफ्तार वाहन दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। क्षेत्रवासी प्रशासन से इस मार्ग पर स्पीड ब्रेकर और स्ट्रीट लाइट लगाने की मांग कर रहे हैं ताकि ऐसी दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सके।

यह घटना न सिर्फ सड़क सुरक्षा पर सवाल खड़ा करती है बल्कि बेपरवाह रफ्तार की उस हकीकत को भी उजागर करती है जो हर दिन किसी न किसी परिवार की खुशियां छीन लेती है।

संघर्ष से ही मिलेगा न्याय — देवरिया में पेंशनर्स की प्रभावशाली बैठक

देवरिया में गूंजी पेंशनरों की आवाज़ — मेडिकल क्लेम और जीवित प्रमाण पत्र की समस्या पर हुई गंभीर चर्चा

“बिना संघर्ष कुछ नहीं मिलता — संगठन ही है असली शक्ति”

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।उत्तर प्रदेश पेंशनर्स कल्याण संस्था, देवरिया की मासिक बैठक आज संस्था भवन, कलेक्ट्रेट परिसर में गरिमामयी वातावरण में सम्पन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता संस्था अध्यक्ष श्रीराम त्रिपाठी ने की, जबकि संचालन मंत्री लालसा यादव ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ श्री समनिवास मणि द्वारा सरस्वती वंदना से हुआ।

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बैठक में पेंशनरों की मेडिकल क्लेम, जीवित प्रमाण पत्र की ऑनलाइन व्यवस्था तथा विभिन्न विभागों में लंबित एरियर और भुगतान जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन चर्चा की गई।
अध्यक्ष श्रीराम त्रिपाठी ने कहा कि पेंशनरों की समस्याओं के निस्तारण में विभागीय लापरवाही स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि कोषागार द्वारा जीवित प्रमाण पत्र की ऑनलाइन व्यवस्था बंद करने से वरिष्ठ नागरिकों में व्यापक असंतोष है, जिसके समाधान हेतु संस्था आंदोलन करने को बाध्य होगी।

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वरिष्ठ उपाध्यक्ष एस.के. भौमिक ने कहा — “बिना संघर्ष के कोई अधिकार नहीं मिला है, न मिलेगा। संगठन को मजबूत करना ही सफलता की कुंजी है।”
मंत्री लालसा यादव ने कहा कि शिक्षा, सिंचाई, चिकित्सा आदि विभागों में कर्मचारियों के एरियर एवं मेडिकल क्लेम के प्रकरण वर्षों से लंबित हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना काल के 18 माह का बकाया अब तक भुगतान नहीं हुआ है, जिसके लिए संस्था निरंतर संघर्ष कर रही है।

संयुक्त मंत्री दिग्विजय नाथ सिंह ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए रेल किराए की छूट समाप्त करना दुर्भाग्यपूर्ण है। संगठन मंत्री रामबिलास मणि ने कहा कि सरकारी कार्यालयों में दैनिक, संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के बीच असमानता बढ़ रही है, जिसे दूर करने के लिए संयुक्त संघर्ष आवश्यक है।

सभा को कोषाध्यक्ष शिवदत्त पाठक, उपाध्यक्ष हरेन्द्र मिश्र, तारकेश्वर मणि, प्रचार मंत्री अशोक कुमार कुशवाहा, विजयवैहादुर, सुदागा तिवारी (ज्वाइंट कमिश्नर), मथुरा प्रसाद, अनिल कुमार पाण्डेय, उपेन्द्र पाण्डेय आदि ने भी सम्बोधित किया।

बैठक में बड़ी संख्या में पेंशनर्स उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से —
कामेश्वर पाण्डेय, जफर मंसूर, हर्षचन्द सिंह, राममोहन सिंह, कैलाश प्रसाद, रागनगीना सिंह, धीरेन्द्र लाल श्रीवास्तव, राजबसन्त विश्वकर्मा, रमाकान्त श्रीवास्तव, जीतबन्धन पाण्डेय, रमाशंकर वर्मा, सीताराम यादव, जयराम सिंह, इजहार अहमद सिद्दीकी, प्रेमशंकर दूबे, दिलीप कुमार गुप्त, हरिहर यादव, जीउत प्रसाद, राजमंगल सिंह, कृष्णदेव पाण्डेय, श्रीनारायण सिंह, हरिप्रसाद राजपुर, गो० इब्राहिम, आर०के० गिश्र आदि शामिल रहे।

अंत में संस्था के अध्यक्ष श्रीराम त्रिपाठी ने सभी उपस्थित सम्मानित सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया और संगठन की एकता, संघर्ष तथा पेंशनरों के अधिकारों की रक्षा के संकल्प के साथ सभा का समापन किया।

रामलीला में हुआ ताड़का वध, जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा पूरा पंडाल

शाहजहांपुर (राष्ट्र की परम्परा)।
जैतीपुर कस्बे में चल रहे श्रीराम जानकी रामलीला महोत्सव में मंगलवार की रात ताड़का वध की अद्भुत लीला का मंचन हुआ। भगवान श्रीराम के पराक्रम और धर्म की विजय का यह दृश्य देखकर पूरा पंडाल जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा।

रामलीला के मंचन में दिखाया गया कि राजा दशरथ के दरबार में महर्षि विश्वामित्र पहुंचे और उन्होंने राक्षसों के बढ़ते अत्याचारों का वर्णन करते हुए श्रीराम और लक्ष्मण को अपने साथ वन चलने का अनुरोध किया। दशरथ ने धर्म और ऋषि सेवा के भाव से अपने दोनों पुत्रों को महर्षि के साथ भेज दिया।

विश्वामित्र दोनों राजकुमारों को घनघोर दंडक वन में लेकर गए, जहाँ राक्षसी ताड़का का वास था। ताड़का ऋषि-मुनियों के यज्ञों में विघ्न डालती थी और अत्याचार करती थी, जिससे पूरा वन क्षेत्र भयभीत था।

जैसे ही भगवान श्रीराम और ताड़का आमने-सामने हुए, भीषण युद्ध का दृश्य प्रस्तुत किया गया। रामजी के बाणों से ताड़का का अंत होते ही दर्शक जयघोष करने लगे — “जय श्रीराम! जय श्रीराम!” पूरे पंडाल में भक्तिमय माहौल छा गया।

रामलीला मंचन में कलाकारों ने भावपूर्ण अभिनय कर उपस्थित भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। हर कोई भगवान राम की मर्यादा और धर्म रक्षा के संदेश से प्रेरित नजर आया। आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि आगामी दिनों में मंथन, सीता स्वयंवर और राम वन गमन जैसे प्रसंगों का मंचन किया जाएगा।

नगर पालिका अध्यक्ष की मान-सम्मान पर चोट — सोशल मीडिया पर अमर्यादित टिप्पणी करने वाला गिरफ्तार, भेजा गया जेल

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों के बीच एक महिला जनप्रतिनिधि के सम्मान से जुड़ा मामला सुर्खियों में है। नगर पालिका परिषद गौरा बरहज की अध्यक्ष श्वेता जायसवाल पर सोशल मीडिया के माध्यम से अमर्यादित टिप्पणियाँ करने के आरोप में पुलिस ने तिवारीपुर निवासी दिलीप कुमार को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहाँ से उसे जेल भेज दिया गया।

सूत्रों के अनुसार, आरोपित दिलीप कुमार पिछले दो वर्षों से लगातार नगर पालिका ।अध्यक्ष श्वेता जायसवाल और उनके पति पर सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणियाँ कर रहा था। इस कृत्य से अध्यक्ष की सामाजिक प्रतिष्ठा और व्यक्तिगत गरिमा को गहरी ठेस पहुँची।

अध्यक्ष ने सोमवार को स्थानीय थाने में तहरीर देकर न्याय की गुहार लगाई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी के खिलाफ आईटी एक्ट और मानहानि से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया। जांच के उपरांत पुलिस टीम ने उसे उसके घर से गिरफ्तार कर लिया।

थानाध्यक्ष ने बताया कि साइबर प्लेटफॉर्म पर किसी की मानहानि, चरित्र हनन या असत्य प्रचार करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसे अपराध समाज में विष घोलते हैं और प्रशासन इस तरह की हरकतों को बर्दाश्त नहीं करेगा।

इस घटना ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि सोशल मीडिया अभिव्यक्ति का माध्यम है, अपमान का नहीं। महिला जनप्रतिनिधियों के सम्मान की रक्षा के लिए प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

शक्ति का सदुपयोग करें, वरना मानव से दानव बनता है — डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र

कपरवार/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।
स्थानीय कपरवार गांव में चल रहे श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ में कथाव्यास डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने श्रद्धालुओं को प्रवचन सुनाते हुए कहा कि शक्ति का दुरुपयोग मनुष्य को देव से दैत्य बना देता है। उन्होंने कहा कि “देव बनो या दैत्य, यह सब अपने कर्मों पर निर्भर करता है।” जो व्यक्ति दूसरों की संपत्ति पर अधिकार जमाकर, अपनी शक्ति का दुरुपयोग करते हुए प्राणिमात्र को कष्ट पहुँचाता है, वही दैत्य कहलाता है।

कथाव्यास ने हिरण्याक्ष और हिरण्यकशिपु के प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि जब भगवान वाराह ने हिरण्याक्ष का वध किया तो उसके परिवारजन शोक में डूब गए। तब हिरण्यकशिपु ने उन्हें समझाया कि “जिसका जन्म हुआ है, उसकी मृत्यु निश्चित है।” इसके बाद हिरण्यकशिपु ने मंदराचल पर्वत पर जाकर कठोर तपस्या की और ब्रह्मा जी से अमरत्व का वरदान माँगा।

ब्रह्मा जी ने कहा कि जो जन्म लेता है उसकी मृत्यु निश्चित है, इसलिए कुछ और वर माँगिए। तब हिरण्यकशिपु ने मांगा कि वह न रात में मरे, न दिन में, न धरती पर, न आकाश में, न घर के अंदर, न बाहर, न किसी अस्त्र-शस्त्र से और न किसी प्राणी या अप्राणी से। यह वरदान पाकर वह त्रिलोक का स्वामी बन बैठा।

लेकिन जब उसने अपने ही पुत्र प्रह्लाद, जो भगवान के परम भक्त थे, को मारने का प्रयास किया, तब भगवान नरसिंह स्तंभ (खंभे) से प्रकट होकर हिरण्यकशिपु का अंत कर दिया। डॉ. मिश्र ने कहा कि यह प्रसंग हमें यह सिखाता है कि अहंकार और शक्ति का दुरुपयोग अंततः विनाश का कारण बनता है।

कार्यक्रम में मुख्य यजमान सुरेंद्र प्रसाद गुप्त, राम अवध गुप्त, अनिल गुप्त, अरविंद कुमार, अनिल मिश्र, अमित मिश्र, श्रवण गुप्त सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भागवत कथा का रसपान किया।

बारिश से बर्बाद धान की फसल का नहीं मिला किसानों को मुआवजा — डीएम के कथन और कर्म में फर्क: कनकलता

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)।
हाल ही में हुई तेज वर्षा और मोंथा तूफान से जिले के कई किसानों की धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई, लेकिन अब तक किसानों को मुआवजा नहीं मिल सका है। इसको लेकर समाजवादी पार्टी की वरिष्ठ नेता एवं पूर्व राज्यसभा सांसद कनकलता सिंह ने जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी देवरिया की कथनी और करनी में स्पष्ट अंतर नजर आ रहा है। वे प्रशासनिक अधिकारी की बजाय राजनीतिक तौर पर कार्य कर रही हैं। कनकलता सिंह ने कहा कि एक पखवाड़ा पूर्व जब वर्षा और तूफान से किसानों की फसलें नष्ट हुई थीं, तब जिलाधिकारी ने सोशल मीडिया पर लाइव आकर किसानों के प्रति हमदर्दी जताते हुए मुआवजा देने का आश्वासन दिया था, लेकिन वह केवल दिखावा साबित हुआ।

उन्होंने कहा कि किसानों के सामने अब आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। रवि फसल की बुआई का समय आ गया है, लेकिन किसान खाद और बीज के लिए गोदामों का चक्कर काट रहे हैं। प्रशासन किसानों की समस्याओं पर गंभीर नहीं है और वर्तमान जनप्रतिनिधियों के इशारे पर काम कर रहा है।

पूर्व सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की विकास योजनाओं में बड़े पैमाने पर कमीशनखोरी की जा रही है, जबकि किसानों की वास्तविक समस्या पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

कनकलता सिंह ने मांग की कि बारिश और तूफान से बर्बाद धान की फसल का सर्वे कराकर किसानों को शीघ्र मुआवजा दिया जाए, ताकि वे समय से रवि फसल की बुआई कर सकें। साथ ही जिले के सभी गोदामों पर खाद और बीज की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन किसानों की समस्याओं पर जल्द कार्रवाई नहीं करता, तो समाजवादी पार्टी किसानों के साथ सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेगी और मुख्यमंत्री से मिलकर स्थिति से अवगत कराएगी।

मुख्यमंत्री नगर सृजन योजना के अंतर्गत मोहाव वार्ड में सीसी रोड निर्माण का लोकार्पण, जनता में खुशी की लहर

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।नगर पालिका परिषद गौरा बरहज के वार्ड संख्या 24 मोहाव में मुख्यमंत्री नगर सृजन योजना 2024-25 के अंतर्गत स्वीकृत कार्य रामप्रसाद यादव के मकान से छोटी पुलिया तक सीसी रोड निर्माण कार्य का लोकार्पण आज दिनांक 11 नवम्बर 2025 को नगर पालिका अध्यक्ष श्वेता जायसवाल द्वारा किया गया।लगभग ₹25,54,000.00 की लागत से बनने वाले इस सड़क निर्माण कार्य से वार्डवासियों को लंबे समय से चली आ रही समस्या से राहत मिलेगी।इस अवसर पर सभासद जसोदिया देवी, सभासद प्रतिनिधि मुरारी जायसवाल, अवर अभियंता, निर्माण लिपिक, जलकल प्रभारी, तथा नगर पालिका परिषद के नियमित, संविदा एवं आउटसोर्सिंग कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम स्थल पर बड़ी संख्या में वार्डवासी भी मौजूद रहे और नए निर्माण कार्य के लिए प्रसन्नता व्यक्त की।अध्यक्ष श्वेता जायसवाल ने इस महत्वपूर्ण कार्य की स्वीकृति प्रदान करने के लिए मा० मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मा० नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा, मा० ग्रामीण विकास राज्यमंत्री (भारत सरकार) कमलेश पासवान एवं मा० सांसद बांसगांव के प्रति आभार प्रकट करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।वार्ड की जनता ने इस पहल को विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए नगर पालिका प्रशासन का आभार जताया।