Wednesday, July 1, 2026
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डीएम की अध्यक्षता में समस्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक संपन्न

समस्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि जल्द से जल्द करें बी.एल.ए. की नियुक्ति

मऊ ( राष्ट्र की परम्परा ) बुधवार को जिलाधिकारी प्रवीण मिश्र की अध्यक्षता में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक संपन्न हुई। बैठक के दौरान समस्त राजनीतिक दलों के जिला अध्यक्ष एवं सचिव से एसआईआर के परिपेक्ष्य में बीएलए की नियुक्ति किए जाने के संबंध में चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने बताया कि विशेष गहन पुनरीक्षण मतदाता सूची में नाम की शुद्धता, नवीन पंजीकरण, विलोपन, सुधार एवं स्थानांतरण को सुनिश्चित करना है। इस प्रक्रिया में बीएलओ घर- घर जाकर सत्यापन का कार्य करते हैं एवं फॉर्म 6, 7 एवं 8 के माध्यम से नया नाम जोड़ना, हटना एवं सुधार करने की प्रक्रिया को पूर्ण करते हैं। जिलाधिकारी ने समस्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से कहा कि सभी लोग बी.एल.ए की नियुक्ति कर उसकी सूची जल्द से जल्द उपलब्ध करा दें। जिससे बीएलओ द्वारा किए गए कार्यों में सहयोग मिल सके एवं मतदाता सूची तैयार करने में किसी भी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े। उन्होंने सभी पार्टियों के प्रतिनिधियों से कहा कि निर्वाचन आयोग का सख्त निर्देश है कि किसी भी मतदाता का नाम मतदाता सूची में सम्मिलित होने से छूटना नहीं चाहिए एवं कोई भी अपात्र व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में सम्मिलित नहीं होना चाहिए। जिलाधिकारी ने कहा कि मतदाताओं का नाम मतदाता सूची में अंकित करते समय अगर बी.एल.ओ. से किसी भूलवस नाम सम्मिलित नहीं हो पता है तो बी.एल.ए. उसे व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में सम्मिलित करने एवं अपात्र व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटाने को कहें। इस दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि जितना जल्दी हो सके सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि बीएलए की नियुक्ति कर लें। उन्होंने कहा कि चुनाव से संबंधित कोई भी समस्या एवं सुझाव हेतु मुझसे संपर्क कर सकते हैं।
बैठक के दौरान कांग्रेस पार्टी के जिला अध्यक्ष शैलेंद्र कुमार सिंह, बहुजन समाज पार्टी से लालचंद, आम आदमी पार्टी के जिला महासचिव, समाजवादी पार्टी से शाहनवाज आलम, बहुजन समाज पार्टी से विनोद कुमार भारती सहित अन्य पार्टियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

आरटीओ अफसरों की शह पर चल रहा था वसूली का खेल, एक ट्रक से वसूले जाते थे 6 हजार रुपये – एसटीएफ ने दो गिरफ्तार किए

रायबरेली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। रायबरेली में परिवहन विभाग में बड़े वसूली रैकेट का खुलासा हुआ है। एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) ने छापेमारी कर परिवहन विभाग की दलाली करने वाले मोहित और उसके अयोध्या निवासी साथी को गिरफ्तार किया है। इस मामले में एआरटीओ प्रवर्तन अंबुज और पीटीओ रेहाना बानो के खिलाफ लालगंज कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया है।

जानकारी के मुताबिक, फतेहपुर से रायबरेली आने वाले ट्रकों से हर रोज मोटी रकम वसूली जा रही थी। एक ट्रक से 5 से 6 हजार रुपये तक की अवैध वसूली होती थी, जिसका हिस्सा आरटीओ अधिकारियों तक पहुंचाया जाता था। यह पूरा खेल वाहन चेकिंग अभियान के नाम पर चलाया जा रहा था।

एसटीएफ टीम ने अब तक दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि 11 अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि वसूली का नेटवर्क कई जिलों में फैला हुआ है और उच्च स्तर के अधिकारियों की मिलीभगत से यह कार्रवाई वर्षों से जारी थी।

भाजपा पर वोट चोरी का आरोप, देश में बढ़ रहे आतंकी हमले: कांग्रेस प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह का बड़ा बयान

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक अखिलेश प्रताप सिंह ने टाउनहाल स्थित कांग्रेस कार्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर वोट चोरी करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब देश में लगातार आतंकी हमले और बम ब्लास्ट हो रहे हैं, तब सरकार केवल सत्ता बचाने और चुनावी हेरफेर में व्यस्त है।

अखिलेश प्रताप सिंह ने हाल ही में दिल्ली में हुए बम धमाके का जिक्र करते हुए कहा कि इस हादसे में कई लोग घायल हुए, जिनमें देवरिया के भलुअनी क्षेत्र का एक युवक भी शामिल है। उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने और मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा चरमराई हुई है, और सरकार की खुफिया एजेंसियां विफल साबित हो रही हैं। “दिल्ली और आसपास के इलाकों में किलो के भाव आरडीएक्स मिल रहा है, मगर सरकार आंखें मूंदे बैठी है,” उन्होंने कहा।

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उन्होंने गृह मंत्रालय और खुफिया एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पुलवामा हमले की सच्चाई आज तक सामने नहीं आई। सिंह ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार देश की सुरक्षा से अधिक राजनीतिक लाभ के लिए चुनावों में अनैतिक तरीके अपनाने में लगी है।

इस मौके पर जिलाध्यक्ष विजय शेखर मल्ल “रोशन” समेत कई पार्टी पदाधिकारी मौजूद रहे।

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EVM फोटो-वीडियो वायरल मामला: दो युवकों पर एफआईआर दर्ज, साइबर पुलिस कर रही जांच — जानें पूरा मामला

मुजफ्फरपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान ईवीएम (Electronic Voting Machine) की फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने का मामला सामने आया है। इस पर साइबर थाना मुजफ्फरपुर ने सख्त कार्रवाई करते हुए दो युवकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। दोनों मामले सकरा और बरूराज विधानसभा क्षेत्र से जुड़े हैं। पुलिस ने दोनों घटनाओं को जोड़कर संयुक्त केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पहला मामला बरूराज विधानसभा क्षेत्र के मतदान केंद्र संख्या 43 का है, जहां एक युवक ने वोट डालते समय ईवीएम की तस्वीर खींचकर अपने फेसबुक अकाउंट पर अपलोड कर दी। जांच में आरोपी की पहचान कमलेश लाल यादव के रूप में हुई है।

दूसरा मामला सकरा विधानसभा क्षेत्र का है, जहां सदानंद यादव, निवासी सादिकपुर मुरौल गांव, ने मतदान के दौरान बूथ पर ईवीएम का वीडियो बनाया और 7 नवंबर को उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इसके बाद साइबर डीएसपी हिमांशु कुमार ने दोनों मामलों को जोड़ते हुए संयुक्त एफआईआर दर्ज की।

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हिमांशु कुमार ने बताया कि ईवीएम की फोटो या वीडियो बनाना निर्वाचन आचार संहिता का गंभीर उल्लंघन है। पुलिस तकनीकी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह कंटेंट किन प्लेटफॉर्मों पर और कितने लोगों तक फैला। दोनों आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम गठित की गई है।

गौरतलब है कि इससे पहले भी साहेबगंज विधानसभा क्षेत्र में 6 नवंबर को इसी तरह के मामले में यदुवंशी अभिषेक नामक युवक पर एफआईआर दर्ज की गई थी। लगातार ऐसे मामलों के सामने आने से चुनाव आयोग और साइबर पुलिस सतर्क हो गई है।

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दिल्ली ब्लास्ट कनेक्शन: डॉक्टर की नौकरी छोड़ फरार हुईं डॉ. शाहीन सईद, नेत्र सर्जन पति से लिया तलाक, अब खुफिया एजेंसियों के रडार पर

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। दिल्ली ब्लास्ट केस में गिरफ्तार फरीदाबाद निवासी डॉ. शाहीन सईद की कहानी चौंकाने वाली है। कभी मेडिकल कॉलेज की टॉपर रहीं शाहीन ने सात साल तक जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज कानपुर में प्रवक्ता के रूप में काम किया, लेकिन वर्ष 2013 में बिना सूचना दिए नौकरी छोड़कर लापता हो गईं। कई बार नोटिस भेजे जाने के बावजूद उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। आखिरकार वर्ष 2021 में शासन ने उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया।

जानकारी के मुताबिक, शाहीन ने जनवरी 2003 में एमबीबीएस और दिसंबर 2005 में एमडी (फार्माकोलॉजी) की डिग्री हासिल की थी। 2006 में लोक सेवा आयोग के माध्यम से उनकी नियुक्ति हुई थी। बीच में उनका तबादला कन्नौज मेडिकल कॉलेज हुआ, लेकिन वे जल्द ही वापस कानपुर लौट आईं।

वर्ष 2013 में अचानक नौकरी छोड़ने के बाद उनका कोई अता-पता नहीं चला। बाद में उन्होंने कॉलेज से अनुभव प्रमाणपत्र मांगा, जिसमें उन्होंने अपना पता लखनऊ की इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. परवेज सईद का बताया। बताया जा रहा है कि शाहीन और उनके पति डॉ. हयात जफर (नेत्र रोग विशेषज्ञ, पीएमएस डॉक्टर) के बीच 2015 में तलाक हो गया था।

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शाहीन के पिता के अनुसार, उनकी बेटी ने मां की बीमारी के बाद डॉक्टर बनने का निश्चय किया था। वह बचपन से ही पढ़ाई में तेज और सेवा-भावी रही। मोहल्ले के लोगों को आज भी विश्वास नहीं हो रहा कि शाहीन किसी आतंकी नेटवर्क से जुड़ी हो सकती हैं। कई लोग इसे “माइंडवॉशिंग का मामला” बता रहे हैं।

खुफिया एजेंसियां फिलहाल शाहीन के संपर्कों और गतिविधियों की तहकीकात में जुटी हैं। उनके सहारनपुर कनेक्शन भी सामने आए हैं। सहारनपुर के अंबाला रोड स्थित अस्पताल से हाल ही में गिरफ्तार किए गए डॉ. आदिल अहमद और मुअज्जिम के बयान में शाहीन का नाम उजागर हुआ। अब एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि शाहीन ने किन-किन जगहों पर काम किया और किससे संपर्क में रही।

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दुबौली में श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन गूंजी भक्ति की स्वर लहरियां

कथावाचक ने सुनाया रुक्मिणी विवाह का प्रसंग

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। ग्राम पंचायत दुबौली में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास पंडित उमेश चन्द्र शुक्ल ने इस अवसर पर उद्धव चरित्र, महारास लीला एवं रुक्मिणी विवाह के दिव्य प्रसंगों का मनमोहक वर्णन किया। श्रोता भाव-विभोर होकर कथा श्रवण में डूब गए। कथावाचक पंडित शुक्ल ने महारास प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जब गोपियों ने भगवान श्रीकृष्ण से पति रूप में मिलने की इच्छा प्रकट की, तब भगवान ने उनके इस अनुराग को सम्मान देते हुए शरद पूर्णिमा की रात्रि में यमुना तट पर महारास का आयोजन किया। उस दिव्य रात्रि में जब भगवान की बांसुरी की मधुर तान बजी, तो समस्त गोपियां अपने-अपने घरों से सुध-बुध खोकर श्रीकृष्ण के चरणों की ओर दौड़ पड़ीं। उन्होंने कहा कि गोपियों का यह प्रेम केवल आध्यात्मिक और निष्काम भक्ति का प्रतीक था, जिसमें वासना नहीं, केवल समर्पण और प्रेम की पवित्रता थी। श्रीकृष्ण ने हर गोपी के साथ एक साथ नृत्य करने के लिए अपने अनेक रूप प्रकट किए। इस दिव्य महारास को देखकर देवता भी मुग्ध हो उठे।
कथावाचक ने बताया कि वृंदावन स्थित निधिवन को आज भी वही पावन स्थल माना जाता है, जहां भगवान श्रीकृष्ण ने यह अद्भुत महारास रचाया था।इसके पश्चात पंडित शुक्ल ने रुक्मिणी विवाह का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने सभी प्रतापी राजाओं को परास्त कर विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी का हरण किया और द्वारका में वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार उनका पाणिग्रहण किया। इस प्रसंग के साथ ही कथा स्थल पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से जय श्रीकृष्ण के जयकारों से पूरा वातावरण गुंजायमान कर दिया।
मौके पर आयोजक मंडली की ओर से आकर्षक वेशभूषा में श्रीकृष्ण व रुक्मिणी विवाह की झांकी प्रस्तुत की गई, जिसमें विवाह संस्कार की रस्मों को सजीव रूप से प्रदर्शित किया गया। कथा के दौरान भजन व संकीर्तन की मधुर स्वर लहरियों ने पूरे परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
कार्यक्रम में मुख्य श्रोता के रूप में सेवानिवृत्त अध्यापक शारदा तिवारी उपस्थित रहे। उनके साथ राजन तिवारी, योगेंद्र तिवारी, नरेंद्र तिवारी, कौशल किशोर तिवारी, ग्राम प्रधान सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु मौजूद रहे। कथा स्थल पर दिनभर भक्तों का आना-जाना लगा रहा, वहीं महिलाओं ने कीर्तन मंडली के साथ भक्ति गीतों से माहौल को और भी भक्तिमय बना दिया।

ग्राम पंचायत नदुआ में अंत्येष्ठि स्थल निर्माण की उठी मांग

ग्राम प्रधान दिनेश चंद्र मिश्र ने प्रशासन को सौंपा प्रस्ताव

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। मिठौरा विकासखंड के ग्राम पंचायत नदुआ के ग्रामीणों ने लंबे समय से लंबित अंत्येष्टि स्थल निर्माण को लेकर अपनी मांग को एक बार फिर जोरदार तरीके से उठाया है। मंगलवार को ग्राम प्रधान दिनेश चंद्र मिश्र ने संबंधित अधिकारियों से मिलकर अंत्येष्टि स्थल निर्माण की दिशा में जल्द से जल्द ठोस कदम उठाने की मांग करते हुए पत्र सौंपा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत नदुआ में रहने वाले लोगों को शव दाह संस्कार के लिए दूरदराज स्थित अन्य गांवों के घाटों का सहारा लेना पड़ता है। बरसात के दिनों में मार्ग की दुर्दशा और नजदीकी श्मशान घाट के अभाव में परिजनों को मृतक का अंतिम संस्कार कराने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई बार शव को ले जाने में घंटों का समय लग जाता है, जिससे परिजनों के साथ ही ग्रामीणों को भी भावनात्मक और शारीरिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।

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इसी समस्या को देखते हुए नदुआ, बसन्तपुर राजा,बरवा राजा, बागापार सहित आस-पास की बस्तियों के ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान दिनेश चंद्र मिश्र को अपनी पीड़ा से अवगत कराया। ग्रामीणों की समस्या से सहानुभूति रखते हुए मिश्र ने इस मामले में पहल की और ग्राम पंचायत की जरूरत को प्रशासन के समक्ष मजबूती से रखते हुए रेंहाव नाले पर अंत्येष्टि स्थल निर्माण को शीघ्र शुरू कराए जाने हेतु लिखित पत्र प्रेषित किया। इस दौरान दिनेश चंद्र मिश्र ने कहा मानव जीवन का अंतिम संस्कार सम्मानपूर्वक होना चाहिए, यह हर व्यक्ति का अधिकार है। शव दाह गृह न होने के कारण ग्रामीणों को कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन को चाहिए कि इस मुद्दे को प्राथमिकता में लेकर जल्द से जल्द शव दाह गृह निर्माण कार्य शुरू कराए। ग्रामीणों ने भी प्रशासन से इस मांग को मानवीय दृष्टिकोण से देखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह सुविधा न केवल नदुआ बाजार ग्राम पंचायत के लिए, बल्कि आसपास के कई गांवों के लोगों को राहत देगी।
इस दौरान दिग्विजय चौहान, प्रकाश, प्रेम चंद दूबे, दिपक सिंह चौहान, मनोज पाठक,सुशील पाठक, जनार्दन कन्नौजिया, सुदामा, सहित दर्जनों ग्रामीण मौजूद रहे। वहीं स्थानीय लोगों को अब उम्मीद है कि प्रशासन उनकी मांग को गंभीरता से लेते हुए अंत्येष्टि स्थल के निर्माण कार्य को जल्द स्वीकृति प्रदान करेगा, ताकि भविष्य में किसी परिजन को अंतिम संस्कार के दौरान असुविधा न झेलनी पड़े।

सृष्टि को हिला देने वाला वह क्षण जब देवता भी हुए नतमस्तक

🕉️ जब पुत्र का अभिमान हुआ माता पार्वती की परीक्षा

धर्म / भक्ति / आस्था



🌺 दिव्य कथा का दूसरा अध्याय — गणेश जी की उत्पत्ति के बाद क्या हुआ?

भगवान गणेश — विघ्नहर्ता, बुद्धिदाता और मंगलमूर्ति के रूप में पूजे जाने वाले देवता। उनके जन्म की कथा जितनी अद्भुत है, उतनी ही प्रेरणादायक भी। पहले भाग में हमने पढ़ा कि किस प्रकार माता पार्वती ने अपने शरीर के उबटन से एक बालक की रचना की, और उस बालक ने देवाधिदेव महादेव के मार्ग में रुकावट डाली। इस घटना ने सृष्टि के इतिहास में एक नया अध्याय लिखा।
अब प्रस्तुत है — “गणेश जी की कथा ”, जिसमें हम जानेंगे उस क्षण के बाद क्या हुआ जब भगवान शिव ने क्रोध में आकर गणेश का सिर काट दिया।
जब माता पार्वती का क्रोध हिला गया त्रिलोक
जैसे ही माता पार्वती ने देखा कि उनके प्रिय पुत्र का सिर धड़ से अलग हो गया है, उनका हृदय पीड़ा से भर उठा। उनके क्रोध की ज्वाला से पूरा ब्रह्मांड कांप उठा। देवी के रोदन से दिशाएँ थर्रा उठीं, देवता भयभीत हो उठे।
माता ने कहा —
“हे देवाधिदेव! आपने मेरे पुत्र को बिना किसी अपराध के नष्ट कर दिया। अब मैं इस सृष्टि का नाश कर दूंगी!”
माता पार्वती के इस संकल्प से समस्त देवता संकट में पड़ गए। ब्रह्मा, विष्णु और समस्त देवता मिलकर माता को शांत करने पहुंचे। उन्होंने भगवान शिव से विनती की कि वे किसी उपाय से बालक को पुनर्जीवित करें।
🐘 जब हाथी का सिर बना गणेश का जीवन
भगवान शिव ने करुणा भाव से आदेश दिया —
“उत्तर दिशा में जो पहला जीव मिले, उसका सिर लाकर इस बालक के शरीर से जोड़ दो।”
देवता उस दिशा में गए और उन्हें वहाँ एक विशाल, निर्दोष हाथी का बच्चा मिला। उसका सिर लाकर गणेश के शरीर से जोड़ दिया गया। भगवान शिव ने अपने त्रिशूल से जीवन-संवेदना दी और गणेश बालक पुनः जीवित हो उठे।
माता पार्वती की आँखों में आनंद के आँसू झलक उठे। उनके हृदय में मातृत्व की कोमलता और गर्व एक साथ भर उठा।
🌼 देवताओं ने किया गणेश जी का अभिषेक
बालक के पुनर्जन्म के बाद सभी देवताओं ने उनकी महिमा का गान किया। ब्रह्मा जी ने उन्हें “विघ्नहर्ता” की उपाधि दी, विष्णु जी ने कहा —
“जहाँ गणेश का नाम लिया जाएगा, वहाँ सफलता और समृद्धि अपने आप आएगी।”
भगवान शिव ने भी घोषणा की —
“जो भी कार्य आरंभ में गणेश का स्मरण करेगा, उसके सभी कार्य बिना विघ्न के पूर्ण होंगे।”
इस प्रकार गणेश जी समस्त देवताओं में ‘अग्रपूज्य’ कहलाए — अर्थात जिनकी पूजा सबसे पहले की जाती है।
🪔 इस कथा का संदेश
गणेश जी की कथा केवल एक धार्मिक प्रसंग नहीं, बल्कि जीवन का गहरा दर्शन है। यह हमें सिखाती है कि अहंकार, प्रेम, त्याग और करुणा सभी एक ही सूत्र में बंधे हैं। माता पार्वती की मातृभावना, शिव का संयम और गणेश का पुनर्जन्म — यह सब मिलकर जीवन की सच्चाई बताते हैं कि विनाश के बाद ही सृजन की राह खुलती है।

गणेश जी के जीवन की यह कथा केवल एक पौराणिक घटना नहीं, बल्कि हर मनुष्य के जीवन में एक प्रेरणा है। संकटों से जूझते हुए जब हम श्रद्धा, धैर्य और विनम्रता को अपनाते हैं, तभी सच्चे अर्थों में “विघ्नहर्ता गणेश” हमारे जीवन में प्रवेश करते हैं।

विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण अभियान के तहत घर-घर गणना प्रपत्र का वितरण शुरू

सलेमपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)।
विधानसभा क्षेत्र 341-सलेमपुर में निर्वाचन आयोग के निर्देश पर विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण अभियान के तहत मतदाता सूची को अद्यतन करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस अभियान में बूथ लेवल अधिकारी (BLO) क्षेत्र के प्रत्येक घर पर जाकर गणना प्रपत्र (Form) का वितरण कर रहे हैं।

इस दौरान अधिकारी घर-घर पहुंचकर पात्र मतदाताओं की जानकारी एकत्र कर रहे हैं ताकि 18 वर्ष से अधिक आयु के किसी भी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से छूटने न पाए। वहीं मृतक, स्थानांतरित या दोहरी प्रविष्टियों को भी सूची से हटाने की प्रक्रिया चल रही है।

निर्वाचन विभाग ने आमजन से अपील की है कि वे अपने मतदाता पहचान पत्र और परिवार के सदस्यों की जानकारी सही-सही प्रदान करें ताकि मतदाता सूची को त्रुटिहीन बनाया जा सके।

बताया गया कि यह अभियान निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशानुसार समयबद्ध तरीके से संचालित किया जा रहा है और इसमें जनसहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।

शिव के उग्र रूप की उपासना से मिलता है अजेय

🕉️ कालभैरव जयंती 2025: भैरवनाथ की उपासना से मिटते हैं समस्त संकट, जानिए कथा, पूजा विधि और महत्व

धर्म/भक्ति/आस्था)

🌕 कालभैरव जयंती का दिव्य पर्व
कालभैरव जयंती हिंदू पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन भगवान शिव के उग्रतम रूप भैरवनाथ का जन्म हुआ था। भैरव का अर्थ होता है — “भय का नाश करने वाला।” ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति भक्ति भाव से कालभैरव की पूजा करता है, उसके जीवन से भय, पाप, रोग और शत्रु बाधाएं समाप्त हो जाती हैं।
2025 में यह पावन तिथि 12 नवंबर, बुधवार को पड़ रही है।
🔱 कालभैरव कौन हैं?
शिवपुराण के अनुसार, एक बार ब्रह्मा, विष्णु और महेश में श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ। उस समय ब्रह्मा जी ने शिव का अपमान किया, तब भगवान शिव के तीसरे नेत्र से एक दिव्य तेज प्रकट हुआ, जिसने भैरव रूप धारण कर ब्रह्मा का एक सिर काट दिया।
इस घटना के बाद भगवान शिव ने स्वयं को भैरव रूप में स्थापित किया — जो “काल” अर्थात् समय के भी स्वामी हैं। इसलिए उन्हें कालभैरव कहा जाता है।
🕯️ कालभैरव जयंती का धार्मिक महत्व
भैरव को काशी के कोतवाल कहा गया है। कहा जाता है कि वाराणसी नगरी की रक्षा स्वयं कालभैरव करते हैं। उनकी आराधना से व्यक्ति को न केवल आत्मिक शक्ति प्राप्त होती है बल्कि जीवन में स्थिरता, साहस और सफलता का आशीर्वाद मिलता है।
इस दिन पूजा करने से —
पितृ दोष, ग्रहदोष और कालसर्प दोष का निवारण होता है।
अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है।
व्यापार, धन और यश में वृद्धि होती है।
साधक के जीवन में आत्मबल और निर्णायक शक्ति आती है।
🌸 कालभैरव जयंती की पूजा विधि (Puja Vidhi)

  1. स्नान और संकल्प – प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। भगवान शिव और कालभैरव की पूजा का संकल्प लें।
  2. भैरव पूजन – भैरव की प्रतिमा या चित्र पर जल, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और काले तिल अर्पित करें।
  3. मंत्र जाप – “ॐ कालभैरवाय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।
  4. प्रसाद अर्पण – कालभैरव को सरसों का तेल, काली उड़द, काले तिल, और कुत्ते को भोजन अर्पित करना शुभ माना जाता है।
  5. दीपदान और कथा श्रवण – रात्रि के समय दीपक जलाकर भैरव स्तुति और कालभैरवाष्टक का पाठ करें।
    📖 कालभैरव जयंती की पौराणिक कथा
    एक बार ब्रह्मा जी के अभिमान को देखकर भगवान विष्णु ने उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने। तब शिव ने अपनी शक्ति से भैरव को उत्पन्न किया। भैरव ने क्रोध में आकर ब्रह्मा का अहंकार तोड़ने के लिए उनका एक सिर काट दिया।
    इस पाप से मुक्त होने के लिए भैरव कई लोकों में भटकते रहे। अंततः काशी नगरी में प्रवेश करते ही उनके सभी पाप नष्ट हो गए। तब से कालभैरव काशी के रक्षक बन गए।
    इस कथा का संदेश है — अहंकार का अंत निश्चित है, और भक्ति ही सच्चा मार्ग है।
    🙏 भैरव भक्तों के लिए विशेष उपाय
    बुधवार या रविवार के दिन सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
    मंदिर में काले कुत्ते को रोटी या दूध खिलाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
    कालभैरव के नाम का स्मरण करते हुए अपने कार्यों की शुरुआत करें।
    “भैरव चालीसा” और “भैरवाष्टक” का पाठ अवश्य करें।
    🌙 कालभैरव जयंती पर क्या करें और क्या न करें
    करें:उपवास रखें और संयमपूर्वक भक्ति करें।
    गरीबों, पशुओं और जरूरतमंदों को भोजन कराएं।
    शिव मंदिर या भैरव मंदिर में दर्शन करें।
    न करें:
    किसी का अपमान या झूठ न बोलें।
    मद्यपान या तामसिक भोजन से दूर रहें।
    नकारात्मक विचार या विवाद से बचें।
    🪔 वाराणसी का भव्य कालभैरव उत्सव
    काशी में कालभैरव जयंती के अवसर पर हजारों भक्त भैरव मंदिर में दर्शन के लिए उमड़ते हैं। इस दिन मंदिरों में तेल-दीप, घंटा-घड़ियाल और भैरव स्तुति से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है।
    भक्त मानते हैं कि इस दिन काशी के कालभैरव मंदिर में पूजा करने से सभी बाधाएँ दूर होती हैं और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
    🌼 भावनात्मक संदेश
    कालभैरव जयंती हमें सिखाती है कि जीवन का सबसे बड़ा भय — “काल” — भी भक्ति और सत्य से जीता जा सकता है। जब मनुष्य अपने भीतर के अंधकार को मिटाकर प्रकाश की ओर बढ़ता है, तभी उसका हर भय समाप्त होता है।
    इस दिन यदि मन, कर्म और वचन से भक्ति की जाए तो कालभैरव स्वयं भक्त की रक्षा करते हैं।

🕉️ कालभैरव जयंती का पर्व केवल पूजा का दिन नहीं, बल्कि साहस, न्याय और आत्मबल का उत्सव है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि जब सत्य के मार्ग पर भक्ति और निष्ठा से चला जाए तो “काल” भी हमारे चरणों में होता है।

एक कहानी

बेटा ऑनलाइन था, पर माँ ऑफलाइन चली गई…

(तकनीक के जमाने में बुजुर्गों की अकेलापन-बचाने की पुकार)

सुबह आठ बजे की एक तस्वीर — रसोई में हल्का सा धुंधला उजाला, एक कटोरी बेसन की चलिए जमी हुई, और मेज पर रखा मोबाइल स्क्रीन पर बच्चों के व्हाट्सऐप नोटिफिकेशन की लंबी सूची। उस कमरे में एक कुर्सी खाली है — उस कुर्सी पर हर सुबह बैठने वाली माँ अब अलग दुनिया में चली गई। बेटे के पास अनगिनत मैसेज थे, पर उसे एहसास तब हुआ जब बहुत देर हो चुकी थी।

यह कहानी किसी एक परिवार की नहीं, यह हमारे शहरों, आवासीय कॉलोनियों और गाँवों में छिपी हुई उन हजारों माँ-बाप की कहानी है, जिन्हें तकनीक ने आंखों के सामने भी अकेला कर दिया — क्योंकि हमारा जुड़ाव स्क्रीन पर बढ़ा, पर साथ कम होता गया।

राधा देवी (65) (काल्पनिक नाम) का बेटा सुबह-शाम मोबाइल पर बिजी रहता था। वीडियो कॉल करता, फोटो भेजता, सब ठीक-ठाक लिख देता — पर असल समय में पूछना, बैठकर बातें करना, हाथ पकड़कर सुनना — इन सबसे दूरी बढ़ती गई। रिश्ते संवाद से बदलकर सूचना बन गए। एक दिन राधा देवी के पड़ोसियों ने देखा कि उनका दरवाज़ा देर तक खुला है; भीतर की चुप्पी ने सच बोल दिया।

तकनीक ने ज़िन्दगी आसान की है — पर संवेदनशीलता के लिए हमें जोड़ने का काम खुद करना होगा। घर में बुज़ुर्गों की मानसिक व शारीरिक ज़रूरतें स्क्रीन-नोटिफिकेशन से पूरी नहीं होती। अकेलापन दिल पर चोट करता है, और चोटें अक्सर दिखती नही।

अमर व्यक्तित्वों की स्मृतियों का दिन — जिन्होंने इतिहास में अमिट छाप छोडी

भारत के इतिहास में 12 नवंबर का दिन केवल तिथि मात्र नहीं, बल्कि उन महापुरुषों की यादों से जुड़ा हुआ है, जिन्होंने अपने जीवन से समाज, शिक्षा, राजनीति और संस्कृति के हर क्षेत्र को दिशा दी। यह दिन उन प्रेरणास्रोत व्यक्तित्वों को नमन करने का है जिनके योगदान ने राष्ट्र के मानस पटल पर अमिट छाप छोड़ी है।
मदन मोहन मालवीय: शिक्षा और राष्ट्र निर्माण के अग्रदूत (निधन – 1946)
पंडित मदन मोहन मालवीय न केवल स्वतंत्रता सेनानी थे, बल्कि उन्होंने भारतीय शिक्षा प्रणाली को नई दिशा दी। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना कर उन्होंने शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का माध्यम बनाया। “मालवीय जी” का जीवन भारतीय संस्कृति, राष्ट्रवाद और नैतिकता का प्रतीक रहा। वे ऐसे नेता थे जिन्होंने राजनीति में भी धर्म और सदाचार का समन्वय प्रस्तुत किया। उनके आदर्श आज भी भारत की आत्मा में जीवित हैं।

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भुवनेश्वर प्रसाद सिन्हा: न्याय की गरिमा के रक्षक (निधन – 1986)
भारत के छठे मुख्य न्यायाधीश के रूप में भुवनेश्वर प्रसाद सिन्हा ने न्यायपालिका में ईमानदारी, निष्पक्षता और मानवता की मिसाल कायम की। उनका न्याय दृष्टिकोण केवल कानून तक सीमित नहीं था, बल्कि समाज में न्याय के वास्तविक अर्थ को स्थापित करने पर केंद्रित था। उन्होंने अपनी सादगी और कर्तव्यनिष्ठा से भारतीय न्याय प्रणाली में जनता का विश्वास मजबूत किया।
लल्लन प्रसाद व्यास: समाज सुधार के पुरोधा (निधन – 2012)
लल्लन प्रसाद व्यास भारतीय समाज के उन मनीषियों में थे जिन्होंने समाज सेवा को जीवन का लक्ष्य बनाया। उन्होंने शिक्षा, स्वच्छता और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में कई उल्लेखनीय कार्य किए। उनकी सोच यह थी कि जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की किरण नहीं पहुंचेगी, तब तक सच्चा परिवर्तन संभव नहीं। उनके कार्य आज भी सामाजिक संगठनों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

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अनंत कुमार: जनसेवा में समर्पित कर्मयोगी (निधन – 2018)
बेंगलुरु दक्षिण से सांसद और केंद्रीय मंत्री रहे अनंत कुमार भारतीय राजनीति के सरल, संवेदनशील और कर्मशील नेता थे। उन्होंने सदैव जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। गरीबों के लिए योजनाएं लागू करने से लेकर युवाओं के लिए अवसर सृजन तक, उनका योगदान यादगार रहा। उनकी विनम्रता और कार्य के प्रति निष्ठा ने उन्हें जनता के हृदय में अमर कर दिया।
आसिफ़ बसरा: अभिनय की सादगी और गहराई के प्रतीक (निधन – 2020)
भारतीय सिनेमा और टेलीविज़न जगत के प्रतिभाशाली कलाकार आसिफ़ बसरा ने अपने अभिनय से हर चरित्र में जान डाल दी। चाहे फ़िल्में हों या वेब सीरीज़, उन्होंने यथार्थवादी अभिनय से दर्शकों के दिलों में जगह बनाई। उनकी जिंदादिली और अभिनय के प्रति जुनून ने उन्हें अभिनय की दुनिया में एक सम्मानित स्थान दिलाया।

इन सभी विभूतियों ने अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर भारत के गौरव को ऊँचाइयों तक पहुँचाया। 12 नवंबर उनके योगदानों को स्मरण करने का अवसर है — यह दिन हमें प्रेरित करता है कि हम भी अपने कर्म से समाज और देश के लिए कुछ सार्थक करें।

✨12 नवंबर को जन्मे महान व्यक्तित्व: देश को नई दिशा देने वाले प्रेरणास्रोत नायक✨


भारत का इतिहास केवल तिथियों और घटनाओं का नहीं, बल्कि उन महान आत्माओं का भी है जिन्होंने अपने कर्म, समर्पण और प्रतिभा से देश की पहचान को ऊँचाइयों तक पहुँचाया। 12 नवंबर का दिन भी ऐसे ही कई अद्वितीय रत्नों के जन्म की गवाही देता है, जिन्होंने विज्ञान, सेना, साहित्य, चिकित्सा और सिनेमा जैसे विविध क्षेत्रों में अमिट छाप छोड़ी। आइए, जानते हैं उन महान विभूतियों के जीवन और योगदान को जिन्होंने इस दिन जन्म लेकर भारत को गौरवान्वित किया।

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  1. राजीव संधू — शौर्य और बलिदान के प्रतीक (जन्म: 12 नवंबर 1966, पंजाब, भारत)
    राजीव संधू भारतीय सेना के वीर अधिकारी थे जिन्होंने अपने अदम्य साहस से देश की सीमाओं की रक्षा की। भारतीय सैन्य अकादमी से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्होंने भारतीय सेना की 15 सिख रेजिमेंट में सेवा की। ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान उनका शौर्य अप्रतिम रहा। देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले इस जांबाज़ सैनिक को “महावीर चक्र” से सम्मानित किया गया। राजीव संधू का जीवन देशभक्ति, अनुशासन और कर्तव्यपरायणता का जीवंत उदाहरण है।
  2. बी. एन. सुरेश — भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान के आकाशगामी नायक (जन्म: 12 नवंबर 1943, कर्नाटक)
    डॉ. बी. एन. सुरेश, भारत के प्रमुख एयरोस्पेस वैज्ञानिक और इसरो (ISRO) के वरिष्ठ सदस्य रहे हैं। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास से अपनी उच्च शिक्षा प्राप्त की। मिसाइल और प्रक्षेपण यान तकनीक में उनके योगदान ने भारत को आत्मनिर्भर बनाया। उन्होंने विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC) के निदेशक के रूप में कार्य किया और अंतरिक्ष अनुसंधान को नई दिशा दी। देश उन्हें “भारतीय रॉकेट तकनीक के मार्गदर्शक” के रूप में याद करता है।
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  4. सालिम अली — पक्षियों की दुनिया के सम्राट (जन्म: 12 नवंबर 1896, बॉम्बे, महाराष्ट्र)
    “भारत के पक्षी पुरुष” कहे जाने वाले सालिम अली भारतीय उपमहाद्वीप के सबसे प्रसिद्ध पक्षी वैज्ञानिक थे। बॉम्बे विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त कर उन्होंने पक्षियों के व्यवहार और प्रवास पर व्यापक शोध किया। उनकी पुस्तक “द बुक ऑफ़ इंडियन बर्ड्स” आज भी पक्षी विज्ञान की आधारशिला मानी जाती है। सालिम अली ने भारत में वन्यजीव संरक्षण की चेतना जगाई और कई राष्ट्रीय उद्यानों की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्हें पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।
  5. अमजद ख़ान — अभिनय की दुनिया का अमर नाम (जन्म: 12 नवंबर 1940, पेशावर, अब पाकिस्तान)
    “गब्बर सिंह” — यह नाम सुनते ही सिनेमा प्रेमियों की स्मृति में वही तीखी नज़र और गूंजता संवाद “अरे ओ सांभो!” तैर उठता है। अमजद ख़ान ने फिल्म शोले (1975) में अपने विलक्षण अभिनय से भारतीय सिनेमा को नया आयाम दिया। उनके पिता जयंत भी प्रसिद्ध अभिनेता थे। मुंबई विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त कर उन्होंने रंगमंच से अभिनय का सफ़र शुरू किया। अमजद ख़ान ने केवल खलनायक ही नहीं, बल्कि एक सशक्त चरित्र अभिनेता के रूप में भी भारतीय फिल्म जगत को समृद्ध किया।
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  7. डॉ. दिलीप महलानबीस — ओआरएस के जनक (जन्म: 12 नवंबर 1934, कोलकाता, पश्चिम बंगाल)
    डॉ. महलानबीस भारतीय चिकित्सा जगत के ऐसे नायक थे जिन्होंने लाखों लोगों की जान बचाई। उन्होंने कोलकाता मेडिकल कॉलेज से एम.बी.बी.एस. की डिग्री ली और यूनिसेफ के साथ मिलकर डायरिया रोग से निपटने के लिए ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) का विकास किया। यह सरल, सस्ती और प्रभावी चिकित्सा पद्धति विश्व भर में स्वास्थ्य क्रांति साबित हुई। उनके योगदान को टाइम मैगज़ीन ने “20वीं सदी के सर्वाधिक प्रभावशाली चिकित्सीय आविष्कारों” में स्थान दिया।
  8. अख़्तरुल ईमान — आधुनिक उर्दू नज़्म के स्थापत्य शिल्पी (जन्म: 12 नवंबर 1915, उत्तर प्रदेश)
    अख़्तरुल ईमान उर्दू साहित्य के ऐसे कवि थे जिन्होंने नज़्म को नई पहचान दी। उनकी रचनाओं में मानवीय संवेदनाएँ, सामाजिक यथार्थ और जीवन दर्शन का गहरा सम्मिश्रण है। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से शिक्षा ली और आगे चलकर फ़िल्मों के लिए भी संवाद लिखे। उनकी नज़्में — “शहर के लोग”, “बिन मौसमी बारिश” — आज भी साहित्य प्रेमियों के दिलों में गूंजती हैं। अख़्तरुल ईमान ने शब्दों को आत्मा से जोड़ा और उर्दू कविता को नई आत्मा दी।
  9. अमलप्रवा दास — समाज सेवा का आदर्श स्वरूप (जन्म: 12 नवंबर 1911, ओडिशा)
    अमलप्रवा दास, ओडिशा की अग्रणी सामाजिक कार्यकर्ता थीं। उन्होंने महिलाओं और वंचित वर्ग के उत्थान के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उड़ीसा विश्वविद्यालय से स्नातक करने के बाद उन्होंने कई जनसेवा संगठनों की स्थापना की। महिला शिक्षा, स्वच्छता और स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनके कार्यों ने ग्रामीण भारत में नई चेतना जगाई। उन्हें उनके सामाजिक योगदान के लिए पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
    समापन विचार:
    12 नवंबर का दिन केवल जन्मतिथियों की सूची नहीं, बल्कि एक प्रेरक इतिहास है। ये सभी विभूतियाँ इस सत्य को स्थापित करती हैं कि जब समर्पण, प्रतिभा और राष्ट्रप्रेम मिलते हैं, तब व्यक्ति नहीं, युग बनते हैं। चाहे विज्ञान का क्षेत्र हो, साहित्य, सिनेमा, या समाज सेवा — इन सबकी जीवनगाथा हमें यह सिखाती है कि “देश का निर्माण कर्म से होता है, नाम तो बस पहचान है।”

करियर, शिक्षा, राजनीति और धन पर ग्रहों का प्रभाव

🌟 आज का राशिफल 12 नवंबर 2025 | Aaj Ka Rashifal 12 November 2025
पंडित सत्य प्रकाश पाण्डेय द्वारा प्रस्तुत | वैदिक ज्योतिष आधारित विस्तृत राशिफल

🔯 ग्रह-नक्षत्रों की चाल से जानें — किन राशियों पर बरसेगा भाग्य का वरदान और किसे रहना होगा सतर्क। कार्य क्षेत्र से लेकर शिक्षा, राजनीति, कला, संगीत और प्रशासनिक क्षेत्र तक — जानें आज का संपूर्ण राशिफल।
मेष (Aries) 🔥अ, ल, ई
कार्य क्षेत्र/व्यवसाय: आज आपकी ऊर्जा उच्च रहेगी। ऑफिस या बिज़नेस में आपके प्रयासों की सराहना होगी।
शिक्षा: विद्यार्थियों को किसी महत्वपूर्ण कार्य में सफलता मिल सकती है।
कला/संगीत: रचनात्मकता नई दिशा लेगी।
राजनीति: प्रभावशाली लोगों का समर्थन मिलेगा।
प्रशासन: अधिकारी वर्ग को पदोन्नति या प्रशंसा का योग।
आर्थिक स्थिति: लाभ के साथ खर्च भी बढ़ सकते हैं।
शुभ रंग: लाल 🔴
शुभ अंक: 3
पूजन: भगवान हनुमान की आराधना करें।

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वृषभ (Taurus) 🐂 ब, व, उ
कार्य क्षेत्र: भाग्य का साथ मिलेगा। नए अवसर प्राप्त होंगे।
शिक्षा: उच्च शिक्षा में प्रगति के संकेत।
कला/संगीत: नए प्रोजेक्ट में सफलता।
राजनीति: सम्मान और प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
प्रशासन: सीनियर्स से सराहना मिलेगी।
आर्थिक स्थिति: धन लाभ व निवेश में लाभ।
शुभ रंग: सफेद ⚪
शुभ अंक: 6
पूजन: माता लक्ष्मी की आराधना करें।
मिथुन (Gemini)🕊️ क, छ, घ
कार्य क्षेत्र: कुछ रुकावटें आएंगी, लेकिन धैर्य से सफलता मिलेगी।
शिक्षा: मन विचलित हो सकता है, ध्यान केंद्रित करें।
कला: सृजनशील कार्यों में सुधार होगा।
राजनीति: विरोधी पक्ष पर हावी रहेंगे।
आर्थिक स्थिति: सामान्य लाभ के योग।
शुभ रंग: हरा 💚
शुभ अंक: 5
पूजन: भगवान विष्णु की पूजा करें।

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कर्क (Cancer) 🦀 ड, ह
कार्य क्षेत्र: काम में देरी होगी लेकिन अंततः सफलता मिलेगी।
शिक्षा: पढ़ाई में फोकस बनाए रखें।
कला: परिवार का सहयोग मिलेगा।
राजनीति: निर्णय सोच-समझकर लें।
आर्थिक स्थिति: खर्च अधिक रहेगा।
शुभ रंग: चांदी जैसा ग्रे ⚙️
शुभ अंक: 2
पूजन: भगवान शिव की आराधना शुभ।
सिंह (Leo) 🦁 म, ट, टा
कार्य क्षेत्र: आत्मविश्वास के साथ सफलता।
शिक्षा: प्रतियोगिता में सफलता के योग।
कला: प्रसिद्धि प्राप्त हो सकती है।
राजनीति: किसी बड़े नेता का सहयोग मिलेगा।
प्रशासन: कार्यस्थल पर पदोन्नति संभव।
आर्थिक स्थिति: लाभदायक दिन।
शुभ रंग: सुनहरा 🟡
शुभ अंक: 1
पूजन: सूर्य देव की आराधना करें।

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कन्या (Virgo) 🌾प, ठ, ण
कार्य क्षेत्र: सुबह की सुस्ती दोपहर तक दूर होगी।
शिक्षा: प्रयास जारी रखें, सफलता मिलेगी।
कला: ध्यान केंद्रित करें, अवसर मिलेगा।
राजनीति: योजनाओं पर विचार करें।
आर्थिक स्थिति: खर्च नियंत्रण में रखें।
शुभ रंग: हल्का नीला 🔵
शुभ अंक: 7
पूजन: गणेश जी की पूजा करें।
तुला (Libra) ⚖️ र, त
कार्य क्षेत्र: नई जिम्मेदारी मिलेगी।
शिक्षा: दिन शुभ, मनोबल बढ़ेगा।
कला: रचनात्मक कार्यों में सफलता।
राजनीति: सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि।
आर्थिक स्थिति: स्थिरता बनी रहेगी।
शुभ रंग: गुलाबी 🌸
शुभ अंक: 4
पूजन: देवी सरस्वती की आराधना करें।

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वृश्चिक (Scorpio) 🦂 न, य
कार्य क्षेत्र: काम में नई सफलता मिलेगी।
शिक्षा: प्रतियोगिता में लाभदायक परिणाम।
कला: नई पहचान बन सकती है।
राजनीति: शुभ समाचार मिलेगा।
प्रशासन: वरिष्ठों का सहयोग रहेगा।
आर्थिक स्थिति: आय में वृद्धि।
शुभ रंग: लाल-नारंगी 🧡
शुभ अंक: 9
पूजन: भगवान कार्तिकेय की पूजा करें।
धनु (Sagittarius) 🏹 भ, ध, फ, ढ
कार्य क्षेत्र: योजनाओं में सफलता।
शिक्षा: अध्ययन में एकाग्रता बढ़ेगी।
कला: भावनात्मक उभार से रचनात्मकता बढ़ेगी।
राजनीति: जनसंपर्क मजबूत होंगे।
आर्थिक स्थिति: लाभदायक दिन।
शुभ रंग: पीला 💛
शुभ अंक: 8
पूजन: विष्णु भगवान की आराधना करें।

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मकर (Capricorn) 🐐 ख, ज
कार्य क्षेत्र: भाग्य का साथ मिलेगा।
शिक्षा: परिश्रम का फल मिलेगा।
कला: नए अवसर प्राप्त होंगे।
राजनीति: लोकप्रियता बढ़ेगी।
प्रशासन: सम्मान मिलने की संभावना।
आर्थिक स्थिति: धन लाभ के प्रबल योग।
शुभ रंग: नीला 🩵
शुभ अंक: 10
पूजन: शनिदेव की आराधना करें।
कुम्भ (Aquarius) 🌊 ग, स, श
कार्य क्षेत्र: पुरानी चिंताएँ दूर होंगी।
शिक्षा: परिणाम अनुकूल रहेंगे।
कला: संतुलन और स्थिरता।
राजनीति: समर्थन और सम्मान मिलेगा।
आर्थिक स्थिति: सामान्य पर संतोषजनक।
शुभ रंग: बैंगनी 🟣
शुभ अंक: 11
पूजन: भगवान शिव की पूजा करें।
मीन (Pisces)🐟 द, च, झ, थ
कार्य क्षेत्र: प्रतिस्पर्धा में सावधानी रखें।
शिक्षा: ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता।
कला: भावनात्मक संतुलन जरूरी।
राजनीति: संयम बरतें।
प्रशासन: निर्णायक फैसले लेने से बचें।
आर्थिक स्थिति: खर्च बढ़ेगा पर लाभ भी होगा।
शुभ रंग: आसमानी नीला 💠
शुभ अंक: 2
पूजन: भगवान विष्णु की आराधना शुभ।
🕉️ यह राशिफल वैदिक गणना पर आधारित है, जिसे पंडित सत्य प्रकाश पाण्डेय द्वारा तैयार किया गया है।
🪔 “राष्ट्र की परम्परा” इस ज्योतिषीय भविष्यवाणी की पुष्टि नहीं करता। अपने जन्म विवरण के अनुसार किसी योग्य ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य करें।

🌏 वो घटनाएँ जिन्होंने दुनिया की दिशा और भारत की दशा बदल दी

इतिहास के आईने में 12 नवंबर


इतिहास केवल तारीखों का सिलसिला नहीं होता, यह उन पलों की गवाही है जिनसे मानव सभ्यता ने सीखा, बढ़ा और कई बार स्वयं को पुनः गढ़ा। 12 नवंबर का दिन विश्व और भारत दोनों के लिए कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं का साक्षी रहा है। इस दिन हुए बदलावों ने राजनीति, विज्ञान, संस्कृति और समाज — सभी क्षेत्रों में नई सोच की लहर पैदा की। आइए जानते हैं, इस दिन इतिहास में क्या-क्या घटित हुआ जिसने मानव सभ्यता की यात्रा पर अमिट छाप छोड़ी।
1781 – अंग्रेजों ने नागापट्टनम पर कब्ज़ा किया : दक्षिण भारत में औपनिवेशिक नियंत्रण की नई नींव
1781 में अंग्रेजों ने तमिलनाडु के नागापट्टनम पर कब्ज़ा कर लिया। यह घटना भारत में ब्रिटिश औपनिवेशिक साम्राज्य की रणनीतिक मज़बूती का प्रतीक बनी। इस बंदरगाह पर अधिकार ने अंग्रेजों को व्यापारिक और सामरिक दृष्टि से बड़ी बढ़त दी, जिससे दक्षिण भारत पर उनका नियंत्रण सुदृढ़ हुआ। यह कदम बाद में पूरे देश पर अंग्रेजी हुकूमत की जड़ें फैलाने में निर्णायक साबित हुआ।

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1847 – क्लोरोफॉर्म का पहला प्रयोग : चिकित्सा विज्ञान में नई क्रांति
ब्रिटेन के प्रसिद्ध चिकित्सक सर जेम्स यंग सिंप्सन ने पहली बार बेहोशी के लिए क्लोरोफॉर्म का प्रयोग किया। यह चिकित्सा इतिहास की एक अद्भुत उपलब्धि थी, जिसने सर्जरी को दर्दरहित बनाया। इस खोज ने मानव जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार लाया और चिकित्सकों को जटिल ऑपरेशनों में नई आशा दी।
1918 – ऑस्ट्रिया बना गणतंत्र : राजशाही का अंत, लोकतंत्र की शुरुआत
प्रथम विश्व युद्ध के बाद 12 नवंबर 1918 को ऑस्ट्रिया ने गणतंत्र बनने की घोषणा की। सदियों पुरानी हैब्सबर्ग राजशाही का अंत हुआ और लोकतांत्रिक शासन की शुरुआत हुई। यह यूरोपीय राजनीति के लिए एक बड़ा परिवर्तन था जिसने आधुनिक यूरोप के लोकतांत्रिक स्वरूप को आकार दिया।

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1925 – अमेरिका और इटली के बीच शांति समझौता : वैश्विक स्थिरता की पहल
प्रथम विश्व युद्ध की तबाही के बाद 1925 में अमेरिका और इटली ने शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस कदम ने अंतरराष्ट्रीय रिश्तों में विश्वास की एक नई शुरुआत की और युद्धोत्तर विश्व व्यवस्था को स्थिर करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम था।

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1930 – लंदन का गोलमेज सम्मेलन : भारत की आज़ादी की ओर एक और पड़ाव
1930 में लंदन में पहली बार गोलमेज सम्मेलन आयोजित हुआ। इसमें 56 भारतीय और 23 ब्रिटिश प्रतिनिधियों ने भाग लिया, हालांकि कांग्रेस ने इसमें हिस्सा नहीं लिया। यह सम्मेलन ब्रिटिश शासन और भारतीय नेताओं के बीच संवाद की पहल थी, जिसने स्वतंत्रता आंदोलन की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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1936 – केरल के मंदिरों के द्वार सभी हिंदुओं के लिए खुले : समानता की दिशा में ऐतिहासिक कदम
12 नवंबर 1936 को त्रावणकोर राज्य के महाराजा चिथिरा तिरुनाल बालारामा वर्मा ने एक ऐतिहासिक आदेश जारी कर केरल के मंदिरों के द्वार सभी जातियों के हिंदुओं के लिए खोल दिए। यह निर्णय भारतीय समाज में समानता और सामाजिक सुधार की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुआ।
1953 – डेविड बेन गुरियन का इस्तीफा : इज़राइल में राजनीतिक परिवर्तन की बयार
इज़राइल के पहले प्रधानमंत्री डेविड बेन गुरियन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस कदम ने देश की राजनीति में नई दिशा तय की और यह इज़राइल की लोकतांत्रिक परंपरा की मजबूती का प्रतीक बना।
1956 – तीन देशों की संयुक्त राष्ट्र में एंट्री : वैश्विक परिवार में नया विस्तार
मोरक्को, सूडान और ट्यूनीशिया ने इस दिन संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता हासिल की। अफ्रीका और अरब देशों के लिए यह गौरवपूर्ण क्षण था, जिसने वैश्विक स्तर पर इन देशों की पहचान को मज़बूती दी।
1963 – जापान में रेल हादसा : तकनीकी राष्ट्र को झकझोर देने वाली त्रासदी
12 नवंबर 1963 को जापान में भयानक ट्रेन दुर्घटना हुई, जिसमें 164 लोग मारे गए। इस हादसे ने जापानी परिवहन व्यवस्था को सुरक्षा के नए मानक अपनाने के लिए प्रेरित किया। बाद में जापान ने विश्व की सबसे सुरक्षित रेल प्रणालियों में स्थान प्राप्त किया।
1967 – इंदिरा गांधी का निष्कासन : भारतीय राजनीति में भूचाल
इंदिरा गांधी को कांग्रेस से निष्कासित कर दिया गया। यह घटना भारतीय राजनीति में गहरे बदलाव की शुरुआत थी। इसी से उभरकर बाद में इंदिरा गांधी ने खुद को “जनता की नेता” के रूप में स्थापित किया और देश की राजनीति में नया अध्याय लिखा।
1969 – इंदिरा गांधी का पार्टी से अलग होना : नई कांग्रेस का उदय
1969 में कांग्रेस पार्टी दो हिस्सों में बंट गई — कांग्रेस (ओ) और कांग्रेस (आर)। इस विभाजन ने भारतीय लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष और विचारधारात्मक बहस की परंपरा को जन्म दिया।
1974 – दक्षिण अफ्रीका का निलंबन : नस्लभेद के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र की सख्ती
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दक्षिण अफ्रीका को उसकी नस्लीय नीतियों के कारण निलंबित कर दिया। यह विश्व इतिहास में मानवाधिकारों की रक्षा की दिशा में एक सशक्त संदेश था।
1990 – जापान के सम्राट आकिहितो का सिंहासनारोहण : परंपरा और आधुनिकता का संगम
12 नवंबर 1990 को जापान के सम्राट आकिहितो का औपचारिक रूप से सिंहासनारोहण हुआ। यह समारोह जापानी संस्कृति, अनुशासन और परंपरा का भव्य प्रतीक था, जिसने देश की सांस्कृतिक एकता को और मजबूत किया।
1995 – नाइजीरिया का राष्ट्रमंडल से निलंबन : मानवाधिकारों पर वैश्विक चेतावनी
नाइजीरिया को उसके मानवाधिकार उल्लंघनों के कारण राष्ट्रमंडल की सदस्यता से निलंबित कर दिया गया। यह कदम वैश्विक मंच पर न्याय और समानता की लड़ाई के प्रति गंभीरता को दर्शाता है।
2001 – न्यूयॉर्क विमान दुर्घटना : आतंक के साये में अमेरिका फिर कांपा
11 सितंबर के हमले के कुछ ही हफ्तों बाद 12 नवंबर को न्यूयॉर्क में अमेरिकी एयरलाइंस का विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ। इस हादसे में 260 लोगों की मौत हुई। इसने अमेरिका को सुरक्षा व्यवस्था पर नए सिरे से सोचने को मजबूर किया।
2002 – साइप्रस के लिए संयुक्त राष्ट्र की शांति योजना : विभाजन के घाव पर मरहम
संयुक्त राष्ट्र ने स्विट्जरलैंड के संघीय ढांचे पर आधारित साइप्रस के लिए नई शांति योजना प्रस्तुत की। इस पहल ने दशकों से विभाजित द्वीप राष्ट्र में शांति की नई उम्मीद जगाई।
2005 – 13वां सार्क सम्मेलन : दक्षिण एशिया में आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता
ढाका में 13वां दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) सम्मेलन आयोजित हुआ। इस सम्मेलन में भारतीय प्रधानमंत्री ने क्षेत्र से आतंकवाद मिटाने का आह्वान किया। यह दक्षिण एशियाई देशों की साझा शांति की दिशा में एक बड़ा कदम था।
2007 – सऊदी राजकुमार बने एयरबस A-380 के पहले ग्राहक : विलासिता की नई परिभाषा
सऊदी अरब के राजकुमार अलवलीद बिन तलाल ने एयरबस A-380 का पहला ऑर्डर देकर इतिहास रच दिया। यह विमान दुनिया के सबसे बड़े लक्ज़री जेट्स में शामिल है, जिसने हवाई यात्रा की परिभाषा ही बदल दी।
2008 – भारत की तकनीकी विजय : चंद्रमा, मिसाइल और बैंकिंग निर्णय
2008 में भारत ने तीन महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल कीं —
के-15 मिसाइल का सफल परीक्षण,
चंद्रयान-1 का चंद्रमा की अंतिम कक्षा में सफल प्रवेश,
और अदलपुर अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक का लाइसेंस रद्द कर वित्तीय अनुशासन को मजबूती।
यह दिन भारत की तकनीकी, वैज्ञानिक और प्रशासनिक क्षमता के त्रिवेणी संगम का प्रतीक बना।
2009 – ‘अतुल्य भारत’ को मिला वर्ल्ड ट्रेवल अवार्ड : विश्व मंच पर भारतीय पर्यटन की पहचान
भारत सरकार के पर्यटन अभियान ‘Incredible India’ (अतुल्य भारत) को विश्व यात्रा पुरस्कार-2009 से सम्मानित किया गया। इस अभियान ने भारत को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर विशिष्ट पहचान दिलाई और देश की सांस्कृतिक विविधता को विश्व पटल पर उभारा।
समापन विचार:
12 नवंबर का इतिहास मानवता के उत्थान, संघर्ष, सुधार और प्रगति की कहानी कहता है। विज्ञान की खोज से लेकर समानता की पुकार तक — इस तारीख ने बार-बार साबित किया है कि बदलाव ही सभ्यता की असली पहचान है।