Wednesday, July 1, 2026
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रूस का कीव पर भीषण हमला: 8 की मौत, 35 घायल, कई इमारतें धू-धू कर जलीं

Russia-Ukraine War: रूस ने शुक्रवार तड़के यूक्रेन की राजधानी कीव समेत कई क्षेत्रों पर व्यापक पैमाने पर हवाई हमला किया। हमले में 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि 35 से अधिक घायल हुए हैं। राजधानी के कई जिलों में इमारतें जल उठीं और जगह-जगह मलबा बिखर गया।

कीव सैन्य प्रशासन प्रमुख तैमूर तकाचेंको के अनुसार, आपात बचाव दल तुरंत सक्रिय हुए, लेकिन हमलों की तीव्रता के कारण बड़े पैमाने पर नुकसान से बचा नहीं जा सका।

रूस ने छोड़े 430 ड्रोन और 18 मिसाइलें

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने जानकारी दी कि रूस ने एक ही रात में 430 ड्रोन और 18 मिसाइलें दागीं। इन हमलों का मुख्य निशाना कीव था, जहां दर्जनों अपार्टमेंट इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं।

जेलेंस्की ने टेलीग्राम पोस्ट में कहा कि यह हमला “नागरिकों को अधिकतम नुकसान पहुंचाने की सुनियोजित कोशिश” था।

कीव में बिजली-पानी ठप, अजरबैजान दूतावास को भी नुकसान

हमलों के दौरान इस्कंदर मिसाइल के टुकड़ों ने अजरबैजान के दूतावास को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। राजधानी के कई हिस्सों में बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित हो गई।
हवाई सुरक्षा सक्रिय होने के बाद 15 घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया।

प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, रूस ने सूमी क्षेत्र में जिरकोन मिसाइल का भी इस्तेमाल किया।

जेलेंस्की ने मांगा कड़ा प्रतिबंध और अतिरिक्त सैन्य समर्थन

जेलेंस्की ने पश्चिमी देशों से अतिरिक्त सैन्य सहायता और रूसी तेल पर कड़े प्रतिबंध लगाने की अपील दोहराई। उन्होंने कहा कि यूक्रेन जवाबी कार्रवाई कर रहा है, लेकिन उसकी वायु रक्षा प्रणाली को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

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रूस का दावा: यूक्रेन के 216 ड्रोन मार गिराए

रूसी रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा ने रातभर में यूक्रेन के 216 ड्रोन मार गिराए।

क्रास्नोडार क्षेत्र में 66 ड्रोन नष्ट किए गए, जहां पहले एक तेल डिपो और बंदरगाह को निशाना बनाया गया था।

सारातोव क्षेत्र में भी ड्रोन हमलों से नागरिक ढांचे को नुकसान पहुंचा है।

रूस-यूक्रेन युद्ध में यह हमला हाल के महीनों में सबसे बड़े हवाई आक्रमणों में से एक माना जा रहा है।

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अमृतसिद्धि-सर्वार्थसिद्धि योग और ज्योतिषीय विवरण

Panchang 15 November 2025 — मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष एकादशी
तारीख: 15 नवंबर 2025, शनिवार
मास: अमांत–कार्तिक | पूर्णिमांत–मार्गशीर्ष
संवत्सर: विक्रम 2082 (कालयुक्त), शक 1947 (विश्वावसु)
ऋतु: शरद/हेमंत
अयन: दक्षिणायन

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🕉 तिथि, नक्षत्र, योग, करण तिथि:
कृष्ण पक्ष एकादशी — 15 Nov, 12:50 AM – 16 Nov, 02:37 AM
उपरांत — द्वादशी
नक्षत्र:
उत्तर फाल्गुनी — 14 Nov, 09:20 PM – 15 Nov, 11:34 PM
हस्त — 15 Nov, 11:34 PM – 17 Nov, 02:11 AM
योग:
विष्कुम्भ — 15 Nov, 06:25 AM – 16 Nov, 06:46 AM
करण:
बव — 12:50 AM – 01:40 PM
बालव – 01:40 PM –16 Nov, 02:37 AM
कौलव—16 Nov, 02:37 AM – 03:40 PM

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🌞 सूर्य व चंद्र समय
सूर्योदय: 6:44 AM
सूर्यास्त: 5:38 PM
चन्द्रोदय: 2:21 AM
चन्द्रास्त: 2:43 PM
सूर्य राशि: तुला
चंद्र राशि: कन्या (पूरा दिन-रात)
🚫 अशुभ काल
राहुकाल: 09:28 AM – 10:49 AM
यमगण्ड: 01:33 PM – 02:54 PM
कुलिक: 06:44 AM – 08:06 AM
दुर्मूहुर्त: 08:11 AM – 08:55 AM
वर्ज्यम्: 05:12 AM – 06:57 AM

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✔️ शुभ काल
अभिजीत मुहूर्त: 11:49 AM – 12:33 PM
अमृत काल: 03:40 PM – 05:25 PM
ब्रह्म मुहूर्त: 05:09 AM – 05:57 AM
🌟 Auspicious Yogas Today
अमृतसिद्धि योग:
16 Nov, 06:45 AM – 17 Nov, 02:10 AM (Hasta + Sunday)
सर्वार्थसिद्धि योग:
16 Nov, 06:45 AM–17 Nov,02:10 AM

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🌙 चन्द्र बल आज
शुभ फलदायक राशियाँ:
मेष, वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर
कमज़ोर चंद्रबल:
कुंभ, मीन (सावधानी व संयम आवश्यक)
🧭 आज की यात्रा दिशा
शुभ दिशा: उत्तर-पूर्व (ईशान), पूर्व
अशुभ दिशा: दक्षिण
दक्षिण यात्रा अनिवार्य हो तो—
👉 दही-चीनी या गुड़ खाकर निकलें।
🍀 घर से निकलते समय क्या खाएं?

  • मीठा (गुड़/दही-चीनी) – कार्य सफलता
  • हल्दी-जल दर्शन – बाधा नाश
  • दर्पण दर्शन – शुभता और सौभाग्य
    🔱 आज का शुभ मंत्र
    सर्वकार्य सिद्धि हेतु:
    “ॐ विघ्न विनायकाय नमः”
    यात्रा शुभता हेतु:
    “ॐ ह्रीं नमः”
    🕰️ दिन का चौघड़िया — Day Choghadiya (15 Nov 2025)
    6:44–8:06 — उद्वेग (अशुभ)
    8:06–9:28 — चर (मध्यम)
    9:28–10:49 — रोग (अत्यंत अशुभ)
    10:49–12:11 — लाभ (अत्यंत शुभ)
    12:11–1:33 — अमृत (सर्वश्रेष्ठ)
    1:33–2:54 — काल (अशुभ)
    2:54–4:16 — शुभ (शुभ)
    4:16–5:38 — चर (मध्यम)
    🌙 रात का चौघड़िया — Night Choghadiya
    5:38–7:00 — शुभ
    7:00–8:22 — अमृत
    8:22–9:44 — चर
    9:44–11:06 — रोग
    11:06–12:28 — उद्वेग
    12:28–1:50 — शुभ
    1:50–3:12 — अमृत
    3:12–4:34 — काल
    🛕 आज के व्रत-त्योहार
    उत्पन्ना एकादशी — पाप नाश, रक्षा, संकल्प पूर्ण करने वाला व्रत
    🧘 आनन्दादि योग
    आज: उत्पात — 11:34 PM तक
    उसके बाद: मृत्यु योग

“शनि देव की दिव्य यात्रा: सूर्यपुत्र के उदय से न्याय-अधिष्ठाता बनने तक की पूरी कथा”

🕉️ शनि महाराज एपिसोड–2: जन्म के बाद की दिव्य कथा, तप, संघर्ष और लोककल्याण का अनश्वर प्रसंग

हिंदू धर्म की विशाल कथा-संरचना में शनि देव का चरित्र न्याय, संतुलन और कर्मफल का अद्भुत प्रतीक माना गया है। जहां एक ओर उनका जन्म सूर्य देव और छाया माता के तप से हुआ, वहीं दूसरी ओर उनकी जीवन–यात्रा लोककल्याण की ऐसी अनूठी धारा से भरी है जो आज भी श्रद्धालुओं को प्रेरित करती है। शनि देव की कथा केवल दंड या भय की नहीं, बल्कि तप, साधना, कर्तव्य और न्याय के उच्चतम आदर्शों की जीवंत मिसाल है। यही कारण है कि उनकी कृपा पाने के लिए भक्त न केवल उपवास और पूजा करते हैं, बल्कि सत्य, नैतिकता और कर्म की शुचिता को भी जीवन का आधार बनाते हैं।
इस एपिसोड में प्रस्तुत है—शनि देव की उत्पत्ति के बाद की विस्तृत कथा, जिसे संत-पुराण, ज्योतिष–पंथ और लोकमान्य परंपराओं में अत्यधिक महत्व दिया गया है।

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🌑 छाया माता के तप से जन्मे शनि की कठोर साधना
शनि देव का जन्म होते ही उनके शरीर पर गहरा काला रंग दिखाई दिया। यह कोई कमी नहीं, बल्कि असाधारण शक्ति का संकेत था—वह शक्ति जो लोक और ब्रह्मांड दोनों के संतुलन को बनाए रखने के काम आएगी। बचपन से ही शनि अत्यंत गंभीर, शांत और अंतर्मुखी थे। उनकी आँखों में तीक्ष्ण तेज था जो किसी भी अन्य देव या दैत्य से कम नहीं।
कथा कहती है कि किशोर अवस्था में ही शनिदेव गहन तपस्या के लिए निकल पड़े। कहा जाता है कि—
उन्होंने 12 वर्षों तक निरंतर सूर्य तप (सूर्योदय से सूर्यास्त तक ध्यान), 9 वर्षों तक पर्वत-चोटियों पर कठोर योग और 7 वर्षों तक पूर्ण मौन-व्रत का पालन किया।
यह साधना असाधारण थी, और यही वह समय था जब ब्रह्मांडीय शक्तियाँ शनि देव की ओर आकर्षित होने लगीं। उनके कठोर तप से उनका तेज इतना प्रचंड हो गया कि उनके दर्शन मात्र से लोक, देव और दानव सभी प्रभावित होने लगे।

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🌞 पिता सूर्य देव के साथ पहला संवाद: परीक्षा और भावनात्मक संघर्ष
शनि देव की साधना पूरी हुई तो वह पहली बार पिता सूर्य देव के दर्शन के लिए पहुंचे। सूर्य देव पहले से ही इस बात को लेकर संदिग्ध थे कि शनि में उनके समान तेज क्यों नहीं है। उन्होंने शनि की परीक्षा लेने का संकल्प किया और उनके आगमन पर तेजस्वी प्रकाश फैलाया।
लेकिन जैसे ही शनि देव ने सूर्य की ओर दृष्टि उठाई—
सूर्य का तेज अचानक मंद पड़ गया।
यह घटना पूरे देवलोक में आश्चर्य का विषय बन गई।
सूर्यदेव क्षणभर के लिए क्रोधित हुए और बोले—
“तुम्हारी दृष्टि इतनी कठोर क्यों है?”
शनि देव ने विनम्रता से उत्तर दिया—
“प्रभो, यह दृष्टि किसी अहंकार से नहीं, बल्कि तप की अग्नि से उत्पन्न हुई शक्ति का परिणाम है। मेरा कर्तव्य तो न्याय करना है, चाहे वह देव का हो या दानव का।”
यह संवाद भावनाओं से भरा था—एक पिता का अहं और एक पुत्र का दृढ़ धर्मपालन। बाद में जब सूर्यदेव शनि के तप की महिमा समझ गए, तो उन्होंने शनि को अपने तेज का कुछ अंश भी प्रदान किया और उन्हें ग्रहों में सर्वोच्च स्थान दिया।

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🪐 ब्रह्मांड में एक नया अध्याय—शनि का ग्रहत्व और कर्मफल का विधान
देवताओं ने मिलकर निर्णय लिया कि शनि देव ब्रह्मांड चक्र में ग्रह रूप में स्थापित होंगे और जीवों के कर्मों के अनुसार फल प्रदान करेंगे। यह किसी दंड का अधिकार नहीं, बल्कि न्याय का दायित्व था।
ब्रह्मा जी ने उन्हें वरदान देते हुए कहा—
“हे शनि, तुम्हें कर्माधिपति घोषित किया जाता है। अपने मार्ग से विचलित मत होना। तुम्हारा निर्णय ब्रह्मांड का निर्णय होगा।”
यही क्षण था जब शनि देव न्याय और कर्मफल के अधिपति बने।

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🌑 शनि की दृष्टि क्यों मानी जाती है कठोर? छिपा हुआ करुणा–संदेश
अक्सर कहा जाता है कि शनि की दृष्टि पड़ते ही दुख, कठिनाई या बाधाएँ आती हैं। लेकिन यह आधा सत्य है। शनि की दृष्टि का अर्थ दंड नहीं—सुधार है।
उनका लक्ष्य किसी को तोड़ना नहीं, बल्कि बेहतर बनाना है।
उनकी दृष्टि तीन प्रकार से प्रभाव डालती है—

  1. पहली दृष्टि — संयम सिखाती है
  2. दूसरी दृष्टि — कर्तव्य और नैतिकता की परीक्षा लेती है
  3. तीसरी दृष्टि — गलतियों से मुक्ति और उत्थान देती है
    यही कारण है कि शनि को क्रूर नहीं, बल्कि नीलकंठ समान कठोर-करुण करुणा के देव कहा गया है।
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    🕉️ शनि का लोककल्याण–मार्ग: प्रजा की कठिनाइयों को हरने का व्रत कथा है कि शनि देव ने दंड नहीं, बल्कि लोककल्याण को प्राथमिकता दी। वे हमेशा उन व्यक्तियों की सहायता करते हैं—
    जो मेहनत करते हैं,जो सत्य का पालन करते हैं,जो किसी का अहित नहीं करते,जो न्याय के साथ चलते हैं,शनिदेव ने देवलोक, पृथ्वी और पाताल—तीनों लोकों में न्याय स्थापित किया। कई बार उन्होंने दुष्ट असुरों को नियंत्रित किया और कई बार देवताओं के अहं को भी शांत किया। उनका संदेश स्पष्ट है—“सिर्फ कर्म ही तुम्हारा भविष्य बनाता है।”
    🌑 शनि देव का वाहन—काला कौवा: गूढ़ रहस्य
    कौवा शनि का दूत माना गया है। इसका रंग स्वयं शनि के तप का प्रतीक है—गंभीरता, धैर्य और गहन निरीक्षण का।
    कौवे के माध्यम से शनि देव संकेत देते हैं कि कहीं कर्म-विकृति या अनैतिक मार्ग पर कदम तो नहीं चल रहा।
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    🔱 निष्कर्ष: शनि देव की कथा सिर्फ पौराणिक नहीं—जीवन का दर्शन है शनि देव की उत्पत्ति के बाद की यह कथा हमें बताती है कि—
    तप से शक्ति मिलती है,शक्ति से जिम्मेदारी आती है,और जिम्मेदारी से उत्पन्न होता है न्याय,शनि देव का चरित्र हमें जीवन की कठिनाइयों को स्वीकार करने, अपने कर्मों का निरीक्षण करने और सत्य के मार्ग पर अटल रहने की शिक्षा देता है। इसीलिए उन्हें “कर्मफलदाता”, “न्यायाधीश” और “कल्याणकारी देव” कहा जाता है।
  6. राष्ट्र की परम्परा इस कथा को प्रमाणित नहीं करता यह शास्त्र विदित व लोक कथाओं का मेल से तैयार है।

जल, जंगल और ज़मीन के प्रहरी थे वीर बिरसा मुंडा

जयंती विशेष | नवनीत मिश्र

देश की आज़ादी की लड़ाई का इतिहास सिर्फ राष्ट्रीय नेताओं और बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा, इसकी जड़ें उन दूरदराज़ आदिवासी इलाकों तक भी फैली थीं, जहाँ सदियों से प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने वाली समुदायों की पहचान और अस्तित्व पर औपनिवेशिक शासन लगातार प्रहार कर रहा था। इसी पृष्ठभूमि में 19वीं सदी के अंत में एक ऐसा तेजस्वी व्यक्तित्व उभरा जिसने आदिवासी समाज को नई चेतना, आत्मसम्मान और संघर्ष की राह दिखाई। यह नाम था—वीर बिरसा मुंडा। जल, जंगल और ज़मीन के हक़ की लड़ाई को स्वर देने वाले इस महान क्रांतिनायक की जयंती पूरे देश में गर्व और सम्मान के साथ मनाई जाती है।
15 नवंबर 1875 को उलिहाटू गांव में जन्मे बिरसा मुंडा का बचपन कठिन परिस्थितियों में बीता। अंग्रेजों द्वारा लगाए गए कठोर कर, जंगलों पर प्रतिबंध और जमींदारी प्रथा की कड़ाई से आदिवासी समाज अपनी ही मिट्टी पर पराया हो रहा था। बिरसा ने बहुत कम उम्र में यह समझ लिया कि शोषण और अन्याय के इस सिलसिले को रोकने के लिए समाज को संगठित होना होगा। यही सोच आगे चलकर उन्हें एक जननायक और संघर्ष के प्रतीक के रूप में स्थापित करती है।
1890 के दशक में बिरसा मुंडा के नेतृत्व में अंग्रेजी शासन और महाजनी शोषण के खिलाफ ‘उलगुलान’ यानी महाविद्रोह की शुरुआत हुई। यह आंदोलन केवल प्रशासन के लिए चुनौती नहीं था, बल्कि आदिवासी अस्मिता और अधिकारों की पहली बड़ी हुंकार था। बिरसा का नारा, “अबुआ दिसुम, अबुआ राज” यानी “हमारी धरती, हमारा राज” आंदोलन की आत्मा बन गया। इस संघर्ष ने अंग्रेजी शासन को हिलाकर रख दिया और उन्हें भूमि नीतियों में महत्वपूर्ण बदलाव करने पड़े। छोटानागपुर सहित कई इलाकों में आदिवासियों के भूमि अधिकारों को मान्यता मिली, जो बिरसा के आंदोलन की बड़ी सफलता थी।
बिरसा मुंडा केवल विद्रोह के नेता नहीं थे, बल्कि समाज सुधारक भी थे। उन्होंने आदिवासी समुदाय को नशाखोरी, सामाजिक कुरीतियों और आपसी मतभेदों से दूर रहने का संदेश दिया। सादगी, एकता और आत्मसम्मान पर आधारित उनके विचारों ने समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाए। समुदाय में उनका प्रभाव इतना गहरा था कि लोग उन्हें ‘धरती आबा’ यानी ‘धरती पिता’ कहकर सम्मान देते थे।
9 जून 1900 को बिरसा मुंडा का रांची जेल में निधन हो गया, लेकिन मात्र 25 वर्षों के जीवन में उन्होंने जो इतिहास रचा, वह अमर हो गया। उनके संघर्ष ने भूमि संरक्षण से जुड़े कई कानूनों को जन्म दिया और आदिवासी समाज को एक मजबूत आधार प्रदान किया। आज भी उनकी विरासत देश भर में हाशिए पर रहने वाले समुदायों के अधिकारों की लड़ाई को नई ऊर्जा देती है।
पर्यावरण के बढ़ते संकट, जंगलों के तेजी से घटते क्षेत्र और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव के इस दौर में बिरसा मुंडा का संदेश और भी प्रासंगिक हो उठता है। उन्होंने बहुत पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि जंगल और ज़मीन केवल जीविका का साधन नहीं, बल्कि संस्कृति, पहचान और भविष्य की नींव हैं।
वीर बिरसा मुंडा की जयंती हमें यह याद दिलाती है कि संघर्ष केवल हथियारों से नहीं, बल्कि साहस, सामूहिक चेतना और अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता से भी लड़ा जाता है। आज के दिन हम सभी यह संकल्प लें कि हम जल, जंगल और ज़मीन की रक्षा करेंगे तथा उन समुदायों की आवाज़ बनेंगे, जिनकी आवाज़ अक्सर अनसुनी रह जाती है।
धरती आबा बिरसा मुंडा अमर रहें।

ट्रंप का बड़ा आर्थिक फैसला: बीफ, कॉफी व ट्रॉपिकल फलों पर से टैक्स हटाया, महंगाई से राहत की उम्मीद

वॉशिंगटन (राष्ट्र की परम्परा)। अमेरिका में बढ़ती महंगाई और उपभोक्ताओं की नाराज़गी के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा आर्थिक कदम उठाया है। ट्रंप प्रशासन ने बीफ, कॉफी और ट्रॉपिकल फलों (अनानास, आम, केला आदि) पर लगाए गए आयात शुल्क खत्म करने की घोषणा की है। यह आदेश शुक्रवार को जारी कार्यकारी आदेश के जरिए लागू किया गया।

कीमतों में सीधी राहत देने का प्रयास

पिछले कई महीनों से अमेरिका में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रोजमर्रा की चीजों के महंगे होने से आम अमेरिकी परिवार बजट को लेकर चिंतित थे। ऐसे में सरकार का यह फैसला घरेलू बाजार में इन उत्पादों की कीमतों को नीचे लाने में मददगार साबित हो सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, आयात शुल्क हटने के बाद इन खाद्य वस्तुओं की लागत कम होगी, जिससे आने वाले दिनों में बाजार में उनकी कीमतों में कमी देखने को मिल सकती है।

चुनावी नतीजों ने बढ़ाया सरकार पर दबाव

हाल ही में हुए ऑफ-ईयर चुनावों में मतदाताओं ने महंगाई को सबसे बड़ा मुद्दा बताया। इसके चलते वर्जीनिया और न्यू जर्सी में डेमोक्रेट्स को बड़ी जीत मिली। विश्लेषकों का मानना है कि इन नतीजों ने ट्रंप प्रशासन को तेजी से आर्थिक कदम उठाने के लिए प्रेरित किया।

कई देशों के साथ समझौते भी प्रभावी

इससे पहले ट्रंप प्रशासन ने इक्वाडोर, ग्वाटेमाला, अल साल्वाडोर और अर्जेंटीना के साथ कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क घटाने के लिए प्रारंभिक समझौते किए थे। ट्रंप पहले ही संकेत दे चुके थे कि वे कॉफी पर टैरिफ कम करके इसकी सप्लाई बढ़ाना चाहते हैं।

यह नया आदेश अमेरिकी उपभोक्ताओं को महंगाई से राहत देने की दिशा में सरकार की सबसे बड़ी घोषणाओं में से एक माना जा रहा है।

‘नमस्ते’ लिखते ही मिलेंगी सभी परिवहन सेवाएँ, विभाग ने शुरू की नई चैटबॉट सुविधा

ड्राइविंग लाइसेंस से परमिट तक—परिवहन विभाग की सेवाएँ अब WhatsApp चैटबॉट पर

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। परिवहन आयुक्त कार्यालय उत्तर प्रदेश ने विभागीय सेवाओं को आम जनता तक और अधिक सरलता एवं तेजी से पहुंचाने के उद्देश्य से अपनी आधिकारिक चैटबॉट सुविधा शुरू कर दी है। नई डिजिटल पहल के तहत अब नागरिक परिवहन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ सीधे WhatsApp पर तुरंत प्राप्त कर सकेंगे।
चैटबॉट के माध्यम से ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीकरण, विभिन्न प्रकार के परमिट, कर अदायगी सहित परिवहन विभाग की अन्य प्रमुख सेवाओं से जुड़ी विस्तृत एवं विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। विभाग का कहना है कि यह सुविधा लोगों को कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत दिलाएगी और समय की बचत भी करेगी।
परिवहन विभाग द्वारा इस चैटबॉट सेवा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। विभाग ने इसे सेवाओं से जुड़े नवाचार के रूप में बताते हुए कहा है कि डिजिटल माध्यम से जानकारी उपलब्ध कराना सुशासन और पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
WhatsApp चैटबॉट से जुड़ने के लिए नागरिक अपने मोबाइल पर 8005441222 पर ‘नमस्ते’ लिखकर मैसेज भेज सकते हैं या दिए गए QR कोड को स्कैन कर सीधे सेवा का लाभ ले सकते हैं। विभाग का दावा है कि यह सुविधा परिवहन सेवाओं को और अधिक सहज, सुलभ और समयबद्ध बनाएगी।

बिहार चुनाव में एनडीए की प्रचंड जीत पर सलेमपुर में भाजपा कार्यकर्ताओं ने आतिशबाजी कर मनाया जश्न

सलेमपुर(राष्ट्र की परम्परा)। बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की प्रचंड जीत की घोषणा होते ही पूरे क्षेत्र में उत्साह की लहर दौड़ गई। इसी कड़ी में सलेमपुर में भाजपा कार्यकर्ताओं ने पार्टी कार्यालय के सामने जमकर जश्न मनाया। कार्यकर्ताओं ने आतिशबाजी की, एक-दूसरे को मिठाई खिलाई और विजय के नारे लगाकर माहौल को उत्साहपूर्ण बना दिया।

भाजपा कार्यकर्ता एनडीए की इस जीत को विकास और सुशासन की जीत बता रहे थे। जश्न के दौरान कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचते हुए खुशी का इजहार किया।

इस मौके पर भाजपा सलेमपुर के मीडिया प्रभारी राजीव मिश्र, गुड्डन कुशवाहा, अशोक पाण्डेय, तत्रिपुरायक विश्वकर्मा सहित तमाम भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने संयुक्त रूप से कहा कि यह जीत जनता के भरोसे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व एनडीए नेतृत्व की नीतियों का परिणाम है।

पार्टी कार्यालय परिसर देर शाम तक उत्सव के माहौल में डूबा रहा।

बरनवाल सेवा समिति के प्रवीण अध्यक्ष व विनय बने महामंत्री

सलेमपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)। बरनवाल सेवा समिति सलेमपुर की कार्यकारिणी का दो वर्ष का कार्यकाल पूर्ण होने के बाद गुरुवार शाम उपनगर के नदावर रोड स्थित बरनवाल सेवा सदन में नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। इसमें प्रवीण बरनवाल को एक बार फिर सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुना गया। वहीं विनय बरनवाल को महामंत्री तथा डॉ. अंगद बरनवाल को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई।

कार्यक्रम की शुरुआत महाराज अहिबरन जी के तैल चित्र पर दीप प्रज्ज्वलन और माल्यार्पण के साथ हुई। इसके बाद पुरानी कार्यकारिणी ने दो वर्षों का लेखा–जोखा समिति के समक्ष प्रस्तुत किया। चुनाव अधिकारी के रूप में जौनपुर समिति के अध्यक्ष संजय बरनवाल तथा महामंत्री अभिषेक बरनवाल ने अपनी भूमिका निभाई।

नई कार्यकारिणी के चयन के बाद उपस्थित सदस्यों ने फूलमालाओं से स्वागत कर नव-चयनित पदाधिकारियों को मिठाई खिलाकर शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में प्रमोद बरनवाल, सुशील बरनवाल, धनंजय बरनवाल, विनोद बरनवाल, मुन्ना, अंचल सहित सौ से अधिक सदस्य मौजूद रहे।

बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की प्रचंड जीत पर भाजपाइयों ने मनाया जश्न

संत कबीर नगर(राष्ट्र की परम्परा)। बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को मिली प्रचंड जीत पर स्थानीय भाजपा कार्यालय में जमकर जश्न मनाया गया। जैसे ही रुझानों में एनडीए को बढ़त मिलने लगी, कार्यकर्ता कार्यालय पहुंचने लगे और जीत सुनिश्चित होते ही ढोल-नगाड़ों, आतिशबाजी और नारों के बीच माहौल उत्सव में बदल गया।
जिलाध्यक्ष नीतू सिंह सहित बड़ी संख्या में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी। “योगी-मोदी जिंदाबाद” और “भाजपा जिंदाबाद” से पूरा परिसर गूंज उठा।
जिलाध्यक्ष नीतू सिंह ने कहा कि बिहार की जनता ने विकास, राष्ट्रवाद और सुशासन के पक्ष में प्रचंड जनादेश देकर भाजपा की नीतियों पर अपना विश्वास मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा जताया है, और भाजपा इस विश्वास पर खरा उतरने के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करती रहेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं की मेहनत और संगठन की मजबूती को इस जीत का वास्तविक आधार बताया।
जश्न के दौरान कार्यकर्ताओं का उत्साह देखते ही बनता था। पटाखों की गूंज और विजय झंडा लहराते कार्यकर्ताओं ने पूरे परिसर को उत्सवमय बना दिया। नेताओं ने कहा कि यह जीत भाजपा की संगठनात्मक शक्ति और जनता के अपार समर्थन को दर्शाती है तथा आने वाले समय में विकास के संकल्प को और गति देगी।
इसी क्रम में नगर पंचायत मगहर में मन की बात के संयोजक गौरव निषाद ने लोगो को मिठाई खिलाते हुए कहा कि बिहार में एनडीए की यह जीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विकासपरक नीतियों और जनता के बीच उनकी बढ़ती विश्वसनीयता का प्रमाण है। यह जनादेश स्पष्ट संदेश देता है कि जनता राष्ट्रहित और स्थिरता के पक्ष में खड़ी है। उन्होंने कहा कि यह विजय कार्यकर्ताओं के परिश्रम और संगठन की सुदृढ़ता का परिणाम है, जो पार्टी को नए उत्साह के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
इस दौरान ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि नित्यानंद, जिला उपाध्यक्ष ज्ञानेंद्र मिश्रा, डॉ. मनोज पाण्डेय, सतविंदर पाल सिंह जज्जी, अत्रेश श्रीवास्तव, सुनीता अग्रहरी, किरण प्रजापति, अरुण गुप्ता, सत्य प्रकाश गुप्त, अमर निषाद, अश्वनी कुमार सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपाधि रहे।

गोल्डन लाइफ चिल्ड्रन एकेडमी में बाल दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया

भागलपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा ) भागलपुर ब्लॉक अंतर्गत गोल्डन लाइफ चिल्ड्रन एकेडमी में बाल दिवस बड़े ही हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के प्रबंधक संतोष सैनी, वरिष्ठ शिक्षक राम प्रेम यादव एवं प्रहलाद प्रसाद द्वारा भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर की गई।
इसके पश्चात शिक्षकों ने पंडित नेहरू के जीवन, उनके कार्यों तथा साहित्यिक योगदान पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए बच्चों को उनके आदर्शों से अवगत कराया। इस दौरान श्रीमती कालिंदी देवी ने बच्चों को प्रोत्साहित करते हुए विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का संचालन किया।
कार्यक्रम में कबड्डी, कुर्सी दौड़, बिस्कुट-जलेबी खाने की प्रतियोगिता, गुब्बारा खेल सहित कई रोचक गतिविधियाँ आयोजित हुईं, जिनमें बच्चों ने पूरे उत्साह से भाग लिया। विद्यालय प्रांगण को भव्य रूप से सजाया गया था, जिससे कार्यक्रम का माहौल और भी मनमोहक हो गया।
इस अवसर पर विद्यालय परिवार के प्रिंस कुमार, सौरभ शर्मा, अमर साहनी, प्रीति पांडे, नाजिया खातून, प्रदीप मौर्या, गौरव सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम अनुशासन और सौहार्दपूर्ण वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

बाल मेला: ब्लूमिंग बड्स स्कूल में बच्चों की प्रतिभा, संस्कृति और जागरूकता का अनोखा संगम

पुलिस अधीक्षक श्री संदीप कुमार मीणा एवं अपर जिलाधिकारी श्री जयप्रकाश जी ने किया के भव्य बाल मेले का उद्घाटन

संत कबीर नगर(राष्ट्र की परम्परा)। जिला मुख्यालय स्थित ब्लूमिंग बड्स स्कूल, खलीलाबाद के विशाल प्रांगण में बाल दिवस के अवसर पर शुक्रवार को बाल मेला-2025 का भव्य आयोजन किया गया। मेले का उद्घाटन पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीणा, अपर जिलाधिकारी जयप्रकाश, विद्यालय की प्रबंध निदेशिका पुष्पा चतुर्वेदी और चेयरमैन विनय कुमार चतुर्वेदी ने मां सरस्वती और पंडित जवाहरलाल नेहरू के चित्र पर माल्यार्पण करते हुए फीता काटकर किया।
मेले में बच्चों ने अपने हुनर, रचनात्मकता और सीख को शानदार तरीके से प्रस्तुत किया। मिशन शक्ति, नारी सुरक्षा, साइबर अपराध, यातायात जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण और विधिक साक्षरता जैसे विषयों पर बच्चों ने जागरूकता फैलाने वाले स्टॉल लगाए।
इंडियन और साउथ इंडियन फूड स्टॉल, बच्चों की आर्ट गैलरी, रंगोली प्रतियोगिता, मेहंदी कार्यक्रम सहित कई गतिविधियाँ मेले के आकर्षण का केंद्र बनीं।
कटघोड़वा नृत्य, फरवाही नाच, सपेरा-बंदर नाच, भांगड़ा, जादूगरी और कुम्हार कला ने भी बच्चों और अभिभावकों को खूब लुभाया।
विद्यालय परिसर पूरी तरह उत्साह से भरा रहा। बच्चों द्वारा स्वयं बनाए गए खाद्य पदार्थों के स्टॉलों पर आगंतुकों ने खरीदारी की। महिलाओं के लिए मेहंदी स्टॉल लगातार व्यस्त रहे। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए विद्यालय प्रबंधन ने जगह-जगह सुरक्षा कर्मियों की तैनाती कराई और फायर ब्रिगेड टीम भी मुस्तैद रही।
पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीणा ने अपने संबोधन में कहा कि बच्चे इस देश का भविष्य हैं और उनके अधिकारों की रक्षा व उनका विकास हर जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि आज भी देश में कई बच्चे मजदूरी, शोषण, कुपोषण और शिक्षा से वंचित होने जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं, जिन्हें खत्म करने के लिए शासन-प्रशासन लगातार प्रयासरत है। उन्होंने मिशन शक्ति, साइबर क्राइम जागरूकता, यातायात नियमों और डायल-112 की उपयोगिता पर भी विस्तार से जानकारी दी।
अपर जिलाधिकारी जयप्रकाश ने पंडित नेहरू के योगदान को याद करते हुए कहा कि बाल दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि बच्चों के अधिकारों और विकास से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने का दिन भी है। उन्होंने बताया कि सरकार और विभिन्न संस्थाओं द्वारा बाल अधिकारों एवं बाल संरक्षण में आने वाली बाधाओं को दूर करने के प्रयास जारी हैं।
विद्यालय की प्रबंध निदेशिका पुष्पा चतुर्वेदी ने कहा कि इतने बड़े मेले का सफल आयोजन विद्यालय परिवार के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि बच्चों की प्रतिभा, उनकी रचनात्मकता और अभिभावकों का उत्साह इस मेले को ऐतिहासिक बनाता है। उन्होंने सभी को बाल दिवस की शुभकामनाएं दीं और बच्चों को हमेशा आत्मविश्वास बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य शैलेश त्रिपाठी ने सभी अतिथियों, अभिभावकों और आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर ईडी
दिनेश चंद्र पांडेय, उप प्रधानाचार्य अनूप विश्वकर्मा, मुख्य समन्वयक विजय कुमार राय, रवि प्रताप सिंह, राजेश कुमार पांडेय, नागेंद्र सिंह, विनोद मिश्रा, रितेश त्रिपाठी, दुर्गेश पांडेय, परमहंस यादव, जय प्रकाश दुबे, पूनम मौर्य, सरोज शर्मा, विनोद कुमार राय, धर्मनाथ यादव सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

सीता हरण का भावपूर्ण मंचन दर्शक हुए मंत्रमुग्ध

शाहजहांपुर (राष्ट्र की परम्परा) जैतीपुर कस्बे में चल रही श्री राम जानकी रामलीला में शुक्रवार को सीता हरण लीला का मंचन कलाकारों द्वारा दिखाया गया। सीता हरण की लीला देख दर्शक भाव विभोर हो उठे। रामलीला में कलाकारों द्वारा दिखाया गया कि रावण की बहन सूर्पणखा भगवान राम और लक्ष्मण के पास वन में पहुंच जाती है वहां सूर्पणखा भगवान राम के छोटे भाई लक्ष्मण से शादी करने का प्रस्ताव रखती है, लेकिन लक्ष्मण ने अपने धनुष बाण से सूर्पणखा की नाक काट डालते हैं। इसके बाद सूर्पणखा अपने भाई रावण के पास जाती है और वहां एक तपस्वी द्वारा नाक काटे जाने के विषय में अपने भाई को बताती है। कहती है उनके पास एक सुंदर स्त्री भी है। इसको सुन रावण कहता है कि तपस्वी की इतनी हिम्मत जिन्होंने मेरी बहन की नाक को काट डाली।इसके बाद रावण सीता हरण के लिए मामा मारीच पर दबाव डालता है।मारीच सोने के मृग का भेश धारण कर पंचवटी में पहुंच जाता है। माता सीता सोने के मृग को देख कर उसकी ओर आकर्षित हो जाती हैं।भगवान राम से उसे पकड़ कर लाने को कहती है।सीता हरण की लीला को देख दर्शक भाव विभोर हो उठे।

न्यू दीप्लोक हॉस्पिटल में निशुल्क स्वास्थ्य शिविर, 227 मरीजों की हुई जांच

सिकंदरपुर/बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

घूरी बाबा के टोला स्थित न्यू दीपलोक हॉस्पिटल के तत्वाधान में शुक्रवार को आयोजित निशुल्क स्वास्थ्य शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने हिस्सा लिया। शिविर में कुल 227 मरीजों की निशुल्क जांच, परामर्श तथा दवा वितरण की सुविधा उपलब्ध कराई गई। सुबह से ही डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मियों की टीम सक्रिय रही और मरीजों की समस्याओं का विस्तारपूर्वक परीक्षण किया। शिविर में पहुंचे लोगों को जांच के बाद निःशुल्क दवाएं और आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श प्रदान किया गया। कार्यक्रम की निगरानी मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. पी.सी. राय (MBBS, MD) तथा संस्थापक डॉ. रश्मि राय ने स्वयं की। दोनों डॉक्टर पूरे समय शिविर में उपस्थित रहकर मरीजों की जांच और सुविधा सुनिश्चित करते रहे।
डॉ. पी.सी. राय ने कहा, “ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाना और समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना हमारा प्रमुख उद्देश्य है। मरीजों की बड़ी संख्या यह दर्शाती है कि ऐसे शिविर ग्रामीणों के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। न्यू दीप्लोक हॉस्पिटल आगे भी जनहित में ऐसे कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा। वहीं, संस्थापक डॉ. रश्मि राय ने कहा, “ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की स्वास्थ्य समस्याओं को अक्सर नजरअंदाज करना पड़ता है। ऐसे स्वास्थ्य शिविर उनके लिए वरदान साबित होते हैं। हमारी कोशिश है कि नियमित रूप से इस तरह के शिविर आयोजित कर लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। शिविर में जांच कराने आए लोगों ने एक ही स्थान पर जांच, परामर्श और दवा मिलने पर संतोष व्यक्त किया और हॉस्पिटल प्रबंधन की इस पहल की सराहना की। शिविर को सफल बनाने में शिब्बू राय, सुधीर यादव, गुड्डू जी, सुनील ठाकुर, जगनारायण वर्मा सहित महिला कर्मियों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। न्यू दीप्लोक हॉस्पिटल द्वारा आयोजित यह नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर न सिर्फ ग्रामीणों के लिए उपयोगी रहा, बल्कि सामाजिक सरोकार की दिशा में एक सराहनीय कदम भी साबित हुआ।

स्वयं से करें जेंडर संवेदनशीलता की शुरुआत: प्रो. राजेश गिल

डीडीयूजीयू में जेंडर सेंसिटाइजेशन पर केंद्रित 14-दिवसीय बहुविषयक रिफ्रेशर कोर्स संपन्न

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के मदन मोहन मालवीय टीचर ट्रेनिंग सेंटर एवं समाजशास्त्र विभाग द्वारा आयोजित 14-दिवसीय बहुविषयक रिफ्रेशर कोर्स (पुनश्चर्या पाठ्यक्रम) का समापन समारोह गुरुवार को आयोजित हुआ।
मुख्य अतिथि पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ के समाजशास्त्र विभाग की पूर्व प्रोफेसर एवं बार काउंसलिंग ऑफ पंजाब एवं हरियाणा की सीनियर एडवोकेट प्रो. राजेश गिल ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि जेंडर संवेदनशीलता की शुरुआत व्यक्ति को स्वयं से करनी होगी। समाज में स्थापित जेंडर भूमिकाओं में बदलाव लाए बिना वास्तविक समानता संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि जेंडर को केवल स्त्री-पुरुष की सीमित परिधि में देखने के बजाय उसे एक बहुविध अवधारणा के रूप में समझने की आवश्यकता है। विविध लैंगिक पहचानों का सम्मान किए बिना न्यायपूर्ण समाज की कल्पना अधूरी है।
उन्होंने यह भी कहा कि बचपन से ही बच्चों में जेंडर के प्रति संवेदनशील दृष्टि विकसित करना जरूरी है, ताकि वे समानता और सम्मान आधारित समाज का निर्माण कर सकें।
समापन सत्र में एमएमटीटीसी के निदेशक प्रोफेसर चंद्रशेखर ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने कहा कि जेंडर सेंसिटाइजेशन आज की सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक और शैक्षणिक जरूरतों में से एक है, जिस पर इस पुनश्चर्या पाठ्यक्रम में लगातार विमर्श हुआ।
कोर्स समन्वयक एवं समाजशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. अनुराग द्विवेदी ने रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि कुलपति प्रो पूनम टंडन के मार्गदर्शन में 14 दिनों में देशभर के प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों के लगभग 40 व्याख्यान आयोजित हुए। इन व्याख्यानों में जेंडर के सामाजिक, सांस्कृतिक, मनोवैज्ञानिक और नीतिगत आयामों पर गंभीर विमर्श किया गया।
कला संकाय की अधिष्ठाता प्रो. कीर्ति पांडेय ने अपने वक्तव्य में कहा कि जेंडर-संवेदनशील दृष्टिकोण समाज में समान अधिकार, सम्मानजनक व्यवहार और सहयोगी वातावरण की बुनियाद है।
कार्यक्रम के सह-समन्वयक डॉ. मनीष पांडेय ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षकों और शोधार्थियों की ज़िम्मेदारी है कि वे कक्षा, शोध और नीति-निर्माण के प्रत्येक स्तर पर इस विमर्श को आगे बढ़ाएं।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. तूलिका सिन्हा ने किया। डॉ. जूही देशमुख और डॉ. शगुफ्ता अफरोज ने प्रतिभागियों की ओर से अपने अनुभव साझा किए।
कार्यक्रम में प्रो. संगीता पांडेय, प्रो. सुभी धुसिया, प्रो. अंजू, डॉ. पवन कुमार, डॉ. प्रकाश प्रियदर्शी, डॉ. दीपेंद्र मोहन सिंह सहित विभिन्न राज्यों के महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों से डेढ़ सौ से अधिक प्रतिभागी मौजूद रहे।

लटूरी लाल इंटर कॉलेज समेत कई विद्यालयों में बाल दिवस पर खेलकूद व मिष्ठान वितरण

शाहजहांपुर (राष्ट्र की परम्परा)
जैतीपुर क्षेत्र के विभिन्न शैक्षिक संस्थानों में बाल दिवस धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर बच्चों के लिए खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया और उन्हें मिष्ठान वितरित किया गया।
कार्यक्रमों की शुरुआत प्रार्थना और स्वागत गीत से हुई। शिक्षकों ने बच्चों को बाल दिवस का महत्व समझाया और भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू से जुड़े प्रेरणादायक प्रसंग साझा किए।
लटूरी लाल इंटर कॉलेज में खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इसी दौरान अर्धवार्षिक परीक्षा परिणाम भी वितरित किए गए। जिसके बाद बच्चों को मिष्ठान दिया गया।
इस अवसर पर प्रबंधक रविन्द्र गुप्ता, प्रधानाचार्य हिमांशु सिंह, परीक्षा प्रभारी उपेंद्र कुमार, संचालक मिलन कुमार, शिक्षक योगेंद्र कुमार, रवींद्र, रफी अहमद, अरुण कुमार और भगवान सिंह सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।