Sunday, June 28, 2026
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बदलते भारत की सैन्य सोच के शिल्पकार: जनरल बिपिन रावत

पुनीत मिश्र

भारत के आधुनिक सैन्य इतिहास में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जो केवल अपनी पदस्थापना से नहीं, बल्कि अपने दृष्टिकोण और निर्णायक नेतृत्व से एक युग को प्रभावित करते हैं। जनरल बिपिन रावत ऐसा ही नाम हैं, एक सैनिक, एक रणनीतिकार और एक बदलावकारी नेतृत्व, जिन्होंने भारतीय रक्षा व्यवस्था के ढांचे को नई ऊर्जा और नई दिशा प्रदान की।
जनरल रावत की सैन्य यात्रा उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल से शुरू हुई और भारतीय सैन्य अकादमी से कमीशन प्राप्त करते ही उन्होंने अपने दृढ़, अनुशासित और जमीनी नेतृत्व का परिचय दिया। 11 गोरखा राइफल्स में सेवा के दौरान उनके कार्यों ने उन्हें एक सख़्त लेकिन मानवीय कमांडर के रूप में पहचान दिलाई। कश्मीर और उत्तर-पूर्व जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में उनके नेतृत्व में चलाए गए अभियानों ने सेना की क्षमता और रणनीति दोनों को मजबूती दी।
सीडीएस का पदभार संभालना उनके करियर का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ रहा। भारत के पहले चीफ़ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ के रूप में उन्होंने तीनों सेनाओं के एकीकरण, संसाधनों के साझा उपयोग, थिएटर कमांड्स की तैयारी, सैन्य आधुनिकीकरण और स्वदेशी रक्षा उत्पादन की दिशा में नए युग की शुरुआत की। उनकी सोच यह थी कि भविष्य के युद्ध पारंपरिक नहीं होंगे; साइबर, अंतरिक्ष और तकनीकी क्षमताएँ ही निर्णायक हथियार बनेंगी। इसीलिए उन्होंने तकनीकी आधारित सुरक्षा ढांचे को प्राथमिकता दी।
उनका नेतृत्व साहस और स्पष्टवादिता से परिपूर्ण था। वे निर्णय लेने में निर्भीक, राष्ट्र हित में अडिग और सैनिकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय थे। उनका सिद्धांत सरल थाl नेता वह है जो सबसे आगे खड़ा होकर नेतृत्व करे। यह व्यवहार उन्हें सेना के हर स्तर पर सम्मान दिलाता था।
हेलीकॉप्टर दुर्घटना में उनका निधन देश के लिए गहरा आघात था, परंतु उनके द्वारा शुरू किए गए सुधार आज भी भारतीय रक्षा प्रणाली को मजबूत बना रहे हैं। सैन्य एकीकरण और आत्मनिर्भर रक्षा व्यवस्था की दिशा में उठाए गए कदम उनकी दूरदर्शिता को स्थायी बनाते हैं।
जनरल बिपिन रावत केवल एक सैन्य अधिकारी नहीं थे, बल्कि भारतीय रक्षा चिंतन को आधुनिक और सक्षम बनाने वाले शिल्पकार थे। उनका जीवन यह संदेश देता है कि राष्ट्र सुरक्षा केवल ताक़त का विषय नहीं, बल्कि दृष्टि, साहस और निरंतर सुधार की प्रक्रिया है। उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

तेज बहादुर सप्रू: न्यायपरक विचारधारा और राष्ट्रनिर्माण का उज्ज्वल स्वर

नवनीत मिश्र

भारत के स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास केवल उन वीर सेनानियों का स्मरण नहीं करता जिन्होंने बंदूकों और नारों के साथ लड़ाई लड़ी, बल्कि उन विद्वान चिंतकों, समाज सुधारकों और विधिवेत्ताओं को भी उतनी ही श्रद्धा से याद करता है जिन्होंने अपनी बुद्धि, तर्क और दृढ़ नैतिकता से राष्ट्रनिर्माण की आधारशिला रखी। इन्हीं महान विभूतियों में एक प्रमुख नाम है, तेज बहादुर सप्रू। आज उनकी जयंती पर उन्हें स्मरण करना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने भारत के सार्वजनिक जीवन में न्याय, संयम, संवाद और प्रगतिशील विचारधारा के अद्भुत संतुलन को स्थापित किया।
तेज बहादुर सप्रू अपने समय के सबसे प्रतिष्ठित विधिवेत्ताओं में गिने जाते थे। कानून की उनकी गहरी समझ और तार्किक क्षमता के कारण वे ब्रिटिश सरकार से लेकर राष्ट्रीय आंदोलनों तक, सभी के लिए एक विश्वसनीय व्यक्तित्व थे। उन्होंने आज़ाद हिंद फौज के सेनानियों के मुकदमों में पूर्ण नैतिक साहस के साथ हिस्सा लिया। यह केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि भारत की अस्मिता और सम्मान की रक्षा का प्रश्न था। सप्रू ने यह साबित किया कि न्याय का धर्म किसी शासन या सत्ता का नहीं, बल्कि मानवता का होता है।

सप्रू न केवल एक कुशल वकील थे, बल्कि राष्ट्र की नीतियों और संवैधानिक दिशा को आकार देने में भी उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। वे कांग्रेस और ब्रिटिश सरकार, दोनों के बीच एक सेतु के रूप में उभरे, एक ऐसा सेतु जो टकराव से अधिक संवाद और समाधान पर विश्वास करता था। उनका मानना था कि स्वतंत्रता आंदोलन को भावनाओं के साथ-साथ तर्क, विवेक और विधिक ढांचे की भी आवश्यकता है। राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस में उनकी भूमिका इसी संतुलित दृष्टि का प्रमाण है।
तेज बहादुर सप्रू समाज के व्यापक उत्थान के समर्थक थे। वे शिक्षा, सामाजिक न्याय और आधुनिकता पर आधारित समाज का निर्माण करना चाहते थे। उनका विश्वास था कि भारत को केवल राजनीतिक स्वतंत्रता ही नहीं, बल्कि सामाजिक जागृति और वैज्ञानिक सोच की भी आवश्यकता है। उन्होंने सांप्रदायिक सद्भाव, महिलाओं की उन्नति और जातिगत संकीर्णता समाप्त करने की दिशा में सतत कार्य किया।
सप्रू का व्यक्तित्व गहन अध्ययन, नैतिक दृढ़ता और शांत व्यवहार के लिए जाना जाता था। वे मतभेदों को संघर्ष नहीं, बल्कि संवाद का आधार मानते थे। उनके भीतर गहरी भारतीयता थी, पर सोच पूर्णतः आधुनिक और मानवतावादी। राष्ट्रवाद उनके लिए उग्रता नहीं, बल्कि कर्तव्य, अनुशासन और सत्य के प्रति प्रतिबद्धता था।
आज जब समाज तेजी से बदल रहा है और सार्वजनिक संवाद में धैर्य तथा विवेक कम होता जा रहा है, तेज बहादुर सप्रू का जीवन हमें यह संदेश देता है कि राष्ट्र का निर्माण मजबूत विचारों से होता है, शोर से नहीं। कानून और न्याय केवल पेशा नहीं, बल्कि एक नैतिक जिम्मेदारी है। सुधार का मार्ग संवाद, सहिष्णुता और संवेदना से होकर जाता है।
तेज बहादुर सप्रू की जयंती पर हम उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं। वे उन महान भारतीयों में से हैं, जिनका योगदान हमें निरंतर यह याद दिलाता है कि राष्ट्र की शक्ति उसके विचारों, संस्थानों और न्याय की परंपराओं में निहित होती है।

बाल कृष्ण शर्मा ‘नवीन’ : राष्ट्रीय चेतना के प्रखर कवि और बहुआयामी साहित्यकार

हिंदी साहित्य के स्वर्णिम इतिहास में बाल कृष्ण शर्मा ‘नवीन’ उन रचनाकारों में प्रमुख हैं, जिन्होंने अपनी कविता, पत्रकारिता और चिंतन के माध्यम से स्वाधीनता आंदोलन को वैचारिक धार प्रदान की। वे केवल कवि नहीं थे, बल्कि युग-निर्माता साहित्यकार और निर्भीक राष्ट्रभक्त थे, जिनकी लेखनी में ओज, तेज और संघर्ष की गूँज स्पष्ट दिखाई देती है।
‘नवीन’ की रचनाओं में राष्ट्रभावना का सशक्त स्वर उभरता है। उनका काव्य जनता को जगाने वाला, आत्मबल से भरने वाला और गुलामी के अंधकार में प्रकाश दिखाने वाला था। उनकी कविताएँ केवल भावोत्प्रेरक नहीं थीं, बल्कि क्रांतिकारी चेतना को जगाने का माध्यम भी थीं, जो जनमानस को विदेशी शासन के विरुद्ध खड़े होने का साहस देती थीं।
पत्रकारिता में भी उनका योगदान अद्वितीय रहा। उन्होंने ‘मतवाला’ सहित अनेक राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन के पक्ष में निर्भीक लेखन किया। सत्य के समर्थन और अन्याय के प्रतिरोध को उन्होंने अपनी पत्रकारिता का मूल सिद्धांत बनाया। प्रतिबंधों और दंड का सामना करने पर भी उन्होंने कलम की स्वतंत्रता से समझौता नहीं किया।
भाषा और अभिव्यक्ति के स्तर पर ‘नवीन’ एक सिद्धहस्त शिल्पी थे। उनके काव्य में छंद, लय, ऊर्जा और ओज का अद्भुत संतुलन मिलता है। वे हिंदी को केवल साहित्य की भाषा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय अस्मिता की आवाज मानते थे। उनके शब्द, उनकी शैली और उनकी कविता का स्वभाव पाठकों को अपने भीतर से जोड़ लेता है।
स्वतंत्रता आंदोलन में उन्होंने प्रत्यक्ष भागीदारी निभाई और कई बार जेल भी गए। साहित्य, समाज और राजनीति—तीनों क्षेत्रों में उनकी सक्रियता उनके बहुआयामी व्यक्तित्व का प्रमाण है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी उन्होंने राष्ट्रहित और जनहित को अपने कार्यों का केंद्र बनाए रखा।
बाल कृष्ण शर्मा ‘नवीन’ की साहित्यिक विरासत आज भी प्रेरणा का स्रोत है। उनकी कविताएँ, लेख और भाषण राष्ट्रीय आत्मसम्मान को जगाने वाली ध्वनि से भरे हैं। उनका जीवन यह संदेश देता है कि साहित्य केवल सौंदर्य का विषय नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का माध्यम भी है।
नवीन की विरासत हमें याद दिलाती है कि शब्दों में वह शक्ति होती है, जो पीढ़ियों की दिशा बदल सकती है और राष्ट्र की चेतना को जागृत कर सकती है।

सोम से शशि तक: चन्द्र की आध्यात्मिक यात्रा और वैज्ञानिक सच्चाई

चन्द्र की शास्त्रोक्त महिमा – भावना, विज्ञान और ब्रह्मांडीय चेतना का शाश्वत संगम

चन्द्रमा — केवल रात्रि का उजाला भर नहीं, बल्कि मानव सभ्यता की गहराइयों में समाया एक शाश्वत भाव-तत्त्व है। वह आकाश में मौन रहकर भी हमारे भीतर की अनकही वेदनाओं, आशाओं और स्मृतियों का साक्षी बनता आया है। वैदिक ऋचाओं से लेकर आधुनिक वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं तक, चन्द्रमा निरंतर मनुष्य के चिंतन का केंद्र रहा है। यह केवल एक खगोलीय पिंड नहीं, बल्कि भावना, आस्था, विज्ञान और ज्ञान का संगम है — एक ऐसा प्रकाश जो अंधकार को ही नहीं, अज्ञान को भी चीर देता है।

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भारतीय शास्त्रों में चन्द्र देव को सोम कहा गया है — अमृत का प्रतीक। ऋग्वेद में सोम रस को दिव्यता का स्रोत माना गया है, जो देवताओं को शक्ति प्रदान करता है। यह कल्पना नहीं, बल्कि उस सूक्ष्म ऊर्जा की ओर संकेत है जिसे आज विज्ञान कॉस्मिक एनर्जी कहता है। चन्द्र की किरणों को प्राचीन ऋषियों ने औषधीय बताया था। तपस्या में बैठे साधकों ने चन्द्र-प्रकाश को ध्यान और मानसिक स्थिरता का सहारा बनाया। आयुर्वेद में आज भी पूर्णिमा की रात को ग्रहण की गई औषधियाँ अधिक प्रभावी मानी जाती हैं। यह शास्त्र और विज्ञान का एक अद्भुत संयोग है।

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शिव के मस्तक पर विराजमान चन्द्रकला केवल अलंकार नहीं, बल्कि यह दर्शाती है कि विनाश और सृजन के बीच संतुलन का सूत्र चन्द्र के हाथ में है। जहां सूर्य बाह्य जीवन को ऊर्जा देता है, वहीं चन्द्र अंतर्मन को शीतलता, भावनात्मक स्थिरता और सृजनात्मक शक्ति प्रदान करता है। यही कारण है कि भारतीय मनोविज्ञान में चन्द्रमा को मन का कारक माना गया है। ज्योतिष के अनुसार जिनकी कुंडली में चन्द्र बलवान होता है, वे भावनात्मक रूप से स्थिर, संवेदनशील और रचनात्मक होते हैं।

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आधुनिक विज्ञान भी मान चुका है कि चन्द्रमा पृथ्वी पर गहरा प्रभाव डालता है। समुद्र की ज्वार-भाटा प्रणाली चन्द्र के गुरुत्वाकर्षण बल से संचालित होती है। वैज्ञानिक शोधों में यह भी प्रमाणित हुआ है कि चन्द्र की कलाएँ मानव मस्तिष्क, नींद, व्यवहार और भावनात्मक उतार-चढ़ाव से जुड़ी हैं। पूर्णिमा और अमावस्या के समय मानसिक अस्थिरता, बेचैनी और यहां तक कि अपराधों में भी वृद्धि दर्ज की गई है। यह वही सत्य है जिसे प्राचीन शास्त्र युगों पहले जान चुका था।

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लोककथाओं में चन्द्र प्रेम का साक्षी है। कवियों ने उसे प्रेमिका का चेहरा, माँ का आँचल और विरह का साथी बताया। कालिदास से लेकर निराला तक सभी ने चन्द्र को केवल देखा नहीं, बल्कि महसूस किया। गांवों की बूढ़ी दादी आज भी बच्चों को “चंदा मामा” की कहानी सुनाती हैं, क्योंकि चन्द्र स्नेह का, सुरक्षा का और अपनेपन का प्रतीक है। यह भावनात्मक जुड़ाव किसी वैज्ञानिक सूत्र से नहीं, बल्कि आत्मा की गहराइयों से उपजा है।

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पुराणों में चन्द्र की कथा अत्यंत रोचक और शिक्षाप्रद है। दक्ष प्रजापति की 27 कन्याओं — जो 27 नक्षत्रों का प्रतिनिधित्व करती हैं — से चन्द्र का विवाह होता है। लेकिन वह केवल रोहिणी से अधिक प्रेम करते हैं। इस पक्षपात से क्रोधित होकर दक्ष उन्हें श्राप देते हैं कि वे क्षीण हो जाएंगे। देवताओं की मध्यस्थता से यह श्राप क्षणिक मृत्यु और पुनर्जन्म के चक्र में बदल जाता है — जो अमावस्या से पूर्णिमा तक की यात्रा है। यही चन्द्र की कलाओं का रहस्य है। यह कथा हमें सिखाती है कि असंतुलन पतन की ओर ले जाता है, और संतुलन ही जीवन का मूल मंत्र है।

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चन्द्र की समानता (समानार्थ) भी सांस्कृतिक रूप से अत्यंत व्यापक है — सोम, शशि, राकेश, इन्दु, चन्द्रदेव, निशाकर, हिमांशु, शशांक जैसे अनेक नाम उसके विभिन्न गुणों को दर्शाते हैं। वह शीतल भी है, कोमल भी, पर प्रभाव में अद्वितीय है। जिस प्रकार चन्द्र सूर्य का प्रकाश लेकर अंधेरे को उजाला देता है, उसी प्रकार ज्ञानवान व्यक्ति समाज में प्रकाश का प्रसार करता है। यही चन्द्र-संदेश है — तुम स्वयं प्रकाश बनो।

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आज जब मानव चन्द्रमा तक पहुंच चुका है, अंतरिक्ष में बसाहट के सपने देख रहा है, तब यह आवश्यक हो गया है कि हम उसे केवल संसाधन नहीं, बल्कि संस्कार समझें। वह हमारी धरती का रक्षक है — बड़े उल्कापिंडों को अपने गुरुत्व से रोक लेने वाला प्रहरी। यदि चन्द्र न होता तो पृथ्वी की गति, ऋतुचक्र और जीवन संरचना इतनी संतुलित न होती।

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चन्द्र हमें सिखाता है कि चमक हमेशा उग्र नहीं होती, कभी-कभी वह शीतल होती है, पर उसका असर गहरा होता है। वह मौन रहकर भी संवाद करता है, सवाल पूछता है और उत्तर भी देता है — बस सुनने की दृष्टि चाहिए।

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एपिसोड 5 में चन्द्र केवल आकाश का पिंड नहीं, बल्कि मानव चेतना का दर्पण बनकर उभरता है — जहां शास्त्र, विज्ञान और भावना एक हो जाते हैं।

वे लोग जिन्होंने कलम , तलवार और नीति से इतिहास रचा

8 दिसंबर—हिंदुस्तान के वे अमर सितारे, जिनकी विदाई ने इतिहास को मौन कर दिया

भारत का इतिहास महान व्यक्तित्वों की स्मृतियों से भरा हुआ है। 8 दिसंबर की तारीख देश के लिए हमेशा भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण रही है, क्योंकि इस दिन कई ऐसे रत्नों ने दुनिया को अलविदा कहा, जिन्होंने राष्ट्र निर्माण, साहित्य, राजनीति और स्वतंत्रता संग्राम में अद्वितीय योगदान दिया। इन विभूतियों की जीवनगाथा न केवल प्रेरणा देती है, बल्कि यह भी सिखाती है कि समर्पण और देशप्रेम से इतिहास रचा जाता है।

  1. जनरल बिपिन रावत (निधन: 8 दिसंबर 2021)

जनरल बिपिन रावत भारत के प्रथम चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) थे। उनका जन्म 16 मार्च 1958 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जनपद स्थित सैणीक परिवार में हुआ था। वे भारतीय सेना के एक साहसी और दूरदर्शी अधिकारी माने जाते थे। उन्होंने भारतीय मिलिट्री अकादमी, देहरादून से प्रशिक्षण प्राप्त किया और देश की सीमाओं पर कई महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों का नेतृत्व किया।

2016 में वे भारतीय सेना के 27वें सेनाध्यक्ष बने। उनके कार्यकाल में सेना के आधुनिकीकरण, आतंकरोधी रणनीतियों और सीमाई सुरक्षा को नया आयाम मिला। 2021 में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में उनका निधन हो गया, जिससे पूरा देश शोक में डूब गया। देश के लिए उनका योगदान सदैव स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा।

  1. रमाशंकर यादव ‘विद्रोही’ (निधन: 8 दिसंबर 2015)

रमाशंकर यादव ‘विद्रोही’ का जन्म उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जनपद में हुआ था। वे जनकवि के रूप में प्रसिद्ध थे और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), नई दिल्ली में विद्यार्थियों के बीच अत्यंत लोकप्रिय थे। उनकी कविताओं में जनसंघर्ष, सामाजिक अन्याय और शोषण के विरुद्ध क्रांति की आवाज स्पष्ट सुनाई देती थी।

वे किसी पद या प्रतिष्ठा के मोहताज नहीं थे बल्कि जनता की आवाज बनकर समाज की कुरीतियों को ललकारते थे। उनका जीवन संघर्ष और साहित्य को समर्पित रहा। विद्रोही जी ने सशक्त शब्दों के माध्यम से लोगों को सोचने और लड़ने की ताकत दी।

  1. विजया देवी (निधन: 8 दिसंबर 2005)

विजया देवी एक प्रतिष्ठित भारतीय राजकुमारी थीं, जिनका संबंध एक प्रमुख रियासत से था। उनका जीवन सामाजिक दायित्वों एवं महिला सशक्तिकरण की दिशा में कार्यों के लिए जाना जाता है। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास से जुड़े कई कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई।

उनकी सादगी, परोपकार और सामाजिक प्रतिबद्धता के लिए उन्हें सदा स्मरण किया जाता रहेगा। राजसी जीवन के बावजूद वे आमजन के दुख-दर्द को समझती थीं और उनकी सहायता के लिए आगे रहती थीं।

  1. श्रीपति मिश्रा (निधन: 8 दिसंबर 2002)

श्रीपति मिश्रा उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद से ताल्लुक रखते थे और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शुमार थे। वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रह चुके थे। उनके राजनीतिक जीवन का केंद्र जनता की समस्याओं का समाधान और प्रशासनिक सुधार रहा।

उन्होंने शिक्षा, सड़क और ग्रामीण विकास क्षेत्र में कई योजनाओं को आगे बढ़ाया। सरल स्वभाव और जुझारू नेतृत्व के कारण वे जनता में लोकप्रिय रहे। उनके प्रयासों ने प्रदेश की प्रशासनिक दिशा को लंबे समय तक प्रभावित किया।

  1. भाई परमानन्द (निधन: 8 दिसंबर 1947)

भाई परमानन्द का जन्म पंजाब प्रांत (वर्तमान हरियाणा/पाकिस्तान क्षेत्र, लायलपुर के आसपास) में हुआ था। वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी, समाज सुधारक और चिंतक थे। ‘गदर आंदोलन’ से उनका गहरा जुड़ाव रहा और उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ क्रांति की अलख जगाई।

ब्रिटिश शासन के खिलाफ आवाज उठाने के कारण उन्हें कई बार कारावास भी झेलना पड़ा। स्वतंत्रता के बाद भी वे राष्ट्र के नैतिक व सामाजिक उत्थान के लिए कार्य करते रहे। उनका जीवन बलिदान, निष्ठा और राष्ट्रप्रेम का प्रतीक है।

8 दिसंबर – इतिहास की उन महान हस्तियों का दिन, जिन्होंने भारत की आत्मा को नई पहचान दी

8 दिसंबर का दिन भारतीय और विश्व इतिहास में विशेष महत्व रखता है। इस दिन कई ऐसे महान व्यक्तित्वों ने जन्म लिया जिन्होंने राजनीति, कला, साहित्य, खेल, स्वतंत्रता संग्राम और समाज सेवा के क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ी। उनका जीवन संघर्ष, साधना, सेवा और उपलब्धियों से भरा रहा है। आइए, जानें उनके जन्म स्थान, जनपद, प्रदेश और योगदान के बारे में विस्तार से —

🔹 अमी घिया (1956) – बैडमिंटन जगत की चमकता सितारा
अमी घिया का जन्म भारत के गुजरात प्रदेश के अहमदाबाद जनपद में हुआ था। वे भारतीय महिला बैडमिंटन की अग्रणी खिलाड़ियों में गिनी जाती हैं। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व किया। एशियन बैडमिंटन सर्किट में उनका प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा। खेल के प्रति उनकी निष्ठा और अनुशासन ने युवा खिलाड़ियों को प्रेरित किया। उन्होंने यह सिद्ध किया कि भारतीय महिलाएं भी खेल के अंतरराष्ट्रीय मंच पर परचम लहरा सकती हैं।

🔹 शर्मिला टैगोर (1946) – भारतीय सिनेमा की सदाबहार अभिनेत्री
शर्मिला टैगोर का जन्म हैदराबाद (तत्कालीन निजाम राज्य, अब तेलंगाना) में हुआ। वे टैगोर वंश की समृद्ध विरासत की प्रतिनिधि हैं। उन्होंने हिन्दी और बंगाली सिनेमा में सैकड़ों यादगार फिल्मों में अभिनय किया। आराधना, कश्मीर की कली और अमर प्रेम जैसी फिल्में उन्हें अमर कर गईं। वे भारतीय फिल्म जगत की एक प्रभावशाली महिला स्वरूप बनकर उभरीं। अभिनय के साथ-साथ वे सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहीं।

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🔹 धर्मेंद्र (1935) – सिनेमा का ‘ही-मैन’
धर्मेंद्र का जन्म पंजाब के लुधियाना जनपद के साहनेवाल गांव में हुआ था। भारतीय फिल्म उद्योग में उनका योगदान ऐतिहासिक है। ‘शोले’, ‘धरमवीर’, ‘सीता और गीता’ जैसी सुपरहिट फिल्मों ने उन्हें अमर बना दिया। उन्होंने रोमांटिक, एक्शन और पारिवारिक हर प्रकार के किरदारों में स्वयं को सिद्ध किया। वे भारतीय जनमानस के दिलों में आज भी बसते हैं। धर्मेंद्र ने अभिनय के साथ राजनीति में भी कदम रखा और लोकसभा सदस्य बने।

🔹 प्रकाश सिंह बादल (1927) – पंजाब की राजनीति के स्तंभ
प्रकाश सिंह बादल का जन्म पंजाब के श्री मुक्तसर साहिब जनपद में हुआ था। वे पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री रहे और राजनीति में लंबा संघर्ष किया। उन्होंने अकाली दल को एक मजबूत राजनीतिक पहचान दिलाई। ग्रामीण विकास, किसान हित और सिख समुदाय के हक के लिए उन्होंने व्यापक कार्य किए। वे देश के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्रियों में से एक रहे। उनका जीवन सादगी, जनसेवा और प्रतिबद्धता का प्रतीक रहा।

🔹 अमरनाथ विद्यालंकार (1901) – स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी पत्रकार
अमरनाथ विद्यालंकार का जन्म हरियाणा राज्य के रोहतक जनपद में हुआ था। वे एक निर्भीक स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार और समाजसेवी थे। उन्होंने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध जनचेतना को जाग्रत करने के लिए लेखनी को हथियार बनाया। वे संसद सदस्य भी रहे और देश की नीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका योगदान भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।

🔹 उदय शंकर (1900) – नृत्य जगत के जनक
उदय शंकर का जन्म राजस्थान के उदयपुर में हुआ। वे विश्व विख्यात शास्त्रीय नर्तक, कोरियोग्राफर और बैले निर्माता थे। उन्होंने भारतीय नृत्य को विश्व मंच पर प्रतिष्ठा दिलाई। पेरिस और अमेरिका जैसे देशों में भारत की सांस्कृतिक विरासत को उन्होंने नई पहचान दिलाई। उनका नृत्य भारतीय परंपरा और आधुनिकता का अनोखा संगम था। वे भारतीय नृत्य पुनर्जागरण के अग्रदूत कहे जाते हैं।

🔹 बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ (1897) – साहित्य जगत की प्रखर आवाज़
उनका जन्म मध्य प्रदेश के ग्वालियर जनपद में हुआ था। वे एक सुप्रसिद्ध हिंदी कवि, गद्यकार और ओजस्वी वक्ता थे। उनके लेखों और कविताओं में राष्ट्रभक्ति की स्पष्ट झलक मिलती है। वे महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित थे और समाज सुधार के लिए लेखनी को माध्यम बनाया। हिंदी साहित्य में उनका योगदान चिरकालीन है।

🔹 नारायण शास्त्री मराठे (1877) – मराठी साहित्य के मर्मज्ञ
नारायण शास्त्री मराठे का जन्म महाराष्ट्र राज्य में हुआ था। वे एक महान मराठी विद्वान, लेखक और शिक्षाविद थे। उन्होंने संस्कृत और मराठी साहित्य को समृद्ध किया। उनके लेखन में भारतीय दर्शन, संस्कृति और नैतिकता का गहरा प्रभाव दिखता है। वे एक श्रेष्ठ शिक्षक भी थे जिन्होंने अनेक विद्यार्थियों को ज्ञान का मार्ग दिखाया।

🔹 तेज बहादुर सप्रू (1875) – उदारवादी राजनीति के समर्थक
तेज बहादुर सप्रू का जन्म अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। वे एक प्रख्यात विधिवेत्ता और उदारवादी नेता थे। उन्होंने संविधान निर्माण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे हिन्दू-मुस्लिम एकता और संवैधानिक सुधारों के प्रबल पक्षधर थे। उनके विचार भारत के लोकतांत्रिक ढांचे की नींव बने।

🔹 बालाजी बाजीराव (1721) – मराठा साम्राज्य के महान पेशवा
बालाजी बाजीराव का जन्म महाराष्ट्र के पुणे क्षेत्र में हुआ था। वे मराठा साम्राज्य के दूसरे पेशवा बने और साम्राज्य को उत्तर भारत तक विस्तारित किया। उनकी रणनीति, दूरदर्शिता और नेतृत्व क्षमता अद्भुत थी। उनके समय में मराठा शक्ति अपने चरम पर पहुँची और मुगलों की सत्ता कमजोर पड़ गई। भारतीय इतिहास में वे एक सशक्त प्रशासक और वीर योद्धा के रूप में स्मरण किए जाते हैं।

ग्रह-नक्षत्र आज किस पर रहेंगे मेहरबान?

8 दिसंबर 2025 का विस्तृत दैनिक राशिफल – सभी 12 राशियों का संपूर्ण भविष्यफल

Pandit Satya Prakash Pandey

मेष राशि – Aries (♈) | अक्षर: चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ
आज कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। रुके हुए काम गति पकड़ेंगे।
कार्यक्षेत्र/व्यवसाय: नई योजनाएं लाभ देंगी, यात्रा से फायदा।
शिक्षा: प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लाभ।
कला-संगीत: रचनात्मकता बढ़ेगी।
राजनीति/प्रशासन: प्रभाव बढ़ेगा, नेतृत्व अवसर मिलेंगे।
आर्थिक स्थिति: आय में वृद्धि के संकेत।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 5, 7, 9
पूजा: हनुमान जी की पूजा करें।

वृष राशि – Taurus (♉) | अक्षर: ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो
ध्यान और धैर्य से काम करें, लाभ निश्चित है।
कार्यक्षेत्र/व्यवसाय: फाइनेंस व रियल एस्टेट में लाभ।
शिक्षा: एकाग्रता बढ़ेगी।
कला-संगीत: स्थिर सफलता के योग।
राजनीति/प्रशासन: योजनाएं सफल होंगी।
आर्थिक स्थिति: धन आगमन की संभावना।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 6, 8, 9
पूजा: देवी लक्ष्मी की आराधना करें।

मिथुन राशि – Gemini (♊) | अक्षर: का, की, कु, घ, ङ, छ, के, को, हा
आलस्य छोड़ें, अवसर भरपूर हैं।
कार्यक्षेत्र/व्यवसाय: मीडिया, मार्केटिंग व आईटी में सफलता।
शिक्षा: सीखने की क्षमता बढ़ेगी।
कला-संगीत: रचनात्मक ऊर्जा मिलेगी।
राजनीति/प्रशासन: भाषण से प्रभाव डालेंगे।
आर्थिक स्थिति: आय के नए स्रोत बनेंगे।
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 7, 8, 9
पूजा: गणेश जी का पूजन करें।

कर्क राशि – Cancer (♋) | अक्षर: ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो
घर-परिवार में सुख-शांति रहेगी।
कार्यक्षेत्र/व्यवसाय: पारिवारिक सहयोग से लाभ।
शिक्षा: ध्यान केंद्रित रहेगा।
कला-संगीत: भावनात्मक रचनाएं सफल।
राजनीति/प्रशासन: सामाजिक मान बढ़ेगा।
आर्थिक स्थिति: संतुलित रहेगी।
शुभ रंग: क्रीम
शुभ अंक: 4, 6, 9
पूजा: शिव-पार्वती की पूजा करें।

सिंह राशि – Leo (♌) | अक्षर: मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे
प्रतिष्ठा और सम्मान में वृद्धि।
कार्यक्षेत्र/व्यवसाय: प्रमोशन के योग।
शिक्षा: सफलता के संकेत।
कला-संगीत: मंच पर सराहना।
राजनीति/प्रशासन: बड़ा अवसर मिल सकता है।
आर्थिक स्थिति: मजबूत होगी।
शुभ रंग: सुनहरा
शुभ अंक: 4, 6, 8
पूजा: सूर्य देव को जल अर्पित करें।

कन्या राशि – Virgo (♍) | अक्षर: टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो
संयम से परिस्थितियां नियंत्रित करें।
कार्यक्षेत्र/व्यवसाय: धैर्य से लाभ।
शिक्षा: मेहनत की जरूरत।
कला-संगीत: थोड़ा संघर्ष रहेगा।
राजनीति/प्रशासन: संयम जरूरी।
आर्थिक स्थिति: सामान्य रहेगी।
शुभ रंग: हल्का हरा
शुभ अंक: 3, 6, 9
पूजा: दुर्गा माता की पूजा करें।

तुला राशि – Libra (♎) | अक्षर: रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते
संतुलन से सफलता मिलेगी।
कार्यक्षेत्र/व्यवसाय: व्यापार में फायदा।
शिक्षा: अच्छे परिणाम।
कला-संगीत: प्रशंसा मिलेगी।
राजनीति/प्रशासन: सहयोग बढ़ेगा।
आर्थिक स्थिति: लाभदायक।
शुभ रंग: गुलाबी
शुभ अंक: 5, 7, 8
पूजा: माता लक्ष्मी की पूजा करें।

वृश्चिक राशि – Scorpio (♏) | अक्षर: तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू
नई ऊर्जा का संचार होगा।
कार्यक्षेत्र/व्यवसाय: साझेदारी में लाभ।
शिक्षा: फोकस बढ़ेगा।
कला-संगीत: सराहना मिलेगी।
राजनीति/प्रशासन: गुप्त शत्रु से सावधान रहें।
आर्थिक स्थिति: सुधरेगी।
शुभ रंग: मरून
शुभ अंक: 3, 5, 7
पूजा: महाकाल का स्मरण करें।

धनु राशि – Sagittarius (♐) | अक्षर: ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे
भाग्य आपका साथ देगा।
कार्यक्षेत्र/व्यवसाय: विदेश संबंधी कार्य सफल।
शिक्षा: ज्ञान में वृद्धि।
कला-संगीत: नई प्रेरणा मिलेगी।
राजनीति/प्रशासन: प्रभाव बढ़ेगा।
आर्थिक स्थिति: समृद्धि के योग।
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 3, 6, 7
पूजा: विष्णु भगवान की पूजा करें।

मकर राशि – Capricorn (♑) | अक्षर: भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी
धीरे-धीरे उन्नति होगी।
कार्यक्षेत्र/व्यवसाय: टीमवर्क से सफलता।
शिक्षा: अच्छे परिणाम।
कला-संगीत: स्थिर प्रगति।
राजनीति/प्रशासन: समर्थन मिलेगा।
आर्थिक स्थिति: मजबूत होगी।
शुभ रंग: नीला
शुभ अंक: 3, 5, 7
पूजा: शनिदेव की पूजा करें।

कुंभ राशि – Aquarius (♒) | अक्षर: गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा
नवाचार और रचनात्मकता बढ़ेगी।
कार्यक्षेत्र/व्यवसाय: नए अवसर मिलेंगे।
शिक्षा: शोध में लाभ।
कला-संगीत: पहचान बनेगी।
राजनीति/प्रशासन: नई रणनीति सफल।
आर्थिक स्थिति: लाभदायक।
शुभ रंग: आसमानी
शुभ अंक: 2, 4, 6
पूजा: शिव जी की पूजा करें।

मीन राशि – Pisces (♓) | अक्षर: दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची
धैर्य और विवेक जरूरी है।
कार्यक्षेत्र/व्यवसाय: निर्णय सोच-समझकर लें।
शिक्षा: ध्यान भटक सकता है।
कला-संगीत: भावनात्मक गहराई बढ़ेगी।
राजनीति/प्रशासन: सावधानी जरूरी।
आर्थिक स्थिति: सामान्य रहेगी।
शुभ रंग: बैंगनी
शुभ अंक: 3, 5, 7
पूजा: माता सरस्वती की पूजा करें।

नोट: यह राशिफल पंडित सत्य प्रकाश पाण्डेय द्वारा तैयार किया गया सामान्य ग्रह-गोचर आधारित अनुमान है। राष्ट्र की परम्परा इस ज्योतिष की पुष्टि नहीं करता। अपने जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय से पहले किसी योग्य ज्योतिष विशेषज्ञ से अपनी जन्मकुंडली अवश्य दिखाएं।

गृह कलह शांति उपाय: घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा लाने के प्रभावी तरीके

आज के समय में पारिवारिक तनाव और आपसी मनमुटाव एक आम समस्या बनती जा रही है। छोटी-छोटी बातों पर होने वाला विवाद धीरे-धीरे बड़े गृह कलह का रूप ले लेता है, जिससे घर का वातावरण नकारात्मक और अशांत हो जाता है। ऐसे में ज़रूरत है सही गृह कलह शांति उपाय अपनाने की, ताकि घर में फिर से सुख-शांति और प्रेम का माहौल बन सके।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, घर की साफ-सफाई और सकारात्मक ऊर्जा का गहरा संबंध मन की शांति से होता है। सप्ताह में कम से कम तीन दिन नमक मिले पानी से पूरे घर में पोछा लगाना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और गृह कलह शांति उपाय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हालांकि, गुरुवार के दिन नमक का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

तुलसी और देव पूजन का महत्व

तुलसी को हिंदू धर्म में पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। प्रतिदिन सुबह तुलसी को जल अर्पित करें और शाम को दीपक जलाएं। ऐसा करने से घर में सुख-शांति का वास बना रहता है। ध्यान रहे कि रविवार के दिन तुलसी को जल न दें। इसके साथ ही, भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की नियमित पूजा करने से मानसिक तनाव कम होता है और घर में समृद्धि आती है, जो कि एक प्रभावी गृह कलह शांति उपाय है।

दान और सेवा से मिटेगा तनाव

पहली रोटी गाय को और अंतिम रोटी कुत्ते को खिलाना भी एक शुभ उपाय माना गया है। ऐसा करने से ग्रह दोष शांत होते हैं और घर का वातावरण शांत बना रहता है। यह प्राचीन समय से चला आ रहा एक शक्तिशाली गृह कलह शांति उपाय है, जो कई परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है।

मंत्र जाप से बढ़े सकारात्मकता

‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ और ‘कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने’ जैसे मंत्रों का नियमित जाप मानसिक शांति प्रदान करता है। यदि परिवार के सभी सदस्य मिलकर प्रतिदिन कुछ समय इन मंत्रों का जाप करें, तो आपसी मतभेद दूर होने लगते हैं। विशेष रूप से सास और बहू के बीच संबंध मधुर बनाने के लिए यह गृह कलह शांति उपाय अत्यधिक प्रभावी माना गया है।

वास्तु के उपाय

घर की पूर्व दिशा में कपूर जलाना, नियमित गंगाजल का छिड़काव करना और टूटे-फूटे सामान को बाहर फेंक देना नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है। इससे न केवल मानसिक शांति मिलती है बल्कि घर में सौहार्दपूर्ण वातावरण भी बनता है। यही कारण है कि वास्तु शास्त्र में इन उपायों को प्रमुख गृह कलह शांति उपाय माना गया है।

व्यवहार में लाएं मधुरता

किसी भी धार्मिक या आध्यात्मिक उपाय से अधिक आवश्यक है हमारा व्यवहार। ऊंची आवाज में बात करना, बार-बार की शिकायतें और क्रोध घर की शांति को भंग करते हैं। इसलिए, वाणी में मधुरता, क्षमा का भाव और संयम रखना सबसे बड़ा गृह कलह शांति उपाय है। जब घर के सदस्य एक-दूसरे की बात समझने लगते हैं, तो आधी समस्या अपने आप समाप्त हो जाती है।

अंततः, यदि परिवार के सभी सदस्य मिलकर इन सरल लेकिन असरदार गृह कलह शांति उपाय को अपनाएं, तो न केवल कलह समाप्त होगी, बल्कि घर में स्थायी सुख, प्रेम और सकारात्मकता का वास होगा।

आर्टिफिशियल चोकर नेकलेस: पुरुषों और महिलाओं के लुक को निखारने का नया फैशन ट्रेंड

आज के दौर में आकर्षक दिखना सिर्फ कपड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि सही एक्सेसरीज का चुनाव भी उतना ही जरूरी है। चाहे शादी समारोह हो, पार्टी हो या कोई पारंपरिक कार्यक्रम — ज्वेलरी आपके पूरे लुक को नया आयाम देती है। खासकर आर्टिफिशियल चोकर नेकलेस स्टाइल आजकल पुरुषों और महिलाओं दोनों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह न सिर्फ ट्रेंडी है, बल्कि किफायती होने के साथ-साथ कई तरह के डिजाइन ऑप्शन भी देता है।

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पारंपरिक हैवी ज्वेलरी की तुलना में आर्टिफिशियल चोकर नेकलेस हल्का, आरामदायक और ज्यादा स्टाइलिश होता है। इसे आप साड़ी, लहंगा, कुर्ता, शेरवानी या इंडो-वेस्टर्न आउटफिट के साथ भी आसानी से कैरी कर सकते हैं। महिलाओं के लिए कुंदन वर्क, पर्ल, स्टोन स्टडेड और ऑक्सीडाइज्ड सिल्वर जैसे डिजाइनों में चोकर सेट बेहद खूबसूरत लगते हैं। वहीं पुरुषों के लिए सिंपल मेटलिक, रस्टिक या मिनिमल डिजाइन वाला चोकर लुक को रॉयल टच देता है।

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फैशन के साथ-साथ सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी है। बाजार में मिलने वाले कई आर्टिफिशियल ज्वेलरी में निकल, लेड या अन्य हानिकारक धातुएं इस्तेमाल की जाती हैं, जो त्वचा में एलर्जी, खुजली या रैशेज का कारण बन सकती हैं। इसलिए स्किन-फ्रेंडली मटीरियल से बना आर्टिफिशियल चोकर नेकलेस ही चुनना बेहतर रहता है। कोशिश करें कि ज्वेलरी हाइपो-एलर्जेनिक हो और उसे लगातार कई घंटों तक पहनने से पहले एक बार त्वचा पर जांच जरूर कर लें।

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अगर आप चाहते हैं कि आपका लुक और भी निखरे, तो आउटफिट के कलर कॉम्बिनेशन के अनुसार चोकर नेकलेस चुनें। गोल्डन टोन वाले चोकर लाल, मैरून और ऑफ-व्हाइट कपड़ों के साथ बेहद खूबसूरत लगते हैं। वहीं सिल्वर और ब्लैक टोन डार्क और पेस्टल शेड्स के साथ खास आकर्षण पैदा करते हैं। मेकअप में भी हल्का हाइलाइट और बोल्ड आई लुक आपके पूरे स्टाइल को कम्प्लीट करता है।

आजकल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर आपको सस्ते दामों में कई ट्रेंडी और क्वालिटी चोकर नेकलेस मिल जाते हैं। हालांकि खरीदते समय कस्टमर रिव्यू और मटीरियल की जानकारी जरूर जांच लें। सही एक्सेसरी न केवल आपके लुक को शानदार बनाती है, बल्कि आपके आत्मविश्वास को भी बढ़ाती है।

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नोट – यह जानकारी सुझाव के तौर पर उपलब्ध कराई जा रही है। किसी भी तरह की एलर्जी, त्वचा समस्या या स्वास्थ्य संबंधी परेशानी से बचाव के लिए प्रयोग करने से पहले जानकार डॉक्टर से जरूर सलाह लें।

पांच फीट के रास्ते ने छीनी जिंदगी, गांव में पसरा मातम

खूनी जमीन विवाद में युवक की हत्या, पांच फीट के रास्ते ने उजाड़ दिया पूरा परिवार

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा) के भिटौली थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम भैसा में रविवार शाम एक ऐसा हृदय विदारक घटनाक्रम सामने आया, जिसने पूरे इलाके को दहला कर रख दिया। मात्र पांच फीट चौड़े रास्ते के विवाद ने एक युवक की जान ले ली और एक परिवार को हमेशा के लिए उजाड़ दिया। इस महाराजगंज हत्या कांड को लेकर पूरे गांव में तनाव और भय का माहौल है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक विनोद तिवारी और दूसरे पक्ष के बैजनाथ वर्मा के बीच काफी समय से रास्ते को लेकर विवाद चल रहा था। दोनों के घरों के बीच स्थित एक संकीर्ण रास्ता वर्षों से विवाद की जड़ बना हुआ था। मामला न्यायालय में भी लंबित था, लेकिन आए दिन कहासुनी और झगड़े होते रहते थे।

रविवार की देर शाम दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। पहले तीखी बहस हुई, फिर गाली-गलौज और अंततः मारपीट शुरू हो गई। इसी दौरान गुस्से में दूसरे पक्ष ने विनोद तिवारी पर कुल्हाड़ी से ताबड़तोड़ वार कर दिए। हमले में विनोद बुरी तरह घायल होकर वहीं गिर पड़े और खून से लथपथ हो गए।

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घटना की जानकारी मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे और तत्काल उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परतावल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। चिकित्सकों के अनुसार, अस्पताल पहुंचने से पहले ही विनोद तिवारी की मौत हो चुकी थी।

इस महाराजगंज हत्या कांड की सूचना मिलते ही गांव में हड़कंप मच गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। तीन थानों की पुलिस फोर्स के साथ एडिशनल एसपी सिद्धार्थ मौके पर पहुंचे और गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए गांव में पुलिस तैनात कर दी गई है।

पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मृतक के परिजनों की तहरीर के आधार पर आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीम गठित कर संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।

एडिशनल एसपी सिद्धार्थ ने कहा कि, “फिलहाल गांव में स्थिति नियंत्रण में है। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात हैं। दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।”

यह घटना केवल एक हत्या नहीं, बल्कि समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि जब छोटे-छोटे विवाद संवाद और कानून की बजाय हिंसा का रूप ले लेते हैं, तो उनका परिणाम कितना भयावह हो सकता है। महाराजगंज हत्या कांड ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भूमि और रास्ते के विवादी मामलों का समय रहते समाधान न होना किस प्रकार बड़ी त्रासदी को जन्म दे सकता है।

गांव वालों की मानें तो विनोद तिवारी अपने परिवार का मुख्य सहारा था। उसकी मौत से पत्नी और बच्चों के सामने जीवनयापन का संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को सहायता और न्याय दिलाने की मांग की है।

यह दर्दनाक वारदात न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक कड़वी सीख भी है कि विवादों का समाधान हिंसा नहीं बल्कि समझदारी और कानून के माध्यम से ही संभव है।

शुभ समय का ज्ञान ही सच्चा सौभाग्य है — जानिए 8 दिसंबर का रहस्य

8 दिसंबर 2025 का सम्पूर्ण पंचांग , आज का शुभ-अशुभ समय, नक्षत्र, तिथि, योग और यात्रा दिशा

आज का पंचांग हिन्दू धर्म, वैदिक ज्योतिष और सनातन परंपरा के अनुसार तैयार किया गया है, जो आपके पूरे दिन की दिशा तय करने में सहायक हो सकता है। शुभ कार्य, यात्रा, पूजा, खरीदारी और नए आरंभ से पहले पंचांग जानना अत्यंत आवश्यक माना जाता है।

आज पौष मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी/पंचमी तिथि है, चंद्रमा कर्क राशि में संचार करेगा और दिन विशेष ज्योतिषीय योगों से युक्त रहेगा।

आज का दिन कुछ राशियों के लिए अत्यंत शुभ है, जबकि कुछ कार्यों में सावधानी की आवश्यकता बताई गई है।

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आज का पंचांग — 08 दिसंबर 2025 (सोमवार)

तिथि
कृष्ण पक्ष चतुर्थी – 04:03 PM तक
उपरांत कृष्ण पक्ष पंचमी प्रारम्भ

नक्षत्र
पुष्य – 02:52 AM तक
उपरांत आश्लेषा

योग
ब्रह्म योग – 05:01 PM तक
उसके बाद इन्द्र योग

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करण
बालव – 04:03 PM तक
कौलव – 03:10 AM तक
तैतिल – 03:10 AM के बाद

वार – सोमवार

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विक्रम संवत
2082 (कालयुक्त संवत्सर)

शक संवत
1947 (विश्वावसु)

चन्द्र मास
अमांत – मार्गशीर्ष
पूर्णिमांत – पौष

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ऋतु
हेमंत

अयन
दक्षिणायन

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⬤ सूर्य और चन्द्रमा का समय

सूर्योदय – 07:00 AM
सूर्यास्त – 05:37 PM
चन्द्रोदय – 09:22 PM
चन्द्रास्त – 11:01 AM

सूर्य राशि – वृश्चिक
चंद्र राशि – कर्क (पूर्ण दिन-रात)

⬤ आज के शुभ काल

अभिजीत मुहूर्त – 11:57 AM से 12:39 PM
ब्रह्म मुहूर्त – 05:24 AM से 06:12 AM
अमृत काल – 08:48 PM से 10:19 PM
लाभ चौघड़िया – 02:57 PM से 04:17 PM
अमृत चौघड़िया – 04:17 PM से 05:37 PM

ये समय विवाह, पूजा, वाहन खरीद, नई शुरुआत और महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए उत्तम हैं।

⬤ आज के अशुभ काल

राहु काल – 08:19 AM से 09:39 AM
यम गण्ड – 10:59 AM से 12:18 PM
दुर्मुहूर्त – 12:39 PM से 01:22 PM
वर्ज्यम् – 11:44 AM से 01:15 PM

इन समयों में नई शुरुआत, निवेश, यात्रा और बड़े निर्णय लेने से बचें।

⬤ विशेष ज्योतिषीय योग

सर्वार्थसिद्धि योग – 04:11 AM से 02:52 AM (9 दिसंबर)
(पुष्य नक्षत्र के कारण)

रवि पुष्य योग – सुबह 04:11 AM से 07:00 AM तक

ये योग कार्यसिद्धि और सफलता के लिए श्रेष्ठ माने जाते हैं।

⬤ आज यात्रा की शुभ-अशुभ दिशा

आज उत्तर और दक्षिण दिशा की यात्रा वर्जित मानी गई है।
यदि आवश्यक यात्रा करनी हो तो गुड़ (जग्गरी) खाकर अथवा कनक (गेहूं) स्पर्श कर यात्रा करें।

पूर्व दिशा की यात्रा आज अत्यंत शुभ और लाभकारी सिद्ध होगी।
पश्चिम दिशा की यात्रा सामान्य फलदायक रहेगी।

आज व्यापार, नौकरी, परीक्षा और इंटरव्यू के लिए पूर्व दिशा श्रेष्ठ है।

⬤ चंद्रबल (राशि अनुसार)

वृषभ
कर्क
कन्या
तुला
मकर
कुंभ

इन राशियों वालों के लिए आज का दिन शुभ परिणाम देने वाला है।

नोट: इस पंचांग में किसी भी प्रकार की त्रुटि अथवा भिन्नता के लिए राष्ट्र की परम्परा जिम्मेदार नहीं होगी। कृपया किसी भी धार्मिक, शुभ कार्य या निर्णय से पूर्व योग्य ज्योतिषाचार्य अथवा विद्वान से अवश्य परामर्श करें।

मुनीडीह में कुड़मालि नेगाचारी देसजाड़पा संपन्न

सामाजिक पुनर्जागरण के लिए कुड़मी समाज के युवा आगे आएं : सुदेश महतो

रांची (राष्ट्र की परम्परा)l आजसू पार्टी के केंद्रीय उपाध्यक्ष एवं झारखंड के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो ने कहा है कि कुड़मी समुदाय सामाजिक पुनर्जागरण के लिए समाज और युवाओं को आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि कुड़मी समाज राजनीतिक साजिश का शिकार हुआ है। उस साजिश को पहचानने की जरूरत है। बिखरे समाज में वैचारिक एकता स्थापित करना होगा।
सुदेश महतो आज धनबाद के मुनीडीह स्थित भाटिन हाड़ी थान (भटिंदा फाल्स) में आयोजित दो दिवसीय कुड़मालि नेगाचारी देसजाड़पा (महाधिवेशन) के समापन समारोह में भाग लेने पहुंचे। देसजाड़पा में भाग लेने झारखंड के अलावा बंगाल, ओडिशा एवं असम से भी प्रतिनिधि पहुंचे। आदिवासी कुड़मी समाज के अध्यक्ष अजीत महतो समेत कई सामाजिक पदाधिकारियों ने महतो का स्वागत किया।
महतो ने कहा कि समाज की युवा पीढ़ी के भीतर एक नई चेतना दिख रही है। सौभाग्य की बात है कि सामाजिक, सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए युवा पीढ़ी सजग हुई है। पूर्वजों का सपना और सम्मान नई पीढ़ी संवार रही है बहुत खुशी की बात है। दहेज और दारू जैसी कुरीति ने समाज को क्षति पहुंचाई है। परंपरा को निभाएं, उसे कुरीति नहीं बनाएं। नवनिर्माण के लिए कुरीतियों से समाज को बचाना होगा।
महतो ने कहा कि नई पीढ़ी ने शोध कर सामाजिक पुनर्जागरण एवं पुनरुद्धार के लिए पहल शुरू की है। इसका स्वागत है। वैचारिक समानता के लिए देसजाड़पा का आयोजन किया गया है उन्होंने कहा कि हमलोगों के बीच राजनीतिक मतभिन्नता हो सकती है, लेकिन सामाजिक, सांस्कृतिक मुद्दे पर समाज को एकजुट होना होगा।
पूर्व विधायक डॉ लंबोदर महतो ने कहा कि सुदेश महतो ने 2004 में झारखंड मंत्रिमंडल की बैठक में कुड़मी को आदिवासी दर्जा देने का प्रस्ताव पारित करवा कर केंद्र सरकार को भेजा था। उन्होंने कहा कि लगातार कुड़मी को एसटी स्टेटस और कुड़मालि को संविधान की आठवी अनुसूची में शामिल करने के लिए प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए समाज को मजबूत बनाना होगा।

सेंट मैरी इंटरनेशनल स्कूल का वार्षिक उत्सव बना प्रेरणा का मंच, एसपी रहे मुख्य अतिथि

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। फरेंदा स्थित सेंट मैरी इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित वार्षिक उत्सव का कार्यक्रम रविवार को बड़े ही हर्षोल्लास, उत्साह और गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक महराजगंज सोमेन्द्र मीना मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। उनकी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा और भी बढ़ गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ पुलिस अधीक्षक द्वारा पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इसके पश्चात विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने नृत्य, संगीत, समूह गान तथा रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। बच्चों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने उपस्थित अभिभावकों, शिक्षकों और अतिथियों की खूब तालियां बटोरीं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पुलिस अधीक्षक सोमेन्द्र मीना ने कहा कि विद्यालय में आयोजित इस प्रकार की सांस्कृतिक और रचनात्मक गतिविधियां बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इससे न केवल आत्मविश्वास बढ़ता है, बल्कि बच्चों की छिपी प्रतिभाओं को निखरने का अवसर भी मिलता है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को सकारात्मक माहौल,उचित मार्गदर्शन और नैतिक संस्कार दें, ताकि वे देश और समाज के लिए उपयोगी नागरिक बन सकें।
उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद विद्यार्थियों और अभिभावकों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करते हुए ऑनलाइन फ्रॉड से बचाव, सोशल मीडिया के सुरक्षित एवं सीमित उपयोग तथा यातायात नियमों के पालन की अहम जानकारियां दीं। उन्होंने कहा कि थोड़ी-सी सतर्कता और सावधानी अपनाकर बच्चे, परिवार और समाज को बड़ी अनहोनी से बचाया जा सकता है।
कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय प्रबंधन व शिक्षकों ने मुख्य अतिथि पुलिस अधीक्षक का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी प्रेरणादाई उपस्थिति से बच्चों में न केवल उत्साह बढ़ा है, बल्कि उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की नई दिशा भी मिली है। वार्षिक उत्सव विद्यार्थियों, अभिभावकों और अतिथियों के लिए एक यादगार आयोजन बनकर सामने आया।

डम डम डमरू बजावेला हमार जोगिया गीत पर झूमे दर्शक

काशी तमिल संगमम 4.0 में नमो घाट पर आयोजित हुआ सांस्कृतिक संध्या

वाराणसी (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज एवं दक्षिण क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र तंजावूर संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार की ओर से आयोजित काशी तमिल संगमम 4.0 संस्करण के छठवां दिवस नमोघाट स्थित मुक्ताकाशी प्रांगण में सांस्कृतिक कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। जिसमे तमिलनाडु एवं काशी के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दी। सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत प्रथम प्रस्तुति आरंभ हुई ममता शर्मा एवं दल वाराणसी के लोक गायन से। गायन में सर्वप्रथम गंगा भजन से जिसके बोल थे चलोमन गंगा जमुना तीर, इसी क्रम में शिव भजन की प्रस्तुति सम्पन्न हुई जिसके बोल थे जेकर नाथ विश्वनाथ उ अनाथ कैसे.., इसके उपरांत डम डम डमरू बजावेला हमार जोगिया… की प्रस्तुति की गई। तबला पर संगीत कुमार तथा आर्गन पर दिलीप कुमार ने संगत किया।
द्वितीय प्रस्तुति डॉ. शिवानी शुक्ला एवं दल वाराणसी के भजन गायन की। गायन का आरंभ एकताल में निबध्य रचना से किया। जिसके बोल थे आदि देव महादेव…, इसकी क्रम में भजन गायन की प्रस्तुति सम्पन्न हुई। जिसके बोल थे अवगुन चित न धरो…., गायन का समापन भजन कर मनवा राम रघुराई … के किया गया। इस प्रस्तुति में तबला पर अंकित कुमार सिंह, वायलिन पर सुखदेव मिश्रा तथा साइड रिदम पर संजय श्रीवास्तव ने साथ दिया।
तृतीय प्रस्तुति गीतांजलि एवं दल, तमिल नायडू के लोक नृत्य की। जिसमें करकट्टम, मईलाट्टम, पोईक्कल कुटीरई अट्टम की प्रस्तुति की। चतुर्थ प्रस्तुति शुभांगी सिंह एवं दल वाराणसी के भरतनाट्यम नृत्य नाटिका की। नृत्य नाटिका में रामायण पर आधारित प्रस्तुति की गई। जिसमें जटायु मोक्ष प्रसंग को प्रस्तुत किया गया। नृत्य में कलाकार थे शुभांगी सिंह, वागीशा सिंह, जयरसा यशोमिया, आरती कंदु। पंचम प्रस्तुति सुनिधि पाठक एवं दल वाराणसी के कथक नृत्य की। कथक नृत्य में प्रथम प्रस्तुति मंगलाचरण शिव वंदना से हुई। इसके उपरांत दूसरी प्रस्तुति ताराना। जिसमें शुद्ध कथक नृत्य की।
कार्यक्रम की छठी प्रस्तुति गीतांजलि एवं दल तमिल नायडू के लोक नृत्य की। कार्यक्रम का संचालन किया सौरभ चक्रवर्ती ने किया।
अंत में सूफ़ियाना रचनाओं के माध्यम से रुकसार-परम्परा से समापन हुआ। नृत्य में कलाकार थे सुषमा भारती, प्रिया दुबे, विशाल सिंह एवं अशुतोष सिंह।

सलेमपुर में ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन की बैठक संपन्न, सदस्यता अभियान शुरू

सलेमपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन की तहसील इकाई सलेमपुर की एक महत्वपूर्ण बैठक स्थानीय पत्रकार भवन में सफलता पूर्वक संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता तहसील अध्यक्ष श्याम नारायण मिश्र ने की। इस दौरान संगठन को और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से सदस्यता अभियान की औपचारिक शुरुआत की गई, जिसमें पुराने और सक्रिय सदस्यों ने अपने सदस्यता फॉर्म भरकर अभियान को गति दी।

बैठक में संगठन के विस्तार, कार्यशैली और पत्रकारों की भूमिका पर गहन चर्चा हुई। वरिष्ठ पत्रकार के.पी. गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि संगठन में उन्हीं व्यक्तियों को जोड़ा जाए, जो वास्तव में पत्रकारिता पेशे से जुड़े हैं और जो इसके नैतिक मूल्यों एवं मर्यादा का पालन करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक मजबूत और विश्वसनीय संगठन के लिए योग्य और प्रतिबद्ध सदस्य होना अत्यंत आवश्यक है।

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तहसील अध्यक्ष श्याम नारायण मिश्र ने सभी पत्रकार साथियों से आह्वान किया कि वे संगठन की मजबूती के लिए एकजुट होकर कार्य करें। उन्होंने भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए कहा कि जल्द ही पत्रकारों के लिए प्रतियोगिताएं, कार्यशालाएं और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे उनके पेशेवर कौशल का विकास हो सके।

बैठक में संगठन की आगामी रणनीति पर सहमति बनी और सदस्यता अभियान को हर गांव व कस्बे तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया।

इस अवसर पर धर्मेंद्र पाण्डेय, रत्नेश यादव, फैज ईनाम, कालिका तिवारी, राकेश यादव, अजय उपाध्याय सहित कई सक्रिय पत्रकार उपस्थित रहे। बैठक सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई और सभी सदस्यों में उत्साह देखने को मिला।