Sunday, June 28, 2026
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चोरी की 11 बाइक के साथ तीन शातिर चोर गिरफ्तार, बिहार में बेचते थे वाहन

कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। जिले में लगातार बढ़ रही बाइक चोरी की घटनाओं के बीच पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पडरौना कोतवाली पुलिस और स्वाट टीम ने संयुक्त अभियान चलाकर तीन शातिर बाइक चोरों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने 11 चोरी की बाइक बरामद की हैं।

कैसे पकड़े गए आरोपी?

बाइक चोरी की बढ़ती शिकायतें एसपी तक पहुंचने लगी थीं। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज की। जांच के दौरान पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले, फुटेज में संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर आरोपियों की पहचान की गई, ।और फिर मारकंडेय चौराहा क्षेत्र से तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया।

छिपाते थे बाइक, फिर बिहार में बेच देते थे

पडरौना सीओ डॉ. अजय कुमार सिंह के मुताबिक, गिरोह कुशीनगर और गोरखपुर के भीड़-भाड़ वाले स्थानों—मॉल, बैंक, सब्जी मंडी और चौराहों से बाइक चोरी करता था। चोरी की बाइकें आरोपी मारकंडेय चौराहा बंधे के नीचे झाड़ियों में छिपाकर रखते थे। जब बाइकें अधिक संख्या में हो जातीं, तो एक साथी की निगरानी में उन्हें बिहार ले जाकर बेच दिया जाता था।

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गिरफ्तार आरोपी और उनका इतिहास

पुलिस ने जिन तीन अभियुक्तों को पकड़ा है, उनकी पहचान—

शमशाद अंसारी उर्फ खरहा निवासी उर्दहा नंबर 2, थाना रामकोला (12 मुकदमे दर्ज)

अशोक पासवान निवासी बलुआ रेता, थाना नदी जिला पश्चिमी चंपारण, बिहार (3 मुकदमे दर्ज)

अनिल यादव निवासी मदरहवा मूजा टोला, थाना नदी जिला पश्चिमी चंपारण, बिहार

पुलिस जांच में सामने आया कि यह एक संगठित गिरोह है, जो कुशीनगर, गोरखपुर, देवरिया सहित कई जिलों में बाइक चोरी की घटनाओं को अंजाम दे रहा था।

आगे की कार्रवाई

पुलिस इनसे पूछताछ कर गिरोह के अन्य सदस्यों और बाइक खरीदने वाले नेटवर्क की तलाश में जुटी है।

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नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो का परिचालन संकट सोमवार को भी कम होता नहीं दिख रहा है। दिल्ली और मुंबई सहित कई बड़े एयरपोर्ट पर इंडिगो की उड़ानें लगातार रद्द हो रही हैं या देरी का सामना कर रही हैं।

दिल्ली और बेंगलूरु एयरपोर्ट पर उड़ानें रद्द

सोमवार सुबह दिल्ली एयरपोर्ट ने यात्रियों के लिए एडवाइजरी जारी की, जिसमें कहा गया कि इंडिगो की कई उड़ानें रद्द हो सकती हैं या देरी हो सकती है। यात्रियों को घर से निकलने से पहले फ्लाइट स्टेटस चेक करने की सलाह दी गई।

दिल्ली में कुल 134 उड़ानें रद्द

75 प्रस्थान

59 आगमन

बेंगलूरु में 127 उड़ानें रद्द

उड़ानों की रद्दीकरण से हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा है।

डीजीसीए के नोटिस पर इंडिगो ने मांगा और समय

डीजीसीए ने 6 दिसंबर को इंडिगो को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसमें परिचालन योजना और संसाधन प्रबंधन में गंभीर चूक का आरोप लगाया गया।
नोटिस में कहा गया कि नए FDTL नियमों को लागू करने में इंडिगो पूरी तरह असफल रही, और यही व्यापक संकट का कारण है।

इंडिगो ने नोटिस का जवाब देने के लिए 8 दिसंबर तक अतिरिक्त समय मांगा है।

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सरकार कर रही है संकट की जांच

सरकार द्वारा गठित चार सदस्यीय समिति यह जांच कर रही है कि:

• क्या इंडिगो ने अक्टूबर तक FDTL नियमों को लागू करने में देरी की?

• क्या एयरलाइन ने नियमों में छूट लेने की कोशिश की?

सरकार का मानना है कि उचित योजना न होने के कारण यह संकट उत्पन्न हुआ।

610 करोड़ रुपये का रिफंड और 3,000+ बैगेज लौटाए

सरकार के सख्त निर्देश के बाद इंडिगो ने रविवार शाम तक यात्रियों को 610 करोड़ रुपये का रिफंड जारी किया।
इसके साथ ही एयरलाइन ने 3,000 से ज्यादा बैगेज यात्रियों को वापस कर दिए हैं।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने इसकी आधिकारिक पुष्टि की।

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‘पति बिना तलाक दूसरी शादी करने जा रहा है’, पाकिस्तान में बैठी पत्नी ने PM मोदी से लगाई गुहार – इंदौर में अंतरराष्ट्रीय वैवाहिक विवाद

इंदौर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। इंदौर में एक अंतरराष्ट्रीय वैवाहिक विवाद सुर्खियों में है, जहां पाकिस्तान की कराची निवासी निकिता ने अपने पति विक्रम नागदेव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। निकिता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्रालय और उच्च अधिकारियों से अपील की है कि उनके पति को पाकिस्तान डिपोर्ट किया जाए ताकि मामला कराची अदालत में कानूनी रूप से सुना जा सके।

मामले की जांच सिंधी पंच मध्यस्थता और विधिक परामर्श केंद्र ने की है और एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी है। मामला वैवाहिक विवाद के साथ-साथ वीज़ा नियमों और न्यायिक क्षेत्राधिकार को लेकर चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

क्या है पूरा मामला?

निकिता और विक्रम की शादी 26 जनवरी 2020 को कराची के सिंध में हुई थी। विवाह के एक महीने बाद विक्रम उन्हें इंदौर लेकर आया, लेकिन आरोप है कि 9 जुलाई 2020 को वीज़ा संबंधी औपचारिकताओं के बहाने निकिता को अटारी बॉर्डर पर छोड़ दिया और वह वापस नहीं आए।

निकिता का कहना है कि लंबे समय से वह उपेक्षा और उत्पीड़न झेल रही हैं। उन्होंने 27 जनवरी 2025 को लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया कि उनके पति भारत में रहकर दिल्ली की एक युवती से बिना तलाक दूसरी शादी करने की तैयारी कर रहे हैं।

मध्यस्थता केंद्र ने जारी किए नोटिस

शिकायत के बाद सिंधी पंच मध्यस्थता केंद्र ने विक्रम और कथित मंगेतर दोनों को नोटिस जारी कर समझौता वार्ता आयोजित की। कई दौर की बैठकों के बावजूद दंपति के बीच कोई समाधान नहीं निकल सका।

मध्यस्थता अधिनियम 2023 के तहत जारी रिपोर्ट में केंद्र ने साफ लिखा कि दोनों पक्ष भारतीय नागरिक नहीं हैं, इसलिए मामला भारत के न्यायिक क्षेत्र में नहीं आता और पाकिस्तान में ही सुना जाना चाहिए।

पति को पाकिस्तान भेजने की अनुशंसा

केंद्र ने अपनी रिपोर्ट में पति विक्रम नागदेव को पाकिस्तान डिपोर्ट करने की अनुशंसा जिलाध्यक्ष को भेजी है, ताकि आगे की कार्यवाही पाकिस्तान में हो सके।

निकिता ने वीडियो जारी कर लगाई गुहार

इस बीच, निकिता ने एक वीडियो संदेश जारी कर प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्रालय से न्याय की अपील की है। उन्होंने मांग की कि पति को कानूनी प्रक्रिया के तहत पाकिस्तान भेजा जाए ताकि वह कराची में अदालत में अपना मामला रख सकें।

यह मामला गैर-भारतीय नागरिकों के वैवाहिक विवाद, वीज़ा नियम, और अंतरराष्ट्रीय क्षेत्राधिकार को लेकर प्रशासनिक व कानूनी हलकों में बड़ी चर्चा पैदा कर रहा है।

सुधार के दावों के बीच आम जनता क्यों झेल रही भ्रष्टाचार की मार

(राष्ट्र की परम्परा)

देश में बीते कुछ वर्षों के दौरान शासन-प्रशासन को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए डिजिटल इंडिया, ई-गवर्नेंस, सिंगल विंडो सिस्टम और ऑनलाइन सेवाओं की शुरुआत की गई। सरकार की ओर से बार-बार यह दावा किया जाता है कि अब भ्रष्टाचार पर लगाम लग चुकी है और जनता को बिना किसी बाधा के सेवाएँ मिल रही हैं। लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करती है। जब आम नागरिक किसी सरकारी दफ्तर के दरवाज़े पर पहुंचता है, तो उसे आज भी वही पुरानी समस्याओं का सामना करना पड़ता है—फाइलों का अटकना, अनावश्यक देरी और “सिस्टम” के नाम पर की जाने वाली वसूली।

डिजिटल प्लेटफॉर्म ही अब अधिकांश योजनाओं और सेवाओं का आधार बन चुके हैं। आवेदन, दस्तावेज़ अपलोड, स्टेटस ट्रैकिंग जैसी सुविधाएँ ऑनलाइन हो चुकी हैं। परंतु समस्या यह है कि ऑनलाइन प्रक्रिया के बाद भी निस्तारण ऑफलाइन ही होता है, जहां मानव हस्तक्षेप बना रहता है। यही वह स्थान है जहां भ्रष्टाचार अपनी जड़ें गहराई से जमाए बैठा है। पोर्टल आधुनिक हैं, पर कई जगहों पर कर्मचारियों की मानसिकता पुराने ढर्रे पर ही टिकी हुई है। बिना “तेल” दिए काम आगे नहीं बढ़ने की सोच आज भी जीवित है।

सरकार समयबद्ध सेवा की गारंटी तो देती है, लेकिन हकीकत में फाइलें महीनों तक धूल फांकती रहती हैं। राशन कार्ड में संशोधन हो, जमीन का दाखिल-खारिज, जाति या निवास प्रमाण पत्र बनवाना हो या फिर बिजली-पानी कनेक्शन लेना हो—हर जगह आम आदमी को अनकहे दबावों और इशारों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में जनता के मन में यह सवाल उठता है कि अगर यह सब ऑनलाइन हो चुका है, तो फिर भ्रष्टाचार पर लगाम क्यों नहीं लग पा रही?

समस्या की जड़ें केवल तकनीक की कमी नहीं, बल्कि व्यवस्था में जवाबदेही के अभाव से जुड़ी हैं। कई बार शिकायतें दर्ज तो हो जाती हैं, लेकिन उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। दोषी अधिकारियों या कर्मचारियों को सजा न मिलने से उनका हौसला और बढ़ जाता है। जब दंड का भय खत्म हो जाता है, तब भ्रष्टाचार धीरे-धीरे सिस्टम का हिस्सा बन जाता है और ईमानदारी हाशिए पर चली जाती है।

राजनीतिक मंचों से लेकर सरकारी दावों तक, हर जगह सुधार की बातें होती हैं। नीति बनती है, दिशा-निर्देश जारी होते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर बदलाव की रफ्तार बेहद धीमी है। यही दूरी जनता के विश्वास को कमजोर कर रही है। लोग मानने लगे हैं कि भ्रष्टाचार पर लगाम सिर्फ भाषणों और विज्ञापनों तक ही सीमित है, हकीकत में नहीं।

यदि देश को सच में भ्रष्टाचार मुक्त बनाना है, तो केवल तकनीकी बदलाव से काम नहीं चलेगा। जरूरी है कि हर स्तर पर सख्त निगरानी हो, पारदर्शिता के साथ जवाबदेही भी तय हो और दोषियों पर बिना किसी दबाव के तत्काल कार्रवाई की जाए। जब तक ईमानदारी को मजबूरी नहीं, बल्कि सिस्टम की पहचान नहीं बनाया जाएगा, तब तक भ्रष्टाचार की यह पुरानी बीमारी यूँ ही फैलती रहेगी।

अब समय आ गया है कि सुधार सिर्फ फाइलों और वेबसाइटों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका असर आम नागरिक के जीवन में साफ दिखाई दे। तभी भ्रष्टाचार पर लगाम एक नारा नहीं, बल्कि सच्चाई बन पाएगी।

कैंसर का खतरा घटाने से लेकर शुगर कंट्रोल तक: गाजर क्यों माना जाता है हेल्थ का सुपरफूड? जानें इसके चमत्कारी फायदे

हेल्थ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। सर्दियों में खूब खाई जाने वाली गाजर सिर्फ स्वाद ही नहीं बढ़ाती, बल्कि पोषण से भरपूर एक ऐसी जड़ वाली सब्जी है, जो पूरे शरीर को मजबूत बनाने में मदद करती है। इसमें बीटा-कैरोटीन, फाइबर, विटामिन A, विटामिन K1, पोटैशियम और विभिन्न एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो कई गंभीर बीमारियों के जोखिम को कम करने में सहायक हैं। खासतौर पर कैंसर और डायबिटीज जैसे मामलों में गाजर के लाभों को कई शोधों में महत्वपूर्ण बताया गया है।

कैंसर का खतरा कैसे घटाती है गाजर?

गाजर में मौजूद बीटा-कैरोटीन एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है, जो शरीर में जाकर विटामिन A बनाता है। यह कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाता है—एक ऐसी स्थिति जिसमें फ्री-रेडिकल्स कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं और कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं।
नियमित रूप से गाजर खाने वालों में कोलोरेक्टल, फेफड़े और प्रोस्टेट कैंसर का जोखिम तुलनात्मक रूप से कम देखा गया है। एक अध्ययन में पाया गया कि सप्ताह में 2–4 कच्ची गाजर खाने से कोलोरेक्टल कैंसर का जोखिम लगभग 17% तक कम हो सकता है।
गाजर में मौजूद कैरोटिनॉयड और ल्यूटिन जैसे तत्व भी कोशिकाओं को स्वस्थ रखने और कैंसर बनने की प्रक्रिया को धीमा करने में भूमिका निभाते हैं।

ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में कैसे मदद करती है गाजर?

गाजर के मीठे स्वाद के कारण कई लोग सोचते हैं कि यह डायबिटीज मरीजों के लिए नुकसानदेह हो सकती है, जबकि इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) काफी कम होता है।

• यह ब्लड शुगर को धीमी गति से बढ़ाता है

• इसमें मौजूद फाइबर पाचन को धीमा कर ग्लूकोज के अवशोषण को नियंत्रित करता है

इस वजह से गाजर रक्त शर्करा को संतुलित रखने में मदद करती है और नियमित सेवन टाइप 2 डायबिटीज के जोखिम को कम कर सकता है।

गाजर के अन्य फायदे जो इसे सुपरफूड बनाते हैं

  1. आंखों की रोशनी बढ़ाती है – विटामिन A आंखों की सेहत के लिए लाभकारी है और उम्र से जुड़ी समस्याओं से बचाता है।
  2. इम्यूनिटी मजबूत करती है – एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन A शरीर को संक्रमणों से लड़ने में सक्षम बनाते हैं।
  3. दिल को स्वस्थ रखती है – इसमें मौजूद पोटैशियम और फाइबर ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखते हैं और कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद करते हैं।
  4. पाचन तंत्र को बेहतर बनाती है – गाजर में उच्च मात्रा में फाइबर होता है, जो कब्ज को दूर करता है और आंतों को स्वस्थ बनाता है।
  5. हड्डियों को मजबूत करती है – विटामिन K1 और पोटैशियम हड्डियों के स्वास्थ्य को सपोर्ट करते हैं।
  6. स्किन में नेचुरल ग्लो लाती है – एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को स्वस्थ रखते हैं और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करते हैं।
  7. लीवर की सफाई में सहायक – गाजर शरीर को डिटॉक्सीफाई करने में मदद करती है।
  8. दिमाग की सेहत सुधारती है – विटामिन B6 और कैरोटिनॉयड्स ब्रेन फंक्शन को सपोर्ट करते हैं और याददाश्त बेहतर बनाते हैं।

सीएम योगी आदित्यनाथ आज तीन जिलों के दौरे पर: मुरादाबाद, गाजियाबाद और आगरा में करेंगे समीक्षा

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को पश्चिमी यूपी के तीन प्रमुख जिलों—मुरादाबाद, गाजियाबाद और आगरा—के दौरे पर रहेंगे। आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, वह सुबह बरेली से हेलिकॉप्टर द्वारा 10:50 बजे मुरादाबाद सर्किट हाउस पहुंचेंगे।

यहां सीएम योगी 11 बजे से 12 बजे तक मंडल के जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन के साथ विकास कार्यों व शासन की योजनाओं की प्रगति पर समीक्षा बैठक करेंगे। अधिकारियों के अनुसार, बैठक का एजेंडा शासन की ओर से स्पष्ट नहीं किया गया है, लेकिन अनुमान है कि SIR (स्पेशल इंवेस्टमेंट रीजन) और क्षेत्रीय विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

गाजियाबाद में दोपहर तक कार्यक्रम

मुरादाबाद की बैठक के बाद मुख्यमंत्री 12:10 बजे गाजियाबाद के लिए रवाना होंगे। यहां वह दोपहर 2:45 बजे तक रहेंगे।
गाजियाबाद में भी सीएम योगी समीक्षा बैठक करेंगे और साथ ही सरस्वती विद्या मंदिर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे।

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दोपहर बाद आगरा में समीक्षा

गाजियाबाद के कार्यक्रम के तुरंत बाद मुख्यमंत्री 2:50 बजे आगरा के लिए प्रस्थान करेंगे। आगरा में भी प्रशासनिक समीक्षा बैठक प्रस्तावित है, जिसमें जिले के विकास कार्यों, निवेश, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों की समीक्षा की जाएगी।

सीएम योगी का यह दौरा पश्चिमी यूपी में विकास परियोजनाओं की निगरानी, प्रशासनिक कार्यों की समीक्षा और जनप्रतिनिधियों से संवाद पर केंद्रित माना जा रहा है।

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अमौसी एयरपोर्ट पर यात्री की तबीयत बिगड़ने से मौत; परिजनों ने एयरपोर्ट अथॉरिटी पर लापरवाही के आरोप लगाए

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। लखनऊ के चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर शुक्रवार देर रात एक गंभीर घटना हुई, जहां कानपुर निवासी फाइनेंस प्रोफेशनल अनूप पांडेय (46) की फ्लाइट का इंतजार करते समय तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें तुरंत लोकबंधु अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित किया। रविवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिवार को सौंप दिया गया।

परिजनों ने एयरपोर्ट अथॉरिटी पर यह आरोप लगाया है कि एयरपोर्ट में समय रहते चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध होती तो अनूप की जान बच सकती थी। परिवार के अनुसार, फ्लाइट लगातार रद्द होने से वह तनाव में थे।

फ्लाइटें रद्द, यात्री परेशान

लखनऊ एयरपोर्ट पर कई दिनों से उड़ानों का संचालन बाधित है। रविवार को भी 33 उड़ानें निरस्त रहीं और एक फ्लाइट कोलकाता डायवर्ट करनी पड़ी। लगातार रद्द हो रही उड़ानों से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना कर रहा है।

• 740 टिकट यात्रियों ने कैंसिल करवाए

• होटल व टैक्सी पर अतिरिक्त खर्च की शिकायतें

• DGCA से तत्काल हस्तक्षेप की मांग तेज

बलरामपुर से आईं दो बहनें फ्लाइट रद्द होने पर रो पड़ीं, जबकि कई यात्री आगे की कनेक्टिंग फ्लाइट मिस होने से परेशान दिखे। गोरखपुर निवासी कपिल यादव की अबूधाबी जाने वाली यात्रा बाधित हो गई, वहीं लखनऊ के अरविंद कुमार ने भी इंडिगो पर सूचना न देने का आरोप लगाया।

परिवार का दर्द: “अगर एयरपोर्ट पर इलाज होता तो बच जाते”

अनूप पांडेय कोकाकोला कंपनी में सेल्स जोनल हेड के पद पर कार्यरत थे और अपने परिवार के साथ बंगलूरू में रहते थे। रिश्तेदार की तेरहवीं में शामिल होने के बाद वह वापसी के लिए अमौसी एयरपोर्ट पहुंचे थे। रात 9 बजे उन्होंने पत्नी से बात की थी, लेकिन रात 11 बजे परिवार को उनके निधन की सूचना मिली।

परिवार का कहना है कि एयरपोर्ट अथॉरिटी ने समय पर जानकारी देने और सीसीटीवी फुटेज साझा करने में भी सहयोग नहीं किया।
उनके भाई अनिल पांडे का कहना है—“एयरपोर्ट पर डॉक्टर या प्राथमिक इलाज उपलब्ध होता तो अनूप की जान बच सकती थी।”

अनूप के दो बच्चे हैं—17 वर्षीय बेटी श्रेया और हाईस्कूल में पढ़ने वाला बेटा पारस। पिता का शव देखकर परिवार बेहद दुखी हो गया।

वायरल कंटेंट का कहर: क्या सोशल मीडिया बन रहा है नई अदालत?

सोमनाथ मिश्रा की कलम से

(राष्ट्र की परम्परा)

आज की डिजिटल मीडिया पर राय बनाना और फैसले सुनाना आम हो गया है। कुछ सेकंड की वीडियो क्लिप, अधूरी जानकारी या भ्रामक पोस्ट कुछ ही घंटे में हजारों-लाखों लोगों तक पहुंच जाती है और देखते ही देखते एक इंसान “दोषी” या “खलनायक” बना दिया जाता है।

यह नया डिजिटल ट्रेंड केवल अफवाहों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर किसी के सम्मान, करियर और मानसिक स्वास्थ्य पर हमला करता है। सोशल मीडिया ट्रायल में न तो आर्टिकल 21 का सम्मान होता है और न ही “दोष सिद्ध होने तक निर्दोष” की संवैधानिक भावना। अदालत से पहले ही भीड़ फैसला सुना देती है, और वही फैसला समाज में अंतिम सत्य बन जाता है।

सोशल मीडिया ट्रायल कैसे शुरू होता है?

अक्सर कोई अधूरी घटना, लीक हुआ वीडियो या एकतरफा बयान सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया जाता है। लोग बिना संदर्भ जाने, बिना फैक्ट-चेक किए उसे शेयर करने लगते हैं। यहीं से शुरू होता है “सोशल मीडिया ट्रायल” – जहां हर यूजर जज, वकील और जल्लाद बन जाता है।

एल्गोरिदम भी इस प्रक्रिया को तेज करता है। सनसनीखेज, विवादित और नकारात्मक कंटेंट तेजी से वायरल होता है, जिससे झूठ भी सच जैसा दिखने लगता है और सच कहीं दबकर रह जाता है।

इसके गंभीर परिणाम

सोशल मीडिया ट्रायल केवल ऑनलाइन बहस नहीं है, इसके वास्तविक और दर्दनाक परिणाम होते हैं:
नौकरी चले जाने का खतरा
मानसिक तनाव, एंग्जायटी और डिप्रेशन
सामाजिक बहिष्कार और बदनामी
परिवार और बच्चों पर असर
आत्महत्या तक के मामले
एक बार किसी की छवि इंटरनेट पर खराब हो जाए तो बाद में वह निर्दोष साबित भी हो जाए, तब भी उसकी “डिजिटल छवि” को साफ करना लगभग असंभव हो जाता है।

जिम्मेदार कौन?
इस संकट के पीछे कई पक्ष जिम्मेदार हैं:

  1. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म – जो समय रहते फेक या हेटफुल कंटेंट नहीं हटाते।
  2. कंटेंट क्रिएटर – जो व्यूज़ और फॉलोअर्स के लिए सनसनी फैलाते हैं।
  3. यूजर्स – जो बिना सोचे-समझे शेयर और कमेंट करते हैं।
    जब लाखों लोग एक साथ किसी के खिलाफ बोलते हैं, तो वही “डिजिटल भीड़” किसी का भविष्य तय कर देती है।
    समाधान क्या हो सकता है?
    सोशल मीडिया ट्रायल को रोकने के लिए समाज को जिम्मेदारी समझनी होगी:
    फैक्ट-चेक के बिना कोई भी पोस्ट शेयर न करें
    अधूरी वीडियो या खबर से निष्कर्ष न निकालें
    कानून और न्याय व्यवस्था पर भरोसा रखें
    डिजिटल लिटरेसी को स्कूलों और कॉलेजों में अनिवार्य बनाए।
    साइबर कानूनों को और सख्त बनाया जाए
    सोशल मीडिया की ताकत बहुत बड़ी है, लेकिन अगर इसका प्रयोग सोच-समझकर न किया जाए, तो यह सूचना का माध्यम नहीं, विनाश का हथियार बन जाता है।
    “वायरल होना” न्याय नहीं है। किसी के बारे में फैसला सुनाने का अधिकार सोशल मीडिया को नहीं, कोर्ट को है। इसलिए जरूरत है कि हम सोशल मीडिया ट्रायल का हिस्सा बनने के बजाय, सच और संवेदनशीलता का पक्ष लें। तभी यह प्लेटफॉर्म समाज के लिए सहायक बनेगा, घातक नहीं।

बाल कृष्ण शर्मा ‘नवीन’ : राष्ट्रीय चेतना के प्रखर कवि और बहुआयामी साहित्यकार

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हिंदी साहित्य के स्वर्णिम इतिहास में बाल कृष्ण शर्मा ‘नवीन’ उन रचनाकारों में प्रमुख हैं, जिन्होंने अपनी कविता, पत्रकारिता और चिंतन के माध्यम से स्वाधीनता आंदोलन को वैचारिक धार प्रदान की। वे केवल कवि नहीं थे, बल्कि युग-निर्माता साहित्यकार और निर्भीक राष्ट्रभक्त थे, जिनकी लेखनी में ओज, तेज और संघर्ष की गूँज स्पष्ट दिखाई देती है। ‘नवीन’ की रचनाओं में राष्ट्रभावना का सशक्त स्वर उभरता है। उनका काव्य जनता को जगाने वाला, आत्मबल से भरने वाला और गुलामी के अंधकार में प्रकाश दिखाने वाला था। उनकी कविताएँ केवल भावोत्प्रेरक नहीं थीं, बल्कि क्रांतिकारी चेतना को जगाने का माध्यम भी थीं, जो जनमानस को विदेशी शासन के विरुद्ध खड़े होने का साहस देती थीं। पत्रकारिता में भी उनका योगदान अद्वितीय रहा। उन्होंने ‘मतवाला’ सहित अनेक राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन के पक्ष में निर्भीक लेखन किया। सत्य के समर्थन और अन्याय के प्रतिरोध को उन्होंने अपनी पत्रकारिता का मूल सिद्धांत बनाया। प्रतिबंधों और दंड का सामना करने पर भी उन्होंने कलम की स्वतंत्रता से समझौता नहीं किया। भाषा और अभिव्यक्ति के स्तर पर ‘नवीन’ एक सिद्धहस्त शिल्पी थे। उनके काव्य में छंद, लय, ऊर्जा और ओज का अद्भुत संतुलन मिलता है। वे हिंदी को केवल साहित्य की भाषा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय अस्मिता की आवाज मानते थे। उनके शब्द, उनकी शैली और उनकी कविता का स्वभाव पाठकों को अपने भीतर से जोड़ लेता है। स्वतंत्रता आंदोलन में उन्होंने प्रत्यक्ष भागीदारी निभाई और कई बार जेल भी गए। साहित्य, समाज और राजनीति—तीनों क्षेत्रों में उनकी सक्रियता उनके बहुआयामी व्यक्तित्व का प्रमाण है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी उन्होंने राष्ट्रहित और जनहित को अपने कार्यों का केंद्र बनाए रखा। बाल कृष्ण शर्मा ‘नवीन’ की साहित्यिक विरासत आज भी प्रेरणा का स्रोत है। उनकी कविताएँ, लेख और भाषण राष्ट्रीय आत्मसम्मान को जगाने वाली ध्वनि से भरे हैं। उनका जीवन यह संदेश देता है कि साहित्य केवल सौंदर्य का विषय नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का माध्यम भी है। नवीन की विरासत हमें याद दिलाती है कि शब्दों में वह शक्ति होती है, जो पीढ़ियों की दिशा बदल सकती है और राष्ट्र की चेतना को जागृत कर सकती है।

सरपट दौडाई जा रही निजी विद्यालयों के वाहन वगैर फिटनेस व बीमा के वाहन व सड़क सुरक्षा की उड़ाई जा रही है सरेआम धज्जिया

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)नन्हे मुन्ने बच्चो से भरी निजी विद्यालयों के छोटे बड़े वाहन बिना फिटनेस व बीमा के नगर पालिका की मुख्य सड़को पर दौडाई जा रही है, जिसका खामियाजा नगरपालिका के गेट के सामने एक जिंदगी खो कर भुगतना पड़ा। बिना बीमा व फिटनेस के वाहनों द्वारा सड़क व वाहन सुरक्षा की सरेआम उड़ाई जा रही है धज्जिया। जहाँ सरकार द्वारा नन्हें मुन्ने बच्चो के अच्छी शिक्षा व सुरक्षा को लेकर तमाम निर्देश जारी किये जा रहे है, और वही सड़क व वाहन नियमों की उड़ाई जा रही है धज्जिया। अभी हाल ही मे एक घटना ने निजी विद्यालयों के मालिकों द्वारा की जा रही लापरवाही को उजागर किया है।फिर भी गलतियों को दरकिनार कर सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से बच्चो को छोटे बड़े वाहनों मे भरकर नगर की मुख्य सड़क से विद्यालय लाया जा रहा है।यह किसकी गलती है जिसका खामियाजा एक छात्र को अपनी जिंदगी से हाथ धोना पड़ा। क्योकि ग्रामीण व नगरीय क्षेत्रों मे चल रहे निजी विद्यालयों के मालिकों व संचालको पर सरकार द्वारा जारी नियमों का कोई असर नहीं पड़ता है।वही वाहनो के संचालक भाड़ा कमाने के चक्कर मे छोटे बच्चो से भरी वाहनों को तेज रफ्तार से सड़को पर दौड़ाते है क्योंकि उन्हें नन्हें बच्चो की परवाह नहीं अपनी कमाई की परवाह होती है। लोगो का कहना है कि नगरीय व ग्रामीण क्षेत्रों मे अत्यधिक विद्यालय शिक्षा के दृष्टिकोण से नहीं बल्कि व्यवसाय के दृष्टिगत खोले गए गए है। क्योकि अभिभावकों से मोटी रकम वसूल करने के लिए स्कूलों मे ही कॉपी, किताब, ड्रेस, जूता मोजा तथा बैग आदि बच्चो को दिए जाते है,और बच्चो के नामांकन के समय उनकी सुरक्षा का हवाला देकर अभिभावकों से मोटी रकम वसूल किया जाता है।एक निजी विद्यालय के वाहन संचालक के लापरवाही ने शनिवार की सुबह करीब 9 बजकर 30मिनट पर नगरपालिका के गेट के सामने 20 वर्षीय छात्र रतन सोनकर की वाहन से कुचलने से मृत्यु हो गयी, किन्तु दिनों तक भी पुलिस तहरीर न मिलने का बहाना बनाकर बस चालक व बस का पता नहीं लगा पाई। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार थाना के पास स्थित विद्यालय का बस है , और बस के चालक के पास वाहन का फिटनेस, ड्राइविंग लाइसेंस एवं दुर्घटना बीमा के कागज नहीं है उस पर भी नगर के कुछ लोगो व पुलिस द्वारा विद्यायल संचालक व मृतक के परिजनों से आपस मे समझौता करा दिया गया।बिना बीमा व फिटनेस के सड़कों पर दौड़ रही निजी विद्यालयों की गाड़ियां स्कूली वाहनों में सुरक्षा नियमों की कैसे धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, इसकी बानगी में नगरपालिका प्रवेश द्वार पर हुई घटना में देखने को मिला। वैन बिना फिटनेस व बीमा के सड़क पर दौड़ रही थी बस के कुचलने से एक युवक की मृत्यु हो गई। लेकिन पुलिस दूसरे दिन भी बस की पहचान नहीं कर पाई।सरकार की तरफ से बच्चों की सुरक्षा के लिए भले ही नियम जारी किए गए हैं, लेकिन नियमों की धज्जियां नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे विद्यालय संचालकों की मालिकों पर लागू नहीं होती लापरवाही तो इस तरह से होती है। कि वाहन में क्षमता से अधिक नौनिहालों को भरकर गांवों से विद्यालय ले जाया जाता है ।यही नहीं जल्दी पहुंचाने और दूसरे जगह भाड़ा कमाने के चक्कर में वाहनों की रफ्तार अत्यंत अधिक होती है। जिससे उन्हें बच्चों की नहीं बल्कि अपने दुकान की परवाह होती है अधिकांश लोगों का कहना है की नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में अत्यधिक विद्यालय व्यवसाय के लिए खोले गए हैं जो शिक्षा रूपी दुकान में अभिभावकों से पैसा वसूल करने के लिए अपने विद्यालय पर ही कापी, किताब, जूता मौजा, एवं स्कूल बैग के साथ सुरक्षा व्यवस्था की गारंटी के साथ बच्चों का नामांकन करते हैं और अभिभावकों से मोटी रकम वसूलते हैं पूरा मामला तब देखा गया कि जब शनिवार की लगभग साढे नौ बजे थाना स्थित एक विद्यालय के बस के कुचलना से रतन सोनकर 20 की मृत्यु हो गई लेकिन दूसरे दिन भी पुलिस तहरीर न मिलने का बहाना बनाकर बस चालक एवं बस का पता नहीं कर पाई सूत्रों का कहना है कि थाना स्थित विद्यालय का बस था चालक के पास गाड़ी का फिटनेस, ड्राइवरी लाइसेंस व किसी प्रकार का बीमा दुर्घटना नहीं है। जिसमें नगर के कुछ लोग व पुलिस ने मिलकर विद्यालय संचालक एवं दुर्घटना में मृतक स्वजन से समझौता कर दिया।

सलेमपुर नगर में जाम से राहत की पहल, सोहनाग मोड़ पर लगाया गया अस्थायी डिवाइडर

सलेमपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)। नगर क्षेत्र में आए दिन लगने वाले जाम से लोगों को राहत दिलाने के उद्देश्य से सलेमपुर पुलिस द्वारा सोहनाग मोड़ पर अस्थायी डिवाइडर लगाया गया है। इस डिवाइडर के लगने से सड़क पर अनियंत्रित ढंग से होने वाली आवाजाही को व्यवस्थित किया जा सकेगा, जिससे ट्रैफिक का दबाव कम होगा और वाहन चालकों को सुगम मार्ग मिल सकेगा।पुलिस प्रशासन का कहना है कि सोहनाग मोड़ पर अक्सर वाहनों की अव्यवस्थित पार्किंग और गलत दिशा से आने-जाने के कारण जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती थी। इस समस्या को देखते हुए अस्थायी डिवाइडर लगाने का निर्णय लिया गया, ताकि वाहनों के संचालन को एक दिशा में नियंत्रित किया जा सके।नगर वासी भी इस कदम की सराहना कर रहे हैं। सलेमपुर निवासी अवनीश पाण्डेय ने बताया कि “पुलिस का यह निर्णय सराहनीय है। डिवाइडर लगने से जाम की समस्या में निश्चित रूप से कमी आएगी और आमजन को काफी राहत मिलेगी।” उन्होंने आगे कहा कि यदि इस व्यवस्था का पालन सभी वाहन चालक ईमानदारी से करें, तो ट्रैफिक व्यवस्था और बेहतर हो जाएगी।स्थानीय लोगों का मानना है कि यह कदम नगर में सुचारू यातायात व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत है। पुलिस प्रशासन ने भी लोगों से अपील की है कि वे ट्रैफिक नियमों का पालन करें और इस व्यवस्था को सफल बनाने में सहयोग दें।सलेमपुर नगर में लगाए गए इस अस्थायी डिवाइडर को लेकर उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में जाम की समस्या से काफी हद तक निजात मिलेगी और यातायात व्यवस्था और अधिक सुगम हो जाएगी।

केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ को सैन्य अधिकारियों द्वारा ध्वज लगाया गया

रांची (राष्ट्र की परम्परा)
आर्म्स फ़ोर्स फ्लेग डे पर रांची में केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ को सैन्य अधिकारियों द्वारा ध्वज लगाया गया । यह ध्वज राष्ट्र के हर नागरिक का गौरव है। इस अवसर पर ब्रिगेडियर निरंजन कुमार (निदेशक, सैनिक कल्याण निदेशालय), कर्नल संजय प्रसाद गुप्ता (सहायक निदेशक, सैनिक कल्याण निदेशालय), लेफ्टिनेंट कर्नल प्रदीप कुमार झा (संपदा प्रबंधक, सैनिक कल्याण निदेशालय) मौजूद रहे। एक बार पुनः राष्ट्र की सुरक्षा में समर्पित हमारे वीर सैनिकों, वीर बलिदानियों के परिवारों और पूर्व सैनिकों के प्रति सभी देशवासियों की तरफ से कृतज्ञता प्रकट करता हूं। आज का दिन हमें उन अनगिनत बलिदानियों के त्याग की याद दिलाता है, जिनके कारण हम सुरक्षित और स्वतंत्र जीवन जी रहे हैं।

झारखंड राज्य कर्मचारी महासंघ की बैठक में अहम निर्णय आंदोलन की चेतावनी

रांची (राष्ट्र की परम्परा) झारखंड राज्य कर्मचारी महासंघ के कार्यकारिणी की एक आवश्यक बैठक राज्य अध्यक्ष आदिल ज़हीर की अध्यक्षता में सर्वे मैदान कचहरी परिसर रांची मे देर शाम तक हुई। बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर निर्णय लिया गया कि महासंघ के द्वारा सरकार को समर्पित 11 सूत्री लंबित चिरकालीन मांग को सरकार शीघ्र पूरा करें अन्यथा महासंघ बाध्य होकर आंदोलन करने का निर्णय लिया। महासंघ के महासचिव साहेब राम भोक्ता ने कहा कि कर्मचारियों के मांगों को सरकार शीघ्र पूरा करे क्योंकि राज्य के राज्यकर्मी अपनी मांगों के लिए बार-बार सरकार से गुहार लगा रहे हैं। बैठक की अध्यक्षता करते हुए महासंघ के राज्य अध्यक्ष आदिल ज़हीर ने कहा कि अगर शीघ्र हमारी मांगों को सरकार पूरा नहीं करती है तो बाध्य होकर नए साल में महासंघ आंदोलन करेगी जिसके लिए सभी राजकर्मियों को तैयार रहना होगा। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि हम शिक्षक,कर्मचारी एवं पदाधिकारी सभी पूरी तरह एकजुट और एक साथ हैं। आज के इस बैठक में झारखंड राज्य कर्मचारी महासंघ के राज्य अध्यक्ष आदिल ज़हीर, महासचिव साहेब राम भोक्ता, सम्मानित अध्यक्ष शैलेंद्र कुमार, संयुक्त महासचिव आतिश झा, राज्य सचिव रामसेवक महतो, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार महतो ,संरक्षक विजय कुमार सिंह एवं जिला अध्यक्ष अखिलेश कुमार सहित अन्य कर्मचारी नेता शामिल थे।

सरकार और विभागीय कार्रवाई से अराजपत्रिक कर्मचारी महासंघ नाराज

रांची (राष्ट्र की परम्परा) झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के महामंत्री सुनील कुमार साह ने कहा कि झारखंड में आज तक छठा वेतनमान एवं सातवां केंद्रीय वेतनमान की सभी सुविधाएं हु बहु अनुशंसा , संशोधित वेतमान,भत्ता, ग्रेड पे नहीं दी जा रही है। जिससे राज्यकर्मियों में रोष व्याप्त है। राज्यकर्मियों की उम्मीद की मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन झारखंड सरकार इसे लागू करेंगे ,परंतु कोई कारवाई नहीं हुई। तत्कालीन मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्रीमती वंदना दादेल IAS झारखंड सरकार ने वर्ष 2023 में सचिव, कार्मिक विभाग, झारखंड सरकार सहित सभी संबंधित विभाग को 21 सूत्री मांगो पर कारवाई हेतु पीत पत्र वर्ष 2023 में ही सभी संबंधित सचिव को भेजी गई परंतु आज तक कही से भी कोई भी कारवाई नहीं की गई। सहकारिता प्रसार पदाधिकारी सहित सभी निरीक्षक संवर्ग को 6500 रुपए वेतनमान के बदले 5000 रु वेतनमान दी जा रही है,ग्रेड पे 4600 रु के बदले 4200 रु दी जा रही है , मुफ्फसिल लिपिकों का तथा पंचायत सचिव संवर्ग का ग्रेड पे आज तक ग्रेड पे 2400 रु नहीं दी जा रही है। सबसे खराब हालत JSLPS झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी ग्रामीण विकास विभाग झारखंड में कार्यरत ऑफिस बॉय ऑफिस अटेंडेंट हाउस कीपर संवर्ग जिनको मात्र 425 से 450 रु प्रतिदिन के दर से वो भी केवल कार्यदिवस में ही मानदेय मिलता है।इस संवर्ग को कोई अवकाश नहीं महिला कर्मचारियों को विशेष अवकाश नहीं,ये सीधा सीधा अन्याय है।कार्यरत बल इनका 240 है ,JSLPS द्वारा इसमें से 8 ऑफिस बॉय को लेवल L 8 में जोड़ा गया शेष 232 को आज तक नहीं जोड़ा गया। श्रम मंत्रालय भारत सरकार द्वारा इनलोगों को न्यूनतम 783 रु प्रतिदिन मानदेय की अनुशंसा है,नहीं दी जा रही है। जबकि मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन झारखंड सरकार के वरीय आप्त सचिव सुनील कुमार श्रीवास्तव द्वारा कई पत्र कारवाई हेतु सचिव, ग्रामीण विकास विभाग झारखंड सरकार को भेजी गई,कोई कारवाई नहीं। इसी तरह JSLPS में कार्यरत डाटा एंट्री ऑपरेटर को आज तक केवल 7 में नहीं जोड़ा गया,इनका मानदेय 40,900 रु भी नहीं दी जा रही है,इनकी कोई भी जायज मांगो को लागू नहीं की जा रही है।JSLPS में कार्यरत PRP/ BAP संवर्ग की भी जायज मांगो को लागू नहीं जा रही है। इन दोनों संवर्गो को भी इनके मांगो पर कारवाई हेतु सीएम हेमन्त सोरेन झारखंड सरकार के वरीय आप्त सचिव सुनील कुमार श्रीवास्तव के द्वारा पत्र सचिव, ग्रामीण विकास विभाग झारखंड सरकार को कई बार भेजी गई,कोई कारवाई नहीं। अभियान निदेशक,राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ,झारखंड को भी मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन झारखंड सरकार द्वारा निर्देशित कई पत्र तब्बूसम नाज,अस्पताल प्रबंधक धनबाद एवं दीपक कुमार गुप्ता से संबंधित कारवाई हेतु भेजा गया,कोई कारवाई नहीं। स्वास्थ्य विभाग झारखंड में कार्यरत MPW एमपीडब्ल्यू कर्मियों को स्थाई समायोजन अभी तक नहीं की गई। पंचायती राज निदेशक झारखंड के अधीन कार्यरत पंचायत सहायक को मात्र 2500 रु प्रोत्साहन राशि दी जा रही है, आश्चर्य की झारखंड में एक ऐसा संवर्ग जिनको एक भी पैसा मानदेय नहीं दी जा रही है।ये लोग राज्य के विकास में अपना योगदान दे रहे हैं। झारखंड सरकार द्वारा आज तक संविदा कर्मियो, अनुबंध कर्मियो, दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों, कंप्यूटर ऑपरेटर आउट सोर्सिंग कर्मियों को स्थाई समायोजन नहीं की गई,इनलोगों को आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति काफी नाजुक है। जनसेवक संवर्ग की भी जायज मांगो को पूरा की जाय। हेमन्त सोरेन झारखंड सरकार से महासंघ ने यह भी अनुरोध किया था कि सेवानिवृति उम्र 62 वर्ष की जाय। महासंघ द्वारा मुख्यमंत्री को समर्पित 21 सूत्री मांगो पर आज तक कारवाई लंबित है,उसे अविलंब पूरा की जाए। महासंघ के महामंत्री सुनील कुमार साह, अध्यक्ष देव नारायण सिंह मुंडा, सल, संरक्षक गणेश प्रसाद सिंह, सम्मानित अध्यक्ष मुक्तेश्वर लाल , सुरेश हाजरा, कमलेश कुमार, जी बी राम, रामाशीष पासवान, रिंकू कुमार, करन कुमार गुप्ता, मुन्ना कापरी ,पंकज कुमार,भरत उरांव, मुकेश कुमार, टीपू सुल्तान,मिथुन यादव, नारायण महतो, श्याम लाल पासवान, अनिल कुमार, विनोद कुमार, अशोक कुमार, सौरभ कुमार सनातन कुमार,रीना सिंह, सुरेश कुमार, बी अगस्त क्रांति कुमार, डॉक्टर गणेश राम, कौशल प्रसाद सिन्हा, अखिलेश कुमार अंबष्ट पवन कुमार, मंगल हेंब्रम, मो रिजवान, तौफीक आलम, तब्बूसम नाज, आदि ने माननीय मुख्यमंत्री से अविलंब कारवाई की मांग की है। वर्ष 2023 से प्रेषित सरकार के निदेशानुसार 21 सूत्री मांगो से संबंधित पीत पत्र आज तक कारवाई नहीं होना चिंता की विषय है। केंद्र द्वारा आठवां वेतनमान की लागू करने के लिए कमिटी का गठन कर दी और झारखंड में 2006 का ही अनुशंसा लागू नहीं।

मसल्स मेनिया में पूर्वांचल का दबदबा

खलीलाबाद के शुएब और महराजगंज के सनी ने जीता स्वर्ण पदक

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
राजधानी दिल्ली में आयोजित प्रतिष्ठित मसल्स मेनिया चैंपियनशिप में पूर्वांचल के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक बार फिर क्षेत्र का परचम लहराया। खलीलाबाद के शुएब और महराजगंज के सनी गुप्ता ने अपनी-अपनी कैटेगरी में स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाकर टीम माज़ खान और पूर्वांचल को बड़ी उपलब्धि दिलाई।

दो कैटेगरी में चमके शुएब, सनी ने भी दिलाया स्वर्ण

जानकारी के अनुसार टीम माज़ खान के एथलीट शुएब ने शानदार फार्म जारी रखते हुए दो कैटेगरी में गोल्ड मेडल जीता। मजबूत बॉडी, बेहतरीन पोज़िंग और प्रभावशाली मंच प्रदर्शन के दम पर उन्होंने निर्णायकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
वहीं महाराजगंज के सनी गुप्ता ने भी अपने दमदार प्रदर्शन के साथ स्वर्ण पदक जीतकर टीम के मेडल कलेक्शन में एक और चमकदार उपलब्धि जोड़ दी।

टीम माज़ खान लगातार सुर्खियों में

टीम माज़ खान के खिलाड़ी पिछले दिनों भी सुर्खियों में रहे हैं, जब टीम के दो एथलीटों ने थाईलैंड के बैंकॉक में आयोजित अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में भारत का झंडा फहराया था। अब शुएब और सनी की जीत ने फिर साबित कर दिया कि पूर्वांचल के युवा एथलीट राष्ट्रीय मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति बना चुके हैं।

शुएब बोले — “माज़ सर सिर्फ कोच नहीं, अभिभावक हैं

अपनी जीत पर प्रतिक्रिया देते हुए शुएब ने कहा—
“मैं मध्यम परिवार से हूँ। शुरुआत से गोलू भाई के साथ जिम करता रहा हूँ। उन्होंने परिवार की तरह हर कदम पर मेरा साथ दिया। माज़ सर से जुड़ने के बाद असली ट्रेनिंग समझ में आई। सर हमें पूरी नॉलेज और अनुशासन के साथ तैयार करते हैं। वे सिर्फ कोच नहीं, एक अभिभावक की तरह हमेशा हमारे साथ खड़े रहते हैं।”

सनी ने बताया संघर्ष— “गरीब था, लेकिन माज़ सर ने सपने पूरे करवाए”

महाराजगंज के मिठौरा ब्लॉक निवासी सनी ने कहा—
“मैं गरीब परिवार से हूँ। कई कोचों के पास गया, लेकिन पैसों के कारण कोई मदद नहीं करता था। बाद में माज़ सर से मिला और उनकी टीम जॉइन की। फिर मिस्टर पूर्वांचल, मिस्टर गोरखपुर, मिस्टर महाराजगंज और अब मसल्स मेनिया तक पहुँचा। यह सब माज़ सर की वजह से संभव हुआ है। अभी बहुत बड़ी उपलब्धियाँ आनी बाकी हैं—यह तो सिर्फ शुरुआत है।”

पूर्वांचल के एथलीटों ने फिर दिखाया दम

मसल्स मेनिया में शुएब और सनी की दमदार जीत ने यह साबित कर दिया कि
मेहनत, अनुशासन और सही मार्गदर्शन के साथ पूर्वांचल के खिलाड़ी किसी भी मंच पर इतिहास लिखने की क्षमता रखते हैं।