Sunday, June 28, 2026
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बिहार में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की नई क्रांति—टीचर्स ऑफ बिहार मंच की अभिनव पह

टीचर्स ऑफ बिहार मंच: शिक्षकों और छात्रों को जोड़ने वाला बिहार का सबसे सशक्त शैक्षणिक प्लेटफॉर्म

पटना (राष्ट्र की परम्परा)।बिहार के सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और छात्रों के सीखने के स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में टीचर्स ऑफ बिहार मंच ने एक उल्लेखनीय पहचान स्थापित की है। डिजिटल युग में शिक्षकों को एक ही प्लेटफॉर्म पर जोड़कर सकारात्मक शैक्षणिक बदलाव लाने वाला यह मंच अब एक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। हजारों शिक्षकों और लाखों छात्रों को लाभान्वित करते हुए यह मंच बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार की मजबूत मिसाल पेश कर रहा है।

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मंच के संस्थापक शिव कुमार और टेक्निकल टीम लीडर ई. शिवेंद्र प्रकाश सुमन के अनुसार, टीचर्स ऑफ बिहार मंच का लक्ष्य है कि राज्य के हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक और सुलभ शिक्षा पहुँचे। मंच के माध्यम से शिक्षक अपने अनुभव, नवाचार और डिजिटल शिक्षण तकनीकों को साझा करते हैं, जिससे कक्षा-कक्ष में पढ़ाई अधिक प्रभावी और रोचक बन रही है। मंच वीडियो-आधारित लर्निंग, ई-कंटेंट, डिजिटल टूल, टेक-सक्षम शिक्षण गतिविधियों और नवीन शैक्षणिक मॉडल से शिक्षकों को जोड़ रहा है।

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प्रदेश प्रवक्ता रंजेश कुमार और प्रदेश मीडिया संयोजक मृत्युंजय कुमार ने बताया कि टीचर्स ऑफ बिहार मंच ने हजारों शिक्षकों को नई पहचान और दिशा दी है। मंच की मास्टरक्लास, नवाचारी वीडियोज, कहानी आधारित शिक्षण, मोटिवेशनल अभियान और डिजिटल लर्निंग प्रोजेक्ट ने बच्चों के सीखने के स्तर को तेजी से बढ़ाया है। वहीं, वेबिनार, प्रशिक्षण सत्र और कार्यशालाओं ने जिला स्तर पर सकारात्मक शैक्षणिक माहौल तैयार किया है।

इवेंट लीडर केशव कुमार ने कहा कि मंच द्वारा आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम, इनोवेटिव टीचिंग कैंप और छात्र क्रिएटिविटी फेस्ट बच्चों की अभिरुचि और कौशल को निखारने में महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं।

टीचर्स ऑफ बिहार मंच आज राज्य की शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक और स्थायी परिवर्तन की नींव बन चुका है, जो आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को उज्ज्वल करने की ओर एक बड़ा कदम है।

देवरिया पेंशनर्स कल्याण संस्था बैठक: पेंशन पुनरीक्षण पर रोष, 17 दिसंबर को सौंपा जाएगा ज्ञापन

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा )। देवरिया पेंशनर्स कल्याण संस्था बैठक कलेक्ट्रेट परिसर स्थित पेंशनर्स भवन में अध्यक्ष श्रीराम त्रिपाठी की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई, जहां पेंशनरों ने सरकार द्वारा पेंशन पुनरीक्षण को 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की परिधि से बाहर किए जाने पर कड़ा आक्रोश व्यक्त किया। संस्था ने इसे पेंशनरों और वरिष्ठ नागरिकों की उपेक्षा बताते हुए आगामी 17 दिसंबर को कलेक्ट्रेट न्यू सभागार में आयोजित पेंशनर दिवस पर प्रधानमंत्री और केंद्रीय वित्त मंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपने की घोषणा की।

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बैठक का संचालन संयुक्त मंत्री दिग्विजयनाथ सिंह ने किया। उन्होंने पिछली बैठक की कार्यवाही पढ़कर सुनाई, जिसे सर्वसम्मति से अनुमोदित किया गया। वरिष्ठ उपाध्यक्ष एस.के. भौमिक ने कहा कि पेंशन अधिकार है, सरकार इससे वंचित नहीं कर सकती। रिक्त पदों पर नियुक्तियां न होने से दफ्तरों और विद्यालयों में कार्य प्रभावित हो रहा है, ऐसे में पेंशनर और कर्मचारी दोनों को संघर्ष तेज करना होगा।

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अध्यक्ष श्रीराम त्रिपाठी ने कहा कि चिकित्सा प्रतिपूर्ति व नोशनल वेतनवृद्धि से जुड़े कई प्रकरण विभागों और मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में लंबित हैं, जिनके शीघ्र निस्तारण की मांग की गई। संयुक्त मंत्री दिग्विजयनाथ सिंह ने प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों व कर्मचारियों को घोषित कैशलेस चिकित्सा सुविधा का शासनादेश अब तक जारी न होने पर नाराज़गी जताई।

सभा में संगठन की सदस्यता बढ़ाने, पेंशनरों की समस्याओं को लेकर एकजुट होने और संघर्ष को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में 80 वर्षीय वरिष्ठ पेंशनर को सम्मानित भी किया गया। इस दौरान प्रचार मंत्री विजय बहादुर द्वारा प्रस्तुत गीत ने माहौल को भावुक कर दिया।

सभा के अंत में अध्यक्ष श्रीराम त्रिपाठी ने कड़ाके की ठंड में बड़ी संख्या में उपस्थित सभी सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए बैठक का समापन किया।

डिजिटल जाल में फँसता युवा—साइबर ठगी का बढ़ता खतरा और परीक्षा तैयारी का सुरक्षित रोडमैप

सोमनाथ मिश्रा की कलम से (राष्ट्र की परम्परा)

आज का युवा पूरी तरह डिजिटल दुनिया पर निर्भर हो चुका है—ऑनलाइन पढ़ाई, मॉक टेस्ट, फॉर्म भरना, परीक्षा फीस जमा करना, ई-बुक्स और कोचिंग प्लेटफॉर्म से जुड़े हर काम इंटरनेट के माध्यम से ही हो रहे हैं। लेकिन इसी डिजिटल सुविधा ने एक खतरनाक चुनौती भी पैदा कर दी है—साइबर ठगी।
देश में तेजी से बढ़ते ऑनलाइन ट्रांजेक्शन, फर्जी ऐप्स और नकली वेबसाइटों ने छात्रों को सबसे बड़ा शिकार बनाया है। यही वजह है कि आज डिजिटल जाल में फँसता युवा एक गंभीर सामाजिक-तकनीकी संकट बन चुका है।

  1. साइबर ठगी क्यों बढ़ रही है?
    फोकस कीवर्ड को ध्यान में रखते हुए, युवाओं के डिजिटल जाल में फँसने के मुख्य कारण:
    डिजिटल ट्रांजेक्शन की तेज़ी: UPI और वॉलेट पेमेंट ने सुविधा बढ़ाई है, लेकिन खतरा भी।
    फर्जी ऐप और वेबसाइटों की भरमार: छात्र जल्दी विश्वास कर लेते हैं।
    कम जागरूकता और समय की कमी: जल्दी रिजल्ट, जल्दी एडमिट कार्ड पाने की चाहत में ठगी के शिकार बन जाते हैं।
    ऑनलाइन शिक्षा के नाम पर सस्ते ऑफर: कोर्स, नोट्स, टेस्ट सीरीज़ का लालच सबसे बड़ा हथियार।
    साइबर अपराधी जानते हैं कि प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्र सीमित बजट में पढ़ते हैं और ऐसे लोग आसानी से किसी भी ऑफर पर भरोसा कर बैठते हैं।
  2. छात्रों के लिए डिजिटल सुरक्षा के साथ परीक्षा तैयारी का सुरक्षित रोडमैप
    सिर्फ पढ़ाई नहीं, डिजिटल सुरक्षा भी आज की परीक्षा तैयारी का अनिवार्य हिस्सा है।
    समय प्रबंधन—सफलता का पहला मंत्र
    दिन का स्टडी प्लान बनाएँ।
    45–50 मिनट पढ़ें, फिर 10 मिनट का ब्रेक।
    सप्ताह में एक फुल मॉक टेस्ट अनिवार्य।
    रोज़ 1–2 घंटे रिवीजन करें।
    केवल विश्वसनीय प्लेटफॉर्म का उपयोग करें
    सरकारी वेबसाइटें: .gov.in / .nic.in
    मान्यता प्राप्त कोचिंग या ऑफिशियल ऐप्स
    Google Play Store या Apple Store से ही ऐप डाउनलोड करें।
    पेमेंट सुरक्षा—सबसे बड़ा बचाव
    किसी भी UPI ID, QR कोड को दो बार जांचें।
    “अभी भुगतान करें”, “लिंक तुरंत ओपन करें” जैसे संदेशों से दूर रहें।
    सोशल मीडिया पर भेजे गए रिजल्ट/एडमिट कार्ड लिंक पर क्लिक न करें।
    डिजिटल फाइल डाउनलोड करते समय सावधानी
    .exe, .apk, .zip जैसी फाइलें संदिग्ध हो सकती हैं।
    एंटी-वायरस सक्रिय रखें।
    थर्ड-पार्टी साइट से एडमिट कार्ड/रिजल्ट न डाउनलोड करें।
    समय और तकनीक—दोनों पर नियंत्रण
    मोबाइल का उपयोग पढ़ाई के लिए करें, सोशल मीडिया के लिए नहीं।
    रोज़ 4–6 घंटे पढ़ाई पर फोकस करें।
    हर विषय के लिए समय-सीमा तय कर पढ़ाई करें।
  3. डिजिटल सुरक्षा का अभ्यास छात्रों के लिए क्यों अनिवार्य है?
    क्योंकि एक छोटी सी गलती आपके—
    पैसे,डाटा,और तैयारी—तीनों को खतरे में डाल सकती है।
    आज प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता केवल मेहनत से नहीं, बल्कि डिजिटल सुरक्षा की समझ से भी तय होती है।
    डिजिटल जाल में फँसता युवा तब ही सुरक्षित रह सकता है, जब वह तकनीक का उपयोग समझदारी और जिम्मेदारी से करे। परीक्षाओं की तैयारी का भविष्य अब सिर्फ किताबों पर नहीं, बल्कि साइबर जागरूकता पर भी निर्भर है।

कंक्रीट की भूख में निगलते खेत—शहरी विस्तार से मिट रही खेती की जड़ें

(राष्ट्र की परम्परा)

तेज़ी से बढ़ते शहरीकरण, औद्योगिक परियोजनाओं और भूमि अधिग्रहण की नीतियों ने भारत की खेती-किसानी पर गहरा असर डाला है। विकास की चमकदार निगाहों से दूर, गाँवों के खेत कंक्रीट की भूख में निगलते जा रहे हैं, और किसानों की मेहनत से पनपी भूमि धीरे-धीरे शहरों के फैलाव में तबाह हो रही है। कंक्रीट की भूख में निगलते खेत आज देश के कृषि भविष्य के सामने सबसे गंभीर चुनौती बन चुके हैं।

विकास की रफ्तार, लेकिन कीमत किसानों की?

सरकारें विकास को हाईवे, स्मार्ट सिटी, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और हाउसिंग प्रोजेक्ट के रूप में दिखाती हैं। लेकिन इस विकास की रफ्तार में सबसे बड़ी कीमत किसान चुका रहा है। सदियों से जिस जमीन ने परिवारों को जीविका दी, वही जमीन अब मॉल, कॉलोनियों और फैक्ट्रियों के नाम पर अधिग्रहित की जा रही है।
कंक्रीट की भूख में निगलते खेत का दर्द इन गांवों में साफ दिखता है, जहां खेत सिकुड़ रहे हैं और किसान भी जल्द ही मजदूर बनने को मजबूर होते जा रहे हैं।

खेती की जमीन पर बढ़ता शहरी कब्ज़ा
भारत में कृषि भूमि तेजी से घट रही है। कारण—
हाउसिंग कॉलोनियों का तेजी से विस्तार
इंडस्ट्रियल एरिया और फैक्ट्री ज़ोन
नई सड़कें, एक्सप्रेसवे और हाईवे
स्मार्ट सिटी और बड़े शहरी प्रोजेक्ट
जमीन की कीमत के बढ़ने का लाभ भी किसान तक नहीं पहुंचता। जमीन बिक जाने के बाद उसके पास ना खेती बचती है, ना आय का कोई स्थिर साधन। कंक्रीट की भूख में निगलते खेत महज़ एक वाक्य नहीं, बल्कि किसानों की जमीनी हकीकत है।
किसानों का बढ़ता संकट: रोजगार खत्म, सम्मान कम।
खेती का खत्म होना सिर्फ जमीन खोना नहीं है, बल्कि यह पूरी पीढ़ी का भविष्य छिन जाने जैसा है।
स्थायी रोजगार नहीं मिलता,कौशल की कमी से मजदूरी का सहारा,आजीविका में अस्थिरता,कर्ज़ में बढ़ोतरी,सामाजिक और आर्थिक सम्मान में गिरावट।
शहरी विकास की इस दौड़ में किसान अवसर पाने के बजाय नए संघर्षों का सामना कर रहा है।

खाद्यान्न सुरक्षा पर गंभीर खतरा
यदि खेत लगातार कंक्रीट में बदलते रहे तो भारत की खाद्यान्न सुरक्षा पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
कम होती कृषि भूमि का सीधा मतलब है—
अनाज उत्पादन में कमी,खाद्यान्न के दामों में बढ़ोतरी,भविष्य में खाद्यान्न संकट का जोखिम
कंक्रीट की भूख में निगलते खेत देश की भोजन व्यवस्था पर सीधा प्रहार कर रहे हैं।

भूमि अधिग्रहण: वादे बड़े, पारदर्शिता कम

कई किसानों को उचित मुआवजा या पुनर्वास नहीं मिलता। समस्याएँ—
जमीन का कम मूल्य निर्धारित होना,अधिग्रहण प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी,विस्थापन के बाद पुनर्वास न मिलना,रोजगार और स्किल ट्रेनिंग का अभाव,इन वजहों से किसान आर्थिक और सामाजिक रूप से और कमजोर होते जा रहे हैं।

समाधान: संतुलित विकास ही वास्तविक विकास

यदि देश को आगे बढ़ाना है, तो खेती और शहरीकरण के बीच संतुलन बनाना ज़रूरी है।
कृषि भूमि की कानूनी सुरक्षा बढ़ाई जाए।
अधिग्रहण प्रक्रिया पारदर्शी हो।
किसानों को वैकल्पिक रोजगार और स्किल ट्रेनिंग मिले।
आधुनिक खेती, सिंचाई और तकनीक का विस्तार हो।
वास्तविक विकास वही है जिसमें किसान शामिल हों, न कि पीछे छूट जाएँ।

बाबा राघव दास: जनसेवा और करुणा के शिखर पुरुष ‘पूर्वांचल के गांधी’

जयन्ती पर विशेष नवनीत मिश्र

बाबा राघव दास आधुनिक भारत के उन दुर्लभ महापुरुषों में शामिल किए जाते हैं, जिन्होंने साधु जीवन को केवल आध्यात्मिक साधना तक सीमित न रखकर उसे जनसेवा का माध्यम बनाया। उनका जीवन इस सत्य का जीवंत उदाहरण है कि सेवा ही सर्वोच्च धर्म है। वे साधु थे, पर उनका साधुत्व मानवता की रक्षा और पीड़ितों के कल्याण में निहित था। वे राष्ट्रवादी थे, पर उनका राष्ट्रवाद मनुष्यता से शुरू होकर मनुष्यता पर ही समाप्त होता था। महान संत, स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक और दार्शनिक थे, जिन्हें ‘पूर्वांचल का गांधी’ कहा जाता है; उन्होंने गांधीजी के विचारों से प्रेरित होकर आजादी की लड़ाई लड़ी, कई सामाजिक-शैक्षणिक संस्थाएँ बनाईं, और शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया, खासकर उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में, जहाँ आज भी उनके नाम पर मेडिकल कॉलेज और अन्य अनेक संस्थान हैंl
स्वतंत्रता संग्राम के दौरान बाबा राघव दास ने राष्ट्रीय चेतना को जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अंग्रेज़ी शासन के दमन और अन्याय से त्रस्त जनता को उन्होंने सत्य, अहिंसा और स्वाभिमान का मार्ग दिखाया। गांधीजी के विचारों से प्रभावित होकर उन्होंने गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों में स्वदेशी, हरिजन उत्थान, स्वच्छता और नशामुक्ति जैसे आंदोलनों को गाँव-गाँव पहुँचाया। वे केवल आंदोलनकारी नहीं थे, बल्कि जनता को शिक्षित, जागरूक और आत्मनिर्भर बनाने वाले कर्मयोगी थे।
बाबा राघव दास का जीवन मानवता की सेवा के प्रति अतुलनीय समर्पण से भरा था। पूर्वी उत्तर प्रदेश में जब हैजा, मलेरिया और चेचक जैसी महामारियों ने कहर बरपाया, तब वे दिन-रात रोगियों के बीच रहकर उनकी सेवा करते रहे। बीमार, गरीब और असहाय लोगों के लिए वे आशा की अंतिम किरण थे। गोरखपुर का बीडी अस्पताल, जिसे बाद में उनके सम्मान में बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज का नाम दिया गया, उनकी सेवा-भावना की अमर धरोहर है। उन्होंने यह मान्यता स्थापित की कि चिकित्सा, स्वच्छता और जनकल्याण ही समाज सुधार का आधार है।
अपने तपस्वी जीवन में उन्होंने कभी भी पद, प्रतिष्ठा या सत्ता को महत्व नहीं दिया। स्वतंत्रता के बाद विधायक बनने के बावजूद उनकी पहचान एक सच्चे लोकसेवक की ही रही। वे राजनीति को समाज सेवा का साधन मानते थे, साध्य नहीं। जनता के बीच उनकी लोकप्रियता और सम्मान उनकी निष्ठा, सादगी और सत्यनिष्ठा से उपजा था। उनका पूरा जीवन यह संदेश देता है कि सच्चा नेतृत्व वह है, जो जनता का दर्द समझे और उसके समाधान के लिए तन-मन से समर्पित रहे।
बाबा राघव दास की विरासत आज भी समाज को प्रेरित करती है। वे हमें यह सिखाते हैं कि राष्ट्र निर्माण केवल नीतियों से नहीं, बल्कि करुणा, संवेदनशीलता और निःस्वार्थ सेवाभाव से होता है। उनका जीवन हमें यह समझने में मदद करता है कि धर्म का वास्तविक स्वरूप मंदिरों या ग्रंथों में नहीं, बल्कि मानवता की सेवा में है। वे उन महात्माओं में से थे, जिनके शब्द नहीं, बल्कि कर्म ही उनके परिचय का आधार थे।
बाबा राघव दास का व्यक्तित्व और कृतित्व आज भी यह संदेश देता है कि यदि समाज में सच्चे अर्थों में परिवर्तन लाना है तो सेवा, सहानुभूति और मानवीयता को मूलधार बनाना होगा। उनका जीवन और उद्देश्य आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उनके समय में थे, क्योंकि मानवता का धर्म कभी पुराना नहीं होता।

जानें कैसा रहेगा आज का दिन सभी 12 राशियों के लिए

12 दिसंबर 2025 राशिफल

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रह-नक्षत्रों की चाल हर राशि के जीवन में अलग-अलग प्रभाव डालती है। आइए जानते हैं कि 12 दिसंबर 2025 का दिन मेष से मीन तक सभी 12 राशियों के लिए कैसा रहेगा।

मेष राशि (Aries)
कल आपका कॉन्फिडेंस बढ़ेगा और रुके हुए काम तेजी से पूरे होंगे। किसी पुराने काम में अच्छी प्रगति मिलने की संभावना है। परिवार में शांति रहेगी।
✔ खर्च सोच-समझकर करें
✔ जल्दबाजी में कोई फैसला न लें
✔ सेहत का ध्यान रखें

वृषभ राशि (Taurus)
आज आप थोड़ा इमोशनल महसूस कर सकते हैं, लेकिन दिन सामान्य रहेगा। काम में धीरे-धीरे सुधार होगा।
✔ किसी खास व्यक्ति से बातचीत संभव
✔ धन के मामलों में सावधानी रखें
✔ अनावश्यक चिंताओं से बचें

मिथुन राशि (Gemini)
दिन आपके लिए लकी साबित होगा। रुके कार्य आगे बढ़ेंगे और खुशखबरी मिलने के योग हैं।
✔ दोस्तों और परिवार के साथ अच्छा समय
✔ ट्रैवल प्लान बन सकता है
✔ मूड अच्छा रहेगा

कर्क राशि (Cancer)
आप आज शांत मन से निर्णय लेंगे और कार्य आसानी से पूरे होंगे।
✔ ऑफिस में दबाव कम
✔ रिश्तों में स्थिरता
✔ शाम को सुकून भरा समय
✔ हल्की थकान संभव

सिंह राशि (Leo)
आपकी पर्सनैलिटी में निखार आएगा और लोग प्रभावित होंगे।
✔ बिज़नेस में फायदा
✔ परिवार में शुभ सूचना
✔ खर्च बढ़ सकते हैं
✔ नींद और सेहत का ध्यान रखें

कन्या राशि (Virgo)
आपकी मेहनत का फल मिलेगा।
✔ प्रोफेशनल सुझाव प्रभावी साबित होंगे
✔ घर में शांति और खुशियों का आगमन
✔ आर्थिक स्थिति सुधरेगी
✔ अनावश्यक खर्चों पर रोक लगाएं

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तुला राशि (Libra)
जिम्मेदारियां बढ़ेंगी, लेकिन आप कुशलता से मैनेज करेंगे।
✔ काम में सतर्कता जरूरी
✔ रिश्तों में धैर्य और समझ
✔ ओवरथिंकिंग से बचें
✔ बाहर का भोजन न करें

वृश्चिक राशि (Scorpio)
आज आप क्रिएटिविटी से काम करेंगे और लोगों को प्रभावित करेंगे।
✔ हर काम में सफलता
✔ दोस्त मदद कर सकते हैं
✔ लव लाइफ में सुधार
✔ पुरानी चिंता खत्म होने के संकेत

धनु राशि (Sagittarius)
दिन शानदार रहेगा।
✔ मनचाहे काम पूरे होने की उम्मीद
✔ पुराना विवाद समाप्त हो सकता है
✔ आर्थिक स्थिति बेहतर
✔ रूटीन फॉलो करें

मकर राशि (Capricorn)
काम में सफलता मिलेगी।
✔ दूसरों की बातों पर ध्यान न दें
✔ नया अवसर मिल सकता है
✔ आर्थिक स्थिति मजबूत
✔ बड़े निवेश से बचें
✔ जंक फूड से दूरी

कुंभ राशि (Aquarius)
गुस्से पर काबू रखें और बातचीत में संयम बरतें।
✔ ऑफिस मीटिंग में सुझाव ध्यान से सुनें
✔ पैसे के मामलों में सावधानी
✔ सेहत को हल्के में न लें।

मीन राशि (Pisces)
शांत दिमाग से लिया फैसला आपके लिए शुभ रहेगा।
✔ क्रश को प्रपोज करने का सही समय
✔ प्रोफेशनल लाइफ में ग्रोथ
✔ छोटे लाभ मिलेंगे
✔ परिवार में खुशी का माहौल
✔ सेहत का ध्यान रखें

राष्ट्र की धरोहरों का अविस्मरणीय योगदान

12 दिसंबर के अविस्मरणीय विदाई दिवस: राष्ट्र को मार्ग दिखाने वाले महान व्यक्तित्वों का स्मरण

12 दिसंबर भारतीय इतिहास में उन महापुरुषों की स्मृति लेकर आता है, जिनके योगदान ने राष्ट्र, साहित्य, राजनीति और कला की दिशा तय की। इस दिन कई ऐसी विभूतियाँ दुनिया से विदा हुईं, जिन्होंने देशहित में अमिट छाप छोड़ी। यहाँ इस तिथि को हुए प्रमुख निधन प्रस्तुत है—

नित्यानंद स्वामी (2012) – उत्तराखंड के प्रथम मुख्यमंत्री, जनसेवा के प्रतीक
उत्तराखंड के पहले मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी (जन्म: बिहार) ने पर्वतीय राज्य की आधारशिला मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे प्रशासनिक सरलता, संवेदनशील शासन और क्षेत्रीय संतुलन की नीति के लिए जाने जाते थे। उत्तराखंड के गठन के बाद प्रारंभिक चुनौतियों को उन्होंने दृढ़ता से संभाला। सार्वजनिक जीवन में सादगी और लोगों से सीधे संवाद उनकी पहचान थी।

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रामानंद सागर (2005) – भारतीय टीवी इतिहास के शिल्पकार
काश्मीर में जन्मे प्रसिद्ध फिल्मकार रामानंद सागर ने भारतीय टेलीविजन पर धार्मिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की नींव रखी। ‘रामायण’ जैसा ऐतिहासिक धारावाहिक सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की सांस्कृतिक चेतना का केंद्र बना। उन्होंने फ़िल्म निर्देशन, लेखन और प्रोडक्शन के माध्यम से भारतीय मूल्यों को घर-घर तक पहुँचाया और टीवी की दुनिया को एक नई पहचान दी।

सैयद मीर क़ासिम (2004) – जम्मू-कश्मीर की राजनीति के संतुलित व्यक्तित्व
जम्मू-कश्मीर के जन्मजात नेता और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अनुभवी राजनेता सैयद मीर क़ासिम प्रदेश के स्थिर प्रशासन और लोकतांत्रिक मजबूती के लिए हमेशा याद किए जाते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में सामाजिक सौहार्द, शैक्षिक विस्तार और राजनीतिक सुधारों को प्राथमिकता दी। कश्मीर की राजनीति में शांति और संवाद को उन्होंने नई दिशा दी जिसका असर आज भी देखा जा सकता है।
जे. एच. पटेल (2000) – कर्नाटक के प्रगतिशील मुख्यमंत्री
कर्नाटक के 15वें मुख्यमंत्री जे. एच. पटेल ने राज्य की आर्थिक वृद्धि, उद्योगों के विस्तार और ग्रामीण संरचना को मजबूत बनाने के लिए उल्लेखनीय कार्य किए। वे जनता दल के प्रमुख चेहरे थे, जिनकी विकासवादी नीतियों ने कर्नाटक को आधुनिकता के पथ पर आगे बढ़ाया। लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उनकी स्वायत्त सोच और साफ छवि ने उन्हें जननेता की पहचान दी।

मैथिलीशरण गुप्त (1964) – राष्ट्रकवि, हिंदी साहित्य के स्तंभ
उत्तर प्रदेश के चिरगाँव में जन्मे मैथिलीशरण गुप्त भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रभावना को कविता के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाने वाले महामनीषी थे। ‘भारत-भारती’, ‘यशोधरा’ और ‘साकेत’ जैसी कृतियाँ आज भी देशभक्ति की भावना जगाती हैं। राष्ट्रीय चरित्र निर्माण में उनका साहित्य अतुलनीय माना जाता है। वे हिंदी को जनभाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने वाले अग्रणी कवि थे।

राधाचरण गोस्वामी (1925) – ब्रज संस्कृति के प्रकाश स्तम्भ
ब्रज भूमि में जन्मे साहित्यकार राधाचरण गोस्वामी संस्कृत और हिंदी दोनों भाषाओं के उच्च कोटि के विद्वान थे। उन्होंने अनेक नाटक, काव्यग्रंथ और साहित्यिक कृतियाँ लिखीं जो आज भी ब्रज संस्कृति, कृष्ण भक्ति और भारतीय परंपरा की अमूल्य धरोहर हैं। भाषा, संस्कृति और अध्यात्म के समन्वय में उनका योगदान अद्वितीय है।
12 दिसंबर सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि उन महान विभूतियों की याद का दिन है जिन्होंने भारत के सांस्कृतिक, राजनीतिक, सामाजिक और साहित्यिक परिदृश्य को सशक्त बनाया। इनके जीवन मूल्यों और कार्यों से आज भी राष्ट्र प्रेरणा प्राप्त करता है।

जिन्होंने भारत की पहचान विश्वभर में बनाई

12 दिसंबर: इतिहास के अनमोल सितारे — देश ने जिन महान प्रतिभाओं को जन्म दिया

12 दिसंबर भारत के इतिहास में वह तिथि है, जब राजनीति, खेल, साहित्य, सिनेमा और सुरक्षा जैसे विविध क्षेत्रों में देश को महान हस्तियाँ मिलीं। इन प्रतिभाओं ने अपने-अपने क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान देकर राष्ट्र के उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आइए जानें इस दिन जन्मे इन प्रेरणादायी व्यक्तित्वों के जीवन, जन्मस्थान और देशहित में उनके योगदान की विस्तृत जानकारी।

रवि कुमार दहिया (जन्म: 1997) — भारतीय कुश्ती का उभरता सितारा
हरियाणा के सोनीपत जिले के नौगांव गांव में जन्मे ओलंपिक पदक विजेता रवि दहिया भारत के आधुनिक कुश्ती इतिहास का चमकता नाम हैं। बचपन से ही मिट्टी की अखाड़ा संस्कृति में पले-बढ़े रवि ने फ्रीस्टाइल रेसलिंग में विश्व स्तर पर भारत की पहचान मजबूत की। 2020 टोक्यो ओलंपिक में रजत पदक जीतकर उन्होंने भारतीय युवाओं में नई ऊर्जा भरी। देश के लिए उनका योगदान खेल संस्कृति को नई ऊंचाई पर ले जाने वाला है।

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युवराज सिंह (जन्म: 1981) — भारतीय क्रिकेट का तूफानी योद्धा
चंडीगढ़ में जन्मे युवराज सिंह भारत के सबसे आक्रामक और दमदार क्रिकेटरों में गिने जाते हैं। 2007 टी-20 विश्व कप में छह छक्के और 2011 विश्व कप में ‘मैन ऑफ द टूर्नामेंट’ बनकर उन्होंने भारतीय क्रिकेट इतिहास में स्वर्णिम अध्याय लिखा। कैंसर से लड़कर मैदान पर वापसी कर युवराज ने करोड़ों लोगों को साहस, उम्मीद और जुझारूपन का संदेश दिया। देशहित में उनका योगदान सिर्फ खेल तक सीमित नहीं बल्कि मानसिक शक्ति की प्रेरणा भी है।

कृष्णमचारी श्रीकांत (जन्म: 1959) — भारतीय क्रिकेट के सटीक रणनीतिकार

तमिलनाडु के चेन्नई (मद्रास) में जन्मे के. श्रीकांत भारतीय क्रिकेट टीम के ओपनर और बाद में चयन समिति के अध्यक्ष रहे। उन्होंने 1983 विश्व कप में अहम भूमिका निभाई और टीम इंडिया को विश्व विजेता बनाने में योगदान दिया। रणनीति, नेतृत्व और युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के कारण श्रीकांत भारतीय क्रिकेट के मूलभूत आधारों में से एक माने जाते हैं।

वी. मुरलीधरन (जन्म: 1958) — दक्षिण भारत की राजनीति का सशक्त चेहरा

केरल के कन्नूर जिले में जन्मे वी. मुरलीधरन भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। राज्यसभा सदस्य एवं केंद्रीय मंत्री के रूप में उन्होंने विदेश, शिक्षा और विकास आधारित नीतियों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। विभिन्न सामाजिक मुद्दों को राष्ट्रीय फलक पर उठाने के लिए मुरलीधरन की राजनीतिक यात्रा विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
हेमंत करकरे (जन्म: 1954) — मुंबई के निर्भीक आतंकवाद-विरोधी योद्धा
नागपुर, महाराष्ट्र में जन्मे हेमंत करकरे 1982 बैच के आईपीएस अधिकारी और मुंबई एंटी-टेरर स्क्वाड (ATS) के प्रमुख थे। 26/11 मुंबई हमलों के दौरान सर्वोच्च साहस दिखाते हुए उन्होंने देश की सुरक्षा के लिए बलिदान दिया। करकरे भारतीय पुलिस सेवा के इतिहास में ईमानदारी, निष्ठा और वीरता का प्रतीक बन चुके हैं।
रजनीकांत (जन्म: 1949) — भारतीय सिनेमा का सुपरस्टार
बेंगलुरु, कर्नाटक में जन्मे शिवाजी राव गायकवाड़, जिन्हें दुनिया रजनीकांत के नाम से जानती है, भारतीय सिनेमा के सबसे चमकते सितारों में से एक हैं। तमिल, हिंदी और कई भाषाओं में फिल्मों के माध्यम से उन्होंने समाज, संस्कृति और कला जगत पर स्थायी छाप छोड़ी। बस कंडक्टर से सुपरस्टार बनना उनकी जीवनगाथा को करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणादायक बनाता है।
शरद पवार (जन्म: 1940) — भारतीय राजनीति के प्रभावशाली शिल्पकार
महाराष्ट्र के बारामती में जन्मे वरिष्ठ नेता शरद पवार दशकों से भारतीय राजनीति के महत्वपूर्ण स्तंभ रहे हैं। केंद्रीय मंत्री, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय स्तर पर कृषि सुधारों में उनका योगदान उल्लेखनीय है। पवार ने ग्रामीण विकास, किसानों की समस्याओं और राष्ट्रीय राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाई।
ख़लील धनतेजवी (जन्म: 1938) — गुजरात के संवेदनशील ग़ज़लकार
गुजरात के वलसाड जिले में जन्मे प्रसिद्ध कवि ख़लील धनतेजवी अपनी शायरी और ग़ज़लों के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं। उनकी रचनाएँ सामाजिक सरोकार, मानवता और प्रेम की गहरी अभिव्यक्ति हैं। गुजराती साहित्य में धनतेजवी का योगदान अमूल्य माना जाता है।
सोकर जानकी (जन्म: 1931) — दक्षिण भारतीय सिनेमा की अनुभवी अभिनेत्री
चेन्नई (मद्रास) में जन्मीं सोकर जानकी कई तमिल, तेलुगु और मलयालम फिल्मों में अपने सशक्त अभिनय के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने भारतीय सिनेमा में पारिवारिक, सामाजिक और रोमांटिक फिल्मों के स्वर्णिम युग में योगदान दिया। उनकी अभिनय यात्रा आज भी नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए प्रेरणा है।

बालकृष्ण शिवराम मुंजे (जन्म: 1872) — स्वतंत्रता संग्राम के दृढ़ राष्ट्रवादी
महाराष्ट्र के बिलासपुर क्षेत्र में जन्मे मुंजे जी स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख कार्यकर्ता और हिंदू महासभा के अध्यक्ष थे। उन्होंने सैन्य प्रशिक्षण, राष्ट्रीय चेतना और युवाओं के संगठन को बढ़ावा देकर देश को स्वतंत्रता की राह पर आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

समय की उन सरगोशियों को सुनें जिन्होंने दुनिया का रास्ता बदल दिया

12 दिसंबर का इतिहास

मानव सभ्यता के लंबे सफर में कुछ दिन अपने भीतर अनगिनत कहानियाँ समेटे हुए होते हैं—और 12 दिसंबर का इतिहास ऐसा ही एक दिन है। राजनीति, संस्कृति, खेल, संघर्षों और वैशिक बदलावों से भरा यह दिन हमें बताता है कि समय कभी ठहरता नहीं, बल्कि निरंतर मानवता को नए मोड़ों पर ले जाता है।
12 दिसंबर का इतिहास – महत्वपूर्ण घटनाओं का विस्तार
2008 – प्रशासनिक सुधारों का नया खाका और दो राज्यों में नई सरकारों की शुरुआत
12 दिसंबर का इतिहास वर्ष 2008 में प्रशासनिक क्रांति की चर्चा से गूंजा जब प्रशासनिक सुधार आयोग के अध्यक्ष एम. वीरप्पा मोइली ने सरकारी सेवा निगमों में व्यापक बदलाव की अनुशंसा पेश की। इन सुधारों का उद्देश्य प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जनहितकारी बनाना था। इसी दिन छत्तीसगढ़ में डॉ. रमन सिंह और मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत की।

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2007 – पेरू के इतिहास में निर्णायक न्याय और म्यांमार पर अंतरराष्ट्रीय कड़ा रुख
2007 में 12 दिसंबर का इतिहास न्याय और वैशिक कूटनीति की सख्त तस्वीर पेश करता है। पेरू की अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति अल्बर्टो फूजीमोरी को सत्ता के दुरुपयोग के मामलों में छह वर्ष के कारावास की सज़ा सुनाकर न्यायिक इतिहास में एक बड़ा संदेश दिया। इसी दिन अमेरिकी संसद ने म्यांमार पर नए प्रतिबंध लागू किए। वहीं, मलेशिया ने तान सेंग सुन को भारत में अपना नया उच्चायुक्त नियुक्त कर कूटनीतिक संबंध मजबूत किए।
2001 – भारत–नेपाल रक्षा सहयोग की ऐतिहासिक मजबूती
12 दिसंबर का इतिहास 2001 में भारत–नेपाल मित्रता का एक अनोखा उदाहरण बना। भारत ने नेपाल को दो ‘चीता’ हेलीकॉप्टर और कई महत्वपूर्ण हथियार सौंपे, जिससे दोनों देशों के सामरिक सहयोग को नई मजबूती मिली। यह रणनीतिक साझेदारी सीमा सुरक्षा और पर्वतीय क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन के लिहाज़ से अत्यंत महत्वपूर्ण रही।

1998 – अमेरिकी राष्ट्रपति पर महाभियोग प्रक्रिया और साहित्यिक विद्रोह
1998 में इस दिन अमेरिकी राजनीति में भूचाल तब आया जब प्रतिनिधि सदन की न्यायिक समिति ने राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के खिलाफ महाभियोग की मंजूरी दी। यह घटना अमेरिकी लोकतंत्र के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ थी। इसी वर्ष नोबेल पुरस्कार विजेता रूसी लेखक अलेक्ज़ेंडर सोल्झेनित्सिन ने रूस का सर्वोच्च सांस्कृतिक सम्मान लेने से इंकार कर साहित्यिक दुनिया में साहसपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत किया।

1996 – भारत–बांग्लादेश गंगा जल बंटवारा संधि से नई राहें खुलीं
12 दिसंबर का इतिहास 1996 में दो पड़ोसी देशों—भारत और बांग्लादेश—ने गंगा नदी के जल बंटवारे पर 30 वर्षों की ऐतिहासिक संधि पर हस्ताक्षर किए। इस संधि ने दशकों पुरानी जल-विवाद की समस्या का समाधान प्रस्तुत किया और दोनों देशों के बीच सहयोग एवं विश्वास को मजबूत किया।
1992 – हुसैन सागर झील में विशाल बुद्ध प्रतिमा की स्थापना
हैदराबाद की पहचान बन चुकी हुसैन सागर झील में स्थापित विशालकाय बुद्ध प्रतिमा का अनावरण भी इसी दिन हुआ। 350 टन वजन वाली यह प्रतिमा न केवल एक स्थापत्य चमत्कार है बल्कि शांति और अहिंसा के संदेश का प्रतीक भी मानी जाती है। 12 दिसंबर का इतिहास कला और आध्यात्मिकता का उजला अध्याय भी समेटे है।
1990 – टी.एन. शेषन बने मुख्य निर्वाचन आयुक्त
1990 का यह दिन भारतीय लोकतंत्र में एक निर्णायक परिवर्तन का प्रतीक बना। टी. एन. शेषन ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त बनकर चुनाव सुधारों और सख़्त अनुशासन की ऐसी नींव रखी जिसने वोटिंग सिस्टम को पारदर्शी, निष्पक्ष और दुरुपयोग-मुक्त बनाने में अहम भूमिका निभाई। 12 दिसंबर का इतिहास भारतीय चुनाव प्रणाली में स्वर्णाक्षरों में लिखा दिन है।
1981 – जेवियर पेरेज़ दे कुइयार संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बने
यह दिन 1981 में उस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना जब पेरू के अनुभवी राजनयिक जेवियर पेरेज़ दे कुइयार संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव निर्वाचित हुए। उनका कार्यकाल वैशिक शांति, मानवीय राहत और कूटनीतिक संतुलन के लिए जाना जाता है।
1971 – पूर्व राजाओं की सभी सुविधाएँ समाप्त
1971 का यह दिन भारतीय लोकतंत्र के विकास में मील का पत्थर है। संसद ने इस दिन पूर्व रियासतों के महाराजाओं को दी जाने वाली सभी सुविधाएँ और विशेषाधिकार समाप्त कर दिए। यह निर्णय सामाजिक समानता और आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों की दिशा में एक साहसिक कदम था।
1936 – चीन का जापान के खिलाफ युद्ध की घोषणा
12 दिसंबर का इतिहास एशियाई भू-राजनीति के लिए 1936 में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। चीनी नेता च्यांग काई शेक ने जापान की विस्तारवादी नीतियों के खिलाफ युद्ध की घोषणा की, जिसने आगे चलकर द्वितीय विश्व युद्ध के एशियाई परिदृश्य को भी प्रभावित किया।
1917 – फ्रेंच आल्प्स की भीषण ट्रेन दुर्घटना
1917 में फ्रेंच आल्प्स में हुई एक विनाशकारी ट्रेन दुर्घटना में 543 लोगों की मौत हो गई। यह त्रासदी सैन्य एवं नागरिक सुरक्षा प्रबंधन में बड़े सुधारों का कारण बनी और आज भी इतिहास के सबसे दर्दनाक हादसों में गिनी जाती है।
1911 – भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित
12 दिसंबर का इतिहास 1911 में भारत के भू-राजनीतिक नक्शे में बड़ा परिवर्तन लेकर आया। ब्रिटिश सरकार ने राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने की घोषणा की। इसी दिन किंग जॉर्ज पंचम और रानी मेरी भारत आए और नए राजधानी रूपांतरण की नींव रखी।
1884 – ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच पहला टेस्ट मैच
क्रिकेट इतिहास का नया अध्याय भी इसी दिन से शुरू हुआ जब 1884 में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच पहला टेस्ट मैच खेला गया। यह मैच क्रिकेट की वैश्विक लोकप्रियता का आधार बना।
1822 – अमेरिका ने मेक्सिको की स्वतंत्रता को मान्यता दी
1822 में यह दिन अमेरिका–मेक्सिको संबंधों का अहम पड़ाव बना। अमेरिका ने आधिकारिक रूप से मेक्सिको को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता प्रदान की और औपचारिक कूटनीति शुरू हुई।
1800 – वाशिंगटन डी.सी. अमेरिका की राजधानी बना
12 दिसंबर का इतिहास में 1800 वह निर्णायक क्षण था जब वाशिंगटन डी.सी. को अमेरिका की नई राजधानी घोषित किया गया—एक शहर जो आगे चलकर दुनिया के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक केंद्रों में से एक बना।
1787 – पेनसिल्वेनिया अमेरिकी संविधान को अपनाने वाला दूसरा राज्य
1787 में इस दिन पेनसिल्वेनिया अमेरिका का दूसरा राज्य बना जिसने आधिकारिक रूप से अमेरिकी संविधान को स्वीकार किया। यह दिन आधुनिक लोकतांत्रिक ढांचे की नींव मजबूत करने वाला साबित हुआ।

शक्ति के बिना शिव शव हैं, जानें गूढ़ कथा”

जब शिव ने सिखाया— शक्ति बिना शिव शून्य, और शिव बिना शक्ति अधूरा 🔱
कथा : “शिव–पार्वती संवाद— जब अहंकार गलता है, तभी आत्मा शिवत्व को प्राप्त करती है”
शिवपुराण की कथाएँ केवल देवताओं की लीला नहीं, बल्कि मानव जीवन के गहरे रहस्यों को समझाने वाला एक दिव्य दर्पण हैं। पिछले एपिसोड में हमने जाना कि जब मन में अहंकार बढ़ता है, तब कैलाशपति का वैराग्य हमें स्मरण कराता है कि जीवन का मूल—समर्पण और संतुलन है।
जहाँ शिव और शक्ति के दिव्य संवाद के माध्यम से हमें वह सत्य प्राप्त होता है, जो जीवन को शिवमय बना देता है।

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🔶 जब पार्वती ने पूछा— “हे नाथ! सृष्टि का आधार क्या है?”
एक बार माता पार्वती ने भक्तों के कल्याण हेतु महादेव से प्रश्न किया—
“हे महेश! मनुष्य जीवन में शांति, स्थिरता और सिद्धि कब आती है?”
भोलेनाथ मुस्कुराए।
उनकी मुस्कान मानो हिमालय की चोटी पर पड़ती प्रथम सूर्य किरण जैसी दिव्य और शांत थी।
उन्होंने कहा—
“देवि! जब मनुष्य अपने भीतर छिपे शिव और शक्ति को पहचान लेता है, तब वह स्वयं ब्रह्मांड बन जाता है। शिव चेतना हैं, और तुम शक्ति। चेतना बिना शक्ति निष्क्रिय है और शक्ति बिना चेतना दिशाहीन। दोनों का मिलन ही सृष्टि का आधार है।”

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पार्वती विस्मित हुईं—
“तो क्या हर मनुष्य के भीतर भी यही दो शक्तियाँ विद्यमान हैं?”
शिव बोले—
“हाँ देवि! यही तो मानव जन्म का रहस्य है।
जब मनुष्य अपने भीतर इंद्रियों (शक्ति) और विवेक (शिव) का संतुलन सीख जाता है, तब वह दुख–कष्टों को जीत लेता है।”
🔶 शिव का उपदेश— ‘अहंकार में पड़ा मन स्वयं को खो देता है’
शिवपुराण में वर्णित है कि महादेव ने माता पार्वती से कहा—
“अहंकार वह अग्नि है जो पहले स्वयं को जलाती है, फिर संसार को।”
शिव ने स्पष्ट कहा—
जब अहंकार बढ़ता है,
जब मन स्वयं को सम्पूर्ण मानने लगता है,
जब इच्छाएँ विवेक का मार्ग रोक लेती हैं,
तब मनुष्य न स्वयं को समझ पाता है, न ईश्वर को।

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शिव बोले—
“देवि! जो व्यक्ति अपने भीतर बसे शिवत्व को नहीं पहचानता, वह सत्य से दूर चला जाता है।”
🔶 शिव–भस्म कथा का रहस्य— ‘जिसे तुम अपना समझ रहे हो वह नश्वर है’
पार्वती के मन में एक और प्रश्न उठा—
“हे प्रभु! आप भस्म क्यों धारण करते हैं?”
शिव ने अपनी जटाओं को स्पर्श किया और बोले
“देवि! भस्म यह स्मरण दिलाती है कि शरीर, संपत्ति, अभिमान, सौंदर्य—सब नश्वर हैं।
जो नश्वर पर गर्व करता है, वह दुख पाता है।
जो शिव पर, सत्य पर गर्व करता है, वही मुक्त होता है।”**
यह वाक्य सुन पार्वती भावना से भर उठीं।
उनकी दृष्टि में परम ज्ञान उतर आया—
कि शिव का वैराग्य पलायन नहीं, बल्कि महाज्ञान है।

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🔶 शिव–पार्वती संवाद : मिलन का वास्तविक अर्थ
पार्वती ने पूछा—
“किन्हें आपका सान्निध्य प्राप्त होता है, प्रभु?”
शिव बोले—
“देवि! जो मनुष्य शक्ति का सदुपयोग करता है और चेतना को जागृत रखता है—
उसे ही शिव का सान्निध्य मिलता है।”**
उन्होंने आगे कहा—
जो क्रोध को करुणा में बदल दे
जो मन की चंचलता को ध्यान में बदल दे
जो इच्छा को संकल्प में रूपांतरित कर दे
वही शिवमार्ग पर चलता है।

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🔶 जब शिव बोले— “तुम शक्ति हो, मैं शिव; अलग होकर पूर्ण नहीं”
शिवपुराण कहता है कि इस क्षण स्वयं महादेव ने माता पार्वती के चरणों में प्रणाम किया।
माता आश्चर्यचकित हुईं—
“प्रभु! आप मेरे चरण कैसे छू सकते हैं?”
भोलेनाथ ने कहा—
“देवि! शक्ति के बिना शिव केवल शव है।
हम एक-दूसरे के पूरक हैं।
जैसे दिन बिना सूर्य नहीं, और प्रकाश बिना दीप नहीं।”**
इस दृश्य ने समस्त देव–गणों को भी भावविह्वल कर दिया।
संदेश स्पष्ट था—
शिव और शक्ति दो नहीं—एक ही सत्य के दो रूप हैं।

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🔶 अंत में शिव का संदेश मनुष्यों के लिए
शिव बोले—
“हे देवी! मनुष्य तब तक दुखी रहता है, जब तक वह स्वयं को अलग-अलग हिस्सों में बाँटकर देखता है—
मन, बुद्धि, शरीर, इच्छा, क्रोध, प्रेम…
जब वह इन्हें एक मानकर शिव–शक्ति का संतुलन प्राप्त कर लेता है,
तब उसका जीवन शिवमय हो जाता है।”
उन्होंने कहा—
शक्ति संतुलन है
चेतना दिशा है
संतुलन और दिशा — यही शिवत्व है
और यही जीवन में शांति, सफलता और सिद्धि का मूल है।

🔱 निष्कर्ष — शिव भीतर हैं, शक्ति भीतर है, बस जागरण की आवश्यकता है 🔱
शिवपुराण की यह कथा हमें स्पष्ट संदेश देती है कि—
ब्रह्मांड कहीं बाहर नहीं; वह हमारे भीतर है।
जब मन का शिव (चेतना) और हृदय की पार्वती (इच्छाशक्ति) मिलते हैं,
तभी जीवन दिव्यता प्राप्त करता है।

आज का सूर्योदय से चंद्रोदय तक—कैसा बीतेगा आपका दिन, ज्योतिषीय गणना के अनुसार

🌙 12 दिसंबर 2025 का पंचांग: पौष कृष्ण पक्ष अष्टमी — जानें आज का शुभ-अशुभ समय, राहुकाल और यात्रा दिशा

📿 हिंदू पंचांग 12/12/2025 — Friday Panchang in Hindi
पौष कृष्ण पक्ष अष्टमी • विक्रम संवत 2082 (कालयुक्त) • शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर)
चंद्र मास (पूर्णिमांत): पौष • चंद्र मास (अमांत): मार्गशीर्ष • ऋतु: हेमंत
🗓️ आज की तिथि
कृष्ण पक्ष अष्टमी — Dec 11, 01:57 PM से Dec 12, 02:57 PM तक
कृष्ण पक्ष नवमी — Dec 12, 02:57 PM से Dec 13, 04:38 PM तक

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आज का नक्षत्र
उत्तर फाल्गुनी — Dec 12, 03:55 AM तक
हस्त — Dec 13, 05:50 AM से आगे
🌀 योग
प्रीति योग — Dec 11, 11:39 AM – Dec 12, 11:11 AM
आयुष्मान योग — Dec 12, 11:11 AM – Dec 13, 11:16 AM
🕒 करण
कौलव — 02:21 AM – 02:57 PM
तैतिल — 02:57 PM – Dec 13, 03:43 AM
गर — Dec 13, 03:43 AM – 04:38 PM
☀️ सूर्य एवं चंद्र का समय
सूर्योदय: 7:02 AM
सूर्यास्त: 5:38 PM
चन्द्रोदय: 12:16 AM
चन्द्रास्त: 12:44 PM

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🌞 सूर्य राशि
सूर्य वृश्चिक राशि में
🌙 चंद्र राशि
10:20 AM तक सिंह राशि, उसके बाद कन्या राशि
⚠️ आज का अशुभ काल
राहुकाल: 11:01 AM – 12:20 PM
यमगण्ड: 2:59 PM – 4:18 PM
कुलिक: 8:22 AM – 9:41 AM

दुर्मुहूर्त:
09:09 AM – 09:52 AM
12:41 PM – 01:24 PM
वर्ज्य: 11:41 AM – 01:25 PM
आज का शुभ काल
अभिजीत मुहूर्त: 11:59 AM – 12:41 PM
अमृत काल: 10:03 PM – 11:47 PM
ब्रह्म मुहूर्त: 05:27 AM – 06:15 AM
🌟 आनन्दादि योग
शुभ — 05:50 AM तक
अमृत — उसके बाद

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🔱 विशेष योग
अमृतसिद्धि योग: Dec 14, 07:04 AM – Dec 14, 08:18 AM
सर्वार्थसिद्धि योग: Dec 14, 07:04 AM – Dec 14, 08:18 AM
🌗 चंद्र बल (Chandrabalam)
10:20 AM तक इन राशियों को चंद्र बल प्राप्त:
मिथुन, सिंह, तुला, वृश्चिक, कुंभ, मीन
10:20 AM के बाद कन्या में चंद्र प्रवेश — इन राशियों को बल:
मेष, कर्क, कन्या, वृश्चिक, धनु, मीन
🧭 आज की यात्रा दिशा — कौन-सी दिशा शुभ?
12 दिसंबर शुक्रवार को यात्रा वर्जित दिशा: पश्चिम दिशा
यदि पश्चिम दिशा में यात्रा आवश्यक हो:
→ जौ या गुड़ खाकर यात्रा करें

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✔️ आज की लाभकारी यात्रा दिशा:
उत्तर एवं पूर्व दिशा में यात्रा से लाभ, सफलता और शुभ फल प्राप्त होंगे।
📌 दिन का चौघड़िया (Day Choghadiya)
चर: 07:02 AM – 08:22 AM
लाभ: 08:22 AM – 09:41 AM
अमृत: 09:41 AM – 11:01 AM
काल (अशुभ): 11:01 AM – 12:20 PM
शुभ: 12:20 PM – 01:39 PM
रोग: 01:39 PM – 02:59 PM
उद्बेग: 02:59 PM – 04:18 PM
चर: 04:18 PM – 05:38 PM
⚠️ नोट:इस पंचांग में किसी भी त्रुटि के लिए ‘राष्ट्र की परम्परा’ जिम्मेदार नहीं है। कृपया महत्वपूर्ण कार्यों हेतु किसी योग्य ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।

दो पालियों में विश्वविद्यालयी परीक्षा सम्पन्न

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर द्वारा आयोजित विषम सेमेस्टर परीक्षा के तहत गुरुवार को स्थानीय प्रभा देवी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, खलीलाबाद सहित जिले के विभिन्न कालेजों में दो पालियों में परीक्षाएं शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हुईं। दोनों पालियों में कुल 198 परीक्षार्थी उपस्थित रहे।
प्रातः पाली में सुबह 8:30 से 11:30 बजे बीएससी पंचम सेमेस्टर प्राणी विज्ञान प्रथम प्रश्नपत्र और बीए पंचम सेमेस्टर शिक्षाशास्त्र की परीक्षा आयोजित हुई। इसमें पंजीकृत 80 में से 76 परीक्षार्थी उपस्थित रहे, जबकि 4 अनुपस्थित रहे।
द्वितीय पाली में अपराह्न 1 से 4 बजे तक बीए तृतीय सेमेस्टर अंग्रेजी की परीक्षा सम्पन्न हुई। इसमें पंजीकृत 18 में से 14 परीक्षार्थी उपस्थित रहे और 4 अनुपस्थित रहे।
केंद्राध्यक्ष डॉ. प्रमोद कुमार त्रिपाठी ने बताया कि परीक्षा पूर्णतया पारदर्शी और शांतिपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुई। भीषण शीतलहर को देखते हुए अलाव की व्यवस्था सहित परीक्षार्थियों के लिए विशेष प्रबंध किए गए।
परीक्षा संचालन में रितेश त्रिपाठी, डॉ. अमरनाथ पाण्डेय, शालिनी मिश्रा, पूनम उपाध्याय, माया, शाहिदा खातून, बबिता चौरसिया, प्रिया श्रीवास्तव, जिज्ञासा, सुनीता गौतम, सीमा पाण्डेय, सर्वेश दुबे, अजय कुमार सहित शिक्षक-कर्मचारी सक्रिय रहे।

‘जर्नल ऑफ बेसिक माइक्रोबायोलॉजी’ के कवर पर प्रकाशित हुआ डीडीयूजीयू का शोध

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के इंडस्ट्रियल माइक्रोबायोलॉजी विभाग के डॉ. साहिल महफ़ूज़ तथा बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ के डॉ. युसुफ़ अख्तर के संयुक्त शोध को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि मिली है। उनका शोध विश्व-प्रसिद्ध जर्नल ऑफ बेसिक माइक्रोबायोलॉजी (जर्मनी) के दिसंबर 2025 अंक के कवर पेज पर स्थान दिया गया है। यह किसी भी वैज्ञानिक अध्ययन के लिए अत्यंत प्रतिष्ठित पहचान मानी जाती है।
अध्ययन में मीथेनोजेनिक सूक्ष्मजीवों में पाए जाने वाले सिंपल सीक्वेंस रिपीट्स की भूमिका की जांच की गई। शोध में स्पष्ट हुआ कि SSRs इन सूक्ष्मजीवों में प्रोटीन की संरचना और लचीलेपन को नियंत्रित करते हैं, जिससे मीथेन उत्पादन की दक्षता में वृद्धि होती है। यह निष्कर्ष भविष्य में ऐसे सूक्ष्मजीव विकसित करने का मार्ग खोलता है जिन्हें अधिक मीथेन उत्पादन के लिए इंजीनियर किया जा सके। इस अनुसंधान में सीएसआईआर–आईजीआईबी, नई दिल्ली के वैज्ञानिक डॉ. जितेंद्र नारायण का भी अहम योगदान रहा।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने इस सफलता पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि यह उपलब्धि विश्वविद्यालय को वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय में एक विशिष्ट पहचान दिलाने वाली है। वहीं वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार द्विवेदी के अनुसार, यह शोध ग्रामीण ऊर्जा एवं पर्यावरण सुधार आधारित तकनीकों को नई दिशा प्रदान कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज भविष्य में जैव-ऊर्जा क्षेत्र के लिए नए आयाम तय करेगी और मीथेन को स्वच्छ, सस्ती तथा सतत ऊर्जा के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

ऑस्ट्रेलिया का डिजिटल बचपन बचाओ मॉडल: क्या भारत अपना सकता है यह रास्ता?

बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध ऑस्ट्रेलिया का बचपन बचाओ आंदोलन-दुनियाँ के लिए उदाहरण

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर दुनियाँ क़ी राजनीति में जहाँ अक्सर देशों के बीच सैन्य तनाव,आर्थिक प्रतिस्पर्धा, रणनीतिक गठबंधनों और भू- राजनीतिक बदलावों का बोलबाला रहता है, वहीं ऑस्ट्रेलिया ने एक ऐसा साहसिक कदम उठाया है,जिसने अंतरराष्ट्रीय विमर्श को बच्चों की सुरक्षा,डिजिटल बाल-नीति और तकनीकी दुरुपयोग की ओर मोड़ दिया है।यह फैसला किसी युद्ध, प्रतिबंध या व्यापार विवाद से नहीं उपजा,बल्कि यह सीधे-सीधे हमारे परिवारों,हमारे बच्चों और आने वाली पीढ़ियों की मानसिक -सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। ऑस्ट्रेलिया ने दुनियाँ में पहली बार 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट्स को बंद करने का निर्णय लेकर एक ऐतिहासिक सामाजिक हस्तक्षेप किया है, जिसने दुनियाँ को चौंकाया भी है और विचार करने पर मजबूर भी किया है।इस फ़ैसले का सीधा असर इंस्टाग्राम,फेसबुक टिकटॉक यूट्यूब, स्नैपचैट, थ्रेड्स और एक्स जैसे प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पड़ा है।

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लाखों किशोरों के अकाउंट बंद कर दिए गए हैं और सख्त प्रावधान किए गए हैं कि टेक कंपनियों पर 3 करोड़ 20 लाख डॉलर तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है यदि वे इस नीति का पालन नहीं करतीं।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि यह कदम केवल एक कानूनी संशोधन या प्रशासनिक आदेश नहीं है;यह एक बचपन बचाओ आंदोलन है जिसे आधुनिक समाज में डिजिटल प्रदूषण, साइबर बुलिंग, मानसिक तनाव,गलत कंटेंट, हिंसक वीडियो और हानिकारक एल्गोरिद्म्स के बीच बच्चों के लिए एक सुरक्षा कवच माना जा रहा है।

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साथियों बात अगर हम सोशल मीडिया का काला सच: बच्चों के जीवन में प्रवेश औरमनोवैज्ञानिक जोखिम इसको समझने की करें तो, दुनियाँ भर की सरकारें,टेक विशेषज्ञ, मनोवैज्ञानिक और अभिभावक लंबे समय से इस चिंता से ग्रसित रहे हैं कि सोशल मीडिया बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को किस हद तक प्रभावित कर रहा है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि 10-16 वर्ष की उम्र में बच्चे सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा सक्रिय हो रहे हैं,जहाँ वे अनफ़िल्टर्ड और अकसर हानिकारक कंटेंट के संपर्क में आते हैं। कई बच्चे घंटों तक वीडियो स्क्रॉल करते रहते हैं और प्लेटफॉर्म्स के एल्गोरिद्म उन्हें उसी तरह के वीडियो दिखाते रहते हैं,जो ज़्यादा व्यूज़,ज़्यादा क्लिक और कंपनियों के ज़्यादा मुनाफे से जुड़े होते हैं,चाहे वे बच्चों के लिए कितने भी हानिकारक क्यों न हों।मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, बच्चे की मानसिकता सबसे अधिक प्रभावित उसी उम्र में होती है जब वह पहचान,व्यवहार और सीखने की प्रक्रिया में होताहै।

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हानिकारक ऑनलाइन कंटेंटहिंसक वीडियो, अश्लील सामग्री,साइबर बुलिंग, अवास्तविक सुंदरता मानक और फेक सोशल लाइफ की तुलना बच्चों को गहरे अवसाद, आत्महत्या की प्रवृत्ति, आत्म- असमर्थता और पारिवारिक दूरी की ओर धकेल सकते हैं। कई अध्ययन साबित करते हैं कि आज की पीढ़ी किताबों से कम और रील्स से ज्यादा सीख रही है, और घरेलू रिश्तों से अधिक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को सुन रही है। यह खतरे की घंटी है।

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साथियों बात अगर हम टेक कंपनियाँ बच्चों को क्यों टारगेट करती हैं? बिज़नेस मॉडल का कटु सच इसको समझने की करें तो,ऑस्ट्रेलिया के फैसले के पीछे संभावित एक बड़ा कारण सोशल मीडिया कंपनियों का एल्गोरिद्म-आधारित बिज़नेस मॉडल हो सकता है?अधिकतम समय तक बच्चे प्लेटफॉर्म पर बने रहें, यह कंपनियों के मुनाफे का मूल तत्व होता है। बच्चों की रुचि तेज़ी से बदलती है,वे भावनात्मक रूप से संवेदनशील होते हैं और वायरल कंटेंट से जल्दी प्रभावित होते हैं, ऐसे में वे कंपनियों के लिए सबसे आसान उपभोक्ता बन जाते हैं। एल्गोरिद्म इस तरह से डिजाइन किए गए होते हैं कि बच्चे वीडियो देखते रहें, स्क्रॉल करते रहें और प्लेटफॉर्म छोड़ न पाएं।यह डिजिटल व्यसन न सिर्फ उनका समय निगलता है, बल्कि उन्हें वास्तविक जीवन से काटकर वर्चुअल दुनियाँ में फंसा देता है।

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साथियों बात अगर हम ऑस्ट्रेलिया का बचपन बचाओ आंदोलन, दुनियाँ के लिए उदाहरण इसको समझने की करें तो, ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। यह निर्णय दुनिया के किसी भी बड़े लोकतंत्र में पहली बार लिया गया है। इसके कुछ प्रमुख आयाम हैं- (1) किशोरों के लाखों अकाउंट बंद-बच्चों की पहचान सत्यापन के लिए कड़े मानदंड लागू कर दिए गए हैं।(2) 10 सोशल मीडिया ऐप्स पूरी तरहप्रतिबंधित फेसबुक इंस्टाग्राम, टिकटॉक, यूट्यूब, एक्स, स्नैपचैट, थ्रेड्स सहित सभी प्रमुख प्लेटफॉर्म 16 वर्ष से कम उम्र वालों के लिए ब्लॉक कर दिए गए (3) अभिभावकों को सजा नहीं, जिम्मेदारी टेक कंपनियों की ऑस्ट्रेलिया ने यह समझा कि माता-पिता आधुनिकटेक्नोलॉजी की जटिलताओं को हमेशा नहीं समझ सकते। इसलिए दंड सिर्फ कंपनियों पर है।(4) टेक कंपनियों पर भारी जुर्माना 32 मिलियन डॉलर तक-यह कंपनियों को मजबूर करेगा कि वे बच्चों को टारगेट करने वाली व्यावसायिक रणनीतियाँ बदलें।

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यह कदम केवल बच्चों की सुरक्षा का मामला नहीं है;यह डिजिटल युग में सामाजिक मूल्यों की पुनर्स्थापना है। कई विशेषज्ञ इसे ‘डिजिटल फेयर प्ले’ का नया युग मान रहे हैं।
साथियों बात अगर हम भारत में 35 करोड़ बच्चे,क्या ऐसा आंदोलन जरूरी है? इसको समझाने की करें तो, भारत दुनियाँ का सबसे युवा देश है। हमारे यहाँ 15 वर्ष तक के लगभग 35 करोड़ बच्चे हैं, जो किसी भी छोटे देश की कुल आबादी से कहीं ज्यादा हैं।

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भारत के माता-पिता की सबसे बड़ी चिंता यही है कि उनका बच्चा मोबाइल पर क्या देख रहा है, किससे बात कर रहा है, क्या सीख रहा है, और किस हद तक सोशल मीडिया के गलत प्रभावों में फंस रहा है।(1)भारत में कई चिंताजनक स्थितियाँ देखी जा रही हैं:(2)बच्चे साइबर बुलिंग के शिकार हो रहे हैं।(3)हिंसा और असामाजिक व्यवहार को एंटरटेनमेंट मानने लगे हैं।(4) पढ़ाई से दूरी बढ़ रही है।(5)नींद, मानसिक स्वास्थ्य औरसामाजिक व्यवहार तेजी से बिगड़ रहे हैं। (6) इन्फ्लुएंसर्स बच्चों के रोल मॉडल बन गए हैं।(7) गलत कंटेंट की पहुंच लगातार बढ़ रही है।-अगर देखा जाए तो भारत में समस्या ऑस्ट्रेलिया से कहीं अधिक गहरी है, क्योंकि यहाँ जनसंख्या ज्यादा है, मोबाइल पहुच अधिक है, और डिजिटल साक्षरता अपेक्षाकृत कम है।
साथियों बात अगर हम क्या भारत में सोशल मीडिया बैन बचपन बचाओ आंदोलन की दिशा में महत्वपूर्ण होगा? इसको समझने की करें तो,यह सवाल बेहद महत्वपूर्ण है,और इसका जवाब सरल नहीं है। भारत एक विशाल, विविध और जटिल लोकतंत्र है, जहाँ सोशल मीडिया अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, रोजगार बाजार और डिजिटल पहुँच का प्रमुख माध्यम है। परंतु यह भी सच है कि बच्चों की सुरक्षा किसी भी राष्ट्र की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

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भारत में इस तरह का बैन लागू करना निम्न कारणों से प्रभावी हो सकता है:(1)बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा-यदि 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखा जाए, तो उनकी भावनात्मक स्थिरता, सामाजिक बुद्धि और वास्तविक जीवन के अनुभवों में सुधार होगा।(2)शिक्षा पर सकारात्मक प्रभाव-स्कूलों और घरों में डिजिटल ध्यानभंग कम होगा। बच्चे किताबों, खेलों और वास्तविक गतिविधियों में अधिक समय देंगे। (3)पारिवारिक संबंध मजबूत होंगे-परिवार के साथ समय बिताने की प्रवृत्ति बढ़ेगी। बच्चों का जीवन डिजिटल आइसोलेशन से बाहर आएगा।(4)टेक कंपनियों परदबाव-किसी भी प्लेटफॉर्म की कमाई तब तक नहीं रुकेगी जब तक वह भारत जैसे बड़े बाजार को महत्व देता है। यदि भारत कड़े नियम लागू करे, तो कंपनियाँ वैश्विक नीतियों को भी बदलने पर मजबूर हो जाएँगी।(5) डिजिटल साक्षरता आंदोलन-इससे भारत में एक व्यापक डिजिटल नैतिकता आंदोलन की शुरुआत हो सकती है।

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साथियों बात अगर हम भारत के सामने चुनौतियाँ:क्या यहआसान होगा? इसको समझने की करें तो भारत में इस तरह के प्रतिबंध लागू करने में प्रमुख चुनौतियाँ रहेंगी :(1)विशाल जनसंख्या और तकनीकी ट्रैकिंग की कठिनाई(2)डिजिटल पहचान सत्यापन की जटिलता (3) ग्रामीण इलाकों में तकनीकी ढांचा (4) डिजिटल अधिकार एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बहस(5)बच्चों और माता-पिता के बीच विश्वास का मुद्दा (6) विरोध करने वाली टेक कंपनियों की लॉबिंग,लेकिन यह भी सच है कि कोई भी बड़ा सुधार चुनौती- फ़्री नहीं होता। अगर बच्चों का भविष्य दांव पर हो तो कठिन रास्तों पर चलना भी संभव और आवश्यक होता है।

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अतःअगर हम अप्रोच पूरे विवरण का अध्ययन करें इसकाविश्लेषण करें तो हम पाएंगे के क्या भारत के लिए यह सही समय है?ऑस्ट्रेलिया ने दुनिया को एक दिशा दिखा दी है कि बच्चों की सुरक्षा में राज्य कितनी बड़ी भूमिका निभा सकता है। यह केवल एक तकनीकी नियम नहीं, बल्कि समाज को संरक्षित रखने का एक दूरदर्शी प्रयास है। भारत जैसे देश के लिए जहाँ 35 करोड़ बच्चे हैं, यह निर्णय और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। भारत में भी माता-पिता का डर वास्तविक है,बच्चे सोशल मीडिया पर क्या देख रहे हैं, क्या सीख रहे हैं, कैसा बन रहे हैं, यह सब राष्ट्र के भविष्य को प्रभावित करता है।इसलिए यह समय है कि भारत में भी एक डिजिटल बचपन बचाओ आंदोलन शुरू हो। यह आंदोलन कानून से शुरू हो सकता है, लेकिन इसे समाज, स्कूलों, अभिभावकों और डिजिटल कंपनियों की सामूहिक जिम्मेदारी से आगे बढ़ाया जाना चाहिए।अगर हम आज नहीं संभले, तो आने वाली पीढ़ियाँ एक ऐसी डिजिटल अराजकता की शिकार हो सकती हैं जिसे रोकना मुश्किल होगा।ऑस्ट्रेलिया ने पहला कदम उठा लिया है,अब दुनिया की नजर भारत पर है कि वह बच्चों के भविष्य के लिए किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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-संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

वोट चोर गद्दी छोड़ महारैली में जिले से दिल्ली जाएंगे हजारों कांग्रेसी: विजयशेखर मल्ल रोशन

कांग्रेसियों ने दिल्ली में आयोजित महारैली के सफलता के लिए बनाई रणनीति

सलेमपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)। कांग्रेस द्वारा दिल्ली के रामलीला मैदान में 14 दिसम्बर को आयोजित होने वाले वोट चोर गद्दी छोड़ रैली की सफलता के लिए वृहस्पतिवार को कांग्रेस कार्यालय पर बैठक आयोजित किया। इस दौरान जिलाध्यक्ष विजयशेखर मल्ल रोशन ने कहा कि शीर्ष नेतृत्व के द्वारा दिल्ली के रामलीला मैदान में वोट चोर गद्दी छोड़ महारैली में जनपद से हज़ारों की संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता अपने अपने साधनों से जाएंगे। इसके लिए हर विधानसभा क्षेत्र में लोंगो को जिम्मेदारी सौंपी गई है। भाजपा के कुशासन से देश की जनता को निजात दिलाने के लिए यह महारैली किया जा रहा है। हमारे नेता सोनिया गांधी व राहुल गांधी पर फर्जी मुकदमा दर्ज कर सरकार कांग्रेस कार्यकर्ताओं के मनोबल को तोड़ना चाहती है लेकिन कांग्रेस का एक एक कार्यकर्ता इस सरकार के विरोध में चट्टान की तरह खड़ा है। जिला उपाध्यक्ष डॉ धर्मेन्द्र पांडेय ने कहा कि यह सरकार जनविरोधी है, इसको केवल वोट की राजनीति करनी है, आमजन से कोई सरोकार नहीं है। जिला उपाध्यक्ष भरत मणि त्रिपाठी ने कहा कि बिना कांग्रेस के इस देश का भला नहीं होने वाला है। जिला उपाध्यक्ष जयप्रकाश पाल ने कहा कि भाजपा सरकार दलित, गरीब, नौजवान, किसान विरोधी है चुनाव में जितने वादे किए वह पूरा नहीं किया। बैठक को जिला महासचिव मार्कण्डेय मिश्र, जिला प्रवक्ता संजीव मिश्र, शिवशंकर सिंह, रामविलास तिवारी,मनीष रजक,इस्लाम खान,बदरे आलम,प्रमोद श्रीवास्तव,सुच्चन खान,अवधेश यादव,दिनेश गुप्ता, रामकेवल चौहान,शिवलाल वर्मा,योगेंद्र गुप्ता, आदि ने सम्बोधित किया।