Sunday, June 28, 2026
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अवैध भूमि खरीद-बिक्री रोकने के लिए सरकार की कड़ी निगरानी

झारखंड में सीएनटी–एसपीटी भूमि पर अवैध खरीद-फरोख्त के खिलाफ सख्ती, सरकार ने कड़ी कार्रवाई का दिया आश्वासन

रांची (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)झारखंड सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि सीएनटी और एसपीटी कानून से संरक्षित भूमि की अवैध खरीद-बिक्री करने वालों पर अब कठोर कार्रवाई तय है। सादा पट्टा के जरिए जमीन हस्तांतरण से जुड़े मामलों की समीक्षा तेज़ करते हुए सरकार ने आश्वस्त किया कि ऐसे हर मामले में निर्णायक कदम उठाए जाएंगे।

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विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान विधायक राजेश कच्छप के सवाल पर भू-राजस्व मंत्री दीपक बिरुआ ने बताया कि इस समय लगभग 1.5 लाख से अधिक भूमि विवाद लंबित हैं और इनके निष्पादन की प्रक्रिया युद्धस्तर पर जारी है। कच्छप ने सीएनटी—एसपीटी कानून से संबंधित विवादों की त्वरित सुनवाई के लिए भू-राजस्व मंत्री को पीठासीन जज की जिम्मेदारी देने और भू-वापसी की कार्रवाई को तेज करने की भी मांग उठाई।

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शीतकालीन सत्र का समापन: सक्रिय रहा सदन

सत्र के अंतिम दिन स्पीकर रबींद्रनाथ महतो ने बताया कि 5 से 11 दिसंबर तक चले इस सत्र में राज्यहित से जुड़े अहम मुद्दों पर विस्तृत बहस हुई।
सत्र के दौरान 301 प्रश्न स्वीकार किए गए, जिनमें 121 अल्पसूचित, 148 तारांकित और 32 अतारांकित प्रश्न शामिल रहे। विभागों की ओर से 265 प्रश्नों के उत्तर प्राप्त हुए, जबकि कुछ उत्तर अब भी लंबित हैं।
सदन में 129 शून्यकाल नोटिस आए, जिनमें से 94 को पेश किया गया। इसके अलावा 42 ध्यानाकर्षण सूचनाएं प्राप्त हुईं, जिनमें 20 को अनुमति मिली और 12 पर जवाब सदन में दिया गया।

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स्पीकर ने कहा कि बहस के दौरान कुछ अवसरों पर असंगत शब्दों का इस्तेमाल हुआ, जो संसदीय परंपरा के अनुकूल नहीं है। उन्होंने सभी सदस्यों से भाषा और गरिमा बनाए रखने की अपील की।

कफ सिरप कांड: लखनऊ में सिपाही आलोक सिंह की कोठी सहित ईडी की 6 शहरों में 25 ठिकानों पर छापेमारी

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। यूपी के हाई-प्रोफाइल कफ सिरप कांड में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार सुबह बड़ी कार्रवाई करते हुए छह शहरों में फैले 25 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। ईडी की टीमें लखनऊ, वाराणसी, अहमदाबाद, जौनपुर, सहारनपुर और रांची में सक्रिय रहीं। लखनऊ में एजेंसी ने मामले के आरोपी सिपाही आलोक सिंह की कोठी और अन्य ठिकानों पर भी छापे मारे।

दीपक मानवानी गिरोह पर बढ़ा शिकंजा

इससे पहले 11 अक्टूबर को कृष्णानगर के स्नेहनगर निवासी दीपक मानवानी को कोडीन युक्त सिरप, टैबलेट, कैप्सूल और इंजेक्शन की अवैध बिक्री के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने उसके दो साथियों—सूरज मिश्र और प्रीतम सिंह—को भी अब गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक अन्य आरोपी आरुष सक्सेना अभी फरार है।

भारी मात्रा में कोडीन युक्त सिरप की बरामदगी

एसीपी कृष्णानगर रजनीश वर्मा के मुताबिक, 11 अक्टूबर को औषधि विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने दीपक मानवानी के घर से भारी मात्रा में कोडीन युक्त सिरप और नशीली दवाएं बरामद की थीं।
पूछताछ में दीपक ने बताया था कि वह यह प्रतिबंधित दवा सूरज मिश्र और प्रीतम सिंह से खरीदकर नशे के आदी लोगों को बेचता था।

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दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी

बृहस्पतिवार को पुलिस ने बैकुंठ धाम वीआईपी रोड से सूरज मिश्र (मड़ियांव-फैजुल्लागंज निवासी) और प्रीतम सिंह (महानगर- बादशाहनगर निवासी) को पकड़ा।

• सूरज मूल रूप से सीतापुर के अटरिया सदनपुर का रहने वाला है और “न्यू मंगलम आयुर्वेदिक” के नाम से दवा एजेंसी चलाता है।

• प्रीतम मूल रूप से बहराइच के बाड़ी राजा का निवासी है और पुरनिया स्थित एक फैमिली रेस्टोरेंट में काम करता है।

ईडी की रेड और पुलिस की कार्रवाई के बाद कफ सिरप सिंडिकेट की अवैध सप्लाई चेन पर बड़ा दबाव बना है।

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स्वच्छता कार्यों में करोड़ों की अनियमितता? चनकौली पंचायत पर उठे गंभीर सवाल

चनकौली ग्राम पंचायत में घोटाले का खुलासा: प्रधान पर परिजनों को मजदूर दिखाकर लाखों रुपये की भुगतान बंदरबांट का आरोप

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। ChanKauli Gram Panchayat Ghotala—सिसवा ब्लॉक की ग्राम पंचायत चनकौली में स्वच्छता मद और अन्य निर्माण कार्यों में हुए भुगतानों को लेकर बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया है। ई-ग्रामस्वराज पोर्टल पर उपलब्ध भुगतान रिपोर्ट ने पंचायत में हुई अनियमितताओं की परतें खोल दी हैं।

ग्रामीणों द्वारा उठाई गई शिकायतों में आरोप है कि ग्राम प्रधान ने अपने ही परिवार के सदस्यों को मजदूर दिखाकर लाखों रुपये का भुगतान कराया, जबकि जमीनी स्तर पर न तो कोई बड़ा सफाई कार्य दिखा और न ही निर्माण गतिविधियों के प्रमाण मिलते हैं।

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संदिग्ध भुगतान की पोल खोली रिपोर्ट

ई-ग्रामस्वराज पोर्टल की रिपोर्ट के अनुसार, 30 मार्च 2023 को वाउचर संख्या XVFC/2022-23/P/34 के तहत कई छोटे-छोटे भुगतान एक ही दिन में किए गए। इनमें कई भुगतान एक जैसी राशि—जैसे ₹2,982—बार-बार दोहराए गए, जो प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

इन्हीं भुगतानों में प्रधान की पुत्रवधुएं चंद्रशिला यादव, रंजन यादव, पुत्र राजेश कुमार यादव, तथा सर्वेश यादव के नाम शामिल हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इन्हें महीनों तक सफाई कार्य और निर्माण मजदूरी के नाम पर भुगतान दिखाया गया, जबकि पंचायत में ऐसा कोई कार्य नजर नहीं आया।

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विवाह भवन बाउंड्री वॉल का भी फर्जी भुगतान

रिपोर्ट में 9 दिसंबर 2022 को विवाह भवन बाउंड्री वॉल निर्माण के लिए मजदूरी भुगतान दर्ज है, जिसमें भी प्रधान के परिवार का नाम प्रमुख रूप से शामिल है। ग्रामीण दावा करते हैं कि इस अवधि में न तो कोई कार्यस्थल दिखा और न ही मजदूरी करने वाले श्रमिकों की उपस्थिति का रिकॉर्ड उपलब्ध है।

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अगस्त 2023 के भुगतान भी संदेह के घेरे में

अगस्त 2023 में सफाई कार्य के नाम पर—सर्वेश यादव को ₹10,920,राजेश कुमार यादव को ₹25,760
का भुगतान दर्ज है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में इतनी बड़ी सफाई गतिविधि कभी हुई ही नहीं।

ग्रामीणों ने मांगी उच्चस्तरीय जांच – ग्रामीणों का कहना है कि भुगतान सूची में एक ही परिवार के सदस्यों और समान उपनाम वाले कई लोगों के नाम दर्ज हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि यह पूरा मामला “कागजों पर सफाई” और “जमीन पर अनियमितता” का उदाहरण है।

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उन्होंने जिला प्रशासन से उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो लाखों रुपये के घोटाले का पर्दाफाश संभव है। ग्रामीणों के अनुसार, यह मामला केवल एक पंचायत तक सीमित नहीं, बल्कि मनरेगा और सफाई मद में व्यापक भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।

घुसपैठियों पर CM योगी सख्त: बरेली में अफसरों को निर्देश—“जीरो टॉलरेंस अपनाएं, कोई बच न पाए”

बरेली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बरेली में अधिकारियों के साथ बैठक कर घुसपैठियों पर कड़ा रुख अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम किया जाए और सत्यापन प्रक्रिया इतनी मजबूत हो कि कोई भी संदिग्ध व्यक्ति बच न सके।
सीएम ने कहा कि महिला अपराध और समाजिक माहौल बिगाड़ने वालों पर सख्ती जारी रहनी चाहिए। बेहतर कानून-व्यवस्था ही विकास को गति देती है।

जनप्रतिनिधियों के फीडबैक को बताया महत्वपूर्ण

सीएम योगी ने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत रखने के लिए जनप्रतिनिधियों, कार्यकर्ताओं और प्रशासन के बीच मजबूत समन्वय जरूरी है। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर से मिलने वाला फीडबैक बेहद मूल्यवान होता है, जिससे अभियानों की प्रभावशीलता बढ़ती है।
मतदाता पुनरीक्षण अभियान में जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भूमिका को भी उन्होंने अहम बताया।

विकास कार्यों की समीक्षा, रैन बसेरों पर विशेष जोर

मुख्यमंत्री ने विकास कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता पर भी जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिया कि जनप्रतिनिधि यह सुनिश्चित करें कि कौन-सा कार्य क्षेत्र में सबसे जरूरी है और इसकी जानकारी तत्काल अफसरों को दें।
ठंड बढ़ने को देखते हुए उन्होंने रैन बसेरों की व्यवस्था का औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए। सीएम ने कहा कि कोई भी व्यक्ति खुले में न सोए और सार्वजनिक स्थलों पर अलाव की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

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विवाह समारोहों में हुए शामिल

बैठक के बाद मुख्यमंत्री सर्किट हाउस से मेयर डॉ. उमेश गौतम के घर पहुंचे और उनके पुत्र पार्थ व बहू जान्हवी को विवाह की शुभकामनाएं दीं। इसके बाद वे आईवीआरआई ग्राउंड पहुंचे, जहां झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार के पुत्र अपूर्व और बहू संजना के विवाह समारोह में शामिल हुए। बाद में वह राजकीय वायुयान से लखनऊ रवाना हो गए।

बीजेपी नेताओं और पुलिस के बीच नोकझोंक

सर्किट हाउस में बैठक के दौरान पुलिस ने सुरक्षा के लिए भाजपा नेताओं के वाहनों को रोका, जिस पर कुछ नेता नाराज़ हो गए। बाद में उन्हें अंदर जाने दिया गया, लेकिन तुरंत वापस भी बाहर आना पड़ा।

सीएम से मिलने की कोशिश, पुलिस ने रोका

एक महिला अपने पति की कथित गलत इलाज से हुई मौत की शिकायत लेकर मुख्यमंत्री से मिलने पहुंची। उसने पोस्टमार्टम न होने देने का भी आरोप लगाया। सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत पुलिस ने महिला और परिजनों को वहां से हटा दिया।

जमीन विवाद और रंगदारी पर प्रशासन की कड़ी चेतावनी: लापरवाह अधिकारी होंगे शोकॉज

पटना प्रशासन की सख्ती: जमीन विवाद, रंगदारी और अतिक्रमण पर जीरो टॉलरेंस, DM–SP ने जनता दरबार में दिए कड़े निर्देश

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क ) आज का जनता दरबार पूरी तरह प्रशासनिक सक्रियता और सख्ती के नाम रहा। जिला जनता दरबार में डीएम डॉ. त्यागराजन एसएम और ग्रामीण इलाकों के लिए लगाए गए एसपी अपराजिता लोहान के सामने बड़ी संख्या में लोग भूमि विवाद, रसीद कटने में लापरवाही, अतिक्रमण और रंगदारी जैसी गंभीर समस्याएँ लेकर पहुँचे।
दोनों अधिकारियों ने मौके पर ही कई मामलों में तत्काल एक्शन लेते हुए यह संदेश दे दिया कि अब भूमि विवाद व रंगदारी मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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बिहटा से आए सुनील राम ने कर्मचारी मनीष कुशवाहा पर आरोप लगाया कि वह जमीन की रसीद जानबूझकर रोक रहे हैं। डीएम ने शिकायत सुनते ही बिहटा सीओ को तत्काल जांच का आदेश दिया और कहा कि यदि गलती साबित हुई, तो विभागीय कार्रवाई तय है।
जनता दरबार में डीएम ने 65 शिकायतें सुनीं, जिनमें ज़मीन निबंधन, अतिक्रमण और रास्ता अवरुद्ध करने के मामले प्रमुख रहे। गौरीचक के राकेश कुमार द्वारा प्लॉट नंबर 31 के रास्ते को बंद किए जाने की शिकायत पर डीएम ने पुनपुन सीओ को मौके पर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया। वहीं, जमीन निबंधन रोकने की शिकायत पर जिला अवर निबंधक को तुरंत फोन कर कार्रवाई का आदेश दिया।

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उधर, ग्रामीण एसपी अपराजिता लोहान ने एसएसपी कार्यालय में जनता दरबार लगाया, जहाँ बाढ़, मोकामा सहित ग्रामीण क्षेत्रों से लोग पहुँचे। अधिकांश शिकायतें जमीन कब्जा, रंगदारी और पेंडिंग मामलों से जुड़ी थीं। एक किसान ने बताया कि दबंग खेत में घुसने नहीं देते और रंगदारी मांग रहे हैं। एसपी ने तत्काल संबंधित थानेदार को मौके से ही फोन कर सख्त निर्देश दिए।

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इसी दौरान एक थानेदार की लापरवाही उजागर होने पर उसे शोकॉज नोटिस जारी कर दिया गया। एसपी ने कहा कि दोषी पाए जाने पर निलंबन समेत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

पटना प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि जमीन विवाद, रसीद रोके जाने, अतिक्रमण और रंगदारी पर अब जीरो टॉलरेंस लागू है। जनता दरबार में तेजी से हुई कार्रवाई संकेत देती है कि आने वाले दिनों में प्रशासन और भी सख्त कदम उठा सकता है।

बड़हरा राजा में अवैध लकड़ी व्यापार पर कसा शिकंजा, वन विभाग ने रजिस्टर किया जब्त

चौक रेंज में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई: नाथनगर बीट की फर्नीचर दुकान पर छापा, संदिग्ध लकड़ी दस्तावेज जब्त

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।सोहगीबरवां वन्यजीव प्रभाग के दक्षिणी चौक रेंज में गुरुवार को एक बार फिर वन विभाग की सख्ती देखने को मिली। नाथनगर बीट के बड़हरा राजा में स्थित एक फर्नीचर दुकान पर विभागीय टीम ने अचानक निरीक्षण कर लकड़ी कारोबार से जुड़े दस्तावेजों की बारीकी से जांच की। इस कार्रवाई की अगुआई दक्षिणी चौक रेंज का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे क्षेत्रीय वनाधिकारी आर.पी. सिंह ने खुद मौके पर पहुंचकर की।

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सुबह लगभग 11 बजे विभाग की जीप जब बड़हरा राजा पहुंची तो स्थानीय व्यवसायियों में हलचल मच गई। टीम ने तुरंत दुकान को घेरते हुए दुकान संचालक से लकड़ी के स्रोत, खरीद के बिल, बिक्री के रजिस्टर और स्टॉक की स्थिति से संबंधित सभी रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा।
वन कर्मियों ने दुकान में रखे दस्तावेजों की गहनता से जांच की और कई प्रविष्टियों पर सवाल उठाए। जांच के दौरान रजिस्टर में कुछ संदिग्ध एंट्रियां सामने आईं, जिसके बाद विभाग ने पूरा रजिस्टर जब्त कर लिया। रजिस्टर को विस्तृत जांच के लिए रेंज कार्यालय भेज दिया गया है।

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क्षेत्रीय वनाधिकारी आर.पी. सिंह ने मौके पर स्पष्ट कहा कि पिछले कुछ महीनों से क्षेत्र में बिना परमिट लकड़ी कटान और अवैध लकड़ी व्यापार की शिकायतें मिल रही हैं। इसके चलते विभाग ने पूरे क्षेत्र में विशेष अभियान चलाया है, जिसके तहत यह छापेमारी की गई।
उन्होंने बताया कि वन विभाग की टीम ऐसे सभी प्रतिष्ठानों की जांच कर रही है, जिन पर अवैध गतिविधियों की आशंका जताई गई है। कार्रवाई का उद्देश्य जंगलों की अवैध कटान को रोकना और लकड़ी व्यापार में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

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इस अचानक हुई कार्रवाई से नाथनगर बीट और आसपास के क्षेत्रों के फर्नीचर व्यवसायियों में हड़कंप मच गया है। कई दुकानदारों ने अपनी दुकानों पर अचानक तालाबंदी कर दी, जबकि कुछ ने दस्तावेज अपडेट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी सख्ती समय की ज़रूरत है, क्योंकि अवैध कटान से जंगलों का लगातार नुकसान हो रहा था।

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वन विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में क्षेत्र के अन्य फर्नीचर प्रतिष्ठानों, लकड़ी डिपो और आरा मशीनों पर भी इसी प्रकार की कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने कारोबारियों को साफ चेतावनी दी है कि अगर लकड़ी के स्रोत प्रमाणित नहीं पाए गए, तो चालान व कानूनी कार्रवाई तय है।

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वन विभाग की इस कार्रवाई से स्पष्ट संदेश गया है कि अवैध लकड़ी कारोबार पर अब किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
बड़हरा राजा की छापेमारी ने यह साबित कर दिया है कि विभाग की नजर हर संदिग्ध गतिविधि पर है और जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।

युवाओं का पलायन क्यों नहीं थम रहा?

महराजगंज में रोजगार संकट गहराया, भविष्य को लेकर बढ़ी चिंता

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। महराजगंज में युवाओं का पलायन लगातार गंभीर रूप ले रहा है। जिले के हजारों नौजवान आज भी बेहतर नौकरी, स्थायी आय और सुरक्षित भविष्य की तलाश में महानगरों की ओर रुख कर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर रोजगार के अपर्याप्त अवसर और उद्योगों की कमी इस संकट को और गहरा बना रही है। स्थिति यह है कि जनसंख्या तेजी से बढ़ी, लेकिन उसी अनुपात में रोजगार के अवसर विकसित नहीं हो सके।

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सरकार की ओर से रोजगार सृजन के कई दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे काफी अलग दिखाई देती है। महराजगंज जैसे सीमांत जिले में आज भी न तो बड़े उद्योगों का विस्तार हो पाया है और न ही कौशल आधारित रोजगार के लिए पर्याप्त संस्थान विकसित हो सके हैं। युवाओं का पलायन इसलिए भी बढ़ रहा है क्योंकि स्थानीय स्तर पर स्थाई, सम्मानजनक और आय-सृजन करने वाले रोजगार लगभग न के बराबर हैं।

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ग्रामीण युवाओं पर सबसे अधिक असर

ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति और ज्यादा चुनौतीपूर्ण है। एक-एक परिवार में कमाने वाला सदस्य आमतौर पर बाहर ही रहता है, जिससे परिवारों में आर्थिक और सामाजिक असुरक्षा बढ़ रही है। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे घर पर अकेलेपन और असुरक्षा की स्थिति में जीवन बिताने को मजबूर हो रहे हैं। कई युवा बड़े शहरों के असुरक्षित, भीड़भाड़ वाले और अस्थाई कामों में अपना जीवन जोखिम में डाल रहे हैं, फिर भी वापस लौटने का विकल्प उनके पास नहीं।

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स्थानीय उद्योग और कृषि आधारित इकाइयाँ कमजोर

महराजगंज में छोटे उद्योग, कृषि-आधारित इकाइयाँ और स्थानीय व्यापार लंबे समय से कमजोर होते जा रहे हैं। औद्योगिक निवेश के अभाव के कारण रोजगार के नए स्रोत विकसित नहीं हो पा रहे। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में पलायन पर रोक लगाना चाहती है, तो जिले में बड़े पैमाने पर औद्योगिक विकास, कौशल प्रशिक्षण केंद्रों का विस्तार और स्थानीय उद्यमिता को मजबूत करना सबसे जरूरी कदम हैं।

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युवाओं का सवाल—“हम कब तक घर छोड़ते रहेंगे?”

जिले के युवाओं ने साफ कहा है कि वे अवसर चाहते हैं, मजबूरी नहीं। उनकी मांग है कि रोजगार उनके घर के पास उपलब्ध हों ताकि वे अपने परिवार के साथ सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी सकें। जब तक स्थानीय स्तर पर पर्याप्त रोजगार नहीं बनेंगे, तब तक महराजगंज में युवाओं का पलायन रुकना संभव नहीं दिखता।

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समाधान क्या है?
विशेषज्ञों के अनुसार—
जिले में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा
कृषि आधारित उद्योगों का आधुनिकीकरण
युवाओं के लिए कौशल विकास केंद्रों की संख्या बढ़ाना
स्टार्टअप और स्थानीय उद्यमिता को प्रोत्साहन
MSME सेक्टर को मजबूत करना
यही कदम जिले के भविष्य को नई दिशा दे सकते हैं।

संस्कार बनाम रूढ़िवादिता: परंपरा के नाम पर बढ़ता सामाजिक बोझ, क्यों जरूरी है बदलाव की स्वीकार्यता

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। समाज में संस्कार हमेशा से नैतिकता, मानवता और सद्भाव के आधार माने गए हैं। यह वे मूल्य हैं जो व्यक्ति को सही दिशा दिखाते हैं और पीढ़ियों को जोड़ने का काम करते हैं। लेकिन चिंताजनक तथ्य यह है कि समय के साथ संस्कारों की आड़ में रूढ़िवादिता तेज़ी से बढ़ती जा रही है। परिणामस्वरूप कई मूल मानवीय मूल्यों पर परंपरा के नाम पर बोझ लाद दिया गया है।

डॉ. सतीश पाण्डेय का मानना है कि संस्कार सरलता, करुणा और विवेक पर आधारित होते हैं, जबकि रूढ़िवादिता कठोर, तर्कहीन और भय पर आधारित होती है। अक्सर दोनों के बीच फर्क न कर पाने की वजह से समाज अच्छे और बुरे के बीच अंतर करने की क्षमता खोने लगता है। कई बार आवश्यक सवालों को संस्कार विरोधी कहकर रोक दिया जाता है, जबकि ज़रूरी बदलावों को परंपरा पर हमला बताकर दबा दिया जाता है।

लड़कियों की शिक्षा और स्वतंत्रता को ‘संस्कार’ बताकर रोका जा रहा है

आज भी कई परिवारों में लड़कियों की शिक्षा, उनकी स्वतंत्रता, विचारों की आज़ादी और विवाह से जुड़े निर्णयों पर रोक को संस्कारों का नाम दे दिया जाता है। यह स्थिति जाति, समुदाय और सामाजिक वर्गों में और भी स्पष्ट दिखाई देती है, जहां दशकों पुरानी मान्यताएं बिना किसी तर्क के ढोई जा रही हैं।

संस्कार प्रगति का विरोध नहीं करते, रूढ़िवादिता करती है

डॉ. पाण्डेय के अनुसार, संस्कार समाज को आगे बढ़ाते हैं, जबकि रूढ़िवादिता उसे जकड़ कर रखती है।
संस्कार इंसान को— विवेक, करुणा, सम्मान, जिम्मेदारी जैसे गुण सिखाते हैं।
वहीं रूढ़िवादिता वह सोच है जो सवाल पूछने की क्षमता को खत्म कर देती है।

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परंपराओं का बदलना स्वाभाविक है

समय के साथ जो परंपराएं समाज के हित में उपयोगी नहीं रहीं, उनका बदलना अनिवार्य है। परंपरा वही तक उपयोगी है, जब तक वह मानव को ऊपर उठाए। संस्कार मानवता को पोषित करते हैं, जबकि रूढ़िवादिता भय और बंधनों में जकड़ती है।

डॉ. पाण्डेय का कहना है कि विज्ञान, आधुनिकता और नए विचारों को अपनाने के साथ भी हम अपने मूल्यों को सुरक्षित रख सकते हैं—बशर्ते हम यह स्वीकार करें कि बदलाव विनाश नहीं, बल्कि विकास की प्रक्रिया है।

आने वाली पीढ़ियों के लिए जरूरी है रूढ़िवादिता की बेड़ियां तोड़ना

यदि समाज संस्कारों की आड़ में रूढ़िवादिता को बढ़ावा देता रहेगा, तो नई पीढ़ियाँ स्वतंत्र रूप से सोच नहीं पाएंगी और न ही प्रगति कर सकेंगी। जरूरत है कि बोझिल परंपराओं के बजाय मूल्यों को संरक्षित किया जाए। संस्कारों को जीवित रखते हुए रूढ़िवादिता को खत्म करना ही समय की मांग है।

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31 दिसंबर को राम मंदिर के सात उप-मंदिरों के शिखरों पर होगा ध्वजारोहण, रक्षामंत्री और मुख्यमंत्री हो सकते हैं शामिल

अयोध्या (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ इस बार बेहद भव्य रूप में मनाई जाएगी। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने वर्षगांठ को ‘प्रतिष्ठा द्वादशी’ के रूप में मनाने की तैयारी तेज कर दी है। 31 दिसंबर को आयोजित होने वाले इस विशेष उत्सव का मुख्य आकर्षण राम मंदिर परिसर में बने सात उप-मंदिरों के शिखरों पर ध्वजारोहण होगा।

मुख्य शिखर पर ध्वजारोहण के बाद अब उप-मंदिरों की बारी

25 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर के मुख्य शिखर पर ऐतिहासिक ध्वजारोहण किया था। उस समय सात उप-मंदिरों पर भी ध्वजारोहण की योजना थी, लेकिन इन मंदिरों की फिनिशिंग कार्य पूरा न होने के कारण कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया था।

अब जानकारी के अनुसार भगवान शिव, सूर्य देव, गणपति, हनुमान, माता भगवती, माता अन्नपूर्णा और शेषावतार मंदिर की फिनिशिंग और सजावट पूरी हो चुकी है। इसलिए प्रतिष्ठा द्वादशी के अवसर पर इन मंदिरों पर ध्वजारोहण किया जाएगा।

रक्षामंत्री और मुख्यमंत्री हो सकते हैं मुख्य अतिथि

ट्रस्ट सूत्रों के मुताबिक प्रतिष्ठा द्वादशी समारोह में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हो सकते हैं। 31 दिसंबर को दोनों नेता संयुक्त रूप से सातों उप-मंदिरों के शिखर पर ध्वजारोहण कर सकते हैं।

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27 दिसंबर से शुरू होंगे अनुष्ठान

राम मंदिर परिसर में 27 दिसंबर से विभिन्न अनुष्ठान शुरू होंगे। इनमें सातों उप-मंदिरों के ध्वजों का पूजन और अन्य धार्मिक विधियां शामिल होंगी। उप-मंदिरों के लिए तैयार किए गए ध्वज का डिज़ाइन भी पहले ही अंतिम रूप दिया जा चुका है।

ऐतिहासिक आयोजन की तैयारियाँ पूरी

ट्रस्ट की मानें तो इस बार का प्रतिष्ठा द्वादशी उत्सव बेहद भव्य होगा। मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया जाएगा और भक्तों के लिए विस्तृत व्यवस्था की जाएगी। 31 दिसंबर को ध्वजारोहण कार्यक्रम के साथ रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ को ऐतिहासिक रूप में मनाने की योजना है।

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नारे गूंजे, नीतियां डगमगाईं: विकास की राह में क्यों उलझा शासन का असली एजेंडा?

कैलाश सिंह

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा) भारतीय लोकतंत्र में नारे अक्सर जनभावनाओं को जगाने का आसान साधन बने हैं, लेकिन जब शासन की दिशा नीतिगत मजबूती के बजाय नारेबाज़ी पर टिकने लगे, तो विकास स्वतः ही पटरी से उतरने लगता है। यही हकीकत आज के राजनीतिक परिदृश्य में साफ दिखाई देती है—मंचों पर गूंजते नारे तेज़ हो गए, लेकिन नीतियों की कदमताल कमज़ोर पड़ती गई। नीतियों की कमजोरी और नारेबाज़ी आज शासन की सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है।

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जनता को विश्वास था कि ठोस और दूरगामी नीतियां उनकी रोज़मर्रा की जिंदगी में सुधार लाएंगी, लेकिन हकीकत इसके विपरीत निकली। नारे उम्मीद जगाते रहे, जबकि नीतियां फ़ाइलों और घोषणाओं में उलझकर रह गईं। बेरोज़गारी, महंगाई, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी मुद्दे भाषणों के शोर में दब गए, और सरकारें अपनी उपलब्धियों को प्रचार की चमक से सजाने में जुटती रहीं।

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वास्तविकता यह है कि नीति-निर्माण का आधार वैज्ञानिक सोच, पारदर्शिता और जवाबदेही में निहित होता है। लेकिन जब प्राथमिकता लोकप्रियता हासिल करने, भावनाओं को साधने और त्वरित राजनीतिक लाभ लेने की हो, तो नीति-प्रक्रिया कमजोर पड़ जाती है। योजनाएं बनती हैं, लॉन्चिंग की तस्वीरें बनती हैं, लेकिन क्रियान्वयन की रफ्तार या तो बेहद धीमी रहती है या आधे रास्ते में ही दम तोड़ देती है। नतीजा यह कि जनता के हाथ आते हैं—अधूरे वादे, अधूरे प्रोजेक्ट और अधूरी उम्मीदें।

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जब सरकार की पहचान नीतियों से नहीं, बल्कि नारों से होने लगे, तो यह लोकतांत्रिक ढांचे के लिए चिंताजनक संकेत है। जनता यह सवाल पूछने लगती है कि आखिर विकास ज़मीन पर क्यों नहीं उतरता? क्यों पोस्टरों पर प्रगति दिखती है, लेकिन गांवों और शहरों की असल तस्वीर वही रहती है?

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लोकतंत्र का आधार नारों की गूंज नहीं, बल्कि नीतियों की मजबूती है। नारे एक क्षणिक उत्साह पैदा करते हैं, जबकि नीतियां भविष्य की रूपरेखा तय करती हैं। इसलिए जरूरत है कि सरकारें नारे आधारित राजनीति से आगे बढ़कर वास्तविक, समयबद्ध और लक्ष्य आधारित नीति-प्रणाली अपनाएं। जब नीतियां मजबूत होंगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और जवाबदेही सुनिश्चित होगी, तब विकास स्वतः ही दिखाई देगा—नारे अपने आप सार्थक हो जाएंगे।

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सच्चा विकास वही है जिसे जनता महसूस करे, न कि जिसे सिर्फ मंचों और पोस्टरों पर लिखा जाए। इसलिए समय आ गया है कि नीतियों की कमजोरी और नारेबाज़ी के इस चक्र को तोड़ा जाए और शासन को वास्तविक नीतिगत सुधारों की ओर मोड़ा जाए। यही लोकतंत्र की असली जीत होगी और जनता के विश्वास को मजबूत करने का रास्ता भी।

इंडिगो की उड़ानें फिर पटरी पर, लेकिन यात्रियों का भरोसा अब भी कमजोर; राहत के लिए 10,000 रुपये मुआवज़ा

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो की उड़ानें एक बार फिर सामान्य रूप से संचालित होने लगी हैं। एयरपोर्ट पर पहले जैसी अफरा-तफरी अब नहीं दिख रही और फ्लाइट शेड्यूल भी लगभग स्थिर है। इसके बावजूद यात्रियों का भरोसा अभी वापस नहीं लौटा है। पिछले हफ्ते हुए बड़े पैमाने पर फ्लाइट कैंसिलेशन, घंटों की देरी, रातभर एयरपोर्ट पर फंसे यात्रियों की परेशानी और रिफंड से जुड़ी शिकायतों ने लोगों के मन में असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है।

यात्री अब टिकट बुक करने से पहले इंडिगो को लेकर दो बार सोच रहे हैं, खासकर वे लोग जो लगातार यात्रा करते हैं या जिनका सफर समय-समय पर महत्वपूर्ण बैठकों, इंटरव्यू या पारिवारिक कारणों से जुड़ा होता है।

यात्रियों के अनुभव: भरोसा टूटने की कई वजहें

“अब टिकट बुक करने से डर लगता है”

दिल्ली में काम करने वाली स्नेहा का कहना है कि लगातार देरी और कैंसिलेशन के बाद अब इंडिगो में टिकट लेना जोखिम जैसा लगता है। रिफंड समय पर न मिलने से उनकी परेशानी और बढ़ गई।

“भरोसा हिला, खर्च बढ़ा”

जबलपुर जाने वाले यात्रियों से लेकर बिजनेस ट्रैवलर्स तक—सभी ने माना कि पिछले हफ्ते की घटना ने उन्हें मानसिक रूप से असहज कर दिया। कुछ यात्रियों ने बताया कि उन्हें आखिरी समय में अन्य एयरलाइन से महंगे टिकट खरीदने पड़े।

छोटे शहरों के यात्री सबसे ज्यादा प्रभावित

तिरुपति, नागपुर, भुवनेश्वर, त्रिची और राजकोट जैसे शहरों में लोग ऑनटाइम स्टेटस देखकर भी टिकट बुक करने में हिचक रहे हैं। कैंसिलेशन और देर से आने वाले मैसेजों ने विश्वास को और कमजोर किया है।

ट्रैवल एजेंट: “समस्या तकनीकी नहीं, मानसिक है”

दिल्ली एयरपोर्ट के ट्रैवल एजेंटों का कहना है कि अब भी कई यात्री पूछते हैं—“फ्लाइट सच में जाएगी न?”
उनके मुताबिक, लगातार दो से तीन हफ्ते जीरो डिले और जीरो कैंसिलेशन देखने पर ही भरोसा धीरे-धीरे लौटेगा।

इंडिगो का बड़ा कदम: प्रभावित यात्रियों को 10 हजार रुपये का मुआवज़ा

लगातार विरोध और शिकायतों के बाद इंडिगो ने यात्रियों को राहत देने के लिए 10,000 रुपये तक का ट्रैवल वाउचर देने की घोषणा की है।
यह मुआवज़ा 3, 4 और 5 दिसंबर को कैंसिल हुई उड़ानों और भारी देरी से सबसे अधिक प्रभावित यात्रियों को दिया जाएगा।

• वाउचर 12 महीने तक इंडिगो की किसी भी उड़ान में इस्तेमाल किया जा सकेगा।

• यह राशि सरकारी गाइडलाइंस के तहत मिलने वाले मुआवज़े के अतिरिक्त दी जा रही है।

• एयरलाइन का दावा है कि अधिकांश रिफंड प्रोसेस किए जा चुके हैं और बाकी जल्द ही जमा हो जाएंगे।

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5,000 से ज़्यादा उड़ानें रद्द — क्रू की कमी बनी बड़ी वजह

इंडिगो, जिसका घरेलू एविएशन मार्केट में करीब 65% हिस्सा है, दिसंबर की शुरुआत से अब तक 5,000 से अधिक उड़ानें रद्द कर चुका है।
पायलटों के लिए नए रेस्ट नियम लागू होने और क्रू की कमी के कारण एयरलाइन को बड़ा परिचालन संकट झेलना पड़ा।

रिपोर्ट के मुताबिक—

जरूरत: 2,422 कैप्टन

उपलब्ध: 2,357 कैप्टन

यानी क्रू गैप ने पीक ट्रैवल सीज़न में हजारों यात्रियों को प्रभावित किया।

क्या भरोसा लौट पाएगा?

फ्लाइट संचालन सामान्य हो गया है, लेकिन यात्रियों का विश्वास इतना जल्दी वापस लौटना मुश्किल लग रहा है। ट्रैवल एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले कुछ हफ्तों में इंडिगो को समय पर उड़ानें, बेहतर ग्राहक सेवा और त्वरित रिफंड सुनिश्चित करके अपनी छवि पुनर्स्थापित करनी होगी।

पूर्व केंद्रीय मंत्री शिवराज पाटिल का 90 वर्ष की आयु में निधन, लातूर में ली अंतिम सांस

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल का आज सुबह निधन हो गया। 90 वर्षीय पाटिल ने महाराष्ट्र के लातूर स्थित अपने आवास पर सुबह लगभग 6:30 बजे अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से अस्वस्थ थे और उनका घर पर ही उपचार चल रहा था। उनके निधन से राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

शिवराज पाटिल, जिन्हें पूरा नाम शिवराज पाटिल चाकुरकर के नाम से भी जाना जाता था, भारतीय राजनीति के उन दिग्गज नेताओं में शामिल रहे जिन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सक्रिय भूमिका निभाई।

शिवराज पाटिल का राजनीतिक जीवन: एक नजर

जन्म: महाराष्ट्र के लातूर जिले में

विधानसभा: 1973 से 1980 तक महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य रहे

लोकसभा: 1980 से 1999 के बीच लगातार 7 बार सांसद चुने गए

केंद्रीय मंत्री:

इंदिरा गांधी सरकार में रक्षा मंत्री

राजीव गांधी सरकार में नागर विमानन मंत्री

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लोकसभा स्पीकर: कार्यकाल के दौरान संसद में आधुनिक तकनीक के उपयोग की पहल का श्रेय

राज्यपाल: 2008 मुंबई हमले के बाद 2010–2015 तक पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक रहे

उनकी सरल छवि, लंबे राजनीतिक अनुभव और प्रशासनिक दक्षता ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर एक सम्मानित स्थान दिलाया।

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चोरी पर कड़ी रोक: घर, दुकान और वाहन की सुरक्षा के लिए अपनाएँ आधुनिक व पारंपरिक उपाय

बढ़ते शहरीकरण और बदलती जीवनशैली के बीच चोरी की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में घर, दुकान, वाहन और व्यक्तिगत संपत्ति की सुरक्षा पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लोग जागरूक रहें, तकनीक का सही उपयोग करें और बुनियादी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाएँ, तो 60% तक चोरी की घटनाओं को रोका जा सकता है।
इसी क्रम में घर और संपत्ति की सुरक्षा उपाय लागू करना आज आवश्यकता नहीं बल्कि मजबूरी बन चुका है।
मज़बूत सुरक्षा व्यवस्था: घर को बनाएं “नो-एंट्री ज़ोन”

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चोरी रोकने का पहला और सबसे प्रभावी तरीका है घर की भौतिक सुरक्षा को मजबूत बनाना।
डेडबोल्ट लॉक और स्टील फ्रेम: मुख्य दरवाज़े व खिड़कियों पर भारी सुरक्षा ताले और स्टील फ्रेम लगाएँ। यह चोरों के लिए सबसे बड़ा अवरोध बनता है।
सीढ़ियों की सुरक्षा: अक्सर चोर घर के बाहर पड़ी सीढ़ियों का उपयोग कर दूसरी मंज़िल तक पहुँच जाते हैं। इसलिए सीढ़ियों को हमेशा बेसमेंट या गैराज में बंद रखकर सुरक्षित करें।
ग्रिल और स्मार्ट लॉक: खिड़कियों पर मजबूत ग्रिल और दरवाजों पर डिजिटल या बायोमेट्रिक लॉक लगाने से सुरक्षा कई गुना बढ़ जाती है।
ये उपाय घर को आसानी से तोड़ा-फोड़ा नहीं जाने देते और चोरों को पहली ही कोशिश में हतोत्साहित कर देते हैं।
नवीन तकनीक: अलार्म, कैमरे और स्मार्ट होम का बढ़ता उपयोग।
तकनीक ने सुरक्षा की दुनिया को बिल्कुल बदल दिया है। आज अधिकांश घरों और दुकानों में स्मार्ट सुरक्षा उपकरण उपयोग होने लगे हैं।

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अलार्म सिस्टम और मोशन सेंसर: घर के प्रवेश द्वार, खिड़कियों और बाहरी गतिशील स्थानों पर मोशन सेंसर लगाने से किसी भी संदिग्ध हरकत पर अलार्म सक्रिय हो जाता है।
सुरक्षा कैमरे (CCTV): आजकल एचडी विज़न वाले कैमरे मोबाइल पर लाइव फुटेज दिखाते हैं, जिससे घर से दूर रहने पर भी संपत्ति की निगरानी आसान हो जाती है।
स्मार्ट ऑटोमेशन: लाइट, अलार्म और लॉक को ऑटोमेटिक सिस्टम से जोड़कर घर को रिमोटली कंट्रोल करने की सुविधा तकनीक ने आसान बना दी है।
इन तकनीकी उपायों से चोरी की संभावना बेहद कम हो जाती है, क्योंकि चोर आमतौर पर उन घरों में घुसने से बचते हैं जहाँ कैमरे या सेंसर लगे हों।
तेज़ रोशनी: अँधेरा चोरों का साथी, रोशनी उनकी दुश्मन
घर के बाहर अंधेरा चोरी के लिए बड़ा अवसर बनता है।
मुख्य गेट, पार्किंग, पिछवाड़ा और खिड़कियों के आसपास तेज़ LED लाइटिंग अनिवार्य है।
मोशन-एक्टिवेटेड लाइटें भी अत्यंत कारगर साबित होती हैं, क्योंकि किसी के आते ही रोशनी तेज़ हो जाती है, जो चोरों को डराने में सफल रहती है।
जागरूकता: आपकी सावधानी ही आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा।
सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है जागरूकता।
सामान पर नाम लिखें: किताबें, कीमती सामान, वर्क टूल्स पर नाम या मार्किंग करने से चोरी के बाद पहचान आसान हो जाती है।
कीमती वस्तुएँ खुली जगह पर न छोड़ें: सार्वजनिक परिसर, दुकान या गाड़ी में किसी भी महंगे सामान को खुला न रखें।
बड़ी नकदी से बचें: ज्यादा कैश रखना जोखिम भरा होता है। डिजिटल पेमेंट, बैंक ट्रांसफर या चेक का उपयोग अधिक सुरक्षित है।
दुकान और व्यवसाय की सुरक्षा: ग्राहकों से संवाद भी बनता है सुरक्षा कवच
कई रिसर्च बताती हैं कि दुकानदार का सक्रिय व्यवहार चोरी को 40% तक कम कर देता है।
दुकान में प्रवेश करते ग्राहक से हल्की बातचीत और स्वागत उन्हें जिम्मेदारी का एहसास कराता है।
ड्रेसिंग रूम की निगरानी आवश्यक है। स्टाफ को सतर्क रखें ताकि संदिग्ध व्यवहार तुरंत पकड़ा जा सके।
स्टॉक प्रबंधन: इन्वेंट्री सॉफ्टवेयर उपयोग करने से सामान का रिकॉर्ड स्पष्ट रहता है, जिससे गुमशुदगी या चोरी का तुरंत पता चल जाता है।
पुलिस सहायता और सामुदायिक भागीदारी: सुरक्षा सभी की ज़िम्मेदारी
किसी भी संदिग्ध गतिविधि, जैसे घर-घर पूछताछ या भीख मांगने के बहाने इलाके की टोह लेना, तुरंत पुलिस को सूचना दें।
चोरी या घुसपैठ की स्थिति में 100 नंबर पर तुरंत कॉल करें।
यदि घुसपैठिया घर में हो और बात करने में खतरा लगे, तो साइलेंट इमरजेंसी कोड (जैसे 55 या 999) का उपयोग करें।
मोहल्ला सुरक्षा समूह, CCTV नेटवर्क और सामूहिक जागरूकता अभियान सुरक्षा को मजबूत बनाते हैं।
घर और संपत्ति की सुरक्षा उपाय अपनाकर हम न केवल अपने परिवार, दुकान और वाहन को सुरक्षित रख सकते हैं बल्कि सामुदायिक स्तर पर अपराध को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। आधुनिक तकनीक, मजबूत ताले, सतर्कता और पुलिस सहयोग मिलकर एक सुरक्षित वातावरण बनाते हैं, जो हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

अल्लूरी सीता रामाराजू जिले में निजी बस खाई में गिरी, 9 यात्रियों की मौत

आंध्र प्रदेश (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले में बीती रात एक बड़ा सड़क हादसा हुआ, जिसमें निजी बस के खाई में गिरने से 9 लोगों की मौत हो गई। हादसा चित्तूर-मारेदुमिल्ली घाट रोड पर हुआ, जहां तीखा मोड़ होने के कारण बस अनियंत्रित होकर नीचे गिर गई। बस में कुल 37 यात्री सवार थे, जिनमें दो ड्राइवर भी शामिल थे।

तीर्थयात्रा से लौट रही थी बस

जानकारी के अनुसार सभी यात्री चित्तूर जिले से तीर्थयात्रा पर निकले थे। वे भद्राचलम मंदिर में दर्शन करने के बाद अन्नावरम जा रहे थे। हादसा उस समय हुआ जब अधिकतर यात्री यात्रा के दौरान सो रहे थे। बस यात्रियों से खचाखच भरी हुई थी।

मोबाइल नेटवर्क न होने से राहत कार्य में देरी

हादसा पहाड़ी क्षेत्र में हुआ, जहां मोबाइल नेटवर्क काफी कमजोर है। इसकी वजह से घटना की सूचना अधिकारियों तक पहुंचने में देरी हुई। स्थानीय लोगों और पुलिस टीम ने मिलकर तुरंत राहत-बचाव अभियान शुरू किया और घायलों को चिंतूर सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया। अब तक 9 शव बरामद किए जा चुके हैं और मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

सीएम चंद्रबाबू नायडू ने जताया दुख

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने एक्स (Twitter) पर पोस्ट कर कहा कि यह घटना बेहद दर्दनाक है और उन्होंने अधिकारियों को तुरंत घटनास्थल पर पहुंचकर पीड़ितों की हर संभव सहायता करने के निर्देश दिए हैं। नायडू ने घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और मृतकों के परिवारों की पूरी मदद करने का आश्वासन दिया है।

4 साल से अंधेरे में डूबा गोगेपुर चौराहा, हाई मास्ट लाइट समस्या से ग्रामीण परेशान

शाहजहांपुर (राष्ट्र की परम्परा) गोगेपुर चौराहे पर गोगेपुर चौराहा हाई मास्ट लाइट समस्या पिछले चार वर्षों से जस की तस बनी हुई है। जैतीपुर गढ़िया रंगीन कस्बे के इस महत्वपूर्ण चौराहे पर पूर्व सांसद कृष्णा राज के कार्यकाल में हाई मास्ट लाइट लगाई गई थी, ताकि पूरे क्षेत्र में रोशनी फैले और दुर्घटनाओं की संभावना कम हो। लेकिन चार साल से यह लाइट बंद पड़ी है, जिससे चौराहा हर रात घोर अंधेरे में डूब जाता है।

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स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि गोगेपुर चौराहा हाई मास्ट लाइट समस्या को ठीक कराने के लिए कई बार जनप्रतिनिधियों, विभागीय अधिकारियों और राजनीतिक दलों को अवगत कराया गया, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। ग्रामीण धर्मवीर, बृजेश, सलीम और अन्य लोगों ने कहा कि नेताओं द्वारा विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, मगर गढ़िया रंगीन क्षेत्र की इस अहम जरूरत की लगातार अनदेखी समझ से परे है।

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अंधेरे के कारण राहगीरों, दुकानदारों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। दुर्घटना की आशंका भी हमेशा बनी रहती है, क्योंकि ट्रैफिक का दबाव अधिक होने के बावजूद रोशनी का इंतजाम नहीं है। स्थानीय लोग कहते हैं कि यदि हाई मास्ट लाइट दुरुस्त हो जाए तो चौराहा फिर से रोशन हो सकता है और लोगों को राहत मिलेगी।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, बिजली विभाग और जनप्रतिनिधियों से तत्काल गोगेपुर चौराहा हाई मास्ट लाइट समस्या का समाधान कराने की मांग की है, ताकि अंधेरे में डूबे इस चौराहे पर रोशनी बहाल हो सके और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।