Wednesday, June 24, 2026
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गांव से शहर तक बदलते जीवन, बदलते मूल्य

कैलाश सिंह

महराजगंज ( राष्ट्र की परम्परा)। भारत की आत्मा गांवों में बसती है—यह कथन आज भी प्रासंगिक है, लेकिन बदलते समय के साथ गांव और शहर के बीच की दूरी केवल भौगोलिक नहीं रही, बल्कि जीवन-शैली और मूल्यों की खाई भी गहरी होती जा रही है। गांव से शहर की ओर पलायन केवल रोजगार की तलाश नहीं, बल्कि एक ऐसे बदलाव की कहानी है, जहां जीवन के साथ-साथ मानवीय मूल्य भी रूपांतरित हो रहे हैं।
गांवों का जीवन सादगी, सामूहिकता और आत्मीयता से जुड़ा रहा है। वहां रिश्ते खून से ही नहीं, मिट्टी से भी जुड़े होते हैं। सुख-दुःख में पड़ोसी साथ खड़ा होता है, और सामूहिक जिम्मेदारी जीवन का स्वाभाविक हिस्सा होती है। इसके विपरीत शहर का जीवन सुविधाओं से भरा तो है, लेकिन रिश्तों में औपचारिकता और व्यस्तता का बोझ साफ झलकता है। यहां समय है, पर अपनापन नहीं; साधन हैं, पर संतोष नहीं।
शहर की तेज रफ्तार ने व्यक्ति को अवसर तो दिए हैं, लेकिन उसी रफ्तार में संवेदनाएं पीछे छूटती जा रही हैं। भौतिक सुख-सुविधाओं की होड़ में नैतिकता, सहनशीलता और सामाजिक सरोकार जैसे मूल्य धीरे-धीरे कमजोर पड़ते जा रहे हैं। गांव से आया व्यक्ति जब शहर में बसता है, तो उसकी प्राथमिकताएं बदलती हैं—संघर्ष के बीच वह परंपरा और आधुनिकता के द्वंद्व में उलझ जाता है।
दूसरी ओर, शहर का प्रभाव अब गांवों तक भी पहुंच चुका है। तकनीक, संचार और बाजारवाद ने देहाती जीवन की सादगी को प्रभावित किया है। संयुक्त परिवार टूटकर एकल परिवार में बदल रहे हैं, लोक-संस्कृति और पारंपरिक रीति-रिवाज हाशिये पर जा रहे हैं। गांव भी अब पहले जैसा नहीं रहा, वहां भी शहर की नकल और दिखावे की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है।
यह परिवर्तन पूरी तरह नकारात्मक भी नहीं है। शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और जागरूकता के विस्तार ने गांवों को नई दिशा दी है। लेकिन सवाल यह है कि क्या विकास की इस दौड़ में हम अपने मूल मानवीय मूल्यों को खोते जा रहे हैं? क्या सुविधा और आधुनिकता के साथ संवेदनशीलता और सामूहिकता को बनाए रखना संभव नहीं है?
समाधान किसी एक को चुनने में नहीं, बल्कि संतुलन में है। शहर की सुविधाएं और गांव की संवेदनाएं—यदि दोनों का समन्वय हो सके, तो समाज अधिक मानवीय और सशक्त बन सकता है। आवश्यकता इस बात की है कि गांव से शहर तक बदलते जीवन के साथ मूल्यों को टूटने न दिया जाए, बल्कि उन्हें समय के अनुरूप सहेज कर आगे बढ़ाया जाए। तभी विकास वास्तव में समग्र और सार्थक कहा जायेगा।

पसमांदा मुसलमानों की अनदेखी, मंत्री दानिश आज़ाद पर गंभीर सवाल

भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के निवर्तमान क्षेत्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

आजमगढ़ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। पसमांदा समाज के सक्रिय कार्यकर्ता एवं विभिन्न संगठनों में पदाधिकारी अब्दुल रहमान अंसारी (पप्पू महाप्रधान) ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर अल्पसंख्यक कल्याण, हज एवं वक्फ राज्यमंत्री दानिश आज़ाद अंसारी की कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष जताया है। उन्होंने मांग की है कि मंत्री को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जाएं, ताकि केंद्र और प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पसमांदा मुसलमानों तक प्रभावी ढंग से पहुंच सके।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि सरकार गठन के समय पसमांदा समाज को प्रतिनिधित्व मिलने से समुदाय में व्यापक खुशी थी और इसके लिए समाज आज भी आभारी है। लेकिन आरोप लगाया गया है कि मंत्री बनने के बाद दानिश आज़ाद अंसारी ने अपने समाज और पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं से दूरी बना ली है।
पत्र के अनुसार मंत्री उन लोगों के कार्यक्रमों और सुख-दुख में अधिक शामिल होते हैं, जिन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ सोशल मीडिया और जमीनी स्तर पर अभियान चलाया था। पत्र में यह भी दावा किया गया है कि इससे संबंधित वीडियो क्लिप और साक्ष्य उपलब्ध हैं।
अब्दुल रहमान अंसारी ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता संगठन की रीढ़ होते हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश हैं कि मंत्री अपने समाज को पार्टी से जोड़ें और सरकार की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाएं, जिससे 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को मजबूती मिल सके।
पत्र के अंत में मुख्यमंत्री से अनुरोध किया गया है कि दानिश आज़ाद अंसारी को पुनः दिशा-निर्देश देकर पसमांदा ओबीसी मुसलमानों तक योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित कराई जाए, ताकि पसमांदा मुसलमान एकजुट होकर 2027 में सरकार गठन में निर्णायक भूमिका निभा सकें।
ज्ञात हो पत्र भेजने वाले अब्दुल रहमान अंसारी (पप्पू महाप्रधान) पसमांदा एक्टिविस्ट हैं। साथ ही वे राष्ट्रीय गौरक्षा वाहिनी गौसेवा संघ उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष, भारतीय जनता पार्टी अल्पसंख्यक मोर्चा गोरखपुर क्षेत्र के निवर्तमान क्षेत्रीय मंत्री तथा ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ उत्तर प्रदेश के प्रदेश महासचिव भी हैं।

भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को नई धार: पिनाका के नए वैरिएंट का सफल ट्रायल

पिनाका एलआरजीआर-120 का सफल परीक्षण: भारत की स्वदेशी ताकत से बदला एशिया का सैन्य संतुलन


नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)भारत ने स्वदेशी रक्षा क्षमता में एक और निर्णायक उपलब्धि हासिल करते हुए ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट (LRGR-120) का पहला सफल परीक्षण कर लिया है। डीआरडीओ और भारतीय सेना की संयुक्त सफलता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब अत्याधुनिक, लंबी दूरी और सटीक मारक प्रणालियों में आत्मनिर्भर बन चुका है। यह परीक्षण ऐसे समय में हुआ है जब रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने इसी दिन इसे सेना में शामिल करने की मंजूरी दी—जो इस उपलब्धि को और भी ऐतिहासिक बनाता है।
भगवान शिव के धनुष पिनाक से प्रेरित पिनाका रॉकेट सिस्टम एक मल्टी-बैरल, मोबाइल और अत्यंत घातक हथियार मंच है। एक लांचर ट्रक से महज 44 सेकेंड में 12 रॉकेट दागने की क्षमता इसे युद्धक्षेत्र में निर्णायक बढ़त देती है। नई LRGR-120 वैरिएंट में उन्नत गाइडेंस के साथ लंबी दूरी और उच्च सटीकता का मेल है, जिससे सीमावर्ती इलाकों में रणनीतिक दबदबा मजबूत होता है।

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विशेषज्ञों के अनुसार, 2021 के बाद क्षेत्र में लंबी दूरी वाले रॉकेट सिस्टम की तैनाती के मद्देनज़र भारतीय सेना ने 120 किमी और 300 किमी रेंज के पिनाका वैरिएंट विकसित करने का अनुरोध किया था। अब एक ही लांचर से अलग-अलग रेंज के पिनाका रॉकेट दागे जा सकेंगे—यह लचीलापन किसी भी सैन्य योजना को अधिक प्रभावी बनाता है।

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि पर डीआरडीओ को बधाई देते हुए कहा कि लंबी दूरी के गाइडेड रॉकेटों का विकास सशस्त्र बलों की क्षमताओं को नई ऊंचाई देगा। डीआरडीओ चेयरमैन समीर वी. कामत ने भी मिशन टीम की सराहना की। उल्लेखनीय है कि 1999 के कारगिल युद्ध में पिनाका ने अपनी विश्वसनीयता पहले ही साबित कर दी थी। नई LRGR-120 के साथ भारत की स्वदेशी शक्ति और अधिक सशक्त हुई है।

31 दिसंबर 2025 का महाविशेष राशिफल मेष से मीन तक सभी 12 राशियों का विस्तृत भविष्यफल

पंडित सत्य प्रकाश पाण्डेय द्वारा


वैदिक ज्योतिष के अनुसार ग्रह-नक्षत्रों की चाल हमारे जीवन के हर क्षेत्र को प्रभावित करती है। वर्ष 2025 का अंतिम दिन 31 दिसंबर, बुधवार को पड़ रहा है। बुधवार का संबंध बुद्धि, व्यापार और भगवान गणेश से माना जाता है। ऐसे में यह दिन कुछ राशियों के लिए उन्नति, लाभ और नई शुरुआत का संकेत दे रहा है, तो कुछ राशियों को संयम और सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी।
यह राशिफल सामान्य ग्रह-स्थिति पर आधारित है, व्यक्तिगत कुंडली के अनुसार परिणाम भिन्न हो सकते हैं।

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मेष राशि (Aries)
अक्षर: चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ
राशि चिन्ह: ♈
आज का दिन आत्मविश्वास और उपलब्धियों से भरा रहेगा।
कार्य/व्यवसाय: प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिलने के योग हैं। व्यापार में नए कॉन्टैक्ट बनेंगे।
शिक्षा: प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को सकारात्मक संकेत।
कला/संगीत: रचनात्मक ऊर्जा चरम पर, मंच या सोशल मीडिया पर पहचान मिलेगी।
राजनीति/प्रशासन: नेतृत्व क्षमता उभरेगी, वरिष्ठों का सहयोग मिलेगा।
आर्थिक स्थिति: आय में वृद्धि, निवेश के लिए अनुकूल समय।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 9
पूज्य देव: भगवान गणेश

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वृषभ राशि (Taurus)
अक्षर: ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो
राशि चिन्ह: ♉
आज स्वास्थ्य और अनुशासन का दिन है।
कार्य/व्यवसाय: मेहनत का फल धीरे-धीरे मिलेगा, धैर्य रखें।
शिक्षा: ध्यान भटक सकता है, नियमित अभ्यास जरूरी।
कला/संगीत: अभ्यास से ही सफलता मिलेगी।
राजनीति/प्रशासन: कोई पुराना मामला फिर उभर सकता है।
आर्थिक स्थिति: खर्च पर नियंत्रण जरूरी।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 6
पूज्य देव: देवी लक्ष्मी

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मिथुन राशि (Gemini)
अक्षर: का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह
राशि चिन्ह: ♊
मानसिक संतुलन बनाए रखना आज जरूरी है।
कार्य/व्यवसाय: ऑफिस में उत्पादकता बढ़ेगी, नई जिम्मेदारी मिल सकती है।
शिक्षा: लेखन, मीडिया और कम्युनिकेशन से जुड़े छात्रों के लिए श्रेष्ठ दिन।
कला/संगीत: शब्दों और आवाज़ से पहचान बनेगी।
राजनीति/प्रशासन: वक्तृत्व क्षमता से लाभ।
आर्थिक स्थिति: सामान्य से बेहतर।
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 5
पूज्य देव: भगवान विष्णु

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कर्क राशि (Cancer)
अक्षर: ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो
राशि चिन्ह: ♋
भावनात्मक गहराई बढ़ेगी।
कार्य/व्यवसाय: करियर में बदलाव का अवसर मिल सकता है।
शिक्षा: रिसर्च और मेडिकल क्षेत्र के लिए अच्छा दिन।
कला/संगीत: भावनात्मक रचनाएं सराही जाएंगी।
राजनीति/प्रशासन: जनता से जुड़ाव बढ़ेगा।
आर्थिक स्थिति: स्थिर।
शुभ रंग: दूधिया
शुभ अंक: 2
पूज्य देव: भगवान शिव

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सिंह राशि (Leo)
अक्षर: मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे
राशि चिन्ह: ♌
वित्तीय मामलों में सतर्कता जरूरी।
कार्य/व्यवसाय: निर्णय सोच-समझकर लें।
शिक्षा: नेतृत्व से जुड़े विषयों में सफलता।
कला/संगीत: मंच पर प्रशंसा मिलेगी।
राजनीति/प्रशासन: पद-प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
आर्थिक स्थिति: अनावश्यक खर्च से बचें।
शुभ रंग: सुनहरा
शुभ अंक: 1
पूज्य देव: सूर्य देव

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कन्या राशि (Virgo)
अक्षर: टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो
राशि चिन्ह: ♍
समस्याओं का समाधान मिलेगा।
कार्य/व्यवसाय: योजनाएं सफल होंगी।
शिक्षा: गणित, विज्ञान के छात्रों के लिए श्रेष्ठ।
कला/संगीत: परफेक्शन की सराहना होगी।
राजनीति/प्रशासन: नीति निर्धारण में भूमिका।
आर्थिक स्थिति: संतोषजनक।
शुभ रंग: आसमानी
शुभ अंक: 5
पूज्य देव: भगवान गणेश

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तुला राशि (Libra)
अक्षर: रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते
राशि चिन्ह: ♎
साझेदारी और संवाद का दिन।
कार्य/व्यवसाय: पार्टनरशिप से लाभ।
शिक्षा: लॉ और आर्ट्स के छात्रों के लिए अच्छा।
कला/संगीत: सौंदर्यबोध उभरेगा।
राजनीति/प्रशासन: संतुलित निर्णय सराहे जाएंगे।
आर्थिक स्थिति: ठीक-ठाक।
शुभ रंग: गुलाबी
शुभ अंक: 6
पूज्य देव: मां दुर्गा

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वृश्चिक राशि (Scorpio)
अक्षर: तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू
राशि चिन्ह: ♏
अनुशासन से सफलता।
कार्य/व्यवसाय: बजट पर नियंत्रण जरूरी।
शिक्षा: रिसर्च और गूढ़ विषयों में रुचि।
कला/संगीत: गहन रचनाएं।
राजनीति/प्रशासन: रणनीति से लाभ।
आर्थिक स्थिति: संतुलन बनाए रखें।
शुभ रंग: मैरून
शुभ अंक: 8
पूज्य देव: भगवान भैरव

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धनु राशि (Sagittarius)
अक्षर: ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे
राशि चिन्ह: ♐
अनुभव से उन्नति।
कार्य/व्यवसाय: नए अवसर मिलेंगे।
शिक्षा: उच्च शिक्षा में सफलता।
कला/संगीत: विदेश से जुड़े मौके।
राजनीति/प्रशासन: विस्तार के योग।
आर्थिक स्थिति: अच्छी।
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 3
पूज्य देव: भगवान विष्णु

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मकर राशि (Capricorn)
अक्षर: भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी
राशि चिन्ह: ♑
दीर्घकालिक योजना का दिन।
कार्य/व्यवसाय: उपलब्धियों से पहचान।
शिक्षा: अनुशासन से सफलता।
कला/संगीत: धीमी लेकिन स्थायी प्रगति।
राजनीति/प्रशासन: जिम्मेदारी बढ़ेगी।
आर्थिक स्थिति: मजबूत।
शुभ रंग: नीला
शुभ अंक: 10
पूज्य देव: शनिदेव

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कुंभ राशि (Aquarius)
अक्षर: गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा
राशि चिन्ह: ♒
भविष्य की योजना बनेगी।
कार्य/व्यवसाय: इनोवेशन से लाभ।
शिक्षा: टेक्नोलॉजी के छात्रों के लिए श्रेष्ठ।
कला/संगीत: नया प्रयोग सफल।
राजनीति/प्रशासन: जनहित के निर्णय।
आर्थिक स्थिति: संतुलित।
शुभ रंग: बैंगनी
शुभ अंक: 4
पूज्य देव: भगवान शिव

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मीन राशि (Pisces)
अक्षर: दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची
राशि चिन्ह: ♓
धन और पारिवारिक सुख में वृद्धि।
कार्य/व्यवसाय: निवेश लाभ देगा।
शिक्षा: कला और अध्यात्म से जुड़े छात्रों के लिए श्रेष्ठ।
कला/संगीत: रचनात्मकता चरम पर।
राजनीति/प्रशासन: सहानुभूति से लोकप्रियता।
आर्थिक स्थिति: मजबूत।
शुभ रंग: समुद्री नीला
शुभ अंक: 7
पूज्य देव: भगवान विष्णु
नोट: यह ज्योतिषीय विश्लेषण राष्ट्र या विज्ञान द्वारा प्रमाणित नहीं है। यह केवल वैदिक मान्यताओं पर आधारित सामान्य भविष्यफल है। अपनी जन्मकुंडली का सटीक फल जानने के लिए किसी योग्य ज्योतिष विशेषज्ञ से अवश्य परामर्श लें।

31 दिसंबर: जब इतिहास ने अपने अमूल्य रत्नों को खो दिया – राष्ट्रनिर्माताओं को नमन

31 दिसंबर को हुए ऐतिहासिक निधन
31 दिसंबर केवल वर्ष का अंतिम दिन नहीं है, बल्कि भारतीय इतिहास में यह तिथि उन महान विभूतियों की स्मृति से जुड़ी है, जिन्होंने अपने विचार, कर्म और नेतृत्व से देश की दिशा तय की। इस दिन राजनीति, प्रशासन, इतिहास और जनसेवा के क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ने वाले महापुरुषों का निधन हुआ। आइए, 31 दिसंबर को हुए ऐतिहासिक निधन पर विस्तार से जानते हैं और उन्हें श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हैं।

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ज्ञान सिंह रानेवाला (निधन: 31 दिसंबर 1979)
ज्ञान सिंह रानेवाला भारतीय राजनीति के एक सशक्त और सिद्धांतनिष्ठ नेता थे। उनका जन्म राजस्थान प्रांत के एक ग्रामीण परिवेश में हुआ, जहाँ से उन्होंने जनसेवा की प्रेरणा पाई। वे किसानों, श्रमिकों और वंचित वर्गों की आवाज़ के रूप में जाने जाते थे। रानेवाला जी ने लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त करने और सामाजिक न्याय को स्थापित करने के लिए निरंतर संघर्ष किया।
राजनीतिक जीवन में उन्होंने ईमानदारी और स्पष्टवादिता को अपना मूल मंत्र बनाया। वे केवल सत्ता के लिए नहीं, बल्कि नीति और नीयत की राजनीति के पक्षधर थे। उनके प्रयासों से स्थानीय प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ी और जनहितकारी निर्णयों को बल मिला। भारतीय लोकतंत्र में उनका योगदान एक प्रतिबद्ध जननेता के रूप में स्मरणीय रहेगा।

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वी. पी. मेनन (निधन: 31 दिसंबर 1965)
वी. पी. मेनन आधुनिक भारत के निर्माण के उन अदृश्य नायकों में से थे, जिनके बिना आज का भारत संभव नहीं होता। उनका जन्म केरल प्रांत, त्रावणकोर क्षेत्र (वर्तमान केरल, भारत) में हुआ। वे एक साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर भारत सरकार के शीर्ष प्रशासकों में शामिल हुए।
सरदार वल्लभभाई पटेल के साथ मिलकर उन्होंने 560 से अधिक रियासतों के भारत में शांतिपूर्ण एकीकरण में निर्णायक भूमिका निभाई। उनकी प्रशासनिक कुशलता, कूटनीतिक समझ और दूरदृष्टि ने भारत की भौगोलिक एकता को साकार किया। वी. पी. मेनन का योगदान भारतीय राष्ट्र-निर्माण के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है।

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रविशंकर शुक्ल (निधन: 31 दिसंबर 1956)
रविशंकर शुक्ल का जन्म मध्य प्रदेश (तत्कालीन मध्य भारत) क्षेत्र में हुआ। वे स्वतंत्रता संग्राम से निकले एक प्रखर राजनेता और मध्य प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री थे। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाई और महात्मा गांधी के विचारों से गहराई से प्रभावित रहे।
मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने नवगठित राज्य की प्रशासनिक नींव रखी। शिक्षा, कृषि, सिंचाई और सामाजिक समरसता उनके शासन के प्रमुख स्तंभ रहे। वे सरल जीवन, उच्च नैतिकता और जनकल्याणकारी सोच के प्रतीक थे। मध्य प्रदेश के विकास की आधारशिला रखने में उनका योगदान आज भी प्रेरणास्रोत है।

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विश्वनाथ काशीनाथ राजवाडे (निधन: 31 दिसंबर 1926)
विश्वनाथ काशीनाथ राजवाडे का जन्म महाराष्ट्र प्रांत के सतारा ज़िले में हुआ था। वे भारत के अग्रणी इतिहासकार, लेखक, विद्वान और ओजस्वी वक्ता थे। मराठा इतिहास के प्रामाणिक शोधकर्ता के रूप में उन्होंने भारतीय इतिहास लेखन को नई दिशा दी।
उन्होंने प्राचीन दस्तावेज़ों, ताम्रपत्रों और ऐतिहासिक अभिलेखों का गहन अध्ययन कर तथ्यपरक इतिहास प्रस्तुत किया। उनका कार्य केवल अकादमिक नहीं था, बल्कि राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने वाला था। भारतीय इतिहास को औपनिवेशिक दृष्टिकोण से मुक्त करने में राजवाडे जी का योगदान अमूल्य है।

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निष्कर्ष– 31 दिसंबर को हुए ऐतिहासिक निधन हमें यह स्मरण कराते हैं कि राष्ट्र केवल वर्तमान से नहीं, बल्कि अतीत के त्याग, परिश्रम और दूरदृष्टि से बनता है। इन महान व्यक्तित्वों की विरासत आज भी हमारे विचारों और निर्णयों को दिशा देती है।

वर्ष के अंतिम दिन जन्मे महानायक

“31 दिसंबर के अमर नाम: इतिहास के पन्नों में दर्ज वे व्यक्तित्व जिन्होंने भारत और विश्व को दिशा दी”

31 दिसंबर केवल वर्ष का अंतिम दिन नहीं, बल्कि इतिहास में उन महान व्यक्तियों का जन्मदिवस भी है जिन्होंने अपने कर्म, विचार और योगदान से समाज, साहित्य, राजनीति, संस्कृति और स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी। आइए 31 दिसंबर को जन्मे ऐसे ही ऐतिहासिक और प्रेरणादायी व्यक्तित्वों पर विस्तार से प्रकाश डालते हैं।

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अंशु जमसेन्पा (जन्म: 31 दिसंबर 1979)
जन्म स्थान: दिरांग, पश्चिम कामेंग जिला, अरुणाचल प्रदेश, भारत
अंशु जमसेन्पा भारत की अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त पर्वतारोही हैं। वे विश्व की पहली महिला हैं जिन्होंने एक ही सीजन में दो बार माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई कर इतिहास रचा। उन्होंने न केवल भारतीय महिलाओं की क्षमता को वैश्विक मंच पर स्थापित किया, बल्कि सीमावर्ती पूर्वोत्तर भारत को भी नई पहचान दिलाई। उनकी उपलब्धियाँ युवाओं, विशेषकर महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

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अरविंद गणपत सावंत (जन्म: 31 दिसंबर 1951)
जन्म स्थान: मुंबई, महाराष्ट्र, भारत
अरविंद सावंत भारतीय राजनीति का जाना-पहचाना नाम हैं। वे शिवसेना के वरिष्ठ नेता रहे और केंद्र सरकार में भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उपक्रम मंत्री के रूप में कार्य किया। मुंबई और महाराष्ट्र की राजनीति में उनकी मजबूत पकड़ रही है। उन्होंने उद्योग, रोजगार और क्षेत्रीय हितों के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से उठाया।

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त्रिदिब मित्रा (जन्म: 31 दिसंबर 1940)
जन्म स्थान: कोलकाता, पश्चिम बंगाल, भारत
त्रिदिब मित्रा बांग्ला साहित्य के चर्चित ‘भूखी पीढ़ी आंदोलन’ के प्रमुख कवि थे। उनकी कविताओं में सामाजिक विद्रोह, व्यवस्था विरोध और मानवीय पीड़ा की गहरी अभिव्यक्ति मिलती है। उन्होंने पारंपरिक साहित्यिक ढांचे को तोड़कर नई सोच को जन्म दिया, जिससे आधुनिक बांग्ला कविता को नई पहचान मिली।

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श्रीलाल शुक्ल (जन्म: 31 दिसंबर 1925)
जन्म स्थान: लखनऊ, उत्तर प्रदेश, भारत
श्रीलाल शुक्ल हिंदी साहित्य के महान व्यंग्यकार थे। उनका प्रसिद्ध उपन्यास “राग दरबारी” भारतीय ग्रामीण राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था का सशक्त दस्तावेज है। उन्होंने व्यंग्य को केवल हास्य नहीं, बल्कि सामाजिक आलोचना का सशक्त माध्यम बनाया। उनके लेखन ने हिंदी साहित्य को गहराई और धार प्रदान की।

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यमुनाबाई वाईकर (जन्म: 31 दिसंबर 1915)
जन्म स्थान: सांगली जिला, महाराष्ट्र, भारत
यमुनाबाई वाईकर महाराष्ट्र की सुप्रसिद्ध लोक कलाकार थीं, जिन्हें ‘लावणी की क्वीन’ कहा जाता है। उन्होंने लावणी नृत्य को मंचीय गरिमा और राष्ट्रीय पहचान दिलाई। उनका योगदान मराठी लोकसंस्कृति को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुँचाने में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा।

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कृष्ण बल्लभ सहाय (जन्म: 31 दिसंबर 1866)
जन्म स्थान: बिहार, भारत
कृष्ण बल्लभ सहाय स्वतंत्रता सेनानी और बिहार के मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और स्वतंत्र भारत में प्रशासनिक ढांचे को सुदृढ़ करने में योगदान दिया। शिक्षा, सामाजिक सुधार और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए उनका जीवन समर्पित रहा।

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लॉर्ड कॉर्नवॉलिस (जन्म: 31 दिसंबर 1738)
जन्म स्थान: लंदन, इंग्लैंड
लॉर्ड कॉर्नवॉलिस ब्रिटिश भारत में फ़ोर्ट विलियम प्रेसिडेंसी के गवर्नर-जनरल रहे। स्थायी बंदोबस्त (Permanent Settlement) जैसी नीतियों के लिए वे ऐतिहासिक रूप से जाने जाते हैं। यद्यपि उनका योगदान औपनिवेशिक शासन से जुड़ा रहा, फिर भी भारतीय प्रशासनिक इतिहास में उनका नाम महत्वपूर्ण माना जाता है।

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निष्कर्ष– 31 दिसंबर को जन्मे ये सभी व्यक्तित्व अपने-अपने क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ गए। कोई साहित्य के माध्यम से समाज को आईना दिखाता है, कोई संस्कृति को संजोता है, तो कोई राजनीति और राष्ट्र निर्माण में भूमिका निभाता है। ऐसे महान जन्मदिन हमें प्रेरणा देते हैं कि एक व्यक्ति भी इतिहास की दिशा बदल सकता है।

जानें आपका मूलांक क्या कहता है भविष्य धन, करियर और संबंधों के बारे में

🔢 अंक राशिफल 31 दिसंबर 2025: साल का आखिरी दिन बदलेगा भाग्य की दिशा! जानें आपका मूलांक क्या कहता है भविष्य, धन, करियर और संबंधों के बारे में

ज्योतिष शास्त्र में जहां राशि से भविष्य देखा जाता है, वहीं अंक ज्योतिष (Numerology) में जन्मतिथि से बने मूलांक (1 से 9) जीवन की दिशा और दशा बताते हैं।
साल 2025 का अंतिम दिन कई लोगों के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। आज का दिन आपकी मेहनत, सोच और निर्णयों का आईना बनेगा।

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👉 पंडित सुधीर तिवारी (अंतिम बाबा) द्वारा प्रस्तुत यह विशेष अंक राशिफल, आपको कार्य, व्यवसाय, शिक्षा, कला, राजनीति, प्रशासन, आर्थिक स्थिति, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उपायों की विस्तृत जानकारी देगा।
🌟 मूलांक 1 (जन्म तिथि: 1, 10, 19, 28)
आज का दिन: आत्मविश्वास से भरा
कार्य/व्यवसाय: ऑफिस मीटिंग, प्रशासनिक या नेतृत्व वाले पदों पर आपकी बात सुनी जाएगी। अधिकारी वर्ग का सहयोग मिलेगा।
शिक्षा: प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को सही दिशा मिलेगी।
राजनीति/प्रशासन: नेतृत्व क्षमता उभरेगी, पर क्रोध से बचें।
आर्थिक स्थिति: स्थिर रहेगी, बड़े निर्णय टालें।
स्वास्थ्य: गुस्से और बीपी से सावधानी।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 1
पूजा: सूर्य देव को अर्घ्य दें

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🌙 मूलांक 2 (जन्म तिथि: 2, 11, 20, 29)
आज का दिन: भावनाओं पर नियंत्रण जरूरी
कार्य/व्यवसाय: परिणाम देर से मिलेंगे, धैर्य रखें।
शिक्षा: मन भटक सकता है, ध्यान जरूरी।
कला/संगीत: रचनात्मकता बढ़ेगी।
रिश्ते: भावुकता से नुकसान हो सकता है।
आर्थिक स्थिति: सामान्य।
स्वास्थ्य: नींद पूरी लें।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 2
पूजा: माता दुर्गा की आराधना

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🔥 मूलांक 3 (जन्म तिथि: 3, 12, 21, 30)
आज का दिन: उन्नति और अवसरों का
कार्य/व्यवसाय: नई जिम्मेदारी या प्रमोशन के योग।
शिक्षा: उच्च शिक्षा व करियर में सफलता।
राजनीति/प्रशासन: मान-सम्मान बढ़ेगा।
आर्थिक स्थिति: धन लाभ के संकेत।
स्वास्थ्य: सुधार होगा।
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 3
पूजा: गुरु बृहस्पति का स्मरण

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⚙️ मूलांक 4 (जन्म तिथि: 4, 13, 22, 31)
आज का दिन: मेहनत और भागदौड़ वाला
कार्य/व्यवसाय: दबाव रहेगा, पर परिणाम मिलेगा।
शिक्षा: एकाग्रता में कमी हो सकती है।
आर्थिक स्थिति: खर्च बढ़ेगा।
स्वास्थ्य: थकान, आंखों और नींद का ध्यान रखें।
शुभ रंग: नीला
शुभ अंक: 4
पूजा: भगवान गणेश

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🌬️ मूलांक 5 (जन्म तिथि: 5, 14, 23)
आज का दिन: सफलता और संवाद का
कार्य/व्यवसाय: इंटरव्यू, डील, मीडिया, मार्केटिंग में लाभ।
शिक्षा: प्रतियोगी छात्रों के लिए अच्छा समय।
कला/लेखन: पहचान मिलेगी।
आर्थिक स्थिति: मजबूत।
स्वास्थ्य: उत्तम।
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 5
पूजा: भगवान विष्णु

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💖 मूलांक 6 (जन्म तिथि: 6, 15, 24)
आज का दिन: रिश्तों और सौंदर्य का
कार्य/व्यवसाय: फैशन, आर्ट, डिजाइन से जुड़े लोगों को लाभ।
रिश्ते: प्रेम और सामंजस्य बढ़ेगा।
आर्थिक स्थिति: खर्च के साथ सुख भी।
स्वास्थ्य: संतुलित।
शुभ रंग: गुलाबी
शुभ अंक: 6
पूजा: माता लक्ष्मी

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🔮 मूलांक 7 (जन्म तिथि: 7, 16, 25)
आज का दिन: आत्मचिंतन का
कार्य/व्यवसाय: धीमी प्रगति, पर स्थायी लाभ।
शिक्षा: रिसर्च व आध्यात्मिक अध्ययन शुभ।
स्वास्थ्य: पेट, सिर से जुड़ी समस्या हो सकती है।
मानसिक स्थिति: ध्यान-योग लाभ देगा।
शुभ रंग: बैंगनी
शुभ अंक: 7
पूजा: भगवान शिव

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⚖️ मूलांक 8 (जन्म तिथि: 8, 17, 26)
आज का दिन: संघर्ष के बाद सफलता
कार्य/व्यवसाय: अधिक मेहनत, पर शाम बाद राहत।
राजनीति/प्रशासन: वरिष्ठों की सलाह लाभकारी।
आर्थिक स्थिति: सावधानी जरूरी।
स्वास्थ्य: थकावट संभव।
शुभ रंग: काला
शुभ अंक: 8
पूजा: शनि देव

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🔥 मूलांक 9 (जन्म तिथि: 9, 18, 27)
आज का दिन: ऊर्जा और उपलब्धि का
कार्य/व्यवसाय: अधूरे काम पूरे होंगे।
राजनीति/प्रशासन: नई जिम्मेदारी मिलेगी।
आर्थिक स्थिति: सामान्य से बेहतर।
स्वास्थ्य: अच्छा, पर जल्दबाजी से बचें।
शुभ रंग: नारंगी
शुभ अंक: 9
पूजा: हनुमान जी

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⚠️ डिस्क्लेमर
यह अंक राशिफल अंक ज्योतिष पर आधारित सामान्य भविष्यवाणी है। यह किसी राष्ट्र या शास्त्र द्वारा प्रमाणित परंपरा नहीं है। अपनी जन्मकुंडली का विश्लेषण किसी योग्य विशेषज्ञ से अवश्य कराएं।

31 दिसंबर का इतिहास: जब समय ने करवट ली और दुनिया बदल गई

31 दिसंबर केवल साल का आख़िरी दिन नहीं है, बल्कि यह वह तारीख़ है जिसने राजनीति, युद्ध, स्वतंत्रता आंदोलनों, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति, खेल और मानव त्रासदियों के रूप में इतिहास की दिशा बदली है। इस दिन घटित घटनाएँ आज भी विश्व की सामूहिक स्मृति में गहराई से अंकित हैं। आइए 31 दिसंबर को घटित इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं पर विस्तार से नज़र डालते हैं।

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2014 – शंघाई भगदड़: जश्न में बदला मातम
चीन के शंघाई शहर में नए साल की पूर्व संध्या पर आयोजित समारोह उस समय त्रासदी में बदल गया, जब भारी भीड़ के कारण भगदड़ मच गई। इस दर्दनाक घटना में कम से कम 36 लोगों की मौत हुई और 49 से अधिक लोग घायल हो गए। यह हादसा शहरी भीड़ प्रबंधन और सार्वजनिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल छोड़ गया। शंघाई की यह घटना बताती है कि उत्सव के क्षण भी प्रशासनिक चूक से जानलेवा बन सकते हैं।

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2008 – ईश्वरदास रोहिणी बने मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष
31 दिसंबर 2008 को ईश्वरदास रोहिणी को दूसरी बार मध्य प्रदेश विधानसभा का अध्यक्ष घोषित किया गया। उनका पुनर्निर्वाचन राज्य की विधायी स्थिरता और राजनीतिक अनुभव का प्रतीक माना गया। विधानसभा अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका संसदीय परंपराओं के संरक्षण और सदन की कार्यवाही को निष्पक्ष रूप से संचालित करने में अहम रही।

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1999 – IC-814 अपहरण: भारत के लिए कूटनीतिक चुनौती
इंडियन एयरलाइंस के विमान IC-814 का अपहरण कर आतंकियों ने उसे अफगानिस्तान के कंधार हवाई अड्डे पर उतार दिया। सात दिनों तक चला यह बंधक संकट भारत के लिए अभूतपूर्व कूटनीतिक और सुरक्षा परीक्षा था। अंततः 190 यात्रियों की सुरक्षित रिहाई हुई, लेकिन इस घटना ने आतंकवाद के वैश्विक खतरे और विमानन सुरक्षा की कमजोरियों को उजागर कर दिया।

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1984 – राजीव गांधी बने भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री
31 दिसंबर 1984 को राजीव गांधी ने मात्र 40 वर्ष की आयु में भारत के सातवें प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभाला। यह आधुनिक भारत के राजनीतिक इतिहास का महत्वपूर्ण मोड़ था। उन्होंने तकनीक, दूरसंचार और युवा नेतृत्व को बढ़ावा दिया। इसी दिन भारतीय क्रिकेट को भी नया सितारा मिला, जब मोहम्मद अज़हरुद्दीन ने इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया।

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1988 – भारत-पाक परमाणु समझौता: शांति की पहल
भारत और पाकिस्तान ने 31 दिसंबर 1988 को एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत दोनों देश एक-दूसरे के परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमला नहीं करेंगे। यह समझौता 27 जनवरी 1991 से प्रभावी हुआ। दक्षिण एशिया में परमाणु संतुलन और शांति बनाए रखने की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम माना जाता है।

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1964 – इंडोनेशिया का संयुक्त राष्ट्र से निष्कासन
राजनीतिक मतभेदों और अंतरराष्ट्रीय विवादों के चलते 31 दिसंबर 1964 को इंडोनेशिया को संयुक्त राष्ट्र से निष्कासित कर दिया गया। यह घटना शीत युद्ध के दौर की वैश्विक राजनीति को दर्शाती है। बाद में इंडोनेशिया ने पुनः संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता ग्रहण की, लेकिन यह निष्कासन अंतरराष्ट्रीय संबंधों के इतिहास में एक दुर्लभ उदाहरण बना।

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1929 – पूर्ण स्वराज्य का संकल्प
महात्मा गांधी के नेतृत्व में 31 दिसंबर 1929 को लाहौर में कांग्रेस अधिवेशन के दौरान पूर्ण स्वराज्य का ऐतिहासिक संकल्प लिया गया। इसी निर्णय ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को निर्णायक दिशा दी। यह दिन भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की वैचारिक दृढ़ता और जनआंदोलन की शक्ति का प्रतीक बन गया।

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1600 – ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना
31 दिसंबर 1600 को ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना हुई, जिसने आगे चलकर भारत के इतिहास की दिशा ही बदल दी। व्यापार के नाम पर आई इस कंपनी ने धीरे-धीरे राजनीतिक सत्ता हासिल की और औपनिवेशिक शासन की नींव रखी। यह तारीख़ भारतीय इतिहास में ब्रिटिश राज की शुरुआत का संकेत मानी जाती है।

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निष्कर्ष– 31 दिसंबर का इतिहास यह बताता है कि समय के अंतिम दिन भी नए युग की शुरुआत और बड़े बदलावों का कारण बन सकते हैं। यह तारीख़ केवल कैलेंडर का पड़ाव नहीं, बल्कि मानव सभ्यता की संघर्षपूर्ण, प्रेरक और कभी-कभी दर्दनाक स्मृतियों का संग्रह है।

आज का पंचांग हमें सिखाता है कि सही मुहूर्त में किया गया कर्म जीवन को दिशा देता है

पंचांग 31 दिसंबर 2025 | 31 December 2025 Panchang (बुधवार)
नववर्ष की दहलीज़ पर धर्म, समय और कर्म का सटीक संगम
आज का संपूर्ण पंचांग – 31/12/2025

📌 तिथि– शुक्ल पक्ष द्वादशी – सुबह 05:00 बजे से रात्रि 01:48 बजे तक
उपरांत शुक्ल पक्ष त्रयोदशी – 01:48 बजे रात्रि से
📌 नक्षत्र– कृत्तिका – प्रातः 03:58 बजे से रात्रि 01:30 बजे तक
उपरांत रोहिणी
📌 विक्रम संवत- 2082 (कालयुक्त)
📌 शक संवत (राष्ट्रीय पंचांग)
1947 (विश्वावसु)
📌 चंद्र मास- पौष (अमांत एवं पूर्णिमांत)
📌 करण- बव – 05:01 AM से 03:27 PM
बालव – 03:27 PM से 01:48 AM
कौलव – 01:48 AM के बाद
📌 योग- साध्य – 01:01 AM से 09:13 PM तक
शुभ – 09:13 PM के बाद
📌 वार- बुधवार

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🌞 सूर्य और 🌙 चंद्रमा का समय
सूर्योदय – 07:12 AM
सूर्यास्त – 05:47 PM
चन्द्रोदय – 02:38 PM
चन्द्रास्त – 04:46 AM (01 जनवरी)
♐ सूर्य एवं चंद्र राशि
सूर्य राशि – धनु
चंद्र राशि –
09:23 AM तक मेष
उपरांत वृषभ

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अशुभ काल (विशेष सावधानी आवश्यक)
राहुकाल – 12:29 PM से 01:49 PM
यमगण्ड – 08:31 AM से 09:50 AM
कुलिक काल – 11:10 AM से 12:29 PM
दुर्मुहूर्त – 12:08 PM से 12:51 PM
वर्ज्यम् – 02:44 PM से 04:10 PM
शुभ काल (कार्य आरंभ हेतु उत्तम)
ब्रह्म मुहूर्त – 05:36 AM से 06:24 AM
अमृत काल – 11:19 PM से 12:45 AM

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🌟 विशेष योग
सर्वार्थसिद्धि योग
01 जनवरी 01:30 AM से 07:12 AM तक (रोहिणी नक्षत्र + बुधवार)
त्रिपुष्कर योग
31 दिसंबर 05:01 AM से 07:12 AM तक
🧭 यात्रा विचार (दिशा शूल)
आज किस दिशा की यात्रा वर्जित है?
बुधवार को उत्तर दिशा की यात्रा वर्जित मानी जाती है।
यदि यात्रा आवश्यक हो तो क्या करें?
उत्तर दिशा में यात्रा से पूर्व धनिया या पान खाकर निकलें।
किस दिशा की यात्रा लाभदायक है?
आज पूर्व और दक्षिण दिशा की यात्रा से लाभ मिलने की संभावना रहती है।
🔔 चौघड़िया मुहूर्त (संक्षेप)
दिन में श्रेष्ठ चौघड़िया –
लाभ, अमृत, शुभ
रात्रि में श्रेष्ठ चौघड़िया –
शुभ, अमृत, चर

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नोट: इस पंचांग में किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए राष्ट्र की परंपरा उत्तरदायी नहीं है। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पूर्व योग्य विद्वान अथवा ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य लें।

2026 का संकल्प: व्यक्तिगत सफलता नहीं, सामूहिक राष्ट्रीय उत्थान का वर्ष

नववर्ष 2026-व्यक्तिगत आकांक्षाओं से राष्ट्रीय संकल्प तक-वैश्विक जिम्मेदारी की ओर बढ़ता भारत- करना है ऐसा धमाल- दुनियाँ कहे वाह रे भारत माता के लाल!

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारत सहित हर देश में नया वर्ष जब दस्तक देता है, तो वह केवल दीवार पर टंगे कैलेंडर का एक पन्ना नहीं बदलता, बल्कि वह मनुष्य के भीतर सोई हुई उम्मीदों को जगाता है, बीते अनुभवों से उपजी आशंकाओं को सामने लाता है और भविष्य के लिए नए संकल्पों की ज़मीन तैयार करता है। हर व्यक्ति यही कामना करता है कि आने वाला वर्ष उसके जीवन में सुख, सफलता और स्थिरता लेकर आए, किंतु समय की मांग यही है कि 2026 में हम केवल अपने व्यक्तिगत भविष्य तक सीमित न रहें, बल्कि राष्ट्र और मानवता के भविष्य के बारे में भी गहराई से सोचें। यह वर्ष केवल एक और वर्ष नहीं, बल्कि भारत के लिए विज़न 2047 की ओर तेज़ी से बढ़ने का एक निर्णायक पड़ाव है,जहाँ हमारी सोच,हमारी प्राथमिकताएँ और हमारे कर्म,आने वाले दशकों की दिशा तय करेंगे। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि वर्ष 2026 ऐसे समय में प्रवेश कर रहा है,जब विश्व अभूतपूर्व परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है।भू-राजनीतिक अस्थिरता,जलवायु संकट, तकनीकी क्रांति,आर्थिक पुनर्संरचना और लोकतांत्रिक मूल्यों की परीक्षा,ये सभी वैश्विक वास्तविकताएँ भारत के सामने भी हैं। ऐसे में नया वर्ष केवल शुभकामनाओं और उत्सवों तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि उसे कर्म-प्रधान, संकल्प- आधारित और राष्ट्र-केंद्रित सोच के साथ अपनाना होगा। यह समय है जब व्यक्तिगत सपनों और राष्ट्रीय उद्देश्यों के बीच सेतु बनाया जाए।

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साथियों बात अगर हम नव वर्ष 2026 के आगमन की करें तो हर किसी की यह स्वाभाविक कामना होती है कि नया साल उसके लिए बेहतर अवसर लेकर आए,अच्छी शिक्षा,बेहतररोजगार आर्थिक सुरक्षा,स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन। लेकिन 2026 हमें यह भी याद दिलाता है कि एक सशक्त राष्ट्र के बिना व्यक्तिगत प्रगति भी अधूरी है। जब भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मज़बूत होता है,जब उसकी अर्थव्यवस्था स्थिर और समावेशी होती है, जब उसकी लोकतांत्रिक संस्थाएँ विश्व के लिए उदाहरण बनती हैं, तब उसका लाभ प्रत्येक नागरिक तक पहुँचता है। इसलिए इस बार नया साल केवल मेरे लिए क्या बेहतर होगा का प्रश्न नहीं, बल्कि मैं अपने राष्ट्र के लिए क्या बेहतर कर सकता हूँ का भी अवसर है।भारत आज विश्व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्था, उभरती हुई आर्थिक शक्ति और युवा आबादी वाला देश है। 2026 में दुनियाँ की निगाहें भारत पर और अधिक टिकेंगी,चाहे वह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में उसकी भूमिका हो,जलवायु नेतृत्व हो, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर हो या फिर शांति और कूटनीति में उसकी भागीदारी।ऐसे में हर नागरिक का आचरण,हर नीति का प्रभाव और हर निर्णय का संदेश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पढ़ा जाएगा। नया वर्ष हमें यह समझने का अवसर देता है कि राष्ट्र की छवि केवल सरकारों से नहीं, बल्कि नागरिकों के व्यवहार से भी बनती है।

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साथियों बात अगर हम जब नया वर्ष आता है,तो वह मनुष्य को आत्ममंथन का अवसर देता है,इसको समझने की करें तो यह वह क्षण होता है, जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं,हमने बीते वर्ष अपने लिए क्या किया, अपने परिवार के लिए क्या किया, अपने समाज के लिए क्या किया और इस धरती के लिए क्या किया। क्या हमने प्रकृति के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाया, या केवल संसाधनों का उपभोग किया? क्या हमने मानवता के मूल्यों,करुणा,सहिष्णुता और न्याय,को मजबूत किया, या केवल अपने हितों तक सीमित रहे? 2026 की दहलीज पर खड़े होकर ये प्रश्न और भी प्रासंगिक हो जाते हैं।वर्ष 2026 कर्म- प्रधान होने वाला है। यह वह दौर है,जब केवल योजनाएँ बनाना पर्याप्त नहीं होगा,बल्कि उन्हें ज़मीन पर उतारने की परीक्षा होगी। भारत के लिए यह समय है कि वह शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पर्यावरण और तकनीक के क्षेत्रों में ठोस परिणाम दिखाए। अंतरराष्ट्रीय समुदाय आज केवल घोषणाओं पर नहीं, बल्कि क्रियान्वयन की गुणवत्ता पर ध्यान देता है। नया वर्ष हमें यह संदेश देता है कि यदि हम वैश्विक मंच पर बुलंदियों को छूना चाहते हैं, तो हमें अपनी आंतरिक संरचनाओं को भी उतना ही मज़बूत बनाना होगा।

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साथियों बात अगर हम नई संभावनाओं के साथ नई चुनौतियाँ भी आती हैं इसको समझने की करें तो, 2026 में भारत को जिस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है,उनमें आर्थिक असमानता,जलवायुपरिवर्तन के प्रभाव,तकनीकी बेरोज़गारी, सामाजिक ध्रुवीकरण और वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव प्रमुख हैं।इन चुनौतियों से निपटने के लिए केवल सरकारों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। नागरिकों को भी सजग, जागरूक और जिम्मेदार भूमिका निभानी होगी। नया वर्ष हमें यह अवसर देता है कि हम मुकाबला करने का दृढ़ संकल्प लें,चाहे वह व्यक्तिगत स्तर पर हो या राष्ट्रीय स्तर पर।विज़न 2047 केवल एक सरकारी दस्तावेज़ नहीं, बल्कि एक सामूहिक राष्ट्रीय स्वप्न है,एक ऐसा भारत, जो आर्थिक रूप से समृद्ध,सामाजिक रूप से न्यायपूर्ण,पर्यावरणीय रूप से संतुलित और वैश्विक रूप से सम्मानित हो। 2026 इस यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। यदि हम इस वर्ष अपने लक्ष्यों, प्राथमिकताओं और संसाधनों को सही दिशा में नहीं मोड़ते, तो 2047 का सपना केवल कागज़ों तक सीमित रह सकता है।इसलिए नया वर्ष हमें यह चेतावनी भी देता है और यह अवसर भी।

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साथियों बात अगर हम अंतरराष्ट्रीय स्तरपर देखें तो 2026 में विश्व व्यवस्था तेज़ी से बहुध्रुवीय हो रही है। पारंपरिक महाशक्तियों के साथ-साथ नए क्षेत्रीय और उभरते देश वैश्विक निर्णयों में भूमिका निभा रहे हैं। भारत के पास यह ऐतिहासिक अवसर है कि वह केवल एक अनुसरणकर्ता न रहे, बल्कि नीति-निर्माता के रूप में उभरे। इसके लिए आवश्यक है कि भारत की आंतरिक नीतियाँ, शिक्षा से लेकर नवाचार तक, वैश्विक मानकों के अनुरूप हों। नया वर्ष हमें यह सोचने का अवसर देता है कि हम किस तरह का भारत दुनियाँ के सामने प्रस्तुत करना चाहते हैं।नया साल आत्मनिरीक्षण का भी समय होता है। हमें यह स्वीकार करना होगा कि हमने विकास की दौड़ में कई बार पर्यावरण, सामाजिक समरसता और नैतिक मूल्यों की उपेक्षा की है। 2026 हमें यह याद दिलाता है कि विकास केवल जीडीपी के आंकड़ों से नहीं मापा जा सकता,बल्कि मानव विकास, खुशहाली और प्रकृति के साथ संतुलन से मापा जाता है। यदि हम धरती के साथ अन्याय करेंगे, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें माफ़ नहीं करेंगी। इसलिए नए वर्ष में यह संकल्प आवश्यक है कि विकास और संरक्षण साथ-साथ चलें।

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साथियों बात अगर हम मानवता के स्तर पर भी 2026 एक परीक्षा का वर्ष हो सकता है इसको समझने की करें तो, युद्ध, विस्थापन, शरणार्थी संकट और मानवीय आपदाएँ दुनिया को लगातार चुनौती दे रही हैं। भारत की सभ्यतागत परंपरा वसुधैव कुटुम्बकम् की रही है। नया वर्ष हमें यह अवसर देता है कि हम इस विचार को केवल भाषणों तक सीमित न रखें, बल्कि वैश्विक सहयोग, शांति प्रयासों और मानवीय सहायता में ठोस भूमिका निभाएँ। यही वह रास्ता है, जिससे भारत न केवल शक्तिशाली, बल्कि विश्वसनीय भी बनेगा। व्यक्तिगत स्तर पर 2026 हमें यह सिखाता है कि आत्मकेंद्रित सफलता अब पर्याप्त नहीं है। एक जागरूक नागरिक वही है,जो अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों को भी समझे। मतदान से लेकर कर भुगतान तक, सार्वजनिक संपत्ति के संरक्षण से लेकर सामाजिक सद्भाव तक, ये सभी छोटे-छोटे कर्म मिलकर राष्ट्र के बड़े भविष्य का निर्माण करते हैं। नया वर्ष हमें यह अवसर देता है कि हम अपने आचरण को राष्ट्र निर्माण से जोड़ें।जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं, तो हमें यह भी सोचना होगा कि हमने समाज के सबसे कमजोर वर्गों के लिए क्या किया। क्या हमारी प्रगति समावेशी रही, या कुछ वर्ग पीछे छूटते गए? 2026 में भारत के सामने यह नैतिक चुनौती है कि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की साख तभी मज़बूत होगी, जब वह अपने भीतर सामाजिक न्याय और समान अवसर सुनिश्चित करेगा।नया वर्ष हमें नए लक्ष्य तय करने का मौका देता है,ऐसे लक्ष्य, जो केवल भौतिक उपलब्धियों तक सीमित न हों, बल्कि नैतिक और मानवीय मूल्यों से भी जुड़े हों। 2026 में यह आवश्यक है कि हम अपने दृष्टिकोण को व्यापक बनाएं, संकीर्ण हितों से ऊपर उठें और दीर्घकालिक सोच अपनाएँ। यही वह दृष्टि है, जो भारत को 2047 तक एक विकसित और विश्व-नेतृत्वकारी राष्ट्र बना सकती है।

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अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विशेषण करें तो हम पाएंगे क़ि नया वर्ष 2026एक प्रश्न भी है और एक निमंत्रण भी। प्रश्न यह कि क्या हम केवल बेहतर भविष्य की कामना करेंगे,या उसके लिए आवश्यक कर्म भी करेंगे? निमंत्रण यह कि हम व्यक्तिगत आकांक्षाओं से आगे बढ़कर राष्ट्रीय संकल्प और वैश्विक जिम्मेदारी को अपनाएँ। यदि हम इस वर्ष अपने संकल्पों को ईमानदारी से कर्म में बदल पाए,तो न केवल हमाराव्यक्तिगत जीवन बेहतर होगा, बल्कि भारत भीअंतरराष्ट्रीय मंच पर नई ऊँचाइयों को छुएगा।नववर्ष 2026 हमें यही सिखाता है कि समय बदलने से पहले हमें स्वयं को बदलना होगा।जब नागरिक जागरूक होंगे,समाज संवेदनशील होगा और राष्ट्र संकल्पबद्ध होगा, तभी विज़न 2047 का सपना साकार हो पाएगा। यही नए वर्ष का सार है, यही उसका सत्य और यही उसकी सबसे बड़ी चुनौती भी।

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-संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9284141425

गोरखपुर में सपा नेता अमरेंद्र निषाद पर पटीदार ने किया जानलेवा हमला, बाल-बाल बचे

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के गुलरिहा थाना क्षेत्र के खुटहन खास गांव में मंगलवार को दिनदहाड़े समाजवादी पार्टी के नेता अमरेंद्र निषाद पर गोली चला दी गई। आरोप है कि उनके ही पटीदार ने घर के विवाद में रिवाल्वर से फायर किया। गोली सीने को छूते हुए निकल गई, जिससे अमरेंद्र निषाद बाल-बाल बच गए। घटना से इलाके में अफरा-तफरी और दहशत फैल गई।
जानकारी के अनुसार मंगलवार दोपहर करीब 2:30 बजे अमरेंद्र निषाद अपने घर के दरवाजे पर खड़े थे। इसी दौरान बड़े पिता का बेटा वहां पहुंचा और विवाद के चलते उन पर गोली चला दी। फायरिंग के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। गोली चलने की आवाज सुनकर ग्रामीण मौके पर जुट गए।
घटना के बाद शाम करीब छह बजे अमरेंद्र निषाद गुलरिहा थाने पहुंचे और आरोपी के खिलाफ नामजद तहरीर दी। पुलिस ने मामले को गंभीर मानते हुए जांच शुरू कर दी है और आरोपी की तलाश में दबिश दी जा रही है।
बताया जा रहा है कि दोनों के बीच लंबे समय से पारिवारिक और जमीनी विवाद चल रहा था, जो मंगलवार को हिंसक रूप में सामने आया। पुलिस का कहना है कि साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
अमरेंद्र निषाद पिपराइच विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी रह चुके हैं। उनके पिता जमुना निषाद बसपा सरकार में मंत्री थे और निषाद समाज के प्रमुख नेताओं में गिने जाते थे। घटना के बाद गांव और आसपास के क्षेत्रों में तनाव का माहौल बना हुआ है। समाचार लिखे जाने तक पुलिस आरोपी की सरगर्मी से तलाश कर रही थी।

दिल्ली में नए साल पर 100 चेकपॉइंट, ड्रंक ड्राइव पर जीरो टॉलरेंस

नए साल 2026 का जश्न: दिल्ली में कड़ी सुरक्षा, कनॉट प्लेस और इंडिया गेट पर सख्त ट्रैफिक प्रतिबंध

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) देश-दुनिया के साथ राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली भी नए साल 2026 के स्वागत के लिए तैयार है। जैसे-जैसे घड़ी की सुइयां आधी रात की ओर बढ़ रही हैं, वैसे-वैसे राजधानी के प्रमुख इलाकों—खासतौर पर कनॉट प्लेस और इंडिया गेट—में भीड़ बढ़ने की संभावना को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है और हुड़दंग, नशे में ड्राइविंग या कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी है।
दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने मंगलवार को कनॉट प्लेस का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। नई दिल्ली के डीसीपी देवेश कुमार महला ने बताया कि नए साल की रात को देखते हुए कनॉट प्लेस क्षेत्र में CAPF और दिल्ली पुलिस के भारी बल की तैनाती की गई है। पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी है और संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
2500 से ज्यादा पुलिसकर्मी, 100 चेकपॉइंट
एडिशनल सीपी (ट्रैफिक) जोन-1 मोनिका भारद्वाज के अनुसार, नए साल की शाम दिल्ली भर में लगभग 100 ड्रंक एंड ड्राइव चेकपॉइंट लगाए जाएंगे। कुल मिलाकर करीब 2500 पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे, जिनमें से लगभग 1200 जवान सिर्फ नए साल की रात को ड्यूटी पर होंगे। कनॉट प्लेस सर्कल के भीतर केवल वैध पास वाले वाहनों को ही प्रवेश की अनुमति दी जाएगी।
31 दिसंबर शाम 7 बजे से ट्रैफिक प्रतिबंध
दिल्ली यातायात पुलिस ने स्पष्ट किया है कि 31 दिसंबर शाम 7 बजे से जश्न समाप्त होने तक कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में यातायात प्रतिबंध लागू रहेंगे। मंडी हाउस, पटेल चौक, बंगाली मार्केट, गोल मार्केट, जीपीओ, कस्तूरबा गांधी मार्ग-फिरोजशाह रोड, जय सिंह रोड-बंगला साहिब लेन और विंडसर प्लेस जैसे प्वाइंट्स से आगे कनॉट प्लेस की ओर वाहनों की एंट्री बंद रहेगी।
इंडिया गेट क्षेत्र में भी पाबंदियां
इंडिया गेट पर हर साल उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए ओ-पॉइंट, डब्ल्यू-पॉइंट, एमएलएनपी, सुनहरी मस्जिद गोल चक्कर, राजपथ-रफी मार्ग, मथुरा रोड-पुराना किला रोड, शेर शाह रोड और जाकिर हुसैन मार्ग पर भी ट्रैफिक डायवर्जन या अस्थायी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
वैकल्पिक मार्ग और पार्किंग व्यवस्था
उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम आवाजाही के लिए रिंग रोड, मथुरा रोड, रानी झांसी मार्ग, पचकुइयां रोड, मंदिर मार्ग और मदर टेरेसा क्रिसेंट का उपयोग करने की सलाह दी गई है। पार्किंग ‘पहले आओ–पहले पाओ’ के आधार पर होगी। अनधिकृत पार्किंग पर वाहन जब्ती और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
रेलवे स्टेशन जाने वालों के लिए सलाह
दक्षिण दिल्ली से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन जाने वाले यात्रियों को कनॉट प्लेस से बचते हुए वैकल्पिक मार्ग अपनाने को कहा गया है। पुलिस ने नागरिकों से सार्वजनिक परिवहन का अधिक से अधिक उपयोग करने और घर से समय से पहले निकलने की अपील की है।

हाई कमिश्नर की अचानक वापसी से क्षेत्रीय राजनीति में हलचल

ढाका-नई दिल्ली के रिश्तों में बढ़ी तल्खी, कूटनीतिक संकेत साफ

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)भारत और बांग्लादेश के द्विपक्षीय संबंध इस समय गंभीर तनाव के दौर से गुजर रहे हैं। इसी बीच एक अहम कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। भारत में बांग्लादेश के हाई कमिश्नर रियाज हमीदुल्लाह का अचानक रातोंरात दिल्ली छोड़कर ढाका लौट जाना कई तरह के संकेत दे रहा है। कूटनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बांग्लादेश के प्रमुख अखबार प्रथम आलोक की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के साथ मौजूदा हालात को लेकर हाई कमिश्नर को तत्काल ढाका तलब किया गया। सूत्रों का कहना है कि उन्हें एक अर्जेंट कॉल आया, जिसके बाद बिना किसी पूर्व सूचना के उसी रात वे बांग्लादेश रवाना हो गए। माना जा रहा है कि ढाका में उनसे भारत के साथ बिगड़ते रिश्तों, कूटनीतिक रणनीति और भविष्य की दिशा को लेकर उच्चस्तरीय बातचीत की जाएगी।
दरअसल, दोनों देशों के बीच तनाव की नींव वर्ष 2024 में पड़ी, जब शेख हसीना की सत्ता से विदाई हुई। इसके बाद बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बनी नई सरकार के कार्यकाल में भारत विरोधी रुख खुलकर सामने आया। कई नीतिगत फैसले ऐसे रहे, जिन्हें भारत के खिलाफ और चीन-पाकिस्तान समर्थक माना गया। इसी दौरान बांग्लादेश में सक्रिय कट्टरपंथी तत्वों की बयानबाजी ने भी माहौल को और ज्यादा तनावपूर्ण बना दिया।
हाल ही में बांग्लादेश में उस्मान हादी की गोली मारकर हत्या किए जाने के बाद स्थिति और बिगड़ी। इस घटना को लेकर कई बांग्लादेशी संगठनों ने भारत के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। वहीं भारत ने भी पड़ोसी देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा को लेकर सख्त रुख अपनाया है।
नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि भारत, बांग्लादेश में हिंदू, ईसाई और बौद्ध समुदायों के खिलाफ लगातार हो रही हिंसक घटनाओं से गंभीर रूप से चिंतित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत हालात पर कड़ी नजर बनाए हुए है। मयमनसिंह में एक हिंदू युवक की हालिया हत्या की निंदा करते हुए उन्होंने उम्मीद जताई कि दोषियों को जल्द न्याय के कटघरे में लाया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाई कमिश्नर की आपात वापसी इस बात का संकेत है कि भारत-बांग्लादेश संबंध एक संवेदनशील मोड़ पर हैं। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक गतिविधियां और तेज हो सकती हैं, जो पूरे दक्षिण एशिया की राजनीति पर असर डाल सकती हैं।

बिहार के सरकारी अस्पतालों में बड़ा बदलाव: डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर पहली बार लगेगी रोक


पटना/बिहार (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। राज्य के सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों के लिए यह बड़ी राहत की खबर है। बिहार सरकार ने पहली बार स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टर अब प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे। यह अहम फैसला सरकार के महत्वाकांक्षी कार्यक्रम ‘सात निश्चय-3’ के तहत लिया गया है, जिसका उद्देश्य सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत और भरोसेमंद बनाना है।
सरकार का मानना है कि डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगने से वे अस्पताल में पूरा समय देंगे, जिससे गरीब और जरूरतमंद मरीजों को समय पर और बेहतर इलाज मिल सकेगा। लंबे समय से यह शिकायत सामने आती रही है कि कई डॉक्टर अस्पताल की ड्यूटी के दौरान या बाद में निजी क्लिनिक में अधिक समय देते हैं, जिससे सरकारी अस्पतालों में मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है।
सात निश्चय-3 के पांचवें संकल्प ‘सुलभ स्वास्थ्य-सुरक्षित जीवन’ के तहत सरकार ने दूरदराज के इलाकों में सेवा देने वाले चिकित्सकों के लिए विशेष प्रोत्साहन योजना की घोषणा की है। ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों में बेहतर इलाज देने वाले डॉक्टरों को वेतन के अलावा अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
सरकार के 2025-26 के स्वास्थ्य रोडमैप में यह भी तय किया गया है कि प्रखंड स्तर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को स्पेशलिटी हॉस्पिटल के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां कुछ विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती होगी। वहीं जिला अस्पतालों को सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के रूप में अपग्रेड किया जाएगा, ताकि गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मेडिकल कॉलेजों पर निर्भरता कम हो सके।
इसके साथ ही राज्य में नए मेडिकल कॉलेज अस्पतालों की स्थापना और मौजूदा संस्थानों में गुणवत्ता सुधार के लिए लोक-निजी भागीदारी (PPP मॉडल) को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार प्रतिष्ठित निजी अस्पताल समूहों को भी बिहार में निवेश के लिए आमंत्रित करेगी।
यह फैसला बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है, जिससे आम जनता को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

11 हजार वोल्ट हाईटेंशन लाइन की चपेट में आया ट्रैक्टर, चालक की मौके पर मौत

बहराइच (राष्ट्र की परम्परा)। कोतवाली मूर्तिहा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत नौबना में एक दर्दनाक हादसे में ट्रैक्टर चालक की 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन बिजली लाइन की चपेट में आने से मौके पर ही मौत हो गई। घटना से क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है।

जानकारी के अनुसार, युवक ट्रैक्टर से मिट्टी गिराने का कार्य कर रहा था। इसी दौरान ऊपर से लटक रहा हाई वोल्टेज बिजली तार ट्रैक्टर के संपर्क में आ गया, जिससे करंट फैल गया और चालक गंभीर रूप से झुलस गया। हादसा इतना भीषण था कि युवक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

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घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंच गए और तुरंत पुलिस तथा बिजली विभाग को जानकारी दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है तथा मामले की जांच शुरू कर दी है।

ग्रामीणों ने लटकते हाईटेंशन तारों को हादसे का कारण बताते हुए बिजली विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है। लोगों ने मांग की है कि ऐसे खतरनाक बिजली तारों को जल्द दुरुस्त किया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

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