Wednesday, June 24, 2026
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महाराजगंज में फर्जी अस्पतालों का जाल, अवैध इलाज से मरीजों की जान जोखिम में

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जिले में फर्जी अस्पतालों और अवैध नर्सिंग होम का जाल लगातार फैलता जा रहा है, जो सीधे तौर पर मरीजों की जान के लिए खतरा बन चुका है। इलाज के नाम पर संचालित इन कथित अस्पतालों में न तो निर्धारित मानक सुविधाएं मौजूद हैं और न ही योग्य चिकित्सक, इसके बावजूद धड़ल्ले से मरीजों का उपचार किया जा रहा है।

बिना पंजीकरण और योग्य डॉक्टरों के चल रहे अस्पताल

सूत्रों के अनुसार, महाराजगंज के ग्रामीण और शहरी इलाकों में कई ऐसे अस्पताल संचालित हैं, जिनके पास स्वास्थ्य विभाग का वैध पंजीकरण तक नहीं है। इन संस्थानों में न प्रशिक्षित डॉक्टर हैं और न ही योग्य पैरामेडिकल स्टाफ। झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा गंभीर बीमारियों का इलाज किया जा रहा है, जिससे मरीजों की हालत बिगड़ जाती है और उन्हें आनन-फानन में जिला अस्पताल या गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर करना पड़ता है।

इलाज के नाम पर भारी वसूली

स्थानीय लोगों का आरोप है कि फर्जी अस्पतालों में जांच, दवा और भर्ती के नाम पर मरीजों से मोटी रकम वसूली जाती है। गरीब और अशिक्षित लोग बेहतर इलाज की उम्मीद में यहां पहुंचते हैं, लेकिन गलत उपचार और लापरवाही के चलते उनकी जान जोखिम में पड़ जाती है। कई मामलों में मरीज की मौत के बाद अस्पताल संचालक ताला बंद कर फरार हो जाते हैं।

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स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि स्वास्थ्य विभाग की निगरानी आखिर कहां है? बिना लाइसेंस वर्षों से संचालित हो रहे इन अस्पतालों पर कार्रवाई न होना प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। कभी-कभार की कार्रवाई के बाद फिर वही अवैध गतिविधियां शुरू हो जाना आम बात बन गई है।

सघन कार्रवाई की मांग

जिले के जागरूक नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि फर्जी अस्पतालों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाए, दोषियों पर मुकदमा दर्ज हो और अवैध रूप से संचालित अस्पतालों को तत्काल सील किया जाए।

जब इलाज ही मरीजों के लिए खतरा बन जाए, तो यह केवल स्वास्थ्य व्यवस्था की विफलता नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन की जवाबदेही का भी गंभीर सवाल है। समय रहते यदि फर्जी अस्पतालों पर रोक नहीं लगी, तो महाराजगंज में यह अवैध जाल और भी कई जिंदगियों को निगल सकता है।

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3 जनवरी को मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा की 122 वीं जयंती पर मुख्यमंत्री आभार यात्रा

राज्य भर के हजारों आंदोलनकारी भाग लेंगे

रांची (राष्ट्र की परम्परा) हेमंत सोरेन सरकार के द्वारा आंदोलनकारियों के आश्रितों को 5% नौकरियों में क्षैतिज आरक्षण देने एवं सम्मान पत्र वगैरह दिए जाने को लेकर झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा द्वारा 3 जनवरी को मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा की 122 वीं जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री आभार यात्रा किया जाएगा.
यह यात्रा मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा के चुटिया स्थित आवासीय परिसर बहुबाजार चौक से चर्च रोड़ होते अल्बर्ट एक्का चौक पहुंचेंगे यहां से परंपरागत वाद्य यंत्रों ,नृत्य – गीत- संगीत के साथ सभी झारखंड आंदोलनकारी हाथों में लाल हरा झंडा लिए कचहरी चौक जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंचेंगे. यहां पहुंच कर बारी-बारी से सभी आंदोलनकारी पुष्पांजलि अर्पित करेंगे. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सत्ता रूढ़ दल झामुमो के मुख्य सचेतक एवं झारखंड आंदोलनकारियों के अगुवा मथुरा प्रसाद महतो भाग लेंगे. इसके अतिरिक्त पूर्व सांसद भुवनेश्वर प्रसाद मेहता, वृहत अलग राज्य के आंदोलनकारी ओडिसा से अमीर हसन व पश्चिम बंगाल से अजीत महतो भाग लेंगे. कार्यक्रम में राज्य के प्रत्येक जिले से हजारों हजार की संख्या में झारखंड आंदोलनकारी अपने साथ परंपरागत अर्थशास्त्र लिए रहेंगे एवं लाल- हरा मिश्रित झंडा लेकर ,अपनी पूरी व्यवस्था के साथ आएंगे.
उक्त जानकारी झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के संस्थापक प्रधान सचिव पुष्कर महतो ने दी. उन्होंने कहा कि 3 जनवरी को मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा के साथ भारत की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की जयंती मनाते हुए श्रद्धांजलि अर्पित तथा वार्षिक कैलेंडर जारी किया जाएगा. प्रत्येक जिले के आंदोलनकारी मुख्यमंत्री को आभार व्यक्त करते हुए सम्मान भी भेंट करेंगे।

रांची में जजों का द्वितीय ऑल इंडिया बैडमिंटन टूर्नामेंट 3–4 जनवरी को, नौ हाईकोर्ट के न्यायाधीश लेंगे भाग

रांची (राष्ट्र की परम्परा)। झारखंड उच्च न्यायालय के तत्वावधान में जजों का द्वितीय ऑल इंडिया बैडमिंटन टूर्नामेंट आगामी 3 और 4 जनवरी 2026 को रांची में आयोजित किया जाएगा। यह राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता खेलगांव परिसर स्थित ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव इंडोर स्टेडियम में संपन्न होगी।

देशभर के न्यायाधीश दिखाएंगे खेल प्रतिभा

इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में देश के 9 उच्च न्यायालयों के 30 से अधिक न्यायाधीश भाग लेंगे। प्रतियोगिता का उद्देश्य न्यायपालिका से जुड़े पदाधिकारियों के बीच खेल भावना, आपसी सौहार्द, शारीरिक फिटनेस और मानसिक ऊर्जा को बढ़ावा देना है।

चार श्रेणियों में होंगे मुकाबले

टूर्नामेंट के दौरान मेन सिंगल्स, मेन डबल्स, वूमेन सिंगल्स और मिक्स्ड डबल्स श्रेणियों में मुकाबले खेले जाएंगे। प्रतिभागी न्यायाधीश अपने खेल कौशल और प्रतिस्पर्धात्मक भावना का प्रदर्शन करेंगे।

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आयोजन की सभी तैयारियां पूरी

झारखंड उच्च न्यायालय की ओर से प्रतियोगिता के सफल और सुचारु संचालन के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। खेलगांव परिसर में अंतरराष्ट्रीय मानकों के बैडमिंटन कोर्ट, खिलाड़ियों के लिए विश्राम स्थल, चिकित्सा सुविधा, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

विजेताओं को किया जाएगा सम्मानित

प्रतियोगिता के समापन समारोह में विजेता और उपविजेता खिलाड़ियों को सम्मानित किया जाएगा। जिला प्रशासन द्वारा प्रतिभागियों और आगंतुकों के लिए बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं, जिससे यह आयोजन गरिमापूर्ण और सफल बन सके।

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यज्ञ में छिपा ज्ञान–विज्ञान का अद्भुत संगम: भारतीय संस्कृति की वैज्ञानिक चेतना

कैलाश सिंह
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। भारतीय सनातन संस्कृति में यज्ञ को केवल धार्मिक कर्मकांड मानना उसकी गहराई को सीमित करना है। वास्तव में यज्ञ जीवन, प्रकृति और ब्रह्मांड के बीच संतुलन स्थापित करने की एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है। आधुनिक युग में जब हर परंपरा को तर्क और विज्ञान की कसौटी पर परखा जा रहा है, तब यज्ञ की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ जाती है। यज्ञ आस्था, ज्ञान और विज्ञान का ऐसा अद्भुत संगम है, जिसे समझे बिना भारतीय सभ्यता को समझना अधूरा है।

वेदों में यज्ञ का वैज्ञानिक दृष्टिकोण

वेदों में यज्ञ को जीवन का आधार माना गया है। ऋग्वेद से लेकर यजुर्वेद तक, यज्ञ को प्रकृति के नियमों से जोड़कर देखा गया है। यज्ञ का उद्देश्य केवल देव आराधना नहीं, बल्कि पर्यावरण की शुद्धि, मानसिक संतुलन और सामाजिक समरसता है। यही अवधारणा आज के विज्ञान में इकोलॉजिकल बैलेंस और मेंटल वेलबीइंग के रूप में स्वीकार की जा रही है।

यज्ञ और पर्यावरण शुद्धि का विज्ञान

वैज्ञानिक दृष्टि से यज्ञ में प्रयुक्त घी, औषधीय वनस्पतियां और हवन सामग्री दहन के बाद वायुमंडल में ऐसे तत्व छोड़ती हैं, जो वायु शुद्धि में सहायक माने जाते हैं। कई शोध संकेत देते हैं कि यज्ञ से उत्पन्न धुआं कुछ हद तक हानिकारक जीवाणुओं को निष्क्रिय करता है। प्राचीन काल में इसी कारण यज्ञ को महामारी, पर्यावरण असंतुलन और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने का एक प्रभावी माध्यम माना गया।

मंत्र, ध्वनि और मानसिक स्वास्थ्य

यज्ञ का एक महत्वपूर्ण पक्ष मंत्र हैं। मंत्र केवल शब्द नहीं, बल्कि ध्वनि-तरंगें हैं। विज्ञान भी मानता है कि ध्वनि का सीधा प्रभाव मन और वातावरण पर पड़ता है। यज्ञ के दौरान उच्चारित मंत्रों की विशेष लय और आवृत्ति मानसिक एकाग्रता बढ़ाने और तनाव कम करने में सहायक होती है। आज योग, मेडिटेशन और साउंड थेरेपी के रूप में जिस विज्ञान को अपनाया जा रहा है, उसकी जड़ें वैदिक मंत्रों और यज्ञ परंपरा में स्पष्ट दिखाई देती हैं।

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सामाजिक समरसता का संदेश

यज्ञ सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसका मूल भाव है—“इदं न मम”, अर्थात यह मेरा नहीं है। यज्ञ व्यक्तिगत स्वार्थ के बजाय समष्टि कल्याण की भावना को प्रोत्साहित करता है। उपभोक्तावादी युग में, जहां प्रकृति का अंधाधुंध दोहन हो रहा है, यज्ञ त्याग, संतुलन और सहभागिता का संदेश देता है।

परंपरा और विज्ञान का सेतु

आज आवश्यकता है कि यज्ञ को न तो अंधविश्वास के रूप में देखा जाए और न ही आधुनिक विज्ञान के विरोध में खड़ा किया जाए। यज्ञ को उसके मूल स्वरूप—ज्ञान और विज्ञान के संगम—के रूप में समझना समय की मांग है। जब भारतीय परंपराओं को वैज्ञानिक दृष्टि से समझा जाएगा, तभी भारतीय ज्ञान परंपरा का वास्तविक गौरव पुनः स्थापित होगा।

यज्ञ अतीत की धरोहर मात्र नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा दिखाने वाला प्रकाश है। यह सिखाता है कि आस्था और विज्ञान एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। यही यज्ञ का संदेश है और यही भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी शक्ति।

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समकालीन भारत और विश्व: संक्रमण काल की तस्वीर

भारत और विश्व इस समय एक ऐसे दौर से गुजर रहे हैं, जहाँ पुराने ढाँचे तेजी से बदल रही वास्तविकताओं से टकरा रहे हैं। यह केवल नए वर्ष का आरंभ नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक प्राथमिकताओं की पुनर्समीक्षा का समय है।
देश के भीतर सामाजिक और धार्मिक गतिविधियाँ लगातार जनजीवन को प्रभावित कर रही हैं। प्रयागराज का माघ मेला आस्था का आयोजन होने के साथ-साथ सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक निरंतरता का उदाहरण है। करोड़ों लोगों की सहभागिता यह दर्शाती है कि आधुनिकता के दबाव के बावजूद भारतीय समाज अपनी जड़ों से जुड़ा हुआ है।
आर्थिक मोर्चे पर संकेत मिश्रित हैं। उपभोक्ता बाजार की सक्रियता और औद्योगिक उत्पादन में बढ़ोतरी उम्मीद जगाती है, लेकिन महँगाई, बेरोजगारी और असमान विकास जैसी चुनौतियाँ भी उतनी ही वास्तविक हैं। आवश्यक है कि विकास के लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे।
वैश्विक परिदृश्य कहीं अधिक अस्थिर दिखाई देता है। जलवायु संकट, तकनीकी बदलाव और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी नई चुनौतियों ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता को और स्पष्ट कर दिया है। इसके बावजूद, भू-राजनीतिक तनाव और क्षेत्रीय संघर्ष वैश्विक शांति के प्रयासों को कमजोर कर रहे हैं।
भारत के लिए यह समय अवसर और सावधानी—दोनों का है। स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक कल्याण से जुड़ी पहलों में हुए सुधार सकारात्मक संकेत देते हैं, लेकिन इनकी निरंतरता और प्रभावशीलता सुनिश्चित करना नीति-निर्माताओं की बड़ी जिम्मेदारी है।
खेल और संस्कृति के क्षेत्र में बढ़ती उपलब्धियाँ देश की सॉफ्ट पावर को मजबूती दे रही हैं। युवा प्रतिभाओं का उभार यह संकेत देता है कि आने वाला समय नई ऊर्जा और नई सोच का होगा।
संक्रमण काल की यह तस्वीर स्पष्ट संदेश देती है। चुनौतियाँ गंभीर हैं, लेकिन संभावनाएँ भी कम नहीं। 2026 की शुरुआत यह अपेक्षा करती है कि नीतियाँ केवल आंकड़ों तक सीमित न रहें, बल्कि सामाजिक न्याय, समावेशन और दीर्घकालिक स्थिरता को केंद्र में रखें। यही रास्ता भारत और विश्व दोनों के लिए आगे बढ़ने का सही विकल्प होगा।

लोकप्रिय अस्पताल में भर्ती मरीज ने दूसरी मंजिल से कूदकर दी जान, परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप

मेरठ (राष्ट्र की परम्परा)। नौचंदी थाना क्षेत्र स्थित लोकप्रिय अस्पताल में शुक्रवार रात एक दर्दनाक घटना सामने आई। खून की गंभीर कमी के चलते आईसीयू में भर्ती मरीज ने अस्पताल की दूसरी मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया और आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए।

मृतक की पहचान हाईडिल कॉलोनी जेल चुंगी निवासी संजय चौधरी (46) के रूप में हुई है। वह बुधवार 31 दिसंबर से अस्पताल के आईसीयू में भर्ती थे।

खून की कमी के चलते कराया गया था भर्ती

मृतक के साले और बिजली विभाग में लिपिक प्रदीप डोगरा ने बताया कि संजय चौधरी शहर के माइक्रोटेक सर्विस सेंटर में नौकरी करते थे। लंबे समय से कमजोरी की शिकायत पर डॉक्टर को दिखाया गया, जहां जांच में उनका हीमोग्लोबिन मात्र 4 प्रतिशत पाया गया। इसके बाद डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

बाथरूम की खिड़की तोड़कर लगाई छलांग

पुलिस के अनुसार, शुक्रवार रात करीब साढ़े नौ बजे संजय चौधरी ने बाथरूम जाने की बात कही। वह अस्पताल की दूसरी मंजिल पर स्थित बाथरूम में गए और शीशे वाली खिड़की तोड़कर नीचे कूद गए। नीचे तैनात गार्ड ने शोर मचाया, जिसके बाद डॉक्टरों और स्टाफ ने उन्हें तत्काल आईसीयू में भर्ती कराया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

परिजनों का हंगामा, अस्पताल पर लापरवाही का आरोप

घटना की सूचना मिलते ही परिजन अस्पताल पहुंचे और जमकर हंगामा किया। परिजनों ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए लापरवाही का आरोप लगाया। मृतक की पत्नी ज्योति ने अस्पताल कर्मचारियों पर गलत दवा देने का भी आरोप लगाया।

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पोस्टमार्टम को लेकर हुआ विवाद

सूचना पर नौचंदी थाना प्रभारी और सीओ सिविल लाइन अभिषेक तिवारी मौके पर पहुंचे। परिजनों ने पहले पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया, लेकिन पुलिस अधिकारियों के समझाने के बाद देर रात पोस्टमार्टम के लिए सहमति बनी।

सीओ अभिषेक तिवारी ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और परिजनों की तहरीर के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

घटना से पहले सामान्य था व्यवहार

प्रदीप डोगरा ने बताया कि शुक्रवार रात करीब नौ बजे उन्होंने संजय चौधरी से मुलाकात की थी। उन्होंने खाना खाया और सामान्य बातचीत की। किसी भी तरह की बेचैनी या परेशानी के संकेत नहीं दिखे थे।

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नदी के किनारे पड़े कूड़े कबाड़े मे पूजा पाठ करने पर मजबूर श्रद्धांलु

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
जहाँ देश की मोदी सरकार एवं प्रदेश की योगी सरकार द्वारा स्वछता जागरूकता के लिए अनेक योजनाए चलाई जा रही है। वही बरहज मे सरयू नदी के किनारे कूड़े कबाड़ का अम्बार लगा हुआ है, सफाई नदारद है।
सरयू नदी तट पर बसा बरहज जो धार्मिक मेले के लिए प्रसिद्ध है, यहाँ दूर दूर से श्रद्धालू सरयू नदी की जल धारा मे स्नान कर पूजा अर्चना करते है। कार्तिक पूर्णिमा हो, माघी अमावश्या का स्नान हो या श्रावण मास का स्नान, लोगो द्वारा सरयू नदी मे स्नान किया जाता है। धार्मिक नगरी बरहज के मेले मे भारी भीड़ होती है दूर दूर से लोग नहाने आते है पूजा पाठ करके, मेले मे खरीददारी करते हुए अपने घर को चले जाते है। आस्था व श्रद्धा के लिए प्रसिद्ध सरयू तट पर कूड़ा कबाड़ा फैला हुआ है। जो स्वछता को मुँह चिढ़ा रहा है। और नगर प्रशासन मूक दर्शक बना हुआ है।

घूमन्तु जिंदगी और पेट के लिए रोजगार

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
भारत मे ऐसे कई प्रदेश है जहाँ कुछ जातियों के लोग घूमन्तु जिंदगी जीने पर मजबूर है, आज यहाँ तो कल कही और। पेट के लिए दूर प्रदेशो मे अपना डेरा डाल कर रोजी रोटी के जुगाड़ मे लगे रहते है।
कोई खिलौना बेच कर, तो कोई ठंडे वस्त्र को पीठ पर लादकर घूम घूम कर बेचते है और अपना और अपने परिवार का पेट पालते।
आज कल बरहज नगर के मुख्य मार्ग से सटे लोहे के औजार बनाते इन्हे देखा जा रहा है। मध्यप्रदेश के सागर जिले से कई झुण्ड मे आए इन घूमन्तु लोगो को उत्तर प्रदेश के अनेक जनपदो मे लोहे का औजार बनाते देखा जा रहा है। पूछने पर पत्ता चला कि ए लोग सड़क के किनारे अपना डेरा डाल कर रहते है और अपना रोजगार करते है। बरहज मे इस कड़ाके कि ठंड मे ये लोग बरहज देवरिया मार्ग के किनारे टेंट डालकर लोहे का औजार बनाने का काम कर रहे है। इन लोगो का एक से दो माह तक ही किसी जिले मे ठिकाना होता।
लोगो का कहना है कि ज़ब तक धंधा चलता है तबतक हम लोग उस स्थान पर टिके रहते है, अगर ठप हुआ तो डेरा डंडा उठाकर कही और चल देते है। इस तरह से हम लोगो कि घूमन्तु जिंदगी सड़को के किनारे कटती रहती है पेट के लिए। भारत मे ऐसे कई प्रदेश है जहाँ के लोगो द्वारा इस प्रकार कि जिंदगी जीने पर मजबूर है।

निंदा से डरे बिना काम करते रहना चाहिए: सावित्रीबाई फुले

मराठी कवयित्री, भारत में सामाजिक सुधार आंदोलन की नायिका, भारत की प्रथम महिला शिक्षिका, शोषितों-वंचितों एवं पिछड़ गए लोगों की सशक्त आवाज, नारी शिक्षा को समर्पित सावित्रीबाई फुले जी की जयंती पर स्मरण कर रहे हैं- पुनीत मिश्र

भारतीय समाज के इतिहास में सावित्रीबाई फुले का नाम उस क्रांतिकारी चेतना का प्रतीक है, जिसने अंधकार, अज्ञान और भेदभाव के विरुद्ध शिक्षा का दीप जलाया। वे केवल एक संवेदनशील कवयित्री ही नहीं थीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की सशक्त वाहक भी थीं। उनका जीवन संघर्ष, साहस और सामाजिक न्याय के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का अनुपम उदाहरण है।
उन्नीसवीं सदी का भारत रूढ़ियों, जातिगत भेदभाव और स्त्री-वंचना से जकड़ा हुआ था। ऐसे कठिन समय में सावित्रीबाई फुले ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम माना। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि जब तक स्त्री और वंचित वर्ग शिक्षित नहीं होंगे, तब तक समाज की प्रगति अधूरी रहेगी। इसी सोच के साथ उन्होंने बालिकाओं और दलित समाज के बच्चों के लिए विद्यालयों की स्थापना की, जो उस दौर में एक ऐतिहासिक और साहसिक कदम था।
सावित्रीबाई फुले का संघर्ष आसान नहीं था। समाज ने उनका तीखा विरोध किया, अपमानित किया और उनके मार्ग में अनेक बाधाएं खड़ी कीं। विद्यालय जाते समय उन पर कीचड़ और गोबर फेंका गया, लेकिन वे विचलित नहीं हुईं। वे अपने साथ अतिरिक्त साड़ी रखती थीं और हर अपमान को सहते हुए भी शिक्षा का कार्य निरंतर करती रहीं। यही कारण है कि उनका कथन कि “निंदा से डरे बिना काम करते रहना चाहिए।”आज भी सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है।
वे एक जागरूक कवयित्री भी थीं। उनकी कविताओं में सामाजिक असमानता के विरुद्ध तीखा प्रतिरोध, स्त्री चेतना और मानवीय गरिमा की पुकार स्पष्ट दिखाई देती है। उनके विचार विधवा पुनर्विवाह, बाल विवाह विरोध और छुआछूत जैसी कुरीतियों के खिलाफ समाज को झकझोरते हैं।
नारी शिक्षा के क्षेत्र में सावित्रीबाई फुले का योगदान अतुलनीय है। उन्होंने सिद्ध किया कि शिक्षित नारी केवल स्वयं का ही नहीं, बल्कि पूरे समाज का भविष्य संवार सकती है। आज महिला सशक्तिकरण, समान अधिकार और सामाजिक न्याय की जो चेतना दिखाई देती है, उसकी जड़ें सावित्रीबाई फुले के संघर्ष और विचारों में ही निहित हैं।
सावित्रीबाई फुले की जयंती हमें केवल उनके व्यक्तित्व को याद करने का अवसर नहीं देती, बल्कि उनके विचारों को आत्मसात करने का संदेश भी देती है। उनका जीवन यह सिखाता है कि सामाजिक परिवर्तन के मार्ग में आलोचना और विरोध अवश्य आते हैं, लेकिन यदि लक्ष्य मानवता, समानता और शिक्षा हो, तो निडर होकर निरंतर कर्म करते रहना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।

संगम तट पर आस्था का महासंगम: माघ मेला शुरू, पौष पूर्णिमा के पहले स्नान पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

प्रयागराज (राष्ट्र की परम्परा)। संगम की पावन रेती पर बसे तंबुओं के नगर में माघ मेले का विधिवत शुभारंभ हो गया है। पहले मुख्य स्नान पर्व पौष पूर्णिमा के अवसर पर लाखों श्रद्धालु संगम तट पर एकत्र होकर गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। स्नान का क्रम लगातार जारी है और पूरा मेला क्षेत्र भक्तिरस में सराबोर नजर आ रहा है।

44 दिनों तक चलने वाले इस ऐतिहासिक माघ मेले के दौरान 12 से 15 करोड़ श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आने की संभावना है। वहीं, करीब 20 लाख कल्पवासी तीन जनवरी से एक फरवरी तक संगम तट पर कल्पवास करेंगे।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए चाक-चौबंद इंतजाम

मेला क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं। 10 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती के साथ ही एंटी टेररिस्ट स्क्वायड (ATS) की टीमें भी सुरक्षा मोर्चे पर डटी हैं। मेला क्षेत्र में 17 अस्थायी थाने और 42 पुलिस चौकियां स्थापित की गई हैं।

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सात सेक्टरों में बंटा माघ मेला, टेंट सिटी मॉडल पर विकास

माघ मेला क्षेत्र को सात सेक्टरों में विभाजित किया गया है। महाकुंभ मॉडल पर आधारित टेंट सिटी की तर्ज पर मेले का विकास किया गया है। लगभग 800 हेक्टेयर में फैले मेला क्षेत्र में 126 किलोमीटर लंबे मार्ग चेकर्ड प्लेट से तैयार किए गए हैं।

नावों पर एलईडी लाइट से सजी रंगीन छतरियां, संगम जल में सात रंगों की रोशनी वाले फव्वारे और घाटों पर कलर-कोडेड चेंजिंग रूम रात में अलौकिक दृश्य प्रस्तुत कर रहे हैं।

पौष पूर्णिमा से कल्पवास का आरंभ

पौष पूर्णिमा के साथ ही कल्पवासियों का व्रत प्रारंभ हो गया है। आचार्य चौक, दंडीवाड़ा, खाक चौक, तीर्थ पुरोहितों और प्रमुख आध्यात्मिक संस्थाओं के शिविर पूरी तरह तैयार हैं। पहले पुण्य स्नान के साथ संगम तट पर आस्था, परंपरा और संस्कृति का अनुपम संगम देखने को मिल रहा है।

शहर से मेला क्षेत्र तक रंगीन संकेतक और सुगम यातायात

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शहर से मेला क्षेत्र तक अलग-अलग रंगों के संकेतक बोर्ड और हेल्प डेस्क लगाए गए हैं। परिवहन व्यवस्था के तहत 3800 रोडवेज बसें, 75 ई-बसें और 500 से अधिक ई-रिक्शा तैनात किए गए हैं।

अग्नि सुरक्षा के लिए 17 फायर स्टेशन, जबकि स्वच्छता व्यवस्था के लिए 3300 सफाईकर्मी मेला क्षेत्र में तैनात हैं।

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महाकुंभ अनुभवों पर आधारित व्यवस्थाएं

महाकुंभ के अनुभवों के आधार पर इस बार माघ मेले की व्यवस्थाएं तैयार की गई हैं। संगम क्षेत्र को जोड़ने के लिए सात पांटून पुल, जबकि फाफामऊ क्षेत्र में दो अतिरिक्त पांटून पुल बनाए गए हैं। सभी पुलों को दिशा-विशेष के अनुसार आरक्षित किया गया है, जिससे श्रद्धालुओं की आवाजाही सुचारू बनी रहे।

ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर: ट्रंप की धमकी पर भड़के ईरानी विदेश मंत्री, बोले— “हमारी सेनाओं को पता है कहां हमला करना है”

तेहरान/वॉशिंगटन (राष्ट्र की परम्परा)। ईरान में महंगाई और सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच अमेरिका और ईरान के रिश्तों में एक बार फिर तीखा तनाव देखने को मिल रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी के बाद ईरान ने दो टूक जवाब देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि उसकी संप्रभुता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

ईरान में शुक्रवार (2 जनवरी 2026) को लगातार पांचवें दिन प्रदर्शन जारी रहे। अब तक इन प्रदर्शनों में 6 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हालात देश के करीब 21 राज्यों तक फैल चुके हैं। इसे 2022 के बाद ईरान का सबसे बड़ा विरोध-प्रदर्शन बताया जा रहा है।

ट्रंप की चेतावनी से बढ़ी चिंता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाता है तो अमेरिका हस्तक्षेप के लिए तैयार है। ट्रंप के इस बयान को ईरानी नेतृत्व ने देश के आंतरिक मामलों में सीधा दखल बताया है।

अमेरिकी दखल से क्षेत्र में अस्थिरता: ईरान

ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिकी हस्तक्षेप से पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता फैल सकती है और इससे अमेरिकी हितों को भी भारी नुकसान होगा।

वहीं, सुप्रीम लीडर के करीबी सलाहकार अली शमखानी ने ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा को “रेड लाइन” करार दिया।

“हमारी सेनाओं को पता है कहां हमला करना है”

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ट्रंप के बयान को “लापरवाह और खतरनाक” बताया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना लोगों का अधिकार है, लेकिन हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति पर हमले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।
अराघची ने सख्त शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा,

“ईरान के आंतरिक मामलों में किसी भी तरह के हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं किया जाएगा। हमारी सेनाएं पूरी तरह तैयार हैं और यदि ईरानी संप्रभुता का उल्लंघन हुआ तो उन्हें ठीक-ठीक पता है कि कहां हमला करना है।”

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21 राज्यों में फैली हिंसा

ईरान की सेमी-ऑफिशियल न्यूज एजेंसी फार्स के मुताबिक कई शहरों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। पुलिस पर पत्थर फेंके गए, गाड़ियों में आग लगाई गई और कुछ स्थानों पर मोलोटोव कॉकटेल का इस्तेमाल हुआ। हालात पर काबू पाने के लिए सुरक्षा बलों ने कई लोगों से हथियार भी जब्त किए हैं।

महंगाई बनी विरोध की सबसे बड़ी वजह

विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान में जारी इस विरोध-प्रदर्शन की जड़ में गंभीर आर्थिक संकट है। देश में महंगाई दर 42.2 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि खाद्य पदार्थों की कीमतों में 72 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यही वजह है कि आम जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर हुई है।

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मौसम की मार: उत्तर प्रदेश में प्राथमिक विद्यालयों पर अस्थायी विराम

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश में जारी कड़ाके की ठंड और घने कोहरे ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। शीतलहर के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए राज्य सरकार ने एहतियाती कदम उठाते हुए प्रदेश भर में कक्षा 1 से 8 तक के सभी परिषदीय, मान्यता प्राप्त एवं निजी विद्यालयों को 5 जनवरी तक बंद रखने का निर्णय लिया है। यह आदेश विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जारी किया गया है।


पिछले कुछ दिनों से उत्तर प्रदेश के कई जिलों में तापमान लगातार गिर रहा है। सुबह और देर रात घना कोहरा दृश्यता को बेहद कम कर रहा है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है। ऐसे हालात में छोटे बच्चों का स्कूल जाना जोखिम भरा माना जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, मौसम की स्थिति सामान्य होने के बाद ही विद्यालयों को पुनः खोलने पर निर्णय लिया जाएगा।

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हालांकि, कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए जिलाधिकारी अपने-अपने जिलों की परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने के लिए अधिकृत हैं। कई जिलों में ऑनलाइन कक्षाओं का विकल्प अपनाने के निर्देश भी दिए गए हैं ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो। शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रबंधन को यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान पाठ्यक्रम और समय-सारिणी संतुलित रहे।
मौसम विभाग की मानें तो आगामी दिनों में ठंड और कोहरे से फिलहाल राहत मिलने की संभावना कम है। पश्चिमी विक्षोभ और उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवाओं के कारण शीतलहर का असर बना रह सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने, गर्म कपड़े पहनने और अनावश्यक बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है।
प्रदेश सरकार का यह फैसला अभिभावकों के लिए भी राहत भरा है, क्योंकि इससे बच्चों को ठंड से होने वाली बीमारियों से बचाया जा सकेगा। प्रशासन ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि आदेश का कड़ाई से पालन कराया जाए।

खिचड़ी मेले को भव्य, सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने में प्रशासन जुटा


डीएम की अध्यक्षता में तैयारियों की समीक्षा, श्रद्धालुओं की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता


महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।जनपद की धार्मिक आस्था, सामाजिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक खिचड़ी मेला इस वर्ष और अधिक भव्य, सुरक्षित व व्यवस्थित स्वरूप में आयोजित किया जाएगा। इसे लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है। इसी क्रम में नगर पंचायत चौक कार्यालय में जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा की अध्यक्षता में एक अहम समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें मेले से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं की विस्तार से समीक्षा की गई।
बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि खिचड़ी मेला केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा पर्व है। इसलिए किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश देते हुए कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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श्रद्धालुओं के लिए हेल्थ कैंप, खोया-पाया केंद्र, जूता-चप्पल घर, शुद्ध पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाओं की पुख्ता व्यवस्था के निर्देश दिए गए। निचलौल और महराजगंज मार्ग पर आकर्षक स्वागत द्वार बनाए जाने तथा मेला क्षेत्र को भव्य सजावट से सुसज्जित करने पर भी जोर दिया गया।
सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर डीएम ने स्पष्ट निर्देश दिए कि मेला क्षेत्र में वाहनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। निचलौल और झंझनपुर मार्ग पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया जाएगा तथा पर्याप्त पार्किंग स्थलों के साथ दो पार्किंग स्थलों को आपात स्थिति के लिए आरक्षित रखा जाएगा। भीड़ नियंत्रण हेतु बैरीकेडिंग की सुदृढ़ व्यवस्था की जाएगी।
स्वच्छता के लिए तीन शिफ्ट में सफाई कर्मियों की तैनाती, महिला-पुरुषों के लिए पर्याप्त शौचालय और नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। विद्युत सुरक्षा के तहत खंभों पर इंसुलेशन, 24 घंटे निर्बाध बिजली, पीए सिस्टम, सीसीटीवी निगरानी और एकीकृत कंट्रोल रूम की स्थापना का निर्णय लिया गया।
बैठक के बाद जिलाधिकारी ने मंदिर परिसर का स्थलीय निरीक्षण कर तहबाजारी और झूलों की स्थापना में सभी सुरक्षा मानकों के कड़ाई से पालन के निर्देश दिए। बैठक में एडीएम डॉ. प्रशांत कुमार, एएसपी सिद्धार्थ, एसडीएम जितेंद्र कुमार, ईओ ओमप्रकाश यादव सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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वांछित पति की गिरफ्तारी से जुड़ी विवाहिता आत्महत्या की गुत्थी, मऊ में पुलिस जांच तेज

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)।जनपद मऊ के कोपागंज थाना क्षेत्र अंतर्गत इटौरा डोरीपुर गांव में एक विवाहिता की आत्महत्या के मामले में पुलिस को अहम सफलता हाथ लगी है। लंबे समय से वांछित चल रहे अभियुक्त पति की गिरफ्तारी के बाद यह मामला एक नई कड़ी से जुड़ गया है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया है, वहीं पूरे प्रकरण की गहन विवेचना जारी है।
पुलिस अधीक्षक इलामारन के निर्देश पर चलाए जा रहे वांछित अपराधियों की धरपकड़ अभियान के तहत कोपागंज थाना पुलिस ने अभियुक्त गोविन्दा राजभर को हिरासत में लिया। अपर पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार तथा क्षेत्राधिकारी घोसी जितेन्द्र सिंह के पर्यवेक्षण में यह कार्रवाई की गई। प्रभारी निरीक्षक रविन्द्र नाथ राय के निर्देशन में उपनिरीक्षक मनीष कुमार ने पुलिस टीम के साथ छापेमारी कर आरोपी को काछीकला से इटौरा डोरीपुर की ओर जाने वाली सर्विस रोड के पास से दोपहर करीब 1:45 बजे गिरफ्तार किया।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार अभियुक्त गोविन्दा राजभर (25 वर्ष) निवासी इटौरा डोरीपुर के विरुद्ध थाना कोपागंज में मुकदमा संख्या 02/2026 दर्ज है, जिसमें धारा 85/80(2) बीएनएस एवं 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत आरोप हैं। गिरफ्तारी के दौरान सर्वोच्च न्यायालय और मानवाधिकार आयोग के सभी दिशा-निर्देशों का पालन किया गया।

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गौरतलब है कि बुधवार की शाम अभियुक्त की पत्नी अर्चना राजभर (26) ने कथित रूप से पारिवारिक कलह से परेशान होकर आत्महत्या कर ली थी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। परिजनों ने घरेलू विवाद और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है।
थाना प्रभारी रविन्द्र नाथ राय ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

पूर्वी क्षेत्र अंतर विश्वविद्यालय क्रिकेट में डीडीयूजीयू की महिला टीम क्वार्टर फाइनल में

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। केआईआईटी भुवनेश्वर में 1 जनवरी से आयोजित पूर्वी क्षेत्र अंतर विश्वविद्यालय क्रिकेट महिला प्रतियोगिता 2025–26 में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की महिला क्रिकेट टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया है।
विश्वविद्यालय की महिला टीम ने अपने दूसरे मुकाबले में एसएनपीवी विश्वविद्यालय रायगढ़ को आठ विकेट से करारी शिकस्त दी। इससे पहले खेले गए मैच में टीम ने पंडित रवि शंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर को सात विकेट से हराया था।

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विश्वविद्यालय क्रीड़ा परिषद के सचिव डॉ. राज वीर सिंह ने बताया कि इस मैच में अनामिका सिंह ने शानदार गेंदबाजी करते हुए चार ओवर में मात्र दो रन देकर पांच विकेट झटके। वहीं श्रद्धा श्रीवास्तव और आराध्या निगम ने दो-दो विकेट हासिल किए। रायगढ़ की टीम पहले बल्लेबाजी करते हुए केवल 36 रन पर सिमट गई। लक्ष्य का पीछा करते हुए विश्वविद्यालय की ओर से आराध्या निगम ने छह गेंदों में 12 रन बनाए और टीम ने मात्र चार ओवर में ही जीत दर्ज कर ली।
टीम के उत्कृष्ट प्रदर्शन पर कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए खिलाड़ियों को बधाई दी। साथ ही क्रीड़ा परिषद के अध्यक्ष प्रो. विमलेश मिश्रा, उपाध्यक्ष प्रो. विजय चहल, प्रो. आलोक कुमार गोयल, कोषाध्यक्ष प्रो. प्रत्यूष दुबे, संयुक्त सचिव डॉ. मनीष पाण्डेय, टीम मैनेजर प्रो. महेश यादव एवं प्रशिक्षक साधु प्रसाद ने भी टीम को शुभकामनाएं प्रेषित कीं।