Wednesday, June 24, 2026
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कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल से कुलपति पूनम टंडन की भेंट, शिक्षा गुणवत्ता पर जोर

नववर्ष पर गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति ने राज्यपाल से की शिष्टाचार भेंट

गोरखपुर / लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)नववर्ष 2026 के शुभ अवसर पर दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन ने उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल से राजभवन, लखनऊ में शिष्टाचार भेंट की। यह मुलाकात न केवल औपचारिक थी, बल्कि विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और शोधात्मक भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण संवाद का साक्षी भी बनी।
भेंट के दौरान कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने विश्वविद्यालय में संचालित शैक्षणिक कार्यक्रमों, नवाचार आधारित शोध गतिविधियों, अकादमिक गुणवत्ता सुधार तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप किए जा रहे प्रयासों की विस्तार से जानकारी कुलाधिपति को दी। साथ ही, विश्वविद्यालय की भावी कार्ययोजना, अधोसंरचना विकास, शोध केंद्रों के सुदृढ़ीकरण और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालय की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता, नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व को प्राथमिकता देने पर बल दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को शैक्षणिक उत्कृष्टता, शोध नवाचार और वैश्विक मानकों के अनुरूप कार्य करने के लिए प्रेरक सुझाव भी दिए।

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कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि कुलाधिपति का मार्गदर्शन विश्वविद्यालय परिवार के लिए प्रेरणास्रोत है। उनके नेतृत्व में प्राप्त दिशा-निर्देश विश्वविद्यालय को अकादमिक उत्कृष्टता और राष्ट्र निर्माण में अधिक प्रभावी भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
यह शिष्टाचार भेंट नववर्ष की सकारात्मक शुरुआत के साथ विश्वविद्यालय के उज्ज्वल भविष्य की ओर एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

मातृशक्ति की भूमिका पर विशेष जोर, बड़ी संख्या में लोग हुए शामिल

बरहज में हिंदू सम्मेलन आयोजित, सनातन संस्कृति और सामाजिक एकता पर जोर

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।कस्बा स्थित ऐश्वर्य पैलेस में शुक्रवार को आयोजित हिंदू सम्मेलन में सनातन संस्कृति, सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा हुई। सम्मेलन का उद्देश्य अखिल भारतीय हिंदू समाज के बीच बंधुता, परस्पर सहयोग, स्वाभिमान और सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करना रहा। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक रमेश ने भारत की सांस्कृतिक परंपराओं पर प्रकाश डालते हुए सनातन मूल्यों को समाज की आत्मा बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति “वसुधैव कुटुंबकम्” की भावना से विश्व को परिवार मानती है और इसी दृष्टि ने भारत को युगों तक जीवंत रखा है।

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उन्होंने समाज से आह्वान किया कि आधुनिकता के साथ अपनी परंपराओं का संतुलन बनाए रखें। जन्मदिन जैसे अवसरों को सेवा, संस्कार और समाजहित से जोड़ने तथा प्रत्येक परिवार द्वारा कम से कम एक वृक्ष लगाने और उसके संरक्षण की पहल करने पर भी उन्होंने जोर दिया।
आश्रम पीठाधीश्वर आञ्जनेय दास महाराज ने विदेशी प्रभावों के बजाय अपने महापुरुषों के विचारों और संस्कारों को अपनाने की आवश्यकता बताई। बच्चों को सनातन धर्म, संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने को उन्होंने समय की मांग कहा।
बारीपुर मंदिर के महंत गोपाल दास ने जाति-आधारित भेदभाव से ऊपर उठकर सामाजिक एकता की बात कही और समरसता को हिंदू समाज की शक्ति बताया। वहीं, डॉ. दर्शना श्रीवास्तव ने मातृशक्ति की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महिलाओं की सहभागिता से सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक रूप से सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है।

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कार्यक्रम की अध्यक्षता नरेश गोयल ने की तथा संचालन पंकज शुक्ला ने किया। आयोजन समिति के अध्यक्ष सचिन सिंह ने अतिथियों और उपस्थित जनमानस के प्रति आभार व्यक्त किया। सम्मेलन में विधायक दीपक मिश्र शाका सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता, संगठन पदाधिकारी, महिलाएं और पुरुष बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

थाना प्रभारी गौरव त्यागी का गैर जनपद स्थानांतरण, जैतीपुर थाने में भावुक विदाई समारोह

शाहजहांपुर (राष्ट्र की परम्परा)। जैतीपुर थाना प्रभारी के रूप में उत्कृष्ट सेवाएं देने वाले गौरव त्यागी का गैर जनपद स्थानांतरण होने पर थाना परिसर में एक गरिमामय विदाई समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर पुलिस विभाग के अधिकारी, कर्मचारी तथा क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। पूरे वातावरण में सम्मान, भावुकता और कृतज्ञता का भाव स्पष्ट रूप से देखने को मिला।
अपने लगभग 14 माह के कार्यकाल में थाना प्रभारी गौरव त्यागी ने कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने, अपराध नियंत्रण और जनसुनवाई को प्राथमिकता देते हुए पुलिस-जन सहयोग की मजबूत मिसाल पेश की। उनके नेतृत्व में थाना क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को नई दिशा मिली और आम नागरिकों में पुलिस के प्रति विश्वास बढ़ा।
विदाई समारोह के दौरान अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उनके कार्यों की मुक्तकंठ से सराहना की। उन्हें पुष्पगुच्छ, फूल-माला एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। सभी वक्ताओं ने उनके अनुशासित नेतृत्व, निष्पक्ष कार्यशैली और संवेदनशील प्रशासन की प्रशंसा करते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
इस अवसर पर थाना प्रभारी गौरव त्यागी ने भावुक होते हुए कहा कि जैतीपुर थाना उनके लिए हमेशा यादगार रहेगा। उन्होंने अपने सहयोगी पुलिसकर्मियों के समर्पण और टीम भावना की प्रशंसा करते हुए सभी का आभार व्यक्त किया।
विदाई समारोह में उप निरीक्षक सूरज पाल पचौरी, रोहिताश कुमार, रामू आर्य, इतेश तोमर, कांस्टेबल तरुण सिरोही, राहुल यादव सहित बृजेश मिश्रा, मदनपाल सिंह, सुनील यादव, राकेश गुप्ता समेत अनेक सम्मानित नागरिक मौजूद रहे। कार्यक्रम सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।

विकास, संविधान और नागरिक जीवन: दूषित पेयजल ने उजागर की भारत की बुनियादी सच्चाई

यदि 2047 तक भारत को सचमुच विकसित राष्ट्र बनना है, तो उसे बुनियादी सुविधाओं को नीतिगत प्राथमिकता नहीं बल्कि नैतिक दायित्व मानना होगा – एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर विज़न 2047 के तहत भारत स्वयं को एक विकसित राष्ट्र और विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।बुनियादी ढांचे,डिजिटल गवर्नेंस, स्मार्ट सिटी, हाईवे, मेट्रो औद्योगिक गलियारों और वैश्विक निवेश के आंकड़े इस प्रगति का दावा करते हैं। किंतु इसी आधुनिक भारत में यदि नागरिक दूषित पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा के अभाव में अपनी जान गंवा दें, तो यह केवल प्रशासनिक विफ़लता नहीं, बल्कि राज्य की नैतिक, संवैधानिक और मानवीय विफलता बन जाती है।1 जनवरी 2026 को इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों ने इसी विरोधाभास को उजागर कर दिया है,जहाँ एक ओर वर्ल्ड क्लास इंडिया की आकांक्षा है, वहीं दूसरी ओर नागरिक जीवन की बुनियादी सुरक्षा भी सुनिश्चित नहीं हो पा रही। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि,स्वच्छ पेयजल का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। दूषित पानी से हुई मौतें सीधे-सीधे इस अधिकार का हनन हैं।जब भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की बात करता है, तब ऐसी घटनाएँ यह प्रश्न उठाती हैं कि क्या विकास मानवाधिकारों की रक्षा के बिना संभव है?हाईकोर्ट और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का संज्ञान यह स्पष्ट करता है कि यह मामला केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि संवैधानिक और मानवाधिकार उल्लंघन का है।न्यायपालिका की सक्रियता यह सुनिश्चित करने का प्रयास है कि राज्य अपने कर्तव्यों से पलायन न करे और नागरिकों के जीवन की कीमत राजनीतिक सुविधा के अनुसार न तय की जाए। 

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साथियों बात अगर हम इंदौर में हुई त्रासदी को समझने की करें तो, जो शहर लगातार कई वर्षों से राष्ट्रीयस्वच्छता सर्वेक्षण में देश का सबसे स्वच्छ शहर घोषित होता रहा है, वहां नववर्ष के पहले ही दिन दूषित पेयजल से मौतों की खबर ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया।यह घटना इसलिए और भी गंभीर हो जाती है क्योंकि इंदौर को अक्सर शहरी प्रबंधन, नगर निकाय दक्षता और जनभागीदारी का आदर्श मॉडल बताया जाता रहा है।यदि ऐसा शहर भी अपने नागरिकों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने में विफल हो जाए,तो यह प्रश्न केवल इंदौर का नहीं, बल्कि पूरे शहरी भारत की जल सुरक्षा रणनीति पर खड़ा होता है।घटना का केंद्र इंदौर का भागीरथपुरा क्षेत्र है, जहाँ पुलिस चौकी के शौचालय के ठीक नीचे से गुजर रही नर्मदा की मुख्य जल आपूर्ति पाइपलाइन में गंभीर रिसाव पाया गया। इस रिसाव के कारण सीवेज का गंदा पानी सीधे पेयजल लाइन में मिल गया और पूरे वार्ड में दूषित पानी की आपूर्ति होती रही।यह केवल एक तकनीकी खराबी नहीं थी,बल्कि प्रणालीगत लापरवाही का परिणाम भी होने की संभावना है।मीडिया में चल रही खबरों के अनुसार,स्थानीय नागरिकों द्वारा सैकड़ों बार पार्षद को शिकायतें की गईं, नगर निगम की 311 ऐप पर भी बार-बार शिकायत दर्ज कराई गई, परंतु हर बार केवल आश्वासन मिला, समाधान नहीं। यह स्थिति बताती है कि डिजिटल शिकायत तंत्र तब तक अर्थहीन है,जब तक उस पर संवेदनशील और समयबद्ध कार्रवाई न हो।मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि दूषित पानी पीने से ही लोग बीमार पड़े और उनकी मृत्यु हुई। वहीं कलेक्टर स्तरपर यह कहा गया कि डिटेल्ड रिपोर्ट और कल्चर टेस्ट के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।यह प्रशासनिक भाषा एक परिचित पैटर्न को दर्शाती है,पहले टालना, फिर जांच, फिर जिम्मेदारी तय करने में विलंब। जबकि वास्तविकता यह है कि जब सैकड़ों लोग अस्पतालों में भर्ती हों, 16 बच्चे प्रभावित हों और मौतों की संख्या बढ़ रही हो, तब प्रशासनिक सतर्कता नहीं बल्कि आपातकालीन जवाबदेही अपेक्षित होती है। 

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साथियों बात अगर हम मौतों के आंकड़ों पर विवाद: सत्य बनाम आधिकारिक संस्करण इसको समझने की करें तो, इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक पहलू मौतों कीसंख्या को लेकर सामने आया विरोधाभास है।हाईकोर्ट में सरकार की ओर से पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट में अब तक केवल 4 मौतों की बात कही गई,जबकि मीडिया से ऐसी खबरें आ रही है क़ि ज़मीनी रिपोर्ट, मीडिया और अस्पतालों के आंकड़ों के अनुसार 15 लोगों की मृत्यु हो चुकी है।यह अंतर केवल आंकड़ों का नहीं, बल्कि राज्य की पारदर्शिता और नैतिक साहस का प्रश्न है। लोकतंत्र में जब सरकारें मौतों को कम करके दिखाने लगें, तो यह पीड़ितों के प्रति दूसरा अन्याय बन जाता है। न्यायपालिका और मानवाधिकार आयोग की भूमिका इस मामले में हाईकोर्ट द्वारा जनहित याचिका पर संज्ञान लेना और अगली सुनवाई की तिथि तय करना न्यायिक सक्रियता का संकेत है। वहीं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा स्वतः संज्ञान लेकर मुख्य सचिव को नोटिस जारी करना इस बात की पुष्टि करता है कि यह मामला केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि मानवाधिकार उल्लंघन का भी है। 

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साथियों बात अगर हम इस त्रासदी को संवैधानिक रूप से समझने की करें तो, भारत का संविधान नागरिकों को केवल शासन की संरचना नहीं देता, बल्कि उन्हेंसम्मानपूर्ण सुरक्षित और गरिमामय जीवन का वचन देता है। अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार केवल सांस लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसमें स्वच्छ जल, स्वच्छ पर्यावरण और स्वास्थ्य का अधिकार भी निहित है। इंदौर में दूषित पेयजल से हुई मौतें इस संवैधानिक वचन के टूटने का प्रतीक हैं। यह घटना केवल एक नगर निगम या राज्य सरकार की विफलता नहीं, बल्कि राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी के उल्लंघन का गंभीर मामला है।स्वच्छ पेयजल:मूल अधिकार का अविभाज्य हिस्सा भारतीय न्यायपालिका ने समय- समय पर स्पष्ट किया है कि स्वच्छ जल का अधिकार, अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन के अधिकार का अनिवार्य अंग है। सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों में यह स्थापित किया गया है कि यदि राज्य नागरिकों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने में असफल रहता है, तो वह संवैधानिक कर्तव्यहीनता का दोषी है।इंदौर की घटना में, जहाँ सीवेज का पानी पेयजल आपूर्ति में मिला और प्रशासन शिकायतों के बावजूद निष्क्रिय रहा,वहाँ यह तर्क और भी सशक्त हो जाता है कि राज्य ने अपने संवैधानिक दायित्व का पालन नहीं किया।अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन: समानता और जीवन पर भी आघात क़ी ओर इशारा करता है 

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साथियों बात अगर हम राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ: संवेदना,आरोप और नैतिक परीक्षा इसको समझने की करें तो पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा इसे मुख्यमंत्री के लिए परीक्षा की घड़ी बताना और घोर प्रायश्चित की बात कहना इस घटना की नैतिक गंभीरता को रेखांकित करता है।वहीं लोकसभा में विपक्षी नेता द्वारा यह कहना कि साफ पानी अहसान नहीं, जीवन का अधिकार है, लोकतांत्रिक विमर्श को संवैधानिक धरातल पर लाता है।हालांकि,राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से परे यह प्रश्न अधिक गहरा है,क्या शासन व्यवस्था नागरिक जीवन को सर्वोच्च प्राथमिकता मान रही है, या केवल राजनीतिक प्रबंधन तक सीमित है? 

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साथियों बात अगर हम दूषित पानी और घातक बैक्टीरिया एक वैज्ञानिक चेतावनी को समझने की करें तो, विशेषज्ञों के अनुसार, सीवेज मिला पानी केवल गंदा नहीं बल्कि अत्यंत विषैला होता है। इसमें हैजा जैसे घातक बैक्टीरिया, मल-मूत्र से उत्पन्न रोगाणु, साबुन, डिटर्जेंट, केमिकल और कभी-कभी औद्योगिक अपशिष्ट भी शामिल होता है।जब यह मिश्रण पेयजल आपूर्ति में प्रवेश करता है, तो यह एक मौन जैविक हथियार बन जाता है, जिसका प्रभाव बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों पर सबसे अधिक पड़ता है। 

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साथियों बात अगर हम वॉटर विज़न 2047: नीति और ज़मीनी हकीकत का अंतर को समझने की करें तो, हाल ही में भोपाल में आयोजित वॉटर विज़न 2047 सम्मेलन में प्रधानमंत्री के 5 पी मॉडल,राजनीतिक इच्छाशक्ति, लोक वित्त, साझेदारी, जन भागीदारी और सतत प्रेरणा पर विस्तृत चर्चा हुई थीं।जल सुरक्षा के लिए रोडमैप तैयार करने की बातें हुईं थीं,परंतु इंदौर जैसी घटना यह दर्शाती है कि नीतिगत विमर्श और ज़मीनी क्रियान्वयन के बीच अभी भी गहरी खाई है। जब तक पाइपलाइन स्तर पर निगरानी, जवाबदेही और त्वरित सुधार तंत्र विकसित नहीं होंगे, तब तक वॉटर विज़न केवल दस्तावेज़ों में सिमटा रहेगा।

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साथियों बात कर हमअंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य: विकसित देशों से भारत क्या सीख सकता है इसको समझने की करें तो, यूरोप, जापान और सिंगापुर जैसे देशों में पेयजल आपूर्ति को क्रिटिकल नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर माना जाता है। वहां जल आपूर्ति लाइनों की नियमित ऑडिट, सेंसर आधारित निगरानी, और किसी भी रिसाव पर त्वरित अलर्ट सिस्टम लागू हैं।भारत यदि 2047 तक वैश्विक नेतृत्व की आकांक्षा रखता है, तो उसे यह समझना होगा कि आर्थिक शक्ति का मूल्य तभी है जब नागरिक सुरक्षित स्वस्थ और सम्मानजनक जीवन जी सकें।

साथियों बात अगर हम  मीडिया, अभिव्यक्ति और सत्ता का व्यवहार इसको समझने की करें तो, इस प्रकरण में एक इंटरविनर द्वारा मीडिया पब्लिकेशन पर रोक की मांग और एक वरिष्ठ मंत्री द्वारा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सवालों पर असभ्य भाषा का प्रयोग करना लोकतांत्रिक संस्कृति के लिए चिंताजनक संकेत हैं।सत्ता की परिपक्वता इस बात से मापी जाती है कि वह संकट के समय सवालों से डरती है या उनसे सीखती है। मीडिया पर अंकुश लगाने की सोच समस्या के समाधान के बजाय उसे दबाने की प्रवृत्ति को दर्शाती है। 

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अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन करें इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि विकसित भारत का अर्थ केवल जीडीपी नहीं हैं, इंदौर की जल त्रासदी हमें यह याद दिलाती है कि विकसित भारत का सपना केवल आर्थिक आंकड़ों, रैंकिंग और घोषणाओं से पूरा नहीं होता। उसका असली पैमाना यह है कि क्या हर नागरिक सुरक्षित पानी पी सकता है, बिना डर के जी सकता है, और राज्य पर भरोसा कर सकता है।यदि 2047 तक भारत को सचमुच विकसित राष्ट्र बनना है, तो उसे बुनियादी सुविधाओं को नीतिगत प्राथमिकता नहीं बल्कि नैतिक दायित्व मानना होगा। अन्यथा, ऐसी घटनाएँ न केवल जानें लेंगी, बल्कि राष्ट्र की आत्मा को भी घायल करती रहेंगी।

-संकलनकर्ता लेखक-क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9284141425

“शनि दोष का भय नहीं, समाधान जानिए शास्त्रों की जुबानी”

🔱 ढैय्या का रहस्य और शनि दोष निवारण 🔱
जब शनि केवल दंड नहीं, बल्कि धर्म का रक्षक बनकर आते हैं

प्रस्तावना: क्या सच में ढैय्या केवल कष्ट देती है?
भारतीय ज्योतिष में जब भी शनि ढैय्या या शनि दोष का नाम आता है, तो मन भय से भर जाता है। असफलता, विलंब, मानसिक तनाव और जीवन में अवरोध—ये सब शनि से जोड़ दिए जाते हैं।
लेकिन क्या शनि महाराज केवल पीड़ा के दाता हैं?
या फिर वे कर्मों का न्याय कर जीवन को नई दिशा देने वाले देवता हैं?
हम शास्त्रों के आधार पर ढैय्या के रहस्य, शनि की वास्तविक भूमिका, और दोष निवारण की दिव्य विधियों पर गहन प्रकाश डालते हैं।
🪐 शनि महाराज: दंडाधिकारी नहीं, धर्माधिकारी
शास्त्र कहते हैं—
“शनैश्चरः कर्मफलदाता”
अर्थात शनि महाराज मनुष्य को उसके कर्मों का फल देते हैं।
शनि सूर्यदेव के पुत्र हैं, परंतु उनका स्वभाव तपस्वी, संयमी और न्यायप्रिय है। वे न किसी से पक्षपात करते हैं, न ही किसी को बिना कारण कष्ट देते हैं।
शनि अधर्म को दंड देते हैं
शनि धैर्य, तप और सेवा से प्रसन्न होते हैं
शनि का उद्देश्य सुधार है, विनाश नहीं

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🌑 ढैय्या का शास्त्रोक्त रहस्य
ढैय्या तब लगती है जब शनि आपकी जन्म राशि से चौथे या आठवें भाव में गोचर करते हैं। इसकी अवधि लगभग ढाई वर्ष होती है।
ढैय्या क्यों आती है?
अहंकार को तोड़ने
अधूरे कर्मों का शोधन करने
आत्मबल और विवेक बढ़ाने
जीवन की दिशा बदलने
शास्त्रों में कहा गया है—
“यत्र शनि तत्र परीक्षा”
जहाँ शनि होते हैं, वहाँ परीक्षा होती है।

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📜 शास्त्रोक्त कथा: राजा विक्रमादित्य और शनि ढैय्या
बहुत प्राचीन काल की बात है। सम्राट विक्रमादित्य न्यायप्रिय और धर्मनिष्ठ राजा थे। एक बार उन्होंने शनि महाराज को सार्वजनिक रूप से कठोर ग्रह कह दिया।
शनि ने कहा—
“राजन, मेरे प्रभाव का अनुभव स्वयं करिए।”
कुछ समय बाद विक्रमादित्य पर शनि ढैय्या आरंभ हुई।
शनि की परीक्षा:
राज्य छिन गया
अपमान सहना पड़ा
जंगलों में भटकना पड़ा
एक समय लोहार बनकर जीवन बिताया
परंतु विक्रमादित्य ने धैर्य, सत्य और धर्म नहीं छोड़ा।
फल:
ढैय्या समाप्त होते ही—
शनि महाराज प्रकट हुए
राज्य लौटा
यश कई गुना बढ़ा
शनि बोले—
“जो धैर्य रखता है, वही मेरा प्रिय है।”

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🌟 शनि की महिमा: शत्रु नहीं, मार्गदर्शक
शनि महाराज—
झूठे संबंध तोड़ते हैं
असली मित्रों को पहचान कराते हैं
आत्मा को मजबूत बनाते हैं
रामायण में—
हनुमान जी ने शनि को रावण की कैद से मुक्त कराया।
शनि ने वरदान दिया—
“जो हनुमान जी का स्मरण करेगा, उस पर मेरा प्रकोप नहीं होगा।”

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🔔 शनि दोष निवारण: शास्त्रोक्त उपाय
🕯️ 1. शनिवार का व्रत
काले तिल, उड़द, सरसों तेल का दान
पीपल के नीचे दीपक
📿 2. शनि मंत्र
“ॐ शं शनैश्चराय नमः”
108 बार जप प्रतिदिन
🐒 3. हनुमान उपासना
हनुमान चालीसा
बजरंग बाण
मंगलवार–शनिवार विशेष

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🤲 4. सेवा और विनम्रता
गरीब, मजदूर, विकलांग की सेवा
अहंकार त्याग
🕉️ ढैय्या में क्या करें और क्या न करें
करें:
✔ सत्य बोलें
✔ धैर्य रखें
✔ समय का सम्मान करें
न करें:
✖ छल-कपट
✖ घमंड
✖ कमजोरों का अपमान
🌼 निष्कर्ष: शनि से डरें नहीं, समझें
ढैय्या कोई अभिशाप नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि की प्रक्रिया है।
शनि महाराज जब जीवन से अनावश्यक बोझ हटाते हैं, तभी स्थायी सुख का मार्ग खुलता है।
“शनि दुख नहीं देते, वे दुख का कारण समाप्त करते हैं।”

3 जनवरी को इन राशियों को रहना होगा खास सतर्क ?

राशिफल 3 जनवरी 2026: आज किस राशि की चमकेगी किस्मत और किसके सामने आएंगी चुनौतियां, पढ़ें मेष से मीन तक

राशिफल: पंडित सत्य प्रकाश पाण्डेय

ग्रह-नक्षत्रों की चाल के आधार पर 3 जनवरी 2026, शनिवार का दिन कई राशियों के लिए नए अवसर लेकर आ रहा है, वहीं कुछ राशियों को संयम और समझदारी से कदम बढ़ाने की सलाह दी जाती है। नीचे मेष से लेकर मीन तक सभी 12 राशियों का विस्तृत राशिफल प्रस्तुत है, जिसमें कार्य, व्यवसाय, शिक्षा, कला, राजनीति, प्रशासन, धन, शुभ रंग, शुभ अंक, पूज्य देवी-देवता और राशि से जुड़े अक्षरों की जानकारी दी गई है।

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मेष राशि (Aries ♈)
नाम अक्षर: चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ
आज का दिन व्यस्त लेकिन परिणाम देने वाला है।
कार्य/व्यवसाय: कार्यक्षेत्र में पहल करेंगे, लेकिन जल्दबाजी से बचें। व्यापार में पुराने संपर्क लाभ देंगे।
शिक्षा: प्रतियोगी छात्रों को मेहनत का फल मिलेगा।
कला/संगीत: रचनात्मक ऊर्जा बढ़ेगी।
राजनीति/प्रशासन: नेतृत्व का मौका मिलेगा, संयम जरूरी।
आर्थिक स्थिति: आय स्थिर रहेगी, खर्च पर नियंत्रण रखें।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 9
पूज्य देवता: हनुमान जी
वृषभ राशि (Taurus ♉)
नाम अक्षर: ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो
आज धैर्य आपकी सबसे बड़ी ताकत है।
कार्य/व्यवसाय: निवेश सोच-समझकर करें।
शिक्षा: पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ेगी।
कला/संगीत: संगीत से मानसिक शांति मिलेगी।
राजनीति/प्रशासन: वरिष्ठों का सहयोग मिलेगा।
आर्थिक स्थिति: पुराने खर्च सामने आ सकते हैं।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 6
पूज्य देवता: माता लक्ष्मी
मिथुन राशि (Gemini ♊)
नाम अक्षर: का, की, कु, घ, ङ, छ, के, को, ह
दिमाग तेज चलेगा, फैसले सोचकर लें।
कार्य/व्यवसाय: मल्टीटास्किंग से लाभ, अधूरे काम न छोड़ें।
शिक्षा: लेखन, मीडिया, आईटी छात्रों के लिए अच्छा दिन।
कला/संगीत: अभिव्यक्ति मजबूत रहेगी।
राजनीति/प्रशासन: संवाद क्षमता से फायदा।
आर्थिक स्थिति: छोटे लाभ के योग।
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 5
पूज्य देवता: गणेश जी

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कर्क राशि (Cancer ♋)
नाम अक्षर: ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो
भावनात्मक गहराई महसूस होगी।
कार्य/व्यवसाय: टीमवर्क से सफलता।
शिक्षा: मन भटके तो ध्यान जरूरी।
कला/संगीत: लेखन और कविता में रुचि बढ़ेगी।
राजनीति/प्रशासन: जनसमर्थन मिलेगा।
आर्थिक स्थिति: धन स्थिर रहेगा।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 2
पूज्य देवता: भगवान शिव
सिंह राशि (Leo ♌)
नाम अक्षर: मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे
आत्मविश्वास से भरा दिन।
कार्य/व्यवसाय: पद-प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
शिक्षा: मैनेजमेंट व प्रशासनिक छात्र लाभ में।
कला/संगीत: मंच या प्रदर्शन का अवसर।
राजनीति/प्रशासन: नेतृत्व की भूमिका।
आर्थिक स्थिति: आय में वृद्धि के संकेत।
शुभ रंग: सुनहरा
शुभ अंक: 1
पूज्य देवता: सूर्य देव
कन्या राशि (Virgo ♍)
नाम अक्षर: टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो
जिम्मेदारियां बढ़ेंगी लेकिन आप सक्षम हैं।
कार्य/व्यवसाय: मेहनत रंग लाएगी।
शिक्षा: शोध व विश्लेषण में सफलता।
कला/संगीत: बारीकियों पर काम।
राजनीति/प्रशासन: रणनीति से लाभ।
आर्थिक स्थिति: धीरे-धीरे सुधार।
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 5
पूज्य देवता: विष्णु जी

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तुला राशि (Libra ♎)
नाम अक्षर: रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते
संतुलन बनाकर चलना जरूरी।
कार्य/व्यवसाय: साझेदारी में लाभ।
शिक्षा: कला और डिजाइन छात्रों के लिए अच्छा।
कला/संगीत: सौंदर्यबोध प्रबल।
राजनीति/प्रशासन: कूटनीति से काम बनेगा।
आर्थिक स्थिति: खर्च नियंत्रित रखें।
शुभ रंग: गुलाबी
शुभ अंक: 6
पूज्य देवता: माता दुर्गा
वृश्चिक राशि (Scorpio ♏)
नाम अक्षर: तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू
नई सोच उभरेगी।
कार्य/व्यवसाय: गुप्त योजनाएं सफल होंगी।
शिक्षा: रिसर्च छात्रों को लाभ।
कला/संगीत: गहराई से जुड़ाव।
राजनीति/प्रशासन: रणनीतिक बढ़त।
आर्थिक स्थिति: अचानक लाभ संभव।
शुभ रंग: मैरून
शुभ अंक: 9
पूज्य देवता: भैरव जी
धनु राशि (Sagittarius ♐)
नाम अक्षर: ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा
फैसलों में संतुलन रखें।
कार्य/व्यवसाय: यात्रा से लाभ।
शिक्षा: उच्च शिक्षा के योग।
कला/संगीत: दर्शन और साहित्य में रुचि।
राजनीति/प्रशासन: विचारों की सराहना।
आर्थिक स्थिति: सामान्य से बेहतर।
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 3
पूज्य देवता: गुरु बृहस्पति

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मकर राशि (Capricorn ♑)
नाम अक्षर: भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा
गंभीरता से काम करेंगे।
कार्य/व्यवसाय: लंबी योजना सफल।
शिक्षा: अनुशासन से लाभ।
कला/संगीत: धैर्य से प्रगति।
राजनीति/प्रशासन: जिम्मेदार पद।
आर्थिक स्थिति: स्थिर आय।
शुभ रंग: नीला
शुभ अंक: 8
पूज्य देवता: शनि देव
कुंभ राशि (Aquarius ♒)
नाम अक्षर: गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो
नए विचार आएंगे।
कार्य/व्यवसाय: टेक्नोलॉजी व नवाचार में लाभ।
शिक्षा: विज्ञान छात्रों के लिए अच्छा।
कला/संगीत: प्रयोगधर्मिता।
राजनीति/प्रशासन: जनहित के काम।
आर्थिक स्थिति: नए स्रोत बनेंगे।
शुभ रंग: आसमानी
शुभ अंक: 4
पूज्य देवता: शिव जी
मीन राशि (Pisces ♓)
नाम अक्षर: दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची
भावनाएं गहरी रहेंगी।
कार्य/व्यवसाय: सेवा क्षेत्र में सफलता।
शिक्षा: कला व मनोविज्ञान छात्रों को लाभ।
कला/संगीत: संगीत व ध्यान से शक्ति मिलेगी।
राजनीति/प्रशासन: सहानुभूति से लोकप्रियता।
आर्थिक स्थिति: संतुलित रहेगी।
शुभ रंग: बैंगनी
शुभ अंक: 7
पूज्य देवता: भगवान विष्णु
डिस्क्लेमर: यह राशिफल सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। इसकी पूर्ण सटीकता का दावा नहीं किया जाता। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

मूलांक 1 से 9 तक किसका बदलेगा भाग्य, कौन रहे सावधान

🔥 अंक राशिफल 2026: मूलांक 1 से 9 तक किसका बदलेगा भाग्य, कौन रहे सावधान – पूरा भविष्यफल पढ़े बिना नहीं रुकेंगे

पंडित सुधीर तिवारी (अंतिम बाबा) द्वारा प्रस्तुत

🔢 अंक ज्योतिष क्या है और मूलांक क्यों जरूरी है
अंक ज्योतिष में मूलांक को व्यक्ति के जीवन का दिशा-सूचक अंक माना गया है। जन्मतिथि को इकाई अंक में बदलकर जो संख्या प्राप्त होती है, वही मूलांक कहलाती है।
उदाहरण: जन्म तिथि 10 → 1+0 = मूलांक 1
इसी तरह 1 से 31 तारीख तक जन्मे सभी लोगों के मूलांक 1 से 9 के बीच होते हैं। इसी आधार पर साप्ताहिक भविष्यफल देखा जाता है।
🔴 मूलांक 1
(जन्म तिथि: 1, 10, 19, 28)
स्वभाव: नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास, निर्णय शक्ति
कार्य/व्यवसाय: नौकरी में मान-सम्मान, पदोन्नति या वेतन वृद्धि के योग। व्यापारी नए सौदे से लाभ कमाएंगे।
शिक्षा: मैनेजमेंट, अकाउंट्स, प्रोफेशनल कोर्स में सफलता।
कला-संगीत: मंच या पहचान मिलने की संभावना।
राजनीति/प्रशासन: नेतृत्व भूमिका मजबूत होगी।
आर्थिक स्थिति: आय बढ़ेगी, निवेश शुभ।
स्वास्थ्य: ऊर्जा अच्छी, इम्युनिटी मजबूत।
शुभ रंग: सुनहरा
शुभ अंक: 1
पूज्य देवता: सूर्य देव
उपाय: 19 बार “ॐ भास्कराय नमः” का जाप करें।

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मूलांक 2
(जन्म तिथि: 2, 11, 20, 29)
स्वभाव: सौम्य, सहयोगी, भावनात्मक
कार्य/व्यवसाय: नौकरी में प्रमोशन के योग। व्यापार में विस्तार।
शिक्षा: प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता।
कला-संगीत: रचनात्मक सोच निखरेगी।
राजनीति/प्रशासन: जनसंपर्क मजबूत होगा।
आर्थिक स्थिति: आय संतुलित, बचत बढ़ेगी।
स्वास्थ्य: हल्का सिरदर्द या पेट संबंधी परेशानी।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 2
पूज्य देवता: चंद्र देव
उपाय: 20 बार “ॐ चंद्राय नमः” जप करें।
🟡 मूलांक 3
(जन्म तिथि: 3, 12, 21, 30)
स्वभाव: धार्मिक, ज्ञानप्रिय
कार्य/व्यवसाय: नौकरी में कौशल की पहचान, व्यापारी प्रतिस्पर्धा में आगे।
शिक्षा: शिक्षा क्षेत्र में शानदार प्रगति।
कला-संगीत: रचनात्मक कार्यों में सफलता।
राजनीति/प्रशासन: सलाहकार की भूमिका मिलेगी।
आर्थिक स्थिति: स्थिर और मजबूत।
स्वास्थ्य: ऊर्जा और उत्साह बना रहेगा।
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 3
पूज्य देवता: बृहस्पति
उपाय: गुरुवार को बृहस्पति हवन या दान करें।

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🟢 मूलांक 4
(जन्म तिथि: 4, 13, 22, 31)
स्वभाव: मेहनती, जुनूनी
कार्य/व्यवसाय: नौकरी में प्रदर्शन अच्छा, व्यापार में लाभ।
शिक्षा: एकाग्रता की कमी, अभ्यास बढ़ाएं।
कला-संगीत: धैर्य जरूरी।
राजनीति/प्रशासन: विरोध का सामना।
आर्थिक स्थिति: लाभ के साथ खर्च भी।
स्वास्थ्य: त्वचा संबंधी परेशानी।
शुभ रंग: नीला
शुभ अंक: 4
पूज्य देवता: माँ दुर्गा
उपाय: 22 बार “ॐ दुर्गाय नमः” का जाप।
🔵 मूलांक 5
(जन्म तिथि: 5, 14, 23)
स्वभाव: चतुर, योजनाबद्ध
कार्य/व्यवसाय: नौकरी में मानक स्थापित होंगे, व्यापार में बड़ा लाभ।
शिक्षा: प्रतियोगी परीक्षा के लिए उत्तम समय।
कला-संगीत: नई सोच से पहचान।
राजनीति/प्रशासन: रणनीतिक लाभ।
आर्थिक स्थिति: धन वृद्धि।
स्वास्थ्य: मानसिक व शारीरिक संतुलन।
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 5
पूज्य देवता: विष्णु
उपाय: 41 बार “ॐ नमो नारायण”।

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🟣 मूलांक 6
(जन्म तिथि: 6, 15, 24)
स्वभाव: आनंदप्रिय, आकर्षक
कार्य/व्यवसाय: नौकरी में गुणवत्ता दिखेगी, व्यापार में मजबूती।
शिक्षा: उच्च अंक मिलने के योग।
कला-संगीत: फैशन, कला में सफलता।
राजनीति/प्रशासन: लोकप्रियता बढ़ेगी।
आर्थिक स्थिति: सुख-सुविधाओं पर खर्च।
स्वास्थ्य: फिटनेस अच्छी।
शुभ रंग: गुलाबी
शुभ अंक: 6
पूज्य देवता: शुक्र
उपाय: 33 बार “ॐ भार्गवाय नमः”।
मूलांक 7
(जन्म तिथि: 7, 16, 25)
स्वभाव: आध्यात्मिक, चिंतनशील
कार्य/व्यवसाय: नौकरी में दबाव, व्यापार में मंदी।
शिक्षा: एकाग्रता जरूरी।
कला-संगीत: साधना से लाभ।
राजनीति/प्रशासन: निर्णय सोच-समझकर लें।
आर्थिक स्थिति: खर्च नियंत्रित करें।
स्वास्थ्य: त्वचा संबंधी समस्या।
शुभ रंग: बैंगनी
शुभ अंक: 7
पूज्य देवता: गणेश जी
उपाय: 41 बार “ॐ गणेशाय नमः”।

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🟤 मूलांक 8
(जन्म तिथि: 8, 17, 26)
स्वभाव: अनुशासित, कर्मप्रधान
कार्य/व्यवसाय: नौकरी में काम का बोझ, व्यापार में कम लाभ।
शिक्षा: ध्यान भटक सकता है।
कला-संगीत: निरंतर अभ्यास जरूरी।
राजनीति/प्रशासन: नियम पालन अनिवार्य।
आर्थिक स्थिति: स्थिर लेकिन धीमी।
स्वास्थ्य: पैरों में दर्द।
शुभ रंग: गहरा नीला
शुभ अंक: 8
पूज्य देवता: हनुमान जी
उपाय: 11 बार “ॐ वायुपुत्राय नमः”।
🔴 मूलांक 9
(जन्म तिथि: 9, 18, 27)
स्वभाव: साहसी, स्पष्टवादी
कार्य/व्यवसाय: नौकरी में नए अवसर, व्यापार में प्रतिस्पर्धा पर जीत।
शिक्षा: निर्णय टालें, अभ्यास बढ़ाएं।
कला-संगीत: आत्मविश्वास से सफलता।
राजनीति/प्रशासन: नेतृत्व मजबूत।
आर्थिक स्थिति: आय में वृद्धि।
स्वास्थ्य: फिटनेस बेहतरीन।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 9
पूज्य देवता: मंगल देव
उपाय: 27 बार “ॐ मंगलाय नमः”।

जब 3 जनवरी को भारत ने अपने रत्न खोए

3 जनवरी को हुए महान व्यक्तियों के निधन: इतिहास के वे स्तंभ जिन्होंने भारत को दिशा दी

भारत का इतिहास केवल जन्मों से नहीं, बल्कि उन महान आत्माओं की स्मृति से भी बनता है, जिन्होंने अपने विचार, कर्म और योगदान से देश और समाज को नई दिशा दी। 3 जनवरी ऐसी ही एक महत्वपूर्ण तिथि है, जब भारत ने विज्ञान, साहित्य, कला, प्रशासन और समाज सुधार के कई अमूल्य रत्नों को खोया। आइए जानते हैं 3 जनवरी को हुए इन ऐतिहासिक निधन के बारे में विस्तार से, ताकि नई पीढ़ी उनके योगदान से प्रेरणा ले सके।

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एम. एस. गोपालकृष्णन (निधन: 3 जनवरी 2013)
जन्म: मैसूर ज़िला, कर्नाटक, भारत
एम. एस. गोपालकृष्णन भारत के विश्वविख्यात कर्नाटक शास्त्रीय वायलिन वादक थे। उन्हें “एमएसजी” के नाम से जाना जाता था। वे ऐसे दुर्लभ कलाकार थे जिन्होंने कर्नाटक और हिंदुस्तानी—दोनों शास्त्रीय संगीत परंपराओं में समान दक्षता हासिल की।
उन्होंने विश्वभर में भारत की सांगीतिक विरासत को प्रतिष्ठा दिलाई और अनेक अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय संगीत का प्रतिनिधित्व किया। संगीत शिक्षा के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। वे युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बने और भारतीय वायलिन परंपरा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया।
जे. एन. दीक्षित (निधन: 3 जनवरी 2005)
जन्म: उत्तर प्रदेश, भारत
जे. एन. दीक्षित भारत के वरिष्ठ राजनयिक और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे। वे भारत की विदेश नीति के एक प्रमुख शिल्पकार माने जाते हैं। उन्होंने कई महत्वपूर्ण देशों में भारत के राजदूत के रूप में सेवा दी।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के हितों की रक्षा में उनकी भूमिका निर्णायक रही। भारत की रणनीतिक सोच, कूटनीति और सुरक्षा नीति को सुदृढ़ बनाने में उनका योगदान आज भी संदर्भ के रूप में देखा जाता है।

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सतीश धवन (निधन: 3 जनवरी 2002)
जन्म: श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर, भारत
डॉ. सतीश धवन भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के महान वास्तुकार थे। वे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष रहे और उनके नेतृत्व में भारत ने उपग्रह प्रक्षेपण की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल कीं।
उन्होंने वैज्ञानिक अनुसंधान को संस्थागत मजबूती दी और युवा वैज्ञानिकों को आगे बढ़ने का अवसर दिया। आज भारत की अंतरिक्ष शक्ति का जो वैश्विक सम्मान है, उसकी नींव सतीश धवन जैसे वैज्ञानिकों ने रखी।
डॉ. ब्रह्म प्रकाश (निधन: 3 जनवरी 1984)
जन्म: पंजाब प्रांत (ब्रिटिश भारत), भारत
डॉ. ब्रह्म प्रकाश भारत के अग्रणी धातुकर्म वैज्ञानिक थे। उन्हें पद्म श्री और पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। वे भारत के परमाणु और औद्योगिक विकास में अहम भूमिका निभाने वाले वैज्ञानिकों में से एक थे।
उनका योगदान वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी शिक्षा और औद्योगिक आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने भारत को आधुनिक विज्ञान के क्षेत्र में सशक्त बनाने का सपना देखा और उसे साकार करने में जीवन समर्पित कर दिया।

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परशुराम चतुर्वेदी (निधन: 3 जनवरी 1979)
जन्म: उत्तर प्रदेश, भारत
परशुराम चतुर्वेदी हिंदी साहित्य के महान विद्वान, शोधकर्ता और समीक्षक थे। उन्होंने हिंदी साहित्य के इतिहास, संत साहित्य और आलोचना को नई दृष्टि दी।
उनके शोध कार्य आज भी विश्वविद्यालयों और साहित्यिक जगत में प्रमाणिक माने जाते हैं। हिंदी भाषा को अकादमिक गरिमा दिलाने में उनका योगदान अविस्मरणीय है।
मोहन राकेश (निधन: 3 जनवरी 1972)
जन्म: अमृतसर ज़िला, पंजाब, भारत
मोहन राकेश आधुनिक हिंदी साहित्य के सबसे प्रभावशाली लेखक और नाटककार थे। वे नई कहानी और आधुनिक हिंदी नाटक आंदोलन के प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं।
उनकी रचनाओं ने मध्यवर्गीय जीवन की जटिलताओं, मानसिक संघर्ष और सामाजिक यथार्थ को गहराई से प्रस्तुत किया। “आषाढ़ का एक दिन” जैसे नाटक हिंदी रंगमंच के मील के पत्थर हैं।

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कुरिआकोसी इलिआस चावारा (निधन: 3 जनवरी 1871)
जन्म: केरल, भारत
कुरिआकोसी इलिआस चावारा केरल के सीरियन कैथोलिक संत, समाज सुधारक और शिक्षाविद् थे। उन्होंने शिक्षा को समाज सुधार का सबसे सशक्त माध्यम माना।
उन्होंने विद्यालयों, मठों और सामाजिक संस्थानों की स्थापना की। केरल में शिक्षा और सामाजिक चेतना के प्रसार में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही। आज भी उन्हें आध्यात्मिक और सामाजिक प्रेरणा के रूप में स्मरण किया जाता है।

इतिहास के पन्नों में 3 जनवरी: जब जन्मे थे राष्ट्र निर्माता

3 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तित्व: कला, राजनीति, समाज और राष्ट्र निर्माण में अमिट योगदान देने वाले प्रेरणास्रोत

भारत और विश्व इतिहास में 3 जनवरी एक विशेष तिथि है। इस दिन राजनीति, कला, साहित्य, समाज सुधार, विज्ञान और खेल के ऐसे–ऐसे महान व्यक्तित्व जन्मे, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में न केवल पहचान बनाई बल्कि देश और समाज को नई दिशा भी दी। आइए जानते हैं 3 जनवरी को जन्मे प्रसिद्ध व्यक्तियों के जीवन, जन्म स्थान और उनके राष्ट्रहित में योगदान के बारे में विस्तार से।
🎤 नरेश अय्यर (जन्म: 3 जनवरी 1981)
नरेश अय्यर का जन्म मुंबई, महाराष्ट्र, भारत में हुआ। वे भारतीय संगीत जगत के लोकप्रिय पार्श्वगायक हैं। उन्होंने हिंदी, तमिल और तेलुगु फिल्मों में अपनी सुरीली आवाज से विशेष पहचान बनाई। फिल्म रंग दे बसंती का गीत “रूबरू” उन्हें रातों-रात प्रसिद्धि दिलाने वाला साबित हुआ।
नरेश अय्यर ने भारतीय संगीत को आधुनिक और शास्त्रीय शैली के संतुलन के साथ प्रस्तुत किया। उन्होंने युवा पीढ़ी को गुणवत्तापूर्ण संगीत से जोड़ा और भारतीय फिल्म संगीत को वैश्विक मंच पर सम्मान दिलाने में योगदान दिया।

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🎬 गुल पनाग (जन्म: 3 जनवरी 1977)
गुल पनाग का जन्म चंडीगढ़, भारत में हुआ। वे एक मॉडल, अभिनेत्री, पूर्व मिस इंडिया और सामाजिक जागरूकता की समर्थक हैं। गुल पनाग ने बॉलीवुड के साथ-साथ टीवी और वेब सीरीज में भी अभिनय किया।
अभिनय के अलावा वे फिटनेस, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक अधिकारों को लेकर मुखर रही हैं। उन्होंने युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करने में अहम भूमिका निभाई।
🏛️ संजीव कुमार सिंगारी (जन्म: 3 जनवरी 1967)
संजीव कुमार सिंगारी का जन्म आंध्र प्रदेश, भारत में हुआ। वे आंध्र प्रदेश के प्रभावशाली राजनीतिज्ञ रहे हैं। उन्होंने जनसेवा, प्रशासनिक सुधार और क्षेत्रीय विकास पर विशेष ध्यान दिया।
उनका योगदान विशेष रूप से ग्रामीण विकास, शिक्षा और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में रहा। वे जनता की समस्याओं को नीति निर्माण तक पहुँचाने के लिए जाने जाते हैं।

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🎶 बागेश्री चक्रधर (जन्म: 3 जनवरी 1954)
बागेश्री चक्रधर का जन्म भारत में हुआ। वे आकाशवाणी और दूरदर्शन की स्वर-परीक्षित एवं मान्यता-प्राप्त कलाकार रही हैं।
उन्होंने भारतीय शास्त्रीय और सुगम संगीत के संरक्षण एवं प्रचार में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके गायन ने भारतीय सांस्कृतिक विरासत को जन-जन तक पहुँचाने में बड़ी भूमिका निभाई।
🎥 संजय खान (जन्म: 3 जनवरी 1941)
संजय खान का जन्म बेंगलुरु, कर्नाटक, भारत में हुआ। वे बॉलीवुड अभिनेता, निर्माता और निर्देशक रहे। टीवी धारावाहिक द स्वॉर्ड ऑफ टीपू सुल्तान के माध्यम से उन्होंने भारतीय इतिहास को जनमानस तक पहुँचाया।
उन्होंने भारतीय सिनेमा को ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विषयों से जोड़कर राष्ट्रप्रेम की भावना को मजबूत किया।
🇮🇳 जसवंत सिंह (जन्म: 3 जनवरी 1938)
जसवंत सिंह का जन्म बाड़मेर जिला, राजस्थान, भारत में हुआ। वे भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री और वित्त मंत्री रहे।
उनका योगदान भारत की विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा और कूटनीति के क्षेत्र में ऐतिहासिक रहा। वे एक प्रखर वक्ता और विचारशील लेखक भी थे।

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✍️ केदारनाथ चौधरी (जन्म: 3 जनवरी 1936)
केदारनाथ चौधरी का जन्म बिहार, भारत में हुआ। वे मैथिली भाषा के प्रसिद्ध उपन्यासकार थे।उन्होंने मैथिली साहित्य को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया और क्षेत्रीय भाषाओं के सम्मान व संरक्षण में योगदान दिया। उनके साहित्य ने सामाजिक यथार्थ को सशक्त स्वर दिया।
🏛️ जानकी बल्लभ पटनायक (जन्म: 3 जनवरी 1927)
जानकी बल्लभ पटनायक का जन्म खुर्दा जिला, ओडिशा, भारत में हुआ। वे ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री रहे।
उन्होंने राज्य में औद्योगिक विकास, शिक्षा और प्रशासनिक सुधार को गति दी। ओडिशा के आधुनिक विकास की नींव रखने में उनका योगदान स्मरणीय है।

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🎬 चेतन आनंद (जन्म: 3 जनवरी 1915)
चेतन आनंद का जन्म लाहौर (तत्कालीन भारत, वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ। वे भारतीय सिनेमा के प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक थे।
फिल्म नीचा नगर ने कान्स फिल्म फेस्टिवल में भारत को पहला अंतरराष्ट्रीय सम्मान दिलाया। उन्होंने भारतीय सिनेमा को यथार्थवाद और सामाजिक सरोकारों से जोड़ा।
🏑 जयपाल सिंह (जन्म: 3 जनवरी 1903)
जयपाल सिंह का जन्म झारखंड, भारत में हुआ। वे भारत के प्रसिद्ध हॉकी खिलाड़ी और ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता थे।
खेल के साथ-साथ वे आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए भी मुखर रहे। उन्होंने खेल और सामाजिक न्याय—दोनों क्षेत्रों में राष्ट्र का गौरव बढ़ाया।
🔬 भूपति मोहन सेन (जन्म: 3 जनवरी 1888)
भूपति मोहन सेन का जन्म भारत में हुआ। वे जानेमाने गणितज्ञ और भौतिक विज्ञानी थे।
उन्होंने विज्ञान शिक्षा को सुदृढ़ करने और शोध को प्रोत्साहित करने में अहम योगदान दिया। उनके कार्यों से भारतीय वैज्ञानिक परंपरा को मजबूती मिली।

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📚 बी. एम. श्रीकांतैया (जन्म: 3 जनवरी 1881)
बी. एम. श्रीकांतैया का जन्म कर्नाटक, भारत में हुआ। वे कन्नड़ भाषा के प्रसिद्ध लेखक और अनुवादक थे।
उन्होंने कन्नड़ साहित्य को आधुनिक स्वरूप दिया और विश्व साहित्य को कन्नड़ पाठकों तक पहुँचाया।
🖨️ मुंशी नवल किशोर (जन्म: 3 जनवरी 1836)
मुंशी नवल किशोर का जन्म अलीगढ़, उत्तर प्रदेश, भारत में हुआ। वे एशिया की सबसे पुरानी प्रिंटिंग प्रेस – नवल किशोर प्रेस के संस्थापक थे।
उनका योगदान भारतीय भाषाओं, शिक्षा और साहित्य के प्रचार-प्रसार में ऐतिहासिक है।

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🌸 सावित्रीबाई फुले (जन्म: 3 जनवरी 1831)
सावित्रीबाई फुले का जन्म नायगांव, सतारा जिला, महाराष्ट्र, भारत में हुआ। वे भारत की पहली महिला शिक्षिका, समाज सुधारक और मराठी की पहली महिला कवयित्री थीं।
उन्होंने महिला शिक्षा, दलित उत्थान और सामाजिक समानता के लिए आजीवन संघर्ष किया। उनका जीवन आज भी प्रेरणा का स्रोत है।

भारत और विश्व इतिहास की प्रमुख तिथियाँ

3 जनवरी का इतिहास: समय की धरोहर में दर्ज वे घटनाएँ जिन्होंने दुनिया की दिशा बदली

इतिहास केवल तिथियों का संकलन नहीं होता, बल्कि यह उन निर्णयों, त्रासदियों, उपलब्धियों और बदलावों की कहानी है, जिन्होंने मानव सभ्यता की सोच और दिशा को प्रभावित किया। 3 जनवरी का दिन भी ऐसी ही अनेक ऐतिहासिक, राजनीतिक, वैज्ञानिक और सामाजिक घटनाओं का साक्षी रहा है। आइए जानते हैं 3 जनवरी को घटित उन महत्वपूर्ण घटनाओं के बारे में, जिन्होंने विश्व और भारत के इतिहास में गहरी छाप छोड़ी।

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2020 – विज्ञान और ग्रामीण विकास का संगम
3 जनवरी 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेंगलुरु में भारतीय विज्ञान कांग्रेस के 107वें सत्र का उद्घाटन किया। इसकी थीम “ग्रामीण विकास के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी” रखी गई, जिसने यह संदेश दिया कि वैज्ञानिक प्रगति तभी सार्थक है जब उसका लाभ गांवों और अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। इसी वर्ष खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) ने गुजरात में पहला रेशम प्रसंस्करण संयंत्र खोला, जिससे ग्रामीण रोजगार को नई दिशा मिली। ताइवान द्वारा चीन के “एक देश, दो व्यवस्था” प्रस्ताव को ठुकराना वैश्विक राजनीति में एक बड़ा संकेत माना गया।

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2015 – बोको हराम का भयावह आतंक
3 जनवरी 2015 को नाइजीरिया के उत्तर-पूर्वी शहर बागा में आतंकी संगठन बोको हराम ने भीषण हमला किया। इस नरसंहार में लगभग 2000 निर्दोष लोगों की जान चली गई, जिसने पूरी दुनिया को झकझोर दिया। यह घटना आतंकवाद की अमानवीयता और अफ्रीकी देशों में सुरक्षा चुनौतियों की भयावह तस्वीर पेश करती है।
2013 – इराक में सांप्रदायिक हिंसा
इराक के मुसय्यिब क्षेत्र में हुए आत्मघाती बम विस्फोट में शिया समुदाय के 27 लोगों की मौत और 60 से अधिक के घायल होने की खबर ने मध्य-पूर्व में जारी अस्थिरता को उजागर किया। यह घटना बताती है कि कैसे सांप्रदायिक तनाव आम नागरिकों के जीवन को सबसे अधिक प्रभावित करता है।
2009 – लोकतंत्र की परीक्षा
राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 3 जनवरी 2009 को विधानसभा में विश्वास मत हासिल किया। यह घटना भारतीय लोकतंत्र में बहुमत, जनादेश और राजनीतिक स्थिरता के महत्व को रेखांकित करती है।

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2000 – कलकत्ता से कोलकाता
3 जनवरी 2000 को ऐतिहासिक फैसला लेते हुए कलकत्ता का आधिकारिक नाम “कोलकाता” कर दिया गया। यह केवल नाम परिवर्तन नहीं था, बल्कि स्थानीय संस्कृति, भाषा और पहचान को सम्मान देने की दिशा में एक बड़ा कदम था।
1995 – डबवाली अग्निकांड
हरियाणा के डबवाली में एक स्कूल में लगी भीषण आग ने 360 मासूम जिंदगियों को लील लिया। यह त्रासदी भारत के सबसे दर्दनाक हादसों में गिनी जाती है और आज भी सुरक्षा मानकों की अनदेखी के दुष्परिणामों की याद दिलाती है।
1993 – परमाणु हथियारों में कटौती
अमेरिका के राष्ट्रपति जार्ज बुश और रूस के राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन ने स्टार्ट-द्वितीय संधि पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत दोनों देशों ने अपने परमाणु हथियारों की संख्या आधी करने पर सहमति जताई, जो शीत युद्ध के बाद शांति की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल थी।
1968 – भारत का पहला मौसम विज्ञान रॉकेट
भारत ने 3 जनवरी 1968 को अपना पहला मौसम विज्ञान रॉकेट ‘मेनका’ प्रक्षेपित किया। यह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान की शुरुआती उपलब्धियों में से एक था, जिसने आगे चलकर ISRO की मजबूत नींव रखी।

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1959 – अमेरिका का 49वां राज्य
अलास्का को 3 जनवरी 1959 को अमेरिका का 49वां राज्य घोषित किया गया। यह फैसला अमेरिका के भौगोलिक विस्तार और रणनीतिक शक्ति को और मजबूत करने वाला सिद्ध हुआ।
1901 – शांतिनिकेतन की नींव
रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा स्थापित शांतिनिकेतन में ब्रह्मचर्य आश्रम की शुरुआत हुई। आगे चलकर यही स्थान विश्वभारती विश्वविद्यालय बना और भारतीय शिक्षा, कला व संस्कृति का वैश्विक केंद्र साबित हुआ।
निष्कर्ष – 3 जनवरी का इतिहास हमें यह सिखाता है कि एक ही दिन में मानवता ने विज्ञान, राजनीति, संस्कृति, त्रासदी और शांति—सभी के अनुभव देखे हैं। यह दिन हमें अतीत से सीख लेकर बेहतर भविष्य गढ़ने की प्रेरणा देता है।

यात्रा, शुभ मुहूर्त और ग्रह स्थिति: आज का दिन किसके लिए बनाएगा भाग्य?

पंचांग 03 जनवरी 2026 | आज का विस्तृत हिन्दू पंचांग (शनिवार)
📜 आज का पंचांग : 03/01/2026 (शनिवार)
तिथि: 🌕 शुक्ल पक्ष पूर्णिमा – सुबह से 03:32 PM तक
🌑 कृष्ण पक्ष प्रतिपदा – 03:32 PM के बाद
नक्षत्र:आद्रा – 05:27 PM तक
उसके बाद पुनर्वसु
विक्रम संवत: 2082 (कालयुक्त संवत्सर)
शक संवत: 1947 (विश्वावसु संवत्सर)
चन्द्र मास:
अमांत – पौष
पूर्णिमांत – पौष

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🔱 योगब्रह्म योग – 09:05 AM तक
इन्द्र योग – 05:15 AM (04 जनवरी) तक
इसके बाद वैधृति योग
🔸 करण- बव – 03:32 PM तक
बालव – 01:58 AM तक
कौलव – उसके बाद
☀️ सूर्य एवं 🌙 चंद्रमा का समय
सूर्योदय: 07:12 AM
सूर्यास्त: 05:49 PM
चन्द्रोदय: 05:49 PM
चन्द्रास्त: 08:00 AM (04 जनवरी)

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🌌 ग्रह एवं राशि स्थिति
सूर्य राशि: धनु
चंद्र राशि: मिथुन (पूरा दिन-रात)
अयन: दक्षिणायन
द्रिक ऋतु: शिशिर
वैदिक ऋतु: हेमंत
⚠️ अशुभ काल- राहुकाल: 09:52 AM – 11:11 AM
यम गण्ड: 01:50 PM – 03:10 PM
कुलिक काल: 07:12 AM – 08:32 AM
दुर्मुहूर्त: 08:37 AM – 09:20 AM
वर्ज्यम्: 04:19 AM – 05:46 AM

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शुभ काल- ब्रह्म मुहूर्त: 05:36 AM – 06:24 AM
अमृत काल: 08:32 AM – 09:57 AM
अभिजीत मुहूर्त: 12:10 PM – 12:52 PM
🪔 व्रत एवं त्योहार
🌕 पौष पूर्णिमा
🙏 पूर्णिमा व्रत
🔱 सत्य व्रत
🌊 माघ स्नान प्रारंभ
✨ सर्वार्थसिद्धि योग
👉 आज सर्वार्थसिद्धि योग नहीं है, किन्तु पूर्णिमा तिथि व ब्रह्म योग धार्मिक अनुष्ठानों के लिए श्रेष्ठ माने गए हैं।

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🧭 दिशा शूल (यात्रा विचार)
शनिवार को पूर्व दिशा की यात्रा वर्जित मानी जाती है।
यदि यात्रा आवश्यक हो तो तिल या काली मिर्च खाकर निकलें।
पश्चिम एवं उत्तर दिशा की यात्रा से आज लाभ प्राप्त होता है।
🌙 चंद्रबल – 04/01/26 सुबह 07:13 AM तक चंद्रबल जिन राशियों को है:
मेष, मिथुन, सिंह, कन्या, धनु, मकर

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ताराबल- 05:27 PM तक शुभ नक्षत्र: अश्विनी, कृत्तिका, मृगशीर्षा, पुनर्वसु, पुष्य, मघा, उत्तर फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वभाद्रपदा, उत्तरभाद्रपदा
नोट:👉 इस पंचांग में किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए राष्ट्र की परम्परा जिम्मेदार नहीं है। कृपया किसी भी धार्मिक, ज्योतिषीय अथवा महत्वपूर्ण निर्णय से पूर्व योग्य विद्वान अथवा आचार्य से परामर्श अवश्य लें।

सीएम युवा योजना की समीक्षा बैठक में बैंकों को समयबद्ध ऋण स्वीकृति के निर्देश

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी आलोक कुमार की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में मुख्यमंत्री युवा योजना की समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान बैंक ऑफ इंडिया की समीक्षा करते हुए उपायुक्त उद्योग राजकुमार शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री युवा योजना के अंतर्गत कुल 25 पत्रावलियां बैंक को प्रेषित की गई थीं, जिनमें से 3 पत्रावलियां बैंक पोर्टल पर लंबित हैं तथा 8 पत्रावलियों को निरस्त कर दिया गया है। लंबित पत्रावलियों की समीक्षा के समय आवेदक बिरेंद्र कुमार भी उपस्थित रहे। इस पर शाखा प्रबंधक द्वारा एक सप्ताह के भीतर पत्रावलियों को स्वीकृत करने का आश्वासन दिया गया। अस्वीकृत पत्रावलियों की भी विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक में बैंक ऑफ इंडिया एवं यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की खलीलाबाद, करनजोत और सुगरमिल शाखा के शाखा प्रबंधक एवं जिला समन्वयक उपस्थित रहे।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि बिना उचित कारण के किसी भी पत्रावली को निरस्त न किया जाए।
इसी क्रम में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की समीक्षा के दौरान उपायुक्त उद्योग ने बताया कि बैंक को मुख्यमंत्री युवा योजना के अंतर्गत 100 का लक्ष्य निर्धारित है, जिसके सापेक्ष 60 पत्रावलियां बैंक को प्रेषित की गई हैं। इनमें से 19 आवेदकों को ऋण वितरित किया जा चुका है, 11 पत्रावलियां स्वीकृति हेतु पोर्टल पर लंबित हैं, जबकि 32 पत्रावलियों को अस्वीकृत कर दिया गया है। करनजोत शाखा को भेजी गई 5 पत्रावलियों में से एक भी स्वीकृत या वितरित न होने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त करते हुए नियमानुसार शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए। शाखा प्रबंधक ने एक पत्रावली को उसी दिन स्वीकृत करने का आश्वासन दिया।
बैठक में उपस्थित जिला अग्रणी प्रबंधक एसबीआई ने सभी बैंकों से अपेक्षा की कि मुख्यमंत्री युवा योजना के अंतर्गत निर्धारित गाइडलाइन के अनुसार समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। इस पर जिलाधिकारी ने उपायुक्त उद्योग, जिला अग्रणी प्रबंधक एसबीआई, संबंधित बैंकों के जिला समन्वयक एवं शाखा प्रबंधकों को निर्देशित किया कि जनपद के लिए निर्धारित लक्ष्यों के सापेक्ष बैंकों को आवंटित लक्ष्य की पूर्ति नियमानुसार एवं समयबद्ध रूप से कराई जाए।
बैठक में उपायुक्त उद्योग राजकुमार शर्मा, अग्रणी बैंक प्रबंधक पवन कुमार सिन्हा सहित विभिन्न बैंकों के शाखा प्रबंधक एवं जिला समन्वयक उपस्थित रहे।

बाइक सवार परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

देवरिया में भीषण सड़क हादसा: बाइक सवार अधेड़ की मौत, बच्चा-बच्ची गंभीर घायल, स्कॉर्पियो चालक फरार


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।जनपद देवरिया के भलुआनी थाना क्षेत्र अंतर्गत परसिया अजमेर के समीप गुरुवार को एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना हो गई। तेज रफ्तार अज्ञात स्कॉर्पियो वाहन ने बाइक सवारों को जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में बाइक पर सवार एक अधेड़ व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक युवक और एक युवती गंभीर रूप से घायल हो गए। टक्कर के बाद स्कॉर्पियो चालक वाहन सहित मौके से फरार हो गया।

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प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसा इतना भीषण था कि बाइक सवार सड़क पर दूर जा गिरे। स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए पुलिस को सूचना दी और घायलों की मदद की। मौके पर पहुंची भलुआनी पुलिस ने घायलों को एंबुलेंस की सहायता से जिला सदर अस्पताल, देवरिया भिजवाया, जहां उनका इलाज जारी है।
घायलों की पहचान मुस्कान (8 वर्ष), पुत्री पप्पू प्रसाद, निवासी बरडीहा लाला तथा विशाल (10 वर्ष), पुत्र राजेश के रूप में की गई है। वहीं मृतक की पहचान अनिल (35 वर्ष), पुत्र सुदामा के रूप में हुई है। बताया गया कि अनिल अपने भतीजे-भतीजी के साथ बाइक से कर्मटार स्थित अपनी बुआ के घर जा रहे थे। दुर्भाग्यवश रास्ते में यह हादसा हो गया और अनिल की घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई।
पुलिस ने मृतक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला मोर्चरी भेज दिया है। भलुआनी थाना प्रभारी ने बताया कि अज्ञात स्कॉर्पियो वाहन की तलाश की जा रही है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच कराई जा रही है, ताकि फरार चालक को जल्द गिरफ्तार किया जा सके।

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इस घटना से क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सड़क पर तेज रफ्तार वाहनों पर सख्ती और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की मांग की है।

सड़क सुरक्षा के लिए यातायात नियमों का पालन जरूरी

देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण और यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से यातायात पुलिस द्वारा व्यापक चेकिंग अभियान चलाया गया। पुलिस अधीक्षक देवरिया संजीव सुमन के निर्देशन में दिनांक 02 जनवरी 2026 को यातायात प्रभारी श्री गुलाब सिंह के नेतृत्व में शहर के प्रमुख मार्गों पर विशेष अभियान संचालित किया गया।
इस दौरान गोरखपुर रोड, कसया ओवरब्रिज, मालवीय रोड, बस स्टैंड सहित अन्य व्यस्त क्षेत्रों में वाहनों की सघन जांच की गई। अभियान में सड़क पर वाहन खड़ा कर सवारी भरने वाले ऑटो चालकों, बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाने वालों, तीन सवारी बैठाने वालों और वाहन से स्टंट करने वालों के विरुद्ध मोटर वाहन अधिनियम के अंतर्गत कड़ी कार्रवाई की गई। इसके अतिरिक्त सोनूघाट और सलेमपुर रोड पर सड़क किनारे अवैध रूप से खड़े वाहनों का भी चालान किया गया।
यातायात पुलिस की इस कार्रवाई के तहत कुल 104 वाहनों का ई-चालान किया गया, जबकि एक वाहन को सीज किया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के नियमित अभियान का उद्देश्य वाहन चालकों में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और सड़क दुर्घटनाओं की संभावना को कम करना है।
पुलिस प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे हेलमेट पहनें, यातायात संकेतों का पालन करें और वाहन चलाते समय सुरक्षा नियमों को गंभीरता से अपनाएं। नियमों का उल्लंघन न केवल जान जोखिम में डालता है, बल्कि कानूनी कार्रवाई का कारण भी बनता है। देवरिया यातायात पुलिस का यह अभियान आने वाले दिनों में भी लगातार जारी रहेगा, ताकि सुरक्षित और सुचारू यातायात व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।

ग्राम पंचायत स्तर पर लगाए जा रहे फार्मर आईडी कैम्प

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)जनपद के समस्त भूमिधर किसानों के लिए यह सूचना अत्यंत महत्वपूर्ण है कि अब फार्मर आईडी के बिना किसी भी सरकारी कृषि योजना का लाभ नहीं मिल सकेगा। कृषि विभाग के अनुसार जिन किसानों की फार्मर रजिस्ट्री पूरी नहीं होगी, वे आगामी पीएम किसान सम्मान निधि की किस्त से भी वंचित रह सकते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए जनवरी 2026 तक प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर विशेष फार्मर रजिस्ट्री कैम्प आयोजित किए जा रहे हैं।
इन शिविरों में कृषि विभाग एवं पंचायत विभाग के क्षेत्रीय कर्मचारियों की तैनाती की गई है, ताकि किसानों की फार्मर आईडी समय पर बनाई जा सके। किसान ग्राम पंचायत भवन पहुंचकर आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपना पंजीकरण करा सकते हैं। इसके अलावा किसान स्वयं ‘फार्मर रजिस्ट्री यूपी’ ऐप के माध्यम से भी रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं या फिर आधार कार्ड, खतौनी और आधार से लिंक मोबाइल नंबर लेकर नजदीकी जन सेवा केंद्र पर जाकर वेब पोर्टल upfr.agristack.gov.in के जरिए फार्मर आईडी बनवा सकते हैं, जिसे राजस्व विभाग के लेखपाल द्वारा सत्यापित किया जाएगा।
फार्मर आईडी बनने के बाद किसानों को पीएम किसान, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल विक्रय सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिलेगा और बार-बार दस्तावेज देने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। इन शिविरों का निरीक्षण जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी द्वारा भी किया जाएगा। अधिक जानकारी के लिए किसान अपने नजदीकी कृषि विभाग कार्यालय या राजकीय कृषि बीज गोदाम से संपर्क करें।