Tuesday, June 23, 2026
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धुर्वा से चार दिनों से लापता दो बच्चो का संज्ञान ले मुख्यमंत्री – संजय सेठ

राँची ( राष्ट्र की परम्परा)
रांची के धुर्वा स्थित मौसी बाड़ी क्षेत्र से दो मासूम बच्चे जो दोनों भाई बहन हैं अंश और अंशिका विगत 2 जनवरी से लापता है और अभी तक बच्चों को रांची प्रशासन नहीं ढूंढ पाई है। इस पर केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने परिजनों से फोन पर बात कर हर संभव मदद करने की बात कही। सेठ ने रांची के एसपी से बात कर बच्चों को यथाशीघ्र खोजने की बात कही। सेठ ने बताया अभी वह दिल्ली प्रवास पर हैं रांची पहुंचने पर अभिलंब उनके परिवार जनों से मिलकर उन्हें हर संभव मदद की जाएगी। वहीं केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस मामले को संज्ञान में लेते हुए प्रशासन को जल्द से जल्द बच्चों को खोजने की बात कही।

योगी-मोदी मुलाक़ात: मुस्कान, आत्मविश्वास और राजनीतिक संकेत

दिल्ली में हुई योगी-मोदी मुलाक़ात को केवल औपचारिक शिष्टाचार के रूप में देखना इसके राजनीतिक निहितार्थों को सीमित कर देना होगा। तस्वीरों में दिखाई देती मुस्कान, चेहरे की सहज चमक और आत्मविश्वास भरी देहभाषा यह संकेत देती है कि यह मुलाक़ात साझा संतोष और निरंतर संवाद का परिणाम है। राजनीति में ऐसे दृश्य अक्सर शब्दों से अधिक अर्थ रखते हैं।
योगी का नेतृत्व अब केवल गोरखपुर या उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहा है। प्रशासनिक निर्णयों में स्पष्टता, कानून-व्यवस्था पर सख़्त रुख़ और योजनाओं के क्रियान्वयन में गति ने उनकी पहचान को एक मज़बूत प्रशासक के रूप में स्थापित किया है। यही कारण है कि दिल्ली में उनकी उपस्थिति केवल राज्य-स्तरीय नेता की नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विमर्श में भागीदारी की तरह देखी जाती है।
मुलाक़ात के दौरान दिखी सहजता यह बताती है कि केंद्र और राज्य के बीच संवाद में संतुलन और तालमेल बना हुआ है। यह तालमेल शासन की निरंतरता और नीतिगत स्थिरता के लिए आवश्यक माना जाता है। ऐसे समय में जब राजनीतिक वातावरण अक्सर अटकलों से भरा रहता है, यह दृश्य भरोसे और स्पष्टता का संकेत देता है।
मुस्कान के पीछे का आत्मविश्वास केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि एक शासन मॉडल से जुड़ा हुआ दिखाई देता है। उत्तर प्रदेश में लागू की गई नीतियों और प्रशासनिक फैसलों का असर अब राज्य की सीमाओं से बाहर भी चर्चा का विषय बन रहा है। यह आत्मविश्वास उपलब्धियों से उपजता है, न कि केवल बयानबाज़ी से।
मोदी की दिल्ली और योगी की राजनीति का यह संवाद किसी एक क्षण तक सीमित नहीं है। यह उस व्यापक राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसमें नेतृत्व की भूमिकाएँ स्पष्ट रहती हैं और जिम्मेदारियों का बँटवारा संतुलित रूप से आगे बढ़ता है। यही संतुलन शासन को स्थायित्व प्रदान करता है।
चेहरे की चमक और सुखद भाव राजनीति में सकारात्मकता का संकेत होते हैं। जब नेतृत्व आत्मविश्वास के साथ सामने आता है, तो उसका असर कार्यकर्ताओं से लेकर आम जनता तक दिखाई देता है। इस दृष्टि से यह मुलाक़ात संदेश देती है कि राजनीतिक यात्रा में निरंतरता और संवाद दोनों समान रूप से आवश्यक हैं।
अंततः योगी का जलवा गोरखपुर से आगे बढ़कर व्यापक राजनीतिक परिदृश्य में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। यह विस्तार किसी आक्रामक दावे के रूप में नहीं, बल्कि संतुलित नेतृत्व और निरंतर कार्य के परिणामस्वरूप उभरता दिखाई देता है। राजनीति में यही संतुलन लंबे समय तक भरोसे का आधार बनता है।

क्या 6 जनवरी को जन्मे लोग नेतृत्व में होते हैं खास?

6 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तित्व: कला, राजनीति, खेल और साहित्य में अमिट छाप छोड़ने वाले दिग्गज

6 जनवरी का दिन विश्व और भारत के इतिहास में इसलिए खास है क्योंकि इस दिन अनेक ऐसे व्यक्तित्व जन्मे, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में असाधारण योगदान देकर देश और दुनिया को नई दिशा दी। संगीत, खेल, साहित्य, राजनीति, रंगमंच और दर्शन—हर क्षेत्र में 6 जनवरी को जन्मे लोगों ने अपनी प्रतिभा से पहचान बनाई। आइए जानते हैं इन महान व्यक्तियों के जीवन, जन्म स्थान और उनके योगदान के बारे में विस्तार से।

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किशन श्रीकांत (जन्म: 6 जनवरी 1996)
किशन श्रीकांत का जन्म भारत में हुआ। वे नई पीढ़ी के प्रतिभाशाली फ़िल्म निर्देशक और अभिनेता के रूप में जाने जाते हैं। कम उम्र में ही उन्होंने सिनेमा की तकनीकी और रचनात्मक बारीकियों को समझा। उनकी फिल्मों में युवा सोच, सामाजिक मुद्दे और आधुनिक प्रस्तुति का प्रभाव देखने को मिलता है। भारतीय सिनेमा में उन्होंने नए प्रयोगों को बढ़ावा दिया, जिससे स्वतंत्र और कंटेंट-आधारित फिल्मों को पहचान मिली। किशन श्रीकांत का योगदान खास तौर पर युवाओं को सिनेमा के माध्यम से अपनी बात कहने की प्रेरणा देता है।
मधु कोडा (जन्म: 6 जनवरी 1971)
मधु कोडा का जन्म झारखंड राज्य में हुआ। वे झारखंड के पाँचवें मुख्यमंत्री रहे और राज्य की राजनीति में एक प्रभावशाली आदिवासी नेता के रूप में पहचाने जाते हैं। उनका राजनीतिक सफर जमीनी स्तर से शुरू हुआ। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने खनिज संसाधनों से समृद्ध झारखंड के विकास, आदिवासी अधिकारों और बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित किया। झारखंड की राजनीति में उनकी भूमिका राज्य निर्माण के बाद के दौर में विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है।

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ए. आर. रहमान (जन्म: 6 जनवरी 1966, चेन्नई, तमिलनाडु, भारत)
अल्लाह रक्खा रहमान, जिन्हें दुनिया ए. आर. रहमान के नाम से जानती है, भारत के सबसे प्रतिष्ठित संगीतकारों में से एक हैं। उनका जन्म चेन्नई में हुआ। उन्होंने भारतीय संगीत को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाई। ऑस्कर, ग्रैमी और बाफ्टा जैसे अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीतकर उन्होंने भारत का नाम रोशन किया। फिल्मों, एल्बमों और सामाजिक परियोजनाओं के जरिए उन्होंने संगीत को आध्यात्मिक और मानवीय संदेश से जोड़ा। उनका योगदान भारतीय सॉफ्ट पावर का मजबूत प्रतीक है।
जयराम ठाकुर (जन्म: 6 जनवरी 1965, मंडी जिला, हिमाचल प्रदेश, भारत)
जयराम ठाकुर हिमाचल प्रदेश के 13वें मुख्यमंत्री रहे हैं। उनका जन्म मंडी जिले में हुआ। वे लंबे समय से सक्रिय राजनीतिज्ञ हैं और संगठनात्मक क्षमता के लिए जाने जाते हैं। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास पर विशेष ध्यान दिया। हिमाचल जैसे पर्वतीय राज्य में संतुलित विकास और प्रशासनिक स्थिरता बनाए रखना उनका प्रमुख योगदान माना जाता है।

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कपिल देव (जन्म: 6 जनवरी 1959, चंडीगढ़, भारत)
कपिल देव भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे महान खिलाड़ियों में से एक हैं। उनका जन्म चंडीगढ़ में हुआ। 1983 में उनकी कप्तानी में भारत ने पहला क्रिकेट विश्व कप जीतकर इतिहास रचा। वे एक शानदार ऑलराउंडर रहे, जिन्होंने बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में रिकॉर्ड बनाए। खेल से संन्यास के बाद भी उन्होंने युवाओं को खेल के प्रति प्रेरित किया। भारतीय क्रिकेट को वैश्विक पहचान दिलाने में कपिल देव का योगदान अमूल्य है।
आमिर रज़ा हुसैन (जन्म: 6 जनवरी 1957, भारत)
आमिर रज़ा हुसैन भारत के प्रसिद्ध रंगमंच अभिनेता और निर्देशक हैं। उन्होंने भारतीय थिएटर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। उनके नाटकों में ऐतिहासिक, सामाजिक और मानवीय विषयों का गहन चित्रण मिलता है। उन्होंने कई विदेशी प्रस्तुतियों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। रंगमंच को जीवंत और वैश्विक बनाने में उनका योगदान भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को मजबूत करता है।

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रवि नाइक (जन्म: 6 जनवरी 1951, गोवा, भारत)
रवि नाइक गोवा के भूतपूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे हैं। उनका जन्म गोवा में हुआ। उन्होंने राज्य की राजनीति में स्थिरता और प्रशासनिक सुधारों पर काम किया। गोवा जैसे छोटे लेकिन संवेदनशील राज्य में पर्यटन, रोजगार और सामाजिक संतुलन बनाए रखने में उनकी भूमिका अहम रही।
बाना सिंह (जन्म: 6 जनवरी 1949, जम्मू-कश्मीर, भारत)
बाना सिंह भारतीय सेना के वीर सपूत हैं, जिन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। उनका जन्म जम्मू-कश्मीर में हुआ। सियाचिन ग्लेशियर में अद्वितीय साहस का प्रदर्शन कर उन्होंने देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान और वीरता दिखाई। उनका जीवन भारतीय युवाओं के लिए देशभक्ति और साहस की प्रेरणा है।
गुलाब कोठारी (जन्म: 6 जनवरी 1949, राजस्थान, भारत)
गुलाब कोठारी राजस्थान पत्रिका समूह के प्रधान संपादक, वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं। उनका जन्म राजस्थान में हुआ। उन्होंने पत्रकारिता को सामाजिक सरोकारों से जोड़ा और वैचारिक लेखन के माध्यम से समाज को जागरूक किया। भारतीय मीडिया में नैतिकता और विचारशीलता के प्रतीक के रूप में उनका योगदान उल्लेखनीय है।

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नरेन्द्र कोहली (जन्म: 6 जनवरी 1940, भारत)
नरेन्द्र कोहली प्रसिद्ध हिन्दी लेखक हैं। उन्होंने भारतीय संस्कृति, इतिहास और दर्शन पर आधारित साहित्य रचा। उनकी रचनाओं में वैचारिक गहराई और भारतीय दृष्टिकोण स्पष्ट झलकता है। हिन्दी साहित्य को समृद्ध करने में उनका योगदान स्थायी माना जाता है।
कमलेश्वर (जन्म: 6 जनवरी 1932, उत्तर प्रदेश, भारत)
कमलेश्वर हिन्दी साहित्य के प्रमुख स्तंभ रहे। उनका जन्म उत्तर प्रदेश में हुआ। वे कहानीकार, उपन्यासकार और पटकथा लेखक थे। उनके साहित्य में आम आदमी की पीड़ा और सामाजिक यथार्थ का सशक्त चित्रण मिलता है। हिन्दी कथा साहित्य को नई दिशा देने में उनका योगदान ऐतिहासिक है।
विजय तेंदुलकर (जन्म: 6 जनवरी 1928, महाराष्ट्र, भारत)
विजय तेंदुलकर भारत के महान नाटककार और रंगमंचकर्मी थे। उनका जन्म महाराष्ट्र में हुआ। उनके नाटक सामाजिक विसंगतियों, सत्ता और मानव मनोविज्ञान पर आधारित होते थे। भारतीय रंगमंच को आधुनिक और यथार्थवादी स्वर देने में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
भरत व्यास (जन्म: 6 जनवरी 1918, भारत)
भरत व्यास बॉलीवुड के प्रसिद्ध गीतकार रहे। उन्होंने भारतीय सिनेमा को भावनात्मक और सांस्कृतिक गीत दिए। उनके गीत आज भी भारतीय संगीत प्रेमियों के दिलों में बसे हुए हैं। हिन्दी फिल्म संगीत को साहित्यिक ऊँचाई देने में उनका योगदान अमर है।

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ख़लील जिब्रान (जन्म: 6 जनवरी 1883, बशरी, लेबनान)
ख़लील जिब्रान विश्वप्रसिद्ध दार्शनिक, कवि और चिंतक थे। उनका जन्म लेबनान में हुआ। उनकी कृति द प्रोफेट ने पूरी दुनिया में आध्यात्मिक चेतना को नई दिशा दी। मानवता, प्रेम और जीवन पर उनके विचार आज भी वैश्विक समाज को प्रेरित करते हैं।

6 जनवरी का इतिहास: राष्ट्र, विश्व और परिवर्तन की गवाही देने वाला दिन

6 जनवरी इतिहास के पन्नों में एक ऐसा दिन है, जिसने भारत की राजनीति, विश्व कूटनीति, सामाजिक सेवा, सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक चेतना को गहराई से प्रभावित किया। इस दिन घटित घटनाएँ केवल तारीखें नहीं हैं, बल्कि वे राष्ट्रों की दिशा बदलने वाले निर्णय, संघर्ष, बलिदान और उपलब्धियाँ हैं। आइए 6 जनवरी के इतिहास की प्रमुख घटनाओं को विस्तृत, तथ्यात्मक और विश्लेषणात्मक रूप में समझते हैं।
1664 – छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा सूरत पर आक्रमण
छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी 1630, शिवनेरी दुर्ग, जुन्नर (पुणे जिला), महाराष्ट्र, भारत में हुआ।
6 जनवरी 1664 को उन्होंने मुगल साम्राज्य के समृद्ध व्यापारिक केंद्र सूरत (गुजरात, भारत) पर आक्रमण किया। यह हमला केवल धन प्राप्ति नहीं था, बल्कि मुगल सत्ता की आर्थिक रीढ़ को तोड़ने की रणनीति थी। इससे मराठा साम्राज्य को संसाधन मिले और स्वराज्य की नींव मजबूत हुई। शिवाजी महाराज का योगदान भारतीय इतिहास में स्वतंत्रता, प्रशासनिक सुधार और सैन्य रणनीति के लिए अमर है।

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1929 – मदर टेरेसा का भारत आगमन
मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त 1910, स्कोप्जे (उस समय ओटोमन साम्राज्य, वर्तमान में उत्तरी मैसेडोनिया) में हुआ।
6 जनवरी 1929 को वे भारत के कलकत्ता (कोलकाता, पश्चिम बंगाल, भारत) पहुँचीं। उन्होंने अपना पूरा जीवन भारत के गरीब, बीमार और उपेक्षित लोगों की सेवा में समर्पित कर दिया। ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ की स्थापना कर उन्होंने मानवता को नई दिशा दी। उनका योगदान निस्वार्थ सेवा, करुणा और वैश्विक मानवीय मूल्यों का प्रतीक है।
1947 – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा विभाजन स्वीकार
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 1885, बंबई (मुंबई), महाराष्ट्र, भारत) में हुई।
6 जनवरी 1947 को कांग्रेस कमेटी ने भारत के विभाजन को स्वीकार किया। यह निर्णय ऐतिहासिक, पीड़ादायक लेकिन तत्कालीन परिस्थितियों में राजनीतिक समाधान के रूप में लिया गया। इस फैसले ने भारत और पाकिस्तान के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। देशहित में यह निर्णय आज़ादी की प्रक्रिया का एक जटिल लेकिन निर्णायक अध्याय था।

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1950 – ब्रिटेन द्वारा चीन की कम्युनिस्ट सरकार को मान्यता
1 अक्टूबर 1949 को गठित चीन की जनवादी गणराज्य सरकार (बीजिंग, चीन) को 6 जनवरी 1950 को ब्रिटेन ने मान्यता दी।
यह कदम शीत युद्ध के दौर में वैश्विक कूटनीति का महत्वपूर्ण संकेत था। इससे चीन को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली और एशिया की राजनीति में शक्ति संतुलन बदला। यह घटना विश्व राजनीति में यथार्थवादी कूटनीति का उदाहरण है।
1976 – चीन का परमाणु परीक्षण
चीन ने लोप नोर (शिनजियांग, चीन) क्षेत्र में 6 जनवरी 1976 को परमाणु परीक्षण किया।
यह परीक्षण चीन की सैन्य और वैज्ञानिक क्षमता का प्रदर्शन था। इससे एशिया में सामरिक संतुलन प्रभावित हुआ और भारत सहित कई देशों की सुरक्षा रणनीतियों पर असर पड़ा। यह घटना वैश्विक परमाणु राजनीति और शक्ति प्रदर्शन का महत्वपूर्ण अध्याय है।

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1980 – सातवीं लोकसभा चुनाव में इंदिरा गांधी की ऐतिहासिक जीत
इंदिरा गांधी का जन्म 19 नवंबर 1917, इलाहाबाद (प्रयागराज), उत्तर प्रदेश, भारत) में हुआ।
6 जनवरी 1980 के आसपास घोषित परिणामों में उनकी अगुवाई वाली कांग्रेस पार्टी को दो-तिहाई बहुमत मिला। यह जीत राजनीतिक पुनरुत्थान का प्रतीक थी। उन्होंने देश में स्थिर सरकार, विदेश नीति और आर्थिक सुधारों को नई दिशा दी।
1983 – आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में कांग्रेस की हार
6 जनवरी 1983 के दौरान कांग्रेस को पहली बार आंध्र प्रदेश और कर्नाटक विधानसभा चुनावों में हार मिली।
यह घटना क्षेत्रीय दलों के उदय और भारतीय लोकतंत्र में बहुदलीय व्यवस्था की मजबूती का संकेत थी। इससे राजनीति में सत्ता के केंद्रीकरण की जगह जनादेश की विविधता सामने आई।
1989 – इंदिरा गांधी हत्याकांड के दोषियों को फाँसी
इंदिरा गांधी की हत्या के दोषी सतवंत सिंह और केहर सिंह को 6 जनवरी 1989 को फाँसी दी गई।
यह निर्णय भारतीय न्याय व्यवस्था में एक संवेदनशील और ऐतिहासिक घटना था। इससे कानून के शासन और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति सख्त संदेश गया।

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2002 – भारत की कूटनीतिक और सैन्य सक्रियता
6 जनवरी 2002 को भारत ने सीमा में घुसे पाकिस्तानी जासूसी विमान को मार गिराया।
इसी वर्ष काठमांडू (नेपाल) में दक्षेस शिखर सम्मेलन सम्पन्न हुआ, जिसमें आतंकवाद के खिलाफ साझा संकल्प लिया गया। यह भारत की राजनीतिक और कूटनीतिक सफलता मानी गई।
2007 – केदारनाथ सिंह को भारत भारती सम्मान
केदारनाथ सिंह का जन्म 7 जुलाई 1934, बलिया जिला, उत्तर प्रदेश, भारत में हुआ।
6 जनवरी 2007 को उन्हें भारत भारती सम्मान देने की घोषणा हुई। उन्होंने हिंदी कविता को जनसंवेदना, ग्रामीण यथार्थ और सांस्कृतिक चेतना से समृद्ध किया। साहित्य में उनका योगदान राष्ट्रीय बौद्धिक विरासत का हिस्सा है।
2010 – दिल्ली मेट्रो यमुना बैंक–आनंद विहार सेक्शन शुरू
6 जनवरी 2010 को नई दिल्ली, भारत में इस मेट्रो सेक्शन का संचालन शुरू हुआ।
यह शहरी परिवहन, पर्यावरण संरक्षण और यातायात सुधार की दिशा में बड़ा कदम था। इससे पूर्वी दिल्ली के लाखों लोगों को लाभ मिला और आधुनिक भारत की बुनियादी ढाँचा क्षमता प्रदर्शित हुई।

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2012 – दमिश्क में आत्मघाती हमला
6 जनवरी 2012 को दमिश्क, सीरिया में हुए आत्मघाती हमले में 26 लोगों की मौत हुई।
यह घटना सीरिया संकट और वैश्विक आतंकवाद की भयावहता को दर्शाती है। इससे अंतरराष्ट्रीय शांति और मानवीय सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े हुए।

युवाओं के हाथों बदलाव की डोर: गोरखपुर में 3C यात्रा के उत्सव ने दिया जलवायु, स्वच्छता और संविधान का सशक्त संदेश

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)। जलवायु परिवर्तन, स्वच्छता से जुड़ी चुनौतियाँ और संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूकता की कमी आज समाज के सामने गंभीर सवाल बनकर खड़ी हैं। इन्हीं मुद्दों पर युवाओं को संवाद, सीख और बदलाव की प्रक्रिया से जोड़ने के उद्देश्य से वी एम्ब्रेस ट्रस्ट द्वारा प्रेमचंद पार्क, गोरखपुर में एक भव्य युवा मेले का आयोजन किया गया।
यह युवा मेला बीते एक वर्ष से संचालित 3-सी (क्लाइमेट, क्लीनलीनेस और कॉन्स्टिट्यूशन) यात्रा का उत्सव रहा, जिसमें युवाओं के निरंतर प्रयास, सहभागिता और नेतृत्व क्षमता स्पष्ट रूप से दिखाई दी। इस यात्रा के दौरान युवाओं ने जलवायु संरक्षण, स्वच्छता और संविधान से जुड़े विषयों को गहराई से समझा और अपने समुदाय व व्यक्तिगत जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में लगातार पहल की। कार्यक्रम के दौरान एक वर्ष तक 3 सी यात्रा से सक्रिय रूप से जुड़े रहे युवाओं को प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
युवा मेले में संविधान पर आधारित इंटरैक्टिव खेल, अनुभवात्मक सीख की गतिविधियाँ और रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ आयोजित की गईं। इन सभी गतिविधियों की परिकल्पना, तैयारी और प्रस्तुति पूरी तरह युवाओं द्वारा की गई। रचनात्मक माध्यमों के जरिए युवाओं ने संवैधानिक मूल्य, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और स्वच्छता जैसे विषयों को सरल, प्रभावी और जनमानस से जुड़ने वाले अंदाज में प्रस्तुत किया, जिसे उपस्थित लोगों ने सराहा।
इस आयोजन की एक खास विशेषता यह रही कि कार्यक्रम का संचार, संचालन और संपूर्ण व्यवस्थापन भी युवाओं ने स्वयं संभाला। मंच संचालन मांडवी और शांध्वी द्वारा किया गया। 3 सी यात्रा के दौरान अर्जित नेतृत्व क्षमता, संवाद कौशल और टीमवर्क का जीवंत उदाहरण पूरे आयोजन में देखने को मिला।
वी एम्ब्रेस ट्रस्ट के संस्थापक नेविश ने बताया कि ऐसे आयोजन केवल कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं की सीख, सहभागिता और सामाजिक परिवर्तन की निरंतर चलने वाली प्रक्रिया का उत्सव होते हैं। संस्था का उद्देश्य युवाओं में संवैधानिक मूल्य, समानता, स्वतंत्रता, बंधुत्व और न्याय का विकास करना है, ताकि वे जागरूक, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक के रूप में समाज और लोकतंत्र को सशक्त बना सकें। उन्होंने कहा कि वी एम्ब्रेस ट्रस्ट भविष्य में भी युवाओं के साथ मिलकर जलवायु, स्वच्छता और संविधान जैसे विषयों पर संवाद और जमीनी स्तर पर कार्य को निरंतर आगे बढ़ाता रहेगा।

कपिल देव: एक कप्तान, जिसने असंभव को संभव बनाया

पुनीत मिश्र

भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं, जो केवल रिकॉर्ड नहीं बनाते, बल्कि सोच की दिशा बदल देते हैं। कपिल देव उन्हीं विरले व्यक्तित्वों में से एक हैं। 1983 में विश्व क्रिकेट के सबसे शक्तिशाली दौर में भारत को विश्व विजेता बनाकर उन्होंने यह साबित कर दिया कि आत्मविश्वास, साहस और नेतृत्व के सामने असंभव शब्द भी हार मान लेता है।
6 जनवरी 1959 को जन्मे कपिल देव ने एक साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बनाई। तेज गेंदबाज के रूप में उनकी ऊर्जा, बल्लेबाज के रूप में उनका निर्भीक अंदाज़ और कप्तान के रूप में उनका विश्वास। इन तीनों ने मिलकर भारतीय क्रिकेट को नई पहचान दी। वे ऐसे खिलाड़ी थे, जो मुश्किल परिस्थितियों में घबराने के बजाय चुनौती को अवसर में बदलते थे।
1983 का विश्व कप भारतीय क्रिकेट के लिए निर्णायक मोड़ साबित हुआ। उस समय वेस्टइंडीज जैसी टीमें अपराजेय मानी जाती थीं और भारतीय टीम को कोई खास दावेदार नहीं समझा जाता था। लेकिन कपिल देव की कप्तानी में टीम ने हर मुकाबले में जुझारूपन दिखाया। जिम्बाब्वे के खिलाफ उनकी 175 रनों की ऐतिहासिक पारी केवल एक बल्लेबाजी प्रदर्शन नहीं थी, बल्कि पूरी टीम में आत्मविश्वास भर देने वाला क्षण थी। फाइनल मुकाबले में रणनीति, संयम और नेतृत्व का ऐसा संतुलन दिखा, जिसने भारत को पहली बार विश्व चैंपियन बना दिया।
कपिल देव की खासियत यह थी कि वे केवल खुद अच्छा प्रदर्शन करने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि अपने साथियों की क्षमता पर भरोसा करते थे। उन्होंने टीम को यह सिखाया कि नाम नहीं, प्रदर्शन मायने रखता है। इसी सोच ने भारतीय क्रिकेट को मानसिक रूप से मजबूत बनाया और आने वाली पीढ़ियों के लिए मजबूत नींव रखी।
खेल के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके व्यक्तिगत कौशल के साथ-साथ देश के लिए किए गए ऐतिहासिक योगदान की भी स्वीकृति है। कपिल देव ने यह सिद्ध किया कि खिलाड़ी का कद केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि उसके प्रभाव से तय होता है।
आज कपिल देव का जन्मदिन केवल एक महान क्रिकेटर का उत्सव नहीं है, बल्कि उस विचार का स्मरण है, जिसने भारतीय खेल इतिहास को नया आत्मविश्वास दिया। उन्होंने देश को यह सिखाया कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि नेतृत्व में विश्वास और कर्म में साहस हो, तो असंभव भी संभव बन जाता है।

मूलांक के अनुसार आज करें सही निर्णय, पाएं सफलता

🔮 अंक ज्योतिष राशिफल 6 जनवरी 2026: जन्मतिथि से जानिए आज का भाग्य, करियर, धन और प्रेम | पंडित सुधीर तिवारी (अंतिम बाबा)
जिस प्रकार राशि के आधार पर भविष्य देखा जाता है, उसी तरह अंक ज्योतिष में जन्म तिथि से व्यक्ति का मूलांक निकलता है। मूलांक के अनुसार दिन का प्रभाव जीवन के हर क्षेत्र—नौकरी, व्यापार, शिक्षा, प्रेम, राजनीति और आर्थिक स्थिति—पर पड़ता है।
मंगलवार, 6 जनवरी 2026 को कौन-सा मूलांक देगा सफलता और किसे बरतनी होगी सावधानी, जानिए विस्तार से।
🔢 मूलांक 1 (जिनकी जन्मतिथि 1, 10, 19, 28)
आज संवाद और संपर्क आपकी सबसे बड़ी ताकत रहेंगे।
कार्य क्षेत्र: नौकरीपेशा लोगों को वरिष्ठ अधिकारियों से सहयोग मिलेगा। नई जिम्मेदारी मिल सकती है।
व्यवसाय: साझेदारी में काम करने वालों के लिए दिन लाभदायक।
शिक्षा: प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को फोकस बनाए रखना होगा।
राजनीति/प्रशासन: नेतृत्व क्षमता उभरेगी, लेकिन वाणी पर संयम रखें।
आर्थिक स्थिति: आय स्थिर रहेगी, खर्च नियंत्रित रखें।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 1
पूज्य देवता: भगवान सूर्य

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🔢 मूलांक 2 (2, 11, 20, 29)
भावनात्मक रूप से मजबूत दिन।
कार्य/नौकरी: टीमवर्क में सफलता मिलेगी।
व्यवसाय: ग्राहक वर्ग बढ़ेगा।
शिक्षा: कला, साहित्य और मनोविज्ञान के छात्रों को लाभ।
कला/संगीत: रचनात्मकता बढ़ेगी।
आर्थिक स्थिति: आमदनी बढ़ेगी, लेकिन बचत सीमित।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 2
पूज्य देवता: मां दुर्गा
🔢 मूलांक 3 (3, 12, 21, 30)
कुछ बड़ा पाने के लिए निजी समय का त्याग करना पड़ सकता है।
कार्य क्षेत्र: प्रमोशन या नई जिम्मेदारी के योग।
व्यवसाय: विस्तार की योजना सफल होगी।
शिक्षा: उच्च शिक्षा के छात्रों के लिए अनुकूल समय।
राजनीति: प्रभाव बढ़ेगा, मान-सम्मान मिलेगा।
आर्थिक स्थिति: आय में वृद्धि।
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 3
पूज्य देवता: भगवान बृहस्पति

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🔢 मूलांक 4 (4, 13, 22, 31)
जिम्मेदारियों का भार महसूस हो सकता है।
कार्य/नौकरी: अतिरिक्त आय के स्रोत तलाशें।
व्यवसाय: रियल एस्टेट व निर्माण से जुड़े लोगों को लाभ।
शिक्षा: तकनीकी छात्रों के लिए अच्छा दिन।
प्रशासन: योजनाओं पर अमल सफल रहेगा।
आर्थिक स्थिति: धीरे-धीरे सुधार।
शुभ रंग: नीला
शुभ अंक: 4
पूज्य देवता: भगवान गणेश
🔢 मूलांक 5 (5, 14, 23)
सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर दिन।
कार्य क्षेत्र: नई नौकरी या प्रोजेक्ट मिल सकता है।
व्यवसाय: मार्केटिंग, मीडिया से जुड़े लोगों को लाभ।
शिक्षा: कम्युनिकेशन स्किल मजबूत होगी।
कला/संगीत: नाम और पहचान मिलेगी।
आर्थिक स्थिति: लाभ के योग।
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 5
पूज्य देवता: भगवान विष्णु

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🔢 मूलांक 6 (6, 15, 24)
त्याग और धैर्य का दिन।
कार्य/नौकरी: काम का दबाव बढ़ेगा।
व्यवसाय: भविष्य की योजना बनाना लाभदायक।
शिक्षा: फैशन, डिजाइन, कला क्षेत्र के छात्रों को सफलता।
परिवार: परिवार के लिए महत्वपूर्ण निर्णय।
आर्थिक स्थिति: खर्च अधिक, संयम जरूरी।
शुभ रंग: गुलाबी
शुभ अंक: 6
पूज्य देवता: मां लक्ष्मी
🔢 मूलांक 7 (7, 16, 25)
आध्यात्मिक सोच बढ़ेगी।
कार्य क्षेत्र: रिसर्च और विश्लेषण से जुड़े कामों में सफलता।
व्यवसाय: जल्दबाजी से बचें।
शिक्षा: उच्च अध्ययन में मन लगेगा।
राजनीति: पर्दे के पीछे काम करने से लाभ।
आर्थिक स्थिति: संतुलित।
शुभ रंग: बैंगनी
शुभ अंक: 7
पूज्य देवता: भगवान शिव

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🔢 मूलांक 8 (8, 17, 26)
मेहनत रंग लाएगी।
कार्य/नौकरी: लंबे समय से अटका काम पूरा होगा।
व्यवसाय: निवेश से लाभ।
प्रशासन: अधिकार बढ़ेंगे।
आर्थिक स्थिति: स्थिरता आएगी।
शुभ रंग: काला
शुभ अंक: 8
पूज्य देवता: शनिदेव
🔢 मूलांक 9 (9, 18, 27)
ऊर्जा और आत्मविश्वास से भरा दिन।
कार्य क्षेत्र: साहसिक निर्णय सफल होंगे।
व्यवसाय: जोखिम लेकर लाभ।
शिक्षा: खेल और रक्षा क्षेत्र के छात्रों को सफलता।
प्रेम जीवन: संबंध मजबूत होंगे।
आर्थिक स्थिति: अच्छा लाभ।
शुभ रंग: नारंगी
शुभ अंक: 9
पूज्य देवता: भगवान हनुमान

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डिस्क्लेमर:यह अंक राशिफल सामान्य अंक ज्योतिष गणनाओं पर आधारित है। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

योगी-मोदी मुलाक़ात: मुस्कान, आत्मविश्वास और राजनीतिक संकेत

दिल्ली में हुई योगी-मोदी मुलाक़ात को केवल औपचारिक शिष्टाचार के रूप में देखना इसके राजनीतिक निहितार्थों को सीमित कर देना होगा। तस्वीरों में दिखाई देती मुस्कान, चेहरे की सहज चमक और आत्मविश्वास भरी देहभाषा यह संकेत देती है कि यह मुलाक़ात साझा संतोष और निरंतर संवाद का परिणाम है। राजनीति में ऐसे दृश्य अक्सर शब्दों से अधिक अर्थ रखते हैं।
योगी का नेतृत्व अब केवल गोरखपुर या उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहा है। प्रशासनिक निर्णयों में स्पष्टता, कानून-व्यवस्था पर सख़्त रुख़ और योजनाओं के क्रियान्वयन में गति ने उनकी पहचान को एक मज़बूत प्रशासक के रूप में स्थापित किया है। यही कारण है कि दिल्ली में उनकी उपस्थिति केवल राज्य-स्तरीय नेता की नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विमर्श में भागीदारी की तरह देखी जाती है।
मुलाक़ात के दौरान दिखी सहजता यह बताती है कि केंद्र और राज्य के बीच संवाद में संतुलन और तालमेल बना हुआ है। यह तालमेल शासन की निरंतरता और नीतिगत स्थिरता के लिए आवश्यक माना जाता है। ऐसे समय में जब राजनीतिक वातावरण अक्सर अटकलों से भरा रहता है, यह दृश्य भरोसे और स्पष्टता का संकेत देता है।
मुस्कान के पीछे का आत्मविश्वास केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि एक शासन मॉडल से जुड़ा हुआ दिखाई देता है। उत्तर प्रदेश में लागू की गई नीतियों और प्रशासनिक फैसलों का असर अब राज्य की सीमाओं से बाहर भी चर्चा का विषय बन रहा है। यह आत्मविश्वास उपलब्धियों से उपजता है, न कि केवल बयानबाज़ी से।
मोदी की दिल्ली और योगी की राजनीति का यह संवाद किसी एक क्षण तक सीमित नहीं है। यह उस व्यापक राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसमें नेतृत्व की भूमिकाएँ स्पष्ट रहती हैं और जिम्मेदारियों का बँटवारा संतुलित रूप से आगे बढ़ता है। यही संतुलन शासन को स्थायित्व प्रदान करता है।
चेहरे की चमक और सुखद भाव राजनीति में सकारात्मकता का संकेत होते हैं। जब नेतृत्व आत्मविश्वास के साथ सामने आता है, तो उसका असर कार्यकर्ताओं से लेकर आम जनता तक दिखाई देता है। इस दृष्टि से यह मुलाक़ात संदेश देती है कि राजनीतिक यात्रा में निरंतरता और संवाद दोनों समान रूप से आवश्यक हैं।
अंततः योगी का जलवा गोरखपुर से आगे बढ़कर व्यापक राजनीतिक परिदृश्य में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। यह विस्तार किसी आक्रामक दावे के रूप में नहीं, बल्कि संतुलित नेतृत्व और निरंतर कार्य के परिणामस्वरूप उभरता दिखाई देता है। राजनीति में यही संतुलन लंबे समय तक भरोसे का आधार बनता है।

भारतेन्दु हरिश्चंद्र : हिंदी के पितामह-नवजागरण के शिल्पकार

नवनीत मिश्र

‘निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल’…यह पंक्ति मात्र एक काव्य-सूत्र नहीं, बल्कि उस वैचारिक क्रांति की उद्घोषणा है, जिसने आधुनिक हिंदी साहित्य की दिशा और दृष्टि तय की। इस क्रांति के केंद्र में थे भारतेन्दु हरिश्चंद्र, जिन्हें आधुनिक हिंदी साहित्य का पितामह कहा जाता है। वे केवल एक साहित्यकार नहीं, बल्कि भारतीय नवजागरण के ऐसे अग्रदूत थे जिन्होंने भाषा, समाज और संस्कृति को नई चेतना प्रदान की।
भारतेन्दु हरिश्चंद्र का व्यक्तित्व बहुआयामी था। वे लेखक, कवि, नाटककार, निबंधकार, संपादक और कुशल वक्ता के रूप में समान अधिकार से प्रतिष्ठित थे। उनके साहित्य में केवल सौंदर्य-बोध नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकार, राष्ट्रीय चेतना और जनजागरण की स्पष्ट धड़कन सुनाई देती है। उन्होंने साहित्य को राजदरबारों और अभिजात वर्ग की सीमा से निकालकर जनसामान्य की आवाज़ बनाया।
उन्नीसवीं शताब्दी का भारत सामाजिक कुरीतियों, राजनीतिक पराधीनता और सांस्कृतिक आत्मविस्मृति से जूझ रहा था। ऐसे समय में भारतेन्दु हरिश्चंद्र ने हिंदी को केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और राष्ट्रीय चेतना का माध्यम बनाया। उनका आग्रह था कि जब तक समाज अपनी निज भाषा में सोचने और लिखने की शक्ति अर्जित नहीं करेगा, तब तक सच्ची उन्नति संभव नहीं है। इसी कारण उन्होंने हिंदी गद्य को सशक्त, सरल और प्रभावी रूप दिया।
नाटक के क्षेत्र में भारतेन्दु का योगदान विशेष उल्लेखनीय है। उनके नाटक सामाजिक व्यंग्य, यथार्थ और सुधार चेतना से ओत-प्रोत हैं। वे मंच के माध्यम से समाज को आईना दिखाते थे। कभी तीखे हास्य से, तो कभी करुणा और संवेदना के सहारे। उनके पात्र जीवन से उठाए गए प्रतीत होते हैं, जिनके माध्यम से तत्कालीन समाज की विसंगतियाँ उजागर होती हैं।
एक संपादक के रूप में भारतेन्दु हरिश्चंद्र ने पत्र-पत्रिकाओं को विचार-प्रसार का सशक्त माध्यम बनाया। उनके संपादकीय लेखों में निर्भीकता, तर्कशीलता और राष्ट्रहित का स्पष्ट स्वर दिखाई देता है। वे मानते थे कि साहित्य का दायित्व केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को जाग्रत करना भी है।
भारतेन्दु हरिश्चंद्र का साहित्य आज भी प्रासंगिक है, क्योंकि उसमें भाषा के प्रति प्रेम, समाज के प्रति उत्तरदायित्व और राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता का अद्भुत समन्वय है। उन्होंने हिंदी को आत्मगौरव की भाषा बनाया और साहित्य को सामाजिक परिवर्तन का औज़ार। यही कारण है कि उन्हें केवल एक युग का प्रतिनिधि नहीं, बल्कि हिंदी नवजागरण का शिल्पकार माना जाता है।
भारतेन्दु हरिश्चंद्र का योगदान हिंदी साहित्य के इतिहास में एक स्थायी प्रकाशस्तंभ की तरह है। उनकी विचारधारा, रचनात्मकता और भाषा-चेतना आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करती रहेगी, क्योंकि उन्होंने सिखाया कि निज भाषा में ही आत्मा की सच्ची आवाज़ बसती है।

यात्रा, व्रत और शुभ कार्यों के लिए 06 जनवरी क्यों है खास?

🪔 आज का विस्तृत पंचांग (06/01/2026)
तिथि
कृष्ण पक्ष तृतीया – 05 जनवरी 09:56 AM से 06 जनवरी 08:01 AM तक
कृष्ण पक्ष चतुर्थी (क्षय तिथि) – 06 जनवरी 08:01 AM से 07 जनवरी 06:52 AM तक
🌟 नक्षत्र – आश्लेषा – 06 जनवरी 12:17 PM तक
मघा – 06 जनवरी 12:17 PM से 07 जनवरी 11:56 AM तक
🧘‍♂️ योग
प्रीति – 06 जनवरी 08:21 PM तक
आयुष्मान – 08:21 PM के बाद
🔱 करण – विष्टि – 08:02 AM तक
बव – 08:02 AM से 07:21 PM तक
बालव – 07:21 PM से 07 जनवरी 06:53 AM तक

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📜 संवत एवं काल गणना
विक्रम संवत: 2082 (कालयुक्त)
शक संवत: 1947 (विश्वावसु)
चन्द्र मास:अमांत – पौष
पूर्णिमांत – माघ
ऋतु: द्रिक – शिशिर | वैदिक – हेमंत
अयन: दक्षिणायन
☀️ सूर्य और 🌙 चंद्रमा का समय
सूर्योदय: 07:13 AM
सूर्यास्त: 05:51 PM
चन्द्रोदय: 09:07 PM

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चन्द्रास्त: 07 जनवरी 10:09 AM
🌞 सूर्य व 🌙 चंद्र राशि
सूर्य राशि: धनु
चंद्र राशि:12:17 PM तक – कर्क
12:17 PM के बाद – सिंह
🚫 अशुभ काल (इन समयों में शुभ कार्य न करें)
राहु काल: 03:12 PM – 04:31 PM
यम गण्ड: 09:53 AM – 11:12 AM
कुलिक: 12:32 PM – 01:52 PM
दुर्मुहूर्त:09:21 AM – 10:03 AM
11:12 PM – 12:05 AM
वर्ज्यम्: 12:06 AM – 01:41 AM
✅ शुभ काल (शुभ कार्यों हेतु उत्तम)
ब्रह्म मुहूर्त: 05:37 AM – 06:25 AM
अमृत काल: 10:44 AM – 12:16 PM
अभिजीत मुहूर्त: 12:11 PM – 12:53 PM
✨ विशेष योग व पर्व
सर्वार्थसिद्धि योग:07:13 AM से 12:17 PM तक (आश्लेषा नक्षत्र एवं मंगलवार)
त्योहार/व्रत: अंगारकी चतुर्थी
सकट चौथ
संकष्टी गणेश चतुर्थी
🧭 दिशा शूल व यात्रा विचार
आज किस दिशा की यात्रा वर्जित है:
👉 उत्तर दिशा (मंगलवार को)
यदि यात्रा आवश्यक हो तो क्या खाकर जाएं:
👉 गुड़ अथवा घी खाकर यात्रा करने से दोष शमन होता है।
किस दिशा की यात्रा लाभकारी:
👉 पूर्व एवं दक्षिण दिशा में यात्रा से लाभ, सफलता और शुभ फल मिलते हैं।

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📌 चंद्रबल (राशि अनुसार)
12:17 PM तक शुभ राशियाँ:
वृषभ, कर्क, कन्या, तुला, मकर, कुंभ
12:17 PM के बाद शुभ राशियाँ:
मिथुन, सिंह, तुला, वृश्चिक, कुंभ, मीन
🔔 गण्डमूल नक्षत्र
आश्लेषा: 05 जनवरी 01:24 PM – 06 जनवरी 12:17 PM
मघा: 06 जनवरी 12:17 PM – 07 जनवरी 11:56 AM
✍️ नोट- इस पंचांग में किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए “राष्ट्र की परम्परा” जिम्मेदार नहीं है। किसी भी धार्मिक, ज्योतिषीय या महत्वपूर्ण कार्य से पूर्व योग्य विद्वान/आचार्य से परामर्श अवश्य लें।

बिना परिपत्र बदली गई निविदा शर्तें, उठे सवाल

PWD देवरिया में निविदा प्रक्रिया पर सवाल, बिना शासनादेश नई शर्त से ठेकेदारों को किया गया बाहर

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।लोक निर्माण विभाग (PWD) के देवरिया वृत्त में पांटून पीपा पुल के खोलने–बांधने से जुड़ी निविदा प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। विभाग के गठन के बाद से यह कार्य मार्ग श्रेणी के अनुभवी ठेकेदारों के माध्यम से शासनादेश के अनुरूप कराया जाता रहा है, लेकिन वर्तमान अधीक्षण अभियंता के कार्यकाल में इस परंपरागत व्यवस्था में कथित रूप से मनमाने बदलाव किए जाने का आरोप है।
आरोप है कि बिना किसी स्पष्ट शासनादेश या आधिकारिक परिपत्र के पांटून पीपा पुल की निविदा में “सेतु पंजीकरण” (Bridge Registration) को अनिवार्य कर दिया गया। इस नई शर्त के चलते कई योग्य और अनुभवी ठेकेदार निविदा प्रक्रिया से बाहर हो गए, जिससे प्रतिस्पर्धा सीमित हो गई। विशेषज्ञों का मानना है कि निविदा में अचानक शर्तें जोड़ना न केवल नियमों के विरुद्ध है, बल्कि पारदर्शिता और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
ठेकेदारों की आपत्ति, फिर भी नहीं सुनी गई बात
प्रतिस्पर्धा में भाग लेने वाले ठेकेदारों, जिनमें गिरिजेश कुमार मिश्रा सहित अन्य शामिल हैं, ने इस नई शर्त पर आपत्ति जताते हुए मुख्य अभियंता, गोरखपुर क्षेत्र को लिखित रूप से अवगत कराया। ठेकेदारों का कहना है कि शासनादेशों का पालन सुनिश्चित कराना मुख्य अभियंता की जिम्मेदारी है, इसके बावजूद प्रकाशित निविदाओं में वही विवादित शर्त लागू रही।
आरोप यह भी है कि 3 जनवरी 2026 को अवकाश के दिन निविदा खोलकर कुछ ठेकेदारों को अपात्र घोषित कर दिया गया, जिससे संदेह और गहराता है। ठेकेदारों का दावा है कि प्रमुख अभियंता स्तर से भी इस शर्त को लेकर दिशा-निर्देश दिए गए थे, फिर भी उनका पालन नहीं हुआ।
मुख्यमंत्री के निकटवर्ती जिले में नियमों की अनदेखी?
देवरिया जिला मुख्यमंत्री के गृह जनपद के निकट है। ऐसे में नियमों और परिपत्रों की कथित अनदेखी को लेकर शासन की छवि पर भी असर पड़ने की चर्चा है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि यदि मुख्यमंत्री के समीपवर्ती जिलों में ही इस तरह की अनियमितताएं हो रही हैं, तो अन्य जनपदों की स्थिति क्या होगी।
निविदा निरस्त कर पुनः प्रकाशन की मांग
ठेकेदार गिरिजेश कुमार मिश्रा द्वारा मुख्य अभियंता गोरखपुर क्षेत्र को भेजे गए पत्र में मांग की गई है कि विशेष शर्त लगाकर जारी की गई निविदा को निरस्त कर शासनादेश के अनुरूप पुनः निविदा प्रकाशित की जाए, ताकि सभी पात्र ठेकेदारों को समान अवसर मिल सके और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित हो।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि लोक निर्माण विभाग देवरिया वृत्त में उठे इन आरोपों पर कोई ठोस कार्रवाई होती है या मामला पूर्व की तरह जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में चला जाता है। जब इस संदर्भ में अधीक्षण अभियंता से बात करने की कोशिश की गई तो बात नहीं हो सकी।

फरियादियों की समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए जिलाधिकारी ने दिए कड़े निर्देश

सम्पूर्ण समाधान दिवस में आए 77 मामलों में से 11 का मौके पर निस्तारण

कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)कसया तहसील सभागार में आयोजित आज सम्पूर्ण समाधान दिवस के अवसर पर जिलाधिकारी महेन्द्र सिंह तंवर एवं पुलिस अधीक्षक केशव कुमार ने जनसुनवाई करते हुए फरियादियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और उनके त्वरित व निष्पक्ष निस्तारण का निर्देश दिए।सम्पूर्ण समाधान दिवस में तहसील क्षेत्र के सुदूरवर्ती गांवों से बड़ी संख्या में फरियादी अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। जिलाधिकारी श्री तंवर ने एक-एक कर सभी प्रार्थनापत्रों को सुना और संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि आम जनता की समस्याओं का समाधान कराना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सभी अधिकारी एवं कर्मचारी प्राप्त प्रार्थनापत्रों का निष्पक्ष, पारदर्शी एवं समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करें। शिकायतों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।पुलिस अधीक्षक केशव कुमार ने पुलिस विभाग से संबंधित प्रार्थनापत्रों के शीघ्र एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुलिस से जुड़े मामलों में पीड़ितों को समय पर न्याय मिलना चाहिए और इसमें किसी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।सम्पूर्ण समाधान दिवस के दौरान विभिन्न विभागों से कुल 77 मामले प्राप्त हुए, जिनमें राजस्व विभाग के 49, पुलिस विभाग के 11, विकास विभाग के 4, कृषि विभाग के 5, खाद्य एवं रसद विभाग के 4 तथा अन्य विभागों के 4 प्रकरण शामिल रहे। इनमें से मौके पर ही राजस्व विभाग के 5, पुलिस विभाग के 2, कृषि विभाग के 2 तथा खाद्य एवं रसद विभाग के 2 सहित कुल 11 मामलों का निस्तारण कर दिया गया। शेष 66 प्रकरणों को संबंधित विभागों को समयबद्ध निस्तारण हेतु प्रेषित किया गया।इस अवसर पर परियोजना निदेशक पीयूष, मुख्य चिकित्सा अधिकारी चन्द्र प्रकाश, बीएस राम जियावन मौर्य, उप कृषि निदेशक अतिंद्र सिंह, उपजिलाधिकारी डॉ. संतराज सिंह बघेल, सहित समस्त जनपद स्तरीय अधिकारी एवं क्षेत्राधिकारी कुन्दन सिंह, तहसीलदार धर्मवीर सिंह, नायब तहसीलदार संदीप कुमार, अधिशासी अधिकारी अंकिता शुक्ला, एवं अन्य विभागों के अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।

“जीवन को हां, नशे को न”: जनपद न्यायाधीश ने दिलाई शपथ

नशा मुक्त समाज के संकल्प के साथ राष्ट्रीय युवा सप्ताह का शुभारंभ

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशन में आगामी 12 जनवरी को मनाई जाने वाली स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर सोमवार को जनपद न्यायालय सभागार में राष्ट्रीय युवा सप्ताह कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जनपद न्यायाधीश मोहन लाल विश्वकर्मा ने न्यायिक अधिकारियों, पराविधिक स्वयंसेवकों एवं पैनल लायर्स को नशा एवं ड्रग्स जैसे दुर्व्यसनों से दूर रहने के लिए “जीवन को हां और ड्रग्स को ना” की शपथ दिलाई।
अपने संबोधन में जनपद न्यायाधीश मोहन लाल विश्वकर्मा ने कहा कि 5 जनवरी से 12 जनवरी तक स्वामी विवेकानंद जयंती के उपलक्ष्य में जनपद स्तर पर सप्ताहभर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों का आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा अलग-अलग स्वरूपों में किया जाएगा। उन्होंने युवाओं से स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को अपनाने और समाज को सकारात्मक दिशा देने का आह्वान किया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं अपर जिला जज देवेंद्र नाथ गोस्वामी ने सप्ताह भर चलने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए लोगों से उत्साहपूर्वक सहभागिता सुनिश्चित करने की अपील की।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल अन्जय कुमार श्रीवास्तव ने स्वामी विवेकानंद के विचारों को साझा करते हुए कहा कि उन्होंने योग एवं वेदांत के माध्यम से भारतीय दर्शन को वैश्विक पहचान दिलाई।
कार्यक्रम में प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय नासिर अहमद, अपर जिला जज गजेंद्र, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट चेतना त्यागी, सिविल जज संजय राज पांडेय, न्यायिक अधिकारी सुनील कुमार सिंह, मिमोह यादव, भारती तायल, अशोक कुमार कसौधन, निधि मिश्रा, नरेंद्र कुमार यादव, अभिनव त्रिपाठी, संजीव कुमार पांडेय, मो. दानिश, प्रज्ञा श्रीवास्तव, प्राधिकरण लिपिक आर. भवन चौधरी, पैनल लायर्स सुरेश चंद्र पांडेय, इमरान खान, रंजू यादव, पीएलवी त्रिलोकी सिंह, अफराक अहमद, मंजू रानी, जयशंकर यादव, मुलायम सिंह यादव सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

डीएम ने नालों से गुजर रही पेयजल पाइप लाइनों को तत्काल सुरक्षित कराने के दिए निर्देश

देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)l जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने ओवरब्रिज के निकट एसएसबीएल इंटर कॉलेज देवरिया के पास निरीक्षण के दौरान पाया कि कुछ स्थानों पर पेयजल पाइप लाइनें नालों के बीच से होकर गुजर रही हैं, जो जनस्वास्थ्य की दृष्टि से उचित नहीं है। उन्होंने इस स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की।निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने नगर पालिका परिषद देवरिया एवं जल निगम के अधिकारियों को निर्देशित किया कि ऐसे सभी स्थलों को चिन्हित कर पेयजल पाइप लाइनों पर तत्काल सुरक्षा कवरिंग कराई जाए, जिससे किसी भी स्थिति में नाले का पानी पाइप लाइन के संपर्क में न आ सके।जिलाधिकारी ने कहा कि नागरिकों को स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए और सभी आवश्यक उपाय सुनिश्चित किए जाएं, ताकि आमजन के स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

लोकतांत्रिक और सेकुलर मिज़ाज के कारण उर्दू सदैव जीवंत रहेगी: डॉ महबूब हसन

मुंबई यूनिवर्सिटी के उर्दू विभाग में डीडीयूजीयू के डॉ. महबूब हसन का विशिष्ट व्याख्यान

मुंबई (राष्ट्र की परम्परा)। मुंबई यूनिवर्सिटी के उर्दू विभाग में आयोजित विशिष्ट व्याख्यान में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के उर्दू के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.महबूब हसन ने कहा कि उर्दू भाषा अपने लोकतांत्रिक स्वभाव और सेकुलर चरित्र के कारण हमेशा जीवित रहेगी। उन्होंने कहा कि उर्दू की रगों में हिंदुस्तान की सांस्कृतिक विविधता बहती है और इसके पास इस मिट्टी की सामाजिक, सांस्कृतिक व साहित्यिक विरासत का समृद्ध भंडार है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता उर्दू विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर अब्दुल्ला इम्तियाज अहमद ने की। इस अवसर पर डॉ महबूब हसन का अंगवस्त्र और पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया। व्याख्यान के दौरान उन्होंने उर्दू भाषा और साहित्य की मौजूदा स्थिति पर विस्तार से अपने विचार रखे और इसके उज्ज्वल भविष्य की संभावना पर बल दिया।
स्वागत भाषण में सहायक आचार्य डॉ ताबिश खान ने कहा कि डॉ महबूब हसन अध्यापन के साथ-साथ उर्दू साहित्य जगत में निरंतर सक्रिय हैं। उनकी रचनाएं राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रही हैं। जंगल जंगल, तितली रानी, टुंडे कबाब, इस्मत चुगताई व जैन ऑस्टिन और निकात-ए-फिक्शन उनकी प्रमुख कृतियां हैं। बाल साहित्य और हास्य-व्यंग्य के क्षेत्र में उनकी विशेष पहचान है, जिससे दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित हो रहा है।


अध्यक्षता करते हुए प्रोफेसर अब्दुल्ला इम्तियाज अहमद ने कहा कि डॉ महबूब हसन ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से एमफिल और पीएचडी की उपाधियां प्राप्त की हैं। ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले डॉ. हसन ने अपनी साहित्यिक साधना से उर्दू भाषा और साहित्य में अलग पहचान बनाई है। उनकी रचनाओं में समकालीन सामाजिक, राजनीतिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक विसंगतियों पर तीखा व्यंग्य देखने को मिलता है।
व्याख्यान के दौरान डॉ. महबूब हसन ने हास्य-व्यंग्य रचना “मैं पटाखे से ही मर जाऊंगा, बम रहने दे” का पाठ किया, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा। उनकी प्रस्तुति ने कार्यक्रम को जीवंत बना दिया।
इस अवसर पर उर्दू विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कमर सिद्दीकी, डॉ. अहरार अहमद, डॉ. तबस्सुम खान सहित शोधार्थी और छात्र-छात्राओं की बड़ी संख्या मौजूद रही। अंत में सहायक आचार्य डॉ. सईदुर्रहमान ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।