Tuesday, June 16, 2026
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फर्जी एडमिशन लेटर बनाकर ठगी करने वाला अभियुक्त गिरफ्तार

डिप्लोमा कोर्स में दाखिले के नाम पर 26.85 लाख रुपये हड़पे

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
थाना रामगढ़ताल पुलिस ने डिप्लोमा कोर्स में दाखिला दिलाने के नाम पर फर्जी एडमिशन लेटर जारी कर लाखों रुपये की ठगी करने वाले वांछित अभियुक्त को गिरफ्तार किया है।
पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए अमित दूबे पुत्र सकलेश दूबे निवासी कैलाशपुरी, हनुमान नगर (कंकड़बाग), थाना पत्रकारनगर, जनपद पटना (बिहार) को गिरफ्तार किया। आरोपी के खिलाफ थाना रामगढ़ताल में विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज था।
पुलिस के अनुसार, अभियुक्त ने वादी के पुत्र को एमबीबीएस के बाद डिप्लोमा कोर्स डी0सी0एच में दाखिला दिलाने का झांसा दिया। इस दौरान उसने फर्जी व कूटरचित एडमिशन लेटर जारी कर धोखाधड़ी करते हुए कुल 26,85,000 रुपये हड़प लिए। पीड़ित की तहरीर के आधार पर थाना रामगढ़ताल में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई थी।
जांच के दौरान आरोपी की तलाश की जा रही थी, जिसे पुलिस टीम ने गिरफ्तार कर लिया। मामले में अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है।
इस कार्रवाई में उ0नि0 आनंद कुमार उपाध्याय, उ0नि0 सुनील यादव एवं उ0नि0 सुनील शर्मा की टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

दहेज हत्या के मामले में 2 गिरफ्तार ससुराल पक्ष पर कार्रवा

महिला उत्पीड़न के खिलाफ पुलिस की सख्त कार्रवाई जारी

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
थाना कैण्ट पुलिस ने दहेज हत्या के मामले में वांछित एक अभियुक्त और एक अभियुक्ता को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई को महिला संबंधी अपराधों पर अंकुश लगाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
पुलिस टीम ने रामरतन मौर्या उर्फ अमरजीत पुत्र रामप्रीत मौर्या तथा विद्यावती देवी पत्नी रामप्रीत मौर्या निवासी रानीडीहा थाना कैण्ट जनपद गोरखपुर को गिरफ्तार किया। दोनों आरोपियों के विरुद्ध दहेज हत्या और दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज था।
पुलिस के अनुसार, थाना कैण्ट में पंजीकृत मु0अ0सं0 214/2026 में आरोपियों के खिलाफ धारा 85, 80(2), 115(2), 352, 351(3) भा0न्या0सं0 व 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले में दोनों आरोपी वांछित चल रहे थे, जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी की कार्रवाई उ0नि0 सुनील कुमार यादव के नेतृत्व में पुलिस टीम द्वारा की गई, जिसमें म0उ0नि0 मधु यादव सहित अन्य पुलिसकर्मी शामिल रहे।
पुलिस ने बताया कि मामले में आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।

बारिश से सड़को पर जल भरावजनजीवन अस्त व्यस्त

बरहज /देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
सोमवार दिन के लगभग 11 बजे से हो रही रुक-रुक कर बारिश ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। कभी कभी भारी बारिश से लोगों को परेशानीयों का सामना करना पड़ रहा है।
बताते चले कि नगर के मुख्य सड़क से रेलवे स्टेशन तक जाने वाली सड़क के अत्यधिक जर्जर एवं गड्ढे हो जाने के बारिश से गड्ढे तालाब मे तब्दील हो गई है।सड़क पर सैलाब जैसी स्थिति बन गई है। पैदल चलने वालों एवं दोपहिया वाहन चालकों को आने जाने में भारी दिक्कतो का सामना करना पड़ रहा है, पानी का कोई निकास नहीं होने से बारिश का पानी सड़क पर जम जा रहा है।
कई जगह तो राहगीर कीचड़ व फिसलन से गिरकर चोटिल भी हुए।
बेमौसम बारिश के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में बुरा असर पड़ा है। बारिश के कारण किसान अपने पशुओं के लिए चारा भी नहीं जुटा पाए। खेतों में पानी भरने से सब्जी के फसल को नुकसान होने की आशंका है। बाजार में सन्नाटा पसरा रहा।
इस जलभराव को लेकर अवधेश चौधरी ने कहा कि, रेलवे कि सड़क का टेंडर हो जाने बावजूद आज तक उस पर कार्य शुरू नहीं किया गया नगर प्रशासन द्वारा। उन्होंने कहा कि ज़ब सूखे मे लोगो का चलना मुश्किल हो जाता है तो बारिश के समय बड़ी भयावह स्थिति उतपन्न हो जाती है।
समाज सेवी कमलेश शुक्ला ने बताया कि वर्षो से जर्जर अवस्था मे पड़ा रेलवे स्टेशन रोड पर विद्यार्थियों, बाजार से खरीददारी करने वालों व घाटों पर अपनी मन्नत पूरा करने वाले श्रद्धालुओं का आना जाना होता है, लेकिन नगर प्रशासन ख़ामोशी का चादर ओढ़े बैठा है।
इस क्रम मे जिला सचिव भाकपा अरविन्द कुशवाहा ने कहा कि रेलवे सड़क को लेकर हम लोगो ने कई बार इओ को ज्ञापन सौप कर शीघ्र कार्य कराने कि मांग की है। लेकिन बरहज विधानसभा क्षेत्र कि जनता के लिए यह दुर्भाग्य कि बात है कि इस सड़क का टेंडर हो जाने के बाद भी नगरपालिका द्वारा कार्य शुरू नहीं कराया गया। चाहे जनता जलभराव मे चले या सुख कर जर्जर हुए इस सड़क पर किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता है।

देवरिया: महिला आरक्षण बिल के विरोध में सपा का प्रदर्शन, विजय रावत ने भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। देवरिया जिले के बरहज क्षेत्र में सोमवार को समाजवादी पार्टी (सपा) के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने महिला आरक्षण बिल के विरोध में प्रदर्शन किया। इस दौरान सपा नेता विजय रावत ने भाजपा सरकार पर महिलाओं के साथ “धोखा” करने का आरोप लगाया।

प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए विजय रावत ने कहा कि महिला आरक्षण बिल के नाम पर भाजपा केवल राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बिल महिलाओं के वास्तविक सशक्तीकरण के बजाय उनके अधिकारों को कमजोर करने का माध्यम बन सकता है।

रावत ने कहा कि देश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध, महंगाई, बेरोजगारी और अशिक्षा जैसे मुद्दों पर सरकार ठोस कदम उठाने में विफल रही है। उनके अनुसार, महिला आरक्षण बिल में पिछड़े, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक वर्ग की महिलाओं के हितों की अनदेखी की गई है, जिससे सामाजिक असंतुलन पैदा हो सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि बिल की प्रक्रिया और आधार पर सवाल उठाना विरोध नहीं, बल्कि महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए आवश्यक है। रावत ने जनगणना आधारित आंकड़ों और पारदर्शी प्रक्रिया की मांग करते हुए कहा कि बिना स्पष्ट आधार के लाया गया यह बिल प्रभावी नहीं होगा।

प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और बिल में सुधार की मांग की। इस मौके पर अमित प्रधान, संजय सिंह, राहुल यादव, अजीत जोगी, विकास यादव, वीरेंद्र कुमार, रणविजय सिंह, दिनेश यादव, विक्की सिंह और महावीर गुप्ता सहित कई लोग मौजूद रहे।

देवरिया: बिजली समस्या को लेकर उपभोक्ताओं में आक्रोश, 7 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। देवरिया जिले के बरहज क्षेत्र में बिजली समस्याओं को लेकर उपभोक्ताओं में भारी आक्रोश देखने को मिला। सोमवार को क्षेत्र के उपभोक्ताओं ने स्मार्ट मीटर, प्री-पेड बिलिंग और लोकल फॉल्ट समेत सात सूत्रीय मांगों को लेकर बिजली विभाग को ज्ञापन सौंपा।

उपभोक्ताओं का आरोप है कि बिजली विभाग के अधिकारी और कर्मचारी आम जनता के साथ सही व्यवहार नहीं करते हैं। उन्होंने एसडीओ, जेई समेत अन्य कर्मियों पर धमकी देने और समस्याओं की अनदेखी करने का भी आरोप लगाया।

ज्ञापन में उपभोक्ताओं ने प्रमुख मांगें रखीं, जिनमें स्मार्ट मीटर हटाकर मैनुअल मीटर लगाने, प्री-पेड बिलिंग को पोस्टपेड में बदलने, लोकल फॉल्ट को तुरंत ठीक करने और जले हुए ट्रांसफार्मर को 24 घंटे के भीतर बदलने की मांग शामिल है। इसके अलावा उपकेंद्र पर कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए भ्रमण रजिस्टर रखने, गलत बिजली बिलों का तत्काल निस्तारण करने और अधिकारियों के व्यवहार को सहयोगात्मक बनाने की भी मांग की गई।

ज्ञापन सौंपने वालों में आनंद जायसवाल, मनोज गुप्ता सहित कई उपभोक्ता शामिल रहे। इस दौरान अजीत जायसवाल, प्रदीप जायसवाल, अमित जायसवाल, अमरजीत सोनकर, मुरारी अग्रवाल, राकेश जायसवाल, बड़े तिवारी, बृजेश चौहान, विन्देश्वर गिरी, पुरुषोत्तम गुप्ता, महेश जायसवाल, विष्णु विश्वकर्मा, अनिल मिश्रा, राणा प्रताप सिंह और अरुण गुप्ता सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

उपभोक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया, तो वे धरना-प्रदर्शन और घेराव के लिए बाध्य होंगे, जिसकी जिम्मेदारी विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की होगी।

तकनीकी शिक्षा से प्रशासनिक नेतृत्व तक, देवरिया के नए डीएम की प्रेरक कहानी

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)को नया जिलाधिकारी मिल गया है। वर्ष 2015 बैच के आईएएस अधिकारी मधुसूदन हुगली को जिले की कमान सौंपी गई है। प्रशासनिक कार्यशैली, तकनीकी समझ और शांत नेतृत्व के लिए पहचाने जाने वाले मधुसूदन हुगली मूल रूप से कर्नाटक के बेलगौम के निवासी हैं।
मधुसूदन हुगली ने मेकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की पढ़ाई की है। तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी की और अपने पहले ही प्रयासों में सफलता हासिल कर भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित हुए। आईएएस बनने के बाद उन्होंने बैंगलौर में प्रशासनिक प्रशिक्षण प्राप्त किया, जहां से उन्होंने प्रशासनिक प्रबंधन और सुशासन की बारीकियां सीखीं।
उत्तर प्रदेश में विभिन्न जिम्मेदार पदों पर कार्य करते हुए उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी कार्यशैली में अनुशासन, पारदर्शिता और जनसुनवाई को विशेष प्राथमिकता दी जाती है। अब देवरिया के जिलाधिकारी के रूप में उनकी नियुक्ति को जिले के विकास और प्रशासनिक मजबूती के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जनता को उम्मीद है कि नए जिलाधिकारी जिले में विकास योजनाओं की गति तेज करने, कानून व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने और आम लोगों की समस्याओं के त्वरित समाधान पर विशेष ध्यान देंगे। प्रशासनिक हलकों में भी उनकी नियुक्ति को सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

देवरिया से मुरादाबाद तक प्रशासनिक बदलाव, सरकार ने जारी की तबादला सूची

कई जिलों के डीएम बदले, शासन स्तर पर भी तबादले

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए कई आईएएस अधिकारियों के तबादले किए हैं। इस फेरबदल में देवरिया, जौनपुर, मऊ, महाराजगंज, फिरोजाबाद, मुरादाबाद, संभल और प्रतापगढ़ समेत कई जिलों के जिलाधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। शासन स्तर पर भी विशेष सचिव, विकास प्राधिकरण, नगर निगम और आयोगों में तैनात अधिकारियों के कार्यक्षेत्र बदले गए हैं।
प्रदेश सरकार द्वारा जारी सूची के अनुसार मधुसूदन हुल्गी को देवरिया का नया जिलाधिकारी बनाया गया है। इससे पहले वे मुख्यमंत्री कार्यालय में विशेष सचिव और उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद में अपर आवास आयुक्त के पद पर तैनात थे। वहीं देवरिया की जिलाधिकारी रहीं दिव्या मित्तल को राजस्व विभाग में विशेष सचिव की जिम्मेदारी दी गई है।
डा. दिनेश चन्द्र को जौनपुर, प्रवीण मिश्रा को मऊ, संतोष कुमार शर्मा को महाराजगंज, रमेश रंजन को फिरोजाबाद, अनुज सिंह को मुरादाबाद, राजेंद्र पेंसिया को संभल तथा शिव सहाय अवस्थी को प्रतापगढ़ का जिलाधिकारी बनाया गया है।
इसके अलावा शासन स्तर पर भी कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। आनन्द वर्धन को गोरखपुर विकास प्राधिकरण का उपाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि गौरव सिंह सोगरवाल को नगर आयुक्त नगर निगम गोरखपुर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अंकित खंडेलवाल को नगर आयुक्त नगर निगम आगरा बनाया गया है।
सैमुअल पाल एन. को प्रबंध निदेशक केस्को के साथ अपर आयुक्त राज्य कर कानपुर प्रथम का दायित्व दिया गया है। अभिषेक पाण्डेय को अपर भूमि व्यवस्था आयुक्त राजस्व परिषद नियुक्त किया गया है। डॉ. अल्का वर्मा को निदेशक (प्रशासन) चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं बनाया गया है। नेहा जैन को विशेष सचिव आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग तथा प्रबंध निदेशक यूपी डेस्को की जिम्मेदारी मिली है। समीर को विशेष सचिव वित्त विभाग एवं रजिस्ट्रार फर्म, चिट्स एवं सोसायटी बनाया गया है। सी. इन्दुमती को विशेष सचिव चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग तथा संयुक्त प्रबंध निदेशक उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम नियुक्त किया गया है।
डा. वन्दना वर्मा को निदेशक महिला कल्याण विभाग एवं प्रबंध निदेशक महिला कल्याण निगम, अंकुर कौशिक को मुख्य कार्यपालक अधिकारी उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण तथा अवनीश सक्सेना को सचिव उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग बनाया गया है।
सरकार के इस प्रशासनिक फेरबदल को आगामी विकास योजनाओं, प्रशासनिक कसावट और जनसेवा को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। कई जिलों में नए अधिकारियों की नियुक्ति से विकास कार्यों में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

दक्षिण भारत में चुनावी भूचाल, तमिलनाडु से बंगाल तक बदले समीकरण

तमिलनाडु में बदलेगा सत्ता का समीकरण? विजय की एंट्री से द्रविड़ राजनीति में नई हलचल, कई राज्यों में रोमांचक रुझान


चेन्नई/कोलकाता/गुवाहाटी/तिरुवनंतपुरम (राष्ट्र की परम्परा चुनावी डेस्क)। देश के पांच राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में चल रही मतगणना ने राजनीतिक माहौल को बेहद गर्म कर दिया है। सबसे ज्यादा चर्चा तमिलनाडु की राजनीति को लेकर हो रही है, जहां दशकों से चली आ रही द्रविड़ दलों की पारंपरिक राजनीति इस बार नए मोड़ पर दिखाई दे रही है। अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके (तमिलगा वेत्त्री कजगम) ने शुरुआती रुझानों में प्रभाव दिखाकर चुनावी मुकाबले को रोचक बना दिया है।
तमिलनाडु में अब तक डीएमके और एआईएडीएमके के बीच ही सत्ता का संघर्ष देखने को मिलता रहा है। 1967 के बाद से राज्य में द्रविड़ पहचान वाली पार्टियों का ही दबदबा रहा है, लेकिन इस बार बीजेपी और विजय की सक्रियता ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं।
राज्य की कुल 234 विधानसभा सीटों में से शुरुआती रुझानों में एआईएडीएमके 5 सीटों पर, विजय की टीवीके 3 सीटों पर, जबकि डीएमके और सीपीआई एक-एक सीट पर आगे दिखाई दे रहे हैं। हालांकि यह शुरुआती रुझान हैं और अंतिम परिणाम आने तक तस्वीर बदल सकती है।
मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके सरकार फिलहाल मजबूत स्थिति में मानी जा रही थी। डीएमके गठबंधन के पास वर्तमान में 159 सीटें हैं और पार्टी का ओबीसी वोट बैंक पर मजबूत प्रभाव है। दूसरी ओर, जयललिता के निधन के बाद एआईएडीएमके नेतृत्व संकट और संगठनात्मक कमजोरी से जूझती दिख रही है।
बीजेपी ने इस चुनाव में “द्रविड़ बनाम राष्ट्रीय पहचान” का नया नैरेटिव खड़ा करने की कोशिश की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की लगातार सभाओं के जरिए बीजेपी ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी भले अभी सत्ता से दूर हो, लेकिन डीएमके के सामने खुद को मुख्य चुनौती के रूप में स्थापित करने में सफल होती दिख रही है।
वहीं अभिनेता विजय की राजनीति में एंट्री ने चुनाव को सबसे ज्यादा दिलचस्प बना दिया है। आम लोगों के मुद्दों, भ्रष्टाचार और सिस्टम परिवर्तन की बात कर विजय ने युवाओं और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं को आकर्षित किया है। तमिलनाडु की राजनीति में पहले भी एमजीआर और जयललिता जैसे फिल्मी चेहरों ने बड़ी सफलता हासिल की थी, ऐसे में विजय को लेकर भी लोगों की उत्सुकता बढ़ी हुई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विजय की पार्टी एआईएडीएमके के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगा सकती है। यदि विजय लगातार सक्रिय राजनीति में बने रहते हैं तो आने वाले वर्षों में वे तमिलनाडु की राजनीति में बड़ी ताकत बन सकते हैं।
इधर केरल में शुरुआती रुझानों में कांग्रेस नीत यूडीएफ गठबंधन बढ़त बनाता नजर आ रहा है। चुनाव आयोग के अनुसार कांग्रेस 21 सीटों पर, सीपीएम 11 सीटों पर और आईयूएमएल 5 सीटों पर आगे चल रही है। केरल की राजनीति में इस बार यूडीएफ, एलडीएफ और एनडीए के बीच त्रिकोणीय मुकाबले की चर्चा तेज हो गई है।
पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा नजर भवानीपुर सीट पर बनी हुई है, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के बीच कांटे की टक्कर दिखाई दे रही है। शुरुआती रुझानों में ममता बनर्जी बढ़त बनाए हुए हैं। वहीं नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी आगे चल रहे हैं। आसनसोल दक्षिण में भाजपा की अग्निमित्रा पॉल और सोनारपुर दक्षिण में रूपा गांगुली भी शुरुआती बढ़त में हैं।
असम में शुरुआती रुझानों में बीजेपी गठबंधन को बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। भाजपा 13 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि कांग्रेस 2 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। राज्य में कुल 126 विधानसभा सीटों के लिए मतगणना जारी है।
पुडुचेरी में बीजेपी-एआईएनआरसी गठबंधन शुरुआती बढ़त में दिखाई दे रहा है। यहां कुल 89.87 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था।
देशभर में जारी इन चुनावी रुझानों ने यह संकेत दे दिया है कि दक्षिण भारतीय राजनीति में बदलाव की आहट तेज हो चुकी है। खासतौर पर तमिलनाडु में विजय की एंट्री ने आने वाले समय में नई राजनीतिक धुरी बनने की संभावनाओं को मजबूत कर दिया है।

महराजगंज: टप्पेबाज गैंग का पर्दाफाश, दो शातिर महिलाएं गिरफ्तार, जेवरात बरामद

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। महराजगंज जिले के घुघली थाना क्षेत्र में टप्पेबाजी की बढ़ती घटनाओं पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो शातिर महिला अभियुक्ताओं को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई 3 मई 2026 को की गई, जिसमें महिलाओं को निशाना बनाकर चोरी करने वाले गिरोह का खुलासा हुआ।

गिरफ्तार अभियुक्ताओं की पहचान रानी (26) निवासी चनवा मोड़, थाना नवादा, जिला आरा (बिहार) और अरिता (21) निवासी सर्रैया, जिला मुजफ्फरपुर (बिहार) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, दोनों महिलाएं सुनियोजित तरीके से विभिन्न इलाकों में घूमकर महिलाओं को अपने झांसे में लेती थीं और मौका मिलते ही उनके आभूषण चोरी कर लेती थीं।

घुघली पुलिस ने उनके कब्जे से एक जोड़ी पाजेब, दो जोड़ी पायल और एक जोड़ी बिछिया (सफेद धातु) बरामद की है, जो हाल की टप्पेबाजी की घटनाओं से जुड़ी बताई जा रही हैं। प्रारंभिक पूछताछ में यह भी सामने आया है कि ये महिलाएं भीड़-भाड़ वाले बाजारों और ग्रामीण क्षेत्रों को अपना मुख्य निशाना बनाती थीं।

इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में लोगों ने राहत की सांस ली है, क्योंकि पिछले कुछ समय से इस तरह की घटनाओं में लगातार वृद्धि हो रही थी। खासकर महिलाओं को निशाना बनाए जाने से सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी।

थानाध्यक्ष घुघली गौरव सिंह ने नागरिकों से अपील की है कि वे बाजार और भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर सतर्क रहें और अपने कीमती सामान की सुरक्षा स्वयं सुनिश्चित करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को देने की भी सलाह दी गई है।

पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार अभियुक्ताओं के खिलाफ आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है और इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की भी जांच जारी है, ताकि ऐसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।

मानव जीवन: सृष्टि का सर्वोच्च उपहार या भटकती चेतना का आईना?

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। आज के दौर में जब भौतिक उपलब्धियों की अंधी दौड़ तेज होती जा रही है, तब मानव जीवन के वास्तविक उद्देश्य पर विचार करना बेहद आवश्यक हो गया है। इस सृष्टि में असंख्य जीवों के बीच मनुष्य को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है, क्योंकि उसमें विवेक, संवेदना और आत्मचिंतन की अद्वितीय क्षमता है।

मानव जीवन केवल भोग और प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सृजन, सुधार और समाज के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक है। मनुष्य के पास यह विशेषता है कि वह सही और गलत में अंतर कर सकता है तथा अपनी कमियों को पहचानकर स्वयं को बेहतर बना सकता है। यही उसे अन्य जीवों से अलग बनाता है।

लेकिन आधुनिक जीवनशैली और भौतिकवाद की होड़ में इंसान अपने मूल मूल्यों से भटकता जा रहा है। आज सफलता को केवल धन, पद और बाहरी दिखावे से मापा जा रहा है, जिससे मानसिक तनाव, असंतोष और अवसाद जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। रिश्तों में भी औपचारिकता बढ़ती जा रही है और मानवीय संवेदनाएं कमजोर पड़ रही हैं।

वास्तव में, मानव जीवन केवल अधिकारों का नहीं, बल्कि कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का भी प्रतीक है। जब व्यक्ति अपने स्वार्थ, लोभ और अहंकार से ऊपर उठकर सेवा, सहयोग और करुणा के मार्ग पर चलता है, तभी उसका जीवन सार्थक बनता है।

इतिहास इस बात का साक्षी है कि जिन्होंने अपने जीवन को मानवता की सेवा में समर्पित किया, वही आज भी समाज के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। उनकी महानता उनके वैभव में नहीं, बल्कि उनके द्वारा किए गए कार्यों में निहित है।
आज के समय में शिक्षा की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्ति का माध्यम न होकर, नैतिक मूल्यों और चरित्र निर्माण का आधार होनी चाहिए। परिवार और समाज को भी नई पीढ़ी में संस्कार और जिम्मेदारी की भावना विकसित करनी होगी।

आत्ममंथन आज की सबसे बड़ी जरूरत है। हर व्यक्ति को खुद से यह सवाल पूछना चाहिए कि वह अपने जीवन को किस दिशा में ले जा रहा है—क्या वह केवल समय बिता रहा है या किसी उद्देश्य के साथ जीवन जी रहा है?

अंततः, मानव जीवन सृष्टि का सर्वोच्च उपहार है। यह हमें केवल जीने का अवसर नहीं देता, बल्कि अपने अस्तित्व को समझने और उसे ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता भी प्रदान करता है। अब यह हम पर निर्भर करता है कि हम इस अवसर को साधारण बनाएं या असाधारण बनाकर समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बनें।

मथुरा से बरगी तक : कब जागेगा प्रशासन, कितनी और जानें जाएंगी?

मथुरा डैम त्रासदी से सीख नहीं : बरगी डैम हादसा प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर संकेत


पर्यटन सुरक्षा तंत्र की विफलता और जवाबदेही की कसौटी पर खड़ा भारत


भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में धार्मिक, प्राकृतिक और साहसिक पर्यटन तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ सुरक्षा मानकों का पालन उतनी गंभीरता से नहीं हो रहा जितना आवश्यक है। 30 अप्रैल 2026 को मध्यप्रदेश के बरगी डैम स्थित नर्मदा बैकवॉटर में हुआ भीषण क्रूज हादसा इसी लापरवाही का दर्दनाक उदाहरण बनकर सामने आया। प्रारंभिक रिपोर्टों में 13 लोगों की मौत की पुष्टि ने पूरे देश को झकझोर दिया।
यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि पर्यटन सुरक्षा तंत्र की गहरी विफलता और प्रशासनिक उदासीनता का आईना प्रतीत होता है। जब घटनास्थल से यह तथ्य सामने आता है कि कई यात्रियों ने लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी, उन्हें पहनने के लिए बाध्य नहीं किया गया तथा मौसम विभाग की चेतावनियों को भी नजरअंदाज किया गया, तब यह प्रश्न स्वाभाविक हो जाता है कि क्या यह केवल चूक थी या सुनियोजित लापरवाही?
हाल ही में मथुरा में हुए जल हादसे में भी 26 लोगों की जान गई थी और वहां भी सुरक्षा मानकों की अनदेखी प्रमुख कारणों में शामिल रही। इतने कम अंतराल में दो बड़े हादसे यह स्पष्ट संकेत देते हैं कि देश ने अब तक कोई ठोस सबक नहीं सीखा है।
लाइफ जैकेट का अभाव बना सबसे बड़ा खतरा
जल पर्यटन में लाइफ जैकेट केवल औपचारिक उपकरण नहीं बल्कि जीवन रक्षा का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम होती है। अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार किसी भी नाव या क्रूज को संचालन से पहले यह सुनिश्चित करना अनिवार्य होता है कि प्रत्येक यात्री ने सही तरीके से लाइफ जैकेट पहन रखी हो।
यदि बरगी हादसे में यात्रियों को बिना लाइफ जैकेट यात्रा करने दी गई या उन्हें मजबूर नहीं किया गया, तो यह सीधी आपराधिक लापरवाही की श्रेणी में आता है। संकट की स्थिति में यही सुरक्षा कवच अनेक जिंदगियां बचा सकता था।
मौसम चेतावनी की अनदेखी कितनी उचित?
यदि भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा तेज हवाओं और खराब मौसम की चेतावनी पहले ही जारी कर दी गई थी और इसके बावजूद क्रूज संचालन जारी रखा गया, तो यह गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाएं किसी भी जलयान के लिए खतरनाक मानी जाती हैं।
ऐसी परिस्थितियों में पर्यटन गतिविधियों को तत्काल रोकना प्रशासन और ऑपरेटर दोनों की जिम्मेदारी होती है। लेकिन यदि मुनाफे या दबाव के कारण संचालन जारी रखा गया, तो इसे केवल जोखिम नहीं बल्कि जानबूझकर खतरे को आमंत्रित करना माना जाएगा।
ओवरलोडिंग और सुरक्षा उपकरणों की कमी
देशभर में कई जल पर्यटन स्थलों पर निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। इससे नाव या क्रूज का संतुलन बिगड़ता है और दुर्घटना की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
यदि बरगी डैम हादसे में ओवरलोडिंग का तथ्य सामने आता है, तो यह और अधिक गंभीर मामला होगा। इसके अतिरिक्त लाइफ बोट, सिग्नलिंग डिवाइस, प्रशिक्षित स्टाफ और आपदा प्रबंधन संसाधनों की कमी भी ऐसी त्रासदियों को भयावह बना देती है।
प्रशासनिक जवाबदेही सबसे बड़ा प्रश्न
पर्यटन विभाग और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी केवल लाइसेंस जारी करने तक सीमित नहीं हो सकती। नियमित निरीक्षण, सुरक्षा ऑडिट और मानकों के पालन की निगरानी करना भी उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
यदि लंबे समय से नियमों का उल्लंघन हो रहा था और फिर भी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह केवल चूक नहीं बल्कि सिस्टमेटिक फेल्योर का संकेत है। ऐसे मामलों में केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं बल्कि उच्च अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
कानूनी दृष्टिकोण से कितना गंभीर मामला?
भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत ऐसी घटनाओं में लापरवाही से मृत्यु संबंधित धाराएं स्पष्ट रूप से लागू होती हैं। यदि जांच में यह सिद्ध हो जाए कि संबंधित पक्षों को संभावित खतरे की जानकारी थी और फिर भी संचालन जारी रखा गया, तो मामला अधिक गंभीर आपराधिक श्रेणी में भी जा सकता है।
बरगी और मथुरा जैसी घटनाएं यह बहस तेज करती हैं कि क्या इन्हें सामान्य दुर्घटना मानना उचित है या फिर इन्हें कठोर आपराधिक जवाबदेही के दायरे में लाया जाना चाहिए।
ऋषिकेश का अनुभव बताता है जमीनी हकीकत
26 अप्रैल 2026 को उत्तराखंड के ऋषिकेश में रामझूला और गंगा तट पर स्वयं देखा गया अनुभव भी सुरक्षा तंत्र की कमजोरी को उजागर करता है। नाव यात्रा के दौरान यात्रियों को बिना लाइफ जैकेट बैठाया जा रहा था। आग्रह करने पर ही यात्रियों ने जैकेट पहनी।
यह स्थिति बताती है कि नियम केवल कागजों तक सीमित हैं और जमीनी स्तर पर उनका पालन सुनिश्चित करने वाला प्रभावी तंत्र मौजूद नहीं है। यदि पर्यटक स्वयं सुरक्षा के लिए आग्रह करने को मजबूर हो जाए, तो यह पूरे तंत्र की गंभीर विफलता है।
भविष्य में क्या होना चाहिए?
ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए बहुस्तरीय और कठोर कदम आवश्यक हैं।
बिना लाइफ जैकेट किसी भी यात्री को बोर्डिंग की अनुमति न मिले
मौसम चेतावनी जारी होते ही संचालन स्वतः बंद हो
थर्ड पार्टी सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य किए जाएं
नियमित और औचक निरीक्षण हों
प्रशिक्षित आपदा प्रबंधन स्टाफ की नियुक्ति हो
क्षमता से अधिक यात्रियों पर सख्त कार्रवाई हो
डिजिटल सुरक्षा निगरानी तंत्र विकसित किया जाए
जवाबदेही तय करना समय की मांग
बरगी डैम और मथुरा जैसी त्रासदियां केवल आंकड़े नहीं बल्कि उन परिवारों का असहनीय दर्द हैं जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया। अब समय आ गया है कि “दुर्घटना” शब्द के पीछे छिपने के बजाय “जवाबदेही” को केंद्र में लाया जाए।
जब तक दोषियों पर कठोर और उदाहरणात्मक कार्रवाई नहीं होगी, तब तक यह सिलसिला रुकने वाला नहीं है। पर्यटन विकास तभी सार्थक माना जाएगा जब वह सुरक्षित भी हो।
यह केवल सरकार या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज और नागरिकों की भी भूमिका है कि सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करें। लेकिन नेतृत्व की सबसे बड़ी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन पर ही आती है। बरगी डैम त्रासदी एक गंभीर चेतावनी है। यदि अब भी व्यवस्था नहीं चेती, तो अगली त्रासदी किसी और नदी, किसी और शहर और किसी अन्य परिवार की जिंदगी छीन सकती है।

✒️ : एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया महाराष्ट्र

माडर्न सिटी कॉलेज की छात्रा शिवांगी वर्मा का होगा भव्य सम्मान समारोह

देवरिया की बेटी शिवांगी वर्मा ने बढ़ाया जिले का मान, इंटर परीक्षा की टॉप-10 सूची में बनाई जगह


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा) । शिक्षा के क्षेत्र में एक बार फिर देवरिया की प्रतिभा ने जिले का गौरव बढ़ाया है। माडर्न सिटी माण्टेसरी इण्टरमीडिएट कॉलेज की छात्रा कु० शिवांगी वर्मा ने वर्ष 2026 की इंटरमीडिएट परीक्षा में जिले की सर्वोच्च टॉप-10 सूची में स्थान प्राप्त कर विद्यालय और परिवार का नाम रोशन किया है। छात्रा की इस शानदार उपलब्धि से विद्यालय परिवार, अभिभावकों और क्षेत्रवासियों में हर्ष का माहौल है।
विद्यालय प्रबंधन की ओर से इस गौरवपूर्ण सफलता के उपलक्ष्य में एक सम्मान समारोह का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम 08 मई 2026, शुक्रवार को पूर्वाह्न 10:00 बजे विद्यालय परिसर, न्यू कॉलोनी (नेहरू नगर), देवरिया में आयोजित होगा। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में मा० शशांक मणि त्रिपाठी की गरिमामयी उपस्थिति प्रस्तावित है।
विद्यालय परिवार ने समाज के गणमान्य नागरिकों, अभिभावकों एवं शिक्षा प्रेमियों से समारोह में उपस्थित होकर छात्रा का उत्साहवर्धन करने की अपील की है। विद्यालय के संरक्षक डॉ. मधुसूदन, गिरीश चन्द्र तिवारी एवं आद्या प्रसाद तिवारी ने कहा कि छात्राओं की यह सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
कु० शिवांगी वर्मा की इस उपलब्धि को जिले में शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता और छात्राओं की मेहनत का प्रतीक माना जा रहा है। विद्यालय परिवार ने छात्रा के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए इसे पूरे जिले के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया है।

फर्जी दस्तावेज लगाकर शिक्षक भर्ती में घुसने की कोशिश

वांछित अभियुक्त गिरफ्तार

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)l थाना राजघाट पुलिस ने कूटरचित दस्तावेजों के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने के प्रयास में वांछित चल रहे एक अभियुक्त को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गोरखपुर के निर्देश पर चलाए जा रहे अभियान के तहत की गई।
पुलिस के अनुसार, मु0अ0सं0 132/2016 धारा 419, 420, 467, 468, 471 भादवि से संबंधित वांछित अभियुक्त अनुज प्रताप सिंह निवासी मैनपुरी को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी लंबे समय से फरार चल रहा था।
जांच में सामने आया कि अभियुक्त ने गोरखपुर मंडल के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती के लिए फर्जी व कूटरचित अंकपत्र और प्रमाणपत्रों के आधार पर आवेदन किया था। मामले की शिकायत मिलने के बाद थाना राजघाट में मुकदमा दर्ज किया गया था।
मुकदमा दर्ज होने के बाद से ही आरोपी फरार चल रहा था। पुलिस उसकी तलाश में जुटी थी और आखिरकार उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस टीम की भूमिका
इस गिरफ्तारी में अपराध शाखा के निरीक्षक बृजेश कुमार मिश्र व थाना राजघाट के उपनिरीक्षक उमाशंकर कन्नौजिया समेत पुलिस टीम की अहम भूमिका रही।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आवश्यक विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

छुट्टी के दिन मेडिकल कॉलेज में सीडीओ का औचक निरीक्षण

अव्यवस्थाओं पर जताई नाराजगी

शाहजहांपुर(राष्ट्र की परम्परा) रविवार को छुट्टी के दिन राजकीय मेडिकल कॉलेज में मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) उत्कर्ष द्विवेदी के अचानक निरीक्षण से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। बिना पूर्व सूचना के पहुंचे सीडीओ ने इमरजेंसी सहित विभिन्न वार्डों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और कई खामियों पर नाराजगी जाहिर की।
निरीक्षण के दौरान सीडीओ इमरजेंसी, टीबी वार्ड, ट्रॉमा, आईसीयू, एसएनसीयू, मेल-फीमेल सर्जिकल व मेडिसिन वार्डों समेत महिला अस्पताल के लेबर रूम, ओपीडी और अन्य इकाइयों में पहुंचे। उन्होंने मरीजों से बातचीत कर इलाज और सुविधाओं की हकीकत जानी।
दवा कक्षों में स्टॉक और एक्सपायरी डेट की जांच के साथ साफ-सफाई, शौचालय और पेयजल व्यवस्था पर भी सख्त निर्देश दिए। कई जगह स्टाफ की कार्यशैली पर सवाल उठने पर कर्मचारियों को फटकार लगाई गई।
सीडीओ ने स्पष्ट कहा कि मरीजों के इलाज में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। आयुष्मान योजना के लाभार्थियों को समय पर सुविधा देने और कुपोषित व गंभीर मरीजों के बेहतर इलाज पर विशेष जोर दिया।
औचक निरीक्षण से पूरे दिन अस्पताल प्रशासन में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।

फर्जी बैनामा कर जमीन बेचने वाला 25 हजार का इनामी आरोपी दबोचा

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
जनपद के कैम्पियरगंज थाना क्षेत्र में जमीन की धोखाधड़ी के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन बेचने के आरोप में 25 हजार रुपये के इनामी वांछित अभियुक्त को गिरफ्तार कर लिया है।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान अनूप कुमार श्रीवास्तव निवासी जटेपुर उत्तरी, थाना गोरखनाथ के रूप में हुई है। वह काफी समय से फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी पर पुलिस द्वारा 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने अपने साथियों के साथ मिलकर पहले से बैनामा हो चुकी जमीन के कूटरचित दस्तावेज तैयार किए और उसे एक महिला को बेच दिया। जब पीड़िता को धोखाधड़ी का पता चला तो उसने कैम्पियरगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर वर्ष 2024 में संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।
मामले की जांच के दौरान पुलिस लगातार आरोपी की तलाश में जुटी थी। इसी क्रम में मुखबिर की सूचना पर पुलिस टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
इस कार्रवाई को उपनिरीक्षक आदर्श त्रिवेदी के नेतृत्व में टीम ने अंजाम दिया, जिसमें कांस्टेबल पप्पू यादव और रिक्रूट कांस्टेबल अमित गिरी शामिल रहे।
पुलिस ने बताया कि आरोपी के खिलाफ आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है, साथ ही इस गिरोह में शामिल अन्य लोगों की तलाश भी जारी है।