Friday, May 1, 2026
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फार्मर आईडी के बिना नहीं मिलेगा योजनाओं का लाभ, प्रशासन ने जारी किए निर्देश

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में किसानों के लिए फार्मर आईडी/किसान पहचान पत्र को अनिवार्य कर दिया गया है। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) जयप्रकाश ने जानकारी देते हुए बताया कि शासन के निर्देशानुसार अब विभिन्न विभागों की योजनाओं का लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा, जिनके पास किसान पहचान पत्र होगा।
उन्होंने बताया कि जनपद में लगभग 70 प्रतिशत किसानों के पहचान पत्र बनाए जा चुके हैं, जबकि शेष किसानों के लिए 06 से 15 अप्रैल, 2026 तक विशेष अभियान चलाकर गांव-गांव में कैंप लगाए जा रहे हैं। इस अभियान के तहत किसानों को प्राथमिकता के आधार पर फार्मर आईडी उपलब्ध कराई जा रही है।
अपर जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की किश्तें भी अब केवल उन्हीं किसानों को प्राप्त होंगी, जिनके पास किसान पहचान पत्र होगा। इसके साथ ही कृषि, उद्यान, पशुपालन, मत्स्य, सहकारिता और लघु सिंचाई विभाग की सभी लाभार्थीपरक योजनाओं में किसान पहचान पत्र को आधार बनाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि उर्वरक, बीज, कीटनाशक एवं अन्य कृषि इनपुट के वितरण में भी किसान पहचान पत्र की अनिवार्यता लागू की जा रही है। वर्तमान में उर्वरकों का वितरण पीओएस मशीनों के माध्यम से आईएफएमएस पोर्टल पर किया जा रहा है, जिसे मई 2026 से पूरी तरह किसान पहचान पत्र और फार्मर रजिस्ट्री से जोड़ दिया जाएगा।
इसके अलावा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर होने वाली फसलों की खरीद में भी अब केवल उन्हीं किसानों से खरीद की जाएगी, जिनके पास किसान पहचान पत्र उपलब्ध होगा। अन्य विभागों द्वारा संचालित योजनाओं में भी 31 मई, 2026 तक किसान पहचान पत्र को अनिवार्य करने की तैयारी पूरी कर ली जाएगी।

देवरिया में स्पा सेंटर पर पुलिस का छापा, कई युवक-युवतियां हिरासत में

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में गुरुवार को पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक स्पा सेंटर पर छापा मारकर कथित अवैध गतिविधियों का खुलासा किया। यह कार्रवाई सदर कोतवाली थाना क्षेत्र के रुद्रपुर मोड़ के पास स्थित एक स्पा सेंटर में की गई।

गुप्त सूचना पर की गई छापेमारी

पुलिस को काफी समय से सूचना मिल रही थी कि उक्त स्पा सेंटर की आड़ में अवैध गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसी आधार पर पुलिस टीम ने योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी की।

मौके से कई युवक-युवतियां हिरासत में

छापे के दौरान पुलिस ने संदिग्ध परिस्थितियों में कई युवक और युवतियों को मौके से हिरासत में लिया। सभी को पूछताछ के लिए थाने ले जाया गया है।
सूत्रों के अनुसार, मौके से कुछ आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद हुई है, जिसकी जांच की जा रही है।

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संचालकों पर होगी सख्त कार्रवाई

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की गहन जांच जारी है।

• स्पा सेंटर संचालकों की भूमिका की जांच
• अवैध गतिविधियों के सबूत जुटाए जा रहे
• दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तय

स्थानीय लोगों ने पहले भी की थी शिकायत

स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस स्पा सेंटर को लेकर पहले भी कई बार शिकायतें की गई थीं। लोगों का आरोप है कि लंबे समय से यहां संदिग्ध गतिविधियां चल रही थीं।

जांच जारी

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और जल्द ही पूरे नेटवर्क का खुलासा होने की संभावना जताई जा रही है।

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केरल की विकास-यात्रा का एक दशक: 2016–2026 में बना समावेशी विकास का मॉडल

वर्ष 2016 से 2026 तक का दशक केरल के लिए तेज़, संतुलित और समावेशी विकास का प्रतीक बनकर उभरा है। वित्तीय चुनौतियों और केंद्र की सीमाओं के बावजूद, राज्य ने आर्थिक वृद्धि, सामाजिक न्याय, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।

आर्थिक विकास और निवेश में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

केरल ने इस दशक में राष्ट्रीय औसत के बराबर या उससे अधिक विकास दर हासिल की।

• 1,200+ इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को मंजूरी
• पूंजीगत व्यय में निरंतर वृद्धि
• स्थानीय निकायों की भूमिका मजबूत

केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड (KIIFB) ने विकास परियोजनाओं को नई गति दी।

शिक्षा में क्रांति: डिजिटल और शून्य ड्रॉपआउट

• प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर 0% ड्रॉपआउट
• भारत का पहला पूरी तरह डिजिटल स्कूली राज्य
• SC/ST छात्रों की न्यूनतम ड्रॉपआउट दर

राज्य ने शिक्षा के हर स्तर पर गुणवत्ता सुधार और भारी निवेश किया।

स्वास्थ्य क्षेत्र में वैश्विक पहचान

• शिशु मृत्यु दर: प्रति 1000 जन्म पर सिर्फ 5
• 42 लाख परिवारों को ₹5 लाख तक कैशलेस इलाज
• कोविड-19 और निपाह वायरस से सफल मुकाबला

‘आर्द्रम मिशन’ और ‘कारुण्य आरोग्य सुरक्षा योजना’ ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया।

गरीबी उन्मूलन और आवास में ऐतिहासिक सफलता

• नवंबर 2025 में अत्यधिक गरीबी का पूर्ण अंत
• ‘लाइफ़ मिशन’ के तहत 5 लाख+ घरों का निर्माण

यह उपलब्धि देश के लिए एक मिसाल बनी है।

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महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय

• ‘कुडुम्बश्री’ मॉडल से महिलाओं को आर्थिक ताकत
• लिंग आधारित बजट: कुल व्यय का 20%+
• 75% बुजुर्ग पेंशन योजनाओं से कवर

इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव

•हिल हाईवे और 4-लेन नेशनल हाईवे
• कोच्चि मेट्रो और वॉटर मेट्रो
• विझिंजम अंतर्राष्ट्रीय बंदरगाह (2024)
• 100% विद्युतीकरण और सौर ऊर्जा विस्तार

आईटी और स्टार्टअप में तेज़ उछाल

• स्टार्टअप इकोसिस्टम में 147% वृद्धि (2025)
• इंटरनेट को मौलिक अधिकार का दर्जा
• K-FON परियोजना से डिजिटल कनेक्टिविटी

संघीय वित्तीय चुनौतियाँ

हालांकि विकास के बावजूद, केरल को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा:

• GST के कारण राजस्व पर असर
• उधारी की सीमाएं
• केंद्र से मिलने वाले फंड में कमी

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आंगनबाड़ी सहायिका चयन में पारदर्शिता: आवेदिकाओं की आपत्तियों का मौके पर निस्तारण

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में आंगनबाड़ी सहायिका के रिक्त पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए प्रशासन ने अहम पहल की है। 8 अप्रैल 2026 को विकास खंड मुरलीछपरा, सीयर और चिलकहर की आवेदिकाओं को गंगा ऑडिटोरियम हॉल में बुलाकर चयन प्रक्रिया को सार्वजनिक रूप से संपन्न कराया गया।

कार्यक्रम में जिला कार्यक्रम अधिकारी, सहायक जिला पंचायत राज अधिकारी और बाल विकास परियोजना अधिकारी मौजूद रहे। बड़ी संख्या में आवेदिकाओं की उपस्थिति में शासनादेश (17 सितंबर 2025) के तहत निर्धारित चयन मानकों की विस्तृत जानकारी दी गई।

इसके बाद सभी आवेदनों का लाइव प्रस्तुतीकरण किया गया और केंद्रवार पात्र अभ्यर्थियों की सूची सार्वजनिक रूप से साझा की गई। इस दौरान आवेदिकाओं द्वारा उठाई गई आपत्तियों का मौके पर ही निस्तारण किया गया, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता और भरोसा बढ़ा।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार:

• मुरलीछपरा: 56 अभ्यर्थी पात्र
• सीयर: 67 अभ्यर्थी पात्र
• चिलकहर: 69 अभ्यर्थी पात्र

हालांकि, मुरलीछपरा के 4 केंद्रों और सीयर के 6 केंद्रों पर चयन प्रक्रिया फिलहाल स्थगित कर दी गई है। अधिकारियों के अनुसार, इन केंद्रों पर अभिलेखों का सत्यापन और शिकायतों की जांच के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

प्रशासन का मानना है कि इस तरह की पारदर्शी व्यवस्था से भविष्य में विवाद और शिकायतों की संभावना कम होगी तथा योग्य अभ्यर्थियों का निष्पक्ष चयन सुनिश्चित किया जा सकेगा।

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तीन राज्यों में लोकतंत्र का महापर्व—केरल, असम और पुडुचेरी में एक चरण में मतदान, शुरुआती घंटों में दिखा उत्साह

असम-केरल-पुडुचेरी में चुनावी जंग तेज, जनता कर रही फैसला


नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा) देश के तीन महत्वपूर्ण राज्यों—केरल, असम और पुडुचेरी—में आज गुरुवार (9 अप्रैल 2026) को विधानसभा चुनाव के लिए एक ही चरण में मतदान शुरू हो गया। सुबह 7 बजे से मतदान प्रक्रिया आरंभ हुई और शुरुआती घंटों में ही मतदाताओं में उत्साह देखने को मिला। तीनों राज्यों की कुल 296 सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं, जिनमें असम की 126, केरल की 140 और पुडुचेरी की 30 सीटें शामिल हैं। इन चुनावों के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे।
सुबह 9 बजे तक मिले आंकड़ों के अनुसार, असम में 17.87 प्रतिशत, केरल में 16.23 प्रतिशत और पुडुचेरी में 17.41 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। मतदान केंद्रों पर सुबह से ही मतदाताओं की लंबी कतारें दिखाई दीं, जो लोकतंत्र के प्रति लोगों की जागरूकता और भागीदारी को दर्शाती हैं।
केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने तिरुवनंतपुरम के एक मतदान केंद्र पर वोट डाला। मतदान के बाद उन्होंने लोगों से बड़ी संख्या में मतदान करने की अपील करते हुए कहा कि हर नागरिक को अपने मताधिकार का प्रयोग जरूर करना चाहिए।
असम में चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है। यहां कुल 722 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनके भाग्य का फैसला 2.50 करोड़ मतदाता करेंगे। इनमें 1.25 करोड़ महिला मतदाता भी शामिल हैं। राज्यभर में 31,490 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने लोगों से मतदान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि “बेहतर असम के निर्माण में हर वोट महत्वपूर्ण है।”
केरल में भी चुनावी हलचल चरम पर है। राज्य में कुल 883 उम्मीदवार मैदान में हैं और 2.71 करोड़ मतदाता उनके राजनीतिक भविष्य का फैसला करेंगे। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी रतन यू केलकर के अनुसार, 30,495 मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं। चुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए 1.46 लाख चुनाव कर्मियों और 76 हजार से अधिक सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है।
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने धर्मदम सीट के एक मतदान केंद्र पर अपना वोट डाला। मतदान के बाद उन्होंने लोगों से लोकतंत्र के इस पर्व में भाग लेने की अपील की।
इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी असम, केरल और पुडुचेरी के मतदाताओं से बड़ी संख्या में मतदान करने की अपील की। उन्होंने विभिन्न भाषाओं—असमिया, मलयालम और तमिल—में संदेश जारी कर विशेष रूप से युवाओं और महिलाओं को मतदान के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि यह चुनाव लोकतंत्र का उत्सव है और इसमें हर नागरिक की भागीदारी आवश्यक है।
तीनों राज्यों में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं ताकि मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो सके। चुनाव आयोग ने भी सभी मतदाताओं से अपील की है कि वे बिना किसी डर या दबाव के अपने मताधिकार का प्रयोग करें।
लोकतंत्र के इस महापर्व में जनता का जोश और भागीदारी यह संकेत दे रही है कि मतदाता अपने अधिकार और जिम्मेदारी के प्रति पूरी तरह सजग हैं। अब सभी की नजरें 4 मई को आने वाले चुनाव परिणामों पर टिकी हैं, जो इन राज्यों की राजनीतिक दिशा तय करेंगे।

नकली दवाओं पर बड़ा वार: नौतनवां में छापेमारी, 4 मेडिकल स्टोर्स के नमूने सील

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में नकली और संदिग्ध दवाओं के कारोबार पर लगाम कसने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए नौतनवां क्षेत्र में व्यापक छापेमारी अभियान चलाया। जिलाधिकारी Santosh Kumar Sharma के निर्देश पर की गई इस कार्रवाई से दवा कारोबारियों में हड़कंप मच गया।

उपजिलाधिकारी नौतनवां Madan Mohan Verma के नेतृत्व में राजस्व, स्वास्थ्य, पुलिस और औषधि विभाग की संयुक्त टीम ने कई मेडिकल स्टोर्स पर औचक निरीक्षण किया। इस दौरान कुल सात दुकानों की गहन जांच की गई।

जांच के दौरान स्टॉक रजिस्टर, लाइसेंस, खरीद-बिक्री रिकॉर्ड और दवाओं की गुणवत्ता की बारीकी से पड़ताल की गई। चार दुकानों पर अनियमितताएं मिलने के बाद संबंधित दवाओं के नमूने लेकर उन्हें सील कर दिया गया।

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औषधि निरीक्षक Naveen Kumar ने बताया कि सभी नमूनों को परीक्षण के लिए राजकीय प्रयोगशाला भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनपद में नकली या प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आगे भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे।

अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि यदि कहीं संदिग्ध दवाओं की बिक्री या अवैध गतिविधि नजर आए तो तुरंत सूचना दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

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घुमक्कड़ी का दर्शन और ज्ञान का विराट संसार: राहुल सांकृत्यायन

नवनीत मिश्र

सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल, ज़िंदगानी फिर कहाँ… ज़िंदगी गर कुछ रही, तो ये जवानी फिर कहाँ॥”
उक्त पंक्तियाँ केवल काव्य-सौंदर्य नहीं, बल्कि जीवन को खुली आँखों से देखने और उसे जी भरकर जीने का संदेश हैं। इस संदेश को अपने जीवन की साधना बना देने वाले महापंडित राहुल सांकृत्यायन वास्तव में भारतीय ज्ञान-परंपरा के उन दुर्लभ व्यक्तित्वों में से हैं, जिन्होंने जीवन को प्रयोगशाला और यात्रा को विश्वविद्यालय बना दिया।
राहुल सांकृत्यायन का जीवन एक अनवरत खोज-यात्रा था। ज्ञान की, सत्य की और मनुष्य की मूल पहचान की। वे केवल स्थानों के यात्री नहीं थे, बल्कि विचारों के यात्री थे। उन्होंने घुमक्कड़ी को एक उच्च कोटि का दर्शन माना। उनके अनुसार, स्थिरता मनुष्य की प्रगति में बाधक है, जबकि गतिशीलता उसे नए अनुभवों और ज्ञान से समृद्ध करती है। यही कारण है कि उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय यात्रा में व्यतीत किया और हर यात्रा को सीखने का अवसर बनाया।

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उनकी यात्राएं केवल भौगोलिक विस्तार तक सीमित नहीं थीं, बल्कि सांस्कृतिक और बौद्धिक गहराई तक जाती थीं। तिब्बत, श्रीलंका, रूस, यूरोप और एशिया के अनेक देशों की यात्राओं के दौरान उन्होंने न केवल विभिन्न सभ्यताओं को देखा, बल्कि उनके भीतर छिपे ज्ञान और जीवन-दृष्टि को भी समझा। तिब्बत की कठिन यात्राओं के दौरान उन्होंने अनेक दुर्लभ बौद्ध ग्रंथों को खोजकर भारत लाने का जो कार्य किया, वह भारतीय इतिहास और साहित्य के लिए अमूल्य धरोहर सिद्ध हुआ।
राहुल सांकृत्यायन की विद्वता का दायरा अत्यंत व्यापक था। वे इतिहासकार थे, दार्शनिक थे, भाषाविद थे, पुरातत्ववेत्ता थे और साथ ही एक उत्कृष्ट साहित्यकार भी। संस्कृत, पाली, प्राकृत, तिब्बती, रूसी और कई अन्य भाषाओं का उनका ज्ञान उन्हें वैश्विक दृष्टि प्रदान करता था। उनके लेखन में यह व्यापकता स्पष्ट रूप से झलकती है। वे जटिल से जटिल विषय को भी सरल और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की अद्भुत क्षमता रखते थे।
उनका चिंतन पूरी तरह वैज्ञानिक और तार्किक था। उन्होंने समाज में व्याप्त अंधविश्वास, कुरीतियों और जड़ता का खुलकर विरोध किया। वे मानते थे कि मनुष्य को हर बात को तर्क और प्रमाण की कसौटी पर परखना चाहिए। यही वैज्ञानिक दृष्टिकोण उनके लेखन और जीवन दोनों में स्पष्ट दिखाई देता है। उन्होंने अपने समय के समाज को जागरूक और प्रगतिशील बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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उनकी प्रसिद्ध कृति “वोल्गा से गंगा” केवल एक साहित्यिक रचना नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के विकास का एक सजीव दस्तावेज है। इस कृति के माध्यम से उन्होंने हजारों वर्षों की मानव यात्रा को कथा के रूप में प्रस्तुत किया, जो पाठक को न केवल इतिहास से परिचित कराती है, बल्कि उसे सोचने और समझने के लिए भी प्रेरित करती है। इसके अतिरिक्त “भागो नहीं, दुनिया को बदलो”, “दर्शन-दिग्दर्शन” और “घुमक्कड़ शास्त्र” जैसी कृतियां उनके व्यापक चिंतन और समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।
राहुल सांकृत्यायन का व्यक्तित्व केवल ज्ञान तक सीमित नहीं था, बल्कि उसमें साहस, जिज्ञासा और कर्मशीलता का अद्भुत समन्वय था। उन्होंने अपने जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना किया, परंतु कभी अपने उद्देश्य से विचलित नहीं हुए। उनका जीवन यह सिखाता है कि सच्चा ज्ञान वही है, जो अनुभव और संघर्ष से अर्जित होता है।
आज के समय में, जब मनुष्य तकनीक के माध्यम से दुनिया को अपने हाथों में समेट चुका है, फिर भी विचारों की सीमाएं अक्सर संकीर्ण हो जाती हैं, ऐसे में राहुल सांकृत्यायन का जीवन और दर्शन और भी प्रासंगिक हो जाता है। वे हमें सिखाते हैं कि केवल जानकारी प्राप्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे समझना, परखना और जीवन में उतारना भी आवश्यक है।
उनकी जयंती पर उन्हें स्मरण करना केवल एक औपचारिक श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि उनके विचारों को अपने जीवन में आत्मसात करने का अवसर है। यदि हम उनकी घुमक्कड़ी को केवल यात्रा न मानकर ज्ञान और अनुभव की साधना के रूप में देखें, तो निश्चित ही हमारा जीवन अधिक समृद्ध और सार्थक बन सकता है।
अंततः महापंडित राहुल सांकृत्यायन हमें यह संदेश देते हैं कि जीवन का वास्तविक आनंद खोज में है, जिज्ञासा में है और निरंतर आगे बढ़ते रहने में है। उनकी विरासत हमें यह प्रेरणा देती है कि हम भी अपने भीतर के यात्री को जगाएं, प्रश्न करें, सीखें और दुनिया को एक नई दृष्टि से देखें।

8 अप्रैल 2026 का ईरान-अमेरिका युद्धविराम: राहत की सांस या बड़े टकराव से पहले रणनीतिक विराम?

गोंदिया पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक सुर्खियों में है। 8 अप्रैल 2026 को Donald Trump द्वारा United States और Iran के बीच दो सप्ताह के अस्थायी युद्धविराम की घोषणा ने दुनिया को तत्काल राहत जरूर दी, लेकिन इसके साथ ही अनिश्चितताओं का एक नया दौर भी शुरू हो गया है। यह कदम उस समय सामने आया जब सैन्य टकराव अपने चरम पर था और वैश्विक स्तर पर बड़े युद्ध की आशंका जताई जा रही थी।

हालांकि, युद्धविराम की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद ईरान की एक ऑयल रिफाइनरी में विस्फोट और खाड़ी क्षेत्र में ड्रोन व मिसाइल हमलों की खबरों ने यह साफ कर दिया कि यह शांति स्थायी नहीं है, बल्कि बेहद नाजुक और शर्तों पर आधारित है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह वास्तविक युद्धविराम कम और रणनीतिक “पॉज” अधिक है।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे संवेदनशील बिंदु Strait of Hormuz है, जहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति होती है। यदि इस जलमार्ग में कोई बाधा आती है, तो वैश्विक तेल कीमतों में उछाल, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और आर्थिक अस्थिरता तय है। यही वजह है कि अमेरिका इस मार्ग को खुला और सुरक्षित रखने पर जोर दे रहा है, जबकि ईरान इसे अपने रणनीतिक दबाव के साधन के रूप में देखता है।
ईरान ने इस युद्धविराम को स्थायी शांति में बदलने के लिए कई शर्तें रखी हैं, जिनमें आर्थिक प्रतिबंध हटाना, जब्त संपत्तियों की वापसी और क्षेत्रीय संघर्षों का समाधान शामिल है। साथ ही, उसने परमाणु कार्यक्रम को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए यूरेनियम संवर्धन के अधिकार पर जोर दिया है। यह मुद्दा लंबे समय से अमेरिका और ईरान के बीच विवाद का मुख्य कारण रहा है और आगे की वार्ताओं में सबसे बड़ी चुनौती भी यही रहने वाला है।

जमीनी स्तर पर हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। Israel और ईरान के बीच परोक्ष टकराव जारी है, जबकि United Arab Emirates और Kuwait जैसे खाड़ी देशों पर हमलों की खबरें इस संघर्ष को क्षेत्रीय दायरे से बाहर ले जाती दिख रही हैं। इससे यह स्पष्ट है कि यह विवाद केवल दो देशों तक सीमित नहीं, बल्कि बहु-स्तरीय शक्ति संघर्ष में बदल चुका है।
भारत ने इस घटनाक्रम पर संतुलित प्रतिक्रिया दी है। Ministry of External Affairs India ने युद्धविराम का स्वागत करते हुए इसे सकारात्मक कदम बताया, लेकिन साथ ही अपने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। Embassy of India in Tehran ने ईरान में रह रहे भारतीयों के लिए एडवाइजरी जारी कर सतर्क रहने और आवश्यक होने पर देश छोड़ने की सलाह दी है। यह भारत की व्यावहारिक और प्रोएक्टिव कूटनीति को दर्शाता है।
इस घटनाक्रम का असर भारत की आंतरिक राजनीति पर भी देखा गया है, जहां विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच विदेश नीति को लेकर बहस तेज हो गई है। वहीं, Pakistan की भूमिका को लेकर भी चर्चा हो रही है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने मध्यस्थता की कोशिश की, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि सीमित है। फिर भी यह स्पष्ट है कि क्षेत्रीय देश इस स्थिति को कूटनीतिक अवसर के रूप में देख रहे हैं।
वैश्विक स्तर पर इस युद्धविराम का प्रभाव ऊर्जा, अर्थव्यवस्था और कूटनीति तीनों पर पड़ेगा। तेल की कीमतों में अस्थिरता, शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक व्यापार मार्गों पर दबाव इसकी प्रमुख परिणतियां हो सकती हैं। यदि स्थिति नियंत्रण से बाहर होती है, तो इसका असर वैश्विक मंदी तक पहुंच सकता है।
समग्र रूप से देखा जाए तो 8 अप्रैल 2026 का यह युद्धविराम एक राहत का क्षण जरूर है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है। अमेरिका और ईरान के बीच गहरे अविश्वास, परमाणु मुद्दे पर मतभेद और क्षेत्रीय संघर्षों की जटिलता इसे बेहद नाजुक बनाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समय केवल सैन्य शक्ति का नहीं, बल्कि संवाद, सहयोग और समझ का है। यदि कूटनीतिक प्रयास सफल होते हैं, तो यह युद्धविराम शांति की दिशा में पहला कदम बन सकता है। अन्यथा, यह केवल एक विराम साबित होगा—एक ऐसा अंतराल, जिसके बाद संघर्ष और भी तीव्र रूप ले सकता है।

संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यम सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

Bengal Polls: मालदा मामले में NIA का बड़ा एक्शन, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 12 FIR दर्ज

कोलकाता/मालदा (राष्ट्र की परम्परा)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले मालदा में जजों के घेराव मामले में National Investigation Agency (NIA) ने बड़ा कदम उठाया है। एजेंसी ने इस मामले में 12 एफआईआर दर्ज कर गहन जांच शुरू कर दी है।

यह कार्रवाई Supreme Court of India के निर्देश के बाद की गई है। सर्वोच्च न्यायालय ने इस घटना को प्रशासनिक विफलता और संभावित राजनीतिक हस्तक्षेप का संकेत मानते हुए जांच एनआईए को सौंप दी थी।
एनआईए ने अपने बयान में बताया कि मालदा जिले के मोथाबाड़ी थाने से जुड़े 7 और कालियाचक थाने से जुड़े 5 मामलों को पुनः दर्ज किया गया है।

ये सभी मामले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्य में लगे न्यायाधीशों की सुरक्षा से संबंधित हैं। जांच टीमें मौके पर पहुंच चुकी हैं और साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

गौरतलब है कि इस घटना में सात न्यायाधीश—जिनमें तीन महिलाएं और एक बच्चा भी शामिल था—करीब 9 घंटे तक भीड़ के कब्जे में रहे। इस दौरान उन्हें भोजन और पानी तक नहीं दिया गया। घटना को सुनियोजित हमला बताया जा रहा है।

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सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें Surya Kant, Joymalya Bagchi और Vipul Pancholi शामिल थे, ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत 12 मामलों को एनआईए को ट्रांसफर किया।

कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला को फटकार लगाते हुए हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से माफी मांगने का निर्देश दिया। साथ ही पुलिस को आदेश दिया गया कि गिरफ्तार 26 आरोपियों को एनआईए के हवाले किया जाए।

मामले में प्रमुख आरोपी मोफाकरुल इस्लाम और मौलाना मोहम्मद शाहजहां अली कादरी पहले से ही गिरफ्तार हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह घटना न्यायपालिका को डराने की साजिश का हिस्सा हो सकती है।
चुनाव से पहले इस कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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डीएम का औचक निरीक्षण: कस्तूरबा विद्यालय में खामियों पर सख्ती, सुधार के निर्देश

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, खजूरिया का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने विद्यालय परिसर, रसोईघर, छात्रावास और सुरक्षा व्यवस्था का विस्तार से अवलोकन किया तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने छात्राओं की शैक्षिक प्रगति, सुरक्षा व्यवस्था और दैनिक गतिविधियों के संचालन के संबंध में बेसिक शिक्षा अधिकारी से जानकारी प्राप्त की। उन्होंने विद्यालय के मुख्य गेट पर पर्याप्त संख्या में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने के निर्देश दिए, ताकि प्रवेश द्वार और आस-पास के क्षेत्र की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित हो सके। रसोईघर के निरीक्षण के दौरान रोटी मेकिंग मशीन बंद पाए जाने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने मशीन के संचालन के लिए तत्काल प्रशिक्षण दिलाने और उसके नियमित उपयोग को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही भोजन की गुणवत्ता की जांच करते हुए पोषण मानकों का कड़ाई से पालन करने पर जोर दिया।
परिसर एवं छात्रावास में साफ-सफाई की स्थिति का निरीक्षण करते हुए जिलाधिकारी ने सफाई व्यवस्था को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि छात्राओं को स्वच्छ, सुरक्षित और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए।
इस दौरान जिलाधिकारी ने छात्राओं से संवाद भी किया और उनसे विज्ञान, कंप्यूटर तथा सामान्य ज्ञान से जुड़े प्रश्न पूछे। उन्होंने मिशन शक्ति के तहत छात्राओं को जागरूक करते हुए विभिन्न हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी और उन्हें आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। छात्राओं के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण सुनिश्चित कराने के निर्देश देते हुए कहा कि उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी समस्या की स्थिति में छात्राएं सीधे संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर सकती हैं।
निरीक्षण के दौरान कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, फरेंदा में कक्षा 6, 7 और 8 की कुल 89 छात्राएं उपस्थित पाई गईं, जबकि खजूरिया विद्यालय में 64 छात्राएं मौजूद थीं।
अंत में उन्होंने विद्यालय प्रशासन को निर्देशित किया कि सभी व्यवस्थाओं को समयबद्ध एवं प्रभावी ढंग से दुरुस्त किया जाए, ताकि छात्राओं को बेहतर शिक्षण वातावरण मिल सके। निरीक्षण के दौरान बेसिक शिक्षा अधिकारी रिद्धी पांडेय सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहें।

Iran War: नेतन्याहू बोले- मिशन अधूरा, फिर शुरू हो सकता है युद्ध; ईरान का कड़ा पलटवार

नई दिल्ली/तेहरान (राष्ट्र की परम्परा)। अमेरिका और ईरान के बीच घोषित सीजफायर के कुछ ही घंटों बाद मिडिल ईस्ट में हालात फिर तनावपूर्ण हो गए हैं। दोनों पक्षों की ओर से हमलों की खबरों के बीच क्षेत्र में संघर्ष और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने साफ कहा है कि उनका “मिशन अभी अधूरा” है और जरूरत पड़ी तो युद्ध दोबारा शुरू किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि सीजफायर पर उनकी और अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की सहमति थी, लेकिन अभी कई लक्ष्य बाकी हैं।

नेतन्याहू ने दावा किया कि इजरायल ने ईरान की मिसाइल उत्पादन क्षमता को काफी हद तक कमजोर कर दिया है। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि यदि जरूरी हुआ तो सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी।

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इस बीच ईरान ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि अगर लेबनान में हमले नहीं रोके गए तो जोरदार जवाब दिया जाएगा। ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने इस मुद्दे पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif से भी बातचीत की और सीजफायर उल्लंघन की आलोचना की।

तनाव के बीच ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही रोक दी है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के संघर्षविराम की घोषणा से शांति की उम्मीद जगी थी, लेकिन ताजा घटनाक्रम ने इस उम्मीद को झटका दिया है। लगातार बयानबाजी और हमलों से संकेत मिल रहे हैं कि मिडिल ईस्ट में हालात अभी भी बेहद अस्थिर हैं और बड़ा संघर्ष फिर भड़क सकता है।

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उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक फेरबदल की सुगबुगाहट, कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारी प्रतीक्षारत सूची में


लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। राज्य सरकार द्वारा वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के दायित्वों में संभावित फेरबदल की चर्चाओं के बीच कई प्रमुख अधिकारियों को प्रतीक्षारत सूची में रखा गया है। इस घटनाक्रम को प्रशासनिक पुनर्गठन और कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुंजन द्विवेदी (आईएएस) और रत्नेश सिंह (आईएएस) को फिलहाल प्रतीक्षारत रखा गया है। इन दोनों अधिकारियों के अनुभव और कार्यशैली को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि उन्हें जल्द ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं। प्रशासनिक हलकों में यह भी चर्चा है कि इनकी नई तैनाती रणनीतिक रूप से अहम विभागों में की जा सकती है।
वहीं, अशोक कुमार को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग, प्रयागराज में सचिव के रूप में जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह पद राज्य की भर्ती प्रक्रियाओं और चयन प्रणाली के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। उनकी नियुक्ति से आयोग की कार्यप्रणाली में तेजी और पारदर्शिता आने की उम्मीद जताई जा रही है।
इसी क्रम में गिरिजेश कुमार त्यागी को उच्च शिक्षा विभाग में विशेष सचिव के साथ-साथ डॉ. राम मनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ के कुलसचिव का दायित्व सौंपा गया है। शिक्षा क्षेत्र में उनके अनुभव को देखते हुए यह नियुक्ति महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे विश्वविद्यालय प्रशासन और उच्च शिक्षा नीतियों के बेहतर क्रियान्वयन की संभावना जताई जा रही है।
श्रीमती अनीता वर्मा सिंह को सिंचाई, जल संसाधन एवं परती भूमि विकास विभाग के विशेष सचिव के साथ-साथ कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग की जिम्मेदारी भी दी गई है। इसके अतिरिक्त उन्हें स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की मिशन निदेशक तथा उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी, लखनऊ में अपर निदेशक का कार्यभार भी सौंपा गया है। इतने विविध विभागों की जिम्मेदारी उनके प्रशासनिक कौशल और अनुभव पर सरकार के भरोसे को दर्शाती है।

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विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रशासनिक फेरबदल से शासन व्यवस्था में नई ऊर्जा का संचार होता है। इससे न केवल विभागों की कार्यक्षमता बढ़ती है, बल्कि योजनाओं के क्रियान्वयन में भी तेजी आती है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में प्रशासनिक संतुलन बनाए रखना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है, और इस प्रकार के निर्णय उसी दिशा में उठाए गए कदम के रूप में देखे जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में और भी बड़े स्तर पर प्रशासनिक बदलाव संभव हैं। सरकार की मंशा स्पष्ट है कि शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और परिणामोन्मुख बनाया जाए। ऐसे में अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव एक नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है, जो समय-समय पर आवश्यकतानुसार किया जाता है।
राजनीतिक और प्रशासनिक विश्लेषकों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि प्रतीक्षारत अधिकारियों को कौन-कौन सी नई जिम्मेदारियां मिलती हैं और इसका राज्य के प्रशासनिक ढांचे पर क्या प्रभाव पड़ता है। फिलहाल, यह फेरबदल प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

लागत बढ़ी, काम रुका: NHAI के बाद यूपी में भी राहत पैकेज की उठी मांग

बिटुमेन की कीमतों में उछाल से ठेकेदार परेशान, यूपी सरकार से राहत पैकेज की मांग तेज


लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। वैश्विक स्तर पर पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में तेजी का असर अब उत्तर प्रदेश के सड़क निर्माण कार्यों पर भी साफ दिखने लगा है। बिटुमेन (डामर) की दरों में अप्रत्याशित वृद्धि के चलते राज्य के ठेकेदारों ने काम करना मुश्किल बताया है और सरकार से तत्काल राहत की मांग की है। उत्तर प्रदेश ठेकेदार कल्याण समिति ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान आकर्षित किया है।
समिति के अध्यक्ष शरद कुमार सिंह के नेतृत्व में भेजे गए पत्र में कहा गया है कि अमेरिका-ईरान तनाव के चलते पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे बिटुमेन की कीमतों में भारी उछाल आया है। सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों में उपयोग होने वाले बिटुमेन की दर में प्रति मीट्रिक टन लगभग 30,000 रुपये तक की वृद्धि हो चुकी है। इसका सीधा असर परियोजनाओं की लागत पर पड़ रहा है।
पत्र के अनुसार, पहले से तय दरों पर हुए टेंडर के तहत काम करना अब ठेकेदारों के लिए घाटे का सौदा बन गया है। प्रति किलोमीटर सड़क नवीनीकरण में करीब 1.20 लाख रुपये की अतिरिक्त लागत आ रही है। ऐसे में ठेकेदारों ने स्पष्ट किया है कि पुराने रेट पर काम जारी रखना संभव नहीं है।

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इस बीच, National Highways Authority of India (NHAI) ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए अपने प्रोजेक्ट्स के लिए राहत देने का निर्णय लिया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के निर्देश पर 8 अप्रैल 2026 को जारी नीति परिपत्र के तहत लागत वृद्धि की भरपाई के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। यह व्यवस्था 1 अप्रैल से 30 जून 2026 तक लागू रहेगी या तब तक जारी रहेगी जब तक वैश्विक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती।
नीति के तहत ईंधन, निर्माण सामग्री और लॉजिस्टिक्स लागत में वृद्धि के प्रभाव को कम करने के लिए लागत समायोजन (Cost Escalation Compensation) का प्रावधान किया गया है। इससे राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में काम की गति बनाए रखने में मदद मिलेगी।
ठेकेदार कल्याण समिति ने मांग की है कि राज्य सरकार भी इसी तरह की नीति लागू करे ताकि लोक निर्माण विभाग (PWD) के तहत चल रहे कार्य प्रभावित न हों। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते राहत नहीं दी गई तो विकास कार्यों की गति धीमी पड़ सकती है और परियोजनाएं अधर में लटक सकती हैं।

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समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि ठेकेदार पहले से ही वित्तीय दबाव झेल रहे हैं। समय पर भुगतान में देरी और अब लागत में अचानक वृद्धि ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। ऐसे में सरकार को तत्काल हस्तक्षेप कर ठोस समाधान निकालना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बिटुमेन की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो आने वाले समय में सड़क निर्माण परियोजनाओं की लागत और बढ़ सकती है, जिससे राज्य के बजट पर भी असर पड़ेगा। वहीं, गुणवत्ता पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
सरकार के सामने अब चुनौती यह है कि वह विकास कार्यों को बाधित किए बिना ठेकेदारों को राहत कैसे दे। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर बड़ा निर्णय लिया जा सकता है।

फार्मर रजिस्ट्री अभियान की डीएम ने की दैनिक समीक्षा, 15 अप्रैल तक विशेष कैंप जारी

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में 06 अप्रैल से 15 अप्रैल तक गांववार विशेष कैंप लगाकर छूटे हुए किसानों की फार्मर रजिस्ट्री कराई जा रही है। इस अभियान की प्रगति की समीक्षा जिलाधिकारी द्वारा प्रतिदिन रात्रि 09:00 बजे गूगल मीट के माध्यम से की जा रही है, जिसमें अपर जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी सहित सभी उप जिलाधिकारी, तहसीलदार, उप कृषि निदेशक, खंड विकास अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी, जिला कृषि अधिकारी एवं भूमि संरक्षण अधिकारी शामिल होते हैं।
प्रदेश सरकार द्वारा किसानों के लिए फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य की जा रही है। भविष्य में उर्वरक वितरण, बीज वितरण, किसान क्रेडिट कार्ड, धान-गेहूं क्रय, कृषक दुर्घटना सहायता सहित अन्य योजनाओं में इसका होना जरूरी होगा।
समीक्षा के दौरान उप कृषि निदेशक ने बताया कि जनपद में 216863 प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि पात्र किसानों के सापेक्ष 152054 किसानों की रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है। वहीं कुल 178197 किसानों का फार्मर रजिस्ट्री किया जा चुका है। अब भी 64809 किसानों का रजिस्ट्री कराना शेष है। 7 अप्रैल को 2346 किसानों की रजिस्ट्री कराई गई।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि अभियान में नामित लेखपाल, कृषि कर्मी, पंचायत सहायक, रोजगार सेवक तथा ग्राम स्तर के जनप्रतिनिधियों के सहयोग से रजिस्ट्री कार्य तेज किया जाए। प्रतिदिन 6000 किसानों की रजिस्ट्री सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। लापरवाही मिलने पर संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
किसानों से अपील की गई है कि वे आधार, मोबाइल नंबर और खतौनी के साथ अपना फार्मर रजिस्ट्री अवश्य करा लें। किसान स्वयं मोबाइल ऐप, नामित सरकारी कर्मियों या जन सुविधा केंद्रों के माध्यम से भी यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

गेहूं खरीद की तैयारियों की समीक्षा, 63 क्रय केंद्रों पर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। अपर जिलाधिकारी (वित्त व राजस्व) जयप्रकाश की अध्यक्षता में जनपद के सभी क्रय केंद्रों पर गेहूं खरीद की तैयारियों, अद्यतन स्थिति और प्रगति की समीक्षा बैठक विकास भवन सभागार में आयोजित हुई। बैठक में किसानों की सुविधाओं को प्राथमिकता देते हुए व्यवस्थाएं सुदृढ़ करने के निर्देश दिए गए।
जिला खाद्य विपणन अधिकारी ने जानकारी दी कि रबी विपणन वर्ष 2026-27 में मूल्य समर्थन योजना के तहत 30 मार्च 2026 से गेहूं खरीद शुरू हो चुकी है। जनपद में कुल 63 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें खाद्य विभाग, पीसीएफ, पीसीयू, भारतीय खाद्य निगम और मंडी समिति के केंद्र शामिल हैं। विभिन्न सहकारी संस्थाओं के माध्यम से भी गेहूं खरीद की व्यवस्था की गई है।
अपर जिलाधिकारी ने बताया कि गेहूं खरीद की अवधि 30 मार्च से 15 जून 2026 तक निर्धारित है। केंद्र प्रातः 9 बजे से सायं 6 बजे तक खुले रहेंगे। इस वर्ष गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति कुंतल तय किया गया है, जो पिछले वर्ष से 160 रुपये अधिक है। उतराई, छनाई और सफाई के लिए किसानों को अधिकतम 20 रुपये प्रति कुंतल का भुगतान किया जाएगा, जिसकी प्रतिपूर्ति उनके बैंक खाते में की जाएगी।
उन्होंने निर्देश दिया कि सभी ग्राम पंचायतों में क्रय केंद्रों की जानकारी, प्रभारी का नाम, मोबाइल नंबर, समय और समर्थन मूल्य की जानकारी वॉल पेंटिंग के माध्यम से प्रदर्शित की जाए। गेहूं बिक्री के लिए किसानों को खाद्य विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण या नवीनीकरण कराना अनिवार्य होगा, जिसे वे स्वयं या जन सुविधा केंद्रों के माध्यम से करा सकते हैं।
लघु एवं सीमान्त किसानों को बिना पंजीकरण के भी केंद्र पर सुविधा देते हुए वहीं पंजीकरण कर खरीद सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। बटाईदार किसानों और ट्रस्ट श्रेणी के अंतर्गत भी गेहूं खरीद की व्यवस्था लागू रहेगी। सत्यापन के लिए भूलेख, आधार और अन्य अभिलेखों का उपयोग किया जाएगा।
अपर जिलाधिकारी ने सभी केंद्र प्रभारियों को निर्देशित किया कि प्रतिदिन बायोमैट्रिक उपस्थिति दर्ज करें तथा प्रत्येक बोरे पर आवश्यक विवरण अंकित किया जाए। उन्होंने किसानों की सुविधा और पारदर्शिता को प्राथमिकता देते हुए निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप गेहूं खरीद सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
बैठक में जिला खाद्य विपणन अधिकारी कमलेश सिंह, जिला कृषि अधिकारी डॉ. सर्वेश यादव, एआर को-ऑपरेटिव आनंद मिश्रा सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।