गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. कौस्तुभ ने थाना गोरखनाथ क्षेत्र स्थित धर्मशाला तिराहा का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने ट्रैफिक जाम, वाहनों की आवाजाही और यातायात पुलिस की तैनाती का बारीकी से जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान एसएसपी ने तिराहे पर लगने वाले जाम के प्रमुख कारणों की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अनावश्यक रूप से खड़े वाहनों को तत्काल हटाया जाए और अवैध पार्किंग के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही सड़क किनारे अतिक्रमण को भी हटाने के निर्देश दिए गए, ताकि यातायात सुचारू रूप से संचालित हो सके।
एसएसपी ने यातायात पुलिस को निर्देशित किया कि पीक आवर्स के दौरान अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा ट्रैफिक सिग्नल और बैरिकेडिंग का प्रभावी उपयोग करने पर जोर दिया गया। ई-रिक्शा, ऑटो और अन्य सार्वजनिक वाहनों के संचालन को व्यवस्थित करने के लिए निर्धारित स्थानों का सख्ती से पालन कराने के निर्देश भी दिए गए।
उन्होंने कहा कि यातायात नियमों के प्रति आमजन को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि शहर में सुरक्षित और सुगम यातायात व्यवस्था प्रशासन की प्राथमिकता है। इस दौरान पुलिस अधीक्षक नगर निमिष पाटिल, पुलिस अधीक्षक यातायात अमित कुमार श्रीवास्तव सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
पश्चिम बंगाल 2026 : जनादेश से सत्ता परिवर्तन तक, क्या शुरू होगा विकास का नया सवेरा?
भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति उसकी जनता है। जब जनता परिवर्तन का मन बना लेती है, तब वर्षों से स्थापित राजनीतिक समीकरण भी बदल जाते हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के परिणाम इसी लोकतांत्रिक शक्ति का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आए हैं। 4 मई 2026 को घोषित चुनाव परिणामों ने न केवल बंगाल की राजनीति की दिशा बदल दी, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी एक नया अध्याय जोड़ दिया। 206 सीटों के अभूतपूर्व जनादेश के साथ पहली बार भाजपा पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने की स्थिति में पहुंची है। यह परिणाम केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि मतदाताओं की बदलती प्राथमिकताओं, विकास की अपेक्षाओं और राजनीतिक चेतना का संकेत माना जा रहा है इस चुनाव की सबसे बड़ी राजनीतिक घटना भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी की हार रही। लंबे समय से सुरक्षित मानी जाने वाली इस सीट पर मिली पराजय ने यह स्पष्ट कर दिया कि जनता अब पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों से आगे बढ़कर परिणाम आधारित राजनीति चाहती है। भाजपा की यह जीत अचानक नहीं मानी जा सकती। 2014 में सीमित राजनीतिक उपस्थिति से शुरू हुई यात्रा 2019 में मजबूत हुई, 2021 में चुनौती के रूप में उभरी और 2026 में स्पष्ट बहुमत तक पहुंच गई। यह क्रम भाजपा की संगठनात्मक रणनीति, बूथ स्तर की सक्रियता और दीर्घकालिक राजनीतिक विस्तार का परिणाम माना जा रहा है। चुनाव परिणाम के बाद राज्य में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने की चर्चाएं लगातार बढ़ रही हैं। हालांकि अंतिम निर्णय विधायक दल और केंद्रीय नेतृत्व की सहमति के बाद ही तय होगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की कोलकाता यात्रा और विधायकों के साथ बैठक को भी इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 9 मई 2026 को नई सरकार का शपथ ग्रहण प्रस्तावित है और विशेष बात यह है कि यह दिन रवीन्द्रनाथ टैगोर की जयंती के साथ मेल खा रहा है। बंगाल की सांस्कृतिक चेतना में टैगोर केवल साहित्यकार नहीं, बल्कि सांस्कृतिक आत्मा के प्रतीक हैं। ऐसे में इस दिन शपथ ग्रहण को राजनीतिक और सांस्कृतिक संदेश दोनों के रूप में देखा जा रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने राष्ट्रीय सुरक्षा, अवैध घुसपैठ, सीमा सुरक्षा, कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा, औद्योगिक विकास और केंद्र सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। सिलीगुड़ी कॉरिडोर की रणनीतिक महत्ता और नागरिकता संशोधन कानून जैसे विषयों ने भी चुनावी विमर्श को प्रभावित किया। हालांकि, जनादेश जितना बड़ा है, चुनौतियां भी उतनी ही गंभीर हैं। पश्चिम बंगाल का सामाजिक और सांस्कृतिक ढांचा अत्यंत संवेदनशील और बहुआयामी है। क्षेत्रीय पहचान, भाषाई गौरव और सांस्कृतिक अस्मिता यहां की राजनीति को गहराई से प्रभावित करते हैं। नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती सामाजिक समरसता बनाए रखने और राजनीतिक ध्रुवीकरण को नियंत्रित करने की होगी। प्रधानमंत्री द्वारा चुनाव परिणाम के बाद दिया गया संदेश—“बदलाव, बदले की राजनीति नहीं”—नई सरकार के लिए दिशा संकेत माना जा रहा है। यदि सरकार इस संदेश को व्यवहारिक रूप में लागू कर पाती है, तो यह बंगाल की राजनीति में नई कार्यसंस्कृति की शुरुआत हो सकती है। तृणमूल कांग्रेस की मजबूत उपस्थिति विपक्ष के रूप में लोकतांत्रिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। स्वस्थ लोकतंत्र के लिए सशक्त विपक्ष भी उतना ही आवश्यक होता है जितना मजबूत शासन। इसलिए आने वाले समय में बंगाल की राजनीति अधिक प्रतिस्पर्धी और परिणाम आधारित दिखाई दे सकती है। इस राजनीतिक परिवर्तन का प्रभाव केवल सत्ता तक सीमित नहीं रहेगा। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की नजरें भी अब पश्चिम बंगाल पर टिक गई हैं। यदि नई सरकार उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण, स्थिर कानून-व्यवस्था और पारदर्शी प्रशासन प्रदान करती है, तो राज्य में निवेश की नई संभावनाएं विकसित हो सकती हैं। विशेष रूप से आईटी, विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स, बंदरगाह, बुनियादी ढांचा और पर्यटन क्षेत्र में नए अवसर पैदा होने की संभावना है। सिलीगुड़ी कॉरिडोर जैसे रणनीतिक क्षेत्र का विकास राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जाएगा। राजनीतिक स्थिरता का सकारात्मक असर शेयर बाजार और आर्थिक गतिविधियों पर भी देखने को मिल सकता है। निवेशक आमतौर पर स्थिर और विकासोन्मुखी सरकारों को प्राथमिकता देते हैं। इसलिए यह जनादेश आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि कुछ जोखिम भी मौजूद हैं। यदि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा सामाजिक तनाव में बदलती है या क्षेत्रीय अस्मिता के प्रश्नों को संतुलित ढंग से नहीं संभाला गया, तो विकास प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। नई सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि चुनावी वादे केवल घोषणाएं बनकर न रह जाएं, बल्कि समयबद्ध तरीके से जमीन पर दिखाई दें। जनता अब केवल भाषण नहीं, परिणाम चाहती है। वह बेहतर कानून-व्यवस्था, रोजगार, औद्योगिक विकास, सामाजिक सुरक्षा और पारदर्शी प्रशासन की अपेक्षा रखती है। यही कारण है कि 2026 का यह जनादेश भारतीय लोकतंत्र में जवाबदेही की नई परिभाषा के रूप में भी देखा जा रहा है। पश्चिम बंगाल का यह चुनाव परिणाम भारतीय लोकतंत्र की परिपक्वता का प्रमाण है। यह दिखाता है कि जनता परिस्थितियों के अनुसार सत्ता बदलने का साहस रखती है और लोकतंत्र में अंतिम निर्णय मतदाता ही करता है। आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह सत्ता परिवर्तन वास्तव में बंगाल में विकास, सामाजिक संतुलन और राजनीतिक स्थिरता का नया अध्याय लिख पाता है, या फिर यह केवल एक चुनावी बदलाव बनकर रह जाता है। यदि नई सरकार जनता के विश्वास को बनाए रखने में सफल होती है, तो 2026 का यह जनादेश वास्तव में पश्चिम बंगाल के लिए “नए सवेरे” की शुरुआत सिद्ध हो सकता है।
— लेखक : एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया महाराष्ट्र
गौ माता को मवेशी और कैटल कहना गरिमा का अपमान, पुलिस थाने और कागजों में गाय का अपमान बर्दाश्त नहीं
24 जुलाई को लखनऊ में 2,18,700 सैनिकों की चतुरंगिनी सेना के साथ होगा आर-पार का ऐलान; सनातनी वोटबैंक के नेतृत्व संकट पर उठाए सवाल।
मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री पद पर साधुओं की मौजूदगी को बताया शास्त्र विरुद्ध, विदेशी विचारधाराओं की गुलाम है वर्तमान राजनीति
गौरव कुशवाहा
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने गविष्टि धर्मयुद्ध यात्रा के तीसरे दिन मंगलवार को वैकुंठपुर स्थित श्री राम मंदिर की भूमि से केंद्र और राज्य सरकार के विरुद्ध अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। शंकराचार्य ने तथाकथित हिंदूवादी सरकारों को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि धर्म के नाम पर सत्ता में बैठे लोग आज सबसे बड़ा अधर्म कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि भारत विश्व में बीफ एक्सपोर्ट (गो-मांस निर्यात) में शीर्ष पर है, तो यह कैसी सनातनी व्यवस्था है? जगद्गुरु ने अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि गौ माता को राष्ट्र माता घोषित नहीं किया गया, तो आगामी 24 जुलाई को लखनऊ की सड़कों पर 2 लाख 18 हजार 700 सैनिकों वाली ‘अक्षौहिणी सेना’ के साथ निर्णायक युद्ध की घोषणा की जाएगी।
शंकराचार्य ने भाजपा, कांग्रेस, सपा और बसपा को एक ही सिक्के के दो पहलू बताते हुए कहा कि इनमें से कोई भी दल भारत की मूल सनातनी विचारधारा का प्रतिनिधित्व नहीं करता। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा अमेरिका के पूंजीवाद की नकल कर रही है, कांग्रेस ब्रिटिश राजनीति के अवशेषों पर टिकी है, जबकि समाजवादी और साम्यवादी दल रूस व चीन की विचारधारा से प्रभावित हैं। महाराजश्री ने दुख व्यक्त किया कि राम, कृष्ण और विक्रमादित्य की गौरवशाली परंपरा वाली भारतीय राजनीति आज लुप्तप्राय है। उन्होंने आह्वान किया कि देश की 70 करोड़ सनातनी जनता आज नेतृत्व के अभाव में 30 करोड़ के पीछे चलने को विवश है, जिसे अब और सहन नहीं किया जाएगा।
राजनीति और धर्म के घालमेल पर बड़ा बयान देते हुए जगद्गुरु ने स्पष्ट किया कि जो साधु-सन्यासी संसार का त्याग कर चुके हैं, उनके लिए मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री या विधायक जैसे सांसारिक पद ग्रहण करना शास्त्र सम्मत नहीं है। उन्होंने कहा कि जो गृहस्थ सनातनी वेदों और शास्त्रों को प्रमाण मानते हैं, उन्हें राजनीति में आना चाहिए और समाज को उन्हें भरपूर समर्थन देना चाहिए। उन्होंने आगाह किया कि संन्यासी का कार्य सत्ता भोगना नहीं, बल्कि सत्ता को धर्म के मार्ग पर चलाना है। उत्तर प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए महाराजश्री ने कहा कि पुलिस थानों और सरकारी आँकड़ों में गाय को आज भी ‘मवेशी’ (Cattle) लिखा जाता है, जो उसकी गरिमा का घोर अपमान है। उन्होंने स्मरण दिलाया कि महाराष्ट्र की शिंदे सरकार ने उनके मात्र एक आग्रह पर गाय को राज्य माता घोषित कर दिया, जिसे रोकने के लिए न कोई कानून आगे आया और न ही कोई न्यायालय। उन्होंने मांग की कि गाय को पशु सूची से हटाकर एक सम्मानित पृथक श्रेणी में रखा जाए।
महाराजश्री ने चेतावनी दी कि यदि 81 दिनों की यात्रा पूर्ण होने तक सरकार ने उनकी माँगें नहीं मानी, तो 24 जुलाई को लखनऊ में महाभारत कालीन चतुरंगिनी सेना का प्रदर्शन होगा। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे ‘1008.guru’ पोर्टल पर पंजीकरण कर इस धर्मयुद्ध का हिस्सा बनें। मुंडेरा बाबू, बंजरिया, कंचनपुर और सोनुघाट जैसे क्षेत्रों में जनसमुदाय ने ‘गविष्टि’ के संकल्प के साथ शपथ ली कि वे गौ माता को सताने वाली आसुरी शक्तियों को पराजित करके ही दम लेंगे।
शंकराचार्य ने जिस सेना की घोषणा की है, वह महाभारत के युद्ध मानकों पर आधारित है। एक अक्षौहिणी सेना में 2,18,700 सैनिक होते हैं, जिसमें हाथी, रथ, घुड़सवार और पैदल सेना का एक निश्चित अनुपात होता है। लखनऊ में इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का जुटना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा ) पश्चिम बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक विजय के बाद बंगाल चुनाव प्रचार से वापस लौटे पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा मार्कण्डेय शाही का किसान मोर्चा कार्यकर्ताओ ने माल्यार्पण कर स्वागत-अभिनंदन किया। भाजपा किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष पवन मिश्र ने कहा कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कार्यकर्ताओ के आतंक और भय और ममता सरकार के भ्रष्टाचार से आजिज आकर जनता ने भारतीय जनता पार्टी को प्रचण्ड बहुमत दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार आने के बाद बंगाल में सुशासन का राज स्थापित होगा, जनता खुशहाल और समृद्ध होगी। बंगाल चुनाव प्रचार से लौटे पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा मार्कण्डेय शाही ने कहा कि बंगाल में अराजकता चरम सीमा पर थी, तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के भय से आम जनता त्रस्त थी, तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा बंगाल में भाजपा के कार्यकर्ताओं और खासकर हिन्दुओ का उत्पीड़न किया जा रहा था, जिसके फलस्वरूप कार्यकर्ताओ ने संगठित होकर चुनाव में परिश्रम किया और आमजनता ने साथ देकर बंगाल में पूर्ण बहुमत की भाजपा सरकार को बनाया। इस अवसर पर मुख्य रूप से सभासद अमित मिश्रा, विजेंद्र चौहान, डॉ विनोद पांडेय,राजू मिश्र, सोनू, अवनीश उपस्थित रहे।
समाजवादी पार्टी के सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद रमाशंकर राजभर ने प्रदेश सरकार पर विकास कार्यों में भेदभाव का आरोप लगाया है। मंगलवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने कहा कि मार्च माह में सरकार द्वारा त्वरित योजना के तहत सभी सांसदों और विधायकों से उनके क्षेत्रों की जर्जर सड़कों के निर्माण के लिए 5-5 करोड़ रुपये तक के प्रस्ताव मांगे गए थे।सांसद ने बताया कि उन्होंने भी अपने क्षेत्र की सड़कों के सुधार के लिए निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रस्ताव भेजा था। हालांकि, जब स्वीकृत धनराशि की सूची सामने आई, तो यह देखकर निराशा हुई कि सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों के क्षेत्रों में 5 से 6 करोड़ रुपये तक की राशि आवंटित की गई, जबकि विपक्षी क्षेत्रों को मात्र 1 करोड़ रुपये तक ही सीमित रखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कई विपक्षी जनप्रतिनिधियों के प्रस्तावों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया, जो नियमों के विपरीत है।रमाशंकर राजभर ने कहा कि यह स्थिति सरकार की पक्षपातपूर्ण कार्यशैली को दर्शाती है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि इस प्रकार के भेदभाव को तत्काल समाप्त किया जाए और सभी क्षेत्रों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित किया जाए, ताकि संतुलित विकास संभव हो सके। मीडिया प्रभारी जितेश कुमार वर्मा ने भी कहा कि समाजवादी पार्टी जनहित के मुद्दों को लगातार उठाती रही है और आगे भी निष्पक्ष विकास के लिए संघर्ष जारी रखेगी।
सिकंदरपुर समाजवादी पार्टी के नेताओं ने क्षेत्र की विभिन्न जनसमस्याओं को लेकर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई है। पार्टी के विधानसभा क्षेत्र सिकंदरपुर अध्यक्ष रामजी यादव के नेतृत्व में उठाए गए मुद्दों में अधूरे विकास कार्य, खराब सड़कें, बिजली आपूर्ति और किसानों की समस्याएं प्रमुख रूप से शामिल हैं। नेताओं ने बताया कि दरौली घाट पर पक्का पुल निर्माण के लिए पूर्व में स्वीकृति मिल चुकी थी और प्रारंभिक कार्य भी कराया गया था, लेकिन वर्तमान सरकार की उदासीनता के चलते अब तक निर्माण के लिए आवश्यक धनराशि उपलब्ध नहीं कराई गई है। निर्माण निगम द्वारा पिलर बढ़ाने का प्रस्ताव भी शासन को भेजा गया है, लेकिन उस पर भी कोई निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे क्षेत्रीय जनता में गहरा असंतोष व्याप्त है। इसके अलावा सिकंदरपुर चौराहे से थाना होते हुए देवकली तक जाने वाली मुख्य सड़क जल निगम द्वारा पाइप डालने के बाद खोदकर छोड़ दी गई है। करीब छह किलोमीटर लंबी इस सड़क पर आवागमन पूरी तरह बाधित है, जिससे दर्जनों गांवों के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सपा नेताओं ने मांग की है कि बरसात से पहले इस सड़क का निर्माण कार्य पूरा कराया जाए। बिजली आपूर्ति को लेकर भी पार्टी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि गर्मी के दिनों में कम से कम 18 से 20 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। वहीं असमय बारिश से गेहूं की फसल को हुए नुकसान का सर्वे कराकर किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग भी उठाई गई।सपा नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो पार्टी आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
सुखपुरा में सोमवार की शाम आई तेज आंधी और बारिश ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया। इस दौरान सुखपुरा अस्पताल परिसर में 11 हजार वोल्ट की विद्युत लाइन के दो पोल टूटकर गिर पड़े, जिससे पूरे कस्बे की बिजली आपूर्ति ठप हो गई। घटना के बाद से 24 घंटे बीत जाने के बावजूद अब तक विद्युत व्यवस्था बहाल नहीं हो सकी है, जिससे उपभोक्ताओं में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।स्थानीय लोगों का कहना है कि बिजली विभाग की ओर से अब तक कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है कि गिरे हुए पोल के स्थान पर नया पोल कब तक लगाया जाएगा और आपूर्ति कब बहाल होगी। विद्युत आपूर्ति बाधित होने से लोगों का दैनिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। पानी की समस्या, मोबाइल चार्जिंग और छोटे व्यवसायों पर भी इसका असर पड़ा है। कस्बे के उपभोक्ताओं ने बताया कि सुखपुरा विद्युत उपकेंद्र से जुड़े कई गांव पहले से ही अनियमित बिजली आपूर्ति की समस्या से जूझ रहे हैं। आए दिन ब्रेकडाउन और फाल्ट के कारण उन्हें घंटों बिजली से वंचित रहना पड़ता है। इस ताजा घटना ने उनकी परेशानियों को और बढ़ा दिया है। उपभोक्ताओं ने विभाग के उच्चाधिकारियों से जल्द से जल्द क्षतिग्रस्त पोल को बदलकर विद्युत आपूर्ति बहाल करने की मांग की है, ताकि जनजीवन सामान्य हो सके।
बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा) तहसील क्षेत्र ग्राम कपरवार तिराहे के नजदीक नाली निर्माण कार्य के दौरान एक बिजली का खम्बा गिरा जिससे दो पहिया वाहन क्षतिग्रस्त हो गया बड़ी दुर्घटना होने से रहा। खुदाई के चलते मंगलवार को बिजली का खंभा अचानक गिर गया। गनीमत रहा कि कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन खंभे के निचे आने से एक दोपहिया वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। खम्बा गिरता देख मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
सूत्रों के मुताबिक स्थानीय लोगो की माने तो ग्राम पंचायत द्वारा नाली निर्माण का काम चल रहा था। जेसीबी से खुदाई के दौरान बिजली के खंभे की नींव कमजोर होने से खंभा अचानक सड़क पर आ गिरा, जिससे पास खड़ी एक दो पहिया वाहन खम्बे के नीचे दब गई। और मौके पर अफरा तफरी मच गयी।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदार और जेई की लापरवाही से हादसा हुआ। न तो बिजली विभाग को सूचना दी गई और न ही खम्बे के चारो तरफ बैरिकेडिंग की गई और न ही सुरक्षा के इंतजाम किये गए। खंभा गिरने से 11 हजार की लाइन टूट गई। इससे कपरवार व आसपास के आधा दर्जन गांवों की बिजली आपूर्ति ठप हो गई। बिजली विभाग के जेई मौके पर पहुंचे और लाइन दुरुस्त करने का काम शुरू कराया। देर शाम तक आपूर्ति बहाल होने की उम्मीद है।
बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा ) मंगलवार 5/05/2026 को पश्चिम बंगाल, असम एवं पुडुचेरी में भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड जीत के उपलक्ष्य में नगर पालिका परिषद गौरा बरहज में, हर्षोल्लास के साथ खुशी मनाई गई। इस अवसर पर कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों द्वारा पटाखे फोड़े गए तथा एक-दूसरे को मिष्ठान खिलाकर बधाई एवं शुभकामनाएं दी गईं। इस ऐतिहासिक जीत का श्रेय देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व, विकासोन्मुखी नीतियों एवं जनकल्याणकारी योजनाओं को जाता है, जिन्होंने देश के हर वर्ग का विश्वास जीता है। साथ ही गृह मंत्री अमित शाह की कुशल रणनीति, संगठनात्मक क्षमता एवं मजबूत नेतृत्व ने भी इस विजय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के संगठनात्मक योगदान एवं इन सभी के समन्वित प्रयासों ने इस विजय को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया है। असम, पुडुचेरी एवं पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सुशासन, सख्त कानून-व्यवस्था और विकास मॉडल की व्यापक चर्चा ने कार्यकर्ताओं में उत्साह और जनता में विश्वास को और मजबूत किया है, जिससे भाजपा को राजनीतिक बढ़त बनाने में सकारात्मक माहौल मिला है। इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष श्वेता जायसवाल, अध्यक्ष प्रतिनिधि श्याम जायसवाल, नगर उपाध्यक्ष आशुतोष तिवारी, विजय सिंह व सभासदगण धर्मवीर सिंह, सतेंद्र यादव, शुभम निषाद , उमेश यादव रामभवन सोनकर सहित अन्य सम्मानित कार्यकर्तागण उपस्थित रहें। यह जीत न केवल पार्टी कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम का परिणाम है, बल्कि जनता के अटूट विश्वास और समर्थन का प्रतीक भी है, जिससे देश में विकास और सुशासन की दिशा और अधिक मजबूत होगी।
भौंरहिया नदी पुल के पास मुखबिर की सूचना पर दबिश, साईकिल से हो रही थी शराब तस्करी
महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में अपराध नियंत्रण एवं अवैध तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत ठूठीबारी पुलिस ने सफलता हासिल की है। पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी के निर्देशन तथा अपर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ के पर्यवेक्षण में लगातार सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। इसी क्रम में मंगलवार को थाना ठूठीबारी की पुलिस टीम, उ.नि.मनीष पटेल के नेतृत्व में क्षेत्र में गश्त, संदिग्ध व्यक्तियों एवं वाहनों की चेकिंग तथा अवैध तस्करी की रोकथाम हेतु सक्रिय थी। इसी दौरान मुखबिर से प्राप्त सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने लक्ष्मीपुर खुर्द स्थित भौंरहिया नदी पुल से पूर्व पगडंडी मार्ग पर घेराबंदी कर दबिश दी। पुलिस कार्रवाई के दौरान मौके से शिवम साहनी उम्र लगभग 19 वर्ष, पुत्र रमेश, निवासी डिगहीं थाना ठूठीबारी को गिरफ्तार किया गया। तलाशी लेने पर उसके कब्जे से पांच बोरों में भरी कुल 450 शीशी अवैध नेपाली शराब बरामद हुई। साथ ही तस्करी में प्रयुक्त एक साईकिल भी पुलिस ने जब्त कर ली। प्रारंभिक पूछ-ताछ में यह बात सामने आई कि आरोपी सीमावर्ती क्षेत्र का लाभ उठाकर साईकिल के माध्यम से शराब की अवैध तस्करी करता था और इसे स्थानीय स्तर पर खपाने की योजना थी। पुलिस का मानना है कि इस मामले में अन्य तस्करों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है, ताकि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके। पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध धारा 60/63 उत्तर प्रदेश आबकारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर उसे थाना लाकर विधिक कार्रवाई प्रारंभ कर दी है। इस सफल कार्रवाई में उ.नि. उमाकांत सरोज, हे.का. उदयभान कुमार, हे.का. धर्मेन्द्र कुमार सिंह, कांस्टेबल दीपक कुमार, कांस्टेबल कवि कुमार, कांस्टेबल सुनील कुमार, कांस्टेबल प्रमोद यादव तथा गौरव पासवान की सराहनीय भूमिका रही।
गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा) बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत प्रदेश के 1,43,000 शिक्षामित्रों का मानदेय 10,000 रुपये से बढ़ाकर 18,000 रुपये प्रति माह किए जाने के उपलक्ष्य में गोरखपुर के बाबा गम्भीर नाथ प्रेक्षागृह में भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षामित्रों को सम्मानित किया।
यूपी कैबिनेट के बड़े फैसले: ट्रांसफर नीति से टेक्सटाइल पार्क तक, विकास और प्रशासनिक सुधारों पर जोर
लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश सरकार की मंत्रिपरिषद बैठक में सोमवार को प्रशासनिक सुधार, औद्योगिक विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, न्यायिक व्यवस्था और आधारभूत संरचना से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। सरकार ने जहां नई स्थानांतरण नीति लागू कर कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादलों की समयसीमा तय की, वहीं टेक्सटाइल पार्क, नर्सिंग कॉलेज, सड़क निर्माण, ई-साक्ष्य प्रबंधन और कौशल विकास जैसी योजनाओं को भी आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया। इन फैसलों का सीधा असर प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था, रोजगार, निवेश और जनसुविधाओं पर दिखाई देगा। सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए नई स्थानांतरण नीति लागू करते हुए स्पष्ट किया कि सभी तबादले 31 मई 2026 तक पूरे किए जाएंगे। समूह ‘क’ और ‘ख’ के वे अधिकारी जो किसी जनपद में तीन वर्ष या किसी मंडल में सात वर्ष पूरे कर चुके हैं, उन्हें स्थानांतरित किया जाएगा। समूह ‘ग’ और ‘घ’ कर्मचारियों के तबादलों की अधिकतम सीमा भी तय की गई है। दिव्यांग बच्चों के अभिभावकों को सुविधाजनक स्थानों पर तैनाती देने का विशेष प्रावधान भी रखा गया है। प्रदेश सरकार ने पश्चिम एशिया में संघर्ष के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी पेट्रोलियम कीमतों का असर सड़क निर्माण कार्यों पर स्वीकार किया है। बिटुमिन की कीमतों में वृद्धि को देखते हुए लोक निर्माण विभाग के पुराने अनुबंधों में मूल्य समायोजन का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि सड़क निर्माण कार्य प्रभावित न हों और ठेकेदारों को राहत मिल सके। सड़क परियोजनाओं के क्षेत्र में लखनऊ में आउटर रिंग रोड से पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क तक 14.28 किलोमीटर लंबे छह लेन मार्ग के निर्माण और आईआईएम लखनऊ से रैथा अंडरपास तक सड़क चौड़ीकरण परियोजना की संशोधित लागत 546.51 करोड़ रुपये मंजूर की गई है। सरकार का मानना है कि इससे औद्योगिक निवेश और यातायात सुविधा दोनों को मजबूती मिलेगी। कुशीनगर में मेडिकल कॉलेज के पास नर्सिंग कॉलेज की स्थापना के लिए 0.405 हेक्टेयर भूमि चिकित्सा शिक्षा विभाग को नि:शुल्क हस्तांतरित करने का निर्णय लिया गया है। केंद्र सहायतित योजना के तहत बनने वाला यह कॉलेज स्वास्थ्य सेवाओं के साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा। पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2026-27 में 35 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य तय किया गया है। वन विभाग की पौधशालाओं से सरकारी संस्थाओं, किसानों और सामाजिक संगठनों को यूकेलिप्टस और पॉपलर को छोड़कर अन्य पौधे नि:शुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रदेश में न्यायिक व्यवस्था को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए उत्तर प्रदेश ई-साक्ष्य प्रबंधन नियम 2026, ई-समन नियम 2026 और सामुदायिक सेवा गाइडलाइन 2026 लागू करने का प्रस्ताव भी रखा गया। इसके तहत डिजिटल साक्ष्य प्रबंधन, ऑनलाइन समन और छोटे अपराधों के लिए सामुदायिक सेवा जैसी व्यवस्थाएं लागू होंगी। प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य के तहत “OTD CM Fellow” कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। प्रत्येक जिले में आर्थिक विकास और डेटा विश्लेषण के लिए दो विशेषज्ञ फेलो नियुक्त किए जाएंगे, जिन्हें 50 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय, लैपटॉप और अन्य सुविधाएं दी जाएंगी। सरकार ने निजी क्षेत्र में अमरदीप विश्वविद्यालय, फिरोजाबाद की स्थापना के लिए आशय पत्र जारी करने का प्रस्ताव भी मंजूर किया है। वहीं संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क योजना के तहत चार बंद कताई मिलों की 251.805 एकड़ भूमि वस्त्रोद्योग विभाग को हस्तांतरित की जाएगी। शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश के 150 राजकीय विद्यालयों में टाटा समूह की सहयोगी कंपनी नेल्को नेटवर्क प्रोडक्ट लिमिटेड के माध्यम से DREAM Skill Labs स्थापित किए जाएंगे। इन लैब्स में छात्रों को रोबोटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग जैसे आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण दिए जाएंगे। उच्च न्यायालय इलाहाबाद और लखनऊ खंडपीठ में कार्यरत लॉ क्लर्क और रिसर्च एसोसिएट का कार्यकाल दो वर्ष से बढ़ाकर अधिकतम तीन वर्ष करने का प्रस्ताव भी लाया गया है, जिससे न्यायिक कार्यों में निरंतरता और दक्षता बढ़ सके। ऊर्जा विभाग ने किसानों को राहत देते हुए पावर ट्रांसमिशन लाइनों के लिए भूमि अधिग्रहण और राइट ऑफ वे कॉरिडोर में अधिक क्षतिपूर्ति देने का प्रस्ताव रखा है। नई व्यवस्था के तहत किसानों को सर्किल रेट के आधार पर बेहतर मुआवजा मिलेगा। प्रदेश सरकार के इन फैसलों को प्रशासनिक सुधार, निवेश प्रोत्साहन, रोजगार सृजन और बुनियादी ढांचे के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
पांच राज्यों के चुनाव परिणामों ने बदली देश की सियासी तस्वीर
2026 विधानसभा चुनाव: बंगाल में खिला कमल, असम में बीजेपी की हैट्रिक, तमिलनाडु में विजय फैक्टर से बदला सियासी समीकरण
भारत के पांच राज्यों पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी के विधानसभा चुनाव परिणामों ने देश की राजनीति के साथ-साथ आर्थिक और वैश्विक परिदृश्य को भी नई दिशा देने के संकेत दिए हैं। 4 मई 2026 को आए रुझानों और परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारतीय लोकतंत्र अब केवल पारंपरिक राजनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मतदाता विकास, स्थिरता और मजबूत नेतृत्व को प्राथमिकता देने लगे हैं। पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी का ऐतिहासिक प्रदर्शन सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। लंबे समय तक क्षेत्रीय राजनीति और टीएमसी के प्रभाव वाले राज्य में बीजेपी का उभार केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि राजनीतिक संस्कृति में बदलाव का संकेत माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार मतदाता अब केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय और विकास आधारित शासन की अपेक्षा कर रहे हैं। असम में बीजेपी की लगातार तीसरी जीत ने पूर्वोत्तर भारत में पार्टी की मजबूत पकड़ को फिर साबित कर दिया। बुनियादी ढांचे के विकास, सुरक्षा व्यवस्था और कनेक्टिविटी में सुधार को इस जीत का प्रमुख आधार माना जा रहा है। यह परिणाम भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी और पूर्वोत्तर क्षेत्र में राजनीतिक स्थिरता के लिए भी अहम संकेत देता है। तमिलनाडु में अभिनेता विजय की पार्टी के उभार ने दक्षिण भारतीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। द्रविड़ राजनीति के लंबे दौर के बीच नई राजनीतिक ताकत का उभरना इस बात का संकेत है कि मतदाता अब पारंपरिक निष्ठाओं से आगे बढ़कर नए नेतृत्व और प्रदर्शन आधारित राजनीति को मौका देने के लिए तैयार हैं। राजनीतिक विशेषज्ञ इसे दक्षिण भारत की राजनीति में संभावित बदलाव की शुरुआत मान रहे हैं। इन चुनाव परिणामों का असर आर्थिक मोर्चे पर भी देखने को मिल सकता है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक स्थिरता और नीति निरंतरता का संकेत मिलने से निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा। इंफ्रास्ट्रक्चर, बैंकिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। विदेशी निवेशकों के लिए भी यह संदेश महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि भारत में नीतिगत स्थिरता बनी हुई है। वैश्विक स्तर पर भी इन चुनाव नतीजों को भारत की राजनीतिक मजबूती के रूप में देखा जा रहा है। चीन प्लस वन रणनीति के तहत भारत पहले से ही निवेश का बड़ा केंद्र बन रहा है। ऐसे में स्थिर राजनीतिक माहौल विदेशी कंपनियों और निवेशकों को आकर्षित कर सकता है। पश्चिम बंगाल जैसे रणनीतिक राज्य में संभावित सत्ता परिवर्तन पूर्वी भारत के औद्योगिक विकास को नई गति दे सकता है। हालांकि राजनीतिक विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि नई सरकारों के सामने जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने की बड़ी चुनौती होगी। लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष की भूमिका भी उतनी ही जरूरी मानी जा रही है ताकि लोकतांत्रिक संतुलन बना रहे। समग्र रूप से देखा जाए तो 2026 के विधानसभा चुनाव परिणाम भारतीय राजनीति के बदलते स्वरूप को दर्शाते हैं। बंगाल में कमल का खिलना, असम में बीजेपी की हैट्रिक और तमिलनाडु में नए राजनीतिक समीकरण यह साबित करते हैं कि देश की राजनीति तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। यह चुनाव केवल जीत और हार का नहीं, बल्कि भारत के परिपक्व लोकतंत्र और बदलती जनभावनाओं का प्रतीक बनकर उभरा है।
✒️ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया महाराष्ट्र
संगठित अपराधों पर कार्रवाई कई मुकदमों में वांछित था आरोपी
गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा) थाना तिवारीपुर पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट से जुड़े एक अभियुक्त को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। गिरफ्तार आरोपी लंबे समय से विभिन्न आपराधिक मामलों में संलिप्त रहा है और पुलिस को उसकी तलाश थी। प्रभारी निरीक्षक तिवारीपुर के नेतृत्व में पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए विशाल निषाद पुत्र रमाकांत निषाद निवासी हरसेवकपुर नं0 2 टोला दहला थाना गुलरिहा जनपद गोरखपुर को गिरफ्तार किया। आरोपी के विरुद्ध थाना तिवारीपुर में गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज था। पुलिस के अनुसार, विशाल निषाद का आपराधिक इतिहास रहा है और उसके खिलाफ हत्या के प्रयास, आर्म्स एक्ट, गोवध अधिनियम सहित अन्य गंभीर धाराओं में कई मुकदमे दर्ज हैं। वर्ष 2025 में उसके विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई थी। गिरफ्तार अभियुक्त के खिलाफ मु0अ0सं0 280/2025 धारा 2(ख) की उपधारा (i)(xvii)/3(1) उ0प्र0 गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम 1986 के तहत मामला दर्ज है। पुलिस ने बताया कि आरोपी के विरुद्ध आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है। गिरफ्तारी में थाना तिवारीपुर पुलिस टीम के कई अधिकारियों व कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही ।
14 नए एंड्रॉयड फोन, 2 कीपैड मोबाइल व 1.40 लाख नकद बरामद
गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा) थाना गोला पुलिस, एसओजी, सर्विलांस व एंटीथेफ्ट सेल की संयुक्त टीम ने मोबाइल दुकान में हुई चोरी की घटना का सफल खुलासा करते हुए 5 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी के 14 नए एंड्रॉयड मोबाइल फोन, 2 कीपैड मोबाइल, 1,40,000 रुपये नकद व अन्य मोबाइल फोन बरामद किए हैं। यह कार्रवाई प्रभारी निरीक्षक गोला के नेतृत्व में एसओजी, सर्विलांस व एंटीथेफ्ट सेल की टीम द्वारा की गई। पुलिस के अनुसार, 03 मई 2026 की रात करीब 3 बजे अज्ञात चोरों ने एक मोबाइल दुकान का शटर तोड़कर 14 एंड्रॉयड मोबाइल, 2 कीपैड मोबाइल और 1.40 लाख रुपये नकद चोरी कर लिया था। पीड़ित की तहरीर के आधार पर थाना गोला में मुकदमा दर्ज किया गया था। जांच के दौरान प्रकाश में आए अभियुक्तों—सरजीत सिंह उर्फ काका, मलकीत सिंह, देवेन्दर कौर, सरबजीत तथा जगजीत सिंह उर्फ अमन रानी (ट्रांसजेंडर)—को गिरफ्तार किया गया। सभी आरोपी पंजाब के विभिन्न जनपदों के निवासी बताए जा रहे हैं। गिरफ्तार अभियुक्तों के कब्जे से चोरी के 14 नए एंड्रॉयड मोबाइल फोन, 2 नए कीपैड मोबाइल, 1,40,000 रुपये नकद, 3 अन्य उपयोग किए हुए एंड्रॉयड मोबाइल फोन व घटना में प्रयुक्त एक लोहे की छड़ बरामद की गई। बरामदगी के आधार पर मुकदमे में संबंधित धाराओं की बढ़ोतरी की गई है। पुलिस ने बताया कि मामले में आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है। इस सफलता में थाना गोला पुलिस, एसओजी, सर्विलांस व एंटीथेफ्ट सेल की संयुक्त टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।