Tuesday, June 23, 2026
Home Blog Page 282

Meerut News: जिस आंगन में कन्यादान होना था, वहां बिखर गए टूटे सपने

मेरठ (राष्ट्र की परम्परा)। कपसाड़ गांव में हुए जघन्य हत्याकांड ने न सिर्फ एक महिला की जान ले ली, बल्कि एक पिता के अरमानों और एक मां की ममता को भी हमेशा के लिए छीन लिया। शुक्रवार को मृतका सुनीता का शव घर के आंगन में रखा था। वही आंगन, जहां कुछ ही दिनों बाद बेटी के कन्यादान की तैयारियां होनी थीं, अब मातम और चीख-पुकार से गूंज रहा था। यह दृश्य पत्थरदिल इंसान को भी रुला देने वाला था।

परिवार की आंखों में जहां हत्यारों के लिए गुस्सा और आक्रोश साफ दिख रहा था, वहीं अपनी लाड़ली बेटी रूबी के लिए बेबसी और गहरा दुख भी छलक रहा था। जिस बेटी की शादी की खुशियां घर में आने वाली थीं, वह अब मां के अंतिम दर्शन तक नहीं कर पा रही।

बेटी की शादी के सपने संजोए थी मां सुनीता

सतेंद्र और सुनीता की दुनिया अपने तीन बेटों—नरसी, मनदीप और शिवम—और इकलौती बेटी रूबी के इर्द-गिर्द घूमती थी। तीन बेटों के बाद रूबी का जन्म परिवार के लिए खुशियों की सौगात बनकर आया था। तभी से मां सुनीता ने बेटी के कन्यादान के सपने देखना शुरू कर दिया था।

वह समय अब नजदीक आ चुका था। रूबी का रिश्ता तय हो चुका था और अप्रैल में उसकी शादी होनी थी। सुनीता बेटी की विदाई की तैयारियों में जुटी हुई थी। कपड़े, गहने और घर के इंतजाम—सब कुछ मां अपनी लाड़ली के लिए बड़े अरमानों के साथ कर रही थी। लेकिन किसे पता था कि जिस बेटी को वह डोली में बिठाना चाहती है, उसे दबंग जबरन उठाकर ले जाएंगे।

ये भी पढ़ें – जल ही जीवन है: बूंद-बूंद में बसी हमारी सांसें

जान देकर भी बेटी को नहीं बचा पाई मां

गुरुवार का वह काला दिन परिवार के लिए कभी न भूलने वाला बन गया। जब हमलावरों ने रूबी पर हाथ डाला, तो मां सुनीता बेटी के सामने ढाल बनकर खड़ी हो गई। अपनी जान की परवाह किए बिना उसने आखिरी सांस तक बेटी को बचाने की कोशिश की।
गंभीर रूप से घायल सुनीता को अस्पताल ले जाया गया, जहां वह करीब दो घंटे तक जिंदगी और मौत से जूझती रही। आखिरकार उसने दम तोड़ दिया। सुनीता की मौत के साथ ही बेटी की शादी से जुड़े सारे सपने और तैयारियां हमेशा के लिए दफन हो गईं।

भाइयों का दर्द: मां के अंतिम दर्शन भी नहीं कर पाएगी बहन

शुक्रवार को जब सुनीता का शव घर लाया गया, तो आंगन में मौजूद हर आंख नम थी। तीनों भाई नरसी, मनदीप और शिवम फफक-फफक कर रो पड़े। उनकी सिसकियां हर किसी का कलेजा चीर रही थीं।

भाइयों का कहना था कि रूबी मां की सबसे लाड़ली थी। मां उसकी पसंद का हर सामान लाती थी, उसकी हर खुशी का ख्याल रखती थी। लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि वह अपनी मां के अंतिम दर्शन तक नहीं कर पा रही। जिस बहन को वे हंसते-खेलते डोली में विदा करने वाले थे, आज वह घर से दूर है और मां इस दुनिया में नहीं रही।

ये भी पढ़ें – लापरवाही, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक उदासीनता: महराजगंज के विकास में तीन बड़ी बाधाएँ

जल ही जीवन है: बूंद-बूंद में बसी हमारी सांसें

डॉ सतीश पाण्डेय

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। जल केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। मानव शरीर से लेकर खेती, पशुपालन और पर्यावरण तक—हर क्षेत्र में पानी की अनिवार्यता निर्विवाद है। बावजूद इसके, जल का अंधाधुंध दोहन और संरक्षण के प्रति लापरवाही आने वाले समय में गंभीर संकट का संकेत दे रही है। सच यही है कि जल ही जीवन है और हर बूंद में हमारी सांसें बसी हैं।
जिले के कई क्षेत्रों में भू-जल स्तर लगातार गिर रहा है। तालाब, पोखरे और नहरें अतिक्रमण व गंदगी की चपेट में हैं। ग्रामीण इलाकों में गर्मी के दिनों में पेयजल संकट आम समस्या बन जाती है, जिससे आमजन को दूर-दराज से पानी लाने को मजबूर होना पड़ता है। यह स्थिति भविष्य के लिए चिंताजनक है।कृषि प्रधान जिले महाराजगंज में जल की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। फसलों की सिंचाई, पशुओं के पालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ पानी पर ही टिकी है। यदि जल स्रोत सूखते गए, तो इसका सीधा असर किसानों की आय और खाद्य सुरक्षा पर पड़ेगा।
सरकार द्वारा जल संरक्षण को लेकर विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं—तालाबों का पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन, नल-जल योजना जैसी पहलें इसी दिशा में कदम हैं। लेकिन इन योजनाओं की सफलता तभी संभव है, जब समाज भी अपनी जिम्मेदारी समझे और पानी की बर्बादी रोकने में सक्रिय भूमिका निभाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्षा जल का संग्रह, जल स्रोतों की साफ- सफाई, वृक्षारोपण और सीमित उपयोग जैसे छोटे-छोटे प्रयास मिलकर बड़े संकट को टाल सकते हैं। जल संरक्षण कोई एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि निरंतर जन- आंदोलन होना चाहिए।
जल है तो कल है। यदि आज हमने हर बूंद की कीमत नहीं समझी, तो आने वाली पीढ़ियों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। इसलिए समय की मांग है कि हम सब मिलकर जल को बचाएं, क्योंकि सच में—बूंद-बूंद में ही हमारी सांसें बसी हैं।

लापरवाही, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक उदासीनता: महराजगंज के विकास में तीन बड़ी बाधाएँ

कैलाश सिंह
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। अपार संभावनाओं से भरपूर महराजगंज जिला आज भी बुनियादी सुविधाओं और प्रभावी सुशासन के लिए जूझता नजर आ रहा है। सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं, पर्याप्त बजट और संसाधनों की उपलब्धता के बावजूद जिले में अपेक्षित विकास धरातल पर दिखाई नहीं देता। इसके पीछे तीन प्रमुख कारण सामने आते हैं—लापरवाही, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक उदासीनता, जो मिलकर महराजगंज के विकास पथ में सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं।

योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही

जिले के कई विभागों में विकास योजनाओं का क्रियान्वयन केवल कागजों तक सीमित रह गया है। सड़कों की मरम्मत, नालियों की सफाई, पेयजल आपूर्ति, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी योजनाएं फाइलों में समय पर पूरी दिखा दी जाती हैं, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। घटिया गुणवत्ता के कार्य, अधूरी परियोजनाएं और निरीक्षण की औपचारिकता यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर जिम्मेदारी किसकी तय होगी।

भ्रष्टाचार बना सबसे गंभीर रोड़ा

महराजगंज के विकास में दूसरा और सबसे गंभीर रोड़ा भ्रष्टाचार है। निर्माण कार्यों से लेकर सरकारी खरीद और जनकल्याणकारी योजनाओं तक में अनियमितताओं की शिकायतें आम हो चुकी हैं। मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना और नल-जल योजना जैसी योजनाओं में लाभार्थियों के चयन से लेकर भुगतान तक गड़बड़ियों के आरोप लगातार सामने आते रहे हैं। इसका सीधा असर यह है कि सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है और वास्तविक जरूरतमंद योजनाओं के लाभ से वंचित रह जा रहे हैं।

ये भी पढ़ें – अमेरिकी टैरिफ नीति से भारतीय निर्यात और वैश्विक व्यापार को खतरा

प्रशासनिक उदासीनता से जनता में असंतोष

तीसरी और सबसे चिंताजनक समस्या प्रशासनिक उदासीनता है। जनसमस्याओं के समाधान में देरी, शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई का अभाव और अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय की कमी ने जनता के भरोसे को कमजोर किया है। कई बार लोगों की आवाज फाइलों में दबकर रह जाती है, जिससे असंतोष और निराशा लगातार बढ़ रही है।

समाधान की दिशा में ठोस कदम जरूरी

स्थानीय नागरिकों और विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लापरवाही, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक उदासीनता पर सख्ती से अंकुश लगाया जाए, पारदर्शिता और जवाबदेही तय की जाए तथा योजनाओं की नियमित और निष्पक्ष निगरानी हो, तो महराजगंज तेजी से विकास की राह पकड़ सकता है। अब आवश्यकता इस बात की है कि शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधि केवल दावों तक सीमित न रहें, बल्कि जमीन पर ईमानदार और प्रभावी कार्रवाई करें। तभी महराजगंज विकास, विश्वास और समृद्धि की ओर अग्रसर हो सकेगा।

ये भी पढ़ें – पश्चिम बंगाल से उठता सवाल: क्या सत्ता कानून से ऊपर हो सकती है?

विश्व हिंदी दिवस: माँ भारती के माथे पर सजी भाषा की अमिट आभा

हिंदी केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना की धुरी है। विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर यह अनुभूति और गहरी हो जाती है कि हिंदी माँ भारती के माथे पर उस श्रृंगार की तरह सुशोभित है, जो उसकी पहचान, गरिमा और आत्मसम्मान को उजागर करता है। यह भाषा जन-जीवन से निकली, जन-मन में रची-बसी और समय-समय पर राष्ट्र की दिशा तय करने वाली आवाज़ बनी।
स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर सामाजिक सुधारों तक, हिंदी ने संघर्षों को शब्द दिए और सपनों को आकार। संत-कवियों की वाणी में अध्यात्म, साहित्यकारों की लेखनी में यथार्थ और जनआंदोलनों में साहस, हर स्तर पर हिंदी ने समाज का दर्पण बनकर भूमिका निभाई। यही कारण है कि हिंदी विचारों की वाहक ही नहीं, मूल्यों की संवाहक भी है।
वैश्वीकरण के युग में विश्व हिंदी दिवस यह संदेश देता है कि हिंदी सीमाओं से परे अपनी जगह बना रही है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इसकी उपस्थिति, विदेशी विश्वविद्यालयों में अध्ययन-अध्यापन और प्रवासी भारतीयों के माध्यम से निरंतर विस्तार इस बात का प्रमाण है कि हिंदी में वैश्विक संवाद की क्षमता है। सरलता, आत्मीयता और स्वीकार्यता ने हिंदी को विश्व-समुदाय से जोड़ा है।
फिर भी आधुनिकता की दौड़ में अपनी ही भाषा से दूरी चिंता का विषय है। अंग्रेज़ी की अनिवार्यता के बीच हिंदी को कमतर आंकना आत्मघाती सोच है। विश्व हिंदी दिवस आत्ममंथन का अवसर देता है कि हिंदी को घर, विद्यालय, कार्यालय और तकनीक, हर क्षेत्र में सम्मान और अवसर कैसे मिले। भाषा तभी फलती-फूलती है, जब वह रोज़मर्रा के व्यवहार में जीवित रहती है।
डिजिटल युग में हिंदी की बढ़ती मौजूदगी आशा जगाती है। तकनीक, विज्ञान, स्टार्टअप और नवाचार के क्षेत्र में हिंदी की स्वीकार्यता बढ़ रही है। आवश्यकता है कि शब्दावली के विकास, गुणवत्तापूर्ण सामग्री और सृजनशील प्रयोगों से हिंदी को भविष्य की भाषा बनाया जाए।
विश्व हिंदी दिवस पर संकल्प यही होना चाहिए कि हिंदी केवल बोली न जाए, बल्कि सोची जाए, रची जाए और जी जाए। क्योंकि जब हिंदी समृद्ध होगी, तभी माँ भारती के माथे पर सजी यह भाषा-सौंदर्य विश्व को भारतीय संस्कृति की उज्ज्वल पहचान कराता रहेगा।

पश्चिम बंगाल से उठता सवाल: क्या सत्ता कानून से ऊपर हो सकती है?

नवनीत मिश्र

पश्चिम बंगाल की घटना केवल एक क्षणिक राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि संवैधानिक मर्यादाओं और संस्थागत संतुलन पर गहराते संकट की ओर संकेत करती है। जब कोई केंद्रीय एजेंसी विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत छापा मार रही हो और उसी समय राज्य का मुख्यमंत्री वहाँ पहुँचकर फाइलें उठाने लगे, तो यह दृश्य अपने-आप में कई गंभीर प्रश्न खड़े करता है। यह सवाल केवल सत्ता के दुरुपयोग का नहीं, बल्कि कानून के शासन की अवधारणा पर सीधी चोट का है।
लोकतंत्र में जांच एजेंसियाँ व्यक्ति या पद नहीं देखतीं, वे तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर काम करती हैं। यदि जांच प्रक्रिया में राजनीतिक हस्तक्षेप होने लगे, तो संदेश स्पष्ट होता है कि कानून सबके लिए समान नहीं रह गया। इसका असर केवल एक प्रकरण तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आम नागरिक के मन में न्याय व्यवस्था को लेकर अविश्वास पैदा करता है।
मुख्यमंत्री का पद संवैधानिक संयम, मर्यादा और संस्थाओं के प्रति सम्मान का प्रतीक होता है। जब वही पद जांच एजेंसियों के कार्य में बाधा डालता हुआ दिखाई दे, तो यह प्रशासनिक अराजकता और सत्ता की असहजता को उजागर करता है। इससे यह धारणा मजबूत होती है कि सत्ता स्वयं को कानून से ऊपर समझने लगी है। जो किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक संकेत है।
पश्चिम बंगाल पहले से ही राजनीतिक हिंसा, संस्थागत टकराव और प्रशासनिक अव्यवस्था के आरोपों से घिरा रहा है। ऐसे में इस तरह की घटनाएँ राज्य की छवि को और नुकसान पहुँचाती हैं। निवेश, विकास और सामाजिक सौहार्द के लिए सबसे आवश्यक तत्व है, कानून पर भरोसा। जब यही भरोसा कमजोर पड़ता है, तो विकास की गति भी ठहर जाती है।
यह मुद्दा केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं है। यह पूरे देश के लिए चेतावनी है कि यदि आज किसी राज्य में संवैधानिक संस्थाओं को खुली चुनौती दी जाती है और उसे राजनीतिक संरक्षण मिलता है, तो कल यही प्रवृत्ति अन्य राज्यों में भी फैल सकती है। लोकतंत्र की मजबूती इसी में है कि सत्ता में बैठे लोग स्वयं को कानून के अधीन मानें, न कि कानून को अपने अधीन।
अंततः प्रश्न किसी व्यक्ति या दल का नहीं, बल्कि व्यवस्था का है। जांच एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से काम करने देना, न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग करना और संवैधानिक सीमाओं का पालन करना। यही लोकतंत्र की बुनियाद है। यदि इन मूल सिद्धांतों को नजरअंदाज किया गया, तो उसका खामियाजा केवल किसी सरकार को नहीं, बल्कि पूरे देश को भुगतना पड़ेगा।

अमेरिकी टैरिफ नीति से भारतीय निर्यात और वैश्विक व्यापार को खतरा

अमेरिका क़े संभावित 500 प्रतिशत तक टैरिफ प्लान से भारत के फार्मास्यूटिकल्स टेक्सटाइल, ऑटो पार्ट्स,आईटी हार्डवेयर और स्टील जैसे क्षेत्रों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है

गोंदिया – वैश्विक राजनीति में अमेरिका की भूमिका सदैव निर्णायक रही है,किंतु डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिकी विदेश नीति एक बार फिर आक्रामक राष्ट्रवाद,संरक्षणवाद और बहुपक्षीय संस्थाओं से दूरी की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने वाला रूस प्रतिबंध विधेयक 2025 तथा भारत के नेतृत्व वाले अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) सहित 60 से अधिक वैश्विक संस्थाओं से अमेरिका के बाहर निकलने का निर्णय,ये दोनों घटनाएँ न केवल भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव का कारण बन सकता हैं, बल्कि पूरी वैश्विक शासन व्यवस्था को भी गंभीर प्रश्नों के घेरे में खड़ा कर रही हैं।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि यह कदम भारत की रणनीतिक स्वायत्तता पर सीधा हमला माना जा सकता है,क्योंकि भारत ने यह निर्णय किसी राजनीतिक समर्थन के तहत नहीं, बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर लिया हैं,(1)रूस प्रतिबंध विधेयक 2025:आर्थिक दबाव का नया हथियार बन सकता है,क्योंकि यह विधेयक एक द्वितीयक प्रतिबंध का उदाहरण है,जिसके अंतर्गत उन देशों को दंडित किया जा रहा है जो रूस से तेल और ऊर्जा संसाधन खरीद रहे हैं। भारत और चीन जैसे देश, जिन्होंने अपने ऊर्जा सुरक्षा हितों को प्राथमिकता देते हुए रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदा अब सीधे अमेरिकी आर्थिक दबाव के निशाने पर हैं। 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की धमकी किसी भी देश के निर्यात- आधारित क्षेत्रों को गहरा झटका दे सकती है। (2) भारत की ऊर्जा सुरक्षा बनाम अमेरिकी रणनीति-भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और उसकी ऊर्जा जरूरतें तेजी से बढ़ रही हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद रूस ने भारत को सस्ता कच्चा तेल उपलब्ध कराया जिससे भारत की मुद्रास्फीति नियंत्रित रही और आर्थिक स्थिरता बनी रही। अब भारत के लिए यह नई चुनौती खड़ी हुई है
साथियों बात अगर हम भारत के निर्यात पर संभावित प्रभाव को समझने की करें तो,यदिअमेरिका वास्तव में 500 प्रतिशत तक टैरिफ लागू करता है, तो इसका असर भारत के फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, ऑटो पार्ट्स, आईटी हार्डवेयर और स्टील जैसे क्षेत्रों पर पड़ सकता है। अमेरिका भारत का एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार है और इस तरह के टैरिफ भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को कमजोर कर सकते हैं। यह स्थिति वैश्विक व्यापार संगठन के मुक्त व्यापार सिद्धांतों के भी विपरीत है।अमेरिका द्वारा भारत और चीन को एक ही श्रेणी में रखना कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।भारत,जो इंडो- पैसिफिक रणनीति में अमेरिका का प्रमुख साझेदार माना जाता रहा है,अब उसी दंडात्मक नीति का शिकार बन रहा है जोचीन के लिए अपनाई जाती है। यह दर्शाता है कि ट्रंप प्रशासन के लिए रणनीतिक साझेदारी से अधिक महत्व तत्काल अमेरिकी हितों का है।

ये भी पढ़ें – सीएम युवा योजना में लापरवाही बर्दाश्त नहीं: डीएम ने बैंकों को लगाई फटकार, एक सप्ताह में लंबित ऋण निस्तारण के निर्देश

साथियों बात अगर हम अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन से अमेरिका का बाहर निकलनें की रणनीति को समझने की करें तो, 7 जनवरी 2026 को राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा हस्ताक्षरित मेमोरेंडम के तहत अमेरिका ने 60 से अधिक अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अलग होने का निर्णय लिया, जिनमें भारतके नेतृत्व वाला अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधनभी शामिल है। यह कदम भारत के लिए केवल कूटनीतिक झटका नहीं, बल्कि वैश्विक जलवायु नेतृत्व के प्रयासों पर भी आघात है।क्योंकि आईएसए भारत का सॉफ्ट पावर और जलवायु नेतृत्व हैं,जिसकी स्थापना भारत और फ्रांस की पहल पर हुई थी और इसका उद्देश्य सौर ऊर्जा को बढ़ावा देकर विकासशील देशों को स्वच्छ ऊर्जा की ओर ले जाना है। यह संगठन भारत की सॉफ्ट पावर और ग्लोबल साउथ नेतृत्व का प्रतीक बन चुका है। अमेरिका का इससे बाहर निकलना जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को कमजोर करता है।बता दें इंटरनेशनल सोलर अलायंस एक वैश्विक पहल है, जिसके 120 से अधिक देश सदस्य हैं, इसका उद्देश्य सौर ऊर्जा को बढ़ावा देकर जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना है। इस संगठन की अवधारणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2015 में लंदन के वेंबली स्टेडियम में अपने भाषण के दौरान रखी थी,आई एसएए की औपचारिक शुरुआत 2016 में मोरक्को के माराकेश में हुई थी,अमेरिका नवंबर 2021 में इसका 101वां सदस्य बना था।

ये भी पढ़ें – मिशन शक्ति व सड़क सुरक्षा अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम

साथियों बात अगर हम अमेरिका फर्स्ट’ बनाम वैश्विक जिम्मेदारी को समझने की करें तो व्हाइट हाउस का यह तर्क कि अंतरराष्ट्रीय संगठन अमेरिकी करदाताओं के पैसे का दुरुपयोग कर रहे हैं,अमेरिका फर्स्ट नीति का ही विस्तार है।किंतु वैश्विक चुनौतियाँ,जैसे जलवायु परिवर्तन,महामारी,मानवाधिकार और शरणार्थी संकट, किसी एक देश के प्रयासों से हल नहीं हो सकतीं। अमेरिका का बहुपक्षीय मंचों से हटना वैश्विक सहयोग की भावना को कमजोर करता है।यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से दूरी बनाई हो। इससे पहले वह संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से बाहर हो चुका है,फिलिस्तीनी राहत एजेंसी की फंडिंग रोक चुका है, युनेस्को से अलग हो चुका है और डब्लूएचओ व पेरिस जलवायु समझौते से बाहर निकलने की घोषणा कर चुका है। ये सभी कदम अमेरिका के संस्थागत अलगाववाद को दर्शाते हैं।अमेरिका का इस तरह पीछे हटना वैश्विक शासन ढांचे में नेतृत्व का शून्य पैदा करता है, जिसे चीन, रूस या अन्य क्षेत्रीय शक्तियाँ भरने का प्रयास कर सकती हैं। यह बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को तो बढ़ावा देता हैकिंतु साथ ही नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को कमजोर भी करता है।

ये भी पढ़ें –
साथियों बात अगर हम भारत- अमेरिका संबंधों में बढ़ते तनाव को समझने की करें तो हाल के वर्षों में भारत- अमेरिका संबंधों को रणनीतिक साझेदारी और स्वाभाविक सहयोगी के रूप में देखा गया था। रक्षा,प्रौद्योगिकी, क्वाड और इंडो-पैसिफिक जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों की नजदीकी बढ़ी थी। किंतु रूस प्रतिबंध विधेयक और आईएसए से अलगाव जैसे कदम इस रिश्ते में अविश्वास पैदा कर रहे हैं।भारत के सामने अब एक जटिल चुनौती है, एक ओर अमेरिका जैसे शक्तिशाली साझेदार के साथ संबंध बनाए रखना और दूसरी ओर अपनी रणनीतिक स्वायत्तता, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक दक्षिण के नेतृत्व को भी संरक्षित करना। भारत को संतुलित कूटनीति, वैकल्पिक बाजारों की खोज और बहुपक्षीय मंचों को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाने होंगे।अमेरिका के अलगाववादी रुख के बीच भारत के पास अवसर भी है। वह आईएसए ब्रिक्स, जी-20 और अन्य मंचों के माध्यम से विकासशील देशों की आवाज़ बन सकता है।यह स्थिति भारत को एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित कर सकती है।
अतःअगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि बदलती विश्व व्यवस्था में भारत का मार्ग, अमेरिका द्वारा रूस प्रतिबंध विधेयक 2025 को मंजूरी देना और अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन जैसे मंचों से बाहर निकलना केवल द्विपक्षीय मुद्दे नहीं हैं,बल्कि ये पूरी वैश्विक व्यवस्था को प्रभावित करने वाले फैसले हैं।भारत के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण अवश्य है,किंतु यह उसकी कूटनीतिक परिपक्वता और वैश्विक नेतृत्व क्षमता की भी परीक्षा है। बदलती विश्व व्यवस्था में भारत को संतुलन,आत्मनिर्भरता और बहुपक्षीय सहयोग के रास्ते पर चलते हुए अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करनी होगी।

-संकलनकर्ता लेखक- एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया,क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी)
महाराष्ट्र

आज का अंक ज्योतिष: क्या आपका मूलांक बदलेगा आपकी किस्मत?

2026: आज आपका मूलांक क्या कहता है?

जानिए पंडित सुधीर तिवारी (अंतिम बाबा) से पूरा अंक राशिफल

अंक ज्योतिष राशिफल 10 जनवरी 2026


पंडित सुधीर तिवारी (अंतिम बाबा) द्वारा प्रस्तुत यह अंक राशिफल सरल शब्दों में आपके भविष्य, स्वभाव, कार्यक्षेत्र, शिक्षा, व्यापार, राजनीति, कला, प्रशासन और आर्थिक स्थिति पर प्रकाश डालता है।अंक ज्योतिष में जन्म तिथि को इकाई अंक तक जोड़कर मूलांक निकाला जाता है। जैसे 8, 17 या 29 तारीख को जन्मे लोगों का मूलांक 8 होता है।आइए जानते हैं आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा।
🔢 मूलांक 1 (1, 10, 19, 28)
आज आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता मजबूत रहेगी।
कार्य/व्यवसाय: सरकारी नौकरी, प्रबंधन और प्रशासन से जुड़े लोगों को नई जिम्मेदारी मिल सकती है।
शिक्षा: प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए अच्छा दिन।
कला/राजनीति: राजनीति में सक्रिय लोगों को जनसमर्थन मिलेगा।
आर्थिक स्थिति: आय स्थिर रहेगी, नया निवेश सोच-समझकर करें।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 1
पूज्य देवता: भगवान सूर्य
🔢 मूलांक 2 (2, 11, 20, 29)
भावनात्मक संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
कार्य/व्यवसाय: साझेदारी के काम में सावधानी रखें।
शिक्षा: पढ़ाई में मन कम लगेगा, ध्यान बढ़ाने की जरूरत।
कला/संगीत: लेखन, गायन से जुड़े लोगों को प्रेरणा मिलेगी।
आर्थिक स्थिति: खर्च पर नियंत्रण रखें।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 2
पूज्य देवता: माता पार्वती
🔢 मूलांक 3 (3, 12, 21, 30)
भाग्य का पूरा साथ मिलेगा।
कार्य/व्यवसाय: शिक्षा, सलाहकार, मीडिया से जुड़े लोगों को लाभ।
शिक्षा: छात्रों के लिए सफलता का दिन।
राजनीति: वरिष्ठ नेताओं से सहयोग मिलेगा।
आर्थिक स्थिति: धन लाभ के योग।
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 3
पूज्य देवता: भगवान बृहस्पति

ये भी पढ़ें – सही समय पर छिड़काव से बचाएं आलू और सरसों की उपज

🔢 मूलांक 4 (4, 13, 22, 31)
आज धैर्य और अनुशासन जरूरी है।
कार्य/व्यवसाय: तकनीकी और प्राइवेट सेक्टर में दबाव रह सकता है।
शिक्षा: गणित और विज्ञान के छात्रों को अतिरिक्त मेहनत करनी होगी।
आर्थिक स्थिति: खर्च बढ़ सकता है।
शुभ रंग: नीला
शुभ अंक: 4
पूज्य देवता: भगवान गणेश
🔢 मूलांक 5 (5, 14, 23)
आज सक्रियता और अवसरों का दिन है।
कार्य/व्यवसाय: मार्केटिंग, सेल्स, मीडिया में लाभ।
शिक्षा: नए कोर्स या स्किल सीखने का अच्छा समय।
राजनीति: संपर्क बढ़ेंगे।
आर्थिक स्थिति: आय के नए स्रोत बन सकते हैं।
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 5
पूज्य देवता: भगवान विष्णु

ये भी पढ़ें – सांसद खेल प्रतियोगिता को लेकर सियासी बवाल, सलेमपुर सांसद को आमंत्रण न मिलने पर उठे सवाल

🔢 मूलांक 6 (6, 15, 24)
रिश्तों और सौंदर्य से जुड़ा दिन।
कार्य/व्यवसाय: फैशन, डिजाइन, फिल्म, कला क्षेत्र में लाभ।
शिक्षा: क्रिएटिव छात्रों को सफलता।
आर्थिक स्थिति: खर्च बढ़ेगा, पर सुखद रहेगा।
शुभ रंग: गुलाबी
शुभ अंक: 6
पूज्य देवता: माता लक्ष्मी
🔢 मूलांक 7 (7, 16, 25)
आत्मचिंतन और शांति का दिन।
कार्य/व्यवसाय: रिसर्च, अध्यात्म, लेखन में प्रगति।
शिक्षा: पढ़ाई में ध्यान बढ़ेगा।
आर्थिक स्थिति: सामान्य रहेगी।
स्वास्थ्य: नींद और खानपान पर ध्यान दें।
शुभ रंग: बैंगनी
शुभ अंक: 7
पूज्य देवता: भगवान शिव
🔢 मूलांक 8 (8, 17, 26)
जिम्मेदारियां बढ़ेंगी, पर परिणाम मिलेगा।
कार्य/व्यवसाय: प्रशासन, कानून, सरकारी सेवा में दबाव।
राजनीति: संघर्ष के बाद सफलता।
आर्थिक स्थिति: उधार देने से बचें।
शुभ रंग: काला
शुभ अंक: 8
पूज्य देवता: शनिदेव

ये भी पढ़ें – चलती बस में 5 साल की बच्ची से दरिंदगी, यात्रियों की सतर्कता से आरोपी गिरफ्तार

🔢 मूलांक 9 (9, 18, 27)
ऊर्जा और साहस से भरा दिन।
कार्य/व्यवसाय: पुलिस, सेना, खेल, प्रशासन में लाभ।
शिक्षा: प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता।
आर्थिक स्थिति: पुराने रुके पैसे मिल सकते हैं।
शुभ रंग: नारंगी
शुभ अंक: 9
पूज्य देवता: भगवान हनुमान
डिस्क्लेमर:
यह अंक राशिफल पंडित सुधीर तिवारी (अंतिम बाबा) द्वारा अंक ज्योतिष पर आधारित सामान्य भविष्यवाणी है। इसकी पूर्ण सत्यता का हम दावा नहीं करते। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

पंचाग कालाष्टमी का रहस्य: शनिदेव और कालभैरव की विशेष कृपा कैसे प्राप्त करें?

आज का पंचांग: 10 जनवरी 2026 (शनिवार) | Today Panchang 10 January 2026
दिनांक: 10/01/2026
वार: शनिवार
स्थान: भारत (द्रिक पंचांग के अनुसार)
🪔 पंचांग विवरण (10 जनवरी 2026)
तिथि

माघ कृष्ण पक्ष सप्तमी – प्रातः 08:24 AM तक
तत्पश्चात अष्टमी – 11 जनवरी 10:20 AM तक
नक्षत्र
हस्त – 03:39 PM तक
तत्पश्चात चित्रा
योग
अतिगण्ड योग – 04:58 PM तक
उसके बाद सुकर्मा योग
करण
बव – 08:24 AM तक
बालव – 09:18 PM तक
कौलव – रात्रि 09:18 PM के बाद
📜 संवत्सर विवरण
विक्रम संवत: 2082 (कालयुक्त)
शक संवत: 1947 (विश्वावसु)
अमांत मास: पौष
पूर्णिमांत मास: माघ
वैदिक ऋतु: हेमंत
द्रिक ऋतु: शिशिर
अयन: दक्षिणायन
राष्ट्रीय कैलेंडर: पौष 20, 1947
☀️ सूर्य और 🌙 चंद्रमा का समय
सूर्योदय: 07:14 AM
सूर्यास्त: 05:54 PM
चन्द्रोदय: 12:42 AM (11 जनवरी)
चन्द्रास्त: 12:16 PM (11 जनवरी)
🌞 सूर्य एवं चंद्र राशि
सूर्य राशि: धनु
चंद्र राशि:
11 जनवरी 04:52 AM तक कन्या
उसके बाद तुला
अशुभ काल
राहुकाल: 09:54 AM – 11:14 AM
यमगण्ड: 01:54 PM – 03:14 PM
कुलिक काल: 07:14 AM – 08:34 AM
दुर्मुहूर्त: 08:39 AM – 09:22 AM
वर्ज्यम्: 12:30 AM – 02:16 AM
शुभ काल
ब्रह्म मुहूर्त: 05:38 AM – 06:26 AM
अभिजीत मुहूर्त: 12:12 PM – 12:55 PM
अमृत काल: 09:09 AM – 10:53 AM
🔱 विशेष योग व पर्व
त्योहार / व्रत: कालाष्टमी
आनन्दादि योग: मृत्यु (03:39 PM तक)
सर्वार्थसिद्धि योग: ❌ आज नहीं है
🧭 दिशा शूल (यात्रा विचार)
शनिवार को यात्रा वर्जित दिशा: पूर्व दिशा
यदि यात्रा आवश्यक हो तो:
तिल या गुड़ का सेवन करके यात्रा करें
लाभकारी दिशा:
पश्चिम व दक्षिण दिशा में यात्रा से लाभ की संभावना
🌙 चंद्रबल (राशि अनुसार)
11 जनवरी 04:52 AM तक शुभ राशियाँ:
मेष, कर्क, कन्या, वृश्चिक, धनु, मीन
उसके बाद 07:14 AM तक:
मेष, वृषभ, सिंह, तुला, धनु, मकर
ताराबल (नक्षत्र अनुसार)
03:39 PM तक शुभ नक्षत्र:
अश्विनी, कृत्तिका, मृगशीर्षा, आद्रा, पुष्य, मघा, उत्तर फाल्गुनी, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तरभाद्रपदा
📌 निष्कर्ष
आज का दिन कालाष्टमी के कारण साधना, जप, दान और आत्मचिंतन के लिए उत्तम है। शुभ कार्यों में अभिजीत मुहूर्त का विशेष महत्व रहेगा। राहुकाल और दिशा शूल का ध्यान अवश्य रखें।
🔔 विशेष नोट
इस पंचांग में किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए ‘राष्ट्र की परम्परा’ जिम्मेदार नहीं है। कृपया किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पूर्व योग्य विद्वान या पंडित से परामर्श अवश्य लें।

पुण्यतिथि विशेष: जब विरासत बन जाती है इतिहास

10 जनवरी के ऐतिहासिक निधन: जब भारत और विश्व ने खोए अपने महान सितारे

भारत और विश्व के इतिहास में 10 जनवरी एक ऐसी तिथि है, जब कई महान व्यक्तित्वों ने इस दुनिया को अलविदा कहा। इन विभूतियों ने कला, साहित्य, राजनीति और न्याय के क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ी। आइए जानते हैं 10 जनवरी को हुए प्रमुख निधन और उनके जीवन, योगदान व ऐतिहासिक महत्व के बारे में विस्तार से।
नाडिया (Nadia) – भारतीय सिनेमा की पहली एक्शन हीरोइन
निधन: 10 जनवरी 1996

नाडिया, जिनका वास्तविक नाम मैरी एन इवांस था, का जन्म ऑस्ट्रेलिया में हुआ था, लेकिन उन्होंने भारत आकर हिंदी सिनेमा को नई दिशा दी। वह भारतीय फिल्मों की पहली महिला स्टंट कलाकार और एक्शन हीरोइन मानी जाती हैं। 1930–40 के दशक में उन्होंने ‘हंटरवाली’, ‘डायमंड क्वीन’ और ‘जंगल प्रिंसेस’ जैसी फिल्मों से अपार लोकप्रियता हासिल की। उस दौर में जब महिलाएं परदे पर सीमित भूमिकाओं तक सिमटी थीं, नाडिया ने तलवारबाजी, घुड़सवारी और साहसिक स्टंट कर समाज की सोच को चुनौती दी। भारतीय सिनेमा में नारी सशक्तिकरण की नींव रखने में उनका योगदान ऐतिहासिक माना जाता है।

ये भी पढ़ें – नाबालिग से अपराध पर पुलिस का बड़ा एक्शन, देवरिया में आरोपी सलाखों के पीछे

गिरिजाकुमार माथुर – आधुनिक हिंदी कविता के सशक्त हस्ताक्षर
निधन: 10 जनवरी 1994

गिरिजाकुमार माथुर का जन्म राजस्थान के अजमेर जिले में हुआ था। वे हिंदी साहित्य के प्रमुख कवि, नाटककार और आलोचक थे। नई कविता आंदोलन के महत्वपूर्ण स्तंभों में गिने जाने वाले माथुर की रचनाओं में मानवीय संवेदना, सामाजिक यथार्थ और आधुनिक चेतना स्पष्ट दिखाई देती है। उनकी कविताओं में भाषा की सादगी और विचारों की गहराई का सुंदर समन्वय मिलता है। ‘मैं वक्त के सामने’ और ‘धूप के धुएँ’ जैसे काव्य संग्रह उन्हें साहित्य जगत में अमर बनाते हैं। साहित्य के माध्यम से समाज को जागरूक करना उनके जीवन का प्रमुख उद्देश्य रहा।
सम्पूर्णानंद – स्वतंत्र भारत के विचारशील राजनेता
निधन: 10 जनवरी 1969

सम्पूर्णानंद का जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में हुआ था। वे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, विद्वान लेखक और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तथा बाद में राज्यपाल रहे। गांधीवादी विचारधारा से प्रेरित सम्पूर्णानंद ने राजनीति को सेवा का माध्यम माना। उन्होंने शिक्षा, भाषा और सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संस्कृत और हिंदी के विद्वान होने के कारण वे लेखन में भी सक्रिय रहे। उनका योगदान भारतीय लोकतंत्र को नैतिक और बौद्धिक आधार देने में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

ये भी पढ़ें – मदरसा सील, मान्यता निलंबित: छात्राओं का भविष्य बचाने के लिए प्रशासन का कड़ा आदेश

राधाबिनोद पाल – न्याय और अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रतीक
निधन: 10 जनवरी 1967

राधाबिनोद पाल का जन्म पश्चिम बंगाल के कुश्तिया (वर्तमान बांग्लादेश क्षेत्र) में हुआ था। वे विश्वविख्यात न्यायविद थे और टोक्यो युद्ध अपराध न्यायाधिकरण में भारत के न्यायाधीश रहे। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जापानी नेताओं को सामूहिक रूप से दोषी ठहराने का विरोध किया और अंतरराष्ट्रीय कानून में निष्पक्षता की मिसाल पेश की। उनका असहमति मत आज भी न्यायिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों का मजबूत दस्तावेज माना जाता है। भारत ही नहीं, जापान में भी उन्हें अत्यंत सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है।
जाब चार्नोक – आधुनिक कोलकाता की नींव रखने वाला व्यक्तित्व
निधन: 10 जनवरी 1692

जाब चार्नोक एक अंग्रेज व्यापारी थे, जिन्हें परंपरागत रूप से कलकत्ता (कोलकाता) का संस्थापक माना जाता है। उन्होंने 1690 में हुगली नदी के तट पर व्यापारिक केंद्र की स्थापना की, जो आगे चलकर ब्रिटिश भारत की राजधानी बना। हालांकि वे औपनिवेशिक शासन से जुड़े थे, लेकिन उनके द्वारा बसाई गई बस्ती ने भारत के आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक इतिहास को गहराई से प्रभावित किया। कोलकाता आज भी उनके ऐतिहासिक प्रयासों की जीवित पहचान है।

राजनीति से सिनेमा तक: 10 जनवरी ने भारत को क्या-क्या दिया?

राजनीति, साहित्य, सिनेमा और संगीत के वे सितारे जिन्होंने भारत की पहचान गढ़ी

10 जनवरी भारतीय इतिहास और संस्कृति के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन राजनीति, साहित्य, सिनेमा, संगीत और कानून के ऐसे-ऐसे दिग्गज जन्मे, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ी। आइए जानते हैं 10 जनवरी को जन्मे इन महान व्यक्तित्वों के जीवन, जन्म-स्थान और राष्ट्रहित में उनके योगदान के बारे में विस्तार से।

ये भी पढ़ें – बिछुआ कॉलेज में छात्रों को निवेश, बचत व जोखिम प्रबंधन की ट्रेनिंग

जी. लक्ष्मणन (जन्म: 10 जनवरी 2001)
जी. लक्ष्मणन का जन्म तमिलनाडु राज्य, भारत में हुआ। वे द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK) से जुड़े एक युवा राजनीतिक व्यक्तित्व के रूप में पहचाने गए। सामाजिक न्याय, क्षेत्रीय स्वाभिमान और तमिल संस्कृति के संरक्षण जैसे मुद्दों पर उनकी सक्रिय भूमिका रही। कम आयु में राजनीति में प्रवेश कर उन्होंने युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ने का प्रयास किया। पार्टी की नीतियों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में उनका योगदान उल्लेखनीय माना जाता है।
ऋतिक रोशन (जन्म: 10 जनवरी 1974, मुंबई, महाराष्ट्र, भारत)
ऋतिक रोशन हिंदी सिनेमा के सबसे प्रतिभाशाली और लोकप्रिय अभिनेताओं में गिने जाते हैं। अभिनेता-निर्देशक राकेश रोशन के घर जन्मे ऋतिक ने फिल्म कहो ना… प्यार है से जबरदस्त शुरुआत की। अभिनय, नृत्य और फिटनेस के क्षेत्र में उन्होंने नए मानक स्थापित किए। लगान, कृष, जोधा अकबर और सुपर 30 जैसी फिल्मों से उन्होंने भारतीय सिनेमा को वैश्विक पहचान दिलाई और युवाओं के लिए प्रेरणा बने।
सलीम गौस (जन्म: 10 जनवरी 1952, बेंगलुरु, कर्नाटक, भारत)
सलीम गौस का जन्म बेंगलुरु में हुआ। वे एक बहुभाषी अभिनेता थे, जिन्होंने हिंदी, तमिल, तेलुगु और अंग्रेज़ी फिल्मों में सशक्त अभिनय किया। सरदार, कृष्णा, भारत एक खोज जैसे प्रोजेक्ट्स में उनके किरदार आज भी याद किए जाते हैं। थिएटर और टेलीविजन के माध्यम से उन्होंने गंभीर और विचारोत्तेजक भूमिकाओं को नई ऊंचाई दी। उनका योगदान भारतीय अभिनय परंपरा को समृद्ध करने वाला रहा।
सुचित्रा भट्टाचार्य (जन्म: 10 जनवरी 1950, कोलकाता, पश्चिम बंगाल, भारत)
सुचित्रा भट्टाचार्य बांग्ला साहित्य की सशक्त महिला लेखिका थीं। उनका जन्म कोलकाता में हुआ। उन्होंने अपने उपन्यासों और कहानियों में शहरी जीवन, नारी संघर्ष और सामाजिक यथार्थ को गहराई से प्रस्तुत किया। काछे आशी, हाचिस और दहन जैसे उपन्यासों ने उन्हें विशेष पहचान दिलाई। उनका लेखन महिलाओं की आवाज़ को साहित्यिक मंच देने का सशक्त माध्यम बना।

ये भी पढ़ें – सीएचसी सोनबरसा में पुख़्ता इंतजाम, ठंड से सुरक्षित मरीज

अल्लू अरविन्द (जन्म: 10 जनवरी 1949, पश्चिम गोदावरी, आंध्र प्रदेश, भारत)
अल्लू अरविन्द दक्षिण भारतीय सिनेमा के प्रतिष्ठित फिल्म निर्माता हैं। उनका जन्म आंध्र प्रदेश में हुआ। गीता आर्ट्स के बैनर तले उन्होंने कई सुपरहिट और प्रयोगधर्मी फिल्मों का निर्माण किया। उन्होंने तेलुगु सिनेमा को आधुनिक तकनीक और व्यावसायिक सोच से जोड़ा। नए कलाकारों और निर्देशकों को अवसर देकर उन्होंने भारतीय फिल्म उद्योग के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
के. जे. येसुदास (जन्म: 10 जनवरी 1940, त्रिवेंद्रम, केरल, भारत)
के. जे. येसुदास भारतीय संगीत के एक अमूल्य रत्न हैं। उनका जन्म केरल में हुआ। कर्नाटक शास्त्रीय संगीत से लेकर फिल्मी गीतों तक उन्होंने हजारों गीत गाए। मलयालम, हिंदी, तमिल, तेलुगु सहित कई भाषाओं में उनका योगदान अद्वितीय है। पद्म पुरस्कारों से सम्मानित येसुदास ने भारतीय संगीत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर गौरव दिलाया।
गुरदयाल सिंह (जन्म: 10 जनवरी 1933, पंजाब, भारत)
गुरदयाल सिंह पंजाबी साहित्य के महान लेखक थे। उनका जन्म पंजाब में हुआ। मरही दा दीवा जैसे उपन्यास के लिए उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला। उन्होंने ग्रामीण जीवन, सामाजिक बदलाव और मानवीय संवेदनाओं को अपनी रचनाओं का केंद्र बनाया। उनका साहित्य भारतीय भाषाई धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

ये भी पढ़ें – राष्ट्रपति सम्मान पाने वाली खुशबू यादव का गांव में ऐतिहासिक स्वागत

फली एस. नरीमन (जन्म: 10 जनवरी 1929, रंगून/यांगून, म्यांमार)
फली एस. नरीमन भारत के सबसे प्रतिष्ठित संवैधानिक वकीलों में से एक थे। उनका जन्म तत्कालीन बर्मा (अब म्यांमार) में हुआ। उन्होंने भारत के सर्वोच्च न्यायालय में दशकों तक सेवा दी और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा की। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और न्यायिक स्वतंत्रता के लिए उनका योगदान ऐतिहासिक माना जाता है।
बासु चटर्जी (जन्म: 10 जनवरी 1927, अजमेर, राजस्थान, भारत)
बासु चटर्जी का जन्म अजमेर में हुआ। वे हिंदी और बंगाली सिनेमा के संवेदनशील निर्देशक और लेखक थे। रजनीगंधा, चोटी सी बात और बातों बातों में जैसी फिल्मों से उन्होंने आम आदमी की भावनाओं को पर्दे पर उतारा। उनका सिनेमा सादगी और यथार्थ का प्रतीक माना जाता है।
पद्मनारायण राय (जन्म: 10 जनवरी 1908, उत्तर प्रदेश, भारत)
पद्मनारायण राय हिंदी साहित्य के प्रतिष्ठित निबंधकार थे। उनका जन्म उत्तर प्रदेश में हुआ। उन्होंने हिंदी निबंध को वैचारिक गहराई और सामाजिक चेतना से जोड़ा। उनकी रचनाएं विद्यार्थियों और साहित्य प्रेमियों के लिए आज भी प्रेरणास्रोत हैं।

ये भी पढ़ें – यूपी पॉलिटेक्निक प्रवेश परीक्षा 2026 की तिथियां घोषित, मई में ऑनलाइन होगी परीक्षा

नरहर विष्णु गाडगिल (जन्म: 10 जनवरी 1896, महाराष्ट्र, भारत)
नरहर विष्णु गाडगिल स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, अर्थशास्त्री और संविधान सभा के सदस्य थे। उनका जन्म महाराष्ट्र में हुआ। उन्होंने आर्थिक नीतियों और सामाजिक सुधारों पर महत्वपूर्ण कार्य किया। स्वतंत्र भारत की नींव रखने में उनका योगदान ऐतिहासिक है।
पी. लक्ष्मीकांतम (जन्म: 10 जनवरी 1894, आंध्र प्रदेश, भारत)
पी. लक्ष्मीकांतम एक प्रसिद्ध कवि और लेखक थे। उनका जन्म आंध्र प्रदेश में हुआ। उन्होंने साहित्य के माध्यम से सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा दिया। उनकी रचनाएं आज भी साहित्यिक अध्ययन का हिस्सा हैं।
जॉन मथाई (जन्म: 10 जनवरी 1886, केरल, भारत)
जॉन मथाई एक प्रख्यात शिक्षाविद, अर्थशास्त्री और न्यायविद् थे। उनका जन्म केरल में हुआ। वे स्वतंत्र भारत के पहले रेल मंत्री और वित्त मंत्री रहे। शिक्षा और आर्थिक नीतियों में उनके योगदान ने आधुनिक भारत के विकास की दिशा तय की।

इतिहास के पन्नों में 10 जनवरी: समय, सत्ता और संवेदनाओं से जुड़ी यादगार घटनाएँ

10 जनवरी का दिन विश्व और भारत के इतिहास में अनेक राजनीतिक, वैज्ञानिक, सामाजिक और सांस्कृतिक बदलावों का साक्षी रहा है। यह तारीख कभी अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की दिशा तय करती दिखी, तो कभी विज्ञान, शासन और मानव सभ्यता के विकास में मील का पत्थर बनी। आइए इतिहास के आईने में 10 जनवरी की उन प्रमुख घटनाओं पर विस्तार से नज़र डालते हैं, जिन्होंने दुनिया की सोच और दिशा को प्रभावित किया।
2020: अनुच्छेद 370, नागरिकता कानून और वैश्विक घटनाएँ
10 जनवरी 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन को बड़ा निर्देश देते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान हटाए जाने के बाद लगाए गए प्रतिबंधों की एक सप्ताह के भीतर समीक्षा की जाए। यह फैसला लोकतांत्रिक अधिकारों और संवैधानिक संतुलन के लिहाज़ से अहम माना गया।
इसी दिन साल का पहला चंद्रग्रहण लगा, जिसने खगोल प्रेमियों का ध्यान खींचा। यह ग्रहण रात 10:39 से 11 जनवरी तड़के 2:40 बजे तक रहा।

ये भी पढ़ें – जमीनी जनसंपर्क से उभरता नेतृत्व: विधानसभा 319 में सुमन ओझा की मजबूत होती राजनीतिक पहचान

केंद्र सरकार ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) को लेकर अधिसूचना जारी की, जिसके तहत 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए छह अल्पसंख्यक समुदायों को नागरिकता देने का प्रावधान स्पष्ट हुआ।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान ने स्वीकार किया कि यूक्रेनी बोइंग 737 विमान को मानवीय त्रुटि के चलते गलती से मार गिराया गया, जिससे वैश्विक तनाव और बढ़ा।
इसी दिन ओमान के सुल्तान कबूस बिन सैद अल सैद का निधन हुआ, जिनके नेतृत्व में ओमान ने स्थिरता और कूटनीतिक संतुलन बनाए रखा।
2013: पाकिस्तान में आतंकी हमलों की त्रासदी
10 जनवरी 2013 को पाकिस्तान में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया। इन हमलों में लगभग 100 लोगों की जान गई और 270 से अधिक घायल हुए। यह घटना आतंकवाद की भयावहता और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों का प्रतीक बन गई।

ये भी पढ़ें – ED कार्रवाई के खिलाफ TMC का हल्ला बोल, अमित शाह के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन, सांसद हिरासत में

2010: भारतीय मूल के राजीव शाह की ऐतिहासिक नियुक्ति
इस दिन भारतीय मूल के अमेरिकी विशेषज्ञ राजीव शाह ने यूएसएआईडी के प्रमुख का पद संभाला। वे बराक ओबामा प्रशासन में सर्वोच्च पद पाने वाले भारतीय मूल के व्यक्ति बने। यह उपलब्धि वैश्विक मंच पर भारतीय प्रतिभा की पहचान का उदाहरण बनी।
2008: टाटा नैनो और औद्योगिक क्रांति
10 जनवरी 2008 को टाटा मोटर्स ने दुनिया की सबसे सस्ती कार ‘नैनो’ पेश की। एक लाख रुपये की कीमत वाली इस कार ने आम आदमी के सपनों को पंख दिए और भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग को नई पहचान दिलाई।
2006: विश्व हिंदी दिवस की घोषणा
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी को प्रतिवर्ष विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। यह निर्णय हिंदी भाषा को वैश्विक मंच पर सम्मान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया।
2003: उत्तर कोरिया का परमाणु अप्रसार संधि से हटना
इस दिन उत्तर कोरिया ने परमाणु अप्रसार संधि से अलग होने की घोषणा की, जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में तनाव और सुरक्षा चिंताएँ गहराईं।

ये भी पढ़ें – निचलौल–महराजगंज मार्ग पर महिला का क्षत-विक्षत शव मिलने से मचा हड़कंप

1991: खाड़ी युद्ध रोकने की अंतिम कोशिश
संयुक्त राष्ट्र महासचिव जेवियर पेरेज़ द कुइयार खाड़ी युद्ध टालने की अंतिम कोशिश में बगदाद पहुंचे। हालांकि युद्ध टल नहीं सका, लेकिन यह प्रयास कूटनीति के महत्व को दर्शाता है।
1972: शेख मुजीबुर रहमान की ऐतिहासिक वापसी
पाकिस्तान की जेल में नौ महीने से अधिक कैद रहने के बाद शेख मुजीबुर रहमान बांग्लादेश पहुंचे। उनकी वापसी बांग्लादेश के स्वतंत्र इतिहास का निर्णायक क्षण बनी।
1946: संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली बैठक
लंदन में संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली बैठक आयोजित हुई, जिसमें 51 देशों ने भाग लिया। यह वैश्विक सहयोग और शांति प्रयासों की नींव थी।
1920: राष्ट्रसंघ की स्थापना
10 जनवरी 1920 को राष्ट्रसंघ अस्तित्व में आया। इसी दिन वर्साय संधि के लागू होने से प्रथम विश्व युद्ध औपचारिक रूप से समाप्त हुआ।
1863: दुनिया की पहली भूमिगत रेल
लंदन में विश्व की पहली अंडरग्राउंड रेलवे सेवा शुरू हुई, जिसने आधुनिक शहरी परिवहन की दिशा बदल दी।

ये भी पढ़ें – छह माह से मानदेय बकाया, शासन की चुप्पी पर सवाल

1836: भारत में पहला मानव विच्छेदन
प्रोफेसर मधुसूदन गुप्ता ने छात्रों के साथ मिलकर मानव शरीर का पहला वैज्ञानिक विच्छेदन किया, जिसने भारतीय चिकित्सा शिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव लाया।
निष्कर्ष
10 जनवरी केवल एक तारीख नहीं, बल्कि इतिहास, विज्ञान, राजनीति और संस्कृति के अनेक अध्यायों का संगम है। यह दिन हमें अतीत से सीख लेकर भविष्य को बेहतर बनाने की प्रेरणा देता है।

Ayodhya: 15 जनवरी को मकर संक्रांति, रामलला को लगेगा विशेष खिचड़ी भोग

अयोध्या (राष्ट्र की परम्परा)। रामनगरी अयोध्या में मकर संक्रांति का पावन पर्व इस वर्ष 15 जनवरी को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में विराजमान रामलला को विशेष खिचड़ी का भोग अर्पित किया जाएगा। साथ ही विधि-विधान से विशेष पूजन कर तिल, गुड़ और अन्य सात्विक पदार्थ भी अर्पित किए जाएंगे।

मकर संक्रांति का पुण्यकाल कब है?

मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश के साथ पुण्यकाल का आरंभ माना जाता है। पंडित कौशल्यानंदन वर्धन के अनुसार, इस वर्ष मकर संक्रांति 14 जनवरी की रात 9:39 बजे से लग रही है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार संक्रांति का पुण्यकाल सूर्य उदय के बाद ही मान्य होगा।
उन्होंने बताया कि 15 जनवरी की सुबह से दोपहर 1:39 बजे तक का समय स्नान, दान और पूजन के लिए विशेष फलदायी रहेगा।

खिचड़ी भोग का धार्मिक महत्व

पंडितों के अनुसार, मकर संक्रांति सूर्य और शनिदेव से जुड़ा पर्व है। इस दिन सूर्य देव शनिदेव की राशि मकर में प्रवेश करते हैं। खिचड़ी शनिदेव को अत्यंत प्रिय मानी जाती है और इसे नवग्रहों का प्रतीक भी कहा जाता है, जिससे ग्रह दोष शांत होते हैं।

मठ-मंदिरों में विशेष तैयारियां

रामनगरी के प्रमुख मठ-मंदिरों में मकर संक्रांति को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
हनुमानगढ़ी, कनकभवन, दशरथ महल समेत अन्य मंदिरों में भगवान को तिल और खिचड़ी का भोग अर्पित किया जाएगा। श्रद्धालु सरयू स्नान के बाद दान-पुण्य कर भगवान के दर्शन करेंगे।

खिचड़ी भोज और दान का विशेष महत्व

मकर संक्रांति के दिन अन्न, तिल, वस्त्र और कंबल दान को विशेष पुण्यदायी बताया गया है। अयोध्या में कई स्थानों पर खिचड़ी भोज का आयोजन भी किया जाएगा।
दशरथ महल, मणिराम दास की छावनी, श्रीराम बल्लभाकुंज, हनुमान बाग, सियाराम किला सहित कई मंदिरों में श्रद्धालुओं को खिचड़ी का प्रसाद वितरित किया जाएगा।

हिजाब विवाद पर ओवैसी का बड़ा बयान, बोले– एक दिन हिजाब पहनने वाली महिला बनेगी भारत की प्रधानमंत्री

हिजाब और बुर्का को लेकर चल रहे विवाद के बीच AIMIM प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने बड़ा बयान दिया है। महाराष्ट्र के सोलापुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा कि भविष्य में हिजाब पहनने वाली महिला भारत की प्रधानमंत्री बनेगी। उन्होंने भारत के संविधान की मजबूती पर भरोसा जताते हुए कहा कि यहां हर नागरिक को देश का नेतृत्व करने का अधिकार है।

ओवैसी ने इस दौरान महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार पर भी तीखा हमला बोला और केंद्र की मोदी सरकार की नीतियों को लेकर जमकर आलोचना की।

हिजाब-बुर्का विवाद की पृष्ठभूमि

दरअसल, हिजाब और बुर्का को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता जा रहा है। बिहार में कुछ ज्वेलरी शॉप्स में हिजाब-बुर्का पहनकर प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है। इस मामले को लेकर अल्पसंख्यक आयोग ने पटना के जिलाधिकारी और एसपी को पत्र लिखकर स्पष्टीकरण मांगा है।

‘एक दिन हिजाब पहनने वाली महिला देश का नेतृत्व करेगी’

अपने भाषण में ओवैसी ने कहा कि भारत का संविधान पाकिस्तान से कहीं बेहतर है, क्योंकि यहां किसी धर्म या पहनावे के आधार पर किसी को प्रधानमंत्री बनने से नहीं रोका जा सकता। उन्होंने कहा,
“भारत में हर नागरिक को बराबरी का हक है और इसी संविधान की ताकत से एक दिन हिजाब पहनने वाली महिला देश का नेतृत्व करेगी।”

अजित पवार पर साधा निशाना

ओवैसी ने कहा कि अजित पवार मोदी के प्रभाव में आ चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि अजित पवार को वोट देने का मतलब सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों का समर्थन करना है।

ये भी पढ़ें – अमेरिका ने कैरिबियन सागर में वेनेजुएला का पांचवां तेल टैंकर जब्त किया, ट्रंप प्रशासन का दबाव तेज

सोलापुर में जनता से किए कई वादे

सोलापुर की जनसभा में ओवैसी ने स्थानीय मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने

• 16 इंच की पानी की पाइपलाइन

• सड़कों की मरम्मत

• गरीबों के लिए एंबुलेंस सेवा

• प्रॉपर्टी कार्ड और जमीन के मालिकाना हक से जुड़े मामलों के समाधान
का वादा किया।

इसके साथ ही उन्होंने मुस्लिम लड़कियों की शिक्षा पर जोर देते हुए सावित्रीबाई फुले और फातिमा शेख को याद किया।

‘ये त्रिमूर्ति आंखों में धूल झोंक रही है’

ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अजित पवार को ‘त्रिमूर्ति’ बताते हुए कहा कि यह गठबंधन जनता को गुमराह कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि
“अजित पवार आज मोदी की गोद में बैठ गए हैं। एक-एक वोट मोदी सरकार के लाए गए वक्फ कानून को मजबूत करेगा।”

ये भी पढ़ें – WPL 2026: नदीन डी क्लर्क की तूफानी पारी से RCB ने MI को 3 विकेट से हराया

अमेरिका ने कैरिबियन सागर में वेनेजुएला का पांचवां तेल टैंकर जब्त किया, ट्रंप प्रशासन का दबाव तेज

अमेरिका की सेना ने लगातार तीसरे दिन कार्रवाई करते हुए कैरिबियन सागर में ‘ओलिना’ नाम के एक तेल टैंकर को जब्त कर लिया है। यह टैंकर वेनेजुएला के तेल परिवहन से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। ट्रंप प्रशासन द्वारा वेनेजुएला के खनन और तेल आपूर्ति पर नियंत्रण को लेकर की जा रही कार्रवाई दिन-ब-दिन तेज होती जा रही है।

अमेरिकी सेना के एक विशेष ऑपरेशन के तहत यूएस मरीन और नेवी के जवानों ने सुबह के समय इस टैंकर को अपनी कस्टडी में लिया। यह अब तक अमेरिका द्वारा जब्त किया गया पांचवां तेल टैंकर है। वेनेजुएला में सत्ता पर अमेरिकी कब्जे के बाद से वॉशिंगटन लगातार प्रशासनिक और सैन्य स्तर पर हस्तक्षेप बढ़ा रहा है।

अमेरिका की सदर्न कमांड का कड़ा संदेश

इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए अमेरिका की सदर्न कमांड (Southern Command) ने सख्त बयान जारी किया। कमांड ने कहा,
“अपराधियों के लिए समुद्र में भी कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं है। आपराधिक गतिविधियों को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

सदर्न कमांड के अनुसार, यह कार्रवाई व्यापक दबाव रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य वेनेजुएला के तेल वितरण नेटवर्क को पूरी तरह नियंत्रित करना है।

अब तक कितने टैंकर जब्त कर चुकी है US Navy

अमेरिकी सेना इससे पहले

• उत्तरी अटलांटिक में रूस के झंडे वाले टैंकर ‘मैरिनेरा’

• कैरिबियन सागर से एक अन्य जहाज

• और एमटी सोफिया नामक टैंकर को संदिग्ध गतिविधियों के चलते

जब्त कर चुकी है। इन कार्रवाइयों के बाद अमेरिका और रूस के बीच राजनयिक तनाव गहरा गया है। रूस ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है।

ये भी पढ़ें – ईरान में हिंसक प्रदर्शन, खामेनेई की सत्ता को खुली चुनौती

वेनेजुएला पर अमेरिकी ऑपरेशन और मादुरो की गिरफ्तारी

इससे पहले 3–4 जनवरी 2026 को अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला की राजधानी काराकास में बड़ा सैन्य ऑपरेशन चलाया था। इस दौरान वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेंस को गिरफ्तार किया गया था। दोनों पर ड्रग ट्रैफिकिंग के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा था कि यदि जरूरत पड़ी तो वेनेजुएला में दूसरा सैन्य हमला भी किया जा सकता है।

WPL 2026: नदीन डी क्लर्क की तूफानी पारी से RCB ने MI को 3 विकेट से हराया

खेल (राष्ट्र की परम्परा)। महिला प्रीमियर लीग सीजन-4 (WPL 2026) के पहले मुकाबले में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने मुंबई इंडियंस (MI) को रोमांचक मुकाबले में 3 विकेट से मात दी। डीवाई पाटिल स्टेडियम में खेले गए इस मैच में नदीन डी क्लर्क आखिरी ओवर की हीरो बनकर उभरीं और अपनी टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाई।

155 रन के लक्ष्य का रोमांचक पीछा

मुंबई इंडियंस द्वारा दिए गए 155 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए RCB की शुरुआत अच्छी रही। कप्तान स्मृति मंधाना और ग्रेस हेरिस ने तेज तर्रार अंदाज में 40 रनों की साझेदारी की, लेकिन इसके बाद विकेट लगातार गिरते चले गए। एक समय मैच पूरी तरह मुंबई के पक्ष में जाता दिख रहा था।

नदीन डी क्लर्क ने पलटा मैच

मुश्किल हालात में नदीन डी क्लर्क ने सूझबूझ भरी और आक्रामक पारी खेली। उन्होंने एक छोर संभाले रखा और धीरे-धीरे टीम को लक्ष्य के करीब पहुंचाया। डी क्लर्क ने 44 गेंदों में नाबाद 63 रन बनाए, जिसमें 7 चौके और 2 छक्के शामिल थे।

ये भी पढ़ें – ईरान में हिंसक प्रदर्शन, खामेनेई की सत्ता को खुली चुनौती

अंतिम ओवर में क्या हुआ?

RCB को अंतिम ओवर में जीत के लिए 18 रन चाहिए थे। नताली स्कीवर-ब्रंट के ओवर में शुरुआती दो गेंदों पर सिंगल नहीं लेकर डी क्लर्क ने बड़ा दांव खेला।

• तीसरी गेंद पर शानदार छक्का

• चौथी गेंद पर चौका, इसी के साथ अर्धशतक पूरा

• पांचवीं गेंद पर फिर छक्का

• आखिरी गेंद पर चौका, और RCB ने जीत दर्ज की

इस तरह आखिरी 4 गेंदों में पूरा मुकाबला पलट गया।

RCB ने रचा इतिहास

यह पहला मौका है जब रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने WPL के पहले मैच में मुंबई इंडियंस को हराया। पिछले तीन सीजन में RCB ऐसा नहीं कर पाई थी।
मुंबई ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 154 रन बनाए थे। लक्ष्य का पीछा करते हुए डी क्लर्क के अलावा अरुंधति रेड्डी (20) और प्रेमा रावत (8) ने भी अहम योगदान दिया।