Saturday, June 13, 2026
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पूर्वी क्षेत्र अंतर विश्वविद्यालय महिला बास्केटबॉल: चौथे दिन बड़े उलटफेर

दो नई टीमें क्वालीफाई, फाइनल आज

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में चल रहे पूर्वी क्षेत्र अंतर विश्वविद्यालय बास्केटबॉल महिला टूर्नामेंट के चौथे दिन बड़ा उलटफेर देखने को मिला। पिछले वर्ष की क्वालीफाइड टीमें उत्कल विश्वविद्यालय और काशी हिंदू विश्वविद्यालय बाहर हो गईं, जबकि पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर और संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा ने अपनी जगह पक्की की।
दिन के क्वालीफाइंग मुकाबलों में कोलकाता विश्वविद्यालय ने रावेंशा विश्वविद्यालय, कटक को 41-5 से हराया। संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय ने उत्कल विश्वविद्यालय को 53-30 से मात दी। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय को 36-28 से परास्त किया। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ को 45-36 से हराया।

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लीग मैचों में संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय ने रायपुर विश्वविद्यालय को 63-38 से हराया, जबकि हेमचंद यादव विश्वविद्यालय ने कोलकाता विश्वविद्यालय को 73-61 से पराजित कर टूर्नामेंट का अब तक का सर्वोच्च स्कोरिंग मैच खेला।
चौथे दिन की सर्वाधिक स्कोरर रहीं रिमझिम मिश्रा, जिन्होंने 21 अंक हासिल किए। तीसरे दिन की टॉप स्कोरर प्रतिभा सिंह ने भी 21 अंक अर्जित किए थे। खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने के लिए पूर्वोत्तर रेलवे के अशोक रत्न बरनवाल, अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी और यूपी टीम की कप्तान रहीं रंजना सिंह, फादर रोजर और फादर जीजो की विशेष उपस्थिति रही।

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टूर्नामेंट का आखिरी दिन कल होगा, जिसमें चार मैच खेले जाएंगे और विजेता टीम का निर्णय होगा।

जनविरोधी नीतियों के खिलाफ भाकपा का वैचारिक संघर्ष तेज

भाकपा जिला काउंसिल की समीक्षा बैठक सम्पन्न, संगठन मजबूती और जनसंघर्ष पर हुआ मंथन


बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) की जिला काउंसिल की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक रविवार को बरहज स्थित बाईपास रोड पर काशी नाथ अस्पताल के पास पार्टी के कैंप कार्यालय में सम्पन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता भाकपा के पूर्व जिला सचिव कामरेड चक्रपाणि तिवारी ने की, जबकि संचालन जिला सह-सचिव कामरेड कमलेश चौरसिया द्वारा किया गया।
बैठक में संगठन की वर्तमान स्थिति, सदस्यता अभियान, आगामी पंचायती चुनाव एवं विधानसभा चुनाव की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। साथ ही भारत एवं अमेरिका की जनविरोधी नीतियों, बढ़ती आर्थिक असमानता और सामाजिक विभाजन जैसे मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया गया।

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चर्चा के दौरान खेत मजदूर यूनियन के राज्य सचिव कामरेड विनोद कुमार सिंह ने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ताओं को अपने ऐतिहासिक संघर्षों से प्रेरणा लेते हुए जनता के बीच सक्रिय रूप से जाना होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार की विभाजनकारी नीतियों से जनता त्रस्त है और आज भी लाल झंडे से उन्हें उम्मीद है। जरूरत है कि भाकपा कार्यकर्ता जनता की पीड़ा को समझते हुए उनके संघर्षों में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हों।

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भाकपा के जिला सचिव कामरेड अरविंद कुशवाहा ने कहा कि अब समय आ गया है कि पार्टी गांवों की ओर लौटे और अपने वास्तविक वर्ग से सीधा संवाद स्थापित करे। उन्होंने आरोप लगाया कि जातीय राजनीति करने वाली पार्टियों ने मजदूर, किसान और गरीब वर्ग को अपने राजनीतिक लाभ का साधन बना लिया है। भाकपा को यह स्पष्ट करना होगा कि पार्टी ने अतीत में भी जनता की लड़ाई लड़ी है, आज भी लड़ रही है और भविष्य में भी संघर्ष जारी रहेगा।

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पूर्व जिला सचिव कामरेड आनंद प्रकाश चौरसिया ने कहा कि जनता भले ही सरकारी नीतियों से परेशान है, लेकिन कूटनीति और भ्रम के जाल में फंसी हुई है। लोग अपने शोषकों को पहचानने में असमर्थ हैं और अपने सच्चे हितैषियों को समझ नहीं पा रहे हैं।
अध्यक्षीय संबोधन में कामरेड चक्रपाणि तिवारी ने कहा कि मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं होता। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी धर्म या सत्ता की राजनीति के पक्षधर नहीं हैं, बल्कि गरीबों, शोषितों और वंचितों के अधिकारों की लड़ाई को ही सच्चा धर्म मानते हैं। उनके अनुसार, बिना भेदभाव के अन्याय के खिलाफ संघर्ष करना ही कम्युनिस्ट आंदोलन की पहचान है।

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बैठक में प्रस्तुत सभी प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए। इस अवसर पर कमला यादव, रविंद्र कुमार, राम ध्यान प्रधान, काशी यादव, संजय दूबे, पराग कुशवाहा, मनोज गौड़, हरिचरण कुशवाहा सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

महाराणा प्रताप: स्वाभिमान, संघर्ष और स्वतंत्रता के अमर प्रतीक

नवनीत मिश्र

भारतीय इतिहास में कुछ व्यक्तित्व ऐसे हैं, जो सत्ता, वैभव और सुविधा से ऊपर स्वाभिमान और स्वतंत्रता को रखते हैं। महाराणा प्रताप ऐसे ही युगपुरुष थे, जिनका जीवन केवल एक राजा का जीवन नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, त्याग और राष्ट्रप्रेम की जीवंत गाथा है। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि पराजय परिस्थितियों की हो सकती है, विचारों और संकल्पों की नहीं।
मेवाड मुकुट महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई 1540 को मेवाड़ के सिसोदिया राजवंश में हुआ। वे महाराणा उदयसिंह द्वितीय के पुत्र थे। उस समय भारत में मुगल साम्राज्य का विस्तार हो रहा था और अधिकांश राजपूत शासक अकबर की अधीनता स्वीकार कर चुके थे। किंतु महाराणा प्रताप ने किसी भी परिस्थिति में मुगल सत्ता के सामने सिर झुकाना स्वीकार नहीं किया। उनके लिए स्वतंत्रता कोई राजनीतिक विकल्प नहीं, बल्कि जीवन का मूल मूल्य थी।
अकबर ने कई बार कूटनीति, वैवाहिक संबंधों और साम-दाम-दंड-भेद की नीति के माध्यम से महाराणा प्रताप को अपने अधीन लाने का प्रयास किया, लेकिन हर बार उसे असफलता मिली। महाराणा प्रताप का स्पष्ट मत था कि मेवाड़ की मिट्टी की स्वतंत्रता किसी भी कीमत पर गिरवी नहीं रखी जा सकती। यही अडिग संकल्प हल्दीघाटी के ऐतिहासिक युद्ध में दिखाई देता है।
1576 ईस्वी में हल्दीघाटी का युद्ध लड़ा गया। यह युद्ध केवल दो सेनाओं के बीच नहीं था, बल्कि आत्मसम्मान और साम्राज्यवाद के बीच का संघर्ष था। यद्यपि संसाधनों और संख्या में मुगल सेना अधिक थी, फिर भी महाराणा प्रताप ने अद्भुत वीरता का परिचय दिया। चेतक जैसे अश्व की स्वामीभक्ति और बलिदान भारतीय इतिहास में अद्वितीय हैं। युद्ध का परिणाम राजनीतिक दृष्टि से मुगलों के पक्ष में रहा, परंतु नैतिक विजय महाराणा प्रताप की ही थी। वे पराजित नहीं हुए, बल्कि जीवनपर्यंत संघर्षरत रहे।
युद्ध के बाद महाराणा प्रताप का जीवन अत्यंत कष्टों में बीता। जंगलों में रहना, परिवार का घास की रोटियाँ खाना, बच्चों का अभावों में पलना। ये सब उनके संघर्ष की मूक साक्षी हैं। फिर भी उन्होंने कभी समझौता नहीं किया। अपने साहस, रणनीति और जनसमर्थन के बल पर उन्होंने मेवाड़ के अधिकांश भूभाग को पुनः स्वतंत्र कराया। यह उनकी अटूट इच्छाशक्ति और नेतृत्व क्षमता का प्रमाण है।
जीवन के अंतिम वर्षों में भी महाराणा प्रताप का संकल्प अडिग रहा। निरंतर संघर्ष, घावों और कठिन जीवन के कारण उनका शरीर शिथिल होने लगा। अंततः 19 जनवरी 1597 को चावंड (मेवाड़) में उनका निधन हुआ। उनका निधन किसी पराजित राजा का नहीं, बल्कि एक ऐसे योद्धा का था जिसने अंतिम सांस तक स्वतंत्रता की ज्योति को जलाए रखा। उनके निधन के साथ एक युग का अंत अवश्य हुआ, परंतु उनके आदर्श युगों तक जीवित रहेंगे।
महाराणा प्रताप केवल एक योद्धा नहीं थे, वे आदर्श शासक भी थे। प्रजा के प्रति उनका प्रेम, न्यायप्रियता और स्वाभिमानी दृष्टि उन्हें महान बनाती है। वे किसी धर्म या समुदाय के विरोधी नहीं थे, बल्कि विदेशी अधीनता के विरोधी थे। यही कारण है कि आज भी उन्हें संपूर्ण भारत में सम्मान और श्रद्धा के साथ स्मरण किया जाता है।
महाराणा प्रताप का जीवन हमें यह सिखाता है कि सच्ची विजय तलवार से नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, धैर्य और दृढ़ संकल्प से प्राप्त होती है। वे इतिहास के पन्नों में नहीं, बल्कि भारतीय चेतना में अमर हैं। जब-जब स्वतंत्रता, स्वाभिमान और संघर्ष की बात होगी, महाराणा प्रताप का नाम स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा।

कोहबर कला हमारी लोक संस्कृति की अमूल्य धरोहर : डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव

लोक में कोहबर कला प्रदर्शनी व कार्यशाला का प्रमाण-पत्र वितरण के साथ समापन

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर द्वारा लोक कलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय “लोक में कोहबर कला” कार्यशाला का समापन रविवार को प्रमाण-पत्र वितरण एवं प्रदर्शनी आयोजन के साथ सम्पन्न हुआ।
प्रदर्शनी का शुभारम्भ मुख्य अतिथि महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए युवा कलाकारों द्वारा कैनवास पर उकेरी गई कोहबर कला की सराहना की। इस अवसर पर संग्रहालय के उप निदेशक डॉ. यशवन्त सिंह राठौर ने अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर मुख्य अतिथि का स्वागत किया तथा कार्यशाला की विस्तृत जानकारी दी।

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अपने संबोधन में डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने कहा कि कोहबर कला हमारी लोक संस्कृति की एक अमूल्य धरोहर है, जो हमें हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ती है। युवा कलाकारों द्वारा कोहबर कला के विविध रूपों को जीवंत रूप में प्रस्तुत करना प्रशंसनीय है। ऐसे प्रयासों से हमारी प्राचीन भित्ति कला अगली पीढ़ी तक सुरक्षित और सशक्त रूप में पहुंच सकेगी। उन्होंने राजकीय बौद्ध संग्रहालय के इस प्रयास को उत्कृष्ट एवं सराहनीय बताया।
कार्यशाला की मुख्य प्रशिक्षक उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजातीय संस्कृति संस्थान, लखनऊ की सदस्य डॉ. कुमुद सिंह ने कहा कि सभी कलाकारों में अद्भुत प्रतिभा है। आवश्यकता है इन्हें निरंतर अवसर और मार्गदर्शन प्रदान करने की, जो कि राजकीय बौद्ध संग्रहालय द्वारा प्रभावी रूप से किया जा रहा है। युवाओं को अपनी पारंपरिक कलाओं से जोड़ने का यह अभियान प्रशंसनीय है।

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समापन अवसर पर कोहबर कला की उत्कृष्ट कृतियाँ सृजित करने वाले शिवम कुमार गुप्ता, विष्णुदेव शर्मा, प्राची पाठक, समीर रंजन एवं नीशू यादव को विशिष्ट कलाकार सम्मान प्रदान किया गया। साथ ही गोरखपुर एवं बस्ती मंडल से कार्यशाला में सम्मिलित सभी 30 कलाकारों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।

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कार्यक्रम के संयोजक एवं संचालक प्रेमनाथ ने सभी कलाकारों एवं उपस्थित अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर डॉ. विनीता गुप्ता, रेनू लता पाठक, कुलवन्त सिंह, आस्था यादव, डॉ. रोली तिवारी, मोहन कुमार यादव, मलय मिश्र, मनीष तिवारी, वंदना दास, आदित्य कुमार वर्मा, निवेदिता यादव सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

मंडलायुक्त ने राजनीतिक दलों के साथ एसआईआर की समीक्षा की, समन्वय पर दिया जोर

संत कबीर नगर( राष्ट्र की परम्परा)। मंडलायुक्त बस्ती मंडल बस्ती/रोल प्रेक्षक अखिलेश सिंह की अध्यक्षता में अर्हता तिथि 01 जनवरी 2026 के आधार पर निर्वाचक नामावलियों के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) को लेकर एनआईसी सभागार में राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों के साथ बैठक आयोजित हुई। बैठक में जिला निर्वाचन अधिकारी/जिलाधिकारी आलोक कुमार, उप जिला निर्वाचन अधिकारी/अपर जिलाधिकारी (वित्त व राजस्व) जय प्रकाश, अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) चंद्रेश कुमार सिंह, ईआरओ/एईआरओ सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। मेहदावल विधायक अनिल कुमार त्रिपाठी और धनघटा विधायक गणेश चंद्र चौहान भी बैठक में शामिल हुए।
मंडलायुक्त/रोल प्रेक्षक अखिलेश सिंह ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार एसआईआर के तहत मतदाता सूची के आलेख्य के प्रकाशन के बाद छूटे हुए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने, संशोधन, स्थानांतरण और त्रुटि सुधार का कार्य किया जा रहा है। विशेष अभियान तिथि के दौरान विभिन्न बूथों पर बीएलओ द्वारा निर्वाचक नामावलियों को पढ़कर सुनाया गया। उन्होंने राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त बूथ लेवल एजेंट्स से बीएलओ के साथ समन्वय बनाकर कार्य करने की अपेक्षा जताई, ताकि किसी भी स्तर पर त्रुटि का समय से निस्तारण हो सके।

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समीक्षा के दौरान मंडलायुक्त ने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से आवश्यक सुझाव भी लिए। जिला निर्वाचन अधिकारी आलोक कुमार ने एसआईआर में राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि पुनरीक्षण कार्य में सभी दलों का सहयोग निरंतर मिल रहा है।
मंडलायुक्त/रोल प्रेक्षक ने निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों व उप जिलाधिकारियों से विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण अभियान की अद्यतन स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने नाम जोड़ने, हटाने, संशोधन और स्थानांतरण से जुड़े कार्यों की आंकड़ेवार समीक्षा करते हुए ईआरओ/एईआरओ को बीएलओ से प्राप्त प्रपत्रों के आधार पर मतदाता सूची को परिष्कृत करने के निर्देश दिए। नाम व फोटो मिसमैचिंग जैसी त्रुटियों पर बार-बार क्रॉस चेकिंग कर शुद्धतम मतदाता सूची जारी करने पर विशेष जोर दिया गया।

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मंडलायुक्त ने बताया कि जनपद में लगभग 60 हजार मतदाता नो-मैपिंग श्रेणी में हैं। इनके नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मिलान कर निर्वाचन आयोग के नियमानुसार संशोधन सुनिश्चित किया जाए। एएसडी सूची को गांवों और शहरी क्षेत्रों के प्रमुख स्थानों पर बीएलओ द्वारा पढ़कर सुनाने के निर्देश दिए गए, जिससे छूटे हुए मतदाता अपने नाम जुड़वा सकें। साथ ही नए बीएलओ को आवश्यकतानुसार प्रशिक्षण देने की बात कही गई।
उन्होंने निर्देशित किया कि विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण अभियान के दौरान डोर-टू-डोर सर्वे कर यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी पात्र व्यक्ति मतदाता सूची में दर्ज होने से न छूटे। 01 जनवरी 2026 को 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले युवाओं का नाम अनिवार्य रूप से फार्म-6 के माध्यम से मतदाता सूची में शामिल किया जाए।

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बैठक के अंत में जिलाधिकारी आलोक कुमार ने मंडलायुक्त द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुपालन और कार्यों में गुणवत्तापूर्ण परिणाम सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया तथा राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर रामदरश यादव, सचिन सिंह सैंथवार, आदित्य प्रताप यादव, सुनील पांडेय, अभिषेक कुमार, उप जिलाधिकारी खलीलाबाद अरुण कुमार, उप जिलाधिकारी मेहदावल संजीव राय, उप जिलाधिकारी धनघटा डॉ. सुनील कुमार, तहसीलदार अल्पिका वर्मा, आनंद ओझा, खंड विकास अधिकारीगण सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

बूथों पर पढ़ी गई ड्राफ्ट मतदाता सूची, बड़ी संख्या में नागरिकों ने किया सत्यापन

देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में देवरिया जनपद की सभी सात विधानसभाओं के अंतर्गत रविवार को सभी मतदान केंद्रों पर विशेष अभियान चलाया गया। इस दौरान बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान केंद्रों पर उपस्थित रहे और ड्राफ्ट मतदाता सूची का सार्वजनिक वाचन कराया गया।अभियान के अंतर्गत बूथों पर एएसडी (अनुपस्थित, स्थानांतरित एवं मृत) मतदाताओं की सूची भी उपलब्ध कराई गई, जिससे आम नागरिक अपने नाम की स्थिति की जांच कर सकें। बड़ी संख्या में मतदाता बूथों पर पहुंचे और ड्राफ्ट मतदाता सूची व एएसडी सूची का अवलोकन किया। मौके पर ही बीएलओ द्वारा फॉर्म-6 (नया नाम जोड़ने), फॉर्म-7 (नाम हटाने) और फॉर्म-8 (संशोधन व स्थान परिवर्तन) की प्रक्रिया पूरी कराई गई।

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जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने महाराजा अग्रसेन, दानापुर स्थित प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालय का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने नए युवा मतदाताओं को फॉर्म-6 वितरित कर मतदाता पंजीकरण के लिए प्रेरित किया और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी का महत्व समझाया।राजनीतिक दलों के बीएलए एवं पदाधिकारियों ने भी अभियान में सक्रिय सहभागिता निभाई। साथ ही जनपद के सभी ईआरओ व एईआरओ द्वारा विभिन्न मतदान केंद्रों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया।आंकड़ों के अनुसार, जनपद में 17.22 प्रतिशत मतदाता ड्राफ्ट सूची से बाहर हैं। इनमें 2.79 प्रतिशत मृतक, 3.49 प्रतिशत अनुपस्थित, 9.04 प्रतिशत स्थानांतरित तथा 1.26 प्रतिशत डुप्लीकेट मतदाता शामिल हैं। कुल 4,14,799 एएसडी मतदाता यदि आवश्यक प्रमाणों के साथ फॉर्म-6 भरते हैं तो उनके नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल किए जा सकते हैं।ड्राफ्ट मतदाता सूची सभी बीएलओ, बीएलए और राजनीतिक दलों को उपलब्ध करा दी गई है। इसके अतिरिक्त यह सूची भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) की आधिकारिक वेबसाइट पर आम जनता के अवलोकन के लिए उपलब्ध है।

प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0: 3494 लाभार्थियों को मिली पहली किस्त, पक्का मकान का सपना हुआ साकार

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 के अंतर्गत जनपद में शहरी गरीबों के लिए बड़ी सौगात सामने आई है। इस योजना का तहत कुल 3494 पात्र लाभार्थियों को प्रथम किस्त की स्वीकृति प्रदान की गई, जिससे उनके अपने पक्के मकान का सपना अब साकार होने की ओर बढ़ चला है। लाभार्थियों को स्वीकृति प्रमाण पत्र का वितरण भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष रामाश्रय मौर्य द्वारा किया गया।इस अवसर पर जिलाध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में निवास करने वाले आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के परिवारों को सुरक्षित एवं सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना है।

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योजना के तहत प्रत्येक लाभार्थी को ₹2.50 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है, जिससे वे अपना स्वयं का पक्का घर बना सकें।विभिन्न नगर निकायों में लाभार्थियों का वितरण इस प्रकार रहा—नगर निकाय अदरी में 146, अमिला में 1156, चिरैयाकोट में 54, दोहरीघाट में 190, घोसी में 135, कोपागंज में 218, कुर्थीजाफरपुर में 499, मधुबन में 86, मऊनाथ भंजन में 689, मोहम्मदाबाद गोहाना में 97 तथा वलितपुर में 224 लाभार्थी शामिल हैं।इस दौरान इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, गोमती नगर लखनऊ से आयोजित कार्यक्रम का लाइव प्रसारण कलेक्ट्रेट सभागार में दिखाया गया, जिसे लाभार्थियों ने उत्साहपूर्वक देखा। पहली किस्त की स्वीकृति मिलने के बाद लाभार्थियों के चेहरों पर खुशी और संतोष साफ नजर आया।कार्यक्रम में अपर जिलाधिकारी सत्यप्रिय सिंह, परियोजना अधिकारी डूडा अरविंद पाण्डेय सहित अन्य अधिकारी एवं बड़ी संख्या में लाभार्थी उपस्थित रहे। यह पहल शहरी आवास के क्षेत्र में सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता और गरीब कल्याण के संकल्प को दर्शाती है।

नेपाल सहित देशभर के पहलवानों ने दंगल में दिखाया कौशल, रोमांचक रहे मुकाबले

राम-राम दंगल में पहलवानों का उत्साह बढ़ाने पहुंचे पूर्व मंत्री डॉ. सतीश द्विवेदी, देश-नेपाल के पहलवानों ने दिखाया दमखम


सिद्धार्थनगर (राष्ट्र की परम्परा)। डुमरियागंज विधानसभा क्षेत्र में आयोजित पारंपरिक राम-राम दंगल के दूसरे दिन कुश्ती प्रेमियों का उत्साह चरम पर रहा। उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व बेसिक शिक्षा मंत्री एवं इटवा के पूर्व विधायक डॉ. सतीश द्विवेदी मुख्य अतिथि के रूप में दंगल स्थल पर पहुंचे। उन्होंने पहलवानों से हाथ मिलाकर उनका उत्साह बढ़ाया और विधिवत रूप से दूसरे दिन के कुश्ती मुकाबलों का शुभारंभ किया। इस अवसर पर ब्लॉक प्रमुख संघ के जिलाध्यक्ष लवकुश ओझा ने उनका स्वागत किया।
दंगल में उत्तर प्रदेश, अन्य राज्यों के साथ-साथ पड़ोसी देश नेपाल से आए नामी पहलवानों ने भाग लिया। एक से बढ़कर एक रोमांचक मुकाबलों ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। ग्रामीण परिवेश में आयोजित इस दंगल ने पारंपरिक कुश्ती संस्कृति को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।

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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. सतीश द्विवेदी ने कहा कि कुश्ती केवल शारीरिक शक्ति का खेल नहीं है, बल्कि यह मानसिक संतुलन, रणनीति और त्वरित निर्णय क्षमता की भी परीक्षा है। पहलवान अपनी बुद्धिमत्ता और अनुभव के बल पर प्रतिद्वंद्वी पर बढ़त बनाता है। ऐसे आयोजन खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने और पहचान बनाने का मजबूत मंच प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में जहां पारंपरिक खेलों का चलन कम होता जा रहा है, वहीं राम-राम दंगल जैसे आयोजन कुश्ती को नई ऊर्जा देते हैं। यह न केवल क्षेत्रीय पहलवानों के लिए संजीवनी हैं, बल्कि युवा पीढ़ी को भी खेलों से जोड़ने का कार्य करते हैं। अंत में उन्होंने आयोजक मंडल, पहलवानों और क्षेत्रीय जनता को सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।
ब्लॉक प्रमुख संघ के जिलाध्यक्ष लवकुश ओझा ने कहा कि यह दंगल परंपरा, पराक्रम और संस्कार का प्रतीक है, जो क्षेत्रीय एकता और खेल भावना को मजबूत करेगा।

क्रिटिकल गैप्स योजना से बदलेगी कुशीनगर की ग्रामीण तस्वीर, ₹154 करोड़ से अधिक के 8 विकास कार्यों को मिली मंजूरी


कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद कुशीनगर में ग्रामीण विकास को नई गति देने के उद्देश्य से वित्तीय वर्ष 2025–26 के अंतर्गत क्रिटिकल गैप्स योजना के तहत 08 महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं को प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इन सभी परियोजनाओं पर कुल ₹154.05 लाख की लागत आएगी, जिसकी संपूर्ण धनराशि शासन द्वारा निर्गत कर दी गई है।
जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने बताया कि इन योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन, स्वच्छता, शिक्षा संस्थानों की सुरक्षा तथा बुनियादी अधोसंरचना को सुदृढ़ करना है। स्वीकृत कार्यों के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग एवं ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, कुशीनगर को सौंपी गई है।

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₹39.85 लाख की लागत से चार प्रमुख कार्य कराए जाएंगे, जिनमें बांसीघाट एवं हिरण्यवती नदी पर श्रद्धालुओं के लिए शौचालय व चेंजिंग रूम का निर्माण, कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय कसया का पहुँच मार्ग तथा पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, मिल्की कुशीनगर में बाउंड्रीवाल का निर्माण शामिल है। इससे स्वच्छता के साथ-साथ छात्र-छात्राओं की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

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इसके अतिरिक्त ₹94.20 लाख की लागत से विधानसभा हाटा क्षेत्र में असना–सितुहिया–रोहुआ–मछरगांवा मार्ग से राजकीय आईटीआई भलुआ मोतीचक तक संपर्क मार्ग, रामपुर जंगल स्थित संविलियन उच्च प्राथमिक विद्यालय में बाउंड्रीवाल तथा कप्तानगंज–नौरंगिया मार्ग से खोटही मणिताल संपर्क मार्ग का नवनिर्माण किया जाएगा। इन कार्यों से शिक्षा, रोजगार और पर्यटन को सीधा लाभ मिलने की संभावना है।
जनहित में ₹20 लाख की लागत से ग्राम सभा सेन्दुरिया में डीह बाबा स्थान से काली माता मंदिर तक सीसी रोड का निर्माण भी कराया जाएगा, जिससे स्थानीय श्रद्धालुओं और ग्रामीणों को सुगम आवागमन मिलेगा। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि सभी कार्य ई-टेंडरिंग नियमों के तहत गुणवत्ता मानकों का पालन करते हुए 31 मार्च 2026 तक पूर्ण किए जाएं। कार्यस्थलों पर सूचना बोर्ड लगाने और नियमित मॉनिटरिंग के भी निर्देश दिए गए हैं। यह योजना कुशीनगर के ग्रामीण विकास की दिशा में एक ठोस और प्रभावी कदम मानी जा रही है।

छात्रों और शोधार्थियों के लिए प्रेरक जीवन कथाएँ

19 जनवरी के महत्वपूर्ण निधन: इतिहास, योगदान और विरासत


माता प्रसाद (निधन 2021)
माता प्रसाद भारतीय राजनीति के वरिष्ठ नेता और अरुणाचल प्रदेश के भूतपूर्व राज्यपाल थे। उन्होंने प्रशासनिक सुशासन, जनकल्याण और संवैधानिक मूल्यों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका राजनीतिक जीवन सादगी, ईमानदारी और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के लिए जाना जाता है। राज्यपाल के रूप में उन्होंने पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक विविधता और विकास आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी। युवाओं को शिक्षा व रोजगार से जोड़ने के उनके प्रयास उल्लेखनीय रहे। उनका निधन सार्वजनिक जीवन में एक अनुभवी मार्गदर्शक की कमी के रूप में याद किया जाता है।

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डॉ. वी. शांता (निधन 2021)
डॉ. वी. शांता रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित भारतीय महिला चिकित्सक थीं। उन्होंने चेन्नई के कैंसर इंस्टीट्यूट के माध्यम से सस्ती और सुलभ कैंसर चिकित्सा को जन-जन तक पहुँचाया। चिकित्सा सेवा में मानवीय दृष्टिकोण, शोध और प्रशिक्षण को उन्होंने नई दिशा दी। महिला स्वास्थ्य और निवारक चिकित्सा पर उनका कार्य प्रेरणादायी रहा। समाज के कमजोर वर्गों के लिए उनका आजीवन समर्पण उन्हें चिकित्सा क्षेत्र की अग्रणी हस्ती बनाता है।
अतीन बंद्योपाध्याय (निधन 2019)
अतीन बंद्योपाध्याय बंगाली साहित्य के विख्यात रचनाकार थे। उनके उपन्यास और कथाएँ सामाजिक यथार्थ, मानवीय संवेदनाओं और समकालीन मुद्दों को सशक्त रूप से प्रस्तुत करती हैं। भाषा की सहजता और कथानक की गहराई उनकी पहचान रही। उन्होंने साहित्य को आम पाठक से जोड़ा और नई पीढ़ी को प्रेरित किया। उनका योगदान बंगाली साहित्य की आधुनिक धारा में स्थायी महत्व रखता है।

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रजनी कोठारी (निधन 2015)
रजनी कोठारी प्रख्यात राजनीतिक विचारक और लेखक थे। भारतीय लोकतंत्र, राजनीति और विकास पर उनके विश्लेषण को अकादमिक जगत में विशेष सम्मान प्राप्त है। उन्होंने सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज (CSDS) की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी कृतियाँ नीति-निर्माताओं और छात्रों के लिए मार्गदर्शक बनीं। विचारों की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय पर उनका दृष्टिकोण प्रभावशाली रहा।
एंथनी गोंज़ाल्विस (निधन 2012)
एंथनी गोंज़ाल्विस भारतीय और पश्चिमी संगीत के उस्ताद तथा प्रसिद्ध संगीतकार थे। उन्होंने कई दिग्गज गायकों को प्रशिक्षण दिया और संगीत संयोजन में नवीन प्रयोग किए। शास्त्रीय और आधुनिक संगीत के संगम में उनका योगदान स्मरणीय है। भारतीय सिनेमा के संगीत विकास में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही।

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के. एस. अशवाथ (निधन 2010)
के. एस. अशवाथ कन्नड़ फ़िल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता थे। उन्होंने चरित्र भूमिकाओं में गहरी छाप छोड़ी और रंगमंच से सिनेमा तक उत्कृष्ट अभिनय किया। उनकी सादगीपूर्ण अभिनय शैली दर्शकों को प्रभावित करती रही। कन्नड़ सिनेमा में उनका योगदान आज भी प्रेरक है।
हेडी लामार (निधन 2000)
हेडी लामार हॉलीवुड की चर्चित अभिनेत्री होने के साथ-साथ एक महान आविष्कारक भी थीं। उन्होंने वायरलेस कम्युनिकेशन की आधारभूत तकनीक विकसित की, जो आज की वाई-फाई और ब्लूटूथ तकनीक का आधार बनी। कला और विज्ञान के संगम का उनका जीवन अद्वितीय उदाहरण है।

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उपेंद्रनाथ अश्क (निधन 1995)
उपेंद्रनाथ अश्क हिन्दी साहित्य के प्रमुख कथाकार और नाटककार थे। उनकी रचनाओं में सामाजिक यथार्थ, मनोवैज्ञानिक गहराई और सशक्त संवाद मिलते हैं। आधुनिक हिन्दी कथा साहित्य में उनका स्थान महत्वपूर्ण है।
आचार्य रजनीश (ओशो) (निधन 1990)
आचार्य रजनीश भारतीय विचारक और धर्मगुरु थे। ध्यान, चेतना और जीवन-दर्शन पर उनके प्रवचन विश्वभर में लोकप्रिय हुए। उन्होंने पारंपरिक और आधुनिक विचारों के बीच संवाद स्थापित किया।

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देवेन्द्रनाथ टैगोर (निधन 1905)
देवेन्द्रनाथ टैगोर भारतीय चिंतक और ब्रह्म समाज के प्रमुख स्तंभ थे। वे रबीन्द्रनाथ ठाकुर के पिता थे और आध्यात्मिक सुधार आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाई।
राणा प्रताप सिंह (निधन 1597)
मेवाड़ के राजपूत शासक महाराणा प्रताप स्वतंत्रता, स्वाभिमान और वीरता के प्रतीक थे। अकबर के विरुद्ध उनका संघर्ष भारतीय इतिहास में अद्वितीय है।

छात्रों के लिए प्रेरणा: 19 जनवरी को जन्मे महान विचारक

19 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तित्व: महत्वपूर्ण जन्म इतिहास


जगजीत सिंह दर्दी (1949)
जगजीत सिंह दर्दी पंजाबी पत्रकारिता के सशक्त स्तंभ माने जाते हैं। वे प्रसिद्ध पंजाबी दैनिक चढ़दीकला के एडिटर-इन-चीफ रहे हैं और शिक्षा, मीडिया तथा सामाजिक सरोकारों में उनका योगदान उल्लेखनीय है। उन्होंने पंजाबी भाषा को जनसंवाद का सशक्त माध्यम बनाया। पत्रकारिता के साथ-साथ वे शिक्षाविद् भी रहे और अनेक सामाजिक मुद्दों पर निर्भीक लेखन किया। उनके नेतृत्व में चढ़दीकला ने ग्रामीण, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय विषयों को प्रमुखता दी। पंजाबी समाज में जागरूकता और वैचारिक चेतना के प्रसार में उनका योगदान ऐतिहासिक माना जाता है।
सौमित्र चटर्जी (1935)
सौमित्र चटर्जी भारतीय सिनेमा, विशेषकर बंगाली फिल्मों के महान अभिनेता थे। सत्यजीत रे की अपूर संसार से उन्होंने अभिनय यात्रा शुरू की और अपु त्रयी से अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई। उनकी अभिनय शैली में सादगी, गहराई और बौद्धिक संवेदना का अद्भुत संगम था। उन्होंने सैकड़ों फिल्मों, नाटकों और कविताओं में योगदान दिया। पद्म भूषण, दादा साहेब फाल्के पुरस्कार सहित अनेक सम्मान प्राप्त किए। सौमित्र चटर्जी को भारतीय सिनेमा में कलात्मक अभिनय का मानक स्थापित करने वाला कलाकार माना जाता है।
ज़ेवियर पेरेज़ डी कुईयार (1920)
ज़ेवियर पेरेज़ डी कुईयार संयुक्त राष्ट्र संघ के पाँचवें महासचिव रहे। उन्होंने 1982 से 1991 तक यूएन का नेतृत्व किया और शीत युद्ध के अंतिम दौर में कूटनीतिक संतुलन बनाए रखा। ईरान-इराक युद्ध, अफगान संकट और मध्य अमेरिका में शांति प्रयासों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। वे संवाद, सहमति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रबल समर्थक थे। उनके नेतृत्व में संयुक्त राष्ट्र की वैश्विक विश्वसनीयता बढ़ी। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के इतिहास में उन्हें एक संतुलित और दूरदर्शी नेता के रूप में याद किया जाता है।
कैफ़ी आज़मी (1919)
कैफ़ी आज़मी उर्दू साहित्य और हिंदी सिनेमा के प्रतिष्ठित शायर थे। वे प्रगतिशील लेखक आंदोलन के प्रमुख स्तंभों में शामिल रहे। उनकी शायरी में सामाजिक न्याय, प्रेम, मानवीय संवेदना और क्रांति की आवाज़ गूंजती है। औरत, मकान, दायर जैसे संग्रह अत्यंत चर्चित रहे। फ़िल्मी गीतों में भी उन्होंने गहरी साहित्यिक छाप छोड़ी। कैफ़ी आज़मी ने कविता को जनआंदोलन से जोड़ा और साहित्य को सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाया।
विष्णु सखाराम खांडेकर (1898)
विष्णु सखाराम खांडेकर मराठी साहित्य के महान लेखक थे। उन्हें ययाति उपन्यास के लिए विशेष ख्याति मिली, जो मानव जीवन, नैतिकता और कर्तव्य पर गहन विमर्श करता है। वे ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित हुए। खांडेकर की लेखनी में दर्शन, समाज और संस्कृति का संतुलित समावेश मिलता है। उन्होंने मराठी साहित्य को राष्ट्रीय पहचान दिलाई और भारतीय साहित्य में बौद्धिक गंभीरता का नया आयाम जोड़ा।
जी. सुब्रह्मण्यम अय्यर (1855)
जी. सुब्रह्मण्यम अय्यर भारत के अग्रणी पत्रकार और बुद्धिजीवी थे। उन्होंने द हिंदू समाचार पत्र की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे सामाजिक सुधार, शिक्षा और राष्ट्रीय चेतना के समर्थक थे। उनकी पत्रकारिता तथ्य, तर्क और नैतिकता पर आधारित थी। ब्रिटिश शासन के दौरान उन्होंने प्रेस को जनहित और लोकतांत्रिक मूल्यों का सशक्त माध्यम बनाया। भारतीय पत्रकारिता के इतिहास में उनका स्थान अत्यंत सम्माननीय है।
एडगर एलन पो (1809)
एडगर एलन पो अमेरिकी साहित्य के महान लेखक, कवि और आलोचक थे। उन्हें रहस्य, हॉरर और डिटेक्टिव फिक्शन का जनक माना जाता है। द रैवन, द टेल-टेल हार्ट जैसी रचनाएँ विश्व साहित्य में अमर हैं। उनकी लेखन शैली मनोवैज्ञानिक गहराई और प्रतीकात्मकता से भरपूर थी। पो ने आधुनिक लघुकथा और जासूसी साहित्य की नींव रखी। उनका प्रभाव आज भी वैश्विक साहित्य पर स्पष्ट दिखाई देता है।
जेम्स वाट (1736)
जेम्स वाट स्कॉटलैंड के महान आविष्कारक और यांत्रिक अभियंता थे। उन्होंने भाप इंजन में क्रांतिकारी सुधार कर औद्योगिक क्रांति को गति दी। उनके नाम पर शक्ति की इकाई “वाट” रखी गई। उनके आविष्कारों ने कारखानों, परिवहन और उत्पादन प्रणाली को नई दिशा दी। आधुनिक औद्योगिक समाज के निर्माण में जेम्स वाट की भूमिका ऐतिहासिक और निर्णायक मानी जाती है।

खेल, विज्ञान और राजनीति: 19 जनवरी का वैश्विक प्रभाव

19 जनवरी का इतिहास: विश्व और भारत की प्रमुख घटनाएँ
प्रस्तावना


19 जनवरी इतिहास में राजनीति, विज्ञान, खेल, युद्ध, कूटनीति और समाज से जुड़ी अनेक निर्णायक घटनाओं के लिए जाना जाता है। यह तिथि वैश्विक परिदृश्य में बड़े परिवर्तन और ऐतिहासिक उपलब्धियों की साक्षी रही है। नीचे 19 जनवरी की महत्वपूर्ण घटनाओं का संक्षिप्त लेकिन समग्र विवरण प्रस्तुत है।

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19 जनवरी की प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएँ
2020 – विराट कोहली वनडे क्रिकेट में सबसे तेज़ 5000 रन बनाने वाले कप्तान बने; बेंगलुरु में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ निर्णायक मैच में उपलब्धि। भारत ने 3,500 किमी मारक क्षमता वाली परमाणु सक्षम बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया। दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले ‘केजरीवाल गारंटी कार्ड’ जारी हुआ।
2013 – स्कॉटलैंड के ग्लेन कोए में हिमस्खलन से चार पर्वतारोहियों की मृत्यु।
2010 – पश्चिम बंगाल, बिहार और उड़ीसा ने बीटी बैंगन का विरोध किया; इन राज्यों की कुल उत्पादन में 60% हिस्सेदारी।
2009 – झारखंड में राष्ट्रपति शासन का निर्णय; सूर्यशेखर गांगुली ने पार्श्वनाथ शतरंज खिताब जीता।

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2008 – इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया में समझौता; श्रीलंका में एलटीटीई के 31 उग्रवादी मारे गए।
2007 – जवाहरलाल नेहरू पुरस्कार ओमान के सुल्तान काबूस को देने का निर्णय।
2005 – सानिया मिर्ज़ा ऑस्ट्रेलियन ओपन के तीसरे दौर में पहुँचने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।
2004 – हिमाचल प्रदेश के चंबा ज़िले में बस हादसा, 21 की मौत।
2003 – मिस्र ने इज़रायल संबंधी वार्ता के लिए फ़िलिस्तीनी गुटों को आमंत्रित किया; भारतीय राजनयिक सुधीर व्यास के साथ पाकिस्तान में दुर्व्यवहार।
2002 – परवेज़ मुशर्रफ़ ने पाकिस्तान में गैर-पाकिस्तानी आतंकियों की मौजूदगी से इनकार किया।
2001 – थाईलैंड में रॉक थाई पार्टी को बहुमत; तालिबान पर संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध प्रभावी।

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1986 – पहला कंप्यूटर वायरस ‘सी.ब्रेन’ सक्रिय हुआ।
1981 – अमेरिका-ईरान समझौते के तहत 52 अमेरिकी बंधक रिहा।
1977 – अमेरिका के मियामी में पहली बार बर्फबारी।
1966 – इंदिरा गांधी भारत की तीसरी प्रधानमंत्री चुनी गईं।
1960 – अमेरिका-जापान आपसी सुरक्षा समझौता।
1956 – सूडान अरब लीग का नौवाँ सदस्य बना।
1945 – सोवियत सेना ने पोलैंड की लॉड्ज़ यहूदी बस्ती को नाज़ी कब्ज़े से मुक्त कराया।
1942 – द्वितीय विश्वयुद्ध में जापान ने बर्मा (म्यांमार) पर कब्ज़ा किया।
1938 – स्पेन में बार्सिलोना व वैलेसिया पर बमबारी; जनरल मोटर्स ने डीज़ल इंजन का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू किया।
1927 – ब्रिटेन ने चीन में सेना भेजने का निर्णय लिया।
1905 – बंगला साहित्यकार देवेंद्रनाथ टैगोर का निधन।
1839 – ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने अदन (यमन) पर कब्ज़ा किया।
1649 – इंग्लैंड के राजा चार्ल्स प्रथम के विरुद्ध मुकदमा शुरू हुआ।

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निष्कर्ष
19 जनवरी की घटनाएँ बताती हैं कि यह दिन खेल की उपलब्धियों से लेकर वैश्विक राजनीति, वैज्ञानिक प्रगति और मानवीय संघर्षों तक, इतिहास के कई निर्णायक मोड़ों का साक्षी रहा है।

दोहरीघाट में मौन व्रत, दान-पुण्य और भजन-कीर्तन से सजा पर्व

मौनी अमावस्या पर सरयू स्नान: दोहरीघाट में उमड़ी श्रद्धा की लहर, हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर मऊ जनपद के दोहरीघाट स्थित सरयू नदी के तट पर आस्था का विशाल सैलाब उमड़ पड़ा। तड़के भोर से ही रामघाट, गौरी शंकर घाट और मातेश्वरी घाट पर हजारों श्रद्धालु एकत्र हुए और “हर-हर महादेव” व “जय बजरंगबली” के जयघोष के बीच पवित्र सरयू जल में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मौनी अमावस्या पर सरयू में स्नान करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। आचार्य श्याम पांडे ने बताया कि यह तिथि आत्मशुद्धि, संयम और दान-पुण्य के लिए विशेष मानी जाती है।
पवित्र स्नान के उपरांत श्रद्धालुओं ने सरयू तट स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। भक्तों ने हनुमान जी को फूल-माला, सिंदूर और प्रसाद अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ, जिससे वातावरण भक्तिमय बना रहा।

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मंदिर के पुजारी बबलू पांडे ने बताया कि मौनी अमावस्या पर दान का विशेष महत्व है। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और दक्षिणा दान की। कई भक्तों ने मौन व्रत रखकर भगवान की आराधना की, जो इस तिथि की विशिष्ट परंपरा है।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। क्षेत्राधिकारी घोसी जितेंद्र सिंह और दोहरीघाट थाना प्रभारी संजय त्रिपाठी के निर्देशन में घाटों पर गोताखोरों की तैनाती, पुलिस बल की मुस्तैदी और यातायात व्यवस्था सुनिश्चित की गई। प्रशासनिक सतर्कता के चलते स्नान पर्व शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से संपन्न हुआ। यह आयोजन सरयू तट की धार्मिक महत्ता और श्रद्धालुओं की अटूट आस्था को एक बार फिर उजागर करता है।

अंक ज्योतिष के प्रभावी उपाय जो बदल सकते हैं आपका भाग्य

आज का अंक ज्योतिष: 19 जनवरी 2026


(जन्मतिथि के आधार पर मूलांक व भाग्यांक से दैनिक भविष्यफल)
अंक ज्योतिष (Numerology) के अनुसार जन्म तिथि के अंकों से व्यक्ति का मूलांक और भाग्यांक निकाला जाता है। प्रत्येक मूलांक किसी न किसी ग्रह से जुड़ा होता है, जो व्यक्ति के स्वभाव, सोच, निर्णय क्षमता, करियर, धन, परिवार और स्वास्थ्य पर प्रभाव डालता है।
19 जनवरी 2026 का दिन सभी मूलांकों के लिए अलग-अलग अवसर और चुनौतियाँ लेकर आया है। नीचे जन्मतिथि के अनुसार आज का दैनिक अंक ज्योतिष भविष्यफल, साथ ही सरल और प्रभावी उपाय दिए गए हैं।

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🔢 मूलांक 1 (जन्म तिथि: 1, 10, 19, 28)
ग्रह: सूर्य देव
मूलांक 1 के जातक आज अपने करियर और भविष्य को लेकर गंभीर रहेंगे। युवा वर्ग नौकरी में बदलाव या नई दिशा को लेकर मंथन कर सकता है। पैतृक संपत्ति या घर से जुड़े मामलों में चर्चा संभव है। निर्णय लेते समय जल्दबाजी नुकसानदायक हो सकती है।
उपाय:
नारायण कवच का पाठ करें।
इससे आत्मविश्वास बढ़ेगा और निर्णय क्षमता मजबूत होगी।
🔢 मूलांक 2 (जन्म तिथि: 2, 11, 20, 29)
ग्रह: चंद्र देव
आज रुका हुआ धन या उधार दिया गया पैसा वापस मिलने की संभावना है। इससे आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। भावनाओं पर नियंत्रण रखें और दिनचर्या को व्यवस्थित बनाएं। मानसिक शांति आपको सही दिशा में आगे बढ़ाएगी।
उपाय:
शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाएं।
मन शांत रहेगा और धन लाभ के योग बनेंगे।

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🔢 मूलांक 3 (जन्म तिथि: 3, 12, 21, 30)
ग्रह: बृहस्पति देव
आपकी वाणी और व्यवहार आज लोगों को प्रभावित करेगा। सामाजिक गतिविधियों में मान-सम्मान बढ़ेगा। हालांकि अनजान व्यक्तियों पर अधिक भरोसा करना नुकसान दे सकता है। सलाह लेकर ही किसी सौदे या निवेश में आगे बढ़ें।
उपाय:
सुबह गुरु को प्रणाम करें और
“ॐ गुरवे नमः” मंत्र का जाप करें।
बुद्धि और विवेक मजबूत होगा।
🔢 मूलांक 4 (जन्म तिथि: 4, 13, 22, 31)
ग्रह: राहु
विद्यार्थियों के लिए आज का दिन अनुशासन मांगता है। पढ़ाई में लापरवाही भविष्य पर असर डाल सकती है। सोशल मीडिया और अनावश्यक गतिविधियों से दूरी रखें। यात्रा टालना बेहतर रहेगा।
उपाय:
घर में कोई भी खराब बिजली का उपकरण न रखें।
इससे राहु का नकारात्मक प्रभाव कम होगा।

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🔢 मूलांक 5 (जन्म तिथि: 5, 14, 23)
ग्रह: बुध देव
प्रतियोगी परीक्षाओं या इंटरव्यू से जुड़ी शुभ सूचना मिल सकती है। आज लिया गया निर्णय भविष्य में लाभ देगा, बशर्ते आप पूरी जानकारी के साथ आगे बढ़ें। व्यापार में मार्केटिंग पर ध्यान देना जरूरी है।
उपाय:
दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
बुद्धि तेज होगी और निर्णय सही होंगे।
🔢 मूलांक 6 (जन्म तिथि: 6, 15, 24)
ग्रह: शुक्र देव
आज घर-परिवार और सुख-सुविधाओं पर ध्यान रहेगा। महिलाएं घर की सजावट और व्यवस्था में रुचि लेंगी। संपत्ति विवाद किसी अनुभवी व्यक्ति की मदद से सुलझ सकता है। नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति के संकेत हैं।
उपाय:
मंदिर में दही का दान करें।
सुख-समृद्धि और वैभव में वृद्धि होगी।

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🔢 मूलांक 7 (जन्म तिथि: 7, 16, 25)
ग्रह: केतु
बच्चों की जिद या अनुशासनहीनता चिंता का कारण बन सकती है। धैर्य और समझदारी से काम लें। परिवार के साथ समय बिताने से मानसिक संतुलन बना रहेगा।
उपाय:
बच्चों को खट्टी-मीठी टॉफी दें।
केतु का प्रभाव संतुलित होगा।
🔢 मूलांक 8 (जन्म तिथि: 8, 17, 26)
ग्रह: शनि देव
आज बड़े कारोबारी निर्णय टालना बेहतर रहेगा। प्रॉपर्टी से जुड़ा मामला फाइनल हो सकता है। मशीनरी या तकनीकी खराबी से काम प्रभावित हो सकता है, सतर्क रहें।
उपाय:
बिना कारण किसी पर क्रोध न करें।
शनि दोष शांत होगा।

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🔢 मूलांक 9 (जन्म तिथि: 9, 18, 27)
ग्रह: मंगल देव
नौकरीपेशा लोगों के लिए उपलब्धियों से भरा दिन है। कार्यक्षेत्र में सहयोग मिलेगा। पुराने विवाद या तनाव का समाधान होगा और रिश्तों में मधुरता आएगी।
उपाय:
लाल रंग की वस्तुओं का दान करें।
मंगल की ऊर्जा संतुलित रहेगी।
अंक ज्योतिष का महत्व
अंक ज्योतिष व्यक्ति के जीवन में आने वाली परिस्थितियों को समझने का माध्यम है। सही उपाय अपनाकर नकारात्मक प्रभावों को कम और सकारात्मक परिणामों को बढ़ाया जा सकता है।

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⚠️ डिस्क्लेमर
इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। अधिक जानकारी के लिए योग्य अंक ज्योतिष या ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य लें।
नोट: अंक ज्योतिष में किसी भी त्रुटि के लिए राष्ट्र की परम्परा जिम्मेदार नहीं है।

एसआईआर अभियान के तहत बूथों का निरीक्षण, मतदाता सूची परिष्करण पर जोर

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा नियुक्त रोल प्रेक्षक/मण्डलायुक्त बस्ती मण्डल अखिलेश सिंह एवं जिला निर्वाचन अधिकारी/जिलाधिकारी आलोक कुमार ने जनपद के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के अंतर्गत विशेष अभियान तिथि पर विभिन्न बूथों का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण का उद्देश्य आलेख्य के प्रकाशन के बाद छूटे हुए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने तथा मतदाता सूची को परिष्कृत बनाए रखना रहा।


विशेष अभियान दिवस पर 312-मेंहदावल, 313-खलीलाबाद एवं 314-धनघटा (अ0जा0) विधानसभा क्षेत्रों के कई बूथों का निरीक्षण किया गया। इस क्रम में जूनियर हाई स्कूल खलीलाबाद के बूथ संख्या 401 से 406 तक का निरीक्षण करते हुए बीएलओ से फार्म-6 की प्राप्ति, प्रगति और गुणवत्ता की जानकारी ली गई।
जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी ने प्राथमिक विद्यालय नैनीडीहा (बूथ 380), सियारासाथा (बूथ 375, 376), तामा (बूथ 509, 510), पूर्व माध्यमिक विद्यालय नाथनगर (बूथ 89 से 93), प्राथमिक विद्यालय मुखलिसपुर (बूथ 183, 185), उच्च प्राथमिक विद्यालय प्रजापतिपुर (बूथ 347, 348) एवं प्राथमिक विद्यालय बनिया बारी (बूथ 388) का भी निरीक्षण किया। इस दौरान नाम जोड़ने, संशोधन से संबंधित प्राप्त आवेदनों की बूथवार समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

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निर्वाचन आयोग द्वारा अर्हता तिथि 01 जनवरी 2026 के आधार पर चल रहे इस विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण अभियान की आगामी विशेष तिथियां 31 जनवरी 2026 एवं 01 फरवरी 2026 निर्धारित हैं। निरीक्षण के दौरान प्रत्येक बूथ पर बीएलओ की उपस्थिति की जांच की गई तथा मतदाताओं को सूची पढ़कर सुनाने, प्राप्त दावों एवं आपत्तियों का निस्तारण करने और छूटे हुए पात्र मतदाताओं से प्रपत्र-06 भरवाकर बीएलओ ऐप पर डिजिटाइजेशन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही अभियान में गुणवत्ता और यथार्थता पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।