Saturday, June 13, 2026
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कागजों में साफ-सफाई, हकीकत में गंदगी: ग्राम पंचायत व्यवस्था पर सवाल

सफाईकर्मियों की नदारदी से हथिनी गांव में गंदगी का संकट, ग्रामीणों ने चलाया स्वच्छता अभियान, सरकारी व्यवस्था पर उठे सवाल

धीरेन्द्र त्रिपाठी


मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के कोपागंज विकास खंड अंतर्गत ग्राम सभा हथिनी में तैनात सफाईकर्मियों की लगातार अनुपस्थिति के कारण गांव में गंभीर स्वच्छता संकट उत्पन्न हो गया है। गांव की प्रमुख गलियां, सार्वजनिक घाट और नालियां लंबे समय से साफ न होने के चलते कूड़ा-करकट से भर गई हैं। जगह-जगह फैली गंदगी और जलभराव से दुर्गंध फैल रही है, जिससे ग्रामीणों का दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। हालात इतने खराब हो गए हैं कि कई गलियों से होकर गुजरना भी मुश्किल हो गया है।

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ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद सफाई व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ। मजबूर होकर गांव के लोगों ने स्वयं मोर्चा संभाला और श्रमदान के माध्यम से सफाई अभियान शुरू किया। झाड़ू, फावड़ा और अन्य साधनों से ग्रामीणों ने गलियों, घाटों और नालियों की सफाई कर कूड़े को हटाया। इस अभियान में दिनेश त्रिपाठी, सोनू राय, विनोद, बिरजू तिवारी सहित अनेक ग्रामीणों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।

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ग्रामीणों का आरोप है कि सफाईकर्मी महीनों से गांव में दिखाई नहीं देते, जबकि सरकारी अभिलेखों में नियमित सफाई दर्ज की जा रही है। इससे न केवल ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं, बल्कि स्वच्छ भारत मिशन जैसी योजनाओं की जमीनी हकीकत भी उजागर हो रही है। गंदगी के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बना हुआ है। बच्चों और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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इस मामले में खंड विकास अधिकारी चंद्रशेखर कुशवाहा ने बताया कि यह प्रकरण उनके संज्ञान में नहीं था। उन्होंने आश्वासन दिया कि शिकायत की जांच कराई जा रही है और दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही नियमित सफाई व्यवस्था बहाल करने के निर्देश दिए जाएंगे।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव में नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए, सफाईकर्मियों की उपस्थिति की निगरानी हो और लापरवाह कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा न उत्पन्न हो।

रांची में अंश–अंशिका अपहरण कांड का बड़ा खुलासा, 13 आरोपी गिरफ्तार, 12 बच्चे बरामद


राँची (राष्ट्र की परम्परा)।झारखंड में बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। राजधानी रांची के धुर्वा मौसीबाड़ी क्षेत्र से 2 जनवरी को रहस्यमय ढंग से लापता हुए बालक अंश कुमार और अंशिका कुमारी के अपहरण मामले में पुलिस ने बड़े बच्चा चोर गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि 12 बच्चों को सकुशल बरामद किया गया है।

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पुलिस जांच में सामने आया है कि यह केवल एक अपहरण की घटना नहीं, बल्कि बच्चों की खरीद-फरोख्त, भीख मंगवाने, देह व्यापार और अपराध की दुनिया में बच्चों को इस्तेमाल करने वाले संगठित नेटवर्क का हिस्सा था। यह गिरोह झारखंड के साथ-साथ बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और उत्तर प्रदेश तक फैला हुआ है।
झारखंड पुलिस महानिदेशक के निर्देशन में गठित विशेष जांच दल (SIT) ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए राज्य के अलग-अलग जिलों में छापेमारी अभियान चलाया। रांची पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान डीजीपी ने स्वीकार किया कि राज्य में बच्चा चोरी जैसे संगठित अपराध सक्रिय हैं और इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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धुर्वा थाना परिसर में एसएसपी राकेश रंजन ने मीडिया को बताया कि प्रारंभिक जांच में “गुलगुलिया गैंग” नामक गिरोह इस पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था। गिरोह के महिला और पुरुष सदस्य योजनाबद्ध तरीके से छोटे बच्चों को अगवा कर अलग-अलग स्थानों पर छिपाकर रखते थे। पूछताछ में आरोपियों ने सीमावर्ती राज्यों में भी इसी तरह की वारदातों में शामिल होने की बात कबूल की है।

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पुलिस के अनुसार, अब तक 15 अभियुक्तों की पहचान हो चुकी है, जिनमें से 13 को गिरफ्तार किया जा चुका है। शेष की तलाश जारी है। साथ ही यह भी आशंका जताई गई है कि इस नेटवर्क में और लोग शामिल हो सकते हैं तथा अन्य बच्चों की बरामदगी भी संभव है। SIT वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में लगातार जांच कर रही है।
यह मामला न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि समाज के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है। पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

रामकथा से समाज में कैसे जागृत होती है भक्ति और संस्कार चेतना

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)।श्रीराम को पाने के लिए मनु और शतरूपा को तेईस हजार वर्षों तक कठोर तपस्या करनी पड़ी, तब जाकर भगवान श्रीनारायण ने राम रूप में धरती पर अवतार लिया। यह मार्मिक और गूढ़ प्रसंग मानस के प्रकांड विद्वान किशोरी शरण जी महाराज ने मऊ नगर की सिंधी कॉलोनी स्थित श्री दक्षिणेश्वर हनुमान मंदिर के वार्षिकोत्सव एवं श्रीराम कथा के दौरान भक्तों के समक्ष रखा। श्रीराम जन्म के पावन अवसर पर उनकी वाणी से निकली कथाओं ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।

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किशोरी शरण जी महाराज ने कहा कि मनु-शतरूपा की दीर्घ तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान श्रीनारायण ने यह वरदान दिया कि वे स्वयं उनके पुत्र रूप में जन्म लेंगे। इसी क्रम में अयोध्या नरेश महाराज दशरथ के घर भगवान श्रीराम का अवतार हुआ। केवल देवता ही नहीं, बल्कि बंदर, भालू और समस्त देवी-देवता भी विभिन्न रूपों में इस लीला में सहभागी बने। यह प्रसंग सुनते ही श्रद्धालुओं के नेत्र सजल हो उठे और पूरा वातावरण भक्ति से सराबोर हो गया।
श्रीराम लला के प्रकट होते ही मंदिर परिसर “भए प्रकट कृपाला दीन दयाला कौशल्या हितकारी” भजन से गूंज उठा। भक्तजन झूमते-नाचते हुए राम जन्मोत्सव की बधाइयां देने लगे। वृद्ध, युवा और युवतियां सभी सुध-बुध खोकर भाव-विह्वल हो उठे। व्यास पीठ से बधाई और पारंपरिक सोहर गीतों की प्रस्तुति हुई, जिस पर श्रद्धालुओं ने खुले मन से धन न्योछावर किया।

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कार्यक्रम के दौरान मंदिर के पुजारी नागराज रामाशीष चौबे, कमल कुमार और छवि श्याम शर्मा ने सभी श्रद्धालुओं का स्वागत और अभिनंदन किया। आरती में आर.के. सिंह, अरुण कुमार, पुनीत श्रीवास्तव, डॉ. रामगोपाल गुप्त, कपिल खंडेलवाल, राजकुमार खंडेलवाल, वीरू बाबू सहित अनेक गणमान्य लोग शामिल रहे। इसके अतिरिक्त कैलाश चंद जायसवाल, चंद्रशेखर अग्रवाल ‘चंदू’, अमित शर्मा, विनोद गुप्ता, मनीष मद्धेशिया, आनंद गुप्ता, बब्बन सिंह, अनिल शर्मा, धनेश कुमार, शिवधर यादव समेत बड़ी संख्या में भक्तों ने श्रीराम कथा का श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
श्री दक्षिणेश्वर हनुमान मंदिर का यह वार्षिकोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि रामभक्ति, संस्कार और भारतीय परंपरा को सुदृढ़ करने वाला आयोजन भी सिद्ध हुआ।

चुनाव टिकट: साक्षात्कार

चुनाव के टिकट पाने के लिए एक
नेता पुत्र का साक्षात्कार हो रहा था,
उनसे जब पूछा गया, तुम कौन हो,
उसने कहा सर्वशक्तिमान नेता पुत्र।

दूसरा प्रश्न तुम्हारे जीवन का उद्देश्य,
उत्तर दे वो बोला, येन केन प्रकारेण
दौलत, सुख, समृद्धि व अपार शक्ति
अर्जित कर के बाहुबली बन जाना।

आपके जन्मने का क्या कारण है,
जन्म लेकर धरती पर राज्य करना,
आप जन्म मरण से मुक्त कैसे होगे,
जोड़ तोड़ करके सत्ता हासिल करके।

जीते जी अपनी मूर्ति लगवा लूँगा,
फिर मरने के बाद भी अमर रहूँगा,
अगला यक्ष प्रश्न कि ईश्वर कौन है,
वह जो सत्ता तक पहुँचाये, कुर्सी दे।

और संसार में दुःखी कौन होता है,
वह जो सत्ता व कुर्सी से दूर होता है,
और भाग्य किसे कहते हैं, जिताऊ
पार्टी का नेता और फिर मंत्री बनना।

जीवन में सच्चा प्रेम कहाँ मिलता है,
सीधी सी बात है सत्ता की कुर्सी पर,
दुर्भाग्य का सबसे बड़ा कारण क्या,
हाई कमान की कृपा से वंचित रहना।

धरती से ज़्यादा वजनदार क्या है,
मलाईदार कुर्सी व रिश्वत का माल,
तो हवा से भी तेज क्या है, अफ़वाह,
सबसे धीमी चाल, सरकारी फ़ाइल।

सबसे ज़्यादा ऊँचाई किसकी होती है
सिफ़ारिश और उससे मिली नौकरी,
तिनके से भी हल्का क्या होता है,
चुनाव के बाद मतदाता और जनता।

तो राजनीति में त्यागने वाली चीज़
क्या है ? शर्म अर्थात् बेशर्म होना,
सबसे आश्चर्य? फ़ाइल पर वजन
बढ़वाकर भी काम पूरा न करना।

कभी जेल गये हो, हाँ एक बार,
किस जुर्म में, स्कूटर में तीन लोग
घूमने जा रहे थे, सिपाही ने रोका,
हमने सिपाही की पिटाई कर दी।

आपको टिकट क्यों दिया जाय,
क्योंकि मैं समाजसेवा करूँगा,
अभी क्या कर रहे हो, समाजसेवा,
तो करते रहो टिकट क्या करोगे ?

टिकट पाकर चुनाव लड़ूँगा और
चुनाव जीतकर एम एल ए बनूँगा,
मंत्री बनूँगा, समाजसेवा करूँगा,
वो तो अभी भी कर रहे हो भाई।

अब आख़िरी प्रश्न कि राजनीति में
कौन सगा और अपना कौन होता है,
बहुत ही लाजवाब उत्तर कि राजनीति
में कोई सगा या अपना नहीं होता है।

पत्नी के ख़िलाफ़ स्वयं पतिदेव,
पिता के ख़िलाफ़ पुत्र, पुत्री और
भाई के ख़िलाफ़ भाई, और माँ के
ख़िलाफ़ आदित्य बेटा भी होता है।

हाँ, यह बात अलग है कि हमसब
अंदर खाने एक भी हो सकते हैं,
और राजनीति में तो कोई किसी का
न मित्र और न स्थायी शत्रु होता है।

विद्यावाचस्पति डॉ. कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’

घुघली ब्लॉक में अवैध दवा दुकानों का जाल, बिना लाइसेंस बिक्री से स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद महराजगंज के घुघली ब्लॉक में नियम-कानूनों को ताक पर रखकर बिना वैध लाइसेंस दवा दुकानों का संचालन किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। प्रमुख चौराहों और बाजारों में धड़ल्ले से चल रही ये दुकानें न केवल औषधि एवं ड्रग एक्ट का उल्लंघन हैं, बल्कि आम नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन के साथ खुला खिलवाड़ भी कर रही हैं।

स्थानीय नागरिकों के अनुसार, बीते लंबे समय से इन दुकानों पर बिना फार्मेसी लाइसेंस और प्रशिक्षित फार्मासिस्ट के दवाओं की खुलेआम बिक्री की जा रही है। नियमों के विपरीत बिना डॉक्टर की पर्ची के एंटीबायोटिक, दर्द निवारक, बुखार, एलर्जी और अन्य संवेदनशील दवाएं आसानी से उपलब्ध करा दी जाती हैं, जिससे मरीजों की सेहत पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बिना लाइसेंस दवा बिक्री से गलत दवा, गलत मात्रा और एक्सपायरी दवाएं दिए जाने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। खासकर एंटीबायोटिक दवाओं का अनियंत्रित उपयोग भविष्य में दवा प्रतिरोधक क्षमता (एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस) जैसी गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकता है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा है।

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स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस अवैध कारोबार की शिकायतें कई बार स्वास्थ्य विभाग और औषधि निरीक्षक तक पहुंचाई गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। विभागीय चुप्पी को लेकर लोगों में गहरी नाराजगी है और सवाल उठ रहे हैं कि आखिर किनके संरक्षण में ये अवैध दवा दुकानें संचालित हो रही हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इन दुकानों पर सख्ती नहीं की गई तो किसी बड़ी अनहोनी से इंकार नहीं किया जा सकता। जनहित को ध्यान में रखते हुए लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल जांच अभियान चलाकर बिना लाइसेंस संचालित दवा दुकानों को बंद कराया जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

आम जनता का साफ कहना है कि स्वास्थ्य से जुड़ा यह मामला अत्यंत संवेदनशील है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही जनता की जान पर भारी पड़ सकती है। प्रशासनिक सख्ती और नियमित निगरानी से ही ऐसे अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।

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मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान के तहत पुलिस ने किया आमजन से संवाद, दिलाया सुरक्षा का भरोसा

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)पुलिस अधीक्षक देवरिया संजीव सुमन के निर्देशन में जनपद में शांति, सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाए रखने के उद्देश्य से प्रातः 05:00 बजे से 08:00 बजे तक जनपद भर में “मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान” चलाया गया।इस अभियान के अंतर्गत समस्त थाना प्रभारी/थानाध्यक्षों द्वारा मॉर्निंग वॉक पर निकले नागरिकों से सीधा संवाद स्थापित किया गया तथा उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिलाया गया। अभियान का मुख्य उद्देश्य सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देना, मित्र पुलिसिंग की भावना को सुदृढ़ करना तथा छोटे-मोटे विवादों का मौके पर ही समाधान करना रहा।चेकिंग अभियान के दौरान संदिग्ध व्यक्तियों एवं वाहनों की सघन जांच की गई। इस दौरान चोरी की गाड़ियों की तलाश, तीन सवारी चलने वालों के विरुद्ध कार्रवाई, मॉडिफाइड साइलेंसर वाले दुपहिया वाहनों का चालान, नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने तथा दोपहिया पर तीन सवारी के मामलों में कार्रवाई की गई। साथ ही अवैध असलहा एवं मादक पदार्थों पर भी विशेष निगरानी रखी गई।पुलिस द्वारा आमजन को मार्निंग वॉकर अभियान के उद्देश्यों से अवगत कराया गया, जिस पर नागरिकों ने पुलिस की इस पहल की सराहना करते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर संतोष व्यक्त किया।
अभियान के दौरान जनपद के कुल 14 स्थानों पर चेकिंग करते हुए 262 व्यक्तियों एवं 143 वाहनों की जांच की गई।जनपदीय पुलिस द्वारा ऐसे अभियानों को निरंतर जारी रखते हुए आमजन की सुरक्षा, शांति एवं विश्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

Spain Train Accident: कोर्डोबा में दो हाई-स्पीड ट्रेनों की आमने-सामने टक्कर, 21 की मौत

मैड्रिड/कोर्डोबा (राष्ट्र की परम्परा)। दक्षिणी स्पेन में रविवार (18 जनवरी 2026) को एक दर्दनाक रेल हादसा हुआ, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। कोर्डोबा प्रांत के एडामुज स्टेशन के पास दो हाई-स्पीड ट्रेनों की आमने-सामने टक्कर में कम से कम 21 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य यात्री गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार यह हादसा हाल के वर्षों में स्पेन की सबसे भयावह रेल दुर्घटनाओं में शामिल है।

स्पेन की रेल अवसंरचना संस्था ADIF के मुताबिक यह दुर्घटना शाम करीब 5:40 बजे (GMT) हुई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मालागा से मैड्रिड जा रही Iryo 6189 हाई-स्पीड ट्रेन अचानक पटरी से उतरकर पास के ट्रैक पर चली गई। इसी दौरान सामने से आ रही मैड्रिड से हुएलवा जा रही हाई-स्पीड ट्रेन से उसकी जोरदार टक्कर हो गई।

बुरी तरह डिरेल हुईं दोनों ट्रेनें

टक्कर के बाद दोनों ट्रेनें बुरी तरह से डिरेल हो गईं। कई डिब्बे पटरी से नीचे गिर गए, जबकि कुछ एक-दूसरे के ऊपर चढ़ गए। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यात्रियों को निकालने के लिए भारी बचाव मशीनों और विशेष उपकरणों का इस्तेमाल करना पड़ा।

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हाई-स्पीड रेल सेवाओं पर तत्काल रोक

दुर्घटना के बाद मैड्रिड और अंडालूसिया के बीच सभी हाई-स्पीड रेल सेवाओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। हालांकि मैड्रिड से टोलेडो, सियुदाद रियल और पुएर्तोलानो के बीच चलने वाली व्यावसायिक रेल सेवाएं सामान्य रूप से जारी हैं।
बताया गया है कि Iryo एक निजी हाई-स्पीड रेल ऑपरेटर है, जिसका संचालन एक इटालियन कंपनी द्वारा किया जाता है।

राहत और बचाव कार्य जारी

अंडालूसिया की आपातकालीन सेवाओं के अनुसार हादसे के तुरंत बाद सभी रेल यातायात रोक दिए गए और बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। मौके पर कई एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और मेडिकल टीमें भेजी गईं। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, हालांकि अब तक घायलों की सटीक संख्या को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

स्पेन के राजा ने जताया शोक

इस दर्दनाक हादसे पर स्पेन के राजा फेलिपे VI और महारानी लेटिज़िया ने गहरा दुख व्यक्त किया है। शाही महल की ओर से जारी बयान में कहा गया कि एडामुज के पास दो हाई-स्पीड ट्रेनों की टक्कर की खबर से पूरा देश स्तब्ध है।

यह हादसा ऐसे समय हुआ है, जब हाल ही में थाईलैंड में भी एक बड़ी ट्रेन दुर्घटना सामने आई थी, जिसमें क्रेन गिरने से ट्रेन डिरेल हो गई थी और कई लोगों की जान चली गई थी।

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Jharkhand Bus Accident: लातेहार में बारात की बस पलटी, 9 की मौत, 80 घायल

लातेहार/झारखंड (राष्ट्र की परम्परा)। झारखंड के लातेहार जिले में रविवार (18 जनवरी) को एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। बारात लेकर जा रही एक बस के पलट जाने से कम से कम 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि 80 से अधिक यात्री घायल हो गए। यह हादसा महुआडांड़ थाना क्षेत्र के ओरसा बंगलाधारा घाटी में हुआ, जहां बस अनियंत्रित होकर पलट गई।

पुलिस अधीक्षक कुमार गौरव के अनुसार, बस छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से बारात लेकर महुआडांड़ आ रही थी। हादसे में पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जिनमें चार महिलाएं शामिल हैं। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया।

इलाज के दौरान चार और मौतें

एक अन्य अधिकारी ने बताया कि लातेहार अस्पताल में इलाज के दौरान दो लोगों की मौत हो गई, जबकि गुमला सदर अस्पताल में भी दो घायलों ने दम तोड़ दिया। गुमला के सिविल सर्जन शंभूनाथ चौधरी के अनुसार, नौ घायलों को सदर अस्पताल रेफर किया गया था, जिनमें से दो को मृत घोषित कर दिया गया।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जताया शोक

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लातेहार के उपायुक्त को घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

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80 घायल, 32 की हालत गंभीर

उपमंडल अधिकारी विपिन कुमार दुबे ने बताया कि 60 घायलों को महुआडांड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में और 20 से अधिक को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्होंने कहा कि गंभीर रूप से घायल 32 लोगों को बेहतर इलाज के लिए रांची स्थित रिम्स भेजा जा रहा है।

मृतकों की पहचान

मृतकों की पहचान रेशांति देवी (35), प्रेमा देवी (37), सीता देवी (45), सोनमती देवी (55), सुखना भुइयां (40) और विजय भुइयां के रूप में हुई है। लातेहार अस्पताल में मृत एक महिला की पहचान अभी की जा रही है।

ब्रेक फेल होना हादसे की वजह

बस चालक विकास पाठक ने बताया कि बस में करीब 90 यात्री सवार थे। चालक के अनुसार, बस के ब्रेक फेल हो गए थे। हैंडब्रेक लगाने और इंजन बंद करने के बावजूद बस पर नियंत्रण नहीं पाया जा सका और अंततः बस पलट गई।

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जानिए पीएम आवास योजना शहरी 2.0 के लाभ, पात्रता और आवेदन प्रक्रिया

पीएम आवास योजना शहरी 2.0: महाराजगंज में 250 लाभार्थियों को मिले स्वीकृति पत्र, खातों में पहुंची अनुदान राशि


महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के अंतर्गत शहरी क्षेत्र के जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी सौगात सामने आई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ से प्रदेशभर के लगभग दो लाख पात्र लाभार्थियों के बैंक खातों में एक क्लिक से करीब 2000 करोड़ रुपये की अनुदान राशि सीधे अंतरित की। इस पहल से हजारों गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के पक्के मकान का सपना साकार होने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा है।

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लखनऊ में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने 10 लाभार्थियों को प्रतीकात्मक रूप से स्वीकृति पत्र प्रदान किए। इसके साथ ही उन्होंने विभिन्न जिलों के लाभार्थियों से फोन पर संवाद कर उनके अनुभव, समस्याएं और सुझाव भी सुने। इस कार्यक्रम का सजीव प्रसारण महराजगंज कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला स्तरीय समारोह में दिखाया गया, जहां बड़ी संख्या में लाभार्थी उपस्थित रहे।
जिला स्तरीय कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाधिकारी ने की। इस अवसर पर जनपद महराजगंज में कुल 4353 पात्र लाभार्थियों के सापेक्ष प्रथम चरण में 250 लाभार्थियों को प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के स्वीकृति पत्र वितरित किए गए। स्वीकृति पत्र मिलते ही लाभार्थियों के चेहरों पर खुशी साफ झलकने लगी। कई लाभार्थियों ने इसे अपने जीवन का ऐतिहासिक और यादगार दिन बताया।
कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी ने उपस्थित लोगों को बाल विवाह मुक्त भारत के निर्माण की शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और जिम्मेदारी को भी बढ़ावा देना है। समाज से कुरीतियों को समाप्त करने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं, तभी विकास की योजनाएं अपने वास्तविक लक्ष्य तक पहुंच पाएंगी।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र कुमार सिंह, अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) नवनीत गोयल, परियोजना अधिकारी डूडा प्रेम शंकर पांडेय, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष कृष्ण गोपाल जायसवाल सहित अन्य अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में लाभार्थी मौजूद रहे। पूरे आयोजन के दौरान उत्साह, विश्वास और संतोष का माहौल बना रहा। स्पष्ट है कि पीएम आवास योजना शहरी 2.0 गरीबों और जरूरतमंदों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है।

Dungarpur News: मांडव गांव में प्रेमी युगल के शव पेड़ से लटके मिले, एक ही गोत्र के थे दोनों नाबालिग

डूंगरपुर/राजस्थान (राष्ट्र की परम्परा)। डूंगरपुर जिले के वरदा थाना क्षेत्र के मांडव गांव में रविवार को एक हृदयविदारक घटना सामने आई। गांव के सांगेला तालाब के पास जंगल में एक पेड़ पर प्रेमी युगल के शव लटके हुए मिले। दोनों मृतक नाबालिग बताए जा रहे हैं और एक ही गोत्र से संबंध रखते थे। पुलिस के अनुसार दोनों 1 जनवरी से लापता थे।

सूचना मिलने पर वरदा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल की फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी करवाई गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि शव करीब दो सप्ताह पुराने हैं, जिसके कारण क्षेत्र में दुर्गंध फैल रही थी।

परिजनों की मौजूदगी में उतारे गए शव

वरदा थानाधिकारी मोहम्मद रिजवान खान ने बताया कि शवों की पहचान होने के बाद परिजनों को सूचना दी गई। परिजनों की मौजूदगी में दोनों शवों को पेड़ से उतारकर सागवाड़ा अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया।

शादी की इच्छा और गोत्र बना बाधा

पुलिस की प्रारंभिक जांच और पूछताछ में सामने आया है कि दोनों नाबालिग एक-दूसरे से प्रेम करते थे और शादी करना चाहते थे, लेकिन एक ही गोत्र होने के कारण परिजन विवाह के लिए सहमत नहीं थे। इसी कारण दोनों 1 जनवरी को घर से निकल गए थे और इसके बाद से उनका कोई पता नहीं चल पाया।

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हर पहलू से जांच में जुटी पुलिस

फिलहाल पुलिस मामले को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत मानते हुए सभी पहलुओं से जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि यह मामला आत्महत्या का है या इसके पीछे कोई अन्य कारण मौजूद है।

गुप्त नवरात्रि हिंदू धर्म में श्रद्धा, साधना और आध्यात्मिक उत्कर्ष का एक विशेष पर्व

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)

गुप्त नवरात्रि हिंदू धर्म में श्रद्धा, साधना और आध्यात्मिक उत्कर्ष का एक विशेष पर्व है। इसे “शाक्त परंपरा” का अत्यंत महत्वपूर्ण उत्सव माना जाता है, जिसमें भक्त देवी के नौ रूपों की आराधना पूरे मन, भक्ति और एकाग्रता के साथ करते हैं। सामान्यतः वर्ष में दो नवरात्रि—चैत्र और शारदीय—प्रमुख होते हैं, लेकिन इन दोनों के अतिरिक्त वर्ष में दो बार गुप्त नवरात्रि भी पड़ती हैं, जिन्हें साधना, तंत्र और विशेष उपासना से जुड़े साधक अधिक महत्व देते हैं। गुप्त नवरात्रियां प्रायः माघ मास और आषाढ़ मास में मनाई जाती हैं।
गुप्त नवरात्रि का अर्थ ही है—ऐसी नवरात्रि जिसमें साधना गोपनीय रहती है। ये उत्सव आम जनमानस में उतना लोकप्रिय नहीं होते, क्योंकि इन दिनों की पूजा-विधि सामान्य नवरात्रि जैसी नहीं होती। इसमें साधक माता के दशमहाविद्या स्वरूपों की उपासना करते हैं। यह काल साधना, मंत्र-जप, ध्यान, तंत्र-सिद्धि और साधक के आत्म-शोधन का समय माना जाता है। माना जाता है कि इस अवधि में की गई साधनाएँ शीघ्र फलदायी होती हैं और साधक को मानसिक, आध्यात्मिक तथा आधिदैविक शक्तियों का अनुभव कराती हैं।
यह पर्व हमें बताता है कि साधना केवल बाहरी दिखावे का साधन नहीं, बल्कि आत्मिक शक्ति का सृजन है। जहां शारदीय और चैत्र नवरात्रि में घर-घर में पूजा, जगराता, कन्या-पूजन और सार्वजनिक आयोजन होते हैं, वहीं गुप्त नवरात्रि में शांति, संयम और गोपनीय उपासना का महत्व अधिक होता है। इन दिनों ब्रह्मचर्य, सात्त्विक भोजन, संकल्प, स्वच्छता और नियम पालन अनिवार्य माना जाता है। साधक सुबह और शाम देवी के मंत्रों का जप करते हैं और यथाशक्ति हवन, तंत्र-मंत्र साधना और ध्यान से अपने मन को स्थिर करते हैं। गुप्त नवरात्रि की विशेषता यह भी है कि इसमें देवी दुर्गा ही नहीं, बल्कि महाकाली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला—इन दस महाविद्याओं का विशेष पूजन होता है। ऐसा माना जाता है कि इन देवियों की उपासना से साधक जीवन की बाधाओं, नकारात्मक ऊर्जा, भय और मानसिक तनाव से मुक्ति पाता है। साथ ही आत्मविश्वास, इच्छाशक्ति और आध्यात्मिक जागरूकता में वृद्धि होती है। गुप्त नवरात्रि यह संदेश देती है कि शक्ति बाहर नहीं, भीतर है। हमें अपनी चेतना को जागृत करना है और अपनी कमजोरियों पर विजय प्राप्त करना है। यह काल आत्मनिरीक्षण,आत्मसाधना और अपनी आध्यात्मिक यात्रा को गति देने का श्रेष्ठ समय माना गया है। इस प्रकार गुप्त नवरात्रि केवल पूजा-अर्चना का पर्व नहीं, बल्कि आत्मिक शक्ति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग है, जो साधक को शक्ति, शांति और सिद्धि—तीनों का अनुभव कराता है।

ईश्वर की अनुभूति का नाम है अध्यात्म

कैलाश सिंह
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।अध्यात्म कोई दिखावा नहीं, न ही केवल पूजा-पाठ या कर्मकांड का नाम है। अध्यात्म वह सूक्ष्म अनुभूति है, जिसमें मनुष्य अपने भीतर ईश्वर की उपस्थिति को महसूस करता है। जब बाहरी संसार का शोर शांत होने लगता है और अंतरात्मा की आवाज सुनाई देने लगती है, तभी अध्यात्म का वास्तविक अर्थ समझ में आता है। सच कहा जाए तो ईश्वर की अनुभूति का नाम ही अध्यात्म है।
आज का मनुष्य विज्ञान, तकनीक और भौतिक सुख-सुविधाओं के शिखर पर तो पहुंच गया है, लेकिन आंतरिक शांति उससे कोसों दूर होती जा रही है। तनाव, अवसाद, हिंसा और असंतोष की बढ़ती घटनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि केवल बाहरी विकास से जीवन पूर्ण नहीं होता। अध्यात्म मनुष्य को यह बोध कराता है कि सच्चा सुख बाहर नहीं, भीतर निहित है।ईश्वर किसी एक मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर या गुरुद्वारे तक सीमित नहीं है। वह करुणा में है, सेवा में है, सत्य में है और प्रेम में है। जब व्यक्ति दूसरों के दुःख में सहभागी बनता है, अन्याय के विरुद्ध खड़ा होता है और अहंकार का त्याग करता है, तभी उसे ईश्वर की अनुभूति होती है। यही अनुभूति आध्यात्म का वास्तविक स्वरूप है।
आध्यात्म व्यक्ति को आत्मसंयम, सहिष्णुता और नैतिकता की राह दिखाता है। यह मनुष्य को मैं से हम की ओर ले जाता है। आध्यात्म से उपजा विवेक न केवल व्यक्ति के जीवन को संतुलित बनाता है, बल्कि समाज में समरसता और सौहार्द की भावना को भी मजबूत करता है। बिना अध्यात्म के समाज दिशाहीन हो जाता है और मूल्यों का क्षरण होने लगता है।
भारतीय संस्कृति में ऋषि-मुनियों और संतों ने आध्यात्म को जीवन का आधार बताया है। उपनिषदों का आत्मबोध, गीता का कर्मयोग और संत परंपरा का प्रेम-मार्ग—सभी का सार यही है कि ईश्वर को पाने के लिए स्वयं को जानना आवश्यक है। जब मन निर्मल होता है और चित्त स्थिर, तभी ईश्वर की अनुभूति संभव होती है।
आज आवश्यकता इस बात की है कि हम आध्यात्म को जीवन व्यवहार में उतारें। ध्यान, योग, सेवा, सत्य और सदाचार को अपनाकर ही हम भीतर के ईश्वर से साक्षात्कार कर सकते हैं। आध्यात्म पलायन नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने की प्रक्रिया है।
अंततः कहा जा सकता है कि आध्यात्म ही वह प्रकाश है, जो मनुष्य को अंधकार से उजाले की ओर ले जाता है। ईश्वर की अनुभूति जब जीवन का आधार बन जाती है, तभी मनुष्य वास्तव में मानव बनता है।

विराट के शतक पर भारी पड़ा हर्षित राणा का विकेट, इंदौर में भारत हारा सीरीज 2-1 से गंवाई

इंदौर (राष्ट्र की परम्परा)। इंदौर के होल्कर स्टेडियम में खेले गए भारत बनाम न्यूजीलैंड तीसरे और निर्णायक वनडे में भारतीय क्रिकेट फैंस को बड़ा झटका लगा। टीम इंडिया को 41 रन से हार का सामना करना पड़ा और इसके साथ ही न्यूजीलैंड ने वनडे सीरीज 2-1 से अपने नाम कर ली। यह पहला मौका है जब न्यूजीलैंड ने भारत को उसी के घर में वनडे सीरीज में हराया है।

विराट कोहली की शानदार शतकीय पारी के बावजूद भारतीय टीम लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी। इस मुकाबले का असली टर्निंग पॉइंट विराट का विकेट नहीं, बल्कि उससे पहले हर्षित राणा का आउट होना साबित हुआ, जिसने मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया।

विराट कोहली ने जगाई जीत की उम्मीद

338 रन के बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत की शुरुआत बेहद खराब रही। कप्तान रोहित शर्मा 11 और शुभमन गिल 23 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। मुश्किल हालात में विराट कोहली ने एक छोर संभाला और दबाव में शानदार बल्लेबाजी करते हुए वनडे करियर का 54वां शतक जड़ा। विराट ने 108 गेंदों में 124 रन बनाए, जिसमें 10 चौके और 3 छक्के शामिल रहे।

हर्षित राणा के साथ बदला मैच का माहौल

जब भारत का स्कोर 178/6 था और हार तय नजर आ रही थी, तभी हर्षित राणा ने मैदान पर आकर खेल का रुख बदल दिया। उन्होंने सिर्फ 41 गेंदों में अर्धशतक जड़ा और विराट कोहली के साथ सातवें विकेट के लिए 99 रन की साझेदारी की। इस साझेदारी से स्टेडियम में मौजूद दर्शकों में जीत की उम्मीद जाग उठी और न्यूजीलैंड के खिलाड़ी दबाव में नजर आने लगे।

हर्षित का विकेट बना असली टर्निंग पॉइंट

मैच का निर्णायक मोड़ 44वें ओवर में आया, जब हर्षित राणा 52 रन बनाकर आउट हो गए। इसके तुरंत बाद मोहम्मद सिराज बिना खाता खोले आउट हो गए और सारा दबाव विराट कोहली पर आ गया। जल्द ही विराट भी बड़ा शॉट खेलने के प्रयास में बाउंड्री पर कैच आउट हो गए। यहीं से भारत की जीत की सारी उम्मीदें खत्म हो गईं।

न्यूजीलैंड की मजबूत बल्लेबाजी

इससे पहले न्यूजीलैंड ने डेरिल मिचेल (137 रन) और ग्लेन फिलिप्स (106 रन) की शानदार पारियों की बदौलत 8 विकेट पर 337 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। दोनों के बीच 219 रन की रिकॉर्ड साझेदारी हुई। भारत की ओर से अर्शदीप सिंह और हर्षित राणा ने 3-3 विकेट लिए।
जवाब में भारतीय टीम 296 रन पर सिमट गई और मैच के साथ-साथ वनडे सीरीज भी गंवा बैठी।

मतदाता सूची शुद्धिकरण अभियान: डीएम दीपक मीणा ने बूथों का औचक निरीक्षण कर परखी बीएलओ की उपस्थिति

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। मतदाता सूची को शुद्ध, अद्यतन और त्रुटिरहित बनाए रखने के उद्देश्य से जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी दीपक मीणा ने गोरखपुर शहर विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न मतदान केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्वयं मौके पर पहुंचकर यह जांच की कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) निर्धारित समय पर अपने-अपने बूथों पर उपस्थित हैं या नहीं।

जिलाधिकारी ने बताया कि मतदाता सूची से जुड़े सभी कार्यों—नए मतदाताओं का पंजीकरण, मृतक मतदाताओं के नाम विलोपन, स्थायी रूप से अन्यत्र चले गए मतदाताओं के नाम हटाना तथा नाम, पता, आयु और फोटो में संशोधन—के लिए बीएलओ की बूथ पर उपस्थिति अनिवार्य है। इन निर्देशों के अनुपालन की वास्तविक स्थिति जानने के लिए डीएम ने बिना पूर्व सूचना के कई बूथों का निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने बीएलओ उपस्थिति पंजिका का अवलोकन किया और मौके पर मौजूद बीएलओ से प्राप्त आवेदनों की संख्या, उनके निस्तारण की प्रगति और मतदाताओं से किए जा रहे संपर्क की जानकारी ली। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि बीएलओ फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 से संबंधित सही जानकारी आम नागरिकों को उपलब्ध करा रहे हैं या नहीं।

कुछ मतदान केंद्रों पर बीएलओ की अनुपस्थिति या लापरवाही पाए जाने पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी जताई और स्पष्ट कहा कि निर्वाचन कार्य अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण है, इसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि अनुपस्थित या लापरवाही बरतने वाले बीएलओ के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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डीएम दीपक मीणा ने सभी बीएलओ को घर-घर जाकर सत्यापन करने के निर्देश दिए, ताकि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से वंचित न रहे और कोई अपात्र नाम सूची में शामिल न हो। मृतक एवं स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाताओं के नाम समयबद्ध तरीके से हटाने और त्रुटियों का तत्काल सुधार करने के निर्देश भी दिए गए।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने आम मतदाताओं से संवाद कर अपील की कि वे अपने मतदाता विवरण की जांच अवश्य करें और किसी भी त्रुटि या नाम जोड़ने/हटाने की आवश्यकता होने पर संबंधित बीएलओ से समय रहते संपर्क करें।

जिला निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव की नींव शुद्ध मतदाता सूची है। इसे लेकर प्रशासन पूरी तरह गंभीर है और हर स्तर पर सतत निगरानी की जा रही है, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और अधिक सशक्त बनाया जा सके।

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माघ मेला 2026: मौनी अमावस्या पर डीआरएम की रेल निगरानी

वाराणसी (राष्ट्र की परम्परा)। माघ मेला–2026 के दौरान मौनी अमावस्या स्नान पर्व पर श्रद्धालु यात्रियों की सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं सुगम रेल यात्रा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) वाराणसी आशीष जैन ने मण्डलीय अधिकारियों के साथ झूंसी एवं प्रयागराज रामबाग रेलवे स्टेशनों का निरीक्षण किया और यात्री सुविधाओं की सघन निगरानी की।

निरीक्षण के दौरान डीआरएम के साथ वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक शेख रहमान, वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त एस. रामाकृष्णन, वरिष्ठ मंडल इंजीनियर (तृतीय) आयुष कुमार सिंह, वरिष्ठ मंडल विद्युत इंजीनियर (सामान्य) पंकज केशरवानी, वरिष्ठ मंडल यांत्रिक इंजीनियर (कैरेज एंड वैगन) अनुभव पाठक, सहायक यांत्रिक इंजीनियर ओजस श्रीवास्तव, सहायक परिचालन प्रबंधक ओम प्रकाश सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

मेला यात्रियों की सुविधा के लिए पूर्वोत्तर रेलवे द्वारा प्रयागराज रामबाग एवं झूंसी स्टेशनों से 12 मेला स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया गया, जिनके माध्यम से श्रद्धालुओं को सुरक्षित रूप से उनके गंतव्य के लिए रवाना किया गया। अधिकारियों ने बताया कि वापसी यात्रियों की संख्या बढ़ने पर अतिरिक्त मेला स्पेशल गाड़ियां भी चलाई जाएंगी।

डीआरएम वाराणसी ने स्टेशनों पर भीड़ प्रबंधन, मेला स्पेशल ट्रेनों की व्यवस्था और यात्री सुविधाओं की लगातार मॉनिटरिंग की। यात्रियों को ट्रेनों की सटीक जानकारी देने, भीड़ को नियंत्रित रखने और व्यवस्था सुचारु बनाए रखने के लिए पर्याप्त संख्या में आरपीएफ, रेलकर्मी और टीटीई तैनात किए गए हैं। साथ ही, 24 घंटे संचालित जन सहयोग काउंटर यात्रियों को निरंतर सहायता प्रदान कर रहे हैं।

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सुरक्षा के मद्देनज़र आरपीएफ द्वारा स्टेशन परिसर, यात्री आश्रय स्थलों, पैदल उपरिगामी पुलों (FOB) और प्लेटफॉर्म पर मेगा माइक के माध्यम से यात्रियों को निर्देश और जागरूकता संदेश दिए गए।

मौनी अमावस्या स्नान पर्व के दौरान डीआरएम ने सीसीटीवी कंट्रोल रूम से भीड़ प्रबंधन की व्यवस्थाओं की निरंतर निगरानी एवं समीक्षा की और प्लेटफॉर्म, सर्कुलेटिंग एरिया व यात्री आश्रयों का निरीक्षण किया।

इसके अलावा, डीआरएम वाराणसी ने मेला स्पेशल ट्रेनों का निरीक्षण कर साफ-सफाई, पावर कार, लोको और कोचों की स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने ट्रेनों में यात्रा कर रहे श्रद्धालुओं से सीधा संवाद कर उनकी समस्याओं और सुविधाओं के संबंध में फीडबैक भी लिया।

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