डीएम ने कलेक्ट्रेट से हरी झंडी दिखाकर वाहन को किया रवाना, बोले- पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण को होता है नुकसान
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जिले में पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने और फसल अवशेषों के वैज्ञानिक प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन ने जागरूकता अभियान शुरू किया है। गुरुवार को जिलाधिकारी गौरव सिंह सोंगरवाल ने कलेक्ट्रेट परिसर से प्रचार वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह वाहन ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच कर किसानों को पराली जलाने के दुष्परिणामों और फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के प्रति जागरूक करेगा।
फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत संचालित इस अभियान के माध्यम से किसानों को बताया जाएगा कि पराली जलाने से न केवल वायु प्रदूषण बढ़ता है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी प्रभावित होती है। इससे भूमि में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीव नष्ट होते हैं, जिसका असर कृषि उत्पादन और पर्यावरण के संतुलन पर पड़ता है।
प्रचार वाहन को रवाना करने के दौरान जिलाधिकारी ने किसानों से अपील की कि वे खेतों में पराली न जलाएं। इसके बजाय आधुनिक कृषि यंत्रों और वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करें। उन्होंने कहा कि पराली का समुचित निस्तारण पर्यावरण संरक्षण के साथ ही मिट्टी की सेहत और खेतों की उर्वरता बनाए रखने के लिए भी जरूरी है।
डीएम ने किसानों से कृषि विभाग की योजनाओं, अनुदान पर उपलब्ध कृषि यंत्रों और फसल अवशेष प्रबंधन की तकनीकों का लाभ उठाने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जागरूकता और किसानों के सहयोग से पराली जलाने की घटनाओं को प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है।
जिलाधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) और उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के तहत पराली जलाने पर जुर्माने सहित अन्य दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। प्रशासन का प्रयास है कि किसानों को समय रहते जागरूक कर पराली जलाने की नौबत न आने दी जाए। इसके लिए कृषि विभाग को भी किसानों तक फसल अवशेष प्रबंधन के विकल्पों की जानकारी पहुंचाने पर जोर देना होगा।
इस अवसर पर उप निदेशक कृषि संजीव कुमार, अतिरिक्त उपजिलाधिकारी सिद्धार्थ, जिला कृषि अधिकारी एसपी सिंह सहित कृषि विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहें।
