CDO ने खुद की खरीदारी; जानिए क्या-क्या रहा खास

यतींद्र मिश्र की कलम से

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दिव्यांगता को कमजोरी नहीं, बल्कि हुनर और हौसले से अपनी पहचान बनाने का अवसर साबित कर रहे दिव्यांग कारीगरों की प्रतिभा शुक्रवार को गोरखपुर के विकास भवन परिसर में देखने को मिली। यहां आयोजित मंडल स्तरीय दिव्य दीपावली मेला-2026 में मिट्टी के दीयों, आकर्षक लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों, रंग-बिरंगी सजावटी वस्तुओं और हस्तनिर्मित उत्पादों ने लोगों का ध्यान खींचा। मेले का उद्घाटन मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) शाश्वत त्रिपुरारी ने फीता काटकर और दीप प्रज्वलित कर किया। खास बात यह रही कि सीडीओ ने केवल स्टॉलों का निरीक्षण ही नहीं किया, बल्कि उत्पादों की खरीदारी कर दिव्यांगजनों का उत्साह भी बढ़ाया।
हुनर को मिला मंच, खरीदारी से बढ़ा आत्मविश्वास
उद्घाटन के बाद सीडीओ ने विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण किया। उन्होंने दिव्यांग कारीगरों के हाथों से तैयार वस्तुओं की गुणवत्ता, कलात्मकता और उपयोगिता की सराहना की। परियोजना निदेशक दीपक सिंह, डीसी मनरेगा समेत अन्य अधिकारियों ने भी स्टॉलों पर पहुंचकर उत्पाद देखे और खरीदारी की। अधिकारियों के इस प्रोत्साहन से दिव्यांग कारीगरों के चेहरों पर खुशी दिखाई दी। सीडीओ शाश्वत त्रिपुरारी ने कहा कि दिव्यांगजनों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जरूरत है उनके हुनर को उचित मंच, बाजार और प्रोत्साहन देने की। ऐसे आयोजन उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
दीये, मूर्तियां, मोमबत्तियां और जूट के उत्पादों ने खींचा ध्यान
जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, गोरखपुर मंडल की ओर से आयोजित इस मेले में गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर और महाराजगंज के दिव्यांगजन अपने हाथों से तैयार उत्पाद लेकर पहुंचे। दीपावली की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यहां मिट्टी के दीये, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, सजावटी सामान, मिट्टी की कलाकृतियां, मोमबत्तियां और अगरबत्तियां बिक्री के लिए सजाई गईं। इसके अलावा जूट के डोरमैट, बैग, कपड़े के थैले, मोतियों की मालाएं, चित्रकला, झाड़ू और भगवान की आकर्षक पोशाकों ने भी लोगों का ध्यान खींचा। हर स्टॉल पर कारीगरों की मेहनत, रचनात्मकता और अपने काम के प्रति समर्पण की झलक देखने को मिली। दिव्यांगजन खुद अपने उत्पादों की खूबियां बता रहे थे, ताकि ग्राहक उनकी कला को समझ सकें और खरीदारी के लिए प्रेरित हों।
इस दीपावली खरीदारी के साथ किसी का भविष्य भी संवारें
सीडीओ ने लोगों से अपील की कि दीपावली पर बाजार से खरीदारी करते समय दिव्यांगजनों द्वारा बनाए गए उत्पादों को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि इन वस्तुओं की खरीदारी केवल त्योहार की सजावट तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे कारीगरों की मेहनत को सम्मान, आत्मविश्वास को मजबूती और स्वरोजगार को बढ़ावा मिलता है। दिव्य दीपावली मेला महज उत्पादों की बिक्री का आयोजन नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, स्वावलंबन और समान अवसर का संदेश भी है। गोरखपुर मंडल के विभिन्न जिलों से आए दिव्यांग कारीगरों को अपने उत्पाद सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने का अवसर मिला। मेले ने यह संदेश दिया कि सही अवसर और प्रोत्साहन मिले तो दिव्यांगजन भी अपने हुनर के दम पर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर सकते हैं। इस दीपावली उनकी बनाई वस्तु खरीदना किसी की मेहनत का सम्मान करने और उसके सपनों को रोशनी देने जैसा है।