वाराणसी (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। काशी की ऐतिहासिक धरती बुधवार को भारत-जापान की गहरी दोस्ती की एक और नई कहानी की गवाह बनने जा रही है। जापान के पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत शिंजो आबे की स्मृतियों को समर्पित ‘आबे मेमोरियल कॉरिडोर’ का लोकार्पण वाराणसी स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया के माध्यम से कार्यक्रम में शामिल होने की जानकारी साझा की है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत और जापान के संबंधों को विश्वास, विकास और दो प्राचीन सभ्यताओं की आत्मीयता से जुड़ा रिश्ता बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिंजो आबे के नेतृत्व में दोनों देशों की मित्रता को नई मजबूती मिली और यह संबंध अब संस्कृति से आगे बढ़कर विकास एवं आर्थिक साझेदारी तक पहुंच चुका है।
काशी में आयोजित यह कार्यक्रम शिंजो आबे की भारत के साथ विशेष आत्मीयता और उनके योगदान की स्मृतियों को भी सामने लाएगा। रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर स्वयं भारत-जापान सहयोग का बड़ा प्रतीक माना जाता है। जापान के सहयोग से निर्मित इस अत्याधुनिक केंद्र का उद्घाटन वर्ष 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था।
भारत-जापान संबंधों में वाराणसी और क्योटो की साझेदारी भी खास महत्व रखती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2014 के जापान दौरे के दौरान काशी और क्योटो के बीच सहयोग को लेकर समझौता हुआ था। इसके बाद दिसंबर 2015 में तत्कालीन जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने वाराणसी का दौरा किया था। उस दौरान दोनों देशों की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक निकटता की तस्वीर पूरी दुनिया के सामने आई थी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत-जापान संबंधों को ‘काशी से क्योटो तक, आस्था से अर्थव्यवस्था तक’ की दिशा में बढ़ता हुआ रिश्ता बताया। उनका कहना है कि दोनों देशों की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक आत्मीयता अब निवेश, उद्योग और रोजगार के नए अवसरों में भी बदल रही है।
उत्तर प्रदेश में जापानी निवेश को लेकर भी तेजी से काम हुआ है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, प्रदेश सरकार जापानी कंपनियों के साथ करीब 90 हजार करोड़ रुपये के एमओयू कर चुकी है। ऐसे में आबे मेमोरियल कॉरिडोर का लोकार्पण केवल एक स्मृति कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत-जापान की बढ़ती रणनीतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक साझेदारी का प्रतीक भी माना जा रहा है।
काशी की धरती से शिंजो आबे की स्मृतियों को सम्मान देने वाला यह आयोजन भारत और जापान के रिश्तों में एक नया अध्याय जोड़ सकता है। एक तरफ जहां यह कॉरिडोर पूर्व जापानी प्रधानमंत्री की भारत के प्रति आत्मीयता की याद दिलाएगा, वहीं दूसरी ओर दोनों देशों के बीच भविष्य की साझेदारी और सहयोग की संभावनाओं को भी रेखांकित करेगा।