धार्मिक स्थलों से पहाड़ी सुकून तक बढ़ रहा सैलानियों का रुझान

लेखक : राष्ट्र की परम्परा पर्यटन डेस्क
नई दिल्ली/जयपुर। पर्यटन की दुनिया में लोगों की पसंद तेजी से बदल रही है। अब यात्रा का मतलब केवल बड़े शहरों के प्रसिद्ध स्मारक देखना नहीं रह गया है। धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक विरासत, वन्यजीव, पहाड़, जंगल, झरने और अपेक्षाकृत शांत स्थान पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। राजस्थान के ताजा पर्यटन आंकड़े इस बदलाव की तस्वीर पेश करते हैं, वहीं दिल्ली और आसपास रहने वाले यात्रियों के बीच चकराता, मोरनी हिल्स, परवाणू और सोलन जैसे अपेक्षाकृत शांत गंतव्यों की मांग भी बढ़ रही है।
राजस्थान में छह महीने में 10.92 करोड़ पर्यटक यात्राएं
वर्ष 2026 की पहली छमाही यानी जनवरी से जून के बीच राजस्थान में करीब 10.92 करोड़ पर्यटक यात्राएं दर्ज की गईं। इनमें लगभग 10.83 करोड़ घरेलू पर्यटक और करीब 8.44 लाख विदेशी पर्यटक शामिल रहे।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि राजस्थान के पर्यटन क्षेत्र की सबसे बड़ी ताकत घरेलू पर्यटक हैं। खास बात यह है कि घरेलू यात्रियों की पसंद अब केवल जयपुर, उदयपुर और जोधपुर जैसे पारंपरिक पर्यटन केंद्रों तक सीमित नहीं है। धार्मिक पर्यटन, ऐतिहासिक स्थलों, वन्यजीव क्षेत्रों और क्षेत्रीय पर्यटन केंद्रों की ओर भी बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।
सीकर ने घरेलू पर्यटन में दिखाई बड़ी छलांग
राजस्थान के पर्यटन परिदृश्य में सबसे उल्लेखनीय बदलाव सीकर के आंकड़ों में दिखाई देता है। वर्ष 2026 की पहली छमाही में सीकर में 1,56,18,987 घरेलू पर्यटक यात्राएं दर्ज की गईं।
सीकर की लोकप्रियता में धार्मिक पर्यटन की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जा रही है। विशेष रूप से खाटूश्यामजी में आने वाले श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या ने जिले में पर्यटन गतिविधियों को व्यापक आधार दिया है।
वहीं, चित्तौड़गढ़ की ऐतिहासिक विरासत, जैसलमेर का रेगिस्तानी आकर्षण और सवाई माधोपुर का वन्यजीव पर्यटन भी पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है। इससे संकेत मिलता है कि राजस्थान में पर्यटन का स्वरूप अधिक विविध हो रहा है।
विदेशी पर्यटकों की पहली पसंद जयपुर
घरेलू और विदेशी पर्यटकों की पसंद में अंतर भी स्पष्ट दिखाई देता है। विदेशी पर्यटकों के मामले में जयपुर प्रमुख गंतव्य बना हुआ है। जनवरी से जून 2026 के दौरान जयपुर में करीब 2,56,293 विदेशी पर्यटक यात्राएं दर्ज की गईं।
इसके बाद उदयपुर में 1,84,045, जोधपुर में 82,846 और जैसलमेर में 66,433 विदेशी पर्यटक यात्राएं दर्ज हुईं।
सवाई माधोपुर, अजमेर, दौसा, पाली, झुंझुनूं और बीकानेर जैसे जिले भी विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का हिस्सा रहे। इससे यह तस्वीर सामने आती है कि विदेशी यात्रियों के लिए राजस्थान की पहचान अभी भी मुख्य रूप से उसके विरासत शहरों, महलों, किलों और सांस्कृतिक पर्यटन से जुड़ी हुई है।
राजस्थान से बाहर भी बदल रहा है वीकेंड पर्यटन का ट्रेंड
आज के समय में लोग लंबी छुट्टियों के बजाय कई बार दो-तीन दिन के छोटे ब्रेक को प्राथमिकता देने लगे हैं। खासकर महानगरों में रहने वाले लोग सप्ताहांत पर ऐसी जगह तलाशते हैं, जहां यात्रा बहुत लंबी न हो, खर्च नियंत्रित रहे और भीड़भाड़ से दूर प्रकृति के बीच समय बिताया जा सके।
दिल्ली-एनसीआर के यात्रियों के लिए हिमालयी क्षेत्र और आसपास के पहाड़ी गंतव्य इस लिहाज से आकर्षक विकल्प बन रहे हैं। इनमें चकराता, मोरनी हिल्स, परवाणू और सोलन जैसे स्थान शामिल हैं।
चकराता : पहाड़, जंगल और झरनों के बीच सुकून
उत्तराखंड के देहरादून जिले में स्थित चकराता समुद्र तल से करीब 6,948 फीट की ऊंचाई पर बसा शांत पहाड़ी क्षेत्र है। यहां पर्यटकों को पहाड़ों के साथ जंगल, व्यू पॉइंट, ट्रैकिंग रूट और झरने देखने का अवसर मिलता है।
चकराता की खासियत यह है कि यहां लोकप्रिय हिल स्टेशनों की तुलना में अपेक्षाकृत शांत वातावरण का अनुभव किया जा सकता है। चीड़, देवदार और ओक के जंगल इसके प्राकृतिक सौंदर्य को और बढ़ाते हैं।
टाइगर फॉल्स का आकर्षण
चकराता की यात्रा में टाइगर फॉल्स को शामिल किया जा सकता है। चकराता से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित यह जलप्रपात आसपास की हरियाली और पहाड़ी वातावरण के कारण पर्यटकों को आकर्षित करता है।
मानसून के दौरान झरने का दृश्य विशेष रूप से मनमोहक हो सकता है। हालांकि बारिश के मौसम में पहाड़ी रास्तों पर फिसलन और भूस्खलन का खतरा रहता है। इसलिए मौसम और स्थानीय परिस्थितियों की जानकारी लेकर ही यात्रा करना उचित है।
चिलमिरी नेक से पहाड़ों का विहंगम दृश्य
चकराता का चिलमिरी नेक खूबसूरत व्यू पॉइंट के रूप में जाना जाता है। साफ मौसम में यहां से आसपास के पहाड़ों और जंगलों का विस्तृत दृश्य देखा जा सकता है। प्रकृति और फोटोग्राफी पसंद करने वाले यात्रियों के लिए यह स्थान आकर्षक हो सकता है।
रोमांच पसंद है तो मोइला टॉप और बुधेर गुफा
ट्रैकिंग और एडवेंचर में रुचि रखने वाले पर्यटकों के लिए मोइला टॉप और बुधेर गुफा जैसे स्थान विकल्प हो सकते हैं। इन जगहों तक पहुंचने के लिए पैदल यात्रा या ट्रेकिंग करनी पड़ सकती है। इसलिए आरामदायक कपड़े, अच्छे ग्रिप वाले जूते और पर्याप्त पानी साथ रखना जरूरी है।
देवबन में प्रकृति के करीब रहने का अनुभव
चकराता के आसपास देवबन भी प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र है। करीब 9,279 फीट की ऊंचाई वाला यह क्षेत्र जंगल और पहाड़ी वातावरण के लिए जाना जाता है। यहां कुछ समय शहर की भागदौड़ से दूर शांत वातावरण में बिताया जा सकता है।
चकराता में क्या खाएं और कहां ठहरें?
चकराता किसी बड़े महानगर की तरह विशाल फूड हब नहीं है। यहां स्थानीय भोजन के साथ सामान्य भारतीय व्यंजन और कुछ अन्य विकल्प मिल सकते हैं। दाल-चावल, पराठे, चाय और स्थानीय पहाड़ी भोजन यात्रा के दौरान आसानी से उपलब्ध हो सकता है।
रहने के लिए होटल के अलावा होमस्टे, रिजॉर्ट और कैंपिंग जैसे विकल्प भी मिलते हैं। परिवार के साथ यात्रा करने वालों के लिए बाजार के आसपास ठहरना सुविधाजनक हो सकता है, जबकि शांति पसंद करने वाले लोग शहर से कुछ दूरी पर स्थित होमस्टे या रिजॉर्ट चुन सकते हैं।
बारिश में चकराता जाएं तो इन बातों का रखें ध्यान
मानसून या बरसात के दौरान पहाड़ी यात्रा में अतिरिक्त सावधानी जरूरी है। अचानक बारिश से रास्तों पर फिसलन, भूस्खलन अथवा सड़क अवरोध की स्थिति बन सकती है।
यात्रा से पहले मौसम और स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी की जानकारी लेना बेहतर है। तेज बारिश की स्थिति में झरनों, नदी-नालों और जोखिम वाले ट्रैक के आसपास जाने से बचना चाहिए।
साथ रखें—गर्म कपड़े या हल्की जैकेट,रेनकोट या छाता,अच्छी ग्रिप वाले ,ट्रैकिंग/स्पोर्ट्स शूज,आवश्यक दवाइयां,पानी की बोतल,पावर बैंक,ड्राई स्नैक्स
दिल्ली के पास दो दिन की बजट ट्रिप के विकल्प
अगर आपके पास लंबी छुट्टी नहीं है, तो दिल्ली से करीब दो दिन में घूमकर लौटने वाले कुछ गंतव्य भी यात्रा की योजना में शामिल किए जा सकते हैं।
मोरनी हिल्स : हरियाणा का शांत पहाड़ी ठिकाना
हरियाणा का मोरनी हिल्स दिल्ली और आसपास के शहरों से आने वाले यात्रियों के लिए एक विकल्प है। यह चंडीगढ़ के आसपास का पहाड़ी क्षेत्र है और यहां पहाड़ों, हरियाली तथा झील का आनंद लिया जा सकता है।
टिक्कर ताल यहां का प्रमुख आकर्षण है, जहां मौसम और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार बोटिंग तथा पिकनिक का आनंद लिया जा सकता है। आसपास होमस्टे के विकल्प भी मिलते हैं।
कैसे पहुंचे?
मोरनी हिल्स के लिए चंडीगढ़ एयरपोर्ट एक प्रमुख हवाई विकल्प है। चंडीगढ़ और आसपास के रेलवे स्टेशनों से सड़क मार्ग द्वारा आगे की यात्रा की जा सकती है।
परवाणू और सोलन : पहाड़ों के साथ प्रकृति का अनुभव
हिमाचल प्रदेश के परवाणू और सोलन भी कम अवधि की यात्रा के लिए विकल्प हो सकते हैं। परवाणू अपने पहाड़ी वातावरण और केबल कार राइड के लिए जाना जाता है, जबकि सोलन के आसपास हरियाली, पहाड़ और देवदार के जंगल यात्रियों को आकर्षित करते हैं।
इन इलाकों में मौसम के अनुसार सेब के बागानों और आसपास के प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लिया जा सकता है। बजट यात्रियों के लिए होमस्टे भी एक विकल्प हो सकता है।
कैसे पहुंचे?
चंडीगढ़ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा परवाणू के लिए प्रमुख हवाई विकल्प है। दिल्ली से कालका या चंडीगढ़ तक रेल यात्रा के बाद सड़क मार्ग से परवाणू और सोलन पहुंचा जा सकता है।
पर्यटन का नया चेहरा : भीड़ से ज्यादा अनुभव पर जोर
राजस्थान के आंकड़े हों या दिल्ली के आसपास के वीकेंड गेटवे, पर्यटन की बदलती तस्वीर में एक बात स्पष्ट दिखाई देती है—यात्री अब केवल प्रसिद्ध स्थानों की सूची पूरी करने के बजाय अनुभव आधारित यात्रा की ओर भी आकर्षित हो रहे हैं।
कहीं धार्मिक आस्था यात्रा का आधार बन रही है, कहीं ऐतिहासिक विरासत और वन्यजीव पर्यटन लोगों को खींच रहा है, तो कहीं पहाड़, जंगल और शांत वातावरण सप्ताहांत का आकर्षण बन रहे हैं।
ऐसे में पर्यटन का भविष्य केवल बड़े और प्रसिद्ध शहरों तक सीमित नहीं दिखता। छोटे शहर, धार्मिक केंद्र, प्राकृतिक स्थल और कम भीड़ वाले गंतव्य भी पर्यटन अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका लगातार मजबूत कर सकते हैं।
नोट: यात्रा से पहले मौसम, सड़क की स्थिति, स्थानीय प्रशासन की सलाह, प्रवेश नियम और उपलब्ध सुविधाओं की ताजा जानकारी अवश्य जांचें। पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदल सकता है।
