
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के नर्सिंग एवं पैरामेडिकल संकाय की जीएनएम प्रथम वर्ष की छात्राओं ने शुक्रवार को जल शुद्धीकरण संयंत्र का शैक्षणिक भ्रमण किया। भ्रमण के दौरान छात्राओं ने जल शुद्धीकरण की विभिन्न प्रक्रियाओं, पेयजल गुणवत्ता के मानकों तथा सुरक्षित पेयजल के जनस्वास्थ्य से जुड़े महत्व को व्यावहारिक रूप से समझा।शैक्षणिक भ्रमण दो पालियों में आयोजित किया गया। इस दौरान छात्राओं को जल से अशुद्धियां हटाने, छानने, निस्यंदन, कीटाणुशोधन और क्लोरीनीकरण सहित जल शुद्धीकरण की विभिन्न प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई। साथ ही पेयजल की गुणवत्ता जांच में उपयोग होने वाले विभिन्न मानकों के बारे में भी विस्तार से बताया गया।छात्राओं को भारतीय मानक ब्यूरो के निर्धारित मानकों के तहत पानी के रंग, गंध, स्वाद, गंदलापन, कुल घुलित ठोस पदार्थ, पीएच, क्लोराइड, क्षारीयता, कठोरता, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फ्लोराइड, नाइट्रेट, सल्फेट, लौह, आर्सेनिक, अवशिष्ट क्लोरीन, कुल कोलीफॉर्म और ई. कोलाई जैसे मानकों की जानकारी दी गई।भ्रमण के दौरान छात्राओं को बताया गया कि दूषित पानी के सेवन से दस्त, हैजा, टाइफाइड सहित कई जलजनित बीमारियां हो सकती हैं। ऐसे में जल का उचित शुद्धीकरण, गुणवत्ता की नियमित जांच और सुरक्षित भंडारण जनस्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।संकाय सदस्य मिस प्रिया सिंह, मिस शांभवी, मिस अभया प्रजापति और शिवम ने छात्राओं का मार्गदर्शन किया। उन्होंने सुरक्षित पेयजल की आवश्यकता तथा जलजनित रोगों की रोकथाम में जल शुद्धीकरण की भूमिका के बारे में जानकारी दी।शैक्षणिक भ्रमण के माध्यम से छात्राओं को कक्षा में प्राप्त सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने का अवसर मिला। इससे उन्हें जल शुद्धीकरण, पेयजल गुणवत्ता और जनस्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिली।
