60-70 बनाम 105 सीटों की चर्चा के बीच बड़ा सवाल, क्या यूपी में अलग राह पकड़ेंगी सपा-कांग्रेस?

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच गठबंधन की तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं हुई है। दोनों दलों की ओर से साथ चुनाव लड़ने की बात कही जाती रही है, लेकिन सीटों के बंटवारे का अंतिम फॉर्मूला अभी तय नहीं हुआ है। इसी बीच दोनों पार्टियों का प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर संगठन और चुनावी तैयारी करना सियासी चर्चा का विषय बन गया है।
सीट शेयरिंग बना सबसे बड़ा मुद्दा
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक सीटों की संख्या को लेकर सपा और कांग्रेस के बीच अंतर बना हुआ है। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि सपा कांग्रेस को करीब 60 से 70 सीटें देने के विकल्प पर विचार कर रही है, जबकि कांग्रेस की ओर से करीब 105 सीटों की मांग से जुड़ी चर्चा सामने आई है। हालांकि, दोनों दलों ने इस संबंध में कोई अंतिम आधिकारिक सूची या फॉर्मूला जारी नहीं किया है। रायबरेली और अमेठी समेत कुछ महत्वपूर्ण विधानसभा क्षेत्रों को लेकर भी दावेदारी की खबरें सामने आई हैं।
कांग्रेस जल्द चाहती है सीटों पर तस्वीर साफ
कांग्रेस की ओर से सीट बंटवारे पर जल्द बातचीत और निर्णय की जरूरत बताई जा रही है। पार्टी का मानना है कि सीटों की स्थिति पहले स्पष्ट होने से उम्मीदवारों के चयन, संगठन को सक्रिय करने और विधानसभा स्तर पर चुनावी रणनीति तैयार करने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने हाल में कहा है कि कांग्रेस सभी 403 सीटों पर तैयारी कर रही है और संगठनात्मक काम पूरा होने के बाद गठबंधन को लेकर बातचीत आगे बढ़ेगी। उन्होंने गठबंधन को मजबूत करने की बात भी कही है।
सपा की भी सभी सीटों पर तैयारी
दूसरी ओर समाजवादी पार्टी भी प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर संगठनात्मक और चुनावी तैयारियों को आगे बढ़ा रही है। इसे सीधे तौर पर कांग्रेस से अलग चुनाव लड़ने का फैसला नहीं माना जा सकता। सीट शेयरिंग तय होने से पहले किसी भी दल का सभी सीटों पर संभावित उम्मीदवारों, संगठन और स्थानीय समीकरणों की तैयारी रखना बातचीत के दौरान अपने विकल्प खुले रखने की रणनीति हो सकती है।
क्या अलग-अलग चुनाव लड़ेंगी सपा और कांग्रेस?
फिलहाल ऐसा कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है कि सपा-कांग्रेस गठबंधन समाप्त हो गया है। उपलब्ध बयानों में दोनों दल गठबंधन के तहत आगे बढ़ने की बात कर रहे हैं, जबकि मुख्य विवाद सीटों की संख्या, महत्वपूर्ण विधानसभा क्षेत्रों और बातचीत के समय को लेकर बताया जा रहा है। कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने भी सीटों पर समझौते को सम्मानजनक बनाए जाने की बात कही है।
इसलिए मौजूदा स्थिति को गठबंधन टूटने की आधिकारिक घोषणा के बजाय सीट शेयरिंग को लेकर चल रही बातचीत और दोनों दलों की समानांतर चुनावी तैयारियों के रूप में देखा जा रहा है।
2024 के लोकसभा प्रदर्शन के बाद बढ़ी सीटों की अहमियत
2024 के लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में गठबंधन के तहत चुनाव लड़ा था। अब 2027 के विधानसभा चुनाव में दोनों दल उसी अनुभव के आधार पर अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। कांग्रेस शुरुआती चरण से ही सीटों पर बातचीत चाहती रही है और दोनों पार्टियां 403 विधानसभा क्षेत्रों में अपने स्तर पर आकलन और संगठनात्मक तैयारी कर रही हैं।
अब सबसे अहम सवाल यही है कि सीट शेयरिंग पर दोनों दल कब और किस फॉर्मूले पर सहमत होते हैं। जब तक अंतिम समझौता नहीं होता, दोनों पार्टियों का सभी 403 सीटों पर तैयारी करना अपने-अपने संगठन को सक्रिय रखने की रणनीति के तौर पर देखा जा सकता है। आने वाले दिनों में होने वाली औपचारिक बातचीत से ही यह स्पष्ट होगा कि 2027 में सपा-कांग्रेस किस सीट-वितरण व्यवस्था के साथ चुनाव मैदान में उतरती हैं।

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