नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। केंद्रीय मंत्रिपरिषद की दो दिवसीय चिंतन बैठक बुधवार, 23 सितंबर से शुरू होगी। 23 और 24 सितंबर को आयोजित होने वाले इस मंथन सत्र में शासन व्यवस्था, नीति-निर्माण, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और जनसेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने जैसे विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में होगी।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, बैठक का आयोजन सेवा तीर्थ में किया जाएगा, जहां प्रधानमंत्री कार्यालय भी स्थित है। इसमें पूरी मंत्रिपरिषद के शामिल होने की जानकारी है। चर्चा के दौरान सरकारी योजनाओं की प्रगति, नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन, समयबद्ध लक्ष्य, मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय और नागरिकों तक सेवाओं की सुगम पहुंच जैसे मुद्दों पर विचार किया जा सकता है।
छह समूहों में होगी तैयारी
चिंतन बैठक के लिए छह समूह बनाए गए हैं। प्रत्येक समूह में आठ मंत्री शामिल हैं। इन समूहों ने पहले ही कई दौर की बैठकें कर प्रस्तावित विषयों और प्रस्तुतियों की तैयारी पर विचार-विमर्श किया है। माना जा रहा है कि इन समूहों के निष्कर्षों को बैठक के दौरान व्यापक चर्चा के सामने रखा जाएगा।
सुधारों और नीति-निर्माण पर रहेगा जोर
सूत्रों के मुताबिक, कुछ मंत्री अपने-अपने मंत्रालयों में किए गए सुधारों, नीतिगत पहलों और प्रशासनिक उपायों पर प्रस्तुतियां दे सकते हैं। इन प्रस्तुतियों में नीति-निर्माण को अधिक प्रभावी बनाने और योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने के उपायों पर विशेष ध्यान रहने की संभावना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले भी मंत्रियों से शासन व्यवस्था को अधिक परिणामोन्मुख बनाने और आम लोगों की समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता देने पर जोर देते रहे हैं। इसी क्रम में नागरिकों के लिए सरकारी सेवाओं को सरल और सुविधाजनक बनाने से जुड़े मुद्दे भी बैठक के प्रमुख विषयों में शामिल हो सकते हैं।
भविष्य के एजेंडे पर भी चर्चा
इस चिंतन बैठक को सरकार की कार्यप्रणाली की समीक्षा, विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय मजबूत करने और आने वाले समय की प्राथमिकताओं को तय करने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले 21 अक्टूबर 2021 को भी इसी तरह की चिंतन बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें शासन और नीति-निर्माण से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई थी।
बताया गया है कि इस महीने की शुरुआत में प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से मंत्रालयों और विभागों की आधिकारिक वेबसाइटों को अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने की दिशा में काम करने को कहा था। ऐसे में डिजिटल माध्यमों से नागरिक सेवाओं को सरल बनाने का विषय भी व्यापक शासन सुधार के संदर्भ में महत्वपूर्ण हो सकता है।

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