Categories: कविता

क्या साथ लेकर आए

क्या लेकर साथ आये थे हम,
क्या लेकर साथ जायेंगे हम,
पैसा पैसा पैसा करते हरदम,
बताओ कितना कमायेंगे हम।

जीवन में बड़ा आदमी बनने की नहीं,
आदमी बनने की फ़िक्र होनी चाहिये,
अपने आप ही हम बड़े आदमी बन
जाएंगे और बड़ा नाम भी कमायेंगे।

पर आदमी बनने के लिये कठिन
परिश्रम, ईमानदारी, विवेक के
साथ सब अवरोधों को दूर कर
लक्ष्य तक पहुँचा जा सकता है।

कोई कितना भी बड़ा बुद्धिमान हो,
उसकी चाहे कितनी भी पहुँच हो,
उसके मन मुताबिक़ अवसर हों,
उसके ये तीन गुण काम आते हैं।

सफलतम व्यक्ति के लिए वस्तुतः
आदित्य कठिन परिश्रम, ईमानदारी
व विवेक शीलता ही सबसे सफल
साधन उसको ऊँचाई पर ले जाते हैं।

  • डा० कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’,
    विद्या वाचस्पति
Karan Pandey

Recent Posts

प्याज-चीनी की महंगाई से बढ़ी रसोई की चिंता, क्या बफर स्टॉक बनेगा किसान-उपभोक्ता संतुलन का समाधान?

रसोई में महंगाई का तड़का: प्याज 70 रुपये पार, चीनी की तेजी ने बढ़ाई चिंता;…

16 hours ago

औद्योगिक भ्रमण में विद्यार्थियों ने समझी उद्योग जगत की कार्यप्रणाली

बिछुआ (राष्ट्र की परम्परा)। कक्षा में पढ़ाई के साथ विद्यार्थियों को उद्योग जगत की वास्तविक…

19 hours ago

राखी का संदेश

✍️ विजय गुंजन स्नेह है, अनुराग है, पवित्रता का बंधन है,ममता भरे एक धागे का…

20 hours ago

रक्षा बंधन: रिश्तों की डोर से राष्ट्र की परम्परा तक

नवनीत मिश्र रक्षा बंधन केवल कलाई पर राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि भाई-बहन के…

1 day ago

रॉयल्टी के छह गुना दंड से परेशान पीडब्ल्यूडी ठेकेदार, कार्य बहिष्कार की तैयारी

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। लोक निर्माण विभाग, उत्तर प्रदेश के ठेकेदार रॉयल्टी से जुड़े मामलों…

1 day ago

भाई-बहन का स्नेहाकाश

✍️ संजय एम. तराणेकर कलाई पर बंधता धागा है,पर बंधता है उससे विश्वास,बहन की आँखों…

2 days ago