Categories: कविता

राखी का संदेश

✍️ विजय गुंजन

स्नेह है, अनुराग है, पवित्रता का बंधन है,
ममता भरे एक धागे का हृदय से वंदन है।
अंतरिक्ष-सा विस्तार लिए, प्रकाशमय विश्वास का,
राखी का यह पर्व तो समता का चंदन है।

भाषा की मर्यादा की हर भाई से आशा है,
भारतवर्ष की बहनों की बस इतनी अभिलाषा है।
रक्षा के इस सूत्र का पावन संकल्प हो,
बहनों को मिले सम्मान—यही एक विकल्प हो।

स्त्री-अधिकार की गरिमा का अभिनंदन हो,
हर बहन के जीवन में खुशियों का स्पंदन हो।
प्रेम से भरे हृदय उजालों से परिपूर्ण हों,
बहनों के मन उमगें, आनंद से संपूर्ण हों।

मिठास घुले रिश्तों में, प्रेम बने जीवन का धन,
स्नेह की रोशनी से जगमग हो हर आँगन।
राखी केवल धागा नहीं, विश्वास का दर्पण है,
भाई-बहन के पावन रिश्ते का सुंदर समर्पण है।

— विजय गुंजन
कवि

Karan Pandey

Recent Posts

रक्षा बंधन: रिश्तों की डोर से राष्ट्र की परम्परा तक

नवनीत मिश्र रक्षा बंधन केवल कलाई पर राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि भाई-बहन के…

10 hours ago

रॉयल्टी के छह गुना दंड से परेशान पीडब्ल्यूडी ठेकेदार, कार्य बहिष्कार की तैयारी

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। लोक निर्माण विभाग, उत्तर प्रदेश के ठेकेदार रॉयल्टी से जुड़े मामलों…

13 hours ago

भाई-बहन का स्नेहाकाश

✍️ संजय एम. तराणेकर कलाई पर बंधता धागा है,पर बंधता है उससे विश्वास,बहन की आँखों…

18 hours ago

महराजगंज में तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 10 लाख का कॉस्मेटिक सामान बरामद; दो गिरफ्तार

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान…

18 hours ago

साइबर ठगी में पीड़ित के खाते में खोराबार पुलिस ने वापस कराए 40 हजार रुपये

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत खोराबार…

18 hours ago

बारिश,उमस और बढ़ता फ्लू: एच1एन1 की दस्तक के बीच अस्पतालों से लेकर घरों तक कितनी तैयारी?

भारत में स्वाइन फ्लू वायरस (एच1एन1) फिर सुर्खियों में :दिल्ली से कर्नाटक- महाराष्ट्र तक बढ़ते…

23 hours ago