Categories: कविता

भाई-बहन का स्नेहाकाश

✍️ संजय एम. तराणेकर

कलाई पर बंधता धागा है,
पर बंधता है उससे विश्वास,
बहन की आँखों में सपने,
भाई के मन में उसका आकाश।

न रेशम की चाहत इसमें,
न सोने का कोई श्रृंगार,
राखी तो बस एक बहाना,
बहन का भाई ही उसका संसार।

सुख आए तो साथ हँसें हम,
दुःख आए तो बनें ढाल,
रिश्तों की इस प्यारी डोर में,
हर मौसम हो खुशहाल।

समय बदलता जाए चाहे,
बदलें न मन के संस्कार,
पीढ़ी से पीढ़ी तक यूँ ही,
महके स्नेह और प्यार।

बाजारों में राखी बिकती है,
पर रिश्ते बिकने न पाएँ,
त्योहारों की चमक में हम,
अपनों को न भूल जाएँ।

धागा छोटा-सा सही मगर,
इसका बंधन है महान,
रक्षाबंधन यही सिखाता—
रिश्तों से बढ़कर नहीं जहान।

— (संजय एम. तराणेकर)
कवि, लेखक एवं समीक्षक
इंदौर, मध्य प्रदेश

Karan Pandey

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