नई दिल्ली(राष्ट्र की परम्परा)
ज्यूडिशियल काउंसिल ने पर्यावरण संरक्षण और बढ़ते प्रदूषण पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए देशवासियों से अधिक से अधिक वृक्ष लगाने का आह्वान किया। ज्यूडिशियल काउंसिल के चेयरमैन राजीव अग्निहोत्री ने कहा कि यदि समय रहते पर्यावरण को बचाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर जल संकट, प्रदूषण, प्राकृतिक आपदाओं और स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।
अग्निहोत्री ने कहा कि वृक्ष केवल प्रकृति की सुंदरता नहीं बढ़ाते, बल्कि मानव जीवन के अस्तित्व का आधार हैं। पेड़ हमें शुद्ध ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, वातावरण को संतुलित रखते हैं, वर्षा चक्र को नियंत्रित करते हैं तथा गर्मी और प्रदूषण को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आज जिस प्रकार शहरों में तेजी से पेड़ों की कटाई हो रही है और कंक्रीट के जंगल बढ़ते जा रहे हैं, वह अत्यंत चिंताजनक है।
“एक पेड़ सौ पुत्रों के समान” की भारतीय परंपरा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। यदि प्रत्येक नागरिक अपने जीवन में कम से कम एक वृक्ष भी लगाकर उसकी देखभाल करे, तो देश को हरित और स्वच्छ बनाया जा सकता है। केवल सरकारों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति, संस्था, विद्यालय, कॉलेज और उद्योग को इस अभियान में भागीदारी निभानी होगी।
ज्यूडिशियल काउंसिल ने युवाओं से विशेष अपील करते हुए कहा कि वे सोशल मीडिया पर केवल जागरूकता तक सीमित न रहें, बल्कि वास्तविक रूप से वृक्षारोपण अभियान चलाएँ। पर्यावरण संरक्षण केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी है। देश का भविष्य तभी सुरक्षित रहेगा जब प्रकृति सुरक्षित रहेगी।
आज प्रदूषण के कारण अनेक गंभीर बीमारियाँ तेजी से बढ़ रही हैं। वायु प्रदूषण बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाल रहा है। ऐसे समय में वृक्षारोपण सबसे सरल, सस्ता और प्रभावी समाधान है। वृक्ष न केवल वातावरण को शुद्ध करते हैं, बल्कि मानसिक शांति और प्राकृतिक संतुलन भी प्रदान करते हैं।
ज्यूडिशियल काउंसिल ने सभी सामाजिक संगठनों, धार्मिक संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों तथा स्थानीय निकायों से आग्रह किया कि वे बड़े स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाएँ और लोगों को इसके लिए प्रेरित करें। श्री राजीव अग्निहोत्री ने कहा कि केवल एक दिन पौधे लगाकर फोटो खिंचवाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पौधों की नियमित देखभाल और संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है।
आज के समय में लगातार पेड़ों की कटाई और वृक्षारोपण की कमी मानव जीवन के लिए गंभीर संकट बनती जा रही है। पेड़ प्रकृति का संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि समय पर वृक्षारोपण नहीं किया गया, तो पर्यावरण पर इसके विनाशकारी प्रभाव पड़ेंगे।
पेड़ों की कमी से वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ता है, जिससे लोगों को सांस संबंधी बीमारियाँ होने लगती हैं। तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिसके कारण ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याएँ गंभीर होती जा रही हैं। वर्षा का संतुलन बिगड़ने से सूखा और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएँ बढ़ रही हैं।
वृक्षों के अभाव में मिट्टी का कटाव होता है और खेती की उपजाऊ शक्ति कम हो जाती है। पशु-पक्षियों का प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहा है, जिससे जैव विविधता खतरे में पड़ रही है।
अग्निहोत्री ने अंत में देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि “यदि हम प्रकृति को बचाएँगे, तभी मानवता सुरक्षित रहेगी।” हर नागरिक को पर्यावरण संरक्षण को राष्ट्र सेवा का हिस्सा मानते हुए आगे आना चाहिए। आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा, हरियाली और सुरक्षित जीवन देने के लिए आज से ही वृक्षारोपण को जनआंदोलन बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
इसलिए प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह अधिक से अधिक पेड़ लगाए और पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे।
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