ट्राम्बे इंजन हटाने पर बवाल, धरोहर बनाम विकास बहस तेज

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। पर्यटन विकास के दावों के बीच एकमा डिपो स्थित ऐतिहासिक ट्राम्बे रेल इंजन को हटाने की कोशिश ने जिले में नया विवाद खड़ा कर दिया है। लंबे समय से उपेक्षित पड़ा यह इंजन अचानक प्रशासनिक कार्रवाई के केंद्र में आ गया, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी और बहस दोनों तेज हो गई हैं।

दक्षिण चौक और लक्ष्मीपुर वन रेंज क्षेत्र में पर्यटन के नाम पर बजट खर्च होने के बावजूद जमीनी स्तर पर ठोस विकास न दिखने की शिकायत पहले से रही है। ऐसे में इस ऐतिहासिक धरोहर को हटाने की पहल ने लोगों की भावनाओं को और अधिक प्रभावित कर दिया।

रेलवे-वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई

जानकारी के अनुसार पिछले चार महीनों से इंजन को रेलवे संरक्षण में स्थानांतरित करने की तैयारी चल रही थी। इसी क्रम में रेलवे और वन विभाग की संयुक्त टीम एकमा डिपो पहुंची और इंजन को ले जाने के लिए भारी वाहन भी लगाए गए।

जैसे ही इसकी सूचना लक्ष्मीपुर कस्बे और आसपास के गांवों में पहुंची, सैकड़ों ग्रामीण मौके पर जुट गए और इंजन हटाने की कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया। बढ़ते विरोध को देखते हुए अधिकारियों को फिलहाल वाहन वापस करना पड़ा और कार्रवाई रोक दी गई।

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‘कबाड़ नहीं, इतिहास की पहचान’

ग्रामीणों का कहना है कि यह इंजन केवल पुराना ढांचा नहीं बल्कि ब्रिटिश कालीन औद्योगिक विरासत की पहचान है। यदि इसे संरक्षित कर संग्रहालय के रूप में विकसित किया जाए तो यह क्षेत्र पर्यटन मानचित्र पर उभर सकता है।

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि इंजन को हटाने के बजाय यहीं हेरिटेज म्यूजियम बनाया जाए, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

प्रशासन का पक्ष

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि वे शासन के निर्देश पर धरोहर को सुरक्षित संरक्षण में लेने पहुंचे थे। पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है और अंतिम निर्णय शासन स्तर पर लिया जाएगा।
फिलहाल ट्राम्बे इंजन का मुद्दा ‘धरोहर बनाम विकास’ की बहस का केंद्र बन गया है। क्षेत्रवासियों की नजरें अब शासन के अगले फैसले पर टिकी हैं।

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Karan Pandey

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