🎬 सितारे ज़मीन पर समीक्षा
🗓 रिलीज़ डेट: 20 जून
🎥 निर्माता-निर्देशक: आमिर खान
📌 शैली: सामाजिक-भावनात्मक ड्रामा
🌟 मुख्य कलाकार: आमिर खान, डॉली अहलूवालिया, जेनेलिया देशमुख, ब्रिजेंद्र काला, विशेष कलाकार – न्यूरोडाइवर्जेंट युवाओं की टीम
⭐ नई उड़ान, पुराना आसमान:
2007 की क्लासिक तारे ज़मीन पर के 17 साल बाद, आमिर खान एक बार फिर “नॉर्मल” की परिभाषा को चुनौती देने लौटे हैं — इस बार बच्चों की नहीं, बल्कि न्यूरोडाइवर्जेंट वयस्कों की कहानी के साथ। सितारे ज़मीन पर स्पैनिश फिल्म Campeones की आधिकारिक रीमेक है, लेकिन इसमें देसी भावनाओं का ज़ायका भरपूर है।
🏀 कहानी में ट्विस्ट – जब कोच बना स्टूडेंट:
गुलशन अरोड़ा (आमिर खान) एक टैलेंटेड लेकिन घमंडी जूनियर बास्केटबॉल कोच है। जब उसका रवैया बेकाबू हो जाता है, तो उसे सज़ा मिलती है — एक ऐसे बास्केटबॉल दल को ट्रेन करना, जिसमें खिलाड़ी कोई आम खिलाड़ी नहीं, बल्कि न्यूरोडाइवर्जेंट युवा हैं। शुरुआत में घृणा और निराशा के साथ शुरू हुई गुलशन की यह यात्रा, धीरे-धीरे सहानुभूति और आत्म-परिवर्तन की ओर मुड़ती है।
🎭 खिलाड़ियों की टीम:
सुनील: OCD के साथ संघर्ष
गोलू: ADHD से जूझता
हरगोविंद: ऑटिज्म स्पेक्ट्रम पर
और भी कई जिंदादिल किरदार जो फिल्म में ऊर्जा और जीवन भरते हैं
💬 संवाद जो दिल छू जाए:
“साहब, अपना-अपना नॉर्मल होता है।”
फिल्म का यही संदेश, इसकी आत्मा बनकर उभरता है। यह न सिर्फ सामाजिक सोच को चुनौती देता है, बल्कि आपको भीतर तक सोचने पर मजबूर करता है।
🎭 अभिनय की समीक्षा:
आमिर खान एक बार फिर अपनी अभिनय कला से प्रभावित करते हैं, हालांकि उनका किरदार पहले से देखे गए फॉर्मूले पर चलता है।
डॉली अहलूवालिया माँ के रोल में दमदार हैं — उनकी आँखें संवाद बोलती हैं।
जेनेलिया देशमुख और ब्रिजेंद्र काला अपने-अपने हिस्सों में संतुलन लाते हैं।
लेकिन असली हीरो हैं खास खिलाड़ियों की युवा टीम, जो स्क्रीन पर पूरी सच्चाई और सहजता से चमकते हैं।
🎬 तकनीकी पक्ष और निर्देशन:
फिल्म की सिनेमैटोग्राफी रंगीन और सकारात्मक है, लेकिन कुछ जगहों पर स्क्रिप्ट में भावनात्मक गहराई की कमी खलती है। बैकग्राउंड स्कोर अच्छा है, मगर कभी-कभी जबरन भावुकता जगाने की कोशिश करता है।
📉 कमजोरियां:
भावनात्मक असर तारे ज़मीन पर जितना गहरा नहीं
कुछ दृश्य सिनेमाई दिखते हैं, असलीपन से दूर
क्लाइमैक्स अनुमानित और सुरक्षित है, जोखिम कम
🔚 अंतिम फैसला – देखिए या नहीं?:
सितारे ज़मीन पर एक ईमानदार फिल्म है, जो सही बात कहना चाहती है – और उसमें काफी हद तक सफल भी रहती है। यह आपको हिला तो नहीं पाएगी, लेकिन ज़रूर कुछ देर के लिए रोक देगी और सोचने पर मजबूर करेगी।
यह एक ऐसी फिल्म है जिसे “दिल से बनाई गई” कहा जा सकता है, भले ही वह हर दिल तक पहुँचे या नहीं।
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