नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)एशिया कप में भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले बहुप्रतीक्षित मुकाबले से पहले देशभर में विरोध और प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। हाल ही में पहलगाम आतंकी हमले में 26 नागरिकों की मौत और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और गहरा गया है। ऐसे माहौल में इस क्रिकेट मैच के आयोजन पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
ओवैसी का केंद्र पर हमला
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार को घेरते हुए कहा कि, “जिस पाकिस्तान ने पहलगाम में 26 निर्दोष लोगों की जान ली, उसके साथ क्रिकेट खेलना क्या सही है?”
उन्होंने सरकार से सवाल किया कि क्या बीसीसीआई को मिलने वाले 2000-3000 करोड़ रुपये की कमाई हमारे 26 नागरिकों की जान से ज्यादा कीमती है। ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने बयान को याद दिलाते हुए कहा कि जब आपने कहा था, “खून और पानी साथ-साथ नहीं बह सकते, बातचीत और आतंकवाद साथ-साथ नहीं हो सकते,” तो फिर आज यह रुख क्यों बदला जा रहा है?
विपक्षी दलों का विरोध
कई विपक्षी दलों ने इस मैच का बहिष्कार करने का आह्वान किया है। मुंबई में शिवसेना (यूबीटी) की महिला कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया और अनोखे अंदाज़ में अपनी मांग रखते हुए कहा कि वे हर घर से प्रधानमंत्री को ‘सिंदूर’ भेजेंगी।
पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने ऐलान किया कि उनकी महिला कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर इस मैच का विरोध करेंगी। उनका कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सम्मान किसी भी आर्थिक लाभ से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
मैच पर छाया विवाद
भारत-पाकिस्तान मैच को लेकर देश में तीखी बहस छिड़ गई है। जहां एक ओर खेल को राजनीति और आतंकवाद से अलग रखने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर नागरिकों और विपक्षी नेताओं का मानना है कि मौजूदा हालात में पाकिस्तान के साथ खेलना शहीदों और पीड़ित परिवारों का अपमान है।
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