एक गीत वक्त में परिवर्तन लाता है,
एक विचार दुनिया ही बदल देता है,
एक कदम यात्रा की शुरू कर देता है,
एक विनय असंभव संभव कर देता है।
निराशा कुछ ऐसे घर कर गई है,
सोच लिया कि अपना कोई नहीं है,
पुत्र-पुत्री, बहू-दामाद की अमानत हैं,
शरीर, ज़िंदगी मौत की अमानत हैं।
बेटा बहू आप दोनों की अमानत हैं,
बेटी दामाद भी आपकी अमानत हैं,
शरीर तो नश्वर है श्मशान जायेगा,
मरण निश्चित है समय पर आयेगा।
फिर इन सब पर सोचकर अपना
वर्तमान भी क्यों कष्टकर बनाना है,
जीवन अनमोल है ख़ुशी से जीना है,
परिवर्तनशील सत्य को निभाना है।
आदित्य जीवन में दुख बुरा होता है,
जब भी आता है, बहुत रुलाता है,
पर सत्य यह है दुःख अच्छा होता है,
वह बहुत बड़ी शिक्षा देकर जाता है।
कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’
लखनऊ
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