माताओं ने पुत्रों के दीर्घायु की कामना के साथ रखा ललही छठ का व्रत

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले मे ललही छठ तीन षष्ठी का पर्व रविवार को आस्था और विश्वास के साथ मनाया गया। गांव से ले कर शहर के अनेक स्थानों पर माताओं ने सामूहिक रूप से षष्ठी मैया का विधि विधान से पूजन किया और दही तथा महुआ का प्रसाद में चढ़ाया और पुत्र की लम्बी आयु के लिए व्रत रखा।
ज्ञातव्य है कि प्रतिवर्ष भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की षष्ठी को ललही छठ का व्रत रहा जाता है। ललही छठ को हल षष्ठी या हल छठ या तीन षष्ठी भी कहा जाता है।
स्रुतियो के अनुसार हलधर भगवान श्री बलराम के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से ठीक दो दिन पूर्व उनके बड़े भाई बलराम जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है।
भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्म भादों मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी को हुआ था। इसलिए इस दिन को बलराम जयंती भी कहा जाता है। बलराम को बलदेव, बलभद्र और बलदाऊ के नाम से भी जाना जाता है। बलराम को शेषनाग का अवतार माना जाता है। बलराम को हल और मूसल से खास प्रेम था। यही उनके प्रमुख अस्त्र भी थे। इसलिए इस दिन किसान हल, मूसल और बैल की पूजा करते हैं। इसे किसानों के त्योहार के रूप में भी देखा जाता है।बेटे की लंबी आयु के लिए माँ इस दिन व्रत रखती हैं। वह अनाज नहीं खाती हैं।
इसदिन व्रत रखने वाली माताएं महुआ की दातुन करती हैं। इसदिन तालाब में उगे अनाज जैसे कि तिन्नी या पसही के चावल खाकर व्रत रखा जाता है। गाय का दूध और दही का इस्तेमाल भी इस व्रत में वर्जित होता है। भैंस का दूध, दही और घी का प्रयोग किया जाता है। इस व्रत की पूजा हेतु भैंस के गोबर से पूजा घर में दीवार पर हर छठ माता का चित्र बनाया जाता है। श्रीगणेश और माता गौरा की पूजा की जाती है। कई जगहों पर महिलाएं तालाब के किनारे या घर में ही तालाब बनाकर, उसमें झरबेरी, पलाश और कुश के पेड़ लगाती हैं। इस तालाब के चारों ओर आसपास की महिलाएं विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर हल षष्ठी की कथा सुनती हैं। अपने बेटे की लंबी आयु के लिए कामना करती हैं तथा अंत आपस में एक दूसरे को प्रसाद वितरण करती हैं।
व्रती किरण चौधरी ने बताया कि इस व्रत का विशेष महत्व पुत्रों के लिए होता है। साथ ही घर परिवार में सुख-शांति व संपदा बनी रहे। इसके लिए भी इस व्रत को किया जाता है।
ऐसी भी मान्यता है कि जिन माताओ के पुत्र नही होते वे भी इस व्रत को विधि विधान से करती हैं तो उन्हें पुत्ररत्न की प्राप्ति अवश्य होती है।

rkpNavneet Mishra

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