सियालदह से बलिया पहुंच रहे रोजाना 15 कुंतल फूल, शादी बाजार गुलजार

फूलों से महक उठे बलिया के विवाह मंडप, सज रहीं दूल्हों की शाही गाड़ियां


घनश्याम तिवारी, पत्रकार


बलिया (राष्ट्र की परम्परा)पूर्वांचल में इन दिनों शादियों का सीजन पूरे शबाब पर है। विवाह समारोहों की रौनक बढ़ाने में पश्चिम बंगाल से आने वाले रंग-बिरंगे और सुगंधित फूल खास भूमिका निभा रहे हैं। बलिया जिले के विवाह मंडप, जयमाल स्टेज और दूल्हा-दुल्हन की गाड़ियां इन फूलों की खुशबू से महक उठी हैं। गर्मी और चुनावी हलचल के बीच पश्चिम बंगाल के फूल पूर्वांचल की शादियों में आकर्षण का प्रमुख केंद्र बने हुए हैं।
जिले में गेंदा, गुलाब और रजनीगंधा जैसे फूलों की मांग तेजी से बढ़ गई है। स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, प्रतिदिन करीब 15 कुंतल फूल पश्चिम बंगाल के सियालदह से ट्रेन के जरिए बलिया पहुंच रहे हैं। पार्सल के माध्यम से भेजे गए ये फूल अगले दिन सुबह तक मंडियों और दुकानों तक पहुंच जाते हैं।
शहर के एलआईसी रोड स्थित फूल बाजारों में इन दिनों ग्राहकों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। शादी-विवाह के साथ धार्मिक आयोजनों में भी फूलों की मांग लगातार बढ़ी है। वाहन सजावट, स्टेज डेकोरेशन और जयमाल के लिए अलग-अलग किस्म के फूलों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
फूल कारोबारी रवि सैनी बताते हैं कि पश्चिम बंगाल के अलावा महाराष्ट्र के नासिक से पिंक गुलाब, बेबी स्मिथ और सजावटी पत्तियां भी मंगाई जाती हैं। वहीं वाराणसी, छपरा, सिवान और गोपालगंज की मंडियों से भी फूलों की आपूर्ति हो रही है। स्थानीय स्तर पर उत्पादन सीमित होने के कारण व्यापारियों को बाहरी राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता है।
दूल्हे की गाड़ियों की सजावट इस बार खास आकर्षण बनी हुई है। ग्राहकों की पसंद और बजट के अनुसार अलग-अलग डिजाइन तैयार किए जा रहे हैं। फूल व्यापारियों के अनुसार, एक गाड़ी सजाने में दो हजार से चार हजार रुपये तक खर्च आता है, जबकि जयमाल की माला की कीमत चार सौ से पांच सौ रुपये प्रति जोड़ी तक पहुंच गई है।
बलिया जिले में फूलों की खेती अभी बेहद सीमित है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार जिले में केवल एक हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती हो रही है। मुरलीछपरा ब्लॉक के दलनछपरा और हनुमानगंज के इंदरपुर क्षेत्र में गेंदा की खेती होती है, जबकि सिकन्दरपुर क्षेत्र में गुलाब की खेती अब सिमटती जा रही है।
फूलों की ताजगी बनाए रखने के लिए व्यापारियों द्वारा विशेष व्यवस्था की जाती है। फूलों को बांस के बड़े खचोलों में बोरियों के अंदर पैक कर ऊपर से पानी डाला जाता है, जिससे वे लंबे समय तक ताजे बने रहते हैं।
कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल से आने वाले फूल इन दिनों बलिया के शादी समारोहों में चार चांद लगा रहे हैं। इनकी खुशबू और रंगत से विवाह समारोहों की रौनक कई गुना बढ़ गई है।

Editor CP pandey

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