साहित्य समालोचना

मेरी रचना कितनी प्रिय है
मित्रों को कैसी लगती हैं,
समालोचना खुलके करिये,
आदित्य को अच्छी लगती है।

कहा किसी ने खाद, सिंचाई,
विधिवत खेती में रुचि लीजे,
बंज़र भूमि भी बने उपजाऊ,
फसल मिले मेहनत से ताऊ।

लिख लोढ़ा, पढ़ पत्थर मानव,
छिपी सम्पदा प्राप्त न होती,
आशीर्वाद बिना गुरुवर के,
काव्य कला चरितार्थ न होती।

पाषाण सदृश जब हृदय रहेगा,
बिन गुरूकृपा भक्ति नहीं होगी,
गुरूकृपा, गुरुज्ञान मिले जब,
दुर्गम मंज़िल सुगम ही होगी।

भावना नही विचलित होती,
बिना भाव की हृदय हीनता,
साधुवाद! कविता रचना की,
कवि की सृजनात्मक क्षमता।

कविता सुंदर तब बन जाती,
जब उद्गारों से भरी हुई हो,
कोई त्रुटी नहीं दिखती तब,
काव्य कल्पना जब सजती हो।

रचना भावों से भरी हुई हो,
कल्पना सार्थक दिख जाती,
कवि का प्रयास सुंदर लगता,
बेहद सरस रुचिर बन जाती।

सद्भावों के संदेश और,
रचना जो प्रेषित करते हैं,
वह मित्रों, रिश्तेदारों को,
उसी रूप में उन्हें भेजते हैं।

कविता, रचनायें पढ़ कर,
तारीफ सभी मिल करते हैं,
आदित्य तुम्हारे लेखों की,
प्रतीक्षा निरंतर करते हैं।

उक्त प्रशंसा व समालोचना,
मित्रों प्रोत्साहन देती रहती।
आदित्य मिले उत्साह ये जब,
लेखनी यूँ ही चलती रहती।

कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’

rkpNavneet Mishra

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